समुद्र के किनारे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जो बातचीत लीक

जब पीएम नरेंद्र मोदी इजराइल यात्रा पर थे, तो उन्होंने समुद्र के किनारे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जो बातचीत की थी, वह लीक हो गई है। इस दौरान नेतन्याहू ने जहां भारत और चीन के साथ मजबूत संबंधों का हवाला दिया था, वहीं यूरोपियन यूनियन को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी।
इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा था कि यूरोपीय संघ का रवैया इजराइल के प्रति सनक भरा और खुद को नुकसान पहुंचाने वाला है। नेतन्याहू की बुधवार को बंद कमरे में हुई 4 यूरोपीय नेताओं के साथ एक बैठक में हुई यह बातचीत दुर्घटनावश बाहर आ गई। पास के कमरे में बैठे पत्रकारों को ओपन माइक की वजह से सारी बातचीत सुनने को मिल गई।
फिलिस्तीन के पश्चिमी तट पर स्थित रामल्लाह एक महत्वपूर्ण शहर है, जहां भारत सहित तमाम देशों के उच्चायोग स्थित हैं। इजरायल का दौरा करने वाले दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष परंपरागत रूप से यहां ठहरते हैं। मगर, अपनी इजरायल यात्रा के दौरान मोदी रामल्लाह में नहीं रुके। माना जाता है कि मोदी का ऐसा करना विदेशी संबंधों के मामले में इजराइल और फिलिस्तीन को जोड़ने की प्रवृत्ति को तोड़ना था।
इस बातचीत में वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इजराइल को नई खोज का महारथी करने की बात कहते नजर आए। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी की हाल कि इजराइल के दौरान हुई बातचीत का जिक्र करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि मुझे ज्यादा पानी और साफ पानी की जरूरत है। मुझे यह कहां से मिलेगा?
इसके बाद इजराइली पीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल दौरे के बारे में भी बताया। उन्‍होंने कहा कि भारतीय नेता ने उनसे भारत के हितों का ध्‍यान रखने की बात कही। नेतन्‍याहू ने पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के साथ अपने मतभेदों के बारे में भी बात की।
उन्‍होंने कहा कि अमेरिकी नीति को लेकर बड़ी समस्‍या थी लेकिन अब काफी अंतर है। अब ईरान के खिलाफ मजबूत रवैया है और हमारे क्षेत्र अमेरिका की मौजूदगी बदली है। यह काफी सकारात्‍मक है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना ईरान कर रहा परमाणु करार का पालन

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर माना कि ईरान परमाणु करार का पालन कर रहा है। इसके बावजूद ट्रंप गैर-परमाणु गतिविधियों के कारण उस पर कड़े प्रतिबंध लगाना चाहते हैं।
अमेरिका इस मसले पर यूरोपीय देशों के साथ विचार-विमर्श कर ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए विस्तृत रणनीति भी बनाना चाहता है। ट्रंप सरकार ने सोमवार को अमेरिकी संसद को यह जानकारी दी।
इससे पहले अप्रैल में भी ईरान द्वारा परमाणु करार के प्रावधानों का पालन करने की रिपोर्ट सौंपी गई थी। ट्रंप शुरुआत से ही ईरान के विवादस्पद परमाणु कार्यक्रम पर हुए समझौते की आलोचना करते रहे हैं।
वह समय-समय पर इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को खरी-खोटी भी सुनाते रहे हैं। करार के बाद ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को तो नियंत्रित कर दिया है, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण का दौर लगातार जारी रखे हुए है।
अधिकारियों ने बताया कि गैर-परमाणु क्षेत्रों (मिसाइल परीक्षण और कथित तौर पर आतंकियों को समर्थन) में ईरान की गतिविधियों से क्षुब्ध ट्रंप ईरान पर नए प्रतिबंध लगाना चाहते हैं।
व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी सीन स्पाइसर ने कहा, ‘राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि यह समझौता (ईरान के साथ करार) अमेरिका के लिए बुरा है।’
अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका करार के क्रियान्वयन को और सख्त करना चाहता है। आतंकवाद का समर्थन करने और मिसाइल कार्यक्रम के चलते तेहरान पर नए प्रतिबंध लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।
अमेरिका ने ईरान की ताजा गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्थायित्व के लिए खतरा बताया है। परमाणु करार में मिसाइल कार्यक्रम शामिल नहीं है।
ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद जरीफ ने ट्रंप सरकार की ओर से विरोधाभासी संकेत मिलने की बात कही है। साथ ही बताया कि उनका अमेरिकी समकक्ष के साथ कोई संपर्क नहीं हुआ है।

उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में अर्धसैनिक बल के जवानों को ले जा रहे वाहन पर आत्मघाती हमले में एक मेजर समेत दो लोग मारे गए

उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में अर्धसैनिक बल के जवानों को ले जा रहे वाहन पर आत्मघाती हमले में एक मेजर समेत दो लोग मारे गए हैं और दस जवान घायल हुए हैं।
अर्धसैनिक बल का काफिला पेशावर के हयाताबाद इलाके से गुजर रहा था तभी मोटरसाइकिल सवार आत्मघाती हमलावर ने एक वाहन में टक्कर मारी। विस्फोटक लदी इस मोटरसाइकिल के टकराते ही जोरदार धमाका हुआ और दो वाहनों में आग लग गई।
मौके पर पहुंचे एसएसपी (ऑपरेशन) सज्जाद खान ने बताया है कि घटना में एक मेजर समेत और एक जवान की मौके पर ही मौत हो गई। दस घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर है। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरु किया। आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने घटना की जिम्मेदारी ली है। यह उसके प्रभाव वाला इलाका है।
संगठन के प्रवक्ता खुरासानी ने कहा है कि मारे गए मेजर जमाल शेरन उसकी हिट लिस्ट में थे। उन्हीं को निशाना बनाकर हमला किया गया। पाकिस्तानी सेना ने रविवार को ही खैबर आदिवासी इलाके में इस्लामिक स्टेट (आइएस) आतंकियों के खिलाफ अभियान छेड़ने की घोषणा की है।

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा करेंगे सुबूतों की समीक्षा

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा अब सुबूतों की समीक्षा करेंगे। भारतीय नौसेना में अधिकारी रहे जाधव को जासूसी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोप में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई है।
सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि जाधव की अपील पर गुणवत्ता के आधार पर फैसला किया जाएगा। जाधव ने जून में जनरल बाजवा के समक्ष दया याचिका दाखिल की है।
पाकिस्तानी सेना की तरफ से जारी बयान के अनुसार अपीलीय अदालत में दया की अर्जी खारिज होने के बाद जाधव ने सेना प्रमुख के समक्ष दया याचिका रखी थी। जाधव की नई याचिका पर रविवार को सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा, जनरल बाजवा जाधव के खिलाफ मिले सुबूतों की समीक्षा कर रहे हैं।
सेना प्रमुख जाधव की दया की अर्जी पर गुणवत्ता के आधार पर फैसला करेंगे। पाकिस्तान के दावे के अनुसार जाधव को बलूचिस्तान से मार्च में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अप्रैल में सैन्य अदालत में मुकदमा चलाकर उन्हें मौत की सजा देने का फैसला हुआ।
भारतीय एजेंसियों के अनुसार जाधव को ईरान से तालिबान ने अगवा किया और इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी एजेंसियों को सौंप दिया। जाधव ईरान में कारोबार के सिलसिले में गए हुए थे। भारत इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लेकर गया है, जहां जाधव की फांसी की सजा को स्थगित कर दिया गया है।

एटीएम से बाहर निकला आदमी

अमेरिका के टेक्सास प्रांत में बैंक ऑफ अमेरिका के एक एटीएम का ताला कुछ दिनों से खराब था। बैंक के बुलावे पर एक ठेकेदार उसे ठीक करने पहुंचा।
उसने एटीएम खोला और मशीन के अंदर बैठकर उसे ठीक करने लगा। अचानक दरवाजा बंद हो गया और वह उसी में फंस गया। उसके पास सिर्फ कागज और पेन ही थे। उसने अंदर से मदद को आवाज लगाई लेकिन किसी ने उसे सुना नहीं। फिर उसने कागज में मदद का संदेश लिखा और रसीद निकालने वाले सुराख से बाहर उसे किया। वह कई घंटों तक वहां फंसा रहा। उसकी मदद के लिए डाली गई प‍र्ची को देखकर कई लोगों को मजाक लगा।
हालांकि अंदर बंद ठेकेदार ने हिम्मत नहीं हारी, और पर्ची से मदद की गुहार लगाता रहा। अंततः पर्ची देख एक व्यक्ति ने पुलिस बुलाई। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर उसे छह घंटे बाद बाहर निकाला।
कॉर्प्स क्रिस्टी पुलिस के सीनियर अधिकारी ने रिचर्ड ओल्डेन ने कहा, यह अपने तरह का पहला मामला था जब कोई कर्मचारी एटीएम रूम में फंसा। वह अपना मोबाइल ट्रक में छोड़ गया था, इसलिए मदद के लिए उसके पास कोई और चारा नहीं बचा था। शुरू में लोगों को लगा कि कोई उनसे मजाक कर रहा है।

स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने दुनिया का सबसे आलसी देश ढूंढ लिया

अमेरिकी की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने दुनिया का सबसे आलसी देश ढूंढ लिया है। एक स्टडी के अनुसार हांगकांग जहां विश्व का सबसे एक्टिव देश है वहीं इंडोनेशिया सबसे आलसी। हांगकांग के लोग जहां हर रोज औसतन 6880 कदम चलते हैं वहीं इंडोनेशिया के लोग महज 3513 कदम ही चलते हैं।
शोधकर्ताओं ने 111 देशों में मौजूद 7.17 लाख मोबाइल फोन्स को ट्रैक करते हुए लोगों के चलने-फिरने का डेटा एकत्रित कर यह स्टडी की है। इसके अनुसार दूसरे देशों के मुकाबले ब्रिटेन के लोग जहां काफी एक्टिव नजर आए। यहां लोग रोजाना औसतन 5444 कदम चलते हैं जो की 5 किमी के बराबर है।
टीम ने इसके माध्यम से मोटापे से निपटने के लिए भी मदद उपलब्ध करवाई है क्योंकि इस डेटा से यह पता लगता है कि जिन देशों में लोग ज्यादा चलते हैं वहां मोटापे में कमी दिखी। वैज्ञानिकों ने लोगों के स्मार्टफोन्स की मदद से 68 मिलियन दिनों जितना डेटा प्राप्त किया और पाया कि लोग औसतन 4961 कदम चलते हैं। हालांकि मोटापे और लोगों द्वारा चले जाने वाले कदमों में कोई ठोस लिंक नहीं मिली है।
अगर भारत की बात करें तो डेटा में भारत वाले ज्यादा एक्टिव नजर नहीं आए। इसके अनुसार भारतीय 4297 कदम रोज चलते हैं। भारत के मुकाबले चीन और जापान के लोग ज्यादा एक्टिव नजर आए वहीं ब्राजील और अरब देश के लोग भारत के बराबर ही दिखे।

अपने बेटे ने हीं बढ़ा दी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें उनके अपने बेटे ने हीं बढ़ा दी हैं। ट्रंप जूनियर ने मंगलवार को 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस का हाथ होने के कई ई-मेल जारी कर दिए। इन ई-मेल्स में ट्रंप के चुनाव अभियान को प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के बारे में संवेदनशील सूचना रूस की तरफ से देने की बात कही गई है।
ट्रंप जूनियर को लिखे एक ई-मेल में रॉब ग्लैडस्टोन ने कहा है कि सूचना से हिलेरी पर इल्जाम लगेगा और इससे आपके पिता को फायदा मिलेगा। ट्रंप के बेटे की रूसी सूत्र के साथ बैठकों को लेकर अमेरिका में राजनीतिक तूफान उठा हुआ है।
ग्लैडस्टोन ने रूसी सूत्र के साथ उनकी बैठक कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। एक अन्य ई-मेल में ग्लैडस्टोन ने लिखा है कि सूचना को तत्कालीन रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप को उनके सहयोगी आर. ग्राफ के जरिये साझा किया जा सकता है।
ट्रंप जूनियर ने एक बयान में कहा कि वह ग्लैडस्टोन से नौ जून 2016 को मिले थे। पहला ई-मेल तीन जून २०१६ को आया। ट्रंप जूनियर ने किसी तरह का गलत काम करने ने इन्कार किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया बड़ा बयान

इराकी सेना द्वारा मोसुल को आतंकी संगठन आईएस से मुक्त करवाए जाने के बाद अब दुनियाभर से इसे लेकर प्रतिक्रियाएं आ रहीं हैं। ताजा मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर एक बड़ा बयान दिया है। डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा है कि मोसुल में आईएस पर इराक की जीत इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में आतंकी संगठन के दिन गिन-चुन के रह गए हैं। यानि उनका खात्‍मा बेहद नजदीक है।
ट्रंप ने इस जीत के लिए इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी, सुरक्षा बलों और सभी नागरिकों को बधाई दी। आइएस के कब्‍जे से मोसुल को आजाद कराने के लिए अमेरिका व वैश्विक गठबंधन द्वारा समर्थित इराकी सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए उन्‍होंने कहा कि पिछले छह महीनों में आईएस के खिलाफ जबरदस्‍त प्रगति देखने को मिली है, जो कि सबसे बड़ा खतरा बन चुका था।
ट्रंप ने यह भी कहा कि हमें आईएस द्वारा क्रूर तरीके से मौत के घाट उतार दिए गए हजारों इराकियों और आतंकी संगठन द्वारा प्रताड़ित किए गए लोगों के लिए बेहद खेद है। वहीं ट्रंप ने आगे यह भी कहा कि अमेरिका और वैश्विक गठबंधन गर्व के साथ इराकी सुरक्षा बलों और उन लोगों के साथ खड़ा है जिन्‍होंने यह आजादी दिलवाई।

जी-20 शिखर के शुरुआती सत्र में अपने संबोधन में दोनों ने ही एक दूसरे की तारीफ की।

जर्मनी के हैम्बर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन शुरू हो चुका है और सम्मेलन के शुरुआती सत्र में ब्रिक्स देशों के नेताओं की अनौपचारिक बैठक में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने आए। यहां अपने संबोधन में दोनों ने ही एक दूसरे की तारीफ की। जहां चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में भारत द्वारा आतंक से निपटने के लिए जो मजबूत संकल्प पेश किया वो सराहनीय है।
वहीं पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति जिनपिंग की चेयरमैनशिप में ब्रिक्स में सकारात्मक मोमेंटम दिखा है। उन्हें अगली ब्रिक्स समिट के लिए शुभकामनाएं। इससे पहले पीएम मोदी सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जर्मनी के हैम्बर्ग पहुंचे।
हालांकि दोनों की मुलाकात को लेकर चीन के बयान के बाद भारत ने भी इससे इन्कार किया है लेकिन कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात अब भी संभव है।
सूत्रों का कहना है कि मोदी और चिनपिंग के बीच गैर आधिकारिक तौर पर मुलाकात की संभावना से अब भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। इसके पीछे पहला कारण यह बताया जा रहा है कि समूह-20 देशों के प्रमुखों की बैठक की रूपरेखा बहुत अनौपचारिक होती है। दिनभर चलने वाली बैठकों में विभिन्न देशों के नेता एक-दूसरे से कई बार टकराते हैं। कई बार उनके बीच तय नहीं होने के बावजूद लंबी बातचीत हो जाती है।
साथ ही यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि मोदी और चिनपिंग एक बंद कमरे में रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के राष्ट्रपति के साथ ब्रिक्स की बैठक करेंगे। इसमें भी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना होती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी और चिनपिंग मौजूदा तनाव को दूर करने के लिए कूटनीतिक दायरे से बाहर निकलने का माद्दा दिखाते हैं या नहीं।
बता दें कि चीन के विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा था कि दोनों देशों के प्रमुखों के बीच मुलाकात के लिए यह सही माहौल नहीं है। भारत जल्द-से-जल्द अपनी सेना चीन की सीमा से वापस बुला कर शांति स्थापित करने में मदद करे। आधिकारिक तौर पर भारत ने चीन के बयान को खास तवज्जो नहीं दिया है। भारत ने कहा है कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात पहले से तय नहीं थी ऐसे में माहौल ठीक ना होने की बात बेमानी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 20 देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 20 देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए हैम्बर्ग पहुंच चुके हैं। इस सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी हिस्सा लेंगे। हालांकि दोनों की मुलाकात को लेकर चीन के बयान के बाद भारत ने भी इससे इन्कार किया है लेकिन कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात अब भी संभव है।
सूत्रों का कहना है कि मोदी और चिनपिंग के बीच गैर आधिकारिक तौर पर मुलाकात की संभावना से अब भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। इसके पीछे पहला कारण यह बताया जा रहा है कि समूह-20 देशों के प्रमुखों की बैठक की रूपरेखा बहुत अनौपचारिक होती है। दिनभर चलने वाली बैठकों में विभिन्न देशों के नेता एक-दूसरे से कई बार टकराते हैं। कई बार उनके बीच तय नहीं होने के बावजूद लंबी बातचीत हो जाती है।
साथ ही यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि मोदी और चिनपिंग एक बंद कमरे में रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के राष्ट्रपति के साथ ब्रिक्स की बैठक करेंगे। इसमें भी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना होती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी और चिनपिंग मौजूदा तनाव को दूर करने के लिए कूटनीतिक दायरे से बाहर निकलने का माद्दा दिखाते हैं या नहीं।
बता दें कि चीन के विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा था कि दोनों देशों के प्रमुखों के बीच मुलाकात के लिए यह सही माहौल नहीं है। भारत जल्द-से-जल्द अपनी सेना चीन की सीमा से वापस बुला कर शांति स्थापित करने में मदद करे। आधिकारिक तौर पर भारत ने चीन के बयान को खास तवज्जो नहीं दिया है। भारत ने कहा है कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात पहले से तय नहीं थी ऐसे में माहौल ठीक ना होने की बात बेमानी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी20 देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए हैम्बर्ग पहुंच चुके हैं। इस सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी हिस्सा लेंगे। हालांकि दोनों की मुलाकात को लेकर चीन के बयान के बाद भारत ने भी इससे इन्कार किया है लेकिन कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात अब भी संभव है। सूत्रों का कहना है कि मोदी और चिनपिंग के बीच गैर आधिकारिक तौर पर मुलाकात की संभावना से अब भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। इसके पीछे पहला कारण यह बताया जा रहा है कि समूह-20 देशों के प्रमुखों की बैठक की रूपरेखा बहुत अनौपचारिक होती है। दिनभर चलने वाली बैठकों में विभिन्न देशों के नेता एक-दूसरे से कई बार टकराते हैं। कई बार उनके बीच तय नहीं होने के बावजूद लंबी बातचीत हो जाती है। साथ ही यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि मोदी और चिनपिंग एक बंद कमरे में रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के राष्ट्रपति के साथ ब्रिक्स की बैठक करेंगे। इसमें भी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना होती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी और चिनपिंग मौजूदा तनाव को दूर करने के लिए कूटनीतिक दायरे से बाहर निकलने का माद्दा दिखाते हैं या नहीं। बता दें कि चीन के विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा था कि दोनों देशों के प्रमुखों के बीच मुलाकात के लिए यह सही माहौल नहीं है। भारत जल्द-से-जल्द अपनी सेना चीन की सीमा से वापस बुला कर शांति स्थापित करने में मदद करे। आधिकारिक तौर पर भारत ने चीन के बयान को खास तवज्जो नहीं दिया है। भारत ने कहा है कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात पहले से तय नहीं थी ऐसे में माहौल ठीक ना होने की बात बेमानी है।