गूगल विकसित करेगा मैपिंग का एप दोबारा

गूगल ने बुधवार को घोषणा की कि वह अपने लोकप्रिय मैपिंग ऐप को दोबारा विकसित करेगा। इससे यूजर्स अपनी लोकेशन को शेयर कर सकेंगे। सर्च इंजन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रोडक्ट के इंगेजमेंट को बढ़ाने के लिए यह किया जा रहा है।
गूगल ने कहा कि अगले हफ्ते के अंदर गूगल के एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्पल इंक के आईओएस सॉफ्टवेयर दोनों पर चलने वाले डिवाइस के दुनियाभर के यूजर्स इसे साझा करने में सक्षम हो सकेंगे। यह सुविधा गूगल मैप की प्रभावशीलता को बढ़ाने के उद्देश्य से नए टूल्स का एक हिस्सा है।
विश्लेषकों का कहना है कि कॉमर्स और परिवहन में कंपनी की महत्वाकांक्षाओं के लिए यह महत्वपूर्ण है। लोकेशन शेयरिंग फीचर भीड़-भाड़ वाली जगहों जैसे कॉन्सर्ट, कॉन्फ्रेंस आदि पर एक दूसरे का पता करने में लोगों की मदद करने के इरादे से बनाया गया है।
गूगल मैप्स का नेतृत्व कर रहे गूगल के कार्यकारी जेन फिट्जपैट्रिक ने कहा कि लोगों का इस पर नियंत्रण होगा कि वे किसे अपनी लोकेशन बता रहे हैं और कितनी देर तक उनकी लोकेशन दिख रही है। प्राइवेसी की वकालत करने वालों ने लोकेशन शेयरिंग फीचर को लेकर अतीत में चिंता जाहिर की थी।
उन चिंताओं को दूर करने के लिए गूगल यूजर के ऐप और ई-मेल के जरिये याद दिलाएगा कि वे किसके साथ अपनी लोकेशन को साझा कर रहे हैं।

युद्ध के लिए देश पूरी तरह तैयार है उत्तर कोरिया

उत्तर कोरिया ने कहा कि वह अपने परमाणु और मिसाइल के निर्माण को रोकने के लिए अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई के खतरे से डरता नहीं है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि युद्ध के लिए देश पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री रॉक्स टिल्लर्सन की हाल में की गई उस बात का माखौल उड़ाया कि अमेरिका उत्तर कोरिया पर कड़े प्रतिबंध लगाएगा, अधिक दबाव डालेगा और संभावित सैन्य कार्रवाई को भी कर सकता है। प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर अपने परमाणु कार्यक्रम से विचलित नहीं होगा।
अमेरिका को खुली आंख से दुनिया की स्थिति का सामना करना चाहिए। कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने अज्ञात विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का हवाला देते हुए कहा कि डीपीआरके की इच्छा और क्षमता किसी भी युद्ध में पूरी तरह से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है, जिसे अमेरिका भड़काना चाहता है।
उन्होंने कहा कि अगर बिजनेसमैन के अमेरिकी अधिकारी बने लोग सोच रहे हैं कि वे उत्तरी कोरिया को डरा रहे हैं, तो उन्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि उनका यह तरीका काम नहीं करेगा। यह बात उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी अमीर कैबिनेट के लिए अप्रत्यक्ष संदर्भ में कही।
इस बीच, ट्रंप प्रशासन दुनियाभर की वित्तीय प्रणाली से उत्तरी कोरिया को काटने पर विचार कर रहा है। इसके साथ ही उत्तर कोरिया के बाहर किम जोंग-उन की संपत्ति को जब्त करने पर भी विचार किया जा रहा है। यह जानकारी सोमवार को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने दी।

सीरिया में दमिश्क के पूर्वी इलाके में सेना ने सोमवार को भीषण बमबारी की।

सीरिया में शांति की कोशिशों को जोरदार झटका लगा है। राजधानी दमिश्क के पूर्वी इलाके में सेना ने सोमवार को भीषण बमबारी की। इससे एक दिन पहले विद्रोहियों ने इस इलाके में अचानक हमले कर कई महत्वपूर्ण जगहों पर कब्जा कर लिया था। निगरानी संगठन सीरियन ऑब्जरवेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार इनमें से ज्यादातर जगहों पर फिर से सेना का नियंत्रण हो गया है।
हमले में 26 सैनिक और 21 विद्रोहियों के मारे जाने की पुष्टि संगठन ने की है। इसके अलावा इदलिब सहित कई अन्य जगहों पर भी विद्रोहियों के प्रभाव वाले इलाकों में सेना ने हवाई हमले किए हैं। बीते साल अलेप्पो पर सेना का नियंत्रण होने के बाद रूस और तुर्की की पहल पर शांति के प्रयास शुरू किए गए थे। इसके बाद से यह अब तक का सबसे भीषण संघर्ष है।
सीरियाई टीवी के अनुसार विद्रोहियों ने रविवार को अल-कायदा से जुड़े फतेह अल शाम के साथ मिलकर पूर्वी दमिश्क के जोबार और कबोन में सैन्य ठिकानों पर अचानक धावा बोल दिया।
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि विद्रोही लड़ाके सुरंग के रास्ते शहर में दाखिल हुए थे। कार बम धमाके और रॉकेट हमलों से विद्रोहियों ने कई जगहों पर कब्जा कर लिया। सेना ने जवाब में भयंकर बमबारी कर विद्रोहियों को पीछे खदेड़ दिया।
सातवें साल में प्रवेश कर चुके सीरियाई गृहयुद्ध में करीब साढ़े तीन लाख लोग जान गंवा चुके हैं। बीते दो साल से जिन इलाकों में भीषण लड़ाई चल रही है उनमें जोबार भी है। इसके एक ओर सेना तो दूसरी ओर विद्रोहियों का नियंत्रण है। सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थक रूस के दमिश्क स्थित दूतावास की इमारत को भी इस लड़ाई में नुकसान पहुंचा है।
रूस ने मॉस्को में तैनात इजरायली राजदूत को तलब कर सीरियाई में हवाई हमलों को लेकर विरोध भी जताया है। बीते शुक्रवार को इजरायल ने हिजबुल्लाह के लिए हथियार लेकर जा रहे काफिले को निशाना बनाया था। हिजबुल्लाह भी असद का समर्थक है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय विवाह कानून को राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने मंजूरी दी

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से जुड़े बहुप्रतीक्षित विवाह कानून को राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह विधेयक अब कानून बन गया है। इसके बाद अब वहां रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को विवाह के बाद कानूनी मान्यता मिल सकेगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पीएमओ से जारी एक बयान में इसकी पुष्टि करते हुए कहा गया है कि पीएम की सलाह पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने ‘हिंदू विवाह विधेयक 2017’ को मंज़ूरी दे दी है।
इससे पहले 9 मार्च को इसे संसद से मंजूरी मिली थी। कानून को पारित होने से पहले लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। नेशनल असेंबली में दूसरी बार यह विधेयक पारित हुआ था। इससे पहले पिछले साल सितंबर में संसद ने इस कानून को पारित कर दिया था। लेकिन बाद में सीनेट ने इसमें कुछ बदलाव कर दिए थे।
नियमानुसार, कोई भी विधेयक तभी राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है, जब दोनों सदनों से समान प्रति को ही पारित किया गया हो। दोनों सदनों से विधेयक के अंतिम स्वरूप को मंजूरी मिल गई जिसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया। कानून बनने के बाद यह तीन प्रांतों पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लागू होगा।
सिंध प्रांत पहले ही अपने यहां हिंदू विवाह अधिनियम लागू कर चुका है। इस कानून को पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिदुओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिनियम के अंतर्गत हिंदुओं को मुस्लिमों के ‘निकाहनामे’ की तरह शादी के प्रमाण के तौर पर ‘शादीपरत’ दिया जाएगा।
विधवाओं को सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ लेने में शादी का पंजीकरण काम आएगा। शादी के लिए हिंदू जोड़े की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है। कानून के मुताबिक, अलग होने के लिए हिंदू दंपती अदालत से तलाक का अनुरोध भी कर सकेंगे।
तलाक ले चुके व्यक्ति को इस कानून के तहत फिर से विवाह का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा हिंदू विधवा को पति की मृत्यु के छह महीने बाद फिर से शादी का अधिकार होगा। पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी वहां की जनसंख्या का करीब 1.6 फीसद है।
– पाकिस्तान में हिंदू विवाह अधिनियम वहां के हिंदू समुदाय पर लागू होता है, जबकि भारत में हिंदू मैरिज एक्ट हिंदुओं के अलावा जैन, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी लागू होता है।
– पाकिस्तानी कानून के मुताबिक शादी के 15 दिनों के भीतर इसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। भारतीय कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है। इस बारे में राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं।
– पाकिस्तान में शादी के लिए हिंदू जोड़े की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है। भारत में लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल निर्धारित है।
– पाकिस्तानी कानून के मुताबिक, अगर पति-पत्नी एक साल या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं और साथ नहीं रहना चाहते, तो शादी को रद कर सकते हैं। भारतीय कानून में कम से कम दो साल अलग रहने की शर्त है।
– पाकिस्तान में हिंदू विधवा को पति की मृत्यु के छह महीने बाद फिर से शादी का अधिकार होगा। भारत में विधवा पुनर्विवाह के लिए कोई समयसीमा तय नहीं है।

ट्रंप की सरकार बनने और उनके आदेशों के बाद विदेशी आवेदकों की संख्‍या में जबरदस्‍त गिरावट

अमेरिका में डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार बनने और उनके द्वारा दिए गए आदेशों के बाद वहां के विभिन्‍न विश्वविद्यालयों में पढ़ने की इच्‍छा रखने वाले विदेशी आवेदकों की संख्‍या में जबरदस्‍त गिरावट देखने को मिली है। देश के दस सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में इसका सीधा असर देखने को मिला है। यहां 27,000 छात्रों में सिर्फ 1900 अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं।
अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ कलिजिएट रजिस्ट्रार्स के मुताबिक, विभिन्न कॉलेजों में विदेशी छात्रों द्वारा किए जाने वाले आवेदन में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। सबसे कम आवेदन इस बार पश्चिम एशिया के स्टूडेंट्स की तरफ से मिला है। अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप द्वारा ट्रेवल बैन की घोषणा के बाद यहां पर आने वाले छात्रों के मन में चिंता के भाव आने लग गए हैं। यही वजह है कि छात्र इस बार यहां पर आकर पढ़ाई करने से कतरा रहे हैं।
एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक पिछले दिनों ट्रंप के आदेशों को लेकर हवाई के जज ने भी साफतौर पर कहा था कि इन प्रतिबंधों का असर देश के यूनिवर्सिटी सिस्टम पर भी देखने को मिलेगा और देश को आर्थिक हानि झेलनी पड़ेगी। ग्रेजुएशन के लिए यहां आने वाले छात्रों की संख्‍या में ट्रंप के आदेश के बाद करीब 50 फीसद तक गिरावट दर्ज की गई है। इससे उन विषयों को लेकर चिंता बढ़ गई है जो सिर्फ अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाए जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका की अर्थव्यवस्था में हर साल 32 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। गत दशक में अंतरराष्ट्रीय छातोरं की आवक देश में बढ़ी थी और पिछले साल ही यह आंकड़ा एक 10 लाख को पार कर गया था।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया और नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी का कहना है कि उनके यहां विदेशी छात्रों की संख्या ज्यादा रही है। इधर, पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष विम विवेल ने कहा कि पिछले सप्ताह हैदराबाद के 10 संभावित स्टूडेंट्स से उन्होंने मुलाकात की, लेकिन काउंसलिंग सेशन के दौरान अमेरिका में रहने को लेकर उनके अंदर डर दिखाई दिया। एक मुस्लिम छात्र ने कहा कि उसके पिता अमेरिका और इसके मुस्लिम विरोधी रवैये को लेकर डरे हुए हैं।
ओहायो यूनिवर्सिटी में आवेदकों की संख्या में 8.4 फीसदी की गिरावट आई है। आवेदकों में चीनी छात्रों की संख्या सबसे कम पाई गई है जो कि ट्रंप इफेक्ट को समर्थन नहीं देते। वहीं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की फ्रांसिस लेसली की चिंता अब यह है कि आवेदकों में से कितने स्टूडेंट वास्तव में ऐडमिशन लेंगे, क्योंकि कई यूनिवर्सिटी की डेडलाइन तब खत्म हुई थी जब ट्रंप का ट्रैवल बैन ऑर्डर नहीं आया था।
ओरेगन यूनिवर्सिटी में इस साल बेहद कम अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स ने आवेदन दिया है। विवेल हालांकि, यह भी कहते हैं कि नई दिल्ली और बेंगलुरु के स्टूडेंट्स की चिंता पढ़ाई में आने वाला खर्च है जो कि नोटबंदी का सीधा असर है। वहीं, काउंसल ऑफ ग्रैजुएट स्कूल की अध्यक्ष सुसेन ओर्टेगा कहती हैं कि इसके लिए अन्य आर्थिक वजह जैसे सऊदी अरब में कच्चे तेलों की कीमत का कम होना और एच-1बी वीजा को लेकर अमेरिकी अनिश्चितता भी है

यूएस कोर्ट ने दिया डोनल्ड को तगड़ा झटका

ट्रंप के आदेश के लागू होने के पहले ही रोक लगा दी, यूएस कोर्ट ने
अमेरिका में एक फेडरल यूएस कोर्ट ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड को तगड़ा झटका दिया। कोर्ट ने ट्रंप के उस आदेश के लागू होने के एक दिन पहले ही रोक लगा दी, जिसमें ट्रंप ने रिफ्यूजी और छह मुस्लिम देशों से आने वाले नागरिकों पर अमेरिका में घुसने से बैन लगाने की बात कही थी।
कोर्ट ने इस प्रतिबंध की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ट्रंप का यह आदेश एक धर्म विशेष के अपमान के रूप में देखा जा सकता है। कोर्ट का यह आदेश, राष्ट्रपति ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के लागू होने के एक दिन पहले ही आया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा की वे इस गलत निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। कोर्ट ने अपने सीमाएं लांघ कर यह फैसला सुनाया है, जो ठीक नहीं है। गौरतलब है कि छह मुस्लिम देशों के यात्रियों और शरणार्थियों को अमेरिका में बैन करने के ट्रंप के फैसले से दुनियाभर में रोष फैल गया था।
इसके साथ ही देश भर के एयरपोर्ट और विदेशों के हवाई अड्डों पर अराजकता की स्थिति पैदा हो गई थी। क्योंकि अमेरिका में उड़ान भरने वाले यात्रियों को आगमन पर निर्वासन के लिए हिरासत में लिया गया था।
हवाई राज्य के यूएस डिस्ट्रिक्ट जज डेरिक के वाटसन ने 43-पृष्ठ के आदेश में कहा है कि एक्जिक्यूटिव ऑर्डर एक विशेष धर्म का अपमान करने के उद्देश्य से जारी किया गया था। गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 27 जनवरी को शासकीय आदेश जारी कर ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागरिकों की अमेरिकी यात्रा पर तीन महीनों के लिए अस्थाई रोक लगा दी थी। सुरक्षा जांच के बाद इन देशों पर से प्रतिबंध हटाने की बात कही गई थी।
कोर्ट के फैसले का असर
अब ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागरिक हवाई में आ सकते हैं।
ट्रंप के अमेरिका में रिफ्यूजी बैन को भी हटा दिया गया है।
बैन तब तक स्थगित रहेगा, जब तक व्हाइट हाउस इस पर कार्यवाही न करे।

उनकी महान खोजों ने इलेक्ट्रिकल पावर सप्लाय की दुनिया को बदलने में बड़ा योगदान दिया।

वायरलेस टेलीकम्यूनिकेशन और बिजली की सप्लाय के लिए पहले मैग्निफायर को निकोला टेस्ला नामक वैज्ञानिक ने सन् 1895-98 के दौरान डिजाइन किया था। इससे 51 फीट व्यास के क्षेत्र में बिजली भेजी जा सकती थी।
1899 में टेस्ला अमेरिका के कोलेरेडो शिफ्ट हो गए। वहां पोलीफेज अल्टरनेटिंग करंट पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन सामने आ चुका था, जिससे उन्हें बिना चार्जिंग के इलेक्ट्रिक पावर मिल सकता था।
यहां आकर उन्होंने अपने प्रयोगों पर हाथ से 500 पन्नों की डायरी लिखी। टेस्ला ने अपनी खोजें जारी रखीं और तीन
जुलाई 1899 को टेस्ला ने टेरेस्टेरियल स्टेशनरी वेव्स की खोज की। उन्होंने इस सिद्धांत की भी खोज की कि धरती कम प्रतिरोधकता के साथ इलेक्ट्रिक तरंगों की चालक है।
बाद में उनकी इन महान खोजों ने इलेक्ट्रिकल पावर सप्लाय की दुनिया को बहुत प्रभावित किया और दुनिया को बदलने में बड़ा योगदान दिया।