छात्रों ने सवाल किया पढ़ाई में मन नहीं लग रहा क्या करूं

मैडम, मैं दमोह से अभिषेक बोल रहा हंू। मैंने पेपर में विज्ञापन देखा है कि बिना 10वीं-12वीं पास किए ग्रेजुएशन में प्रवेश लें। क्या यह सही है? ऐसा होता है क्या कि बिना बोर्ड परीक्षा दिए ग्रेजुएशन हो जाए? सोमवार को यह सवाल मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा छात्रों के लिए शुरू की गई हेल्पलाइन में पूछा गया। हेल्पलाइन शुरू होने के पहले ही दिन प्रदेशभर से करीब 400 कॉल आए।
बिना हाई स्कूल और हायर सेकंडरी परीक्षा पास किए ग्रेजुएश्ान के सवाल पर काउंसलर्स ने कहा कि यह भ्रामक विज्ञापन है। ऐसे विज्ञापनों के बहकावे में बिल्कुल ना आएं। छात्र से कहा गया कि वह अपनी बोर्ड परीक्षा के लिए मन लगाएं। इस तरह के विज्ञापन कॅरियर खराब कर सकते हैं। ये भोले-भाले छात्रों से पैसा ऐंठने का जरिया है।
काउंसलिंग में भोपाल के एक छात्र ने पूछा कि वह जो भी पढ़ता है भूल जाता है। कई बार पढ़ने में मन नहीं लगता। इसके लिए क्या करूं। काउंसलर ने उससे कहा कि पढ़ाई के समय वह कॉपी-पेन लेकर बैठे। जिस पॉइंट पर भी वह अटक रहा है उसे कॉपी में लिखे। इसके बाद उसे रिकॉल करे अगर फिर वह उसी पर अटक रहा है तो कॉपी देखे। इस प्रक्रिया को अगर वह दोहराएगा तो यह समस्या आसानी से दूर हो जाएगी।
कुछ छात्रों ने सवाल किया कि उन्हें परीक्षा से डर लगता है। घबराहट होती है कि पता नहीं पेपर कैसा आएगा? काउंसलर्स ने कहा कि वे अपनी पढ़ाई पर फोकस करें। इसकी चिंता बिल्कुल न करें कि पेपर कैसा आएगा। पेपर सिलेबस में से ही आएगा कहीं बाहर से बनकर नहीं आएगा, इसलिए पढ़ाई करें अच्छे नंबर आएंगे। छात्रों ने यह भी पूछा कि अच्छे नंबर लाने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए ? काउंसलर्स ने कहा कि पेपर में जो पूछा गया है उसके मुताबिक उत्तर दें। लिखने पर ध्यान रखें इसी के साथ प्रश्न के मुताबिक शब्द सीमा भी देखें। जिन छात्रों को विषय संबंधित समस्या थी उन्हें विषय के शिक्षकों के नंबर भी दिए गए ताकि वे उनसे दिए गए समय पर सीधे बात कर सकें। काउंसलर्स ने बताया कि जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आएगा कॉल करने वालों की संख्या भी बढ़ती जाएगी। गौरतलब है कि यहां तीन शिफ्टों में चार काउंसलर छात्रों-अभिभावकों की चिंता और समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। यहां नीता तिवारी, शबनम खान आदि काउंसलिंग कर रही हैं।
ये मंत्र भी दिए
– हल्का भोजन लें, पर्याप्त नींद लें।
– परीक्षा से घबराएं नहीं पढ़ें, पेपर सिलेबस मे से ही आएगा।
– जहां अटकते हैं या कमजोर हैं, उसे कॉपी में लिखें।
– पढ़ने के बाद रिवीजन जरूर करें।
– प्रश्न के मुताबिक उत्तर लिखें, शब्द सीमा का ध्यान रखें।
– किताब से भी पढ़ें, कई बार प्रश्न पाठ के बीच में से भी पूछे जाते हैं।
– पढ़ाई के बीच थोड़ा अंतराल लें।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन बेटे याइर नेतन्याहू साथ नहीं आ सके भारत

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे याइर नेतन्याहू भी अपने माता-पिता के साथ भारत दौरे पर जाने वाले थे। इसके लिए उन्हें वीजा भी जारी हो गया था। लेकिन आखिरी समय पर भारत आने वालों की सूची से उनका नाम कट गया। इस प्रकार वह भारत नहीं आ सके।
इजरायली चैनल हदाशॉट टीवी न्यूज के अनुसार, याइर नेतन्याहू भी भारत जाने वाले दल में शामिल थे, लेकिन उनसे संबंधित एक विवादित टेप के सार्वजनिक होने के बाद उनका नाम प्रतिनिधिमंडल दल से हटा दिया गया। ध्यान रहे कि इजरायल के चैनल 2 टेलीविजन द्वारा पिछले सोमवार को प्रसारित एक ऑडियो टेप में याइर नेतन्याहू को तेल अवीव के एक स्ट्रिप क्लब के बाहर एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक गैस सौदे के बारे में बातचीत करते हुए पाया गया है।
टेप में वह नशे की हालत में लग रहे हैं। हालांकि नेतन्याहू के परिवार ने चैनल 2 द्वारा प्रसारित रिकार्डिंग की निंदा की है। बाद में इस पर सफाई देते हुए याइर नेतन्याहू ने भी कहा था कि वह 2015 से ही ऑडियो पर इस तरह के मजाक करते आ रहे हैं।

राजस्थान के बूंदी जिले में कलेक्टर को मिला गोली मारने का धमकी भरा पत्र

राजस्थान के बूंदी जिले में मान्धाता छतरी विवाद के चलते बने तनाव के दौरान ही यहां की जिला कलेक्टर को गोली मारने का धमकी भरा पत्र जिला कलेक्ट्रेट में मिला।
जानकारी के मुताबिक, भेजने वाले ने पत्र को डाक के जरिये भेजा और पत्र में जिला कलेक्टर शिवांगी स्वर्णकार को सरेराह बीच बाजार गोली मारने की बात कही। साथ ही खत में बदला लेने का जिक्र करते हुए मौत के घाट उतारने की बात कही है। वहीं जिस खत के जरिये धमकी दी गई है वह किसी वकील के लेटरहेड पर लिखा गया बताया जा रहा है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिस अधिवक्ता का लेटरहेड है, उसका इससे फिलहाल कोई संबंध नहीं मिला। पुलिस हर पहलू पर इस पत्र की जांच में जुटी हुई है। वहीं, उनके आवास पर सुरक्षा बंदोबस्त भी पुख्ता कर दिए गए हैं।
बूंदी में पिछले 3 माह से टाइगर हिल पर मान्धाता छतरी पर पूजा करने को लेकर विवाद चल रहा है, जिसको लेकर गत 1 जनवरी से प्रशासनिक अधिकारियों और हिंदू महासभा के बीच कई बार लाठी-भाटा जंग हुई।

फीस सिस्टम से सरकार को सौ करोड़ की बचत

प्रदेश में सरकारी सिस्टम से फीस बंटवाई और सरकार को सौ करोड़ रुपए की बचत हो गई। पढ़ने-सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन यह सच है कि सरकारी सिस्टम से फीस बंटवाने पर उसे सौ करोड़ बच गए। पिछड़ा वर्ग कल्याण की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में ऐसा ही कुछ हुआ है। चालू वित्तीय वर्ष में पिछले साल की तुलना में करीब सौ करोड़ रुपए छात्रवृत्ति कम लगेगी। इसकी वजह छात्रवृत्ति या छात्रों की संख्या में कटौती नहीं, बल्कि तय नियम का पालन कराना है।
सरकार ने बस किया यह कि फीस नियामक आयोग ने जो फीस तय की थी, जिलों में उसकी केपिंग (तय फीस के हिसाब से छात्रवृत्ति तय) करा दी। इससे दस हजार रुपए की जगह जिन कॉलेजों को बीस से लेकर पचास हजार रुपए प्रति छात्र छात्रवृत्ति दी जा रही थी, वो पूरी तरह से बंद हो गई। इतना ही नहीं, आधा दर्जन से ज्यादा जिला अधिकारी गड़बड़ी करने के कारण मुश्किल में फंस गए हैं। अब नौबत आपराधिक प्रकरण बनने तक आ गई है।
पिछड़ा वर्ग के छात्र आर्थिक अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित न रह जाएं, इसलिए सरकार ट्यूशन फीस छात्रवृत्ति के तौर पर देती है। पहले निजी कॉलेज वाले मनमर्जी से फीस वसूला करते थे, लेकिन फीस नियामक आयोग ने फीस तय कर दी। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 2013 में छात्रवृत्ति के नियम बना दिए। इसके हिसाब से कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वो तय फीस के आधार पर छात्रवृत्ति तय करके दावा प्रस्तुत करे। पिछले तीन-चार साल में छात्रवृत्ति में हुए घोटालों को लेकर विभाग सतर्क हुआ और प्रदेशभर में 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में दी गई छात्रवृत्ति की मुख्यालय से अधिकारियों के दल भेजकर जांच कराई।
इसमें खुलासा हुआ कि ट्यूशन फीस तय होने के बावजूद जिलों में तय छात्रवृत्ति से 10 से लेकर 30 हजार रुपए तक प्रति छात्र अतिरिक्त दे दिए। नौ जिलों की जांच में 14 हजार से ज्यादा छात्रों को 12 करोड़ रुपए ज्यादा देने के मामले सामने आ चुके हैं। जांच का सिलसिला अभी चल रहा है। उधर, विभाग को एक बड़ी कामयाबी यह मिली कि पिछले साल जहां 550 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति दी गई थी, वो चालू वित्तीय वर्ष में घटकर साढ़े चार सौ करोड़ रुपए के आसपास आ गई है।
विभाग के सचिव रमेश थेटे ने बताया कि जब हमे यह पता लगा कि जिलों में नियम के अनुसार छात्रवृत्ति नहीं बंट रही है तो हमने जांच कराने का फैसला किया। लेखों की जांच हुई तो गड़बड़ियां खुलने लगीं। दोषी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगे जा रहे हैं। संतुष्टि लायक जवाब नहीं होने पर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कराए जाएंगे, क्योंकि ये खुली लूट है, जो मान्य नहीं है। सख्ती के चलते उम्मीद है कि छात्रवृत्ति वितरण में इस साल सरकार को करीब सौ करोड़ रुपए की बचत होगी। यह तब है जब छात्रों की संख्या बढ़कर साढ़े पांच लाख के आसपास हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि जब जांच का सिलसिला शुरू हुआ तो जिलों से छात्रवृत्ति की मांग घटने लगी। कुछ जिलों ने तो बाकायदा लिखकर दे दिया कि हमारी मांग को तीन से लेकर पांच करोड़ रुपए तक घटा दिया जाए। इसके मायने यह हुए कि यदि सख्ती नहीं बरती जाती तो अधिक छात्रवृत्ति देने के नाम पर खजाने को लुटाने का जो खेल चल रहा था, वो चलता रहता। सूत्रों का कहना है कि छात्रवृत्ति वितरण में हुई गड़बड़ी के लिए कलेक्टरों की जिम्मेदारी भी बनेगी, क्योंकि वे जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं।
यहां उजागर हो चुकी है गड़बड़ी
जिले–राशि
रीवा–3.21 करोड़
छिंदवाड़ा–2.76 करोड़
सतना–2.18 करोड़
कटनी–1.56 करोड़
बालाघाट–86 लाख
टीकमगढ़–43 लाख
गुना–42 लाख
मुरैना–35 लाख
बैतूल–26 लाख

बल्लेबाज सुरेश रैना ने खुद बताया वो करेंगे 2018 के लिए टीम की उपकप्तानी

चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के बल्लेबाज सुरेश रैना ने खुद बताया कि वो आईपीएल सीजन 2018 के लिए टीम की उपकप्तानी करेंगे।
बाएं हाथ के बल्लेबाज रैना उन तीन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिसे सीएसके ने नीलामी से पहले रिटेन किया था। रैना के साथ धोनी और जडेजा भी रिटेन किए गए थे। मध्यक्रम के बल्लेबाज सुरेश रैना ने कहा कि टीम के कप्तान धोनी होंगे जबकि मैं उप कप्तान की जिम्मेदारी निभाउंगा।
सुरेश रैना ने नीलामी को लेकर चेन्नई फ्रेचाइजी के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट और रिटेन प्लेयर जल्द ही बेंगलुरु में 27 और 28 जनवरी को होने वाली नीलामी को लेकर बैठक करेंगे जिसमें चर्चा होगी कि क्या करना है। 31 वर्षीय रैना ने कहा कि उन्हें लगता है कि सीएसके आईपीएल की बेस्ट टीम होगी। सुरेश रैना और धोनी ने एक साथ घरेलू स्तर पर और इंटरनेशनल स्तर पर कई मैच खेले हैं। इन दोनों खिलाड़ियों के इस अनुभव का फायदा टीम फेंचाइजी नीलामी में जरूर उठाएगी। रैना और धोनी को पता है कि उनकी टीम के लिए सही खिलाड़ी कौन होगा और उसका क्या रोल होगा।
रैना ने कहा कि मुझे लगता है कि इस सीजन में सीएसके एक बेस्ट टीम के तौर पर सामने आएगी क्योंकि दो वर्ष मैंने गुजरात के लिए खेला है और धोनी पुणे के लिए खेले थे साथ ही भारत के लिए भी उन्होंने काफी मैच खेले हैं और मैंने काफी घरेलू मैच खेले हैं। इसकी वजह से हमें टीम के लिए बेस्ट खिलाड़ी चुनने में काफी मदद मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा न्यायपालिका की स्थिति को लेकर मुद्दे को सुलझाने की कोशिशें तेज

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा फ्रेस कॉन्फ्रेस कर न्यायपालिका की स्थिति को लेकर उठाए गए सवालों के बाद अब इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। खबरों के अनुसार पीएम मोदी के प्रमुख सचिव ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से उनके आवास पर मुलाकात की है वहीं बार एसोसिएशन ने भी बैठक बुलाई है।
खबरों के अनुसार एसोसिएशन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बैठक करेगा और इसके बाद मीडिया को संबोधित भी किया जा सकता है। वहीं चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा भी सुप्रीम कोर्ट के जजों से मुलाकात कर अपना पक्ष रख सकते हैं। माना जा रहा है कि आज की इन कवायदों के बाद विवाद सुलझ सकता है।
अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने समाचार एजेंसी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जजों से जुड़ा मामला कल सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘आज की प्रेस कांफ्रेस को टाला जा सकता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों के पास अपार अनुभव और जानकारी है। मुझे पूरा यकीन है की इस पूरे मसले को कल सुलझा लिया जाएगा।’
बता दें कि एक अभूतपूर्व घटना में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) दीपक मिश्रा के खिलाफ सार्वजनिक मोर्चा खोल दिया। आगाह किया कि संस्थान में सब कुछ ठीक नहीं है। स्थिति नहीं बदली तो संस्थान के साथ साथ लोकतंत्र भी खतरे में है। मीडिया के सामने आने के न्यायाधीशों के चौंकाने वाले फैसले ने न सिर्फ आंतरिक कलह को खोलकर सामने रख दिया है, बल्कि कानूनविदों को भी खेमे में बांट दिया।

2006 की पटवारी परीक्षा निरस्त कोर्ट ने अभी कोई फैसला नहीं दिया

साल 2006 में हुई पटवारी चयन परीक्षा का मामला अभी भी ग्वालियर हाईकोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने अभी कोई फैसला नहीं दिया लेकिन, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव अस्र्ण पाण्डेय ने 2006 की पटवारी परीक्षा को निरस्त कर दिया है।
इतना ही नहीं इस परीक्षा में चयन हुए 77 पटवारियों पर एफआईआर के लिए श्योपुर प्रशासन को पत्र भेजा है। पीएस पाण्डेय ने चयनित पटवारियों पर एफआई का जिम्मा कलेक्टर पीएल सोलंकी व एसपी डॉ. शिवदयाल सिंह को दिया है।
गौरतलब है कि पटवारी परीक्षा का यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की सभी दलीलेें खारिज करते हुए दिसंबर 2014 में चयनित पटवारियों के पक्ष में फैसला देते हुए मप्र शासन को आदेश दिए थे कि वह पटवारियों को ज्वाइनिंग दें। लेकिन, राजस्व विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी चयनित उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग नहीं दी।
दो साल तक भोपाल व श्योपुर के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। इससे परेशान चयनित उम्मीदवारों ने कोर्ट की अवमानना की याचिका ग्वालियर हाईकोर्ट में लगा दी । ग्वालियर हाईकोर्ट में पिछले दो महीने में इस मामले में 5 तारीखें लग चुकी हैं।
इस मामले में अब 18 जनवरी की तारीख लगी है। यानी, हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करवाने का मामला अभी विचाराधीन है लेकिन, राजस्व विभाग के पीएस अरुण पांडेय ने पिछले महीने इस मामले को अलग ही रुख दे दिया। श्री पांडेय ने सभी पटवारियों को पद से बर्खास्त करने के आदेश देकर उन पर एफआईआर के निर्देश दिए।
इस आदेश में तकनीकी खामी यह है कि, जब पटवारियों को अब तक ज्वाइन ही नहीं किया तो बर्खास्तगी कैसी? इस सवाल का जवाब कोई अफसर देना नहीं चाहता। अलबत्ता 15 दिसंबर को पीएस अरुण पांडेय ने 2006 पटवारी भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया एवं आदेश श्योपुर भी भेज दिए। मंगलवार को श्री पांडेय का एक और पत्र श्योपुर कलेक्टर-एसपी के पास पहुंचा है जिनमं 77 पटवारी उम्मीदवारों पर एफआईआर कराने के आदेश हैं।
राजस्व विभाग ने जिन 77 पटवारी उम्मीदवारों पर एफआईआर का जिम्मा श्योपुर कलेक्टर-एसपी को सौंपा है उनमें से तीन की मौत हो चुकी है। लता शर्मा ने तो सदमें में फांसी लगा ली थी और नौकरी न मिलने के सदमें भी एक अन्य युवक मदन सोनी की जान चली गई थी। इतना ही नहीं कई युवाओं की संविदा शिक्षक के तौर पर नौकरी लग चुकी है। करीब 6 युवा ऐसे हैं जिन्होंने दोबारा 2013 में हुई पटवारी चयन परीक्षा पास की उसके बाद पटवारी की नौकरी ज्वाइन कर ली। यदि इन पर भी एफआईआर हुई तो इनकी नौकरी संकट में आ जाएगी।
पटवारी चयन भर्ती प्रक्रिया में शासन ने सबसे पहले अफसरों को दोषी माना था इसीलिए, साल 2008 में ही श्योपुर के तत्कालीन कलेक्टर सहित 14 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। शासन के आदेश पर तत्कालीन कलेक्टर एमएस भिलाला, डिप्टी कलेक्टर कमलेश पुरी, एसएलआर हरफूल सिंह गुर्जर, जिला शिक्षा अधिकारी रामजीलाल उपाध्याय, एसएलआर एमपी बदरेंठिया, एमएल गुप्ता, नायब तहसीलदार रामदीन सेमिल, आरआई प्रभूलाल नारौलिया, काशीराम लखन, अशोक निर्मल, रघुवीर जाटव, मुश्ताक अहमद, पीएस धाकड़ और बलराम जाटव पर श्योपुर कोतवाली में कार्य के प्रति लापरवाही सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है।
चयनित पटवारियों की ओर से हरिओम गौतम व अन्य ने ग्वालियर हाईकोर्ट में मामला लगाया है। पिछली तीन तारीखों से हाईकोर्ट प्रमुख सचिव राजस्व का शपथ पत्र मांग रहा है लेकिन, सरकारी वकील कोई न कोई दलील देकर प्रमुख सचिव का शपथ पत्र अब तक पेश नहीं कर पाए हैं। गुरुवार को लगी तारीख में हाईकोर्ट न्यायाधीश ने सरकारी वकील को भी फटकारा क्योंकि, इस प्रकरण को लड़ने के लिए वकील ने अपना हलफनामा नहीं लगाया। पक्षकार हरिओम गौतम ने बताया कि 18 जनवरी को हाईकोर्ट ने पीएस अरुण पांडेय और श्योपुर कलेक्टर को कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
राजस्व विभाग से 2006 के चयनित पटवारियों पर एफआईआर कराने के निर्देश मिले हैं। इस संबंध में पुराने रिकॉर्ड देखे जा रहे हैं। जल्द ही निर्देशों का पालन कराया जाएगा।

अमेरिका अपने सभी विवाद बातचीत के जरिये हल करने को तैयार

दक्षिण कोरिया से उत्तर कोरिया की वार्ता शुरू होने के बाद अमेरिका भी प्रतिबंधित देश से बात करना चाहता है। लेकिन इसके लिए वह उचित समय और सही हालात बनने का इंतजार करेगा। इस बीच उत्तर कोरिया ने कहा है कि वह दक्षिण कोरिया के साथ अपने सभी विवाद बातचीत के जरिये हल करने को तैयार है लेकिन परमाणु हथियारों के मसले पर किसी से कोई वार्ता नहीं करेगा। उसने अमेरिका से बातचीत के बारे में कुछ नहीं कहा है।
उत्तर कोरिया के साथ वार्ता शुरू होने के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लगातार संपर्क में बनाए हुए हैं। उन्होंने दोनों देशों की वार्ता शुरू होने का बड़ा श्रेय ट्रंप को दिया है। कहा है कि ट्रंप ने आश्वासन दिया है कि दक्षिण और उत्तर कोरिया की बातचीत आगे बढ़ती है तो अमेरिका क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की संभावना टाले रहेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने भी व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा, कौन जाने भविष्य में क्या हो जाए? बताया कि राष्ट्रपति मून ने उन्हें उत्तर कोरिया के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी है। आशा है कि यह सफलता की ओर बढ़ेगी। यह सफलता केवल हमारे लिए नहीं होगी बल्कि पूरी दुनिया के लिए होगी। देखना होगा आने वाले हफ्तों और महीनों में इसमें क्या प्रगति होती है।
ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को उत्तर कोरिया को लेकर समस्या है। लेकिन हाल के दिनों में सही दिशा में कई बातें हुई हैं। रचनात्मक ऊर्जा पैदा हुई है। इससे भविष्य को लेकर आशा पैदा हुई है। शांति की संभावना को ताकत मिली है।
उत्तर कोरिया ने कहा है कि वह फरवरी में दक्षिण कोरिया में होने वाले विंटर ओलंपिक में भाग लेगा। दक्षिण कोरिया के साथ हर तरह का विवाद बातचीत से निपटाना चाहता है। लेकिन परमाणु हथियारों के मसले पर वह कोई वार्ता नहीं करेगा। उसका वह मसला अमेरिका के साथ है।

भारत के लिए बड़ी खुशखबरी 21 साल की आंचल ठाकुर ने स्कीइंग में पहला अंतरर्राष्ट्रीय मेडल जीतकर नया इतिहास रच

फरवरी में दक्षिण कोरिया में होने वाले विंटर ओलिंपिक्स से पहले भारत के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। मनाली की 21 साल की आंचल ठाकुर ने स्कीइंग में पहला अंतरर्राष्ट्रीय मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया।
आंचल की इस कामयाबी पर देश के खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने भी तारीफ की है।
आंचल अंतरर्राष्ट्रीय स्कीइंग चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय हैं। आंचल ने तुर्की के अरजुरुम में हुई अल्पाइन एडर स्कीइंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर ये इतिहास रचा। मेडल जीतने के बाद आंचल ठाकुर ने ट्विटर पर अपनी खुशी का इजहार किया। आंचल ने ट्वीट करते हुए कहा कि- ये वाकई अप्रत्याशित है। मेरा पहला अंतरर्राष्ट्रीय मेडल, जोकि मैंने फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्की रेस में जीता।’
इस जीत के बाद एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में आंचल ठाकुर ने कहा कि आखिरकार कड़ी मेहनत रंग लाई। आंचल ने कहा कि-’ इस चैंपियनशिप के लिए मैंने कड़ी मेहनत की थी। अपनी रेस के दौरान भी मैंने अच्छी शुरुआत की, इसी का नतीजा रहा कि मैं तीसरा स्थान हासिल करने में कामयाब रही।’
आंचल के पिता रोशन ठाकुर भी इस खेल से जुड़े हैं। वो विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल हैं। ऐसे में बेटी को मिली कामयाबी पर पिता भी खुश हैं। उन्होंने कहा कि इस मेडल से देश में इस खेल के हालात बदलेंगे।

करीब 16 साल से फरार एक आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

साल 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार मामले में करीब 16 साल से फरार एक आरोपी को पुलिस ने अहमदाबाद में गिरफ्तार कर लिया। फरार आरोपियों में शामिल आशीष पांडे को अपराध शाखा के अधिकारियों ने बुधवार को शहर के असलाली इलाके से गिरफ्तार किया। पांडे को गुरुवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
आपको बता दें कि अहमदाबाद में एक भीड़ ने 28 फरवरी 2002 को मुस्लिम बहुल कालोनी गुलबर्ग सोसाइटी पर हमला किया था। इसी हमले में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे। यह घटना गोधरा बाद के दंगों के दौरान हुई सबसे भीषण हिंसा में से एक थी।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना के बाद 2002 में दर्ज की गई प्राथमिकी में नामजद किए जाने के बाद से पांडे फरार था। वह अपने परिवार के साथ नरोदा इलाके में रहता था लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग गया। इसके बाद हरिद्वार और वापी सहित कई शहरों में वह रहा। वह परिवहन के धंधे से भी जुड़ा रहा।
पुलिस को पांडे के अपने काम के सिलसिले में शहर में होने की गुप्त सूचना मिली थी। उसे विशेष जांच टीम (एसआइटी) को सौंप दिया गया है। एसआइटी इस मामले की जांच कर रही है।
एक विशेष अदालत ने गुलबर्ग मामले में जून 2016 में 24 लोगों को दोषी ठहराया था और उनमें से 11 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। 36 अन्य को बरी कर दिया था। पांडे की गिरफ्तारी के बाद अब भी चार और आरोपी फरार हैं।