देश की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत भारत के कुछ प्रदेश अफ्रीका से भी बदतर

गोरखपुर हादसे ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत सामने लाकर रख दी है। वैसे देखा जाए तो विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच ऐसी स्थिति कमोवेश हर साल बनती है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के आंकडे देखे जाए तो भारत के कुछ प्रदेश अफ्रीका से भी बदतर हैं। 2015 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर मिनट दो मासूम बच्चों की मौत होती है।
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम स्टेटिकल रिपोर्ट 2015 में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया गया है कि उस साल भारत में पांच साल से कम उम्र के 10 लाख 8 हजार बच्चों की असमय मौत हुई थी। यानी 2959 मौतें हर दिन। इस हिसाब से हर मिनट दो बच्चों की जान जा रही है, जिसे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कर बचाया जा सकता है।
– इंडिया अंडर-फाइव मॉर्टलिटी रेट (यू5एमआर) के तहत पांच से साल के कम उम्र के बच्चों पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें बताया गया है कि 2015 में जन्में हर हजार बच्चों में से 43 की मौत हो गई।
– 2015-16 में जहां देश की विकासदर 7.6 फीसदी रही, वहीं हर हजार बच्चों पर 43 की मौत का भारत का आंकड़ा ब्रिक्स देशों में सबसे खराब रहा। मध्यप्रदेश और असम जैसे प्रदेशों की स्थिति तो अफ्रीकी देश घाना से भी बदतर रही।
– वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकडों का हवाला देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 2016-17 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि इन मौतों का सबसे बड़ा कारण (53 फीसदी) नवजात शिशु संबंधी रहे।
– इसके बाद निमोनिया (15 फीसदी), डायरिया (12 फीसदी), मांसपेशियां (3 फीसदी) और चोट लगाना (3 फीसदी) कारण रहे।
– सरकार मानती है कि इनमें से 90 फीसदी बच्चों की मौत को बचाया जा सकता है, लेकिन अस्पतालों में सुविधाएं नहीं होने कारण ऐसा न हो सका।
– यूनिसेफ ने भी माना है कि भारत आर्थिक रूप से विकास कर रहा है, लेकिन बच्चों की मौत रोकने में नाकाम रहा है।

दिल्ली जेल और म्यूजिक वन रिकॉर्ड्स ने पेश किया ‘तिहाड़ आईडियल्स’

दिल्ली जेल और म्यूजिक वन रिकॉर्ड्स ने ‘तिहाड़ आईडियल्स’ को पेश किया है। इस एक अनूठे प्रयास में तिहाड़ जेल ने अपने कैदियों के लिए शनिवार को एक म्यूजिक रियलिटी शो आयोजित किया, जिसमें बाहर की जेलों के अभियुक्त भी शामिल हैं।
एक वरिष्ठ जेल अधिकारी ने बताया कि शो, इसका शीर्षक ट्रैक और प्रोमो शनिवार को एक विशेष समारोह में प्रदर्शित किया जाएगा। तिहाड़ आईडियल्स को दिल्ली प्रिजन्स और म्यूजिक वन रिकॉर्ड्स ने पेश किया है।
कैदियों का प्रदर्शन का फैसला फिल्म और संगीत उद्योग के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों द्वारा किया गया। कैदियों को शो के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था। अधिकारी ने कहा कि जेल परिसर में जेल नंबर 1 को कई महीनों तक अस्थायी स्टूडियो में रियलिटी शो के लिए शूटिंग के लिए तैयार किया गया था। शो में कई दूसरी जेलों में बंद कैदियों में भी हिस्सा लिया।

वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले का मंगलवार देर रात निधन

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हिंदी के वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले का मंगलवार देर रात निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के जौल खेड़ा गाँव में सात नवंबर 1936 को हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा इंदौर से हुई जबकि पीएचडी सागर यूनिवर्सिटी से की। वह साठोत्तरी हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर थे और 1960 के दशक में अकविता आंदोलन के साथ उभरे थे। उस समय उनका कविता संग्रह लकड़बग्घा हंस रहा है काफी चर्चित हुआ था।
हिंदी में एमए करने के बाद उन्होंने मुक्तिबोध पर पीएचडी की थी। उन्होंने इंदौर में एक कॉलेज से शिक्षक के रूप में अपनी सेवा भी दी। कॉलेज से सेवानिवृत्त होने के बाद से वह स्वतंत्र लेखन कर रहे थे। उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान के अलावा मध्य प्रदेश शिखर सम्मान व मैथिली शरण गुप्त सम्मान भी मिला था। उनकी चर्चित कृतियों में रोशनी के मैदान के उस तरफ, पत्थर फेंक रहा हूं और हड्डियों में छिपे ज्वार आदि प्रमुख हैं।

अब पत्नी को पीएम बनाने की तैयारी में नवाज शरीफ

पाकिस्तान में नवाज शरीफ की कुर्सी जाने के बाद अब वह अपनी पत्नी को पीएम बनाने की तैयारी में हैं। वहीं हाल ही में राजनीति में कदम रखने वाली आतंकी हाफिज सईद की पार्टी अपना पहला चुनाव लड़ेगी। उसने नवाज शरीफ की पत्नी के सामने ही अपना उम्मीदवार उतार दिया है।
खबरों के अनुसार हाफिज की पार्टी मिल्ली मुस्लीम लीग ने नवाज की पत्नी कुलसुम नवाज के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारा है। यह उपचुनाव लाहौर की एनए-120 सीट पर हो रहा है। नवाज की पार्टी के आशिफ किरमानी और कैप्टन सफदर ने नवाज की पत्नी की नामांकन दर्ज करवा दिया है।
बता दें कि जमात-उद-दावा ने पिछले दिनों ही राजनीतिक पार्टी का गठन किया है जिसका नाम मिल्ली मुस्लीम लीग रखा गया है। इसका अध्यक्ष सैफुल्ला खालिद को बनाया गया है।

दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताज महल फिर चर्चा में

दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताज महल एक बार फिर से चर्चा में है। दरअसल, सीआईसी ने सरकार से कहा है कि वह स्पष्ट करे कि ताज महल शिवालय है या मकबरा। जानते हैं इसके शिवालय होने के बारे में क्या तर्क दिए गए हैं।
इतिहासकार पुरुषोत्तम नाथ ओक और योगेश सक्सेना अपनी किताब ताज महलः ट ट्रू स्टोरी में दावा किया है कि ताजमहल एक मकबरा नहीं बल्कि शिव मंदिर है। इसके लिए उन्होंने कई तर्क भी दिए हैं। उनके अलावा कई अन्य लोगों का भी मानना है कि ताज महल वास्तव में एक शिव मंदिर था, जिसे मुगलकाल में जयपुर के शासक के जबरन छील लिया गया था।
इतिहासकार ओक की किताब के मुताबिक, ताजमहल एक शिव मंदिर है जिसका असली नाम तेजो महालय है। ताजमहल को शाहजहां ने नहीं बल्कि एक हिंदू राजा ने बनवाया था। ताजमहल के लिए हिंदू संगठनों की ओर से तर्क दिए गए कि संगमरमर की इमारत को साल 1192 में राजा परमार्दिदेव ने बनवाया था।
ये इमारत एक मंदिर थी, जिसमें अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर शिवलिंग की पूजा होती थी। शाहजहां ने इसे राजपूत राजा मानसिंह के पोते जयसिंह से हासिल किया था। शाहजहां की बेगम मुमताज महल का असली मकबरा बुरहानपुर में था। शाहजहां ने कब्जे के बाद मुमताज को वहां दफन कर शिव मंदिर को ही मकबरे में बदल दिया था।
हालांकि, ताज महल की सरकारी वेबसाइट जिसे उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग देखता है, उसमें कहा गया है कि ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहां ने 1628-1658 में अपनी बेगम अर्जुमंद बानो उर्फ मुमताज की याद में बनवाया था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की वेबसाइट में भी कहा गया है कि ताजमहल को अकबर के पोते शाहजहां ने मुमताज की याद में बनवाया था।
इतिहास के पन्नों पर दर्ज ये दास्तान बताती है कि मुमताज महल की मौत के बाद साल 1632 में शाहजहां ने मुमताज महल का ये मकबरा बनवाया था। उन्होंने अपनी चाहत को संगमरमर के इस हुस्न में हमेशा के लिए कैद कर दिया। ताज महल को देखने दुनिया भर से जो पर्यटक आते हैं उन्हें यही कहानी जाने कितनी बार सुनाई गई है। इसके अलावा केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने साल 2015 में कहा था कि सरकार को ताजमहल के हिंदू मंदिर होने के दावे से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला है।
किसी भी मुस्लिम इमारत के नाम के साथ कभी महल शब्‍द प्रयोग नहीं हुआ है।
यह कहा जाता है कि मुमताज की कब्र पर बूंद-बूंद कर पानी गिरता है। दुनियाभर में कहीं भी किसी कब्र पर बूंद-बूंद पानी नहीं गिरता है। यह सिर्फ शिव मंदिरों में ही होता है, जहां शिवलिंग पर बूंद-बूंद पानी गिरता है।
संगमरमर की सीढ़ियां चढ़ने से पहले जूते उतारने की परंपरा है, जैसी मंदिरों में प्रवेश पर होती है, जबकि किसी मकबरे में जाने के लिए जूते नहीं उतारे जाते हैं।
संगमरमर की जाली में 108 कलश चित्रित हैं तथा उसके ऊपर 108 कलश बने हैं, हिंदू मन्दिर परम्परा में भी 108 की संख्या को पवित्र माना जाता है।
ताजमहल शिव मंदिर को इंगित करने वाले शब्द ‘तेजोमहालय’ शब्द का अपभ्रंश है, जहां अग्रेश्वर महादेव प्रतिष्ठित थे।
ताज के दक्षिण में एक पुरानी पशुशाला है, जहां तेजोमहालय की पालतू गायों को बांधा जाता था। मुस्लिम कब्र में गौशाला होना एक असंगत बात है।
ताज के पश्चिमी छोर में लाल पत्थरों के अनेक उपभवन हैं, जो कब्र की तामीर के संदर्भ में अनावश्यक हैं।
संपूर्ण ताज परिसर में 400 से 500 कमरे तथा दीवारें हैं। कब्र जैसे स्थान में इतने सारे रिहाइशी कमरे आखिर क्यों बनाए गए थे।
सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क ब्रुकलिन कॉलेज के प्रो. ईवान टी. विलियम्स ने ताज के मुगलों से प्राचीन होने के सबूत दिए थे। घूमने आए प्रो. ईवान ताज के यमुना की ओर स्थित दरवाजों की लकड़ी के अंश ले गए थे। कार्बन डेटिंग में इस लकड़ी को वर्ष 1359 का बताया गया था। इसमें उन्होंने इसके 89 वर्ष आगे-पीछे होने की बात भी कही थी। इस समय तो मुगल वंश की नींव डालने वाला बाबर का जन्म भी नहीं हुआ था। यह सबूत इस ओर इशारा करता है कि ताज महल संभवतः शिवालय रहा होगा।
न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास यानी शाहजहां के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है। वहीं, मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी उसी वर्ष के अंग्रेज यात्री पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था।

स्वाइन फ्लू का कहर अहमदाबाद सहित पूरे प्रदेश में 13 लोगों की मौत

गुजरात में स्वाइन फ्लू का कहर लगातार जारी है। अहमदाबाद सहित पूरे प्रदेश में रविवार को इस बीमारी से 13 लोगों की मौत हो गई जबकि 100 मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही इस वर्ष स्वाइन फ्लू से मरनेवालों की 190 तक पहुंच गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शंकर सिंह चौधरी ने प्रदेश के उच्च चिकित्सकों के साथ एक बैठक कर प्रशासन को अलर्ट रहने का आदेश दिया है।
अहमदाबाद में रविवार को खाड़िया निवासी शख्स (57 वर्ष) को स्वाइन फ्लू की आशंका के बीच भर्ती किया गया था। देर रात उसकी मौत हो गई। निजी अस्पातल मेँ भर्ती वेजलपुर के एक युवक की इसी बीमारी से मौत हो गई। नरोड़ा की 50 वर्षीय महिला और सरखेज के एक 12 साल के बच्चे की स्वाइन फ्लू की वजह से ही मौत हो गई है। इस तरह रविवार को अहमदाबाद में स्वाइन फ्लू की बीमारी का उपचार ले रहे चार मरीजों की मौत हुई। इसके अलावा इस बीमारी के कुल 41 मामले दर्ज हुए हैं। अहमदाबाद के अलावा राजकोट में भी 4, वड़ोदरा में 1, आणंद में 1, भावनगर में 1, मोरबी में 1 और नर्मदा में एक युवक की मौत स्वाइन फ्लू की वजह से हो गई।
स्वास्थ्य विभाग की अहमदाबाद में हुई बैठक के बाद बताया गया कि गुजरात में स्वाइन फ्लू का कहर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। इस वर्ष अभी तक 190 लोगों ने स्वाइन फ्लू की वजह से दम तोड़ा है। स्वाइन फ्लू के 1609 मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें से 792 मरीजों का अस्पताल में उपचार चल रहा है तथा 627 मरीज उपचार के बाद ठीक हुए हैं। अहमदाबाद और सौराष्ट-राजकोट में स्वाइन फ्लू का जोर अधिक है। यहां सर्वाधिक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के तमाम जिले में डोर टू डोर सर्वे करने का आदेश दिया है। सर्दी-खांसी या बखार होने पर ऐसे मरीजों को दवाई देकर उनका ब्लड टेस्ट किया जा रहा है। अहमदाबाद शहर में किन-किन क्षेत्रों में वायरल इंफेक्शन के मामले अधिक हैं। उन क्षेत्रों की जानकारी हासिल की जा रही है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने अहमदाबाद सिविल अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम (वेंटीलेटर) की संख्या बढ़ाने का भी निर्णय किया है।

मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में किया झंडारोहण

मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज सुबह स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में झंडारोहण किया। इसके बाद उन्‍हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वो लोगों के बीच गए और उनका अभिवादन भी स्‍वीकार किया। समारोह में रंगविरंगे ड्रेस में बच्‍चों का उत्‍साह देखने लायक था।
ध्‍वजारोहण के बाद सीएम शिवराज ने लोगों को संबोधित किया। वो बोले, जिस माता का अन्‍न हमने खाया, पानी पिया है और उसी का खून हमारी रगों में दौड़ रहा है। भारत माता को प्रणाम करते हुए उन्‍होंने कहा कि आप सभी बहिनों भाईयों ओर प्रदेशवासियों को स्‍वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं। सीएम ने कहा कि यह आजादी हमें बड़ी मुश्किलों से मिली इसके लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। हमारे हजारों क्रांतीकारी हंसते-हंसते फांसी पर झूल गए मैं उन्‍हें नमन करता हूं।
उन्‍होंने कहा कि मैं उन सभी माताओं को भी प्रणाम करता हूं जिन्‍हेांने अपने लालों को बॉर्डर पर देश की सुरक्षा के लिए भेजा है। इस दौरान उन्‍होंने शहीद बलराम तोमर को याद किया और कहा कि मैं उनको नमन करके यहां आया हूं।
लाल परेड ग्राउंड लोगों से भरा हुआ था और इस दौरान सुरक्षा का विशेष ध्‍यान रखा गया है। देश आज अपना 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और इस मौके पर पूरे प्रदेश में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। बच्‍चे सड़कों पर तिरंगा लेकर दौड़ते और भारत माता की जय के नारे लगाते हुए नजर आ रहे हैं।

मैं कोई बहाना नहीं बनाना चाहता, लेकिन मैं चोटिल नहीं होता तो इससे बेहतर कर सकता था

देवेंद्र सिंह कंग अपने ऐतिहासिक फाइनल राउंड में प्रभावित करने में असफल रहे और पुरुष भाला फेंक स्पर्धा में निराशाजनक 12वें स्थान पर रहे। विश्व चैंपियनशिप की भाला फेंकस्पर्धा के फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय कंग ने काफी लचर प्रदर्शन किया और वह ओलंपिक स्टेडियम में अपने तीसरे प्रयास में 80.02 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंकसके।
उन्होंने 75.40 मीटर से शुरुआत की और 13 एथलीटों में अपने दूसरे प्रयास में फाउल कर बैठे। तीन राउंड के बाद वह बाहर हो गए, जबकि शीर्ष आठ एथलीटों ने स्पर्धा जारी रखी। कंग का सत्र और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 84.57 मीटर का है।
जर्मनी के जोहानेस वेटर ने 89.89 मीटर के प्रयास से स्वर्ण जीता, जबकि चेक गणराज्य के दो एथलीट जाकुब वाडलेजिच (89.73 मीटर) और पेट्र फ्रिडिच (88.32 मीटर) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक अपने नाम किए।
कंग ने स्पर्धा के बाद कहा, ‘मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश की, लेकिन दायें कंधे की चोट के कारण मुझे दर्द था, यह काफी तेज था और इसकी वजह से मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका। मैं कोई बहाना नहीं बनाना चाहता, लेकिन मैं चोटिल नहीं होता तो इससे बेहतर कर सकता था। मैं निराश हूं, मैंने देश को निराश कर दिया।’ हालांकि पंजाब का यह एथलीट फिर भी विश्र्व चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला भारतीय एथलीट रहा।

शंघाई पुडांग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पर चीनी एयरलाइंस के कर्मचारियों ने भारतीय यात्रियों से बदसुलूकी की

डोकलाम पर भारत के सख्त तेवर से चीनी नागरिक भी बौखला उठे हैं। ऐसे ही एक मामले में शंघाई पुडांग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पर चीनी एयरलाइंस के कर्मचारियों ने भारतीय यात्रियों से बदसुलूकी की। इस मामले के भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संज्ञान में आने के बाद भारत की ओर से चीनी विदेश मंत्रालय व एयरपोर्ट अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने इस तरह की किसी घटना से इन्कार किया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने इस संबंध में सुषमा स्वराज को पत्र लिखा था। चहल छह अगस्त को चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस से नई दिल्ली से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को जा रहे थे। उन्हें शंघाई पुडांग में रूककर इसी एयरलाइंस के सैन फ्रांसिस्को जाने वाले दूसरे विमान में सवार होना था।
चहल ने बताया कि जहाज के निकास द्वार(व्हीलचेयर वाले यात्रियों के लिए) पर एयरलाइंस के ग्राउंड स्टाफ भारतीय यात्रियों को अपमानित कर रहे थे। एयरलाइंस कर्मचारियों के बॉडी लैंग्वेज से लग रहा था कि वे दोनों देशों के बीच बढ़ते सीमा विवाद से कुंठित हैं।
चहल ने विदेश मंत्री को यह सुझाव भी दिया है कि वह भारतीय यात्रियों को चीन के रास्ते ट्रांजिट यात्रा न करने की एडवाइजरी जारी करें। ज्ञात हो कि सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम में भारत व चीन की सेना आमने-सामने है। चीन ने पिछले महीने जारी एडवाइजरी में भारत में रह रहे अपने नागरिकों को सुरक्षा का खास खयाल रखने को कहा था।

जम्मू कश्मीर में सेना ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया

जम्मू कश्मीर के शोपियां के अवनीरा में सेना ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया है। शनिवार शाम से जारी मुठभेड़ रविवार सुबह हिज्बुल मुजाहिदीन के ऑपरेशनल चीफ कमांडर यासीन यत्तु उर्फ महमूद गजनवी उर्फ मंसूर उल इस्लाम समेत तीन आतंकियों के मारे जाने के साथ खत्म हो गई। मुठभेड़ में दो सैन्यकर्मी शहीद व एक कैप्टन समेत चार जख्मी हो गए।
15 लाख का इनामी आतंकी यत्तु मोस्ट वांटेड 12 आतंकियों की सूची में था। अवनीरा गांव में एक दर्जन से ज्यादा लश्कर व हिज्ब आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर शनिवार को सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान चलाया था।
घेराबंदी होते ही पथराव की आड़ में कई आतंकी भाग निकले थे, लेकिन पांच आतंकी फंस गए। शनिवार शाम पांच बजे से रविवार सुबह 11 बजे तक करीब 18 घंटे चली मुठभेड़ में यत्तु समेत तीनों आतंकी ढेर हो गए। दो आतंकी पथराव की आड़ में भाग गए।
आईजी कश्मीर मुनीर अहमद खान ने कहा कि हिज्ब के ऑपरेशनल चीफ कमांडर यासीन यत्तु के अलावा जिला कमांडर इफान-उल-हक और उमर मजीद मारे गए हैं। ये जवान हुए शहीद : सेना के प्रवक्ता ने बताया कि शहीद सैनिकों के नाम तमिलनाडु निवासी सिपाही इलयाराजा पी. और महाराष्ट्र निवासी सिपाही गवई सुमेध वामन हैं।
कश्मीर में यत्तु बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से कश्मीर में जारी अशांति के पीछे शामिल था। वह संगठन के लिए युवाओं की भर्ती भी करता था। 1996 से हिज्बुल से जुड़ा था। 2007 में उसने समर्पण कर दिया था। 2014 में उसे पैरोल पर छोड़ दिया गया। इसके बाद वह फिर से आतंकी बन गया था। वहीं उमर मजीद ने साथियों संग मिलकर मई 2017 में यारीपोरा में एक बैंक में डाका डाला था। उस पर तीन लाख रुपए का इनाम था।