भारत के रोहन बोपन्ना व उरुग्वे के पाब्लो क्यूवास की जोड़ी का शानदार प्रदर्शन जारी

भारत के रोहन बोपन्ना व उरुग्वे के पाब्लो क्यूवास की जोड़ी ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए मोंटे कार्लों मास्टर्स टेनिस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बना ली। बोपन्ना व क्यूवास ने बेहद संघर्षपूर्ण क्वार्टर फाइनल में फिनलैंड के हैनरी कोंटिनेन व ऑस्ट्रेलिया के जॉन पियर्स को 3-6, 6-3, 13-11 से हरा दिया।
पहला सेट हारने के बाद बोपन्ना-क्यूवास ने दूसरा सेट जीतकर 1-1 की बराबरी कर ली। सुपर टाईब्रेक में दोनों जोड़ियों के बीच जमकर संघर्ष हुआ लेकिन बोपन्ना-क्यूवास इसे जीतने में कामयाब रहे। उनका अब सेमीफाइनल में मोनाको के रोमेन आर्नेडो व फ्रांस के ह्यूगो निस से सामना होगा।
पिछले पांच टूर्नामेंट से एक-साथ खेल रहे बोपन्ना-पाब्लो की जोड़ी पहली बार पहले दौर से आगे बढ़ी है। बोपन्ना ने साल के शुरू में हमवतन जीवन नेदुचेझियन के साथ मिलकर चेन्नई ओपन का खिताब जीता था। उसके बाद वे पोलैंड के जोड़ीदार मार्सिन मेटकोवस्की के साथ दुबई चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचे थे।

एक और भारतीय पर गिर गई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाज

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाज एक और भारतीय पर गिर गई है। न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल प्रीत भरारा को बर्खास्त करने के बाद इस बार डॉ. विवेक मूर्ति को अमेरिकी सर्जन जनरल पद से हटा दिया गया है। शीर्ष पदों पर बैठे लोगों में मूर्ति दूसरे भारतवंशी हैं जिन पर ट्रंप प्रशासन ने कार्रवाई की है। अपनी पसंद के व्यक्ति को इस पद पर बैठाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।
ट्रंप प्रशासन ने प्रीत भरारा को पद से इस्तीफा देने के लिए कहा था, लेकिन इससे इंकार करने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा, यूएस पब्लिक हेल्थ सर्विस कमीशन्ड कॉर्प्स के नेता मूर्ति को अपने पद से इस्तीफा देने को कहा गया था। उन्हें सर्जन जनरल के पद से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, वह कमीशन्ड कॉर्प्स के सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं देना जारी रखेंगे।
डिप्टी सर्जन जनरल रियर एडमिरल सेल्विया ट्रेंट एडम्स कार्यकारी सर्जन जनरल बनाई गई हैं। अमेरिका के 19वें सर्जन जनरल मूर्ति इस पद पर बैठने वाले सबसे युवा और पहले भारतीय-अमेरिकी थे। दिसंबर 2014 में जब उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी उनकी उम्र महज 37 साल थी। बंदूक लॉबी के विरोध के बावजूद सीनेट ने 51/43 वोटों के अंतर से उनकी नियुक्ति पर मुहर लगाई थी।
मूर्ति की नियुक्ति चार साल के लिए की गई थी। मगर, उन्हें अचानक पद से हटाने का कारण साफ नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, मूर्ति की को हटाए जाने की खबर से महकमे के कर्मचारी भी अचंभित हैं। मूर्ति ने फेसबुक पोस्ट में लिखा- इस महत्वपूर्ण पद पर काम करना सम्मान की बात थी।
भारत के गरीब किसान के पोते को राष्ट्रपति द्वारा पूरे देश के स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए कहा जाना बेहद अभिभूत करने वाला था। यह एक अद्भुत अमेरिकी कहानी थी। मैं अपने देश का आभारी रहूंगा, जिसने करीब 40 साल पहले मेरे प्रवासी परिवार का स्वागत किया और मुझे सेवा का मौका दिया।
मूर्ति का परिवार भारत में कर्नाटक का रहने वाला है। उनका जन्म इंग्लैंड में हुआ। जब वह तीन साल के थे उनका परिवार अमेरिकी प्रांत फ्लोरिडा के मियामी में आकर बस गया। उन्होंने येल स्कूल ऑफ मेडिसिन से एमडी की डिग्री हासिल की और येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए भी किया है। फिलहाल वे बोस्टन में प्रैक्टिस कर रहे हैं और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से भी जुड़े हुए हैं।

किसानों ने जंतर-मंतर पर मानव मूत्र पीकर विरोध जताया

बीते 40 दिनों से आर्थिक मदद और कर्ज माफी की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर बैठे तमिलनाडु के किसानों ने शनिवार को मानव मूत्र पीकर अपना विरोध जताया। इससे पहले भी तमिल किसान अलग-अलग तरीकों से विरोध प्रदर्शन कर चुके है।
दो किसानों ने दावा किया कि उन्होंने अपना मूत्र पीकर विरोध जताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानेगी तो वे रविवार को अपना मल खाकर विरोध जताएंगे। किसानों ने मूत्र बोतलों में जमा कर रखा था।
प्रदर्शन में शामिल किसान श्रवण कुमार वासुदेवन के मुताबिक लंबे समय से आंदोलन पर बैठे किसानों की समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं है। तमिलनाडु में भयंकर सूखा पड़ रहा है ऐसे में कर्ज के बोझ से जिंदगी और कठिन होती जा रही है। जब तक मांगें पूरी नहीं होती हैं प्रदर्शन जारी रहेगा।
आंदोलनकारी किसानों ने बताया कि रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी उनसे मिलने आ रहे हैं। इससे पहले भी किसान पीएमओ कार्यालय पर नग्न प्रदर्शन व जंतर-मंतर पर चूहे, सांप और घास के साथ विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।

बैठक से गैरहाजिर होने पर मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों पर आग बबूला हुए मुख्यमंत्री

भाजपा कार्यसमिति की बैठक के दूसरे दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने ही मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों पर आग बबूला हो गए। बैठक से गैरहाजिर होने पर उन्होंने ऐसे लोगों को सीधे इस्तीफा देने की सलाह दे डाली।
शिवराज ने खुद का और प्रधानमंत्री का उदाहरण देते हुए कहा कि मेरी तबीयत खराब होने के बाद भी मैं दो दिन से यहां बैठा हूं। राष्ट्रीय कार्यसमिति में प्रधानमंत्री पूरे दो दिन रहते हैं। यदि सरकार के मंत्री और अन्य सदस्य बैठक में नहीं आ सकते तो इस्तीफा दे दें। हमारे बहुत सारे कार्यकर्ता उनकी जगह लेने के लिए बैठे हैं।
सीएम ने कहा कि भूपेंद्र सिंह की सूचना थी, गौरीशंकर बिसेन को हमने छिंदवाड़ा भेजा, लेकिन कई मंत्री नदारद हैं।गौरतलब है कि कार्यसमिति में कई मंत्री पहुंचे ही नहीं तो कुछ दूसरे दिन सुबह-सुबह निकल गए।
बैठक में नहीं आने वाले मंत्रियों में संजय पाठक, जयभान सिंह पवैया, ललिता यादव, ज्ञान सिंह, जयंत मलैया, विजय शाह, ओमप्रकाश धुर्वे, सुरेंद्र पटवा शामिल हैं। वहीं गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा सहित कुछ सदस्य एक दिन बाद चले गए थे। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी बैठक में नहीं पहुंचे। हालांकि यह साफ नहीं है कि इन सभी ने सूचना दी थी या नहीं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया पर बोला हमला, जमीन हड़पने वालों का आदर नहीं कर सकते
मुख्यमंत्री ने फिर कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोलते हुए कहा कि राजमाता सिंधिया सिर्फ स्व. माधवराव सिंधिया की मां नहीं, लोकमाता थीं। मेरी भी मां थी। उनकी बेटी वसुंधरा और यशोधरा लोकनेता हैं, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे व्यक्ति को कभी राजमाता से मिलाने की बात मत करना, वे स्वार्थी हैं। शिवपुरी में ट्रस्ट की 700 एकड़ जमीन को हड़पकर व्यवसाय कर रहे हैं। उनके परिवार के लोग भी राजमाता के रास्ते पर नहीं चल सकते तो उन्हें आदर नहीं मिलेगा। सिंधिया परिवार पर मुख्यमंत्री का बयान एक तरह से डेमेज कंट्रोल की कोशिश मानी जा रही है।
बैठक में शिवराज के निशाने पर पूरे समय मंत्री ही रहे। शिवराज ने कहा कि मंत्री इसी सोच में रहते हैं कि टिकट नहीं मिलेगा तो क्या होगा। वे इसी नकारात्मक कल्पना में रहते हैं। जो कार्यकर्ता तेजी से उभरता हुआ दिखता है, उसे निपटाने की सोचने लगते हैं।

व्यापमं पीएमटी फर्जीवाड़े में 1340 आरोपी

व्यापमं फर्जीवाड़े के आरोपी पूर्व सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा और घोटले के मास्टमाइंड डॉक्टर जगदीश सागर ने परीक्षार्थियों को नकल कराने के लिए 15 करोड़ देकर 400 सॉल्वर तैयार किए थे। इन दोनों ने ये कारनामा साल 2012 और 2013 की पीएमटी परीक्षा में किया था। सीबीआई की पड़ताल में इस बात का खुलासा हुआ है।दावा किया जा रहा है कि सीबीआई ने इस फर्जीवाड़े के पीचेदे हिस्से इंजन-बोगी को लगभग सुलझा लिया है
दरअसल सीबीआई की भाषा में इंजन-बोगी वो मामला है जिसके तहत उन्हें इस बात का पता लगाना था कि परीक्षार्थियों के नकल कैसे कराई गई। व्यापमं के आरोपी अधिकारी पीएमटी परीक्षा में बैठक व्यवस्था इस तरह रखते थे कि साल्वर तय परीक्षार्थी के आगे या पीछे बैठे।
जानकारी के अनुसार मंहिद्रा और डॉ. सागर ने पीएमटी में पास करवाने की गारंटी लेते हुए वर्ग विशेष के हिसाब से सॉल्वर के रेट तय कर रखे थे। मसलन सामान्य, ओबीसी व अजा-अजजा के अभ्यर्थियों को पास करवाने के लिए सॉल्वर की फीस अलग अलग रखी गई । आरक्षित सीटों पर जहां दो लाख रुपए न्यूनतम लिए गए वहीं सामान्य सीटों के लिए आठ लाख रुपए तक वसूले गए।
सीबीआई द्वारा अब तक पड़के गए सॉल्वर्स से पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि महिंद्रा और सागर ने कई सॉल्वर को तो तय राशि के हिसाब से पैसा भी नहीं दिया गया। मलसन जिसे पांच लाख रुपए देना तय किया था उसे बस एक या दो लाख देकर चलता कर दिया। ऐसे सॉल्वर्स की संख्या 150 से ज्यादा है।
15 करोड़ रुपए की राशि अकेले पास करवाने वाले सॉल्वर को दी गई इसके अलावा इनका खुद का कमिशन कितना था, दलालों व अन्य को कितना दिया गया इसकी जांच भी अंतिम स्तर पर है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को अप्रैल माह तक इस फर्जीवाड़े को सुलझाने का टास्क दिया है। सूत्र बताते है कि 85 प्रतिशत जांच पूरी हो गई है। सीबीआई व्यापमं फर्जीवाड़े से जुड़े 145 मामलों की जांच कर रही है। इसमें 54 मामले अकेले पीएमटी से जुड़े। अब तक सीबीआई 60 मामलों में चालान पेश कर चुकी है।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2013 में हुई पीएमटी के लिए 225 से ज्यादा सॉल्वर का इंतजाम किया गया तो वर्ष 2012 में 174 अभ्यर्थियों को पास करवाने का ठेका दोनों ने लिया। सॉल्वर तलाशने की पहली शर्त बस यही होती थी वो इंटेलिजेंट हो। ज्यादातर सॉल्वर यूपी, बिहार से लाए गए।
वहीं दिल्ली, गुजरात से भी कुछ सॉल्वर्स जुगाड़े गए। दोनों मामलों में अभ्यर्थियों, सॉल्वर, दलाल और अभिभावकों सहित वर्ष 2012 पीएमटी में 590 और वर्ष 2013 पीएमटी में कुल 750 नामजद आरोपी सीबीआई ने बनाए है। वहीं 125 ऐसे मुन्ना भाई भी हैं जिन्होंने फर्जी नाम पते पर पीएमटी परीक्षाएं दी उनमें से 90 सीबीआई को मिल चुके है। मालूम हो इस काम के लिए सीबीआई ने अमेरिकी जांच एजेंसी की मदद भी ली थी।

पाकिस्तानी ऑलराउंडर अफरीदी ने दी भारतीय टीम को धन्यवाद

पाकिस्तानी ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी ने उन्हें भारतीय टीम की जर्सी उपहार में देने के लिए विराट कोहली और टीम का आभार व्यक्त किया है। यह कोहली की जर्सी है, जिस पर भारतीय खिलाड़ियों के ऑटोग्राफ हैं।
अफरीदी के क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम ने खेल भावना दिखाते हुए उन्हें यह जर्सी उपहार में दी थी। विराट कोहली ने व्यक्तिगत रूप से इस जर्सी पर एक संदेश भी लिखा है।
उन्होंने लिखा है, ‘आपके खिलाफ खेलना हमेशा सम्मान की बात रही है।’ इस गिफ्ट के मिलने पर अफरीदी ने भी भारतीय टीम को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि- ‘इस शानदार फेयरवेल गिफ्ट के लिए पूरी इंडियन टीम को शुक्रिया… सुपरस्टार (कोहली) उम्मीद है आपसे जल्द मुलाकात होगी…’
बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए जब शाहिद अफरीदी को टीम में स्थान नहीं दिया, तो उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी।
इसके साथ ही शाहिद अफरीदी का क्रिकेट में 20 साल लंबे और चमकदार करियर का अंत हुआ। इस दौरान अफरीदी ने कई रिकॉर्ड बनाए और तोड़े। शाहिद अफरीदी ने साल 1996 में नैरोबी में चार देशों की वनडे सीरीज से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था।

हर घर में शौचालय लक्ष्य पूरा हुआ तो लिए सात फेरे

किशोर विभुते के लिए उनकी शादी किसी सपने से कम नहीं। हो भी क्यों न। आखिर तीन साल पहले उन्होंने जो लक्ष्य बनाया था वह पूरा होना भी किसी ख्वाब से कम नहीं है। किशोर महाराष्ट्र के लातूर जिले के हिवारे गांव में बतौर ग्राम सेवक सेवा दे रहे हैं।
तीन साल पहले जब उन्हें वहां पर तैनात किया गया तो गांव की हालत काफी दयनीय थी। लोग खुले में शौच जाते थे। किशोर ने उनको समझाया, लेकिन तत्काल कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। कुछ समय के लिए वह लकीर के फकीर भी बने रहे पर एक दिन उन्हें प्रेरणा मिली स्वच्छ भारत अभियान से।
वह फिर से हर घर में शौचालय बनवाने की मुहिम में जुटे। 2014 में जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी के साथ बैठक के बाद उन्होंने यह अनूठा प्रण लिया। तीन साल पहले गांव के 351 घरों में से 174 में ही शौचालय थे।
किशोर को अपना ख्वाब पूरा करने में काफी परेशानी भी हुई। वह लोगों को लगातार समझाते रहे कि खुले में शौच जाने के क्या नुकसान है, इससे किस तरह की बीमारियां पनपने लग जाती हैं।
कुछ दिन लोगों ने बात को गंभीरता से नहीं लिया लेकिन फिर लोगों को भी उनकी बात ठीक लगी। पिछले साल उनका लक्ष्य पूरा हुआ तो उन्होंने पड़ोस के संगम गांव की युवती के साथ सात फेरे लेने का फैसला किया।
जिसा सूचना अधिकारी किरण मोघे ने बताया कि शुक्रवार को जिला प्रशासन की टीम ने गांव का दौरा किया तो उन्हें हर घर में शौचालय मिला।

नक्सलियों से लड़ने के अलावा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा सीआरपीएफ

जिले में तैनात सीआरपीएफ 85 बटालियन नक्सल मोर्चे पर नक्सलियों से लड़ने के अलावा सामाजिक सारोकारिता के क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, इसी के तहत एक पैर से दिव्यांग मद्देड़ निवासी रिटायर्ड पोस्टमास्टर को 85 बटालियन के कमांडेंट ने आर्टिफिशियल पैर लगाने और इलाज के लिए जयपुर भेजा है।
मद्देड़ निवासी 55 वर्षीय रिटायर्ड पोस्टमास्टर लक्ष्मण दुर्गम ने बताया की 7 अगस्त 2014 को वह अपनी ड्यूटी के दौरान डाक वितरण का कार्य कर घर लौट रहा था तभी नक्सली उसे पकड़कर ले गए और उस पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाकर कुल्हाड़ी से उसका बांया पैर काट दिया था तब से वे लकड़ी के डंडे के सहारे चल फिर रहे थे। इसी बीच उन्हें इस बात की खबर मिली थी की सीआरपीएफ 85 बटालियन इस तरह लाचार लोगों की मदद करता है। इसीलिए वह 85 बटालियन के मुख्यालय नैमेड़ आए।
जहां से उन्हें जयपुर भेजा जा रहा है। बटालियन के कमांडेंट सुधीर कुमार ने बताया कि इस तरह एक पैर से दिव्यांग लोगों का जयपुर में इलाज किया जाता है और उसके बाद आर्टिफिशियल पैर लगाकर उन्हें दोनों पैरों से चलने फिरने की नई जिंदगी दी जाती है। उन्होंने बताया की उनके साथ देखरेख के लिए उनके जवान साथ जाएंगे और इलाज होने तक साथ रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इसके पूर्व उन्होंने नक्सलियों के कहर का निशाना बनकर अपना एक पैर गंवा चूके चेरपाल निवासी सोनू ताती को भी आर्टिफिशियल पैर लगवाया था जिससे वह आज डंडे के बजाय अपने दोनों पैरों से चलफिर पा रहा है।

सीबीएसई स्कूलों की मनमानी फीस पर अंकुश

सीबीएसई स्कूलों की मनमानी फीस व अन्य शुल्क वसूली पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ठोस कदम उठाने जा रही है।
लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को स्कूल संचालकों की सूची भेजने को कहा है। इसमें राज्‍य के सभी 51 जिलों के 5 सीबीएसई/आईसीएसई स्कूल संचालक तथा 5 एमपी बोर्ड स्कूल के संचालकों का नाम 25 फरवरी तक भेजने का आदेश दिया है।
इसके बाद स्कूल संचालकों की अपर मुख्य सचिव की मौजूदगी में भोपाल में बैठक होगी। इसमें मुख्य रूप से निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के संबंध में बातचीत होगी। स्कूल संचालकों के पक्ष जानने के बाद उसी बैठक में सरकार फीस नियंत्रण पर अंतिम फैसला लेगी।
उल्लेखनीय है कि नईदुनिया की खबर पर संज्ञान लेकर शिक्षा मंत्री ने आयुक्त शिक्षा डीडी अग्रवाल को त्वरित
कार्रवाई के लिए आदेशित किया था। 13 फरवरी को आयुक्त ने संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संचालनालय धीरेंद्र चतुर्वेदी को राज्‍य के सभी स्कूल संचालकों की मीटिंग बुलाने के लिए निर्देशित किया।
आयुक्त के आदेश पर कार्रवाई करते हुए 17 फरवरी को संयुक्त संचालक ने प्रदेश के सभी 7 संभागों के ज्वाइंट डायरेक्टर को हर जिले से कुल 10 निजी स्कूल संचालकों के नाम चयनित करके भेजने को कहा है।

प्रदेश सरकार भरेगी मेधावी छात्रों की फीस

सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के मेधावी छात्रों की भी फीस सरकार भरेगी। इसके लिए मेधावी विद्यार्थी योजना में अलग से प्रावधान किए जाएंगे। सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके संकेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को मोहनखेड़ा में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में दिए। अभी योजना के दायरे में सिर्फ माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों के मेधावी छात्रों को ही शामिल किया गया है।
प्रदेश भाजपा कार्यसमिति में मुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों को बताया कि सरकार ने मध्यम वर्ग के होनहार बच्चों को उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए चयनित होने पर फीस का पूरा खर्चा उठाने की महत्वाकांक्षी योजना लागू की है। इसके दायरे में उन छात्रों को रखा गया है जो माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों में पढ़ते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी, एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाते हैं। कई बार परिवार की आर्थिक परिस्थितियां बच्चों की पढ़ाई में आड़े आ जाती हैं।
ऐसी स्थिति से प्रतिभावान बच्चों का भविष्य खराब न हो, इसके लिए योजना बनाई गई है। अब सीबीएसई के मेधावी छात्रों के लिए भी अलग से प्रावधान करने पर विचार किया जा रहा है। इन स्कूलों में भी सामान्य पृष्ठभूमि के बच्चे पढ़ते हैं और 90-95 फीसदी अंक लाते हैं। ‘नईदुनिया” से चर्चा में मुख्यमंत्री ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सीबीएसई के छात्रों के लिए अलग से प्रावधान करने पर विचार कर रहे हैं।