आइसलैंड ने पुरुषों को महिलाओं से अधिक वेतन देना किया अवैध

भले ही भारत समेत तमाम देशों में महिलाएं पुरुषों की तुलना में समान वेतन के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन योरपीय देश आइसलैंड ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आइसलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जहां पुरुषों को महिलाओं से अधिक वेतन देना अवैध करार दे दिया गया है।
नए कानून के मुताबिक 25 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों और सरकारी एजेंसियों को अपनी समान वेतन की नीति के लिए सरकार से प्रमाण-पत्र लेना होगा।
नए कानून के मुताबिक, जो कंपनियां समान वेतन की नीति पर चलती नहीं पाई जाएंगी, उन्हें जुर्माना भरना होगा। आइसलैंड वीमंस राइट्स असोसिएशन की बोर्ड मेंबर डैग्नी ऑस्क ने कहा, “इसके जरिये यह तय किया जाएगा कि महिलाओं और पुरुषों को समान वेतन मिले।”
ऑस्क ने कहा, “हमारे यहां यह नियम दशकों से ही रहा है कि पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन मिलना चाहिए, लेकिन यह अंतर बढ़ गया है।”
विधेयक पारित होने के बाद यह कानून इसी साल की शुरुआत से यानी 1 जनवरी से लागू हो गया है।
बीते साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर इसका ऐलान किया गया था। इस विधेयक का आइसलैंड की गठबंधन सरकार ने स्वागत किया था। इसके अलावा संसद की विपक्षी पार्टी ने भी स्वागत किया था, जहां 50 फीसदी के करीब सदस्य महिलाएं ही हैं।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2017 के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में आइसलैंड शीर्ष पांच देशों में था। जबकि अमेरिका जैसा विकसित देश शीर्ष 10 देशों की सूची में जगह नहीं बना सका था। वहीं, आइसलैंड सरकार का लक्ष्य वर्ष 2020 तक महिला और पुरुषों में वेतन असमानता को पूरी तरह से खत्म करना है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2017 के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत का स्थान 108 वां है। इसमें 144 देशों को शामिल किया जाता है। 2016 में इसका स्थान 87 था यानी भारत इस मामले में एक साल में 21 स्थान और नीचे आया है। यह इंडेक्स महिला पुरुषों के लिए चार मानकों शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवित रहना, आर्थिक मौके और राजनीतिक सशक्तीकरण पर आधारित होता है।
भारत की कार्यस्थल पर महिला पुरुष समानता और महिलाओं को वेतन के मामले में स्थिति और खराब है। इस मामले में देश का स्थान 144 देशों में 136 वां है। यानी इसमें काफी सुधार की जरूरत है। भारत में औसतन 66 फीसदी महिलाओं को काम के बदले कुछ नहीं मिलता जबकि इस मामले में पुरुषों का प्रतिशत केवल 12 है।

मुंबई शहर के साकीनाका क्षेत्र की एक दुकान में आग से 12 लोगों की मौत

शहर के साकीनाका क्षेत्र की एक दुकान में सोमवार सुबह लगी आग से 12 लोगों की मौत हो गई। दुकान में नमकीन बनाने का कारखाना था। साकीनाका नाका के खैरानी रोड स्थित मकरिया कंपाउंड की एक बड़ी दुकान में भानु फरसाण नामक नमकीन बनाने का कारखाना था।
कारखाने के अंदर बने छज्जे पर वहां काम करनेवाले मजदूर रात में सोते थे। करीब एक दर्जन मजदूर रविवार रात भी वहां सो रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार सुबह करीब 4.25 बजे दुकान की निचली मंजिल पर आग लग गई और यह पूरी दुकान में फैल गई। दुकान के अंदर छज्जे पर सोते मजदूर भी आग की चपेट में आ गए।
करीब 1800 वर्ग फुट का शेड आग के कारण भरभराकर गिर पड़ा। मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों ने आग बुझाने की कोशिश की। झुलसे मजदूरों को मलबे से निकालकर घाटकोपर स्थित राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन 12 मजदूरों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
इमारत के एक हिस्से में रहने वाली दृष्टिहीन महिला की सूझबूझ से कुछ लोगों की जान बच गई। आग लगने के बाद तेज आवाजें आने पर उसने अपने बेटे को जगाया। दोनों ने तुरंत लोगों को सतर्क किया जिसके बाद पांच-छह लोग दुकान बाहर निकल आए।

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने नया चुनाव कराने से किया इन्कार

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने नया चुनाव कराने से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही नई सरकार का गठन करना चाहती हैं।
न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, मर्केल ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि चुनाव नतीजे को लेकर अगर हम कुछ नहीं कर सके तो लोगों से फिर मतदान के लिए कहा जाए।
उन्होंने कहा कि जर्मनी में एक स्थिर सरकार होनी चाहिए। वह शनिवार को अपनी पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन के सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।
12 साल से सत्ता संभालने वाली मर्केल को सबसे गंभीर राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि 24 सितंबर को हुए संघीय चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला।
19 नवंबर को सरकार गठन को लेकर फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी और ग्रीन्स के साथ उनकी बातचीत विफल हो गई थी। जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमियर ने मर्केल, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता मार्टिन शुल्ज और बेवेरियन
क्रिश्चियन सोशल यूनियन के नेता हॉर्स्ट सीहोफर को महागठबंधन बनाने को लेकर चर्चा के लिए अगले सप्ताह बुलाया है।

देश का पहला गांव, जहां अनपढ़ भी बोलते हैं संस्कृत दे रहे निःशुल्क संस्कृत शिक्षा

बीते 14 साल से संस्कृत को सामान्य बोलचाल में अपनाने वाले झिरी गांव में समय बीतने के साथ अब संस्कृत बोलने वालों की संख्या घटती जा रही है। इसके पीछे प्रशासनिक उपेक्षा को कारण बताया जा रहा है। वहीं गांव को संस्कृतभाषी बनाने की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ पदाधिकारियों की मानें तो सरकार ग्रामीणों की रुचि को प्रोत्साहित ही नहीं कर सकी। करीब 14 साल से ग्रामीण गांव में संस्कृत विद्यालय खोलने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार ने इस मांग पर कोई पहल नहीं की।
हालांकि स्वयंसेवी अब भी हार मानने को तैयार नहीं है। गांव में ही सरकारी स्कूल में जनभागीदारी से प्रतिदिन एक घंटे निःशुल्क संस्कृत संभाषण कक्षा लगाकर नई पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ा जा रहा है। आरएसएस के प्रांतीय गौ सेवा प्रमुख उदयसिंह चौहान के मुताबिक गांव में वर्ष 2006-07 में जिला प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार 70 फीसदी ग्रामीण निर्बाध गति से संस्कृत में संवाद करने लगे थे।
यह संख्या अब घटकर 50 फीसदी के आसपास रह गई है। आरएसएस के विभाग संघचालक लक्ष्मीनारायण चौहान के अुनसार ग्राम स्तर पर संस्कृत को बढ़ावा देने सरकार से कुछ नहीं मिला है, जो कुछ भी प्रयास हो रहे हैं, वह स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी से किए जा रहे हैं।
जनभागीदारी से प्रतिदिन सरकारी स्कूल में सुबह 8 से 9 बजे तक निःशुल्क संस्कृत संभाषण कक्षाएं लगाई जा रही हैं। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता शीला चौहान एवं पवित्रा चौहान आम विद्यार्थियों, युवाओं सहित कान्वेंट स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चे भी संस्कृत सीखकर इसे सामान्य बोलचाल में अपना रहे हैं। सरस्वती शिशु मंदिर में एक कक्षा संस्कृत संभाषण की लग रही है।
गांव में करीब 125 परिवारों में करीब 1100 लोग निवासरत हैं। इनमें 90 परिवार पिछड़ा वर्ग, 35 परिवार अजा सहित एक-एक परिवार सामान्य एवं अजजा वर्ग के हैं। गांव की सरदारबाई (62), कमलाबाई चौहान (68) एवं सीमा चौहान (26) सहित करीब दो दर्जन महिलाएं अनपढ़ होकर भी फर्राटेदार संस्कृत संभाषण करने में निपुण हो गई हैं। गांव का एक घर ऐसा है, जिसमें सभी सदस्य संस्कृत में संवाद करते हैं, उस घर को संस्कृत गृहम की उपाधि से नवाजा गया है।
साल 2003 में संस्कृत भारती के सहयोग से दो वर्ष के लिए विस्तारिका के रूप में महिला विमला पन्ना को यहां भेजा था। मूलतः छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के चोगलीबहार गांव की इस महिला ने गांव में नित्य सुबह, दोपहर एवं शाम को क्रमशः बच्चों, महिलाओं एवं पुरुष वर्ग को निःशुल्क संस्कृत संभाषण करना सिखाया। पन्ना बताती हैं कि महज 6 माह में ही गांव के 70 फीसदी लोग संस्कृत की सरलता को समझकर जीवनचर्या में उपयोग करने लगे। कुछ वर्षों बाद उनकी नौकरी शिक्षा विभाग में लग गई एवं संभाषण कक्षाओं का क्रम रुक गया। पन्ना अभी भ्याना के हाईस्कूल में संस्कृत की अध्यापिका हैं एवं झिरी में ही रहती हैं। उनके विषय संस्कृत में सभी बच्चों को 90 फीसदी से अधिक अंक मिलते हैं। वर्ष 2014-15 में 10 वीं की छात्रा शीतल पाटीदार ने 100 में से 99 अंक प्राप्त किए थे।
संस्कृत की पढ़ाई करके गांव के मेहरबानसिंह परमार को शिक्षा विभाग में अध्यापक की नौकरी मिली। परमार वर्तमान में जिले के सोनखेड़ाकला में पदस्थ हैं। एक अन्य युवक शालाग्राम चौहान को भी शिक्षा विभाग में नौकरी मिली वह खजूरियाहरि में पदस्थ हैं। गांव के ही मेहरबानसिंह चौहान की संस्कृत में दक्षता के चलते सरस्वती शिशु मंदिर में आचार्य का दायित्व मिला। राज्य सरकार के पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित कक्षा 7 के संस्कृत विषय की किताब के नवम पाठ ‘ग्राम जीवनम, में राजगढ़ जिले के ग्राम झिरी गांव का उल्लेख मिलता है। फरवरी 2009 में झिरी में आयोजित संस्कृत समारोह में आरएसएस के पांचवे सरसंघचालक केसी सुदर्शन आए थे। उन्होंने संस्कृत संभाषण शैली सुन ग्रामीणों की प्रशंसा की थी।
देश के कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिले के ब्राह्मण बाहुल्य मुत्तुर गांव में हम जनवरी 2011 में गए थे, जो संस्कृत ग्राम के नाम के मामले में पहले नंबर पर गिना जाता है। जहां देखा कि अस्सी फीसदी लोग संस्कृत बोलते हैं, लेकिन ब्राम्हणों को संस्कृत विरासत में मिली है। दूसरी ओर पिछड़ा वर्ग बाहुल्य गांव झिरी में ब्राम्हण का एक ही परिवार है। गांव की सीमा चौहान सहित दर्जनभर महिलाएं इसका उदाहरण है जो कभी स्कूल गई ही नहीं, लेकिन फर्राटेदार संस्कृत बोल रही है। ऐसे में सही मायने में झिरी देश का नंबर एक का संस्कृत भाषी गांव कहा जा सकता है।
संस्कृत भाषा को लेकर झिरी गांव के लोगों में खासी रुची है, संस्कृत के मामले में हम झिरी को देश में मॉडल के तौर पर विकसित करना चाहते हैं, लेकिन जहां समाज खड़ा रहता है, वहां सरकार सोती रहती है। हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। संस्कृत को सामान्य बोलचाल की भाषा बनाने के लिए सरकार ने बीते चौदह वर्षों में सरकार गांव में एक संस्कृत विद्यालय तक नहीं खोल सकी है। प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार होकर भी हमारा प्रयास निरंतर जारी है। सरकारी स्कूल में प्रतिदिन सुबह 8 से 9 बजे तक निःशुल्क संस्कृत संभाषण कक्षाएं लगाकर गांव को पूरी तरह संस्कृत भाषी बनाना चाहते है।

मूर्ति विसर्जन को लेकर हाईकोर्ट ने फिर लगाई ममता सरकार को फटकार

कलकत्ता। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि दो समुदाय एक साथ पर्व क्यों नहीं मना सकते। बता दें कि 30 सितंबर को विजयदशमी और एक अक्टूबर को मुहर्रम है। पश्चिम बंगाल सरकार ने आदेश दिया था कि मुहर्रम के दिन दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार दो धर्मों के बीच सांप्रदायिक फर्क न करे। उन्हें भाईचारे के साथ रहने दे। कोई रेखा बीच में न खींचे। कोर्ट ने ममता सरकार से कहा कि जब आप खुद ही कह रहे हैं कि राज्य में हर धर्म के लोग सदभाव के साथ रहते हैं, दोनों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव है तो फिर आप दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक विभेद पैदा करने की कोशिश आखिर क्यों कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दुर्गा पूजन और मुहर्रम को लेकर राज्य में कभी इस तरह की स्थिती नहीं बनी है, उन्हें साथ रहने दीजिए। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फटकार भी लगाई और पूछा आखिर दो समुदाय एक साथ त्योहार क्यों नहीं मना सकते। दोनों समुदाय के लोगों में भाईचारा के साथ रहने दें, उनके बीच लकीर न खीचें। अब इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट गुरुवार को फैसला सुनाएगा।

पिछले महीने ममता बनर्जी की सरकार ने आदेश दिया था कि शाम 6 बजे के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विजर्सन नहीं किया जा सकेगा। ऐसा इसलिए कहा गया था क्योंकि 30 सितंबर को दुर्गा पूजा है और एक अक्टूबर को मोहर्रम। अब कलकत्ता हाई कोर्ट में साफ कर दिया है कि रात दस बजे तक मूर्ति विजर्सन किया जा सकेगा।

हालांकि एक अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन पर रोक है, जिसे बाद में 2 अक्टूबर से फिर इजाजत दे दी गई है। ममता के इस फैसले का बीजेपी ने कड़ा विरोध किया था। बीजेपी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एक खास वर्ग के वोट बैंक के लिए ऐसा कर रही हैं। इस निर्देश से नाराज होकर 14 सितंबर को वकील अमरजीत रायचौधरी ने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की थी।

बता दें कि पिछले साल भी विजयादशमी और मोहर्रम एक ही दिन पड़े थे, जिसकी वजह से ममता बनर्जी ने पिछले साल भी मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी थी। उनके इस फैसले के खिलाफ बीजेपी कोलकाता हाई कोर्ट पहुंची थीं।

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के एक छात्र की हत्या

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में शुक्रवार को सात साल के एक छात्र की हत्या कर दी गई। कक्षा दो के छात्र प्रद्युम्न की हत्या बाथरूम में गला रेतकर की गई है। मौके से चाकू भी बरामद हुआ है। हत्या किसने और क्यों की, यह जानने के लिए पुलिस की आठ टीमें पूरे दिन छानबीन करती रहीं। लेकिन पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा। सीसीटीवी फुटेज देखे गए मगर कैमरे उस ओर नहीं लगे थे जिस तरफ बाथरूम है।
इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे शहर के लोगों को दहला दिया। काफी संख्या में अभिभावक व लोगों ने स्कूल पहुंचकर प्रदर्शन भी किया। उनकी पुलिस से झड़प भी हुई। हर कोई यही बोल रहा था कि स्कूल में भी बच्चे सुरक्षित नहीं फिर कहां सुरक्षित हैं।
मूल रूप से बिहार (गांव बड़ा, जिला मधुबनी) निवासी वरुणचंद ठाकुर सोहना रोड स्थित श्याम कुंज में परिवार सहित रहते हैं। वह ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी में क्वालिटी मैनेजर हैं। उनकी बेटी विधि (पांचवी कक्षा) और बेटा प्रद्युम्न (दूसरी कक्षा) रेयान स्कूल में पढ़ते हैं। प्रतिदिन की तरह ही उन्होंने शुक्रवार सुबह अपने दोनों बच्चों को सुबह सात बजकर 50 मिनट पर स्कूल के गेट तक छोड़ा था। अनुमान है कि प्रद्युम्न कक्षा में बैग रखने के साथ ही बाथरूम गया होगा। वहीं पर उसकी धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई।
आशंका है कि उस पर हमला बाथरूम में किया गया होगा। इसके बाद वह भागकर बाहर आया होगा। इस वजह से बाथरूम के ठीक बाहर उसका शव पड़ा था। स्कूल के किसी कर्मचारी ने प्रबंधन को इस बारे में सूचना दी। प्रबंधन ने छात्र के पिता को लगभग आठ बजकर 10 से 15 मिनट के बीच में सूचना दी कि प्रद्युम्न बाथरूम में गिर गया है। उसके काफी खून निकल रहा है। उसे लेकर एक निजी अस्पताल जा रहे हैं। लगभग आठ बजकर 35 मिनट पर वरुणचंद ठाकुर अस्पताल पहुंच गए। वहां पर डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की मौत पहले ही हो चुकी थी।
ठाकुर ने इस घटना के लिए स्कूल प्रबंधन को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की हत्या की गई है। यह काम बच्चे का दोस्त नहीं कर सकता। हत्या स्कूल के किसी स्टाफ ने या फिर बड़ी कक्षा के किसी छात्र ने की होगी। क्यों हत्या की गई? यह उन्हें समझ में नहीं आ रहा है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है।

पीवी सिंधु, साइना नेहवाल और किदांबी श्रीकांत विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार

दो बार की कांस्य पदक विजेता पीवी सिंधु, साइना नेहवाल और शानदार फॉर्म में चल रहे किदांबी श्रीकांत सोमवार से शुरु हो रही विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार होंगे। चैंपियनशिप में 21 सदस्यीय भारतीय टीम हिस्सा ले रही हैं।
ओलंपिक की रजत पदक विजेता सिंधु 2016 चाइना ओपन और 2017 इंडिया ओपन जीत चुकी हैं। इसके अलावा 2013 और 2014 में उन्होंने कांस्य पदक जीता था और अब उनकी निगाहें स्वर्ण पदक पर हैं। 2015 विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता साइना नेहवाल भी स्वर्ण के प्रबल दावेदारों में शामिल हैं।
दिलचस्प बात है कि साइना और सिंधु को शुरुआती दौर में बाय मिला है। सिंधु दूसरे दौर में कोरिया की किम हयो मिन और मिस्र की हादिया होस्नी के विजेता के खिलाफ मुकाबले से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी। क्वार्टर फाइनल में उनकी भिड़ंत चीन की सुन यु से हो सकती है। वहीं साइना का सामना स्विट्जरलैंड की सबरीना जाकेट और यूक्रेन की नताल्या वोयेतसेख के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा।
पुरुष वर्ग में देश की उम्मीदें किदाम्बी श्रीकांत से है। इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में लगातार खिताब जीतने के बाद श्रीकांत शानदार फॉर्म में हैं और वे अपनी लय बरकरार रखना चाहेंगे। श्रीकांत पहले दौर में रूस के सर्गेई सीरेंट से खेलेंगे।
थाइलैंड ग्रां प्रि गोल्ड विजेता बी. साई प्रणीत पहले दौर में हांगकांग के वेई नान और अजय जयराम पहले राउंड में ऑस्ट्रिया के लुका रैबर से भिड़ेंगे। धार मध्यप्रदेश के समीर वर्मा पहली बार विश्व चैंपियनशिप में खेलेंगे। पहले दौर में उनका मुकाबला स्पेन के पाब्लो अबियान से होगा।
इसके अलावा राष्ट्रीय चैंपियन रितुपर्णा दास, तन्वी लाड, मनु अत्री और बी सुमित रेड्डी भी नजर आएंगे।
युगल वर्ग में अश्विनी पोनप्पा व सिक्की रेड्डी, जे. मेघना व पूर्विशा एस.राम, संजना संतोष व अराथी सारा सुनील, चिराग सेन व सत्विक साईराज रैंकीरेड्डी, अर्जुन एमआर व रामचंद्रन श्लोक, सुमित व अश्विनी पोनप्पा, प्रणव जेरी चोपड़ा व एन सिक्की रेड्डी और सत्विक और मनीषा की जोड़ी भी नजर आएंगी।
यह शायद सबसे मजबूत टीम है। पुरुष खिलाड़ी अभी काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और पदक दावेदारों में शामिल चार भारतीय काफी अच्छे हैं। उनमें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को मात देने की काबिलियत है। इन दिनों कोई भी प्रबल दावेदार नहीं है और हम अपने खिलाड़ियों से मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद कर सकते हैं

1997 से 2008 तक रिसर्च करने के बाद गेहूं की दो ऐसी किस्में ईजाद की जिनमें प्रोटीन और ग्लूकोज भरपूर मात्रा में

कृषि कॉलेज के दो वैज्ञानिकों डॉ. साईं प्रसाद व रिटायर्ड डॉ. एएन मिश्रा ने 1997 से 2008 तक रिसर्च करने के बाद गेहूं की दो ऐसी किस्में ईजाद की हैं, जिनमें प्रोटीन और ग्लूकोज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये जल्दी पचने वाली हैं। इन दोनों को निजी कंपनियां भी बेच रही हैं, लेकिन इसका संरक्षण कॉलेज के हाथ में है। प्रदेश के साथ-साथ पूर्वी देशों और दुबई में इनकी खूब मांग है। पूर्णा और पोषण नाम की दोनों किस्में वर्तमान में प्रदेश की 25 फीसदी भूमि पर बोई जा रही हैं। इनकी बड़ी खूबी यह है कि ये कम पानी में भी अधिक उत्पादन देती हैं।
दलिया, बाटी, बाफला, सूजी, पास्ता में ज्यादा उपयोग
एचआई- 8663 पोषण किस्म को मालवीय वीट, डुर्रम वीट व टटिया वीट के नाम से भी जानते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसका दलिया, बाटी, बाफला, सूजी और पास्ता प्रोडक्ट में ज्यादा उपयोग हो रहा है। यह प्रति हेक्टेयर पर 65 क्विंटल उत्पादन देती है। मालवा के इंदौर, धार, देवास और उज्जैन सहित मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों को मिलाकर 15 फीसदी में इसकी बोवनी की जा रही है। इसे दुबई व ईस्टर्न देशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है।
एचआई-1544 पूर्णा किस्म की खासियत यह है कि इसकी रोटी जितनी अच्छी गुणवत्ता की बनती है, उतनी अन्य किस्मों की नहीं है। जल्दी पचने वाला, प्रोटीन व ग्लूकोज युक्त यह गेहूं शरीर के लिए भी कई गुना लाभदायक है। मालवा व निमाड़ में इसकी बोवनी 12 से 15 फीसदी हिस्से में इसकी खेती की जा रही है। यदि बोवनी के दौरान ज्यादा गर्मी भी पड़ जाए, तब भी इसकी फसल खराब नहीं होती है।
दोनों किस्मों की खूबी यह है कि 3 से 4 पानी मिलने के बाद इनकी पैदावार अच्छी होती है। एक हेक्टेयर में 65 क्विंटल तक का उत्पादन हो रहा है। बोवनी होने के बाद जब पौधे थोड़े बड़े हो जाते हैं और ऐसे में तेज गर्मी पड़ जाए तो कई किस्में खराब हो जाती हैं, लेकिन ईजाद की गई ये दोनों किस्में प्रतिकूल मौसम में भी खराब नहीं होती।
एचआई 8663 व एचआई 1544 सबसे ज्यादा उपयोगी होने के कारण इसका उपयोग निजी कंपनियां रोटी व पास्ता बनाने में कर रही हैं। इससे बनने वाले प्रोडक्ट विदेश में भी बेचे जाते हैं। इसका कंपनी को अंश के रूप में भुगतान भी करना पड़ता है। इसकी खरीदी व बिक्री पर अनुबंध के अनुरूप नियंत्रण भी रहता है। कृषि कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. अशोक कृष्णा ने बताया कि दोनों किस्मों का उपयोग एमपी में किया जा रहा है। इनमें प्रोटीन व न्यूट्रिशन सहित अन्य कई ऐसे तत्व हैं जो मानव शरीर के लिए बहुत लाभदायक हैं।

बच्ची सुन नहीं सकती अपने दम पर इलाज कराना चाहती है 27 साल की प्रियंका

राजस्थान के झुंझुनूं जिले की 27 साल की प्रियंका ने दसवीं कक्षा में प्रवेश लिया है। उसकी बच्ची चेष्टा सुन नहीं सकती और प्रियंका अपने दम पर उसका इलाज कराना चाहती है। इसीलिए वह पढ़-लिख कर खुद को इस काबिल बनाने में जुट गई है।
झुंझुनूं के बगड़ कस्बे में रहने वाली प्रियंका को गरीबी के कारण दसवीं कक्षा में ही पढ़ाई छोडनी पड़ी। इसके बाद उसकी शादी सुमित सेन से कर दी गई। सुमित आॅटो रिक्शा चलाता हैं। प्रियंका की बेटी चेष्टा के अलावा नौ साल का एक बेटा भी है।
प्रियंका ने जब चेष्टा को जन्म दिया तो पता चला कि वह सुन नहीं सकती। शुरूआत में तो प्रियंका ने बेटी की देखभाल की और जब बच्ची कुछ बड़ी हो गई है तो फिर से दसवीं कक्षा में प्रवेश ले लिया। वह चाहती है पढ़-लिख कर खुद नौकरी करे और अपने दम पर बच्ची का इलाज कराए।
प्रियंका का कहना है कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए उम्र कोई पाबंदी नहीं है और मैं अपने परिवार या किसी और से मदद लेने की बजाय अपने दम पर अपनी बेटी का इलाज करवाना चाहती हूं।

पीएम नरेंद्र मोदी प्रोटोकाल तोड़कर मुंबई हमले के पीड़ित 11 वर्षीय मोशे होल्त्जबर्ग से मिले

पीएम नरेंद्र मोदी प्रोटोकाल तोड़कर मुंबई हमले के पीड़ित 11 वर्षीय मोशे होल्त्जबर्ग से मिले तो दोनों भावुक हो गए। मोशे ने हिदी में मोदी से कहा, “आपका हमारे देश में स्वागत है, फिर बोला, आइ लव यू मोदी जी”।
किशोर ने कहा, वह भारत में आना चाहता है। उसकी ख्वाहिश है कि बड़ा होकर वह मुंबई में बस जाए। पीएम ने दो कदम आगे बढ़ते हुए मोशे को सपरिवार भारत आमंत्रित किया।
पीएम बोले, भारत सरकार आपको लंबी अवधि का वीजा उपलब्ध कराएगी। मोशे ने मोदी से यह भी कहा कि “हमेशा मुझे प्यार करते रहना और मेरे माता-पिता को कभी मत भुलाना”।
उसने मोदी को एक चित्र भेंट किया तो वह बोले “बेहतरीन तोहफे के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद”। उल्लेखनीय है कि मोशे वह किशोर है जिसने महज दो साल की आयु में मुंबई बम धमाकों में अपने माता-पिता को खो दिया था। 2008 में नरीमन हाउस में आतंकी हमला हुआ था।
26 नवंबर 2008 की काली रात को मोशे रब्बी गवेरियल और रिवका होल्टजबर्ग के साथ मुंबई के छाबड़ हाउस में मौजूद था। इस छाबड़ हाउस को नरीमन हाउस भी कहते हैं।
पाक परस्त लश्कर के आतंकियों ने इस बिल्डिंग पर हमला कर कई लोगों की हत्या कर दी। इसमें मोशे के माता-पिता भी शामिल थे। मासूम मोशे उनके शवों के पास खड़ा रो रहा था।
उसकी आया सैन्ड्रा ने रोने की आवाज सुनी और उसे लेकर सुरक्षित स्थान पर चली गई। हमले में मोशे तो बच गया लेकिन वो अनाथ हो चुका था, लेकिन भारत से इस बच्चे को भरपूर प्यार मिला और ये बच्चा आतंक के खिलाफ भारत की जंग में एक जाना-पहचाना चेहरा बना।
सैन्ड्रा को इजरायल सरकार ने 2010 में मानद नागरिकता प्रदान की थी। वह यरुशलम में बच्चों की देखभाल करती है और सप्ताहांत में मोशे से मिलती है।
मोशे इजरायल के अफूला शहर में अपने दादा रब्बी शिमोन रोसेनबर्ग और दादी येहूदित रोसेनबर्ग के साथ रहता है। पीएम मोदी से मुलाकात के लिए ये सभी यरुशलम आए हुए थे।
मोशे के दादा रब्बी शिमोन ने कहा कि ये एक अच्छा एहसास है कि भारत के लोग हमें भूले नहीं है। मुंबई हमले के नौ साल बाद भी हमारा दर्द साझा करते हैं।
उन्होंने कहा कि दो साल बाद वह मोशे की “बार मित्जवाह” की रसम में पीएम मोदी को बुलाना चाहते हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि अगर मोशे चाहे तो उनके साथ भारत जा सकता है। उन्होंने उसके दादा से यह पेशकश की।
उसके दादा रब्बी शिमोन ने बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि जब वह भारत जाएंगे तो मोशे उनके दल में शामिल हो सकता है।
पीएम नरेंद्र मोदी प्रोटोकाल तोड़कर मुंबई हमले के पीड़ित 11 वर्षीय मोशे होल्त्जबर्ग से मिले तो दोनों भावुक हो गए। मोशे ने हिदी में मोदी से कहा, “आपका हमारे देश में स्वागत है, फिर बोला, आइ लव यू मोदी जी”। किशोर ने कहा, वह भारत में आना चाहता है। उसकी ख्वाहिश है कि बड़ा होकर वह मुंबई में बस जाए। पीएम ने दो कदम आगे बढ़ते हुए मोशे को सपरिवार भारत आमंत्रित किया। पीएम बोले, भारत सरकार आपको लंबी अवधि का वीजा उपलब्ध कराएगी। मोशे ने मोदी से यह भी कहा कि “हमेशा मुझे प्यार करते रहना और मेरे माता-पिता को कभी मत भुलाना”। उसने मोदी को एक चित्र भेंट किया तो वह बोले “बेहतरीन तोहफे के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद”। उल्लेखनीय है कि मोशे वह किशोर है जिसने महज दो साल की आयु में मुंबई बम धमाकों में अपने माता-पिता को खो दिया था। 2008 में नरीमन हाउस में आतंकी हमला हुआ था। 26 नवंबर 2008 की काली रात को मोशे रब्बी गवेरियल और रिवका होल्टजबर्ग के साथ मुंबई के छाबड़ हाउस में मौजूद था। इस छाबड़ हाउस को नरीमन हाउस भी कहते हैं। पाक परस्त लश्कर के आतंकियों ने इस बिल्डिंग पर हमला कर कई लोगों की हत्या कर दी। इसमें मोशे के माता-पिता भी शामिल थे। मासूम मोशे उनके शवों के पास खड़ा रो रहा था। उसकी आया सैन्ड्रा ने रोने की आवाज सुनी और उसे लेकर सुरक्षित स्थान पर चली गई। हमले में मोशे तो बच गया लेकिन वो अनाथ हो चुका था, लेकिन भारत से इस बच्चे को भरपूर प्यार मिला और ये बच्चा आतंक के खिलाफ भारत की जंग में एक जाना-पहचाना चेहरा बना। सैन्ड्रा को इजरायल सरकार ने 2010 में मानद नागरिकता प्रदान की थी। वह यरुशलम में बच्चों की देखभाल करती है और सप्ताहांत में मोशे से मिलती है। मोशे इजरायल के अफूला शहर में अपने दादा रब्बी शिमोन रोसेनबर्ग और दादी येहूदित रोसेनबर्ग के साथ रहता है। पीएम मोदी से मुलाकात के लिए ये सभी यरुशलम आए हुए थे। मोशे के दादा रब्बी शिमोन ने कहा कि ये एक अच्छा एहसास है कि भारत के लोग हमें भूले नहीं है। मुंबई हमले के नौ साल बाद भी हमारा दर्द साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि दो साल बाद वह मोशे की “बार मित्जवाह” की रसम में पीएम मोदी को बुलाना चाहते हैं। नेतन्याहू के साथ आएगा मोशे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि अगर मोशे चाहे तो उनके साथ भारत जा सकता है। उन्होंने उसके दादा से यह पेशकश की। उसके दादा रब्बी शिमोन ने बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि जब वह भारत जाएंगे तो मोशे उनके दल में शामिल हो सकता है।