सहयोगियों के लिए अच्छा दोस्त साबित होगा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में अपना पहला संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने ना सिर्फ इस्लामिक आतंक को खत्म करने की बात कही बल्कि नॉर्थ कोरिया को भी साफ चेतावनी दे डाली।
उत्तर कोरिया पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि किम जोंग उन (उत्तर कोरिया का तानाशाह) की परमाणु शक्ति संपन्न सत्ता अगर अपने पड़ोसियों के लिए खतरा बनी तो उत्तर कोरिया को तबाह करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के पास काफी ताकत और धैर्य है, लेकिन अगर उसे खुद का या अपने सहयोगियों का बचाव करना पड़ा तो हमारे पास उत्तर कोरिया को तबाह करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ‘रॉकेट मैन’ (किम जोंग उन) अपने और अपनी सत्ता के लिए आत्मघाती अभियान पर है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका तैयार है, चाहता है और सक्षम है, लेकिन उम्मीद है कि इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।’
ट्रंप ने आगे कहा, किसी भी शासन ने अपने लोगों का उतना अपमान नहीं किया, जितना उत्तर कोरिया ने किया है। परमाणु हथियारों को लेकर उत्तर कोरिया के बेपरवाह रवैये ने पूरी दुनिया को धमकाने का काम किया है।
वहीं इस्लामिक आतंक पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका कट्टर इस्लामी आतंकवाद को खत्म करके रहेगा। उन्होंने कहा कि आतंकियों को वह अपने देश या दुनिया के टुकड़े करने नहीं दे सकते।
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दुनिया के नेताओं से कहा, आतंकी और चरमपंथी दुनिया के हर कोने में मजबूत हुए हैं और फैल रहे हैं। वक्त आ गया है जब आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद और सुरक्षित पनाह मुहैया कराने वाले देशों को बेनकाब किया जाए और उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाए।
उन्होंने कहा कि सभी जिम्मेदार देशों को साथ मिलकर आतंकियों और उन्हें प्रेरित करने वाले इस्लामी चरमपंथियों का मुकाबला करना चाहिए। यहां यह उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ही ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकियों को सुरक्षित पनाह मुहैया कराने के लिए कड़ी चेतावनी दी थी।
ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को अमेरिका के लिए ‘शर्मिदगी’ करार दिया। लिहाजा माना जा रहा है कि अमेरिका या तो इस समझौते को रद कर सकता है या कुछ नई शर्ते लगा सकता है। ट्रंप ने कहा, ‘विश्वास कीजिए, यही समय है जब पूरी दुनिया को हमारे साथ मिलकर ईरान सरकार से मौत और विनाश की अपनी खोज समाप्त करने की मांग करनी चाहिए।’
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का राष्ट्रपति होने के नाते मेरा दायित्व है कि मैं अमेरिकी लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा करूं। यहीं काम सभी राष्ट्राध्यक्षों का है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया और खासतौर पर अपने सहयोगियों के लिए अच्छा दोस्त साबित होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, सीरिया और इराक में आइएस को हराने में हमें बड़ी कामयाबी मिली है। हम जॉर्डन, तुर्की और लेबनान का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं कि उन्होंने अपने यहां सीरिया के शरणार्थियों को पनाह दी।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के लिए यह बड़ी शर्मिंदगी की बात है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कुछ ऐसी सरकारें भी बैठी हुई हैं, जिनका रिकॉर्ड इस मामले में बेहद खराब है। वेनेजुएला के लोग तबाह हो रहे हैं, एक जिम्मेदार दोस्त होने के नाते यह हमारा लक्ष्य है कि हम उनकी मदद करें और लोकतंत्र स्थापित करें।

नाइजीरिया में राहत समाग्री हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत

आंतरिक गृहयुद्ध से जुझ रहे नाइजीरिया में राहत समाग्री प्राप्त कर रहे लोगों पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और लगभग 43 लोग घायल हो गये।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाइजीरिया के मशालरी गांव में 11 बजकर 10 मिनट पर दो आत्मघाती हमला हुआ जिसमें राहत समाग्री प्राप्त कर रहे लोगों को निशाना बनाया गया। इस हमले में आम नागरिकों की मौत हुई है। नाइजीरिया में आंतरिक उठापठक के कारण अंदरुनी हालात बेहद खराब हैं।
तेल संपदा से धनी नाइजीरिया में हिंसा अब आम बात हो गई है। पिछले कुछ दिनों में यहां के हालात दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। इस घटना में स्थानीय चरमपंथी संगठन के हाथ होने की संभावना जताई जा रही है।

बिजली भी पैदा करेगा रगों में बहता खून

आपकी रगों में बहता खून आपमें जोश पैदा करता है और काम का जूनून भी लेकिन अब यही खून बिजली भी पैदा करेगा। जी हां, सुनकर थोड़ा आश्चर्य जरूर होता है लेकिन यह सच है। दरअसल चीन में एक ऐसा नेनो जनरेटर विकसित किया गया है जो नसों में बहते खून से बिजली पैदा करेगा। चीनी वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया यह जनरेटर छोटा होने के साथ ही लाइटवेट भी है।
खबरों के अनुसार चीन के फुडन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक मिलीमीटर से भी कम मोटा फाइबर तैयार किया है, जो पतली ट्यूब या रक्त वाहिका (धमनियों) में नमकीन घोल से घिरे होने पर बिजली उत्पन्न करता है।
चीन के वैज्ञानिक द्वारा तैयार किए गए फाइबर के निर्माण का सिद्धांत बेहद आसान है। इसमें कार्बन नैनोट्यूब की एक क्रमबद्ध सारणी लगातार एक पॉलीमरिक कोर के चारों ओर लपेटी जाती है। कार्बन नैनोट्यूब को एक इलेक्ट्रोएक्टिव के रूप में जाना जाता है। इन्हें शीट्स में काता और श्रेणीबद्ध किया जा सकता है। इलेक्ट्रोएक्टिव धागों में कार्बन नैनोट्यूब शीट्स को आधे माइक्रोन से भी कम मोटाई के फाइबर कोर को लेपित किया जाता है।
वैज्ञानिकों ने रक्तों ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए धागे या फाइबर शेपड फ्लूडिक नैनोजनरेटर (एफएफएनजी) को इलेक्ट्रोड्स से जोड़ा जाता है और इसे बहते पानी या नमकीन घोल में डुबोया जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, शोध के दौरान एफएफएनजी और घोल के रिलेटिव मोशन के कारण बिजली उत्पन्न हुई। इससे उत्पन्न हुई बिजली की क्षमता अन्य विधियों से पैदा होने वाली बिजली से 20 गुना अधिक थी। चीन के वैज्ञानिकों के मुताबिक, मेडिकल एप्लीकेशंस में इसका प्रयोग खून से बिजली उत्पन्न करने में किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने मेंढक की तंत्रिकाओं पर इसकी जांच कर इसकी सफलता की पुष्टि कर दी है।

मैक्सिको में सौ साल का सबसे भीषण भूकंप सायरन सुनकर मची अफरा-तफरी

मैक्सिको में सौ साल का सबसे भीषण भूकंप आया है। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 8.2 मापी गई है। भूकंप के झटकों से सबसे ज्यादा दक्षिणी प्रांत ओक्साका प्रभावित हुआ है। जान गंवाने वाले 60 लोगों में से 20 इसी राज्य में मारे गए। इमारतों को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।
भूकंप की तीव्रता को देखते हुए तटवर्ती इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई। भूकंप का झटका सबसे पहले स्थानीय समय के अनुसार गुरुवार रात 11:49 बजे तटवर्ती शहर टोनाला (दक्षिणी प्रांत चियापस) से करीब सौ किलोमीटर दूर महसूस किया गया। इससे पहले वर्ष 1985 में मैक्सिको में 8.1 की तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें दस हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे।
मैक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो ने कहा, “तीव्रता के लिहाज से यह पिछले सौ साल का सबसे भीषण भूकंप है। देश की 12 करोड़ की आबादी में से पांच करोड़ लोगों ने भूकंप के झटकों को महसूस किया।” नीटो ने राष्ट्रीय आपदा रोकथाम केंद्र पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। वह खुद राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। भूकंप के झटके केंद्र से करीब 800 किलोमीटर दूर मैक्सिको सिटी तक महसूस किए गए। ग्वाटेमाला में भी धरती डोली है।
आधी रात को भूकंप की चेतावनी वाला सायरन सुनकर अफरातफरी मच गई। बदहवास लोग जिस हालत में थे, उसी स्थिति में घर से बाहर भागे। प्राकृतिक आपदा से ओक्साका प्रांत में सबसे ज्यादा तबाही हुई है। अकेले जुचितान शहर में 17 की जान चली गई।
इमरजेंसी रिस्पांस एजेंसी के निदेशक लुईस फिलिप प्यूंटे ने कई मकान के ध्वस्त होने की जानकारी दी है। तबास्को प्रांत के एक अस्पताल में बिजली जाने से एक बच्चे की मौत हो गई। अधिकारियों ने मरने वालों की तादाद बढ़ने की आशंका जताई है। देश के 11 राज्यों में स्कूलों को बंद रखने का निर्देश दिया गया है।

सीरिया के सैन्य ठिकानों पर हमला दो सीरियाई जवान मारे गए

इजरायली लड़ाकू विमान ने गुरुवार सुबह सीरिया के सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इसमें दो सीरियाई जवान मारे गए हैं। सीरियाई गृहयुद्ध की निगरानी करने वाली संस्था सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने इस हमले की पुष्टि की है। इस हमले में सीरिया के साइंटिफिक एंड रिसर्च सेंटर और पास में स्थित सैन्य शिविर को निशाना बनाया गया।
अमेरिका इस रिसर्च सेंटर में रासायनिक हथियार बनाए जाने का आरोप लगाता रहा है। इस सैन्य शिविर में ईरानी जवानों और हिजबुल्ला लड़ाकों को कई बार देखा जा चुका है। हमले पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए सीरियाई सेना ने एक बयान में कहा कि “इजरायल ने हामा प्रांत के मसयाफ शहर को निशाना बनाया”। सीरिया ने कहा कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस आक्रामक कदम से क्षेत्र की शांति और स्थायित्व खतरे में पड़ सकता है।
यह हमला संयुक्त राष्ट्र द्वारा सीरियाई सरकार को अप्रैल में हुए रासायनिक हमले के लिए जिम्मेदार ठहराने की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के ठीक एक दिन बाद किया गया। सीरिया हालांकि वर्ष 2013 में ही रासायनिक हथियार कार्यक्रम को बंद करने की घोषणा कर चुका है। मानवाधिकार संस्था के मुताबिक हमले की चपेट में आए सैन्य शिविर का इस्तेमाल मिसाइल रखने के लिए किया जाता है।
इजरायल और हिजबुल्ला के बीच पिछले कई वर्षों से संघर्ष चल रहा है। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के खिलाफ जारी मुहिम में हिजबुल्ला लड़ाके सीरियाई सेना की ओर से लड़ रहे हैं। हिजबुल्ला नेता सैयद हसन नसरल्ला ने हाल में दमिश्क की यात्रा कर असद से मिलने की बात कही थी। इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार याकोव एमिडरोर ने हमले को नसरल्ला की सीरिया यात्रा से जोड़ा है। याकोव ने सीरियाई रिसर्च सेंटर से हिजबुल्ला को हथियार मुहैया कराने का आरोप लगाया है। वहीं, लेबनान ने इजरायली लड़ाकू विमान द्वारा उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने की बात कही है। इजरायल के इस हमले से पहले से ही संघर्ष की आग में झुलस रहे सीरिया के हालात और बिगड़ सकते हैं।

चीन में तीन स्कूलों में विषाक्त भोजन से 120 बच्चे बीमार

पूर्वी चीन में जियांग्सी प्रांत के छोटे बच्चों के तीन स्कूलों में विषाक्त भोजन से करीब 120 बच्चे बीमार पड़ गए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। नानचांग शैक्षणिक विभाग ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बच्चों के प्रांतीय सरकारी अस्पताल में कम से 120 बच्चों की चिकित्सकीय जांच की गई है।
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इसमें से 36 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि 62 बच्चों को चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है। इनमें से 22 बच्चों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। बताया गया कि सोमवार दोपहर स्कूल से घर लौटने के बाद बच्चों में उल्टी और पेट दर्द के लक्षण दिखाई दिए थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नगरपालिका का स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग स्थानीय खाद्य एवं दवा प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर इस घटना की जांच कर रहे हैं।

पाकिस्तान आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं कहकर किया घोषणापत्र सिरे से खारिज

पाकिस्तान ने ब्रिक्स के घोषणापत्र को सिरे से खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि उनका देश आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं है। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। पाकिस्तान ने उलटे अफगानिस्तान पर आतंकियों को शरण देने का आरोप लगाया है।
उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में भारत की पहल पर सभी सदस्यों ने आतंकवाद की भर्त्सना करते हुए कुछ ऐसे संगठनों पर लगाम कसने की बात कही है जिन्हें पाक सरकार समर्थन देती रही है। ब्रिक्स का यह पैंतरा पाक को रास नहीं आ रहा।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर ने कहा कि उसकी धरती पर जो भी आतंकी संगठन सक्रिय रहे थे उन सभी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई है। अब केवल उनके अवशेष बचे हैं। उनको भी नेस्तनाबूद करने के लिए सरकार रणनीति बना रही है। जियो टीवी पर दिए साक्षात्कार में उन्होंने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान का 40 फीसद हिस्सा आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित जगह है।
अफगानिस्तान में अमेरिका के महानिरीक्षक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 407 जिलों में से केवल 57 फीसद ही सरकार के नियंत्रण में रह गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाक को लेकर दिए गए ताजा वक्तव्य पर उनका कहना था कि विदेश मंत्री क्षेत्रीय साझेदारों से विचार विमर्श के बाद अमेरिका का रुख करेंगे।
उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि पाकिस्तान लगातार चेतावनी के बाद भी अपने रवैये में सुधार नहीं कर रहा है। उसके यहां पोषित आतंकी संगठनों ने अमेरिका को भी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि पाक को ऐसा सबक सिखाया जाएगा जो हमेशा याद रहेगा।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से की मुलाकात

ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने गए पीएम मोदी ने डोकलाम के बाद पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मंगलवार को मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही बड़े पड़ोसी हैं और दुनिया के उभरते देश हैं।
जिनपिंग ने कहा कि हम भारत के साथ पंचशील के सिद्धांतों से मार्गदर्शन लेते हुए काम करना चाहते हैं। भारत और चीन के स्वस्थ्य रिश्ते दोनों देशों के लोगों की रूचि के लिए सही है।
वहीं पीएम मोदी ने जिनपिंग को सफल ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन के लिए बधाई दी।
उस द्विपक्षीय मुलाकात के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह मुलाकात अच्छी रही और दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने पर बात हुई है। दोनों ही देशों ने सीमा पर शांति बढ़ाने को लेकर सहमति जताई है साथ ही मतभेदों का टकराव में ना बदलने पर भी चर्चा की गई।
इस मुलाकात से पहले भारत को बड़ी सफलता मिली और सोमवार को सभी ब्रिक्स सदस्य देशों ने एक सुर में आतंकवाद की निंदा की। इस दौरान जारी हुए डिक्लेरेशन में पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों मसलन जैश-ए-मुहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हक्कानी नेटवर्क का नाम लिया गया।
43 पेज के शियामीन घोषणा-पत्र में चीन समेत पांचों सदस्य देशों ने आतंकवाद की एक स्वर से निंदा करते हुए उसका मिलकर मुकाबला करने का संकल्प लिया। आतंक पर अब तक पाक का समर्थन करने वाला चीन भी चार अन्य देशों के दबाव में झुकने को मजबूर हुआ। पुतिन, जिनपिंग, मोदी, जूमा और टेमर एकजुट
शियामीन शिखर सम्मेलन की सबसे ब़़डी उपलब्धि आतंकवाद के मुद्दे पांचों सदस्य देशों के शासन प्रमुखों का एकजुट होना रहा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी, ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमर और द अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जूमा ने आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की।
चीन ने ब्रिक्स सम्मेलन में आतंकवाद का तो विरोध कर दिया, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या वह भारत के दुश्मन मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने का समर्थन करेगा? अब तक वह अमेरिका व अन्य देशों के इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो का उपयोग कर चुका है। इस बारे में मीडिया ने जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग से चीन का रख जानना चाहा तो उन्होंने सीधा कोई जवाब नहीं दिया।

फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का फेसबुक कई बार ब्लॉक होने से अब ब्लॉक नहीं होता

मार्क जकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रेसिला चान के फेसबुक प्रोफाइल्स को आप ब्लॉक नहीं कर सकते हैं। मार्क या प्रेसिला चान की प्रोफाइल पर जाकर आप ब्लॉक बटन प्रेस करेंगे, तो आपकी स्क्रीन ‘ब्लॉक एरर’ लिखा हुआ एक बड़ा बोर्ड दिखाई देगा जो बताएगा कि मार्क या प्रेसिला को ब्लॉक करने में दिक्कत आ रही है।
ऐसे में आपको लगता होगा कि फेसबुक के मालिक होने के कारण उन्हें प्रिफरेंशियल ट्रीटमेंट दिया जा रहा होगा। मगर, ऐसा नहीं है। इसके लिए उन्हें कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया गया है, बल्कि ऐसा टेक्निकल प्रॉबलम की वजह से है।
दरअसल, मार्क और प्रेसिला को इतनी बार ब्लॉक किया जा चुका है, कि साइट को यह फंक्शनैलिटी ही बंद करनी पड़ी। यह बैन करीब 2010 से है। फेसबुक का कहना है कि उन दोनों को कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिल रहा और उनके पोस्ट्स इतने नापसंद किए जाते हैं कि ऑटोमेटेड सिस्टम्स को ऐसा करने पर मजबूर होना पड़ा।
गौरतलब है कि मार्क जकरबर्ग अपने पर्सनल पेज पर फेसबुक के अपडेट्स, अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी खबरें या समसामयिक मामलों पर अपने विचार पोस्ट करते हैं। फेसबुक ऐलगोरिथम की मदद से ये पोस्ट्स लोगों की न्यूज फीड में जाती हैं। जो लोग इन पोस्ट्स को नहीं देखना चाहते, वे इन्हें ब्लॉक कर देते थे। इसके बाद साइट ने इनके प्रोफाइल पर ब्लॉकिंग को बैन करने का फैसला लिया।
इस मामले में फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह एरर किसी एक खास अकाउंट के लिए नहीं है। यह हर उस अकाउंट पर लागू होती है, जिसे कई बार ब्लॉक किया जाएगा। हम अपने सिस्टम्स को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं और इसपर खास ध्यान दे रहे हैं।

भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर तनातनी पर ट्रम्प प्रशासन की स्थिति असहज

एक अमेरिकी विशेषज्ञ का मानना है कि भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर तनातनी पर ट्रम्प प्रशासन की स्थिति असहज हो गई थी। वह भारत और चीन के विवाद में पड़ना नहीं चाहता था। खासकर ऐसे समय में जब उसे उत्तर कोरिया से निपटने के लिये चीन की मदद की आवश्यकता है।
द हेरिटेज फाउंडेशन में दक्षिण एशिया पर रीसर्च फेलो और साउथ एशिया नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (व्हाइट हाउस) के नवनियुक्त निदेशक जेफ स्मिथ ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि डोकलाम संकट की वजह से ट्रम्प प्रशासन की स्थिति बेहद असहज हो गई थी। यह वो विवाद था जिसमें वह बिलकुल नहीं पड़ना चाहते थे। हालांकि स्मिथ ने यह स्वीकार किया कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि वास्तव में ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले पर आपस में आतंरिक स्तर पर क्या चर्चा की।
स्मिथ ने कहा कि इस विवाद के दौरान अगर आप अमेरिकी प्रशासन के बयानों के पीछे के अर्थ को समझें, आपको लगेगा कि वास्तव में जापान भारत की इस स्थिति का ज्यादा समर्थन करता है। अगर चीन भारत से बातचीत के लिये डोकलाम से हटने की पूर्व शर्त लगा रहा था तो ट्रम्प प्रशासन दोनों पक्षों को संकेत दे रहा था कि वह भारत का पक्षधर है। लेकिन आखिर में हुआ क्या। चीन का रुख लचीला था कि वह किसी समझौते तक पहुंच सके। आखिर में आपसी सहमति से दोतरफा समझौता करते हुए दोनों देशों ने न्यूनतम जरूरतों को पूरा किया।
उन्होंने कहा हालांकि भारत ने कई मायनों में चीन और समूचे विश्व को यह दिखा दिया कि उसके उच्च मानक हैं। वह भले ही नरमी से बात करे लेकिन उसकी ताकत में कहीं कोई कमी नहीं है। भारत ने अपना लक्ष्य स्पष्ट कर दिया और उसे हासिल भी कर लिया।
उल्लेखनीय है कि विगत सोमवार को भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर 75 दिन चला विवाद खत्म हुआ। लिहाजा दोनों देशों ने अपनी सेनाएं डोकलाम से हटा लीं। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन में शामिल होने के लिये चीन जाने पर हामी भरने से सिर्फ एक दिन पहले हुआ।