धर्मगुरु दलाई लामा मुख्‍यमंत्री निवास पर पहुचे

नमामि देवि नर्मदे सेवा यात्रा में भाग लेने के लिए बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा मुख्‍यमंत्री निवास पर पहुंच चुके है। जहां पर शिवराज सिंह चौहान ने उनका स्‍वागत किया है। श्री लामा ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद दिया और आनंद विभाग के गठन, नर्मदा सेवा यात्रा एवं लाड़ली लक्ष्मी योजना की सराहना की।
होली के चलते विश्राम पर रही नमामि देवि नर्मदे सेवा यात्रा 19 मार्च से फिर शुरू होगी। यात्रा सुबह नेमावर के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर भगवान परशुराम की तपोस्थली तुरनाल पहुंचेगी।
यहां बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान जनसंवाद सभा को संबोधित करेंगे। साथ ही पौधारोपण भी करेंगे। इसके बाद यात्रा सीहोर जिले के लिए प्रस्थान करेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक बाबूलाल गौर ने स्र्कवाया झुग्गियों का सर्वे

प्रधानमंत्री का हाउसिंग फॉर ऑल का सपना मध्यप्रदेश में पूरा होता नहीं दिख रहा है। कहीं और तो छोड़िए राज्य सरकार राजधानी में अपनी नाक के नीचे विधानसभा और मंत्रालय के सामने की झुग्गियों का ही सर्वे नहीं करवा पा रही है। राजधानी सहित प्रदेश भर में झुग्गियों का सर्वे कर पक्के मकान देने की लिए डीपीआर तैयार की जा रही है इसमें जनप्रतिनिधी ही आड़े आ रहे हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी शामिल हैं।निगम अफसरों का कहना है कि राजनीतिक दबाव के कारण वह मजबूर हैं।
राजधानी के सबसे संवेदनशील इलाके अरेरा हिल्स में मंत्रालय और विधानसभा के सामने की झुग्गियों के अलावा श्यामला हिल्स और बाणगंगा में भी कुछ झुग्गियों का सर्वे अटका हुआ है। दरअसल पार्षद से लेकर विधायक और मंत्री तक नहीं चाहते कि गरीबों को झुग्गी की जगह प-े मकान मिलें। इसके पीछे वोट बैंक का गणित भी है क्योंकि यदि झुग्गियां हटाकर दूसरे क्षेत्र में मकान बना दिए गए तो उनका वोट बैंक कम हो जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक बाबूलाल गौर ने बकायदा पत्र लिखकर नगर निगम को सर्वे न करने के हिदायत दी है। वार्ड 67 की सतनामी नगर झुग्गी और वार्ड 68 स्थित शांति नगर बस्ती में सर्वे रोकने के निर्देश दिए गए। निगम सूत्रों के अनुसार राजनीतिक दखल के कारण सर्वे का काम रोक दिया गया।
– मंत्रालय के सामने बने भीमनगर का सर्वे ही नहीं हो पाया। यह क्षेत्र राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता हैं। सर्वे न करने को लेकर बीजेपी के नेताओं का दबाव है।
– माता मंदिर से लगे हर्षवर्धन नगर फेज टू में सर्वे का काम चल रहा था,लेकिन बीजेपी नेता राधेश्याम प्रजापति ने यह कहकर सर्वे स्र्कवा दिया कि सक्षम अधिकारी लिखित में दें कि मकान यहीं बनाकर देंगे।
– श्यामला हिल्स बाणगंगा इलाके में कांग्रेसी पार्षद शबिस्ता सुल्तान ने सर्वे करने गई टीम को वापस कर दिया था। फिर यहां सर्वे ही नहीं हो पाया।
यह सही है कि कुछ हमारे और अन्य पार्टियों के जनप्रतिनिधि सर्वे का विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का सपना है कि गरीबों के जीवन स्तर में सुधार हो। इसलिए हाउसिंग फॉर ऑल योजना शुरू की गई। जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर समस्या का निराकरण कराएंगे।
लोगों ने आपत्ति की इसलिए लिखा पत्र
लोग नहीं चाहते थे कि उन्हें वहां से हटाया जाए। इसलिए उन्होंने आपत्ति की थी,इसके बाद हमने पत्र लिखा था। हमने अपनी तरफ से लोगों को समझाया भी है कि वे विरोध न करें ताकि उन्हें पक्के आवास मिल सकें।
बाबूलाल गौर, पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक गोविंदपुरा
सरकार की योजना का यदि कोई विरोध कर रहा है तो इस बारे में जनप्रतिनिधियों से बात की जाएगी और निश्चित ही हल निकाला जाएगा। सरकार का मकसद है जनता को योजनाओं का लाभ मिले।

नक्सल क्षेत्र की सरकारी शराब दुकानों को खतरा

प्रदेश के हर जिले में जनता के विरोध को देखते हुए सरकारी शराब दुकानों की सुरक्षा के लिए नगरसैनिक और सिक्यूरिटी गार्ड तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा विरोध से घबराई सरकार ने दुकानों का बीमा कराने का भी फैसला लिया है। शराब के स्टॉक, पैसों की सुरक्षा और कर्मचारियों का गारंटी बीमा कराया जाएगा। शराब दुकानों का संचालन करने के लिए गठित छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसी) ने बीमा कंपनियों से निविदा बुलाया है।
कॉर्पोरेशन ने बीमा का प्रारूप और शर्त तैयार कर मंगलवार को निविदा की प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकारी शराब दुकानों का बीमा एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 की आधी रात तक रहेगा। चार प्रकार की बीमा पॉलिसी ली जाएगी। पहली फायर पॉलिसी होगी, जिसमें 50 करोड़ तक के स्टॉक में आग, आपदा, भूंकप, आतंक के कारण स्टॉक को नुकसान होता है तो उसका बीमा रहेगा। दूसरी पॉलिसी चोरी या सेंधमारी की घटना होने पर नुकसान की भरपाई करेगी। इसमें भी 50 करोड़ तक के स्टॉक का बीमा रहेगा। तीसरी पॉलिसी मनी इंश्योरेंस की रहेगी।
दुकान में रखी नकद राशि चोर, लुटेरे या डकैत ले जाते हैं तो उसका बीमा रहेगा। नकद राशि पर सरकार नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र की शराब दुकानों का 10 लाख, नगर पंचायत क्षेत्र की दुकानों का पांच लाख और ग्राम पंचायत क्षेत्र की दुकानों का दो लाख का बीमा कराने जा रही है। चौथी पॉलिसी शराब दुकान के सुपरवाइजर, सेल्समैन, अन्य कर्मचारी और गार्ड के बीमा की होगी। कर्मचारियों की संख्या लगभग पांच हजार होगी। कर्मचारियों का कुल 11 करोड़ का बीमा होगा।
निविदा प्रारूप में कॉर्पोरेशन ने इस बात का अनुमान लगाया है कि प्रदेश की 712 देसी-विदेशी शराब दुकानों में हमेशा औसतन 100 करोड़ का स्टॉक और नकद रहेगा। नकद राशि को खतरा इसलिए रहेगा कि सुबह 11 से रात नौ बजे तक बिक्री की राशि रात में दुकान में ही पड़ी रहेगी। उस राशि को अगले दिन सुबह 11 बजे बैंक में जमा कराया जाएगा।
आबकारी अधिकारियों का कहना है कि नक्सल क्षेत्र की सरकारी शराब दुकानों को ज्यादा खतरा रहेगा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 27 शराब दुकानें संचालित होंगी। इनमें गरियाबंद जिले की छह, राजनांदगांव जिले की चार, कोण्डागांव जिले की पांच, दंतेवाड़ा जिले की तीन, सुकमा जिले की चार और बीजापुर जिले की पांच सरकारी शराब दुकानें शामिल होंगी।
विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के उल्लंघन का मुद्दा उठेगा
सुप्रीम कोर्ट ने अशोक लेंका विरुद्ध ऋषि दीक्षित मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन के निर्णय के खिलाफ तल्ख टिप्पणी कर आदेश दिया था। वर्ष 2005 में लाइसेंसी दुकानदारों ने लाइसेंस शुल्क नहीं पटाया और प्रदेश से भाग गए थे। इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए इन दुकानों का संचालन सरकार खुद ही करने लगी थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है राज्य सरकार को अपने संविधान की कार्यप्रणाली सही ढंग से ज्ञात नहीं है।
संविधान प्रदत्त व्यवस्था को सरकार ने राजस्व बढ़ाने की प्रक्रिया समझ ली है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार व मशीनरी अगली बार से ऐसी गलती नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 47 का अक्षरशः पालन करने व इसी के अनुरूप शराब नीति का संचालन करने का आदेश दिया था। विधानसभा में कांग्रेस इसी आदेश को पटल पर रखकर सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता ममता शर्मा ने भी इसी मुद्दे पर विधानसभा की याचिका समिति को आवेदन दिया है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव ने बताया कि विधानसभा में गुरुवार को शराबबंदी के अलावा सुकमा नक्सली हमले को उठाकर सरकार को घेरा जाएगा। इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार पर खुफियातंत्र और नक्सल विरोधी अभियान में फेल होने का आरोप लगाएगा। सरकार से कहा जाएगा कि इस बार भी चूक की बात कहकर शहीद जवानों का अपमान न करें।

कैप्टन अमरिंदर सिंह बने पंजाब के नए मुख्यमंत्री

पंजाब विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें राज्यपाल वीपी सिंह बडनोरे ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई उनके साथ उनकी कैबिनेट के 9 मंत्री भी शपथ ले रहे हैं। यह दूसरी बार होगा जब कैप्टन राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं। वो राज्य के 26वें मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
उनके बाद ब्रह्म मोहिदर और नवजोत सिंह सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण के बाद सिद्धू ने कैप्टन के पैर छू कर आशीर्वाद भी लिया। उनके डिप्टी सीएम बनने पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। कहा जा रहा है कि कैप्टन उन्हे डिप्टी सीएम नहीं बनाना चाहते जबकि पार्टी आलाकमान को इस बात पर कोई एतराज नहीं है। बहीं खबर यह भी है कि कैप्टन उन्हें शहरी विकास मंत्रालय दे सकते हैं। इनके बाद मनप्रीत बादल ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली और उनका वित्तमंत्री बनना तय है।
इसके बाद साधु सिंह धर्मसोत, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राणा गुरजीत सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली जबकि अरुणा चौधरी और रजिया सुल्ताना ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ ली।
यादगार बनेगा अमरिंदर का शपथ ग्रहण समारोह
कैप्टन अमरिंदर सिंह के शपथ ग्रहण समारोह को यादगार बनाने के लिए देशभर से प्रमुख कांग्रेसी नेताओं के अलावा अन्य कई दलों के नेता पहुंचे हैं। समारोह को हालांकि अमरिंदर ने सादा रखने की बात कही थी मगर इसमें पार्टी नेताओं व वर्करों समेत करीब 1200 लोगों के पहुंचने की बात कही जा रही है।
शपथ ग्रहण में राहुल गांधी और मनमोहन सिंह नजर आए वहीं बुधवार को राजभवन से जिन नेताओं के पहुंचने की पुष्टि की गई है उनमें फारूख अब्दुल्ला, अखिलेश यादव, भूपिंदर सिंह हुड्डा और वीरभद्र सिंह आदि के नाम भी शामिल हैं।
इनके अलावा पी चिदंबरम, सलमान खुर्शीद, उमर अब्‍दुल्ला, दिग्विजय सिंह, सीपी जाेशी, अहमद पटेल, अजय माकन, अंबिका सोनी, आनंद शर्मा, अर्चना डालमिया, कपिल सिब्‍बल, वीरप्पा मोइली, मलिका अर्जुन खडके, मीनाक्षी नटराजन, मिलिंद मुरली देवडा, मोहसिना किदवई, सचिन पायलट, रेणुका चौधरी, राजीव शंकर राव साटव, राज बब्बर, आस्कर फर्नाडीज, मोहम्मद असलम एवं फिरोजा, मुकुल वासनिक भी पंजाब राजभवन में कैप्टन अमरिंदर के शपथ ग्रहण समारोह के गवाह बने।

सभी बड़े और गंभीर मामलों में सिराज अब्देअली नामक फर्जी गवाह का नाम सामने

कविता रैना हत्याकांड हो या चर्चित व्यापमं घोटाला। सभी बड़े और गंभीर मामलों में सिराज अब्देअली नामक फर्जी गवाह का नाम सामने आया है। वह अभी तक सैकड़ों मामलों में गवाही दे चुका है। इसका ज्यादातर वक्त कोर्ट और थानों में गुजरता है। कई मामलों में पुलिस खुद सेटिंग कर बयान बदलवा देती है। जिन मामलों में सेटिंग नहीं होती उनके खिलाफ बयान भी करवा देती है।
सिराज अब्देअली वह शख्स है जिसे सिपाही से लेकर कोर्ट कर्मचारी भी पहचानते हैं। सैंकड़ों केसों में गवाह बन चुका सिराज कुछ दिनों पूर्व कविता रैना हत्याकांड में गवाही देने कोर्ट पहुंचा तो वकील दंग रह गए कि आखिर पुलिस का परमानेंट गवाह इस गंभीर मामले में कैसे शामिल हो गया। केस डायरी में उसका नाम तीन जगह दर्ज था। सिराज अमूमन रुपए लेकर गवाही से पलट जाता है लेकिन जिस मामले में सेटिंग नहीं होती उसमें खिलाफ भी बयान देता है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। पुलिस खुद लेकर आई और रटे-रटाए बयान करवाए।
पुलिस ने बताया कविता के हत्यारे महेश बैरागी ने नौलखा पार्किंग में एक्टिवा रखी थी। इसमें सिराज को चश्मदीद गवाह बताया। इसके बाद तीन अलग-अलग तारीखों पर किराया चिट्ठी जब्त करना दर्शाई। ताज्जुब इस बात का है कि सभी में सिराज को गवाह बनाया गया।
राजेंद्र नगर थाने में अ.क्र.539/13 में भी सिराज गवाह है। जांच में शामिल दो टीआई-दो एसआई 18 अप्रैल को मुख्य आरोपी नितिन महिंद्रा से हार्ड डिस्क जब्त करने रवाना हुए। मेमोरंडम पर सिराज और राहुल मराठा को गवाह बनाया गया। राहुल सिराज का साथी है और सिराज की तरह वह भी पॉकेट गवाह है।
सिराज राजेंद्र नगर, जूनी इंदौर और चंदन नगर थाने का ‘पॉकेट’ गवाह है। कई मामलों में सिराज को खुद पता नहीं रहता कि उसे केस में गवाह बना दिया। कोर्ट से समंस और वारंट जारी होने पर वह आरोपी-फरियादी से मिलता है। कोर्ट के बाहर सेटिंग हो गई तो बयान पलट देता है। सेटिंग नहीं हुई तो उनके खिलाफ बयान देता है। रेट भी केस के हिसाब से तय हैं। अवैध हथियार और अवैध शराब के मामले में 500 और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर केस में 50 हजार तक वसूल लेता है।
चायवाले और मुखबिर भी गवाह
कनाड़िया थाने के बाहर चाय का ठेला लगाने वाला राजू और एरोड्रम का मुनीम भी परमामेंट गवाहों में शामिल हैं। इन्हें तो कोर्ट से समंस तामील होने पर केस का पता चलता है। इसी तरह लखन तंवर, लखन गौर, रघुवीर पौहरा, रणवीर, सुरेश माघरे, संजय, धीरज, वकील सिंह, रामलाल, रामसिंह, धरमू, रमेश, महादेव, राजेश, गंगाचरण, अजय पथरोड, राजू दीनानाथ, सुबोध पांडे, बाबू खां, सत्तार, मिट्टूलाल, रामप्रसाद, रतनलाल, रमाकांत, जसवंत, नवाब खान, किशोर, नारायण, रुमाब, छगन, भेरु, गणेश, छीतू, हीरालाल, अनिल, भीमसिंह, रामचंद्र, शंकरलाल, विनोद, कुंवरलाल भी पुलिस के पॉकेट गवाह हैं।
तत्कालीन डीआईजी संतोषकुमार सिंह ने भी जून 2015 में 40 से ज्यादा पॉकेट गवाहों को चिन्हित करवाया था और इसकी समीक्षा भी की जा रही थी, ताकि आगे से ऐसे गवाहों का इस्तेमाल ना हो। कुछ दिनों तक ये ठीक रहा, लेकिन फिर थाना प्रभारियों ने पॉकेट गवाहों को कोर्ट में उतारना शुरू कर दिया।
हर मामले में पुलिस को निष्पक्ष एवं स्वतंत्र गवाहों को ही रखना चाहिए। गंभीर मामलों में गवाह बनाते वक्त विशेष ध्यान रखना चाहिए, कि ऐसा कतई ना हो कि वे पॉकेट गवाह हों। अगर पॉकेट विटनेस बनाए गए हैं और रुपए लेकर पक्षद्रोही होते हैं तो उनकी समीक्षा की जाएगी।

सीएम को होली की शुभकामनाएं देने पहुंचे बड़ी संख्या में भाजपा नेता

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास पर होली मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाजपा नेता और उनके समर्थक सीएम को होली की शुभकामनाएं देने पहुंचे थे। सीएम ने इस दौरान फाग गीत गाए और सभी को रंग लगाया। इस दौरान सीएम हाउस में फूलों की होली का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। सीएम ने सभी मेहमानों संग होली खेली और उन्हें मिठाई खिलाई।
सीएम ने ढोलक की थाप पर जैसे ही फाग गीत गाना शुरू किया, वहां मौजूद हर कोई झूम उठा। इस दौरान उन्होंने बुंदेली गीत भी गाए। सीएम हाउस में मनाई गई होली में यूपी और उत्तराखंड में भाजपा की जीत का उत्साह भी साफ नजर आ रहा था।