मोहम्मद बिन सलमान को कहा जाता है मिस्टर एवरीथिंग

सऊदी अरब में बड़ा बदलाव हुआ है। यहां किंग सलमान ने भतीजे 57 वर्षीय मोहम्मद बिन नायेफ के स्थान पर अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस घोषित किया है। यानी किंग के बाद अब राजगद्दी पर उनके बेटे का हक होगा। साथ ही किंग ने अपने इस 31 वर्षीय प्यारे बेटे को देश का डिप्टी प्राइम मिनिस्टर भी बना दिया है।
– मोहम्मद बिन सलमान आज सऊदी अरब की सत्ता में सबकुछ संभालते हैं, इसीलिए डिप्लोमेट इन्हें ‘मिस्टर एवरीथिंग’ पुकारने लगे हैं। शाही परिवार की नई पीढ़ी की अगुवाई कर रहे मोहम्मद बिन सलमान न केवल देश की अर्थव्यवस्था संभाल रहे हैं, बल्कि रक्षा मंत्री भी हैं।
– पिछले साल किंग अब्दुल्ला के निधन के बाद मोहम्मद बिन सलमान के पिता ने सत्ता संभाली थी। तभी से इनकी ताकत और प्रभाव तेजी से बढ़ी है।
– पश्चिमी देशों के डिप्लोमेट्स भी मोहम्मद बिन सलमान का लोहा मानते हुए उन्हें बहुत होशियार और बुद्धिमान मानते हैं। मोहम्मद बिन सलमान काउंसिल ऑफ इकोनॉमिक एंड डेवलपमेंट अफेयर्स के चेयरमैन हैं। देश में कच्चे तेल का सारा कामकाज संभालने वाली संस्था सऊदी अराम को भी इन्हीं के अधीन हैं।

पाकिस्तान में फांसी की सजा पा चुके कुलभूषण जाधव को लेकर बड़ा बासित का बयान

पाकिस्तान में फांसी की सजा पा चुके कुलभूषण जाधव को लेकर पाकिस्तानी उच्चयुक्त अब्दुल बासित का बड़ा बयान आया है। बासित ने कहा है कि जाधव की फांसी पर पुर्विचार की संभावना है।
बासित ने द हिंदू से अपने कार्यकाल में भारत-पाकिस्‍तान संबंधों के बारे में बात करते हुए कहा कि जब तक कुलभूषण जाधव का मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में है, तब तक उन्हें फांसी नहीं दी जाएगी।
बासित ने कहा कि भले ही कोर्ट की ओर से फैसला आने में दो-तीन साल लग जाएं, लेकिन उससे पहले फांसी नहीं दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वो चाहते हैं इस मामले में जल्द कोर्ट का फैसला आए। बता दें कि अगले माह बासित का कार्यकाल समाप्‍त हो रहा है।
अब्दुल बासित ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के अलावा भी कुलभूषण जाधव के पास फांसी की सजा से बचने के उपाय हैं। बासित ने बताया कि ‘कोर्ट ऑफ अपील’ से यदि जाधव की अपील रद्द हो जाती है, तो उनके पास अपील का मौका है। उन्होंने कहा कि जाधव पहले आर्मी चीफ जनरल से दया की फरियाद कर सकते हैं, उसके बाद राष्ट्रपति के पास भी दया याचिका दी जा सकती है।
पाकिस्तान ने 46 वर्षीय पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को मार्च, 2016 में गिरफ्तार किया था। जिसके बाद पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों के आरोपों में मौत की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ भारत ने 8 मई को आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने फांसी पर रोक लगा दी। फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में लंबित है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच कार्गो कॉरिडोर शुरू

भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए एयर कार्गो कॉरिडोर को आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। इसके माध्यम से पहली फ्लाइट जब भारत पहुंची तो इसमें 60 अफगानी हींग भेजा गया है।
इस पहली फ्लाइट की आगवानी करने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज, नागरिक उड्डयन मंत्री गजपति राजू, विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर वहां मौजूद थे।
हवाई कॉरिडोर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के साथ चारों ओर से जमीन से घिरे अफगानिस्तान को भारत के बाजारों तक पहुंच देगा। इससे अफगानिस्तान के किसानों को खराब होने वाली वस्तुओं की भारतीय बाजारों तक जल्द और सीधी पहुंच से लाभ होगा।
दोनों देशों के बीच पहले एयर कार्गो कॉरिडोर का उद्घाटन अफगान के राष्‍ट्रपति अशरफ गनी ने किया। जिसके बाद पहला मालवाहक विमान 60 टन हींग लेकर काबुल से दिल्ली पहुंचा है। 2016 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी के बीच इस कॉरिडोर पर निर्णय लिया गया था।
मोदी ने ट्वीट करके कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधा हवाई संपर्क समृद्धि की राह खोलेगा। पीएम ने कहा, ‘मैं राष्ट्रपति अशरफ गनी को उनकी इस पहल के लिए धन्यवाद देता हूं।’
मालूम हो कि चारों तरफ से विदेशी जमीनों से घिरे अफगानिस्तान का आयात और निर्यात पड़ोसी देशों पर निर्भर है। लेकिन, वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आतंकियों को पनाह देने जैसे आरोप को लेकर तनावपूर्ण संबंध हैं।
राष्ट्रपति बनने के बाद अशरफ गनी पहली बार 2015 में भारत दौरे पर आए थे। तभी एयर कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया था। इससे पहले सड़क के जरिए अफगानिस्‍तान से प्रोडक्‍ट भारत आते हैं।
अब तक अपने विदेशी व्‍यापार के लिए अफगानिस्‍तान पड़ोसी देश पाकिस्‍तान के पोर्ट पर निर्भर है। इसे भारत तक पहुंचने के लिए पाकिस्‍तान के जरिए आना पड़ता है लेकिन इस मार्ग से भारत को वहां सामान निर्यात की अनुमति नहीं है। नए एयर कॉरिडोर के जरिए अफगानिस्‍तान और भारत के बीच व्‍यापार को तीन साल में 800 मिलियन से 1 बिलियन और अगले दस सालों में 10 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्‍य है।
अगले हफ्ते कंधार से दूसरी कार्गो 40 टन सूखे फल के साथ भारत आएगा। मांग के अनुसार, हर हफ्ते काबुल और कंधार से अनेकों कार्गो विमान भारत आएंगे। अफगानिस्‍तान में भारतीय राजदूत मनप्रीत वोहरा ने राष्‍ट्रपति अशरफ गनी को कहा, ‘हम विभिन्‍न तरीकों से आपकी सहायता जारी रखेंगे।‘

विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने की चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात

विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने रविवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की और द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार पर चर्चा की।
वह ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने बीजिंग गए हैं। इस साल सितंबर में ब्रिक्स का सम्मेलन चीन के शियामन शहर में होगा और इसका एजेंडा तय करने के लिए बीजिंग में बैठक हुई।
वीके सिंह ने कहा कि भारत चीन के साथ सामरिक सहयोग के रिश्तों को मजबूत करना चाहेगा। उनका कहना है कि चीन के विदेश मंत्री के साथ बातचीत में पीएम नरेंद्र मोदी व चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एजेंडा आगे बढ़ाया गया।
ब्रिक्स का सम्मेलन पिछली बार गोवा में आयोजित किया गया था। उस दौरान भारत इसका अध्यक्ष था जबकि इस बार चीन इसकी अगुवाई कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि चीन व भारत के बीच कई मुद्दों को लेकर गतिरोध कायम है। एनएसजी ग्रुप में भारत की सदस्यता का चीन लगातार विरोध कर रहा है तो जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी के मामले में चीन संयुक्त राष्ट्र संघ में अड़ंगा डाल चुका है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर भी दोनों देशों के बीच विवाद लगातार चल रहा है। भारत चाहता है कि पाकिस्तान के साथ चीन का यह प्रोजेक्ट आगे न बढ़ सके, लेकिन चीन कुछ भी सुनने को तैयार नहीं।

कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने के लिए पाकिस्तान अनर्गल ने कर दिया दावा

कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने के लिए पाकिस्तान किस हद तक जा सकता है उसका अनर्गल दावा इसका नया उदाहरण है।
वैश्विक कूटनीति को ताक पर रखते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दावा कर दिया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से कहा है कि वह भारत व पाकिस्तान के लंबित मामलों में हस्तक्षेप करेंगे। शरीफ सरकार इसका स्वागत करती है।
बयान आने के कुछ ही देर बाद भारत ने इस तरह के बयान को पूरी तरह से आधारहीन करार दिया। इसके बाद भारत में रूसी दूतावास ने भी इस तरह के किसी भी आश्वासन या पुतिन व शरीफ के बीच इस आशय की किसी बातचीत से साफ इन्कार कर दिया।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि, रूस की तरफ से भारत के सामने इस तरह की कोई पेशकश नहीं की गई है। साथ ही रूस, भारत की स्थिति से पूरी तरह अवगत है।
रूस इस बात का समर्थन करता है कि पाकिस्तान के साथ भारत अपने सारे मसले शांति पूर्ण माहौल में द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाना चाहता है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब माहौल में आतंकवाद व हिंसा का हस्तक्षेप न हो।
नई दिल्ली में रूसी दूतावास के एक वरिष्ठ राजनयिक ने भी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया के बयान को ख्याली पुलाव बताया।
दरअसल, इस्लामाबाद में वहां के विदेश मंत्रालय के साप्ताहिक प्रेस कांफ्रेंस में जकारिया से पुतिन व शरीफ के बीच हुई बातचीत पर सवाल पूछा गया था।
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पुतिन ने शरीफ से कहा है कि वह भारत व पाक के बीच लंबित मामलों में हस्तक्षेप करना चाहते हैं।
यह पाकिस्तान के लिए अच्छा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक स्थाई सदस्य हस्तक्षेप करना चाहता है। यह संयुक्त राष्ट्र के लंबित मामलों को लागू करने में सहायक हो सकता है।
साफ है कि पाकिस्तान कश्मीर मसले का उदाहरण दे रहा था।
माना जा रहा है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शरीफ सरकार को घरेलू राजनीति में थोड़ी अहमियत दिलाने के लिए यह बयान दिया है।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शरीफ से मुलाकात नहीं की थी।

अमेरिका के 39 राज्यों की मतदान प्रणाली पर हमला

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल देने के मामले में लोगों को जितना बताया गया है, यह उससे कहीं ज्यादा व्यापक था। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि हैकर्स ने अमेरिका के 39 राज्यों की मतदान प्रणाली पर हमला किया। उन्होंने एक राज्य में कैंपेन फाइनेंस डाटाबेस में एक्सेस हासिल की और इलिनोइस में मतदाता डेटा को हटाने या बदलने की कोशिश की।
हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि हमलावर किसी नतीजे को नहीं बदल पाए। यह स्थिति इतनी गंभीर है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा ने असामान्य कदम उठाते हुए क्रेमलिन से शिकायत करने के लिए “रेड फोन” बैक चैनल्स का इस्तेमाल किया।
नवंबर के चुनावों के बाद ओबामा प्रशासन के अधिकारियों ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अमेरिका के चुनाव पर हमला कराया है और रूस पर प्रतिबंध लगा दिया। रायटर्स ने बाद में बताया कि डेमोक्रेट पार्टी के कार्यकर्ताओं को टार्गेट करते हुए रूसी हैकिंग के मामले में एफबीआई तीन अलग-अलग जांच कर रही थी।
अमेरिकी अधिकारियों की ताजी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीजें वास्तव में जितनी सोची गई थीं, उससे कहीं अधिक खराब थीं। जुलाई 2016 में इलिनॉइस चुनाव के अधिकारियों ने मतदाता डेटाबेस में घुसपैठ के मामले का पता किया, जिसके आधार पर जांचकर्ता आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल सिग्नेचर्स तक पहुंच गए। जांचकर्ताओं ने बाद में 37 अन्य अमेरिकी राज्यों में इसी तरह के हमलों का पता किया।
हैकर्स ने इलिनॉइस के मतदाता डेटाबेस को बदलने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई थी। नाम जाहिर नहीं करने के अनुरोध पर अधिकारी ने ब्लूमबर्ग से कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि कहीं यह रूसियों द्वारा एक अधिक आक्रामक हमले की तैयारी से पहले किया गया टेस्ट रन तो नहीं था।
द इंटरसेप्ट द्वारा प्राप्त एनएएसए दस्तावेजों के अनुसार, रूस की जीआरयू सैन्य खुफिया शाखा ने नवंबर के मतदान से पहले 122 स्थानीय चुनाव अधिकारियों के कंप्यूटरों पर कब्जा करने की कोशिश की थी। गौरतलब है कि हाल के दिनों तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जोरदार तरीके से इस बात से इंकार करते रहे हैं कि अमेरिकी चुनावों की हैकिंग में रूस के लोग शामिल थे।
हालांकि, इस महीने की शुरुआत में पुतिन ने स्वीकार किया था कि अमेरिकी चुनाव में रूसी हैकिंग सैद्धांतिक रूप से संभव थी। हालांकि, वह अब भी इस बात पर अड़े हुए हैं कि हैकिंग की घटना में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। एक पूर्व एफबीआई आधिकारिक ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया है।

उत्तर कोरिया ने गुरुवार को एक साथ कई मिसाइलें दागते हुए अमेरिका को चुनौती दी

उत्तर कोरिया ने गुरुवार को एक साथ कई मिसाइलें दागते हुए अमेरिका को चुनौती दी है। दक्षिण कोरिया के अनुसार उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण किया है और यह संभवतः जमीन से जहाज को निशाना बनाने वाली मिसाइले हैं।
अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच पिछले एक महीने के वक्त में नॉर्थ कोरिया चार मिसाइल परीक्षण कर चुका है। अमेरिका द्वारा लगातार नॉर्थ कोरिया को मिसाइल परीक्षण के लिए चेतावनी जारी की जा रही है लेकिन उस पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। अमेरिका कोरियाई द्वीप की तरफ अपने दो जंगी जहाज भेज चुका है।

कतर से 7 देशों द्वारा राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए जाने के बाद लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित

कतर से 7 देशों द्वारा राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए जाने के बाद इस खाड़ी देश में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित हो रही है। प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े उत्पादक इस देश कतर 99 फीसद खाद्य आयात पर निर्भर है। लिहाजा आने वाले दिनों में खाद्यान संकट को देखते हुए वहां लोग खाने-पीने की चीजों को खरीदने के लिए सुपर मार्केट में टूट पड़े हैं।
कतर की 22.4 लाख की आबादी पर इस नाकाबंदी का प्रभाव दिखने लगा है। लोगों को आशंका है कि आने वाले दिनों में खाने-पीने और जरूरत की वस्तुओं की किल्लत हो सकती है। वहीं, इस खाड़ी देश में रहने वाले अरब देश के लोगों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। नए निर्देशों के तहत उन्हें दो हफ्तों में कतर को छोड़कर जाना होगा। इसके अलवा मिस्र के तीन लाख नागरिकों का भविष्य भी अधर में है।
गौरतलब है कि चरमपंथी आतंकी समूहों का समर्थन करने को लेकर बहरीन, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, लीबिया और मालदीव ने सोमवार को कतर से राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए हैं। इन देशों ने कतर पर अल कायदा, आईएस और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे गुटों का समर्थन करने और खाड़ी के देशों में गड़बड़ी पैदा करने का आरोप लगाया।
अरब देशों ने सोमवार सुबह कतर से अपने हवाई, समुद्री और सड़क संपर्क काटने का ऐलान कर दिया। सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने अपने नागरिकों को कतर छोड़ने के लिए कहा है। इसके अलावा उन्हें कतर न जाने और कही से भी कतर न होते हुए आने की हिदायद दी है।
हालांकि, कतर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। कतर के अधिकारियों ने बाजारों और सुपरमार्केटों में सामान खरीदने पहुंच रहे लोगों को धैर्य रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न संकट नहीं है। इसके बाद कतर में जरूरी सामान की किल्लत पैदा हो गई है।
वहीं, भारत ने सऊदी अरब सहित अरब देशों द्वारा कतर से राजनयिक संबंध खत्म करने को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) का आंतरिक मामला बताया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत सिर्फ यह पता करने की कोशिश कर रहा है कि इस घटनाक्रम से उसके

अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत के ओरलैंडो शहर में गोलीबारी की घटना में महिला सहित पांच लोगों की मौत

अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत के ओरलैंडो शहर में सोमवार सुबह एक ऑफिस में गोलीबारी की घटना में महिला सहित पांच लोगों की मौत हो गई। गोलीबारी करने वाला उसी ऑफिस का पूर्व कर्मचारी था।
बाद में उसने खुद को भी गोली मार ली। उसकी भी मौत हो गई है। पुलिस का दावा है कि इस घटना के तार किसी आतंकी गतिविधि से नहीं जुड़े हैं।
ऑरेंज काउंटी शेरिफ कार्यालय (ओसीएसओ) के अनुसार, घटना ओरलैंडो के निकट व्यावसायिक इलाके स्थित एक ऑफिस में हुई। चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
एक घायल ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शेरिफ जेरी डेमिंग्स ने बताया कि गोलीबारी करने वाले को अप्रैल में इस ऑफिस से बर्खास्त कर दिया गया था।
सालभर पहले नाइटक्लब में हुई थी फायरिग
करीब एक साल पहले 12 जून, 2016 को ओरलैंडो के ही पल्स नाइटक्लब में गोलीबारी की घटना हुई थी। उस घटना में 49 लोग मारे गए थे और 58 घायल हुए थे। आधुनिक अमेरिका के इतिहास में यह सबसे दर्दनाक हादसा था।

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जॉन्ग की परमाणु संपन्न राष्ट्र बनने की सनक ने बढ़ा दी पश्चिमी देशों सहित जापान के लिए मुसीबतें

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जॉन्ग उन की परमाणु संपन्न राष्ट्र बनने की सनक ने कई पश्चिमी देशों सहित जापान के लिए मुसीबतें बढ़ा दी हैं। आशंका जताई जा रही है कि युद्ध की स्थिति में वह जापान पर मिसाइल हमला कर सकता है।
ऐसे में किसी भी संभावित मिसाइल हमले से बचने के लिए जापान ने इवैकुएशन ड्रिल (लोगों को निकालने की तैयारी) शुरू कर दी है। जापान के नौसेना और वायु सेना ने यूएस विमानवाहक पोतों के साथ जापान सागर में तीन दिवसीय संयुक्त सैन्य ड्रिल की शुरुआत की।
उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइल को जापानी क्षेत्र तक पहुंचने में 10 मिनट लगते हैं। जापान के अधिकारियों ने नागरिकों को सूचित किया है कि उन्हें देश पर मिसाइल हमला होने के 10 मिनट पहले सूचित किया जाएगा। इसलिए उन्हें हर समय तैयार रहना होगा और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में खुद का बचाव भी करना होगा।
सरकार ने “सशस्त्र हमलों और आतंकवाद” से बचने के लिए एक गाइड भी प्रकाशित की है। ड्रिल में शामिल 280 लोगों को एक संभावित विनाशकारी मिसाइल हमले के बारे में सतर्क करने के लिए लाउडस्पीकर से सतर्क किया गया। वहीं, साइरन्स की आवाज से एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय के बाहर खेल रहे बच्चे चौंक गए।
यह ड्रिल वास्तविक हमले की स्थिति में आपातकालीन संचार के साधनों का परीक्षण करने के लिए की गई थी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि हमले के दौरान सभी लोग एक सुरक्षित जगह तक पहुंच जाएं।
रशिया टुडे ने बताया कि हमले का एक माहौल बनाया गया, जिसमें यामागुची प्रान्त के रॉकी इलाके में मिसाइल गिरने की स्थिति की कल्पना की गई थी, जहां करीब 3,400 लोग रहते हैं। यह एक्सरसाइज जापानी सरकार, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसी की ओर से की गई थी। इसके साथ ही इस ड्रिल में स्थानीय प्रशासन और शहर प्राधिकरणों के अधिकारी शामिल हुए थे।