बसपा प्रमुख मायावती ने दिया राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा

बसपा प्रमुख मायावती ने तल्ख अंदाज दिखाते हुए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनकी शिकायत है कि वे दलितों की आवाज संसद में रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सत्ता पक्ष बोलने नहीं दे रहा। बहरहाल, यह पहला मौका नहीं है जब माया ने दलितों के मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया है। देखा जाए तो उनके करियर की शुरुआत की ऐसे तेवरों से हुई थीं। हम यहां आपको ऐसे ही एक घटनाक्रम के बारे में बताएंगे जहां मायावती ने तब के दिग्गज नेताओं की धज्जियांं इसलिए उड़ा दी थीं कि दलितों के लिए हरिजन शब्द का इस्तेमाल किया गया था।
बात सितंबर 1977 की है। तब मायावती 21 साल थीं। आपातकाल खत्म हो चुका था और उसके बाद हुए चुनावों में जनता पार्टी की सरकार बनी थी। दलितों के हक में आवाज उठाने के लिए इस सरकार ने दिल्ली में तीन दिनी कॉन्फ्रेंस बुलाई थी।
मंच पर सरकार के तमाम दलित नेता बैठे थे और उनसे सामने थे देशभर से आए दलित प्रतिनिधि। इस आयोजन के हीरो थे राजनारायण। राजनारायण वह शख्स हैं, जिन्होंने 1971 में इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ा था और हार गए थे। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और इंदिरा गांधी का निर्वाचन रद्द हो गया था। फिर 1977 में हुए चुनाव में राजनारायण ने इंदिरा को 50,000 से ज्यादा वोटों से हराया था।

गोवा में इसकी कमी नहीं होने देंगे बीफ को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा

बीफ को लेकर भले ही देश में बवाल मचा हो लेकिन गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि वो गोवा में इसकी कमी नहीं होने देंगे। उन्होंने इसके लिए उनकी सरकार ने कर्नाटक से इसे आयात करने का विकल्प खुला रखा है।
पर्रिकर ने मंगलवार को राज्य विधानसभा को यह जानकारी दी। विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन पर्रिकर ने एक प्रश्न के जवाब में कहा, ‘हमने (कर्नाटक में) बेलगाम से बीफ आयात करने का विकल्प बंद नहीं किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां कोई कमी नहीं हो।’
उन्होंने यह जवाब भाजपा विधायक नीलेश कबराल के सवाल पर दिया। पर्रिकर ने कहा, ‘मैं आपको भरोसा दे सकता हूं कि पड़ोसी राज्य से आने वाले बीफ की जांच उचित तरीके से और अधिकृत चिकित्सक द्वारा की जाएगी।
यही नहीं यहां से करीब 40 किमी दूर पोंडा स्थित गोवा मीट कांप्लेक्स में सूबे के एकमात्र वैध बूचड़खाने में रोजाना लगभग 2,000 किलोग्राम बीफ तैयार होता है।’
इस बीच, कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने पूर्व रक्षा मंत्री के इस बयान पर उनकी चुटकी ली है। उन्होंने कहा, ‘गोवा के भाजपा सीएम कह रहे हैं कि वह राज्य में बीफ की कमी नहीं होने देंगे। यह अत्यधिक हास्यास्पद है।’

मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से पटवारियों को उनके मोबाइल पर ही ग्राम के समस्त भूमि स्वामियों के सभी खसरों की जानकारी

किसानों के हित के लिये इस वर्ष से फसल गिरदावरी संबंधी जानकारी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से संग्रहीत की जायेगी। इस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से पटवारियों को उनके मोबाइल पर ही ग्राम के समस्त भूमि स्वामियों के सभी खसरों की जानकारी प्राप्त हो जायेगी। लगायी गयी फसल की जानकारी ग्राम से ही भरी जा सकेगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने समन्वय भवन में मोबाइल एप का शुभारंभ किया।
श्री चौहान ने कहा कि राजस्व अमले की कमी पूरी करने के लिये जल्दी ही 10 हजार पटवारियों, 550 तहसीलदारों और 940 नायब तहसीलदारों की भर्ती की जायेगी। भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दे दिये गये हैं। उन्होंने राजस्व विभाग प्रमुख को पटवारियों की विभागीय पदोन्नति के संबंध में भी विचार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन को प्रभावी बनाने के लिये युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने पटवारियों को सूचना प्रोद्योगिकी का उपयोग करने के लिये टेब खरीदने के लिये उनके खाते में आवश्यक राशि देने की घोषणा की। श्री चौहान ने कहा कि सरकार पूरी तरह से लोगों के प्रति जवाबदेह है। उन्होंने कहा कि बोनी के समय के आँकडों का शुद्ध रेकार्ड उपलब्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने के लिये हर संभव कदम उठाये जा रहे हैं। किसानों को समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर के आधार पर आदर्श दर से भुगतान करने का नवाचारी प्रयोग भी किया जायेगा।
मोबाइल एप से होने वाले लाभों की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि राजस्व विभाग का यह क्रांतिकारी कदम भविष्य में बदलाव लायेगा। पारंपरिक बस्ते से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने एप संचालन के लिये एनआईसी का उपयोग करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि लोगों को राजस्व विभाग और इसके अमले से बहुत अपेक्षाएँ हैं।
फसल गिरदावरी प्रतिवर्ष की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह वर्ष में दो बार खरीफ और रबी सीजन की बुवाई के बाद की जाती है। इसे भू-अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। यह कृषि सांख्यिकी एकत्रित करने की प्रक्रिया है। इसके आधार पर फसलों के क्षेत्रफल एवं उत्पादन संबंधी अनुमान की जानकारी तैयार की जाती है।
कृषि वर्ष 1 जुलाई से प्रारंभ होकर 30 जून को समाप्त होता है। प्रथम खरीफ की फसलों तथा द्वितीय रबी की फसलों के आधार पर चालू वर्ष के खसरे में बोए गए क्षेत्रफल की फसल गिरदावरी के आधार पर दर्ज की जाती है। गिरदावरी जितनी सही और समय पर होगी, कृषि सांख्यिकी पूरी तरह से विश्वसनीय रहेगी।
फसल गिरदावरी के आधार पर ही खरीफ और रबी फसलों के बोए गए रकबे के आँकड़े प्राप्त होते हैं। उस आधार पर प्रमुख फसलों के उत्पादन व उत्पादकता अनुमान तथा राज्य एवं देश की कृषि दर निर्धारित की जाती है।
फसल गिरदावरी कार्य से ही फसल पूर्वानुमान लगाया जाता है, जिससे फसल गिरदावरी को राजस्व खसरे के रकबे के आधार पर सांख्यिकी कार्य के लिये जानकारी शासन को प्रेषित की जाती है। यह जानकारी कई मामलों जैसे फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई, बैंक ऋण, योजनाओं के लाभ लेने आदि में महत्वपूर्ण होती है।
इस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से पटवारियों को उनके मोबाइल पर ही ग्राम के समस्त भूमि स्वामियों के सभी खसरों की जानकारी प्राप्त हो जायेगी। जैसे ही भरी गयी जानकारी अपलोड की जायेगी, कृषक को उससे संबंधित खसरों में फसल गिरदावरी के अंतर्गत कौन सी जानकारी दर्ज की गयी है, यह सूचना एस.एम.एस. के माध्यम से भेजी जायेगी। इसमें एक पासकोड भी होगा।
यदि कृषक, पटवारी द्वारा भरी गयी जानकारी से सहमत है, तो वह पासकोड पटवारी को बतायेगा। जब पटवारी द्वारा यह पासकोड एप्लीकेशन में डाला जायेगा तभी जानकारी को अंतिम माना जायेगा।
यदि किसी कृषक के पास कोई मोबाइल नंबर नहीं है तो वह अपने पड़ोसी का नंबर भी एस.एम.एस. प्राप्त करने में उपयोग कर सकेगा। फसल की जानकारी के साथ ही अन्य पड़त भूमि, भूमि में लगे वृक्ष, मकान आदि की जानकारी भी एप्लीकेशन के माध्यम से दर्ज की जा सकेगी।
प्रमुख सचिव राजस्व श्री अरूण पांडे ने मोबाइल एप के बारे में जानकरी दी। इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीणा, प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री अजीत केसरी उपस्थित थे। आयुक्त भू-अभिलेख श्री एन. के. अग्रवाल ने आभार माना।

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के उपाय किये जायेंगे

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के उपाय किये जायेंगे। तात्कालिक उपाय में किसानों को राहत पहुँचाने का काम जारी रहेगा। दीर्घकालिक उपाय में भण्डारण क्षमता बढ़ाई जायेगी, अधिकतम प्रोसेसिंग इकाईयाँ लगायी जायेंगी, मूल्य संवर्धन किया जायेगा और ग्लोबल मार्केट का लाभ लिया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ मंत्रालय में एग्रीकल्चर टास्क फोर्स की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में कृषि विशेषज्ञों के साथ किसानों को अधिक उत्पादन के बाद भी उचित मूल्य नहीं मिलने की चुनौती पर विचार विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कृषि उत्पादन वृद्धि में कीर्तिमान बना है। पर इसके साथ किसानों की उपज का मूल्य गिरने की समस्या सामने आई है। इसके समाधान की आदर्श व्यवस्था की जायेगी। इसके अंतर्गत ऐसी नीति बनाई जायेगी जिसमें कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और प्रोसेसिंग की व्यवस्था रहेगी। इसमें प्रोसेसिंग इकाईयों और भण्डारण क्षमता के लिये अधोसंरचना बनाने के लिये किसानों के युवा बच्चों को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रदेश में प्याज, आलू, फल-सब्जियों के लिये कोल्ड स्टोरेज श्रंखला बनायी जायेगी। इसके साथ ही मार्केटिंग पर ध्यान दिया जायेगा। प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों जैसे मालवा के आलू, शरबती गेहूँ, नर्मदा किनारे के क्षेत्र में उत्पादित होने वाली तुअर दाल, नीमच के जीरन में पैदा होने वाली एक कली की लहसुन की मार्केटिंग की जायेगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पिछले पाँच सालों में खाद्यान्न का उत्पादन दोगुना हो गया है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ा है। बीज प्रतिस्थापन की दर 30 प्रतिशत हो गयी है। खाद के अग्रिम भण्डारण की व्यवस्था की गई है। मिट्टी परीक्षण में प्रदेश देश में अग्रणी है। उत्पादन बढ़ाने के सभी पक्षों पर तेजी से काम किया गया है जिससे उत्पादन बढ़ा है। उत्पादन बढ़ने के बाद भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने की समस्या सामने आई है। इसके लिये तात्कालिक रूप से प्याज आठ रूपये प्रति किलो तथा तुअर, उड़द, मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई है। इसके बाद भी समस्या के समाधान के लिये दीर्घकालिक उपाय आवश्यक है।
बैठक में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों और मंत्रियों ने किसानों को उपज का उचित मिले, इसके लिये सुझाव दिये।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अशोक गुलाटी – कृषि उत्पादों के लिये भण्डारण क्षमता 5 से 10 गुना बढ़ायी जाये। इसके लिये निवेश किया जाये। कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के लिये डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से लिंकेज किया जाये। गुजरात में दुग्ध उत्पादन के लिये चलाये गये ऑपरेशन फ्लड की तरह मध्यप्रदेश में सब्जी उत्पादन के लिये ऑपरेशन वेजीस चलाया जाये।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. पंजाब सिंह – मध्यप्रदेश की समस्या को चुनौती के रूप में लें। फूड प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन में निवेश के माध्मय से ग्रामीण युवाओं को रोजगार दें। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ उसकी सुरक्षा के उपायों पर ध्यान दें।
कृषि क्षेत्र के इंटरप्रेन्योर श्री प्रशांत अग्रवाल – भण्डारण और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में युवाओं के प्रशिक्षण पर ध्यान दें। प्रशिक्षण की व्यवस्था जिला स्तर पर हो। ग्राम स्तर पर सब्जी मंडियों में कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था हो।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह – कृषि यंत्रों के कस्टम हायरिंग के तरह भण्डारण और प्रोसेसिंग में भी व्यवस्था की जाये। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि उत्पादों के प्रोसेसिंग और भण्डारण के लिये अधोसरंचना विकसित की जाये।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. आर.के. पाटिल – गाँव – गाँव में प्रोसेसिंग की छोटी इकाईयाँ स्थापित की जायें। प्रोसेस्ड फूड के लिये उत्पाद तैयार किये जायें।
वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया – किसानों के लिये समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाये। भण्डारण क्षमता बढ़ाई जाये।
कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन – क्वालिटी फूड पर ध्यान देना चाहिये। जैविक उत्पादों के लिये बेहतर अवसर हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव – भण्डारण क्षमता के लिये राष्ट्रीय संस्थान व्यवस्था करे। किसान कृषि उत्पादों के मूल्यों के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं हों, ऐसी व्यवस्था की जाये।
वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार – प्याज और टमाटर जैसे उत्पादों की प्रोसेसिंग इकाई जिलों में स्थापित हो।
ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन – वैश्विक बाजार में निर्यात किये जाने योग्य उत्पाद तैयार करने के संयंत्र स्थापित किये जायें।
सहकारिता राज्यमंत्री श्री विश्वास सारंग – सहकारिता के क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग इकाईयाँ लगायी जायें। भण्डारण के लिये मल्टीयूटीलिटी गोदाम बनाये जायें।
बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्री ओमप्रकाश धुर्वे, नर्मदा घाटी विकास राज्यमंत्री श्री लाल सिंह आर्य, पर्यटन राज्यमंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, उद्यानिकी राज्यमंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा, मुख्य सचिव श्री बी.पी.सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता अजय शिवहरे द्वारा आत्महत्या कुछ समय से आर्थिक कारणों को लेकर भारी तनाव में थे

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता अजय शिवहरे द्वारा मंगलवार को मुलताई में घर के बैडरूम में पंखे से दुप्पटा बांधकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई। जिस समय उन्होंने आत्महत्या की उस समय घर पर कोई नहीं था, उनके बच्चे स्कूल गए थे और पत्नी सब्जी लेने के लिए बाजार गई हुई थी। जब वह बाजार से वापस आई तो घर के मुख्य द्वार पर ताला लगा था, जिससे किसी को पता नहीं चला कि बैडरूम में क्या हुआ है।
जब बच्ची बैडरूम में स्कूल बैग रखने गई तो अजय शिवहरे को पंखे पर लटका देख हल्ला मचाया। जिसके बाद पुलिस बुलाई गई और उनके शव को पंखे से नीचे उतारा गया। उनके बैडरूम या उनके पास से कोई भी सोसाईड नोट बरामद नहीं हुआ है। आत्महत्या के कारणों का अभी तक कोई खुलासा नहीं हो पाया है, नजदीकी सूत्रों के अनुसार वह कुछ समय से आर्थिक कारणों को लेकर भारी तनाव में थे, फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मुलताई में बैतूल रोड अंबेडकर वार्ड में परिवार के साथ अजय शिवहरे रह रहे थे। वे कुछ दिनों से कर्ज को लेकर परेशान थे, जिसके कारण उन्होने मंगलवार शाम लगभग 4.30 बजे अपने बेडरूम में फांसी लगा ली। अजय शिवहरे के निधन की खबर सुनते ही उनके घर पर भीड लग गई तथा पुलिस ने भी पहुंचकर उनके फांसी पर झूलते शव को नीचे उतारा गया जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।
उनकी पत्नी सुनीता शिवहरे ने बताया कि वे कर्ज को लेकर कुछ समय से परेशान चल रहे थे,लेकिन वे एैसा आत्मघाती कदम उठाएगें, एैसा बिलकुल नही लग रहा था। वे अपने पीछे पत्नी सहित एक पुत्र तथा दो पुत्रियॉ छोड गए हैं। उनके निधन की खबर मिलते ही नगर कांग्रेस में शोक का माहौल है।
अजय शिवहरे द्वारा फांसी लगाने से पूर्व फैसबुक आईडी से अपना कवर फोटो बदल दिया गया था, बदले गए कवर फोटो में उन्होंने लिखा कि निभाओ किरदार इस तरह से कि परदा गिरे पर तालियां बजती रही। कवर फोटो के स्लोगन से यह साफ है कि वह भारी तनाव में थे और आत्महत्या का मन बना चुके है। सीधे, सरल स्वभाव के धनी अजय शिवहरे ने कम समय में ही मुलताई में गहरी पैठ बना ली थी, ऐसे में किसी भी विश्वास नहीं हो पा रहा है, उनके द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई।

दुनिया की नंबर वन महिला क्रिकेटर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रही सेमीफाइनल में प्रवेश कर चुकी कप्तान मिताली राज

इंग्लैंड में खेले जा रहे महिला विश्व कप क्रिकेट में भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन कर रही है। कप्तान मिताली राज की टीम सेमीफाइनल में प्रवेश कर चुकी है। खिलाड़ी के रूप में भी मिताली ने उम्दा प्रदर्शन किया है और वे दुनिया की नंबर वन महिला क्रिकेटर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रही हैं।
आईसीसी वनडे रैंकिंग में मिताली फिलहाल नंबर दो पर हैं। पहले पायदान पर ऑस्ट्रेलिया की कप्तान मेग लैनिंग हैं। इस विश्व कप में मिताली सात मैचों में 356 रन बना चुकी हैं और नंबर वन की लड़ाई में उनके और मेग के बीच का फासला तेजी से कम हो रहा है।
774 अंकों के साथ मिताली फिलहाल नंबर दो पर हैं और मेग से महज पांच अंक पीछे हैं। बहरहाल, आईसीसी की टॉप-10 रैंकिंग में मिताली एक मात्र भारतीय खिलाड़ी हैं।
मिताली ने बनाए हैं सबसे ज्यादा रन
356 रनों के साथ मिताली इस विश्व कप में अब तक सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने 109 रनों की शतकीय पारी खेली है। इससे पहले मिताली वनडे में 6000 रन पूरे करने वाली दुनिया की पहली महिला खिलाड़ी बन चुकी हैं।
महिला गेंदबाजों की रैंकिंग में झूलन गोस्वामी छठे नंबर पर हैं। वहीं एकता बिष्ट सातवीं रैंकिंग पर चली गई हैं। विश्व कप के दौरान दोनों खिलाड़ियों की रैंकिंग गिरी है।
वहीं टीम रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया लगातार नंबर बन बनी हुई है। न्यूजीलैंड दूसरे और भारतीय टीम चौथे नंबर पर है।

उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में अर्धसैनिक बल के जवानों को ले जा रहे वाहन पर आत्मघाती हमले में एक मेजर समेत दो लोग मारे गए

उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में अर्धसैनिक बल के जवानों को ले जा रहे वाहन पर आत्मघाती हमले में एक मेजर समेत दो लोग मारे गए हैं और दस जवान घायल हुए हैं।
अर्धसैनिक बल का काफिला पेशावर के हयाताबाद इलाके से गुजर रहा था तभी मोटरसाइकिल सवार आत्मघाती हमलावर ने एक वाहन में टक्कर मारी। विस्फोटक लदी इस मोटरसाइकिल के टकराते ही जोरदार धमाका हुआ और दो वाहनों में आग लग गई।
मौके पर पहुंचे एसएसपी (ऑपरेशन) सज्जाद खान ने बताया है कि घटना में एक मेजर समेत और एक जवान की मौके पर ही मौत हो गई। दस घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर है। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरु किया। आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने घटना की जिम्मेदारी ली है। यह उसके प्रभाव वाला इलाका है।
संगठन के प्रवक्ता खुरासानी ने कहा है कि मारे गए मेजर जमाल शेरन उसकी हिट लिस्ट में थे। उन्हीं को निशाना बनाकर हमला किया गया। पाकिस्तानी सेना ने रविवार को ही खैबर आदिवासी इलाके में इस्लामिक स्टेट (आइएस) आतंकियों के खिलाफ अभियान छेड़ने की घोषणा की है।

सांसद वैंकेया नायडू को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार चुना

एनडीए ने केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद वैंकेया नायडू को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार चुना है। नायडू कभी लोकसभा सदस्य नहीं रहे लेकिन उन्होंने अपनी संगठन क्षमता का लोहा मनवाया है। उनके आरएसए और फिर भाजपा ने आने की कहानी बेहद रोचक है।
70 के दशक में जब दक्षिण में जनसंघ का नाममात्र का वजूद था, एक युवा पार्टी कार्यकर्ता अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी के पोस्टर दीवारों पर चिपकाया करता था। वह युवा कार्यकर्ता ही आज राजग की तरफ से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किया गया है। वैसे मुप्पावरापु वेंकैया नायडू गारु का राजनीति में आना खेल-खेल में शुरू हुआ था।
छात्र जीवन में 1963 में वह पहली बार आरएसएस से कबड्डी के प्रति लगाव के चलते जुड़े थे। धीरे-धीरे यह बढ़ता गया। वहीं रहते 1967 में पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी से मिले। उस वक्त वाजपेयी एक कार्यक्रम में आए थे और उद्घोषणा की जिम्मेदारी वेंकैया को मिली थी। युवावस्था में आए तो जेपी आंदोलन ने लुभाया। बहरहाल उसके बाद से वह राजनीति के रथ पर सवार हो गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात 1993 में तब हुई थी, जब दोनों पार्टी महासचिव थे। मोदी गुजरात में थे और वेंकैया केंद्र में। वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के बाद पार्टी में सबसे वरिष्ठ वेंकैया खुद को आडवाणी का शिष्य करार देते हैं।
यूं आए राष्ट्रीय राजनीति में
आंध्र प्रदेश के नैल्लोर जिले में उदयगिरी विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जाने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रवेश हुआ। वह खुद इसका इजहार करते रहे हैं कि आडवाणी के अध्यक्षीय काल में उन्हें महासचिव पद की जिम्मेदारी दी गई थी।
संगठन की कला उन्होंने आडवाणी से ही सीखी। यह राजनीति का खेल है कि जिस रामनाथ कोविंद को वेंकैया ने दलित मोर्चे का अध्यक्ष बनाया था, अब वह उनके ऊपर राष्ट्रपति पद पर आसीन होंगे।
जनसंघ में आए तो डराया था
68 वर्षीय वेंकैया ने जब पहली बार जनसंघ में प्रवेश के बारे में सोचा था तो उन्हें डराया गया था। कहा गया वहां गए तो मांस-मछली बंद करना होगा। मुखर वेंकैया ने तत्काल पता लगाया। जब स्पष्ट हो गया कि जनसंघ में आहार पर पाबंदी नहीं तो वह आश्वस्त हुए।
इसी साल मई में पत्रकारों के सवाल पर वेंकैया ने खुद को राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर बताया था। उन्होंने कहा था, “न मैं राष्ट्रपति बनना चाहता हूं, न उपराष्ट्रपति…। मैं “उषापति” बनकर ही खुश हूं…।” मालूम हो, उनकी पत्नी का नाम एम. उषा है। इनके एक बेटा और एक बेटी है।

किसान का हक कोई न मार ले: राजौरा

बाजार में मूंग,उड़द और अरहर की कीमतों मे भारी गिरावट के बाद सरकार ने समर्थन मूल्य पर इन्हें खरीदने का फैसला किया और देखते ही देखते 13 सौ करोड़ की खरीदी हो गई। इतनी ज्यादा खरीदी पर अब सरकार को शक है कि इसमें गड़बड़झाला हुआ है।
नरसिंहपुर, रायसेन, विदिशा, हरदा, होशंगाबाद सहित कुछ अन्य जिलों में खरीदी की मात्रा अप्रत्याशित होने से अधिकारियों को ये लग रहा है कि व्यापारियों ने किसानों के नाम पर अपना पुराना स्टॉक ठिकाने लगा दिया है।
यही वजह है कि सरकार ने खरीदी की पूरी जांच करने के निर्देश कलेक्टरों को दिए हैं। सरकार ने दलहन फसलें बाजार दर से लगभग दो हजार रुपए क्विंटल ज्यादा में खरीदी है। प्रदेश में गर्मी की मूंग, अरहर और उड़द की बंपर पैदावार और बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने के कारण सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदने का फैसला किया था।
अब तक 5 हजार 225 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 1 लाख 65 हजार टन मूूंग, 5 हजार 50 रुपए क्विंटल में 85 हजार 260 टन अरहर और पांच हजार रुपए क्विंटल में 16 हजार 358 टन उड़द खरीदी कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार को आशंका है कि कुछ जिलों में सरकारी खरीदी का फायदा उठाकर गड़बड़ियां की गई हैं। इसमें व्यापारियों ने अपने स्टॉक को किसान के नाम से ठिकाने लगा दिया। गाडरवाड़ा में ऐसे दो व्यापारी पकड़े भी जा चुके हैं।
इसके मद्देनजर कृषि विभाग ने कलेक्टरों को ये निर्देश दिए हैं कि वे जिन किसानों से खरीदी की गई है, उनके दस्तावेज की जांच करा लें। मात्रा बहुत ज्यादा होने पर पटवारी से किसानों के खेतों का निरीक्षण कराया जाए। बैंक खातों में हुए भुगतान की पुष्टि भी कराई जाए कि वे खाते उन्हीं के हैं या नहीं। इन खातों से व्यापारियों के खाते में तो राशि ट्रांसफर नहीं की गई।
इन सभी बिन्दुओं पर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में 1 लाख 20 हजार हेक्टेयर में गर्मी की मूंग बोई गई थी। किसान बड़ी मात्रा में मूंग बेच भी चुके थे लेकिन बाजार में कीमत कम होने की वजह से न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा था। इसके मद्देनजर समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में गर्मी की मूंग का रकबा सवा दो लाख हेक्टेयर के आसपास है। पिछले साल 3 लाख टन मूंग पैदा हुई थी। इस बार बंपर फसल आई है और बाजार में कीमत नहीं मिलने के कारण किसानों ने सरकार को इसे बेच दिया। संभावना इस बात की है कि जिन किसानों ने अपनी उपज औने-पौने दाम में व्यापारियों को बेच दी थी, उन्होंने अपना स्टॉक किसानों के माध्यम से बिकवा दिया हो।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ.राजेश राजौरा ने बताया कि सरकार ने खरीदी किसानों के हितों को देखते हुए की है। अरहर को छोड़कर मूंग और उड़द की खरीदी अभी चल रही है। किसान का हक कोई और न मार ले, इसके लिए ऐहतियातन कलेक्टरों को पड़ताल करने के लिए कहा।

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा करेंगे सुबूतों की समीक्षा

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा अब सुबूतों की समीक्षा करेंगे। भारतीय नौसेना में अधिकारी रहे जाधव को जासूसी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोप में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई है।
सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि जाधव की अपील पर गुणवत्ता के आधार पर फैसला किया जाएगा। जाधव ने जून में जनरल बाजवा के समक्ष दया याचिका दाखिल की है।
पाकिस्तानी सेना की तरफ से जारी बयान के अनुसार अपीलीय अदालत में दया की अर्जी खारिज होने के बाद जाधव ने सेना प्रमुख के समक्ष दया याचिका रखी थी। जाधव की नई याचिका पर रविवार को सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा, जनरल बाजवा जाधव के खिलाफ मिले सुबूतों की समीक्षा कर रहे हैं।
सेना प्रमुख जाधव की दया की अर्जी पर गुणवत्ता के आधार पर फैसला करेंगे। पाकिस्तान के दावे के अनुसार जाधव को बलूचिस्तान से मार्च में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अप्रैल में सैन्य अदालत में मुकदमा चलाकर उन्हें मौत की सजा देने का फैसला हुआ।
भारतीय एजेंसियों के अनुसार जाधव को ईरान से तालिबान ने अगवा किया और इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी एजेंसियों को सौंप दिया। जाधव ईरान में कारोबार के सिलसिले में गए हुए थे। भारत इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लेकर गया है, जहां जाधव की फांसी की सजा को स्थगित कर दिया गया है।