अनुकंपा नियुक्ति की लंबे समय से की जा रही मांग हो सकती है जल्द पूरी

अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को सरल बनाने की कर्मचारी संगठनों द्वारा लंबे समय से की जा रही मांग अब जल्द पूरी हो सकती है। करीब चार महीने बाद नियमों में बदलाव की फाइल सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) वापस लौट आई है।
विभागीय राज्यमंत्री लालसिंह आर्य ने प्रस्तावों को कैबिनेट के सामने रखने की मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित नियमों के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए पद नहीं होने पर संविदा नियुक्ति दी जाएगी। साथ ही पुराने निरस्त मामलों की फाइल एक बार फिर खोलने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ मिलेगी।
राज्य कर्मचारी कल्याण समिति लंबे समय से सामान्य प्रशासन विभाग पर यह दबाव बना रही थी कि अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को सरल किया जाए। इसे लेकर मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन दिए गए। इसके बाद नियमों में संशोधन के लिए मामले को कैबिनेट में भेजने का प्रस्ताव तैयार भी हो गया पर मुख्य सचिव के स्तर से इसे एक बार फिर विचार करने के लिए लौटा दिया गया।
जुलाई 2017 में फाइल विभागीय राज्यमंत्री लालसिंह आर्य को भेजी गई, जो कुछ दिनों पहले ही लौटकर सामान्य प्रशासन विभाग वापस आई है। सूत्रों के मुताबिक पुरुष आवेदकों को महिलाओं के समान आवेदन करने आयु सीमा में छूट देने का प्रस्ताव रद्द कर दिया गया है यानी पुरुष आवेदकों को सिर्फ 45 वर्ष की आयु सीमा तक आवेदन करने की पात्रता होगी।
ऐसे प्रकरण फिर से विचार किया जाएगा जिसमें शासकीय सेवक की मृत्यु के सात साल के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कर दिया और वो किसी वजह से निरस्त हो गया हो। यदि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन सही पाया जाता है तो फिर पात्रता अनुसार नियुक्ति मिलेगी। इसी तरह पद नहीं होने पर अब इंतजार कराने की जगह संविदा नियुक्ति दी जाएगी। जैसे ही पद उपलब्ध होंगे, संबंधित को नियमित कर दिया जाएगा।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हजारों की तादाद में अनुकंपा नियुक्ति के मामले अटके हैं। इनमें बहुत से प्रकरणों में तय अवधि में आवेदन होने के बाद भी पद नहीं होने की वजह अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई। लंबा समय बीतने के बाद प्रकरण निरस्त हो गए। इसी तरह मनचाही जगह नहीं मिलने की वजह से जिन लोगों ने इंतजार करने का फैसला किया, उन्हें भी नियुक्ति नहीं मिल पाई।
अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव शासन में लंबे समय से चला आ रहा है पर तत्कालीन प्रमुख सचिव मुक्तेष वार्ष्णेय इसके लिए सहमत नहीं थे। इसकी वजह से फाइल ही आगे नहीं बढ़ रही थी। जबकि, सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लालसिंह आर्य इसके लिए तैयार थे। वार्ष्णेय के सेवानिवृत्त होते ही तत्कालीन प्रमुख सचिव सीमा शर्मा के कार्यकाल में फाइल तेजी से दौड़ी और प्रस्ताव तैयार हो गया।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर फिर हो गया एक बाघिन का शिकार

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर फिर एक बाघिन का शिकार हो गया है। इसमें पार्क प्रबंधन को सिर्फ बाघिन की हड्डियों का ढांचा मिला है। प्रबंधन को बाघिन के तीन शावक भी मिले हैं, जिन्हें इनक्लोजर (विशेष बाड़े) में रखकर पाला जा रहा है। पिछले 10 महीने में पार्क में छह बाघ मर चुके हैं। प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हड्डियों का डीएनए टेस्ट भी कराने का फैसला हुआ है।
पार्क की ताला रेंज में पांच दिन पहले 11-11 माह के तीन शावक लावारिस घूमते पाए गए थे। सर्चिंग के दौरान प्रबंधन को उस क्षेत्र में हड्डियों को ढांचा मिला। प्रारंभिक जांच में यह हड्डियां बाघिन की पाई गई हैं। इसके बाद तीनों शावकों को रेस्क्यू कर इनक्लोजर में रखा गया है।
ताकि दूसरे बाघ या अन्य मांसाहारी जानवर के हमले में उन्हें नुकसान न हो। प्रबंधन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी शिकार की पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन वे इससे इनकार भी नहीं कर रहे। उनका कहना है कि ये शिकार भी हो सकता है और आपसी लड़ाई में मौत भी।
पार्क में पिछले साल भी शिकार की घटना सामने आ चुकी है। यहां पोखर (पानी की हौज) में जहर डालकर ग्रामीणों ने बाघिन और उसके तीन शावकों को मार डाला था। एक साल के अंदर पार्क की सीमा में शिकार का यह दूसरा मामला है। यहां अप्रैल 2017 में तीन शावकों की भी मौत हो चुकी है। इन्हें संजय दुबरी टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू कर पार्क लाया गया था। यहां पार्वो वायरस की चपेट में आने से उनकी मौत हुई।
तीनों शावक 11-11 माह के हैं। बाघिन ने उन्हें शिकार के गुर भी सिखा दिए हैं। इसलिए दूसरे बाघ और मांसाहारी जानवरों से बचाने के लिए तीनों को इंक्लोजर में छोड़ दिया है। वहीं उन्हें चीतल के शावक शिकार के लिए दिए जा रहे हैं।
अभी तक यह पता नहीं चला है कि बाघिन का शिकार हुआ है या वह आपसी लड़ाई में मारी गई है। इसकी जांच की जा रही है। वहीं शावकों को सुरक्षा की दृष्टि से इनक्लोजर में रखा है। वे स्वस्थ हैं और खुद शिकार करके पेट भर रहे हैं। उन्हें करीब 9 माह यहीं रखा जाएगा।

एक लाख शिक्षकों की कमी के बावजूद सरकार ने 48 प्रतिशत शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगा रखा

मप्र के सरकारी स्कूल करीब एक लाख शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, इसके बावजूद सरकार ने 48 प्रतिशत शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगा रखा है। इसका विपरीत प्रभाव स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। मप्र में बच्चों के अधिकार पर काम करने वाली संस्था चाइल्ड राइट्स ऑब्जर्वेटरी ने मप्र में शिक्षा के अधिकार की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है।
रिपोर्ट में 14 जिलों के सैकड़ों शिक्षकों के बीच एक सर्वे किया गया था। गौरतलब है कि चाइल्ड राइट्स ऑब्जर्वेटरी पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच की संस्था है। संस्था ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे करीब 26 फीसदी शिक्षक स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का समय ही नहीं देते। वहीं अन्य शिक्षक अतिरिक्त कक्षा और संयुक्त कक्षा की मदद से पढ़ाई पूरी कराते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षकों को वोटर आईडी से संबंधित कार्यों में जहां शिक्षकों का मुख्यालय है, वहीं कार्य दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन दमोह, होशंगाबाद, रीवा और झाबुआ जिले के करीब 14 प्रतिशत शिक्षकों को मुख्यालय से बाहर बीएलओ का काम दिया गया था।
दमोह जिले के शिक्षक सबसे ज्यादा गैर शैक्षणिक काम में लगे हुए हैं। यहां करीब 88 प्रतिशत गैर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। वहीं रीवा में 70 फीसदी, सीी में 67 फीसदी, होशंगाबाद में 65 फीसदी और खंडवा में 61 फीसदी शिक्षक शैक्षणिक कामों से अलग हटकर काम कर रहे हैं। सर्वे में करीब 450 शिक्षकों के बीच अध्ययन किया गया था।

मध्यप्रदेश में डाकघरों में आधार कार्ड बनाने एवं अपडेट करने की तैयारी

मध्यप्रदेश में डाकघरों से चिट्ठी-पत्री, डाक टिकट बिक्री, बैंकिंग और पासपोर्ट निर्माण के बाद अब आधार कार्ड बनाने एवं अपडेट करने की तैयारी भी है। प्रारंभिक तौर पर आधार की सुविधा एक हजार डाकघरों में रहेगी। 51 जिलों के डाकघरों में बायोमेट्रिक मशीनें खरीदने के लिए हरी-झंडी दे दी गई है। डाक विभाग ने अपने कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण भी दिला दिया है। साल के अंत तक नई व्यवस्था शुरू किए जाने के संकेत हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि डाकघरों से आधार कार्ड बनाने का निर्णय केन्द्र सरकार ले चुकी है। यह काम अभी निजी एजेंसियों के जरिए हो रहा है, लेकिन देश भर में फैले डाक विभाग के नेटवर्क का उपयोग आधार कार्ड बनाने के लिए शुरू किया जा रहा है।
डाक मुख्यालय ने पहले दिल्ली से ही आधार के लिए जरूरी मशीनें भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन यह मामला सिरे नहीं चढ़ पाया। इसलिए मध्यप्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल आलोक शर्मा को ही बायोमेट्रिक मशीनें एवं अन्य उपकरण जुटाने के लिए अधिकृत किया गया है।
विभाग के डायरेक्टर रामचंद्र जायेभाये का कहना है कि प्रदेश के एक हजार डाकघरों में यह सुविधा शुरू की जाएगी। इनमें से 500 डाकघरों में आधार कार्ड अपडेट करने एवं पांच सौ डाकघरों में नए सिरे से आधार बनाने की सुविधा शुरू की जाएगी। आधार के लिए पंजीयन कराने ‘आईरिश स्कैन” मशीनों को खरीदा जा रहा है। इसके लिए विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
डायरेक्टर जायेभाये ने बताया कि वर्तमान में यह काम निजी एजेंसियों के जरिए कराया जा रहा है, लेकिन जल्द ही कार्ड निर्माण के लिए आउटसोर्सिंग बंद कर दी जाएगी। केन्द्र सरकार ने अपनी ज्यादातर योजनाओं के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता कर दी है। इसलिए डाकघरों के नेटवर्क का उपयोग इसके लिए शुरू किया जाएगा।

सरकार ने किया संविदा शिक्षकों की भर्ती में अतिथि विद्वानों को 25 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का फैसला

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले हुए। सरकार ने संविदा शिक्षकों की भर्ती में अतिथि विद्वानों को 25 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का फैसला किया है। इसके अलावा उन्हें 9 साल की आयु में छूट भी दी जाएगी। 3 सालों से अधिक पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों को लाभ मिलेगा।
किसानों को लेकर सरकार ने अहम फैसला लेते हुए दलहन के उत्पादन में तत्काल भुगतान करने को मंजूरी दी।सरकार ने तय किया है कि गर्मी की फसलों की खरीदी का भुगतान दीपावली से पहले किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दे दिए है। बैठक में ये भी तय किया गया कि औसत गुणवत्ता से एकम के अनाज की खरीदी को भी मान्य करते हुए किसानों को भुगतान किया जाएगा जिन समितियों में गड़बड़ियां हुई थी वहां जहां चलती रहेंगी।
सरकार ने जल संसाधन विभाग की 225 लघु सिंचाई योजनाओं के लिए 180 करोड़ रुपए की मंजूरी दी। इस राशि से नहर बांध तालाब इन का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कैबिनेट की बैठक में तय किया गया कि 14 समूहों का प्रस्तुतीकरण अब 29 अक्टूबर को होगा। ये 17 अक्टूबर को होना था। सरकार ने 15000 मीट्रिक टन मूंग औसत गवत्या से कम की खरीदी थी इसमें से समितियों ने कुछ मूंग को अपग्रेड कर भी लिया है। इसके अलावा रजिस्टार फर्म्स एंड सोसाइटी में 6 चौकीदार 6 फर्राश के पदों को निरंतर रखने का फैसला किया है।

महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में कम पंजीयन ने बढ़ा दी सरकार की चिंता

मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में कम पंजीयन ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दरअसर, सरकार इस योजना को कर्जमाफी के तोड़ के रूप में प्रस्तुत कर रही है। पंजीयन बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को खुद मोर्चा संभाल लिया।
रेडियो और टीवी के माध्यम से उन्होंने विशेष ग्रामसभा लगवाकर किसानों से सीधी बात की। मुख्यमंत्री ने योजना को महाबोनस करार देते हुए कहा कि इससे उचित दाम की गारंटी मिलेगी। किसानों को पंजीयन कराने की हिदायत देते हुए वे बोले कि इसके बिना योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
प्रदेश की 23 हजार पंचायतों में विशेष ग्रामसभा लगवाकर किसानों से भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन के लिए आवेदन भरवाए गए। अभी तक सिर्फ साढ़े आठ लाख किसानों ने पंजीयन कराया है, जबकि उम्मीद 15 लाख से ज्यादा किसानों के योजना से जुड़ने की थी। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष ग्रामसभाएं बुलवाईं और खुद किसानों को भोपाल से संबोधित किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार किसान के साथ है। बाजार में जब भाव कम हुए तो सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर प्याज और फिर मूंग, उड़द और तुअर खरीदी। भावांतर योजना में आठ फसलों की खरीदी 16 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य और मॉडल रेट के बीच जो अंतर आएगा, उसका भुगतान सरकार करेगी।
प्रदेश सरकार भावांतर भुगतान योजना के प्रचार-प्रचार के लिए प्रदेश की 257 कृषि मंडियों में किसान सम्मेलन करेगी। इस पर करीब चार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मंडी बोर्ड ने यह राशि समितियों के लिए मंजूर कर दी है।
योजना में सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग और उड़द की खरीदी होगी। इन फसलों की खरीदी 16 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलेगी। फरवरी में तुअर भी भावांतर योजना के तहत खरीदी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि योजना के तहत खरीदी गई उपज के भाव अंतर का भुगतान करीब दो माह बाद किसान को किया जाएगा। 15 दिसंबर को जब खरीदी बंद हो जाएगी, उसके बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी। भुगतान सिर्फ पंजीयन के वक्त बताए गए बैंक खातों में होगा।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि योजना में वह खरीदी ही मान्य होगा, जो लायसेंसी व्यापारियों द्वारा मंडियों में की जाएगी। पक्की पर्ची पर हुई खरीदी को ही मान्यता मिलेगी। इसके आधार पर ही किसान को भावांतर भुगतान योजना में अंतर की राशि दी जाएगी।

पूरी नहीं हुई अभी जांच ‘खेत बचाओ किसान बचाओ’ आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और कपड़े उतारकर पिटाई करने के मामले की

टीकमगढ़ के ‘खेत बचाओ किसान बचाओ’ आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और आंदोलन से लौट रहे किसानों के कपड़े उतारकर पिटाई करने के मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई। जांच अधिकारी छतरपुर डीआईजी केसी जैन अभी कुछ और पीड़ित किसानों के बयान ले रहे हैं। हालांकि जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को दे दी गई है। दूसरी तरफ कांग्रेस राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में यह मामला ले जा रही है।
टीकमगढ़ के किसानों ने तीन अक्टूबर को आंदोलन किया था, जिसमें लाठीचार्ज हुआ था और फिर कथित रूप से वापस लौटने वाले किसानों को पुलिस ने रास्ते में गाड़ी से उतारकर थाने में बैठाया था। थाने में उनके कपड़े उतारकर पीटा गया।
दूसरे दिन गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने छतरपुर डीआईजी जैन को सागर आईजी सतीश सक्सेना के मार्गदर्शन में जांच करने का जिम्मा दिया था। जैन ने नवदुनिया से बातचीत में कहा है कि वे पीड़ितों के बयान लेने टीकमगढ़ गए थे, कुछ और पीड़ितों के बयान लेना बाकी हैं।
इस संबंध में डीजीपी ऋषि शुक्ला ने कहा कि पूरी रिपोर्ट आने के बाद उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने बताया कि वे टीकमगढ़ किसान आंदोलन की घटना की शिकायत करने शुक्रवार को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे आंदोलनकारी पीड़ित किसानों को भी साथ लेकर जा रहे हैं। आयोग से घटना की जांच कराने की मांग करेंगे।

जिनके बारूद से बेटे और पोते को खोया उनके ही गोदाम की चौकीदारी कर रहे

पटाखा दुकानों या फैक्टरी में आग लगने से इस साल अप्रैल व जून में इंदौर, बालाघाट और दतिया में तीन हादसे हुए। इनमें 39 लोगों की मौत हो गई। पटाखों ने यहां काम करने वाले या खरीदारी करने आए मासूम लोगों के घरों में कैसे जिंदगीभर के लिए अंधेरा कर दिया, यह जानिए इन तीन परिवारों के दास्तां से-
जिनके बारूद से बेटे और पोते को खोया, परिवार पालने के लिए उनके ही गोदाम की चौकीदारी कर रहे हैं धन्नालाल
इंदौर के रानीपुरा हादसे में बेटे और पोते को खो चुके धन्नालाल बोडाना की बदकिस्मती देखिए कि 75 साल की उम्र में उन्हें बेटे और पोते का परिवार पालने के लिए उसी मालिक के गोदाम में काम करना पड़ रहा है, जिसकी दुकान में रखे पटाखों से दोनों की जान चली गई।
हातोद में रह रहे धन्नालाल का परिवार तीन पीढ़ी से पटाखों के काम से जुड़ा हुआ है। वे खुद हातोद में बने गोदाम की चौकीदारी करते हैं, जबकि बेटा और पोता रानीपुरा में गुरविंदर सिंह की दिलीप पटाखा दुकान में काम करते थे। 19 अप्रैल को दुकान में आग लगने से 50 वर्षीय करन और 35 वर्षीय चेतन की मौत हो गई थी।
दो कमाऊ हाथ गंवाने के बाद अब इस परिवार की दो विधवा बहुओं और चेतन के तीन बच्चों को पालने की जिम्मेदारी धन्नालाल पर है। वे कहते हैं दो-दो लाख रुपए का जो मुआवजा मिला था, उससे घर पक्का कर लिया, ताकि पक्की दीवारों के पीछे महिलाएं तो महफूज रहें। बाकी घर का चूल्हा जलाने के लिए ये बूढ़ी हड्डियां अभी बाकी हैं।

किसानों को फसल का उचित दाम दिलाने मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना देशभर में लागू

मध्यप्रदेश में किसानों को फसल का उचित दाम दिलाने के लिए लागू मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना देशभर में लागू हो सकती है। इसके जरिए बाजार में उपज के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होने पर अंतर की राशि किसान को अदा की जाएगी। कई राज्य इस योजना का मसौदा प्रदेश से ले चुके हैं। सोमवार को कृषि मंत्रालय में योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने को लेकर बैठक बुलाई गई है।
सूत्रों के मुताबिक उपज के वाजिब दाम दिलाए जाने को लेकर देशभर में किसान आंदोलन हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए भावांतर देने के फॉर्मूले को सबसे बेहतर माना जा रहा है। इसमें न तो सरकार को फसल की खरीदी करनी पड़ेगी और न ही उसके भंडारण और फिर विपणन की कोई चिंता।
सरकार जिन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, उन्हें और अन्य फसलों को इसमें शामिल किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में दोनों तरह की फसलों को योजना के दायरे में रखा गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को इस योजना से काफी राहत मिलेगी। उन्हें अब यह चिंता नहीं सताएगी कि बाजार में फसल के भाव कम होने का खामियाजा उठाना पड़ेगा। सरकार इस योजना के माध्यम से अप्रत्यक्ष तौर पर बाजार को भी नियंत्रित कर सकेगी।
प्रदेश सरकार भावांतर योजना में शामिल फसल में अंतर की राशि देने के लिए पहले दो राज्यों की उन मंडियों से फसल का भाव लेगी, जहां इनका उत्पादन सर्वाधिक होता है। राज्य स्तरीय समिति भाव का तुलनात्मक चार्ट बनाने के बाद खरीदी सीजन समाप्त होते ही तय अंतर की राशि की घोषणा करेगी। इसके बाद यह राशि किसानों के खातों में सीधी डाली जाएगी।
महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ ।
सरकार ने खरीफ फसलों के लिए भावांतर योजना में पंजीयन कराने के लिए तारीख 11 से बढ़ाकर 15 अक्टूबर कर दी है। अभी तक सात लाख किसानों का पंजीयन हो चुका है। संभावना जताई जा रही है कि यह आंकड़ा 15 लाख तक पहुंच सकता है। योजना का लाभ सिर्फ पंजीकृत किसानों को ही मिलेगा।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा का कहना है कि योजना को लेकर कृषि मंत्रालय भी विचार कर रहा है। सोमवार को एक बैठक होने जा रही है। इसमें योजना के बिन्दुओं पर चर्चा होगी। राज्य की ओर से केंद्र को योजना के बारे में पहले ही अवगत करा दिया है। प्रदेश में योजना को लेकर किसानों में विशेष रूचि देखी जा रही है

टीकमगढ़ में कलेक्टर ने नहीं की थी किसानों से मुलाकात

टीकमगढ़ में किसानों के साथ हुई मारपीट मामले में प्रदेश सरकार भले ही शासन स्तर से जांच करा रही हो, लेकिन स्थानीय किसानों को सरकार की जांच पर भरोसा नहीं है। किसानों का कहना है कि शासन ने जिस अधिकारी को जांच सौंपी है, वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। डीआईजी केसी जैन को वित्तमंत्री जयंत मलैया का खास बताते हुए किसान कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री और टीकमगढ़ प्रभारी द्वारका यादव ने भी जांच प्रभावित होने की बात कही है।
मुआवजा कम मिलने व अन्य मांगों को लेकर टीकमगढ़ कलेक्टर के पास शिकायत करने पहुंचे किसानों से मिलने के लिए कलेक्टर ने समय नहीं निकाला। कलेक्टर के न मिलने पर टीकमगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधायक यादवेन्द्र सिंह भड़क गए और बैरीकेड्स तोड़कर कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ने लगे। पीछे से युवक कांग्रेस के अन्य नेता और कार्यकर्ताओं ने भी बैरीकेड्स तोड़ दिए और पूर्व विधायक के साथ आगे बढ़ने लगे, जिन्हें पुलिस ने रोकने की कोशिश की और बात बिगड़ गई।
टीकमगढ़ मामले में कांग्रेस पार्टी में स्थानीय गुटबाजी और अगले वर्ष प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों का फीवर भी हावी रहा। पार्टी में जो नेता पिछले चार वर्षों से सक्रिय नहीं थे, प्रदर्शन के दिन वे भी पूरी ऊर्जा और सक्रियता दिखाने लगे। खासतौर से नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के सामने। प्रदर्शन में कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं को कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं दी गई थी, इससे कांंग्रेस की गुटबाजी भी स्पष्ट झलक रही है।
टीकमगढ़ मामले की जांच राज्य शासन स्तर से हो रही है, इसमें संभागीय अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया है। संभागीय स्तर पर कोई जांच नहीं कराई गई है। इस मामले को लेकर एक ज्ञापन मुझे जरूर मिला था, लेकिन शासन स्तर से जांच होने के कारण स्थानीय स्तर पर जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं।