एक बार फिर स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर विवाद

राजस्थान में एक बार फिर स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर विवाद खड़े होने के आसार बन गए हैं।
अब राज्य में नौवीं से बारहवीं तक के बच्चे पाठ्यक्रम में मांसाहार से होने वाले नुकसान, नोटबंदी के फायदे और स्वतंत्रता आंदोलन में सावरकर के योगदान जैसे विषयों के बारे में पढ़ेंगे।
नई किताबें आने वाले सत्र से राजस्थान के सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी। राजस्थान की भाजपा सरकार पर शिक्षा के भगवाकरण के आरोप लगते रहे हैं।
ऐसे में सरकार ने पिछले वर्ष आठवीं तक के पाठ्यक्रम में बदलाव किया था और प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पाठ्यक्रम से हटाए जाने सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।
अब फिर वैसा ही कुछ होने की आशंका है। इनमें से एक किताब में मांसाहार के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में बताया गया है और कहा गया है कि सामाजिक मूल्यों की कमी व आधुनिक जीवनशैली के कारण मांसाहर का प्रयोग बढ़ रहा है।
इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसी किताब में भोजन से पहले बोले जाने वाले मंत्र की जानकारी दी गई है। इसके अलावा भोजन करने के तरीके के बारे में भी बताया गया है।
वहीं स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और हिदू महासभा से जुड़े रहे सावरकार के योगदान को काफी स्थान दिया गया है।
इन किताबों में बच्चे समान नागरिक संहिता, प्रधानमंत्री की विदेश नीति, नोटबंदी जैसे सामायिक विषयों के बारे में पढ़ेंगे।
कक्षा दस की सामजिक विज्ञान में कहा गया है कि कांग्रेस नेताओं की शुरुआती खेप भारत में ब्रिटिश शासन बनाए रखना चाहती थी।
कक्षा 12 की राजनीति शास्त्र व अर्थशास्त्र की पुस्तक में नोटबंदी को कालाधन खत्म करने के अभियान के रूप में बताया गया है और इसके फायदे गिनाए गए हैं।

करैरा विधायक पर केस दर्ज सुबह का इंतजार करती रही पुलिस

सोमवार-मंगलवार की रात करैरा विधायक पर केस दर्ज होने के बाद पुलिस सुबह का इंतजार करती रही, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रात में किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। वहीं सुबह को विधायक अपने घर से फरार हो गईं।
करैरा विधायक पर भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप है। करैरा विधायक पर केस दर्ज होने के पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है।
प्रदेशभर में तत्समय आंदोलन हिंसक रूप ले चुका था और पुलिस को पता था कि करैरा में आंदोलन की अगुआई महिला विधायक कर रही हैं, बावजूद इसके मौके पर कोई भी महिला पुलिस नहीं थी, जबकि एसडीओपी की मौजूदगी में आक्रोशित विधायक शकुंतला खटीक ने टीआई पर घूंसे बरसा दिए।
वहीं इस मामले के बाद वीडियो क्लिप सामने आने और सत्ता पक्ष के दबाव के चलते भले ही करैरा पुलिस ने सोमवार की देर रात विधायक व ब्लॉक अध्यक्ष पर केस दर्ज कर लिया, लेकिन यहां भी पुलिस की मंशा विधायक को तत्काल गिरफ्तार करने की नजर नहीं आई, क्योंकि केस देर रात 11:50 बजे दर्ज किया गया।
कानून के जानकारों के अनुसार रात के समय महिला की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। केस दर्ज होने की जानकारी लगते ही विधायक अपने घर से फरार हो गईं। ब्लॉक अध्यक्ष भी फरार हो गए।
विधायक पर केस दर्ज होने के साथ ही करैरा कस्बे में पुलिस ने एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। विधायक के समर्थक कोई अप्रिय घटना को अंजाम न दे सके। कस्बे में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था और देर रात से लेकर मंगलवार शाम तक पुलिस बल तैनात रहा।
विधायक पर जो धाराएं दर्ज की गई हैं, उनमें धारा 353 शासकीय कार्य में बाधा की है, जो गैर जमानती
है और इसमें न्यूनतम दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान हैं। इस मामले में फरियादी पुलिस है, इसलिए विधायक की मुसीबत बढ़ सकती है।
शहर के एडवोकेट गजेन्द्र यादव के अनुसार धारा 147 व 149 विधि विरुद्ध जमाव यानी बलवा की धाराएं हैं, वहीं 189 लोक सेवक को पदीय कार्य न करने के लिए दबाव डालना है। इसके अलावा 294 गाली गलौज, 436 लड़ाई झगड़ा, 504 व 506 जान से मारने की धमकी की श्रेणी में हैं और यह सभी धाराएं जमानती हैं।
घटनाक्रम 8 जून का था, लेकिन तत्समय टीआई से नोकझोंक की बात सामने आई और एक क्लिपिंग में विधायक ‘थाने में आग लगा दो” कहती नजर आई थीं। इसके अगले दिन से लगातार वीडियो सामने आते चले गए।
विधायक ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की और आग लगाने के बयान से मुकर भी गईं, लेकिन एक और वीडियो ने हलचल पैदा कर दी। मंगलवार को नया वीडियो सामने आया है, जिसमें विधायक शकुंतला टीआई संजीव तिवारी को घूंसे से मारती दिखाई दे रही हैं।
चर्चा है कि भले ही पुलिस ने देर रात केस दर्ज कर विधायक शकुंतला को फरार होने का मौका हासिल करा दिया हो, लेकिन दूसरी तरफ पुलिस विधायक सहित ब्लॉक अध्यक्ष को गिरफ्तार करने उनके घरों पर कई बार दबिश देती रही। देर रात दबिश देने के अलावा सुबह और शाम को भी पुलिस दोनों के ठिकानों पर दबिश देती नजर आई।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि जल्द ही दोनों को बंदी बनाया जाएगा। इधर विधायक और ब्लॉक अध्यक्ष के फोन बंद आ रहे हैं। विधायक के गनर शैलेन्द्र सिकरवार के अनुसार विधायक रात को अचानक कहीं चली गई हैं। बता दें कि करैरा विधायक पर विरुद्ध आगजनी के लिए उत्प्रेरित करने, शासकीय कार्य में बाधा, अपशब्द, जान से मारने की धमकी, शासकीय कर्मचारी से अभद्रता सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

स्पेनिश स्टार राफेल नडाल ने रच दिया दसवीं बार जीतकर खिताब

लाल बजरी के बादशाह राफेल नडाल ने रविवार को रिकॉर्ड दसवीं बार रोलां गैरां का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। स्पेनिश स्टार नडाल ने पेरिस में खेले गए फ्रेंच ओपन के फाइनल में स्विट्जरलैंड के स्टेन वावरिका को सीधे सेटों में 6-2, 6-3, 6-1 से पराजित कर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया।
नडाल ने यह मुकाबला दो घंटे, पांच मिनट में अपने नाम किया। इस जीत के साथ 31 वर्षीय नडाल एक ही ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी दस बार जीतने वाले ओपन ऐरा के पहले टेनिस खिलाड़ी बन गए। खिताब के अपने सफर में उन्होंने सात मैच खेले और एक भी सेट नहीं गंवाया, सिर्फ 35 गेम हारे। नडाल यहां एक भी फाइनल नहीं हारे हैं।
बन जाएंगे नंबर दो : इस जीत के साथ नडाल अब दो स्थान के फायदे के साथ दुनिया के नंबर दो खिलाड़ी बन जाएंगे। वह सर्बिया के नोवाक जोकोविक को तीसरे स्थान पर धकेल देंगे।
वावरिका का सपना टूटा : 2015 के चैंपियन वावरिका का दूसरी बार फ्रेंच ओपन ट्रॉफी जीतने का सपना टूट गया। चौथी बार किसी ग्रैंडस्लैम के फाइनल में खेलने वाले वावरिका की यह पहली हार है। इससे पहले खेले गए तीनों फाइनल में वह विजेता बने थे।

महाराष्ट्र सरकार ने कर दिया प्रदेश के किसानों की कर्जमाफी का एलान

महाराष्ट्र सरकार ने प्रदेश के किसानों की कर्जमाफी का एलान कर दिया है। छोटे और सीमांत किसानों को इसका लाभ तुरंत दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले के साथ ही किसानों ने सोमवार से अपना आंदोलन तेज करने का फैसला स्थगित कर दिया है।
महाराष्ट्र में कर्जमाफी सहित कुछ अन्य मांगों को लेकर किसान एक जून से हड़ताल पर हैं। सोमवार से उन्होंने आंदोलन तेज कर सूबे में रेल रोको एवं चक्का जाम करने का फैसला किया था।
इससे राज्य की जनता को होने वाली तकलीफों से बचाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने किसानों से बातचीत के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई थी।
रविवार को इस समिति के साथ किसान नेताओं की दूसरे चरण की वार्ता में फैसला हुआ कि छोटे और सीमांत किसानों का कर्ज तुरंत माफ कर दिया जाएगा। जबकि बड़े किसानों को सशर्त कर्जमाफी दी जाएगी।
एक समिति तय करेगी, जिसमें किसानों के प्रतिनिधि भी होंगे। कर्जमाफी की घोषणा के बाद छोटे किसान नए कर्ज ले सकेंगे। उनका नाम बैंकों की प्रतिबंधित सूची से हटा दिया जाएगा। बैंकों में बंधक खेतों के कागजात भी लौटा दिए जाएंगे।
आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामले भी वापस ले लिए जाएंगे। लेकिन, जिन मामलों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, वे मामले वापस नहीं होंगे।
किसान आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा रहे ‘स्वाभिमानी शेतकरी संगठन’ के नेता एवं सांसद राजू शेट्टी ने चेतावनी दी है कि यदि 25 जुलाई से पहले सभी किसानों को कर्जमाफी न मिली तो हम बड़े पैमाने पर और ताकत के साथ सड़कों पर उतरेंगे।
मालूम हो कि राज्य विधानमंडल का वर्षाकालीन सत्र 25 जुलाई से ही शुरू होना है। यदि किसान आंदोलन खत्म करने का रास्ता न निकाला जाता तो यह सत्र सरकार के लिए मुश्किल भरा साबित हो सकता था।
विपक्षी दल कांग्रेस व राकांपा तो किसान आंदोलन को हवा दे ही रहे थे, सरकार में साझीदार शिवसेना ने भी जुलाई में सूबे की राजनीतिक में तूफान आने की चेतावनी दे दी थी।
किसानों की एक और प्रमुख मांग स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करना रहा है। रविवार को यह भी फैसला हुआ कि इसके लिए मुख्यमंत्री सभी दलों के प्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री से मिलकर चर्चा करने जाएंगे।
राज्य में खेती से जुड़े लोगों की संख्या करीब 2.5 करोड़ है। उन्हें इसका लाभ मिलेगा, लेकिन सरकार का अनुमान है कि सिर्फ छोटे एवं सीमांत किसानों को पूरी कर्जमाफी देने की स्थिति में सरकार पर 30,000 करोड़ रुपयों का बोझ पड़ेगा। यदि बड़े किसानों को भी कर्जमाफी दी गई तो यह बोझ 1.1 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा।
राज्य सरकार पर पहले से ही चार लाख करोड़ का कर्ज है। तुरंत घोषित की गई कर्जमाफी का लाभ पांच एकड़ से कम खेती वाले 1.07 करोड़ किसानों को मिलेगा।
लेकिन, इससे वित्त वर्ष 2018 में राज्य का वित्तीय घाटा बढ़कर 2.71 फीसद तक पहुंच जाएगा। इस घोषणा से बैंकिंग क्षेत्र की हालत और ज्यादा खराब होगी। बैंकिंग क्षेत्र पहले से छह लाख करोड़ के एनपीए की समस्या से जूझ रहा है।

किसान : थम्स अप सरकार : थम्स डाउन

दस दिन चले हिंसक किसान आंदोलन ने मध्यप्रदेश के साथ-साथ पूरे देश को झकझोर दिया है। इस आंदोलन ने सूबे के मुखिया से लेकर प्रशासन, विपक्ष और जनता को भी कुछ संदेश दिए हैं। पेश है नईदुनिया की रिपोर्ट…
फसल की लागत मूल्य और कर्ज माफी के लिए शुरू हुआ आंदोलन कई मुद्दों पर लगभग सफल रहा है। शिवराज ने फसल को समर्थन मूल्य से नीचे नहीं बिकने देने की घोषणा की, जो किसानों के लिए बड़ी सफलता है। इसके अलावा मूल्य स्थिरीकरण आयोग, कर्ज के ब्याज की माफी जैसे फैसले भी किसानों को बड़ी राहत देंगे। हिंसक घटनाओं को छोड़ दें तो किसानों ने अपनी ताकत भी दिखा दी।
पूरे आंदोलन में सरकार की किसान हितैषी छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा। मप्र्र सरकार पूरे देश में किसानों के नाम पर ढिंढोरा पीटती थी, लेकिन आंदोलन से जमीनी समस्या के साथ-साथ यह भी उभरकर सामने आया कि कहीं न कहीं दोनों पक्षों के बीच संवादहीनता की स्थिति बन गई है। इसके अलावा आंदोलन की गंभीरता को समझने में भी सरकार से बहुत बड़ी चूक हो गई।
किसानों के प्रदर्शन से प्रदेश में बुरी तरह चरमरा चुकी प्रशासनिक व्यवस्था भी उजागर हुई। इंटेलीजेंस, पुलिस और जिला प्रशासन स्तर पर कई खामियां सामने आईं। प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस के मुखिया भी कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे हैं। अधिकारियों ने न मंत्रालय स्तर पर सक्रियता दिखाई और न ही स्थानीय स्तर पर। सबने इसे हल्के में लिया।
जिस इलाके में आंदोलन शुरू हुआ, वहां का कोई भाजपा नेता न तो मैदान में उतरा और न ही पार्टी का कोई बड़ा नेता सामने आया। मुख्यमंत्री अकेले पड़ते दिखे। पूरे आंदोलन में किसान मोर्चा की भूमिका न के बराबर रही। आलाकमान के संदेश के बाद कुछ नेता मुख्यमंत्री के साथ खड़े हुए। संगठन के अंतिम छोर तक मैनेजमेंट की कलई खुल गई, क्योंकि पार्टी नेताओं को भी आंदोलन की गंभीरता का पता नहीं चला।
इतने बड़े आंदोलन के बाद भी विपक्ष न तो दमदारी से खड़ा दिखाई दिया और न ही सरकार के लिए मुसीबत बन सका। भाजपा और सरकार के नेताओं ने जरूर कांग्रेस का नाम लेकर उसे तवज्जो दे दी। गोलीकांड के बाद राहुल गांधी का दौरा भी विपक्ष में जान फूंकने में नाकाम रहा। सरकार को कटघरे में खड़ा करने के लिए कांग्रेस के पास प्लानिंग की कमी साफ तौर पर नजर आई।
यात्रियों से भरी बसों में जिस तरह पथराव हुए, उससे पूरे देश में मप्र को लेकर एक गलत संदेश गया। मप्र हमेशा शांति का टापू माना जाता रहा है, लेकिन इस हिंसक आंदोलन ने प्रदेश की इस छवि पर बड़ा दाग लगाया है। किसान आंदोलन के नाम पर प्रदेश में असामाजिक तत्व भी सक्रिय हुए। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश बदनाम हुआ।

ब्रिटेन में सांसद का चुनाव जीतने वाले तनमनजीत सिंह ढेसी की जीत

ब्रिटेन में स्लो हलके से सांसद का चुनाव जीतने वाले तनमनजीत सिंह ढेसी की जीत की खबर से उनके पैतृक गांव रायपुर फराला पहुंची पूरे गांव में जश्न शुरू हो गया। 17 अगस्त 1978 को जन्मे तनमनजीत की उपलब्धि पर पूरा गांव गर्व कर रहा है।
दादा सरवण सिंह ने अपने परिवार और गांववालों के साथ मिलकर भंगड़ा कर खुशी का इजहार किया। बधाई देने और मुंह मीठा करने वाले लगातार आ रहे हैं। चाचा ने बताया कि तनमनजीत सिंह की कॉल आई कि चाचा जी मैं एमपी दा चुनाव जित्त गया हां। तनमनजीत की खासियत यह है कि वह जब भी किसी चुनाव सभा या आमसभा में भाषण देते हैं, शुद्ध पंजाबी बोलते हैं, अंग्रेजी का प्रयोग नहीं करते।
95 वर्षीय दादा सरवण सिंह कहते हैं कि यह मेरे व परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी का दिन है कि उनका पोता ब्रिटेन का ऐसा पहला सांसद बना है, जो पगड़ीधारी सिख है व शाकाहारी है।
जन्म इंग्लैंड में, शुरुआती शिक्षा पंजाब में : तनमनजीत का जन्म इंग्लैंड में हुआ, लेकिन पंजाबी संस्कार और पंजाबियत उन्हें मातृभूमि से ही मिली, क्योंकि उनकी शुरुआती शिक्षा पंजाब में हुई। तनमनजीत ने प्राइमरी तक की शिक्षा शिवालिक पब्लिक स्कूल मोहाली से प्राप्त की। मिडिल शिक्षा दशमेश एकेडमी आनंदपुर साहिब से पूरी करने के बाद इंग्लैंड चले गए।

30 जून के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए UID अनिवार्य

इनकम टैक्स रिटर्न के लिए पैन से आधार को लिंक करने के मुद्दे पर भले ही सुप्रीम कोर्ट ने फौरी राहत दे दी हो, लेकिन केंद्र सरकार आधार की अनिवार्यता से पीछे हटने के मूड में नहीं है। सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए UID अनिवार्य है। 30 जून के बाद ऐसे लोग कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे, जिनके पास आधार नंबर नहीं है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा है कि जहां आधार कार्ड बनवाने की सुविधा नहीं है, वहां राहत दी गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में लोगों को आधार कार्ड बनवाने का पर्याप्त मौका और सुविधाएं दी गईं, वहां यूआईडी के बगैर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठाया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफनामे में कहा गया है कि 30 जून 2017 तक अनिवार्य रूप से आधार के लिए पंजीयन कराने की अधिसूचना जारी की गई है, लेकिन यह भी कहा गया है कि अपने क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव में लोग ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो वे नजदीकी अधिकारी के पास आधार का पंजीयन कराने का अनुरोध कर सकते हैं। उन्हें अपना नाम और मोबाइल नंबर बताना होता ताकि जब भी सुविधाओं जुटें, उनका आधार बनवाया जा सके। ऐसे लोगों को सरकारी योजनाओें का लाभ मिलता रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह सरकार को 30 जून तक आधार अनिवार्य करने दिशा में बढ़ने दे, क्योंकि 95 फीसदी लोग आधार कार्ड बनवा चुके हैं और सामाजिक कल्याण की योजनाओं से आधार को लिंक करवाकर सरकार पिछले ढाई साल में 49,560 करोड़ रुपए की बचत कर चुकी है।

चक्काजाम और रेल रोको आंदोलन को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों की अन्य सभी ड्यूटियां निरस्त कर दी

प्रदेश में किसानों से जुड़े विभिन्न् संगठनों की ओर से शनिवार को प्रस्तावित चक्काजाम और रेल रोको आंदोलन को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों की अन्य सभी ड्यूटियां निरस्त कर दी हैं। सभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को कहा गया है कि जिला पुलिस बल, होमगार्ड, रेडियो सहित अन्य शाखाओं को यूनिफार्म में उपस्थिति रखा जाए। जरूरत के हिसाब से कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी तय की जाए। जहां भी जरूरत हो वन और आबकारी अमले का इस्तेमाल किया जाए।
पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी मैदानी अधिकारियों को दिए निर्देश में कहा गया कि पुलिस अधीक्षक जिला मजिस्ट्रेट से समन्वय करके धारा 144 के तहत कार्रवाई करवाएं। ये देखने में आया है कि ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक स्थानों पर तोड़फोड़ करने वाले उपद्रवियों की गिरफ्तारी के बाद थाने लाए जाने पर आसपास के लोग उन्हें छुड़ाने की कोशिश करते हैं।
ऐसी स्थिति से निपटने के लिए जिला, थान और अनुभाग स्तर पर यूनीफार्म और बलवा किट के साथ बल को थाने में रखें। पुलिस अधीक्षक ये तय करें कि पुलिस बल सुबह सात बजे ड्यूटी पर पहुंच जाए। रेलवे की सुरक्षा के लिए जीआरपी और आरपीएफ थानों से संपर्क में रहें। 9 से 11 जून तक किसान आंदोलन से होने वाले घटनाक्रम की जानकारी कंट्रोल रूप पुलिस मुख्यालय को भेजे।
वहीं, पुलिस महानिरीक्षक मकरंद देउस्कर ने बताया कि अब तक किसान आंदोलन में 231 प्रकरण थानों में दर्ज हो चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा 109 देवास में, नीमच में 4, मंदसौर 28, धार 19, उज्जैन में 20 और रतलाम, बड़वानी व राजगढ़ में भी एफआईआर दर्ज की गई है।
आंदोलन में अब तक 108 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। 27 सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया है तो तीन थानों में आग लगाई गई। 8 पुलिस चौकी को जलाया गया है। 191 निजी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। आंदोलन के दौरन भोपाल में 53, देवास 18, धार 60 और मंदसौर में 28 गिरफ्तारी हुई। एसएसबी की तीन कंपनियों शुक्रवार रात प्रभावित क्षेत्रों में जाएंगी।

राजस्व में कर रहित राशि प्राप्त करने के मामले में भारतीय कप्तान विराट कोहली अपने साथी खिलाड़ी शिखर धवन से पीछे

भारतीय कप्तान विराट कोहली विज्ञापन अनुबंध में सबसे अधिक राशि प्राप्त करने वाले खिलाड़ी हैं, लेकिन बीसीसीआई के राजस्व में कर रहित राशि प्राप्त करने के मामले में वे दिल्ली और टीम इंडिया के अपने साथी खिलाड़ी शिखर धवन से पीछे हैं।
यह राजस्व अंतरराष्ट्रीय मैचों में 2015-16 के दौरान प्राप्त राशि से मिला है। मई में धवन को 87.76 लाख रुपए मिले, जबकि कोहली को 83.07 लाख रुपए मिले। बीसीसीआई ने जिस भी खिलाड़ी को 25 लाख रुपये से ज्यादा राशि प्राप्त हुई उनके बारे में यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर जारी की है। इस मामले में तीसरे नंबर पर अजिंक्य रहाणे हैं, जिन्हें 81.06 लाख रुपए मिले हैं। इसके बाद रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन का नंबर आता है। दोनों 73.02 लाख की राशि के साथ संयुक्त चौथे स्थान पर हैं। सबसे नीचे वरुण एरोन हैं जिन्हें 32.15 लाख मिले।
खिलाड़ियों को पिछले तीन घरेलू सत्रों की मैच फीस भी मिली। उन्हें न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के भारत दौरे पर हुई तीन सीरीज की मैच फीस दी गई। कर रहित राशि का हिस्सा देने के अलावा खिलाड़ियों को टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक पर रहने के लिए आईसीसी से मिली राशि का भुगतान भी हुआ।
बाएं हाथ के अनुभवी तेज गेंदबाज आशीष नेहरा को आईपीएल 2016 में चोट के मुआवजे के रूप में एक करोड़ 52 लाख रुपये का भुगतान किया गया। प्रशासकों की समिति (सीओए) की सदस्य डायना इडुलजी सहित पांच पूर्व महिला खिलाड़ियों को प्रत्येक को 30 लाख रुपए दिए गए। इनमें अंजुम चोपड़ा, नीतू डेविड, शुभांगी कुलकर्णी और सुधा शाह भी शामिल हैं। इसके अलावा बेंगलुरु स्थिति एनपीए की जमीन का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए भी तीन करोड़ रुपएखर्च किए गए।

रेलवे ने अब शुरू की पैसेंजर ट्रेनों की दशा सुधारने की कवायद

रेलवे ने अब पैसेंजर ट्रेनों की दशा सुधारने की कवायद शुरू की है। खबर है कि देश में चल रही सभी पैसेंजर ट्रेनों को बदला जाएगा। इनके स्थान पर MEMU या DEMU श्रेणी की बोगियां लगाई जाएंगी, जिससे इन ट्रेनों की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी। जानें योजना से जुड़ी बड़ी बातें –
– रेल अधिकारियों के मुताबिक, आम बोगियों के स्थान पर मेन इलेक्ट्रिक मल्टिपल यूनिट (MEMU) या डीजल इलेक्ट्रिक यूनिट (DEMU) वाले रैक लगाने से ट्रैफिक स्पीड बढ़ेगी। मुगलसराय सेक्शन में सफल प्रयोग के बाद देशभर की पैसेंजर ट्रेनों के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
– मुगलसराय देश के सबसे व्यस्त रेल रुट में से एक है। यहां छह पैसेंजर ट्रेनों से परंपरात बोगियों को बदला गया और परिणाम संतोषजनक रहे।
– DEMU और MEMU श्रेणी की बोगियों में कोच के नीचे मोटर्स लगी होती हैं। इनसे ट्रेन की गति बढ़ाने और उन्हें कम समय में रोकने में मदद मिलती है। साथ ही इन ट्रेनों को रिवर्स करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि ये दोनों दिशा में चल सकती हैं।
रेलवे बोर्ड के सदस्य मोहम्मद जमशेद ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया है कि यह मुख्य रूप से स्वर्णीम चतुर्भुज रुट पर किया जाएगा। इन रुट्स पर करीब 2000 किमी के ट्रैक्स हैं। कुल खर्च 10 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर आएगा।
योजना के तहत नई दिल्ली से कोलकाता, कोलकाता से चेन्नई, चेन्नई से मुंबई और मुंबई से नई दिल्ली से बीच पैसेंजर ट्रेनों को बदला जाएगा।