ट्रंप की सरकार बनने और उनके आदेशों के बाद विदेशी आवेदकों की संख्‍या में जबरदस्‍त गिरावट

अमेरिका में डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार बनने और उनके द्वारा दिए गए आदेशों के बाद वहां के विभिन्‍न विश्वविद्यालयों में पढ़ने की इच्‍छा रखने वाले विदेशी आवेदकों की संख्‍या में जबरदस्‍त गिरावट देखने को मिली है। देश के दस सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में इसका सीधा असर देखने को मिला है। यहां 27,000 छात्रों में सिर्फ 1900 अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं।
अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ कलिजिएट रजिस्ट्रार्स के मुताबिक, विभिन्न कॉलेजों में विदेशी छात्रों द्वारा किए जाने वाले आवेदन में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। सबसे कम आवेदन इस बार पश्चिम एशिया के स्टूडेंट्स की तरफ से मिला है। अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप द्वारा ट्रेवल बैन की घोषणा के बाद यहां पर आने वाले छात्रों के मन में चिंता के भाव आने लग गए हैं। यही वजह है कि छात्र इस बार यहां पर आकर पढ़ाई करने से कतरा रहे हैं।
एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक पिछले दिनों ट्रंप के आदेशों को लेकर हवाई के जज ने भी साफतौर पर कहा था कि इन प्रतिबंधों का असर देश के यूनिवर्सिटी सिस्टम पर भी देखने को मिलेगा और देश को आर्थिक हानि झेलनी पड़ेगी। ग्रेजुएशन के लिए यहां आने वाले छात्रों की संख्‍या में ट्रंप के आदेश के बाद करीब 50 फीसद तक गिरावट दर्ज की गई है। इससे उन विषयों को लेकर चिंता बढ़ गई है जो सिर्फ अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाए जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका की अर्थव्यवस्था में हर साल 32 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। गत दशक में अंतरराष्ट्रीय छातोरं की आवक देश में बढ़ी थी और पिछले साल ही यह आंकड़ा एक 10 लाख को पार कर गया था।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया और नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी का कहना है कि उनके यहां विदेशी छात्रों की संख्या ज्यादा रही है। इधर, पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष विम विवेल ने कहा कि पिछले सप्ताह हैदराबाद के 10 संभावित स्टूडेंट्स से उन्होंने मुलाकात की, लेकिन काउंसलिंग सेशन के दौरान अमेरिका में रहने को लेकर उनके अंदर डर दिखाई दिया। एक मुस्लिम छात्र ने कहा कि उसके पिता अमेरिका और इसके मुस्लिम विरोधी रवैये को लेकर डरे हुए हैं।
ओहायो यूनिवर्सिटी में आवेदकों की संख्या में 8.4 फीसदी की गिरावट आई है। आवेदकों में चीनी छात्रों की संख्या सबसे कम पाई गई है जो कि ट्रंप इफेक्ट को समर्थन नहीं देते। वहीं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की फ्रांसिस लेसली की चिंता अब यह है कि आवेदकों में से कितने स्टूडेंट वास्तव में ऐडमिशन लेंगे, क्योंकि कई यूनिवर्सिटी की डेडलाइन तब खत्म हुई थी जब ट्रंप का ट्रैवल बैन ऑर्डर नहीं आया था।
ओरेगन यूनिवर्सिटी में इस साल बेहद कम अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स ने आवेदन दिया है। विवेल हालांकि, यह भी कहते हैं कि नई दिल्ली और बेंगलुरु के स्टूडेंट्स की चिंता पढ़ाई में आने वाला खर्च है जो कि नोटबंदी का सीधा असर है। वहीं, काउंसल ऑफ ग्रैजुएट स्कूल की अध्यक्ष सुसेन ओर्टेगा कहती हैं कि इसके लिए अन्य आर्थिक वजह जैसे सऊदी अरब में कच्चे तेलों की कीमत का कम होना और एच-1बी वीजा को लेकर अमेरिकी अनिश्चितता भी है

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा बहुमत नहीं बल्कि सर्वमत चाहिए

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश की सरकारों के बारे में कहा कि राज करने के लिए बहुमत नहीं बल्कि सर्वमत चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र कर कहा, ‘मैंने कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है। उनसे कई चीजें सीखीं हैं। वर्तमान प्रधानमंत्री के काम करने का अपना तरीका है। मैं उनकी कड़ी मेहनत की सराहना करता हूं।’
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में शुक्रवार को कहा कि वह अकेले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिनकी काम करने की शैली पूरी तरह अलग थी। वाजपेयी साथ काम करने वालों की कद्र करना जानते थे।
मुखर्जी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मंत्रियों को काम करने की छूट दी थी। मुखर्जी ने देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी जिंदगी पर सबसे बड़ा प्रभाव पंडित जवाहरलाल नेहरू का था। पंडित नेहरू ने संसद को जीवंत बनाया। उन्होंने व्यक्ति पूजा को हतोत्साहित किया।
राष्ट्रपति ने सरदार पटेल के बारे में कहा, ‘उन्होंने देश को जोड़ने का काम किया।’ उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र कर कहा, ‘इंदिरा गांधी एक बहुत मजबूत नेता और सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री थीं। उनकी राजनीति का चरम बांग्लादेश की आजादी था।’
यूपीए सरकार में रक्षा मंत्री का पद छोड़कर देश के 13वें राष्ट्रपति बने प्रणब ने कहा कि वह संसद में दो साल और काम करना चाहते थे। लेकिन संवैधानिक दायित्व ने ऐसा नहीं होने दिया। एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा,’कई जिम्मेदारियां थीं जिन्हें मैं पूरा करना चाहता था।’
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो रहा है। मुंबई विश्वविद्यालय में एक कंवोकेशन को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि भारत एक भौगोलिक सत्ता ही नहीं है।
एक विचार और संस्कृति है। विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों इन विचारों के आदान-प्रदान का सर्वश्रेष्ठ जरिया हैं। इसलिए इन शिक्षण संस्थानों में असहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

बेटे की गुमशुदगी पर चिंतित माँ बाप को मिला पर पुत्र नहीं लड़की बन चूका लड़का

अहमदाबाद के एक नामी जौहरी परिवार का तब खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब पुलिस ने उन्हें फोन करके बताया कि उनका लापता बेटा मिल गया है, लेकिन जौहर परिवार की यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं थम सकी, क्योंकि अगले पल पुलिस ने जो जानकारी दी, उससे ज्वेलर का परिवार सकते में आ गया, क्योंकि पुलिस ने उन्हें बताया कि उनके लापता बेटे ने अब सेक्स चेंज करवाकर लड़की का रूप धारण कर लिया है।
गौरतलब है कि अहमदाबाद के माधवपुरा इलाके में एक ख्यात ज्वैलर्स का बेटा श्याम (बदला हुआ नाम) बीते दिनों दुकान से घर आते समय लापता हो गया था। परिवार वालों ने पुलिस में इसकी शिकायत भी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने बताया कि श्याम इसीलिए घर से गायब हो गया था, क्योंकि उसने सेक्स चेंज सर्जरी करवाई थी।
इस खबर को सुनने के बाद से श्याम के माता-पिता और उसकी छोटी बहन अब तक सदमे में हैं। पुलिसवालों ने बताया कि श्याम ने स्नातक करने के बाद पारिवारिक बिजनेस में शामिल होने का मन बनाया। कुछ साल पहले उसे इस बात का अहसास हुआ है कि वह एक आदमी है, जो औरत के शरीर में कैद है।
श्याम ने अपने परिवारवालों को मनाने की बहुत कोशिश की कि वह उसे सेक्स चेंज ऑपरेशन करवाने की इजाजत दें लेकिन परिजनों ने श्याम की बात नहीं मानी। उस दिन के बाद से उसने अपने घर पर यह बात कभी नहीं की।
परिवारवालों को लगा कि अब सबकुछ ठीक हो गया है लेकिन तभी पिछले सप्ताह श्याम लापता हो गया। इस मामले की जांच कर रहे माधवपुरा के एएसआई केएन मनत ने बताया कि परिवारवालों ने श्याम की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। हमने उसके फोन को ट्रेस किया तो नवरंगपुरा में उसकी लोकेशन पता चली। पुलिसवालों ने देखा कि एक निजी अस्पताल के बाहर श्याम की मोटरसाइकल लगी हुई थी।
मनत ने कहा कि श्याम उस अस्पताल में सेक्स चेंज ऑपरेशन करवाने गया था। उसने हमें बयान दिया है कि उसने ये सब कुछ अपनी मर्जी से किया है। हमने परिवारवालों को इस बारे में सूचना दे दी और केस को बंद कर दिया।
लंबे समय से कर रहा था ऑपरेशन की तैयारी
पुलिस के मुताबिक श्याम लंबे समय से इस ऑपरेशन की तैयारी कर रहा था। उसने ऑपरेशन से करीब डेढ़ साल पहले हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी भी ली थी। खबर मिलते ही परिवार वाले तुरंत अस्पताल पहुंचे लेकिन श्याम ने उन लोगों से मिलने से इनकार कर दिया। पुलिसवालों ने भी 25 साल के श्याम को समझाने की कोशिश की कि वह अपने परिवारवालों से बात करे लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा रहा और किसी से मुलाकात नहीं की।

पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक बाबूलाल गौर ने स्र्कवाया झुग्गियों का सर्वे

प्रधानमंत्री का हाउसिंग फॉर ऑल का सपना मध्यप्रदेश में पूरा होता नहीं दिख रहा है। कहीं और तो छोड़िए राज्य सरकार राजधानी में अपनी नाक के नीचे विधानसभा और मंत्रालय के सामने की झुग्गियों का ही सर्वे नहीं करवा पा रही है। राजधानी सहित प्रदेश भर में झुग्गियों का सर्वे कर पक्के मकान देने की लिए डीपीआर तैयार की जा रही है इसमें जनप्रतिनिधी ही आड़े आ रहे हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी शामिल हैं।निगम अफसरों का कहना है कि राजनीतिक दबाव के कारण वह मजबूर हैं।
राजधानी के सबसे संवेदनशील इलाके अरेरा हिल्स में मंत्रालय और विधानसभा के सामने की झुग्गियों के अलावा श्यामला हिल्स और बाणगंगा में भी कुछ झुग्गियों का सर्वे अटका हुआ है। दरअसल पार्षद से लेकर विधायक और मंत्री तक नहीं चाहते कि गरीबों को झुग्गी की जगह प-े मकान मिलें। इसके पीछे वोट बैंक का गणित भी है क्योंकि यदि झुग्गियां हटाकर दूसरे क्षेत्र में मकान बना दिए गए तो उनका वोट बैंक कम हो जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक बाबूलाल गौर ने बकायदा पत्र लिखकर नगर निगम को सर्वे न करने के हिदायत दी है। वार्ड 67 की सतनामी नगर झुग्गी और वार्ड 68 स्थित शांति नगर बस्ती में सर्वे रोकने के निर्देश दिए गए। निगम सूत्रों के अनुसार राजनीतिक दखल के कारण सर्वे का काम रोक दिया गया।
– मंत्रालय के सामने बने भीमनगर का सर्वे ही नहीं हो पाया। यह क्षेत्र राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता हैं। सर्वे न करने को लेकर बीजेपी के नेताओं का दबाव है।
– माता मंदिर से लगे हर्षवर्धन नगर फेज टू में सर्वे का काम चल रहा था,लेकिन बीजेपी नेता राधेश्याम प्रजापति ने यह कहकर सर्वे स्र्कवा दिया कि सक्षम अधिकारी लिखित में दें कि मकान यहीं बनाकर देंगे।
– श्यामला हिल्स बाणगंगा इलाके में कांग्रेसी पार्षद शबिस्ता सुल्तान ने सर्वे करने गई टीम को वापस कर दिया था। फिर यहां सर्वे ही नहीं हो पाया।
यह सही है कि कुछ हमारे और अन्य पार्टियों के जनप्रतिनिधि सर्वे का विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का सपना है कि गरीबों के जीवन स्तर में सुधार हो। इसलिए हाउसिंग फॉर ऑल योजना शुरू की गई। जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर समस्या का निराकरण कराएंगे।
लोगों ने आपत्ति की इसलिए लिखा पत्र
लोग नहीं चाहते थे कि उन्हें वहां से हटाया जाए। इसलिए उन्होंने आपत्ति की थी,इसके बाद हमने पत्र लिखा था। हमने अपनी तरफ से लोगों को समझाया भी है कि वे विरोध न करें ताकि उन्हें पक्के आवास मिल सकें।
बाबूलाल गौर, पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक गोविंदपुरा
सरकार की योजना का यदि कोई विरोध कर रहा है तो इस बारे में जनप्रतिनिधियों से बात की जाएगी और निश्चित ही हल निकाला जाएगा। सरकार का मकसद है जनता को योजनाओं का लाभ मिले।

सानिया मिर्जा को पूर्व जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस से करना पड़ा हार का सामना

भारत की दिग्गज महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को बीएनपी परिबास इंडियन वेल्स हार्डकोर्ट टेनिस टूर्नामेंट के महिला युगल वर्ग क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अपनी पूर्व जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस से हार का सामना करना पड़ा।
इस हार के साथ ही सानिया-बारबरा का सफर इस टूर्नामेंट में समाप्त हो गया है और साथ ही इस प्रतियोगिता में भारतीय चुनौती भी समाप्त हो गई है।
टूर्नामेंट में मंगलवार देर रात खेले गए इस मैच में ताइवान की चान युंग जान और स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिगिस की जोड़ी ने सानिया और उनकी जोड़ीदार चेक गणराज्य की बारबोरा स्ट्रायकोवा को सीधे सेटों में 6-4, 6-4 से मात दी।
सानिया-बारबरा की जोड़ी ने इटली की सारा इरानी और पोलैंड की एलिसिया रोसोल्सका की जोड़ी को 6-2, 6-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया था।

यूएस कोर्ट ने दिया डोनल्ड को तगड़ा झटका

ट्रंप के आदेश के लागू होने के पहले ही रोक लगा दी, यूएस कोर्ट ने
अमेरिका में एक फेडरल यूएस कोर्ट ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड को तगड़ा झटका दिया। कोर्ट ने ट्रंप के उस आदेश के लागू होने के एक दिन पहले ही रोक लगा दी, जिसमें ट्रंप ने रिफ्यूजी और छह मुस्लिम देशों से आने वाले नागरिकों पर अमेरिका में घुसने से बैन लगाने की बात कही थी।
कोर्ट ने इस प्रतिबंध की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ट्रंप का यह आदेश एक धर्म विशेष के अपमान के रूप में देखा जा सकता है। कोर्ट का यह आदेश, राष्ट्रपति ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के लागू होने के एक दिन पहले ही आया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा की वे इस गलत निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। कोर्ट ने अपने सीमाएं लांघ कर यह फैसला सुनाया है, जो ठीक नहीं है। गौरतलब है कि छह मुस्लिम देशों के यात्रियों और शरणार्थियों को अमेरिका में बैन करने के ट्रंप के फैसले से दुनियाभर में रोष फैल गया था।
इसके साथ ही देश भर के एयरपोर्ट और विदेशों के हवाई अड्डों पर अराजकता की स्थिति पैदा हो गई थी। क्योंकि अमेरिका में उड़ान भरने वाले यात्रियों को आगमन पर निर्वासन के लिए हिरासत में लिया गया था।
हवाई राज्य के यूएस डिस्ट्रिक्ट जज डेरिक के वाटसन ने 43-पृष्ठ के आदेश में कहा है कि एक्जिक्यूटिव ऑर्डर एक विशेष धर्म का अपमान करने के उद्देश्य से जारी किया गया था। गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 27 जनवरी को शासकीय आदेश जारी कर ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागरिकों की अमेरिकी यात्रा पर तीन महीनों के लिए अस्थाई रोक लगा दी थी। सुरक्षा जांच के बाद इन देशों पर से प्रतिबंध हटाने की बात कही गई थी।
कोर्ट के फैसले का असर
अब ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागरिक हवाई में आ सकते हैं।
ट्रंप के अमेरिका में रिफ्यूजी बैन को भी हटा दिया गया है।
बैन तब तक स्थगित रहेगा, जब तक व्हाइट हाउस इस पर कार्यवाही न करे।

देश के 125 शहरों में 8 करोड़ से भी ज्यादा एलईडी बल्ब वितरित

भारत सरकार की उजाला योजना के तहत देश के 125 शहरों में एक साल के अंदर 8 करोड़ से भी ज्यादा एलईडी बल्ब वितरित किए हैं, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि गुजरात की एक विधायक ने मात्र चार महीने में 6 लाख एलईडी बल्ब लोगों में बांट दिए।
सूरत के लिम्बायत विधानसभा सीट से विधायक संगीता पाटिल ने मात्र चार महीने में मोदी सरकार की उजाला योजना के तहत 6 लाख एलईडी बल्ब व लाइट का वितरण कर रिकॉर्ड बना दिया है। माना जा रहा है कि गुजरात में यह पहली ऐसी विधायक हैं जिन्होंने इतने कम समय में लाखों की संख्या में एलईडी बल्ब का वितरण किया है। सिर्फ इतना ही नहीं सरकार की योजना में शामिल ट्यूबलाइट और पंखे का वितरण भी वे कर रही हैं। इनके चुनावी क्षेत्र में लोग इन्हें बल्ब वाली विधायक के नाम से ज्यादा पहचानते हैं।
उल्लेखनीय है कि संगीता पाटिल को देश में सबसे लोकप्रिय युवा विधायक का पुरस्कार भी मिल चुका है। विधायक संगीता पाटिल का कहना है कि हमारा उद्देश्य है कि मोदी सरकार की उजाला योजना से लोगों को लाभ दिलाया जाए इसलिए हम अपने क्षेत्र में रोजाना 4 से 5 जगहों पर कैम्प लगाकर एलईडी बल्ब का वितरण करते रहे जो अभी भी जारी है। लोग भी इसके लिए अधिक जागरूक नजर आए। पहले कोई योजना आती थी तो लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती थी, लेकिन अब इस तरह के महत्वपूर्ण योजना लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
लोगों के घर उजाला रहे और वह भी सस्ते बिजली दरों में इसलिए भारत सरकार ने उजाला योजना की शुरुआत की। इसे क्रांतिकारी योजना बनाने के लिए भाजपा के हर एक कार्यकर्ता ने गुजरात में एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। गुजरात में उजाला योजना के माध्यम से भाजपा ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में लोगों के बीच अपनी चुनावी पृष्ठभूमि तैयार कर रही है, जहां वह अब तक वोटरों के बीच जगह नहीं बना पाई थी। माना जा रहा है कि जिस तरह उत्तरप्रदेश में उज्ज्वला योजना ने महिलाओं के मन में भाजपा के लिए जगह बनाई वैसे ही गुजरात में उजाला योजना कारगर साबित होगी।

नक्सल क्षेत्र की सरकारी शराब दुकानों को खतरा

प्रदेश के हर जिले में जनता के विरोध को देखते हुए सरकारी शराब दुकानों की सुरक्षा के लिए नगरसैनिक और सिक्यूरिटी गार्ड तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा विरोध से घबराई सरकार ने दुकानों का बीमा कराने का भी फैसला लिया है। शराब के स्टॉक, पैसों की सुरक्षा और कर्मचारियों का गारंटी बीमा कराया जाएगा। शराब दुकानों का संचालन करने के लिए गठित छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसी) ने बीमा कंपनियों से निविदा बुलाया है।
कॉर्पोरेशन ने बीमा का प्रारूप और शर्त तैयार कर मंगलवार को निविदा की प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकारी शराब दुकानों का बीमा एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 की आधी रात तक रहेगा। चार प्रकार की बीमा पॉलिसी ली जाएगी। पहली फायर पॉलिसी होगी, जिसमें 50 करोड़ तक के स्टॉक में आग, आपदा, भूंकप, आतंक के कारण स्टॉक को नुकसान होता है तो उसका बीमा रहेगा। दूसरी पॉलिसी चोरी या सेंधमारी की घटना होने पर नुकसान की भरपाई करेगी। इसमें भी 50 करोड़ तक के स्टॉक का बीमा रहेगा। तीसरी पॉलिसी मनी इंश्योरेंस की रहेगी।
दुकान में रखी नकद राशि चोर, लुटेरे या डकैत ले जाते हैं तो उसका बीमा रहेगा। नकद राशि पर सरकार नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र की शराब दुकानों का 10 लाख, नगर पंचायत क्षेत्र की दुकानों का पांच लाख और ग्राम पंचायत क्षेत्र की दुकानों का दो लाख का बीमा कराने जा रही है। चौथी पॉलिसी शराब दुकान के सुपरवाइजर, सेल्समैन, अन्य कर्मचारी और गार्ड के बीमा की होगी। कर्मचारियों की संख्या लगभग पांच हजार होगी। कर्मचारियों का कुल 11 करोड़ का बीमा होगा।
निविदा प्रारूप में कॉर्पोरेशन ने इस बात का अनुमान लगाया है कि प्रदेश की 712 देसी-विदेशी शराब दुकानों में हमेशा औसतन 100 करोड़ का स्टॉक और नकद रहेगा। नकद राशि को खतरा इसलिए रहेगा कि सुबह 11 से रात नौ बजे तक बिक्री की राशि रात में दुकान में ही पड़ी रहेगी। उस राशि को अगले दिन सुबह 11 बजे बैंक में जमा कराया जाएगा।
आबकारी अधिकारियों का कहना है कि नक्सल क्षेत्र की सरकारी शराब दुकानों को ज्यादा खतरा रहेगा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 27 शराब दुकानें संचालित होंगी। इनमें गरियाबंद जिले की छह, राजनांदगांव जिले की चार, कोण्डागांव जिले की पांच, दंतेवाड़ा जिले की तीन, सुकमा जिले की चार और बीजापुर जिले की पांच सरकारी शराब दुकानें शामिल होंगी।
विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के उल्लंघन का मुद्दा उठेगा
सुप्रीम कोर्ट ने अशोक लेंका विरुद्ध ऋषि दीक्षित मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन के निर्णय के खिलाफ तल्ख टिप्पणी कर आदेश दिया था। वर्ष 2005 में लाइसेंसी दुकानदारों ने लाइसेंस शुल्क नहीं पटाया और प्रदेश से भाग गए थे। इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए इन दुकानों का संचालन सरकार खुद ही करने लगी थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है राज्य सरकार को अपने संविधान की कार्यप्रणाली सही ढंग से ज्ञात नहीं है।
संविधान प्रदत्त व्यवस्था को सरकार ने राजस्व बढ़ाने की प्रक्रिया समझ ली है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार व मशीनरी अगली बार से ऐसी गलती नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 47 का अक्षरशः पालन करने व इसी के अनुरूप शराब नीति का संचालन करने का आदेश दिया था। विधानसभा में कांग्रेस इसी आदेश को पटल पर रखकर सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता ममता शर्मा ने भी इसी मुद्दे पर विधानसभा की याचिका समिति को आवेदन दिया है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव ने बताया कि विधानसभा में गुरुवार को शराबबंदी के अलावा सुकमा नक्सली हमले को उठाकर सरकार को घेरा जाएगा। इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार पर खुफियातंत्र और नक्सल विरोधी अभियान में फेल होने का आरोप लगाएगा। सरकार से कहा जाएगा कि इस बार भी चूक की बात कहकर शहीद जवानों का अपमान न करें।

कैप्टन अमरिंदर सिंह बने पंजाब के नए मुख्यमंत्री

पंजाब विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें राज्यपाल वीपी सिंह बडनोरे ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई उनके साथ उनकी कैबिनेट के 9 मंत्री भी शपथ ले रहे हैं। यह दूसरी बार होगा जब कैप्टन राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं। वो राज्य के 26वें मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
उनके बाद ब्रह्म मोहिदर और नवजोत सिंह सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण के बाद सिद्धू ने कैप्टन के पैर छू कर आशीर्वाद भी लिया। उनके डिप्टी सीएम बनने पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। कहा जा रहा है कि कैप्टन उन्हे डिप्टी सीएम नहीं बनाना चाहते जबकि पार्टी आलाकमान को इस बात पर कोई एतराज नहीं है। बहीं खबर यह भी है कि कैप्टन उन्हें शहरी विकास मंत्रालय दे सकते हैं। इनके बाद मनप्रीत बादल ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली और उनका वित्तमंत्री बनना तय है।
इसके बाद साधु सिंह धर्मसोत, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राणा गुरजीत सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली जबकि अरुणा चौधरी और रजिया सुल्ताना ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ ली।
यादगार बनेगा अमरिंदर का शपथ ग्रहण समारोह
कैप्टन अमरिंदर सिंह के शपथ ग्रहण समारोह को यादगार बनाने के लिए देशभर से प्रमुख कांग्रेसी नेताओं के अलावा अन्य कई दलों के नेता पहुंचे हैं। समारोह को हालांकि अमरिंदर ने सादा रखने की बात कही थी मगर इसमें पार्टी नेताओं व वर्करों समेत करीब 1200 लोगों के पहुंचने की बात कही जा रही है।
शपथ ग्रहण में राहुल गांधी और मनमोहन सिंह नजर आए वहीं बुधवार को राजभवन से जिन नेताओं के पहुंचने की पुष्टि की गई है उनमें फारूख अब्दुल्ला, अखिलेश यादव, भूपिंदर सिंह हुड्डा और वीरभद्र सिंह आदि के नाम भी शामिल हैं।
इनके अलावा पी चिदंबरम, सलमान खुर्शीद, उमर अब्‍दुल्ला, दिग्विजय सिंह, सीपी जाेशी, अहमद पटेल, अजय माकन, अंबिका सोनी, आनंद शर्मा, अर्चना डालमिया, कपिल सिब्‍बल, वीरप्पा मोइली, मलिका अर्जुन खडके, मीनाक्षी नटराजन, मिलिंद मुरली देवडा, मोहसिना किदवई, सचिन पायलट, रेणुका चौधरी, राजीव शंकर राव साटव, राज बब्बर, आस्कर फर्नाडीज, मोहम्मद असलम एवं फिरोजा, मुकुल वासनिक भी पंजाब राजभवन में कैप्टन अमरिंदर के शपथ ग्रहण समारोह के गवाह बने।

पिता पुत्र ने किया कमाल एक ही मैच में लगाई हाफ सेंचरी

वेस्टइंडीज टीम के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी शिवनारायण चंद्रपॉल और उनके बेटे तेगनारायण चंद्रपॉल ने मिलकर क्रिकेट फिल्ड में कमाल कर दिया।
पिता-पुत्र की जोड़ी ने कैरीबियाई घरेलू क्रिकेट में गुयाना की ओर से खेलते हुए एक ही मैच में अर्धशतक ठोंक दिया।
इस तरह घरेलू क्रिकेट में एक ही मैच में हाफ सेंचुरी लगाने वाली यह पिता-पुत्र की पहली जोड़ी बन गई है। जमैका के खिलाफ खेलते हुए दोनों ने 38 रनों की साझेदारी भी की। इसकी बदौलत किंग्सटन के सबीना पार्क मैदान पर गुयाना को पहली पारी के आधार पर कुछ बढ़त भी मिल गई।
तेगबहादुर ने 135 गेंदों पर 58 रनों की पारी खेली वहीं शिवनारायण ने पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 175 गेंदों पर 57 रन बनाए। दोनों बल्लेबाज हालांकि सेंचुरी पूरी नहीं कर सके।
अपने जमाने के खब्बू बल्लेबाज रहे चंद्रपॉल ने 164 टेस्ट मैचों में 11867 रन बनाए हैं। इस दौरान उनकी बल्लेबाजी औसत 51.37 रही है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 30 शतक और 66 अर्धशतक लगाए हैं। टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में सातवें पायदान पर हैं
तेगनारायण ने 2013 में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था। अपने पिता के साथ यह उनका पांचवां मैच है लेकिन पहली बार दोनों ने हाफ सेंचुरी लगाई है।
जब शिवनारायण चंद्रपॉल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने के दो साल बाद 1994 में तेगनारायण का जन्म हुआ। दोनों की उम्र में करीब 22 साल का फर्क है।
42 वर्षीय शिवनारायण ने पिछले साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। तेगनारायण भी अपने पिता की ही तरह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं।