पाकिस्तानी सीनेट के चेयरमैन रजा रब्बानी ने बताया अमेरिका, इजरायल और भारत के बीच गठजोड़ को मुस्लिम दुनिया के लिए बड़ा खतरा

पाकिस्तानी सीनेट के चेयरमैन रजा रब्बानी ने अमेरिका, इजरायल और भारत के बीच गठजोड़ को मुस्लिम दुनिया के लिए बड़ा खतरा बताया है। रब्बानी ने इस्लामिक देशों के संसदीय संघ के 13वें सत्र को संबोधित करते हुए यह कहा है। सीनेट सचिवालय ने एक दिन पहले बुधवार को बयान जारी किया था। बयान में कहा गया है कि रब्बानी ने कहा है, “दुनिया के देशों के बीच रिश्ते बदल रहे हैं।अमेरिका, इजरायल और भारत के बीच बन रहे गठजोड़ से मुस्लिम दुनिया को खतरा है और इससे निपटने के लिए मुस्लिम दुनिया को एकसाथ आने की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि आज पाकिस्तान और ईरान हैं कल कोई और देश हो सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान की सैन्य सहायता पर रोक लगा दी है। ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन को अमेरिका ने अपना समर्थन दिया था।
अमेरिका द्वारा आर्थिक मदद रोके जाने से परेशान पाकिस्तान ने साफ किया है कि वह वाशिंगटन की मदद के बिना भी जिंदा रह सकता है। लेकिन राष्ट्रीय अखंडता के साथ समझौता नहीं करेगा। न्यूज इंटरनेशनल में गुरुवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने सीनेट की वित्तीय मामलों की स्टैडिंग कमेटी से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के बाद वाशिंगटन के साथ पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य नहीं रह गए हैं।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोनों देशों की दोस्ती को स्वर्ग में बनी जोड़ी बताते हुए कहा

भारत यात्रा पर आए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोनों देशों की दोस्ती को स्वर्ग में बनी जोड़ी बताते हुए कहा कि यह मानवता के प्रति प्यार, लोकतंत्र और आजादी के साझे मूल्यों पर टिकी हुई है। नेतन्याहू के मुताबिक, खस्ताहाल अर्थव्यवस्था मिलने के बाद जिस तरह इजरायल में उन्होंने भारी बदलाव किया, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी काम कर रहे हैं। वे योजना बनाकर काम करते हैं और नई खोज का महत्व समझते हैं।
गुरुवार को भारत-इजरायल व्यापार सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी गहरी व्यक्तिगत दोस्ती है। उन्होंने कहा कि बहुत ज्यादा नियम-कानून होने से प्रतिस्पर्द्धा में बाधा आती है। निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने से विकास को तत्काल गति मिलती है। इससे पहले नेतन्याहू ताज होटल में सुबह के नाश्ते पर कॉरपोरेट दिग्गजों से मिले। उद्योगपतियों से अनुसंधान कार्यों की तरफ ध्यान देने का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाला समय उनका है, जो नई खोज करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय और इजरायली उद्योगपतियों का आपस में मिलते रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि मिलकर आप लोग बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। दोनों देशों की साझेदारी आश्चर्यजनक नतीजे दे रही है।
नेतन्याहू ने कहा कि नई खोज खुद-ब-खुद नहीं हो जाती है, बल्कि इसके लिए माहौल बनाना पड़ता है। इसे प्रोत्साहित करना पड़ता है। आदि पिरामल, राहुल बजाज, आदि गोदरेज, हर्ष गोयनका, आनंद महिद्रा और अशोक हिदुजा जैसे उद्योगपति इस मौके पर मौजूद थे।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने देश में तकनीकी दक्षता का श्रेय वहां की अनिवार्य सैनिक सेवा को दिया है। भारत-इजरायल व्यापार सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, आपको लग रहा होगा कि हमारी प्रतिभा बेहतर शिक्षा व्यवस्था का नतीजा है। लेकिन, मुझे नहीं लगता कि हमारी शिक्षा व्यवस्था सर्वश्रेष्ठ है। हमारे यहां तो असली शिक्षा सेना में मिलती है। हमारे यहां हर आदमी को कुछ दिनों के लिए सेना में भर्ती होना पड़ता है। हम उनका परीक्षण करते रहते हैं। 21 या 22 साल का होने के बाद ही उनको तकनीकी विद्यालय जाने दिया जाता है।
महाराष्ट्र का एक भाग मराठवाड़ा हमेशा जल संकट से जूझता रहता है। लेकिन अब महाराष्ट्र सरकार इजरायल के सहयोग से वाटर ग्रिड बनाकर इससे निजात दिलाने की योजना तैयार कर रही है। गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की उपस्थिति में मराठवाड़ा में वाटर ग्रिड तैयार करने का करार हुआ। फड़नवीस का कहना है कि इजरायली तकनीक और अनुभव से इस क्षेत्र में राज्य के सबसे बड़े वाटर ग्रिड की स्थापना की जाएगी। इस प्रक्रिया में राज्य के सभी छोटे-बड़े जलाशयों एवं जलस्त्रोतों को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा।
फड़नवीस ने भरोसा जताया कि इजरायल के सहयोग से राज्य में किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य आसानी से पूरा किया जा सकेगा। बता दें कि मराठवाड़ा में ही दो साल पहले गर्मियों के दिनों में पेयजल के लिए हजारों टैंकरों के साथ-साथ ट्रेन से पानी का आपूर्ति करनी पड़ी थी। फड़नवीस सरकार द्वारा शुरू की गई जलयुक्त शिवार योजना के फलस्वरूप फिलहाल मराठवाड़ा में एक भी टैंकर की जरूरत नहीं पड़ रही है। वाटर ग्रिड का काम पूरा हो जाने के बाद मराठवाड़ा का जलसंकट हमेशा के लिए दूर हो सकता है।
फड़नवीस ने नेतन्याहू की उपस्थिति में हुई इंडिया-इजरायल बिजनेस समिट-2018 को संबोधित करते हुए कहा कि मैं अपनी यात्रा के दौरान वहां की कृषि व्यवस्था देखकर काफी प्रभावित हुआ था। फड़नवीस ने याद दिलाया कि महाराष्ट्र में पिछले 2000 साल से यहूदी आकर बसते रहे हैं। वे यहां के इतिहास एवं संस्कृति का हिस्सा हैं। उन्होंने हमारे राज्य और समाज को बनाने में भी मदद की है।

तुर्कमेनिस्तान में सामने आया एक चौंकाने वाला फैसला अश्गाबात के लोग अब काले रंग की कार नहीं खरीद सकेंगे

मध्य एशिया के देश तुर्कमेनिस्तान में एक चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। यहां राजधानी अश्गाबात के लोग अब काले रंग की कार नहीं खरीद सकेंगे। इसके पीछे कारण है तुर्क राष्ट्रपति गुरबंगुली बिरडीमुहामेडोव का सफेद कारों को लेकर अंधविश्वास।
राष्ट्रपति गुरबंगुली का यह पसंदीदा रंग हैं। वह सफेद रंग को तुर्कमेनिस्तान के लिए भाग्यशाली मानते हैं। ऐसी स्थिति में वहां के अधिकारी भी सफेद रंग की कार को प्राथमिकता देने लगे हैं।
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, राष्ट्रपति गुरबंगुली ने 2015 में काले रंग की कारों के आयात को रोक दिया था। हालांकि, अब उन्होंने राजधानी अश्गाबात में यह प्रतिबंध लगा दिया है। बताया गया कि साल की शुरुआत में अश्गाबात के लोग जब सुबह उठे तो जिनके पास सफेद को छोड़कर दूसरे रंगों की कारें थीं, वह गायब थीं। पता चला कि अधिकारी उनकी कार उठाकर ले गए। बाद में उन्हें इस शर्त पर कार वापस मिली कि वह अपनी कारों को सफेद रंग में रंगा देंगे।
राजधानी में पुलिस वहां मौजूद सफेद कारों को छोड़कर दूसरी कारों की कुर्की कर रही है। इससे पहले अधिकारियों ने फैसला लिया था कि साल 2018 से वहां काले रंग की सभी कारें कुर्क होंगी। हालांकि कोई लिखित आदेश न मिलने के बावजूद पुलिस दूसरे रंग की कारों की भी कुर्की कर रही हैं।
इस फैसले को देखते हुए शहर में कारों को रंगने के बिजनेस में उछाल आ गया और करीब 64 हजार रुपए (एक हजार डॉलर) तक मांगा जाने लगा। पहले कारों की रंगाई करीब 32 हजार रुपए (500 डॉलर) में होती थी।
मलेशिया में पीले कपड़े : 2016 में गृह मंत्री अहमद जाहिद हमीदी ने देश में बढ़ रहे प्रदर्शन को देख पीले कपड़ों पर प्रतिबंध लगाया था। यहां पीले कपड़े पहनकर लोग राष्ट्रपति नजीब रजाक के प्रतिबंध की मांग कर रहे थे।
बुरुंडी में जॉगिंग : राष्ट्रपति पियर कुरुनजीजा ने 2014 में जॉगिंग को विध्वंस से जोड़ते हुए इस पर प्रतिबंध लगाया था।
रोमानिया में पश्चिमी हेयरकट : 2010 में यहां स्पाइक, पोनीटेल आदि जैसी पश्चिमी हेयरकट पर प्रतिबंध लगा। इसके लिए लोगों को निर्धारित हेयरस्टाइल की तस्वीरें भी भेजी गईं। नियम उल्लंघन पर जेल या जुर्माने का प्रावधान।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन बेटे याइर नेतन्याहू साथ नहीं आ सके भारत

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे याइर नेतन्याहू भी अपने माता-पिता के साथ भारत दौरे पर जाने वाले थे। इसके लिए उन्हें वीजा भी जारी हो गया था। लेकिन आखिरी समय पर भारत आने वालों की सूची से उनका नाम कट गया। इस प्रकार वह भारत नहीं आ सके।
इजरायली चैनल हदाशॉट टीवी न्यूज के अनुसार, याइर नेतन्याहू भी भारत जाने वाले दल में शामिल थे, लेकिन उनसे संबंधित एक विवादित टेप के सार्वजनिक होने के बाद उनका नाम प्रतिनिधिमंडल दल से हटा दिया गया। ध्यान रहे कि इजरायल के चैनल 2 टेलीविजन द्वारा पिछले सोमवार को प्रसारित एक ऑडियो टेप में याइर नेतन्याहू को तेल अवीव के एक स्ट्रिप क्लब के बाहर एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक गैस सौदे के बारे में बातचीत करते हुए पाया गया है।
टेप में वह नशे की हालत में लग रहे हैं। हालांकि नेतन्याहू के परिवार ने चैनल 2 द्वारा प्रसारित रिकार्डिंग की निंदा की है। बाद में इस पर सफाई देते हुए याइर नेतन्याहू ने भी कहा था कि वह 2015 से ही ऑडियो पर इस तरह के मजाक करते आ रहे हैं।

अमेरिका अपने सभी विवाद बातचीत के जरिये हल करने को तैयार

दक्षिण कोरिया से उत्तर कोरिया की वार्ता शुरू होने के बाद अमेरिका भी प्रतिबंधित देश से बात करना चाहता है। लेकिन इसके लिए वह उचित समय और सही हालात बनने का इंतजार करेगा। इस बीच उत्तर कोरिया ने कहा है कि वह दक्षिण कोरिया के साथ अपने सभी विवाद बातचीत के जरिये हल करने को तैयार है लेकिन परमाणु हथियारों के मसले पर किसी से कोई वार्ता नहीं करेगा। उसने अमेरिका से बातचीत के बारे में कुछ नहीं कहा है।
उत्तर कोरिया के साथ वार्ता शुरू होने के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लगातार संपर्क में बनाए हुए हैं। उन्होंने दोनों देशों की वार्ता शुरू होने का बड़ा श्रेय ट्रंप को दिया है। कहा है कि ट्रंप ने आश्वासन दिया है कि दक्षिण और उत्तर कोरिया की बातचीत आगे बढ़ती है तो अमेरिका क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की संभावना टाले रहेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने भी व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा, कौन जाने भविष्य में क्या हो जाए? बताया कि राष्ट्रपति मून ने उन्हें उत्तर कोरिया के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी है। आशा है कि यह सफलता की ओर बढ़ेगी। यह सफलता केवल हमारे लिए नहीं होगी बल्कि पूरी दुनिया के लिए होगी। देखना होगा आने वाले हफ्तों और महीनों में इसमें क्या प्रगति होती है।
ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को उत्तर कोरिया को लेकर समस्या है। लेकिन हाल के दिनों में सही दिशा में कई बातें हुई हैं। रचनात्मक ऊर्जा पैदा हुई है। इससे भविष्य को लेकर आशा पैदा हुई है। शांति की संभावना को ताकत मिली है।
उत्तर कोरिया ने कहा है कि वह फरवरी में दक्षिण कोरिया में होने वाले विंटर ओलंपिक में भाग लेगा। दक्षिण कोरिया के साथ हर तरह का विवाद बातचीत से निपटाना चाहता है। लेकिन परमाणु हथियारों के मसले पर वह कोई वार्ता नहीं करेगा। उसका वह मसला अमेरिका के साथ है।

पांच लाख साल पुराने पत्थर के औजार खोजे इजरायल के पुरातत्वविदों ने

इजरायल के पुरातत्वविदों ने पांच लाख साल पुराने पत्थर के औजार खोजे हैं। इन औजारों की बनावट देखने के बाद वैज्ञानिकों का अनुमान है कि उस वक्त के आदिमानवों की दिमागी क्षमता हमारे जैसी ही थी। खोजे गए औजारों में ज्यादातर कुल्हाड़ी की तरह हैं। ये स्विस सेना के चाकू से भी मिलते-जुलते हैं।
तेलअवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि आदिमानवों ने पहले इस तरह के औजार बनाने की कल्पना की फिर उसे मूर्त रूप दिया। आदिमानवों ने अपनी जरूरत के अनुसार विभिन्न तकनीकों से पत्थर के इन हथियारों का निर्माण किया था। इन औजारों को इजरायल के जालिजुलिया शहर के पास से खोद कर निकाला गया।
खुदाई करने वाली टीम के नेतृत्वकर्ता मायान शीमेर ने कहा, ‘खोजे गए सभी औजार अलग-अलग तकनीक से बनाए गए हैं जो इस खोज को और अद्भुत बनाता है। इसके बाद वैज्ञानिकों को आदिमानव व पुरातन पशुओं की कई प्रजातियों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।’

किम जोंग से फोन पर बात करना चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच जारी तनातनी के बीच एक अच्छी खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान देकर सबको हैरान कर दिया है कि वह किम जोंग से फोन पर बात करना चाहते हैं। इसे विश्व शांति के लिहाज से एक शुभ संकेत माना जा सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उत्तर कोरिया के लीडर किम जोंग उन से वह फोन से बात करने को ‘बिल्कुल’ तैयार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया के बीच होने जा रही बातचीत का कुछ सकारात्मक नतीजा निकलेगा।
ट्रंप ने कहा कि निश्चित रूप से मैं हमेशा बातचीत में विश्वास रखता हूं। बिल्कुल मैं वह करूंगा, इससे मुझे कोई समस्या नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने इतनी ही तेजी से यह भी कहा कि हर बातचीत एक शर्त के साथ होती है।उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस बातचीत के लिये क्या शर्तें होंगी।
दो सालों से भी ज्यादा समय में यह पहला मौका होगा जब मंगलवार को एक सीमावर्ती शहर में उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच कोई औपचारिक वार्ता होगी। इस दौरान दोनों विरोधी पक्ष दक्षिण कोरिया में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक खेलों में सहयोग के तरीकों को तलाशनें और आपसी रिश्तों को सुधारने की दिशा में बातचीत करेंगे।
उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर दोनों देशों के बीच खासा तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नरम रुख के लिए लोग दक्षिण कोरिया की भूमिका को अहम मान रहे हैं। जिस समय उत्तर और दक्षिण कोरिया रिश्तों को ओलिंपिक खेलों के जरिए सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, अमेरिका ने दक्षिण कोरिया की तरफ से की गई संयुक्त युद्ध अभ्यासों को रोकने की गुजारिश मान ली है।
इससे पहले इसी हफ्ते उत्तर कोरिया ने अपनी सीमा पर टेलीफोन हॉटलाइन को फिर से शुरू कर दिया था ताकि दोनों के बीच संपर्क हो सके। हालांकि, बहुत से लोग इस बात को लेकर संदेह जता रहे हैं कि अगले हफ्ते होने वाली वार्ता और उत्तर कोरिया के खेलों में शामिल होने का कोई महत्व है।

देश में भी जल्द दिखाई दे सकती हैं सोलर रोड

फ्रांस एवं नीदरलैंड की तर्ज पर देश में भी जल्द ही सोलर रोड दिखाई दे सकती हैं। यानी ऐसी सड़कें, जिसकी सतह के नीचे सोलर पैनल लगे होंगे और ऊपर वाहन दौड़ेंगे।
इसके लिए जल्द ही राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान में शोध शुरू किया जाएगा। शोध के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। नीदरलैंड के साथ एमओयू भी किया गया है ताकि कम से कम समय में शोध पूरा हो सके।
शोध पूरा होते ही सोलर पैनल बनाने वाली भारतीय कंपनियों को सोलर टाइल्स बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए दुनिया के अधिकतर देशों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से काम शुरू हो चुका है।
सोलर पैनलों का निर्माण तेज करने के साथ ही अब सोलर रोड बनाने की दिशा में कई देश कदम बढ़ा चुके हैं। इनमें फ्रांस एवं नीदरलैंड के नाम भी शामिल हैं।
सोलर रोड बनाने वाले देशों की श्रेणी में शामिल होने के लिए भारत ने भी प्रयास शुरू कर दिया है। पहले गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड स्थित राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान में शोध किया जाएगा, फिर रोड का निर्माण शुरू किया जाएगा।
वैसे बहुत अधिक शोध करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि दुनिया के कई देशों में रोड का निर्माण हो चुका है। वाहन दौड़ेंगे, बिजली भी पैदा होगी सोलर रोड बनाए जाने से कई फायदे होंगे।
इसके ऊपर वाहन भी दौड़ेंगे और बिजली भी पैदा होगी। सोलर रोड न टूटे, इसके लिए सोलर टाइल्स बनाने पर जोर दिया जाएगा। छोटे-छोटे टाइल्स को आपस में जोड़ देने से टूटने की संभावना न के बराबर रह जाएगी।
एक तरीका और भी है कि नीचे सोलर पैनल बिछाकर ऊपर रोड इस तरह से बनाया जाता है कि सूर्य की किरणें छिद्रों के माध्यम से पैनल पर पहुंच सकें।
वैसे दुनिया के जिन देशों ने सोलर रोड बनाया है, उनमें से अधिकतर ने सोलर टाइल्स से ही बनाया है। इसे बनाने में अधिक समय नहीं लगता है। साथ ही टूटने पर टाइल्स को बदलना आसान होता है।
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के उप महानिदेशक संजय कुमार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन अस्तित्व में आया है।
इसका मुख्यालय भी अपने देश में ही है। ऐसी स्थिति में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतर से बेहतर करने की सबसे अधिक जिम्मेदारी भी अपने देश की है।
इसे देखते हुए सोलर रोड बनाने की दिशा में जल्द ही शोध शुरू किया जाएगा। आने वाला समय सोलर क्रांति का है। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए आने वाले समय में अधिकतर चीजें सोलर आधारित होंगीं।

बढ़ती दिखाई दे रही तीन तलाक बिल को लेकर राज्यसभा में सरकार की मुश्किल

एकसाथ तीन तलाक बिल को लेकर राज्यसभा में सरकार की मुश्किल बढ़ती दिखाई दे रही है। बुधवार को सदन में बिल पेश होने के बाद कांग्रेस के बदले हुए रूख ने सरकार को परेशानी में डाल दिया वहीं भाजपा के सहयोगी दल भी इसका विरोध करते दिखे। इसके बाद वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। माना जा रहा है कि गुरुवार को भी सदन में इस बिल पर विपक्ष का रूख सरकार के पक्ष में रहने की उम्मीद नहीं है।
बुधवार को बीजद, तेदेपा भी विपक्ष के साथवित्त मंत्री की इस दलील के बावजूद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा और राजद समेत 17 दल विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग पर अड़े रहे। राजग की सहयोगी तेदेपा के अलावा बीजद जैसे दल भी इस पर विपक्ष के साथ दिखे।
इससे पहले मुस्लिम महिलाओं को एकसाथ तीन तलाक की कुप्रथा से आजादी दिलाने वाला यह विधेयक राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच पेश तो हो गया, लेकिन इसे पारित नहीं कराया जा सका। कांग्रेस सहित 17 विपक्षी दल बिल को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) में भेजने की जिद पर अड़े रहे। भारी हंगामे की वजह से सदन को स्थगित करना पड़ा। राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने लोकसभा में समर्थन करने और उच्च सदन में अवरोध खड़ा करने के लिए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।
जेटली ने विपक्ष की मांग को अनुचित बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक संबंधी फैसले के मद्देनजर छह महीने के भीतर कानून बनाना जरूरी है। 22 फरवरी को छह माह की अवधि पूरी हो रही है। इसीलिए यह विधेयक तत्काल पारित होना चाहिए। प्रवर समिति में भेजने की विपक्ष की रणनीति इसे लटकाने का प्रयास है।
नेता सदन और नेता विपक्ष के बीच सदन में विधेयक पेश करने को लेकर भी घमासान हुआ। विपक्ष तत्काल तलाक पर विधेयक से पहले महाराष्ट्र की दलित हिंसा पर चर्चा की मांग पर अड़ा था। मगर उपसभापति पीजे कुरियन के प्रयासों से भारी हंगामे के बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पेश किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा से बिल पारित होने के बाद भी तत्काल तलाक की घटनाएं सामने आ रही हैं। मुस्लिम महिलाओं को हक दिलाने के लिए इसे तत्काल पारित किया जाना चाहिए। मत विभाजन पर अड़ा विपक्षउपसभापति ने विपक्ष के दोनों संशोधन प्रस्तावों को वैध माना। इसके बाद घमासान बढ़ गया और विपक्ष मत विभाजन की मांग करने लगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष का घमासान थमता नहीं देख उपसभापति ने सदन पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।
-245 सदस्यीय राज्यसभा में सत्तारूढ़ राजग के पास 88 सांसद हैं। इनमें अकेले भाजपा के पास 57 सांसद हैं।
-कांग्रेस के 57, सपा के 18, बीजद के 8, अन्नाद्रमुक के 13, तृणमूल के 12 और राकांपा के 5 सांसद हैं।
-सरकार को सभी दलों का साथ मिल जाता है, तो भी बिल पारित कराने के लिए 35 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।
किसी भी विधेयक को कानूनी रूप देने के लिए दोनों सदनों से पास करवाना जरूरी होता है। अब गुरुवार को इस बिल का भविष्य तय होगा। हालांकि, सदन का गणित देखते हुए बिल पारित होने की राह मुश्किल दिख रही है और इसके प्रवर समिति में जाने के प्रबल आसार हैं।
संसद अपने कामकाज निपटाने के लिए कई तरह की समितियों का गठन करती है। संसदीय समितियां दो तरह की होती हैं, प्रवर और स्थायी। प्रवर समिति का गठन किसी खास मामले या उद्देश्य के लिए किया जाता है। रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत कर दिए जाने के बाद उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। स्थायी समिति का काम निश्चित होता है।

चुनौती है चीन की नई हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल

चीन की नई हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल को भारत और जापान के साथ अमेरिका के लिए भी चुनौती बताया जा रहा है। टोक्यो की “डिप्लोमेट” पत्रिका ने पिछले महीने अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया था कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की रॉकेट फोर्स ने नई मिसाइल “हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल” (एचजीवी) का परीक्षण किया है। इसे डीएफ-17 नाम दिया गया है। इसका पहला परीक्षण बीते एक नवंबर और दूसरा दो हफ्ते बाद किया गया। दोनों परीक्षण सफल रहे और यह मिसाइल साल 2020 तक तैनात कर दी जाएगी। यह मिसाइल परीक्षण के दौरान करीब 1400 किमी तक गई थी।
साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने मंगलवार को बीजिंग के सैन्य विश्लेषक झोउ चेनमिंग के हवाले से कहा, “पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में एचजीवी बेहद जटिल है और इसे मार गिराना मुश्किल है। अमेरिका, जापान और भारत को चीन की एचजीवी तकनीक के विकास से चिंतित होना चाहिए।
यह जापान में सैन्य अड्डों और भारत में परमाणु रिएक्टरों तक शीघ्रता और ज्यादा सटीकता के साथ पहुंच सकती है।” पीएलए के पूर्व सदस्य सांग झोंगपिंग ने कहा कि एचजीवी हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल डीएफ-41 के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 12 हजार किमी तक है। यह महज एक घंटे के भीतर अमेरिका के किसी भी स्थान तक मार कर सकती है।
मकाऊ के सैन्य पर्यवेक्षक एंटोनी वांग डोंग ने कहा कि एचजीवी अमेरिकी मिसाइल रोधी प्रणाली थाड तक को तबाह कर सकती है। उत्तर कोरिया के हमले से बचाव के लिए थाड को दक्षिण कोरिया में तैनात किया गया है।