कैबिनेट में विस्तार को लेकर गर्मा गई प्रदेश की सियासत

कैबिनेट में विस्तार को लेकर प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि कमजोर परफॉर्मेंस और अस्वस्थता के चलते कम से कम चार-पांच मंत्रियों की छुट्टी भी की जा सकती है।
वहीं आठ-नौ नए चेहरे भी कैबिनेट में शामिल किए जा सकते हैं। विस्तार की तारीख तय होने में सबसे बड़ी दिक्कत यही आ रही है कि दिल्ली की तर्ज पर कमजोर मंत्रियों की यहां से छुट्टी कैसे की जाए। नए मंत्रियों को शामिल करने के लिए भौगोलिक, जातिगत और सामाजिक आधार होने के साथ ही स्वच्छ छवि, ईमानदार और उम्र का भी आकलन किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक शिवराज कैबिनेट में नवरात्रि के बाद फेरबदल किए जाने की संभावना बताई जा रही है। इसकी वजह उपचुनाव हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि जल्द विस्तार नहीं हुआ तो फिर नवंबर तक मामला टल सकता है।
इसमें कुछ उम्रदराज और अस्वस्थ मंत्रियों से इस्तीफा लिए जाने की संभावना है तो कुछ कमजोर परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों की भी छुट्टी की जा सकती है। जिन मंत्रियों पर तलवार लटक रही है उनमें कुसुम सिंह महदेले, सूर्यप्रकाश मीणा, शरद जैन शामिल हैं। हर्ष सिंह फिलहाल बिना विभाग के मंत्री हैं, पिछले कुछ दिनों से वे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
कैबिनेट विस्तार की सियासत गर्माते ही दावेदारों ने भी लॉबिंग तेज कर दी है। आदिवासी वर्ग से रंजना बघेल, रामलाल रौतेल, रामप्यारे कुलस्ते, निर्मला भूरिया, मीना सिंह को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। अनुसूचित जाति वर्ग से प्रदीप लारिया, रणजीत सिंह गुणवान, गोपीलाल जाटव तो सामान्य वर्ग और ओबीसी से महेंद्र हार्डिया, रमेश दुबे, हेमंत खंडेलवाल, केदार शुक्ला, यशपालसिंह सिसौदिया, लोकेंद्र सिंह तोमर, जसवंत सिंह हाड़ा, मुरलीधर पाटीदार, रामलल्लू वैश्य और मुकेश चतुर्वेदी भी दावेदारों की सूची में शामिल हैं।

फोन बढ़ते गए और शिक्षा से लोग दूर होते गए दोनों ही क्षेत्रों में बड़ा बदलाव

टेलीफोन का उपयोग करने के मामले में मध्यप्रदेश साल दर साल आगे बढ़ रहा है, लेकिन स्कूलों के एडमिशन के मामले में सूबे का ग्राफ नीचे आता जा रहा है। नीति आयोग की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक 2005 में मप्र में हर 100 में से 5 लोगों के पास फोन था। वहीं 100 में से 94 बच्चे प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश लेते थे। करीब दस साल में इन दोनों ही क्षेत्रों में बड़ा बदलाव हुआ है। फोन बढ़ते गए और शिक्षा से लोग दूर होते गए।
नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मप्र में 2015 में हर 100 में से 60 लोगों के पास टेलीफोन पहुंच गया, लेकिन प्राथमिक स्कूलों में एडमिशन की बात करें तो प्रवेश 100 में से 94 लोगों से घटकर 79 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने भोपाल दौरे के दौरान मप्र सरकार को खरी-खरी सुनाते हुए कहा था कि प्रदेश में स्कूल ड्रॉप आउट बहुत ज्यादा हैं, इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
मप्र में स्कूल शिक्षा विभाग का इस साल का बजट करीब 18 हजार करोड़ रुपए है। पिछले दो सालों से यह बजट करीब 20 हजार करोड़ रुपए के आसपास रहा है। पिछले दो सालों में मप्र सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा बजट दिया। इसके बावजूद सरकारी सिस्टम प्रदेश के स्कूलों में प्रवेश की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। स्कूलों में प्रवेश बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर मिड-डे मील, साइकल वितरण सहित कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

शिक्षक असमंजस में लक्ष्य था एक लाख शिक्षकों के रजिस्ट्रेशन का हो चुके 1.37 लाख से ज्यादा

निजी स्कूलों के शिक्षकों को 12 हजार रुपए में डिप्लोमा देने की घोषणा के बाद शिक्षकों की लाइन लग गई है। प्रदेश में एक लाख शिक्षकों के रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य था। अब तक 1.37 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। निजी स्कूलों के शिक्षक योजना को लेकर अब भी असमंजस में हैं।
उन्हें नहीं पता कि डिप्लोमा के बाद सरकारी नौकरी में इसका फायदा मिलेगा या नहीं। प्रदेश सरकार भी इस संबंध में कोई जवाब नहीं दे रही। मार्च 2019 के बाद पहली से आठवीं कक्षा तक वे ही शिक्षक पढ़ा सकेंगे जिनके पास डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीईएलएड) होगा।
निजी स्कूलों के शिक्षक डिप्लोमा कर सकें इसके लिए सरकार राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान के माध्यम से उनका ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन कर रही है। दो साल के डिप्लोमा कोर्स के लिए 6 हजार रुपए प्रतिवर्ष के हिसाब से फीस लगेगी। शिक्षक ऑन लाइन ट्रेनिंग ले सकें इसके लिए उन्हें डिश टीवी कनेक्शन के नाम पर 1500 रुपए प्रतिवर्ष की छूट भी दी जा रही है।
डीईएलएड के लिए 12वीं में न्यूनतम 50 फीसदी अंक होना जरूरी हैं। ऐसे शिक्षक जो ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट तो हैं लेकिन 12वीं में न्यूनतम अंक की पात्रता से कम हैं उन्हें भी श्रेणी सुधार के लिए दोबारा 12वीं की परीक्षा देना होगी। जिन शिक्षकों के पास बीएड की डिग्री है उन्हें भी 6 माह का ब्रिज कोर्स करना होगा।
डीईएलएड को लेकर निजी स्कूलों के शिक्षक परेशान हो रहे हैं। भोपाल से भी कोई जानकारी नहीं मिल रही। यह भी नहीं पता कि जिन शिक्षकों ने 11वीं बोर्ड की परीक्षा पास की है उन्हें क्या करना है।
मार्च 2019 के बाद किसी भी स्कूल में आठवीं तक पढ़ाने के लिए डीईएलएड होना अनिवार्य होगा। शिक्षकों को इसका कोई फायदा प्रतियोगी परीक्षा में मिलेगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। यह सिर्फ न्यूनतम अर्हता है। राज्य सरकार की तरफ से कोई आदेश नहीं आया है।

शहर में स्वाइन फ्लू का कहर स्वास्थ्य विभाग सकते में, सभी अस्पतालों को किया अलर्ट

शहर में स्वाइन फ्लू का कहर बढ़ता जा रहा है। 24 घंटे में एच1एन1 पॉजिटिव चार मरीजों ने दम तोड़ दिया। ये मौतें बुधवार रात 12 से गुरुवार दोपहर 12 बजे के बीच दर्ज हुई हैं। चारों अधेड़ उम्र के थे। इनमें तीन इंदौर के पुरुष और एक धार की महिला है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सिनर्जी अस्पताल में 57 वर्षीय पुरुष, अपोलो अस्पताल में 58 वर्षीय पुरुष, बॉम्बे अस्पताल में 49 वर्षीय पुरुष की मौत हो गई, जबकि एमवायएच में धार निवासी 49 वर्षीय महिला ने दम तोड़ दिया। अब तक कुल मौतों का आंकड़ा 19 पर पहुंच गया है। इनमें से 10 मृतक इंदौर के हैं।
वहीं गुरुवार को भी दो और मरीजों में एच1एन1 की पुष्टि हुई है। एक मरीज मेदांता और दूसरा एमवायएच में भर्ती है। दोनों की हालत गंभीर है। इसके अलावा डेंगू के भी चार मरीज मिले हैं। इनकी भी कुल संख्या 34 पर पहुंच गई है।
इधर जिला प्रशासन ने सभी अस्पतालों को अलर्ट जारी कर दिया है। संदिग्ध मरीजों की लगातार स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए हैं। महीनेभर से लोगों को एहतियात बरतने के निर्देश जारी करने के बाद भी विभाग संक्रमण रोकने में नाकाम रहा है।
आईडीएसपी प्रभारी डॉ. आशा पंडित ने बताया कि सभी मृतकों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया है। इसमें पाया गया कि मरीज पांच-छह दिन तक खुद ही ठीक होने की कोशिश करते रहे। गंभीर स्थिति होने पर अस्पताल पहुंचे।
– खास तौर पर बुजुर्ग, बच्चे, शुगर के मरीज व गर्भवतियों को सतर्क रहने की जरूरत है

मध्य प्रदेश में छह मंदिर पहाड़ों पर

मध्य प्रदेश में स्थित नौ ख्यात देवी मंदिरों में से छह मंदिर पहाड़ों पर हैं। इनमें मैहर की शारदा माता, सलकनपुर की बिजासन माता और देवास की मां तुलजा भवानी, दतिया की रतनगढ़ माता, टीकमगढ़ की आर्चु माता, बुरहानपुर का इच्छादेवी मंदिर शामिल हैं। इनमें से मैहर की मां शारदा देवी मंदिर और देवास की मां तुलजा भवानी मंदिर में क्षरण की परेशानी सबसे ज्यादा सामने आई है।
मैहर के मंदिर का क्षरण रोकने के लिए तो स्थानीय लोगों ने प्रशासन को जगाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। एक मिनट में 50 भक्तों को दर्शन, प्रांगण में 10 मिनट से ज्यादा ठहराव नहीं और यहां तक कि नारियल भी पहाड़ के नीचे ही फोड़े जाने जैसे कड़े नियम मानने में भी कोई गुरेज नहीं है। हालांकि देवास में पहाड़ से क्षरण के बावजूद ऐसे कोई बड़े प्रयास नहीं किए गए।
मैहर के देवी मंदिर के रखरखाव की जिम्मेदारी निभा रहे इंजीनियर एसबी सिंह कहते हैं नारियल के पानी की धार से मार्बल कट रहे थे और छिलकों से कई बार आग लगने जैसी घटनाएं सामने आईं। इसके बाद नारियल फोड़ने पर रोक लगा दी गई। पहाड़ी के नीचे ही नारियल फोड़ने की अनुमति है। इसके अलावा पहाड़ों पर सीमेंट का स्प्रे, बड़े पैमाने पर प्लांटेशन, ऊपर बने हवन कुंड, छोटे-छोटे निर्माण और हजारों टन मिट्टी हटाकर भार कम करने की कोशिश की गई। भारी वाहन पहले से ही प्रतिबंति हैं।
मंदिर का मामला एनजीटी तक ले जाकर गाइडलाइन जारी करवाने वालों में से एक सामाजिक कार्यकर्ता और एडवोकेट नित्यानंद मिश्रा का कहना है, माना कि 2016 में निर्देश आने के बाद काफी काम हुआ, लेकिन अब नए टेक्नीकल सर्वे की जरूरत है। इससे यह पता लगाया जा सके कि मंदिर की भार क्षमता कितनी है। पहाड़ के सिरे पर भीड़ नियंत्रण करने से नहीं होगा। पहाड़ों पर बनी 1200 सीढ़ियों पर तो लोगों का भार रहता है। वैष्णो देवी की तरह इन्हें नीचे ही रोकना चाहिए।
तकनीकी सलाह के लिए अब लगातार रुड़की जैसी संस्थाओं की मदद ली जाएगी। वर्तमान में नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अीन एक सर्वे होगा। इसके बाद ही आगे की चीजें तय होंगी।
क्षेत्रफल – कैमूर व विंध्यकी पर्वत श्रेणियों के बीच 600 फीट ऊंचाई पर बसा हजारों साल पुराना मंदिर।
भीड़ – नवरात्रि में सप्तमी, अष्टमी अैर नवमीं पर रोज दो लाख से ज्यादा लोगों की भीड़, आम दिनों में 10 हजार से ज्यादा।

मध्यप्रदेश में कमजोर मानसून का असर आने लगा नजर

मध्यप्रदेश में कमजोर मानसून का असर खरीफ फसलों पर अब साफ नजर आने लगा है। धान, सोयाबीन और उड़द का उत्पादन 25 फीसदी तक घट सकता है। अल्पवर्षा के कारण कई जगहों पर सोयाबीन पीला पड़ गया है। धान की फली कमजोर है तो उड़द की फसल में सूखने की समस्या सामने आ रही है।
स्थिति को देखते हुए सरकार 20 सितंबर को खरीफ फसलों पर अल्पवर्षा की स्थिति के मद्देनजर समीक्षा करेगी। वहीं तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की कार्रवाई के लिए उच्च स्तरीय बैठक भी होगी।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में कमजोर मानसून के कारण इस बार सोयाबीन का रकबा पांच लाख हेक्टेयर पहले से घट गया है। इसकी पूर्ति के लिए किसानों ने छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द की अधिक बोवनी की थी, लेकिन ये भी अल्पवर्षा की शिकार हो गई। पानी की कमी और तापमान में नमी नहीं होने की वजह से फसल सूखने लगी है।
पूर्व कृषि संचालक डॉ. जीएस कौशल का कहना है कि पूरे मध्यप्रदेश में खरीफ की फसलें कम बारिश की वजह से प्रभावित हुई हैं। इसका असर निश्चित तौर पर उत्पादन पर भी पड़ेगा। 25 प्रतिशत तक उत्पादन घट सकता है।इससे ज्यादा चिंता की बात रबी फसलों के लिए है। भू-जल स्तर गिरने की वजह से पलेवा में दिक्कत आ सकती है। ज्यादातर बांध खाली हैं। इससे नहरें भी कम ही चल पाएंगी।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ.राजेश राजौरा ने बताया कि 20 सितंबर को अल्पवर्षा की वजह से पैदा हो रहे हालातों को लेकर समीक्षा होगी। इसके साथ मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने को लेकर भी जल्द ही बैठक करेगी।

मप्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सामने आई बांटे गए वेतन में विसंगति

मप्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बांटे गए वेतन में ऐसी विसंगति सामने आई हैं, जिसने पूरी व्यवस्था को हिला दिया है। पंचायत विभाग ने पिछले 10 महीनों में प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों में पदस्थ सचिवों को वेतन में लगभग 1 अरब 21 करोड़ रुपए ज्यादा बांट दिए है।
विभाग के पीएस राधेश्याम जुलानिया ने यह गड़बड़ी पकड़ी है। इसके बाद प्रदेशभर के पंचायत सचिवों से वेतन में अधिक बांटी गई राशि की वसूली शुरू हो गई है। एक पंचायत सचिव से 53 हजार रुपए से ज्यादा वसूल होने हैं।
गौरतलब है कि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जुलाई महीने में ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन 5300 रुपए कम कर दिया था। ग्रापं सचिवों सहित कई संगठनों ने इसका विरोध किया और वेतन में कटौती को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच विभाग ने एक निर्देश जारी कर दिया कि, ग्रापं सचिवों को 10 महीने से ज्यादा वेतन मिल रहा है।
विभाग के अनुसार पंचायत सचिवों का वेतन 14 हजार 646 रुपए है लेकिन, किसी विसंगति के कारण अक्टूबर 2016 से पंचायत सचिवों को 19 हजार 770 रुपए वेतन दिया जा रहा है। यानी एक पंचायत सचिव को 5324 रुपए का वेतन हर महीने ज्यादा मिला है। यह वेतन अक्टूबर 2016 से जुलाई 2017 तक मिला।
यानी 10 महीने में एक पंचायत सचिव को 53 हजार 240 रुपए का वेतन ज्यादा दे दिया गया। पूरे प्रदेश में 22 हजार 824 ग्राम पंचायत सचिव हैं। इस हिसाब से 10 महीने में पूरे प्रदेश में लगभग 1 अरब 21 करोड़ 51 लाख रुपए का वेतन सचिवों में ज्यादा बंट गया है। सरकार अब सचिवों से वेतन में ज्यादा दी गई राशि को वसूल करेगी।
वेतन में ज्यादा मिल चुकी राशि को वसूलने के लिए हर पंचायत सचिव से मप्र सरकार अंडरटेकिंग फार्म (वचन पत्र) भरवा रही है। जनपदों के माध्यम से भरवाए जा रहे इस वचन पत्र में लिखा है कि 20 जुलाई 2013 से 1 अगस्त 2013 को तय हुआ वेतनमान अनंतिम था। इस वेतनमान से ऊपर जितनी भी राशि मुझे मिली है उसे सरकार वापस वसूल सकती है।
सचिव इस वचन पत्र में लिखकर दे रहे हैं कि, वेतन में ज्यादा मिली राशि को सरकार हर महीने मिलने वाले वेतन या खास मौकों पर मिलने वाले एरियर की राशि में से वसूली हो सकती है। इतना ही नहीं सचिवांे से यह भी लिखवाकर लिया जा रहा है कि, यदि किसी कारण वह ये राशि वापस नहीं कर पाते तो परिवार या उत्तराधिकारी से बढ़े हुए वेतन की राशि वसूल की जा सकती है।
पूरे प्रदेश में ग्राम पंचायत सचिवों से ऐसे वचन पत्र भरवाएं जा रहे हैं। सरकार के हिसाब से पिछले 10 महीने से सचिवों को करीब 5300 रुपए ज्यादा मिल रहा था। इस हिसाब से एक सचिव से 53 हजार की वसूली तो होनी ही है।
ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन जनपदों से निर्धारित होता है। शासन ने जो वेतन तय किया था उसे कई जगह वेतन बहुत ज्यादा मिल रहा था। जो वेतन ज्यादा मिला है उसे एडजस्ट करने के लिए अंडरटेकिंग फार्म भरवाए जा रहे हैं।

राजस्थान में दो नाबालिग बच्चियां गलत हरकतों की शिकार हुई

राजस्थान में दो नाबालिग बच्चियां गलत हरकतों की शिकार हुई। एक बाड़मेर के केन्द्रीय विद्यालय में तो दूसरी जयपुर में अपने ही घर में अपने ट्यूटर से। बाड़मेर में पुलिस ने संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जबकि जयपुर में आरोपी ट्यूटर पुलिस की गिरफ्त में आ गया है।
बाड़मेर के जालीपा केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने वाली छह वर्ष की मासूम के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया हैं। जिसके बाद प्रशासन के होश उड़ गए हैं। प्रशासन ने पूरी रात स्कूल में अधिकारियों से पूछताछ की। पुलिस ने बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया है और अस्पताल के बाहर सुरक्षा कड़े कर दिए हैं।
एसपी बाड़मेर गगनदीप सिंगला ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय जालीपा कैंट में दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली एक मासूम को शुक्रवार शाम पेट दर्द की शिकायत हुई जिसके बाद उसे एक निजी अस्पताल लाया गया। जहां बच्ची के निजी अंगों में दर्द होने पर डॉक्टर ने मामले को संदिग्ध मानते हुए परिजन को बच्ची के साथ गलत हरकत होने का अंदेशा जताया, जिसके बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने बच्ची के साथ स्कूल में ही यौन उत्पीड़न होने के मामले में पुलिस ने स्कूल पहुंच प्राचार्य और अन्य स्टाफ से जानकारी ली।
एसपी ने बताया कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस ने स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी देखे हैं। पुलिस ने कई संदिग्धों को पकड़ा भी है, जिसमें एक टीचर भी शामिल है।
उधर जयपुर में एक 12 साल की एक बच्ची घर में पढ़ाने आने वाले ट्यूटर की गलत हरकतों का शिकार हो गई। आदर्श नगर थाना पुलिस ने इस 35 वर्षीय ट्यूटर को गिरफ्तार किया है। थानाप्रभारी बृजभूषण अग्रवाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ आदर्श नगर में रहने वाली एक महिला ने 13 सितंबर को रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिसमें बताया कि उनकी 12 साल की बेटी निजी स्कूल में 7वीं कक्षा की छात्रा है। करीब 15 दिन पहले ही उन्होंने बेटी को पढ़ाने के लिए आरोपी ट्यूटर को रखा था। वह बच्ची को पढ़ाने के लिए घर पर ही आता था।
गत 9 सितंबर को बच्ची ट्यूशन कर बैडमिंटन खेलने के लिए नीचे गई थी। तभी आरोपी ट्यूटर बहला फुसलाकर नाबालिग बच्ची को दूसरे ब्लॉक की छत पर ले गया। जहां उसने बच्ची से अश्लील हरकतें की। तब बच्ची चिल्लाई तो आरोपी ट्यूटर भाग निकला। मामले की जानकारी बच्ची के परिजनों को हुई तब उसकी मम्मी ने आदर्श नगर थाने में पोक्सो एक्ट, छेड़छाड़ व दुष्कर्म के प्रयास का मुकदमा दर्ज करवाया। इसके बाद आज आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

मध्यप्रदेश के 60 हजार अभ्यर्थी आरक्षक भर्ती परीक्षा में नहीं हो पाए शामिल

मध्यप्रदेश के करीब 60 हजार अभ्यर्थी व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित की जा रही आरक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। विभिन्न् तकनीकी कारणों के चलते उन्हें यह खामियाजा भुगताना पड़ा। अब व्यापमं इन्हें फिर से प्रवेश पत्र जारी कर परीक्षा में शामिल करेगा। इधर, व्यापमं की दलील है कि यह सर्वर की दिक्कत की वजह से हुआ।
आरक्षक भर्ती परीक्षा को शुरू हुए एक महीना पूरा होने वाला है। यह परीक्षा 18 सितंबर तक होना है। इस तरह से रोज करीब दो हजार अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने से वंचित होना पड़ा। अभी परीक्षा समाप्त होने में तीन दिन शेष हैं, इसलिए यह संख्या बढ़ भी सकती है।
परीक्षा देने से वंचित रहे अभ्यर्थियों में कई ऐसे भी हैं जो दूसरे शहरों से परीक्षा देने आए थे। अब उन्हें दोबारा परीक्षा देने आना पड़ेगा। व्यापमं की लापरवाही और उचित व्यवस्था न होने से ऐसी स्थिति बनी। अभ्यर्थी अमित शर्मा ने बताया कि गलती व्यापमं ने की और खामियाजा परीक्षार्थी भुगत रहे हैं। आने-जाने का खर्चा जेब से लगाओ और पूरा दिन भी खराब करो।
जो परीक्षार्थी तकनीकी दिक्कतों की वजह से परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए उनके लिए व्यापमं 27-28 सितंबर को फिर से परीक्षा आयोजित करेगा। इन परीक्षार्थियों को जल्द ही प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। व्यापमं ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। आरक्षक भर्ती परीक्षा 19 अगस्त से शुरू हुई थी जो 18 सितंबर तक चलेगी। इसके बाद व्यापमं सभी परीक्षा केंद्रों से आई रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा से वंचित रहे अभ्यर्थियों की परीक्षा करेगा।
आधार सत्यापन में आ रही दिक्कतों के चलते व्यापमं ने बायोमीट्रिक सत्यापन भी मान्य किया है। इसके माध्यम से भी अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो जाएंगे। गौरतलब है कि आधार सत्यापन न होने की वजह से हजारों अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे। इधर, व्यापमं के अधिकारियों की दलील है कि इसमें व्यापमं की कोई त्रुटि नहीं है बल्कि सर्वर धीमा होने की वजह से ऐसी स्थिति बनी। इसलिए अभ्यर्थी बायोमीट्रिक सत्यापन भी करवा सकता है।
कई बार सर्वर पर लोड ज्यादा होने की वजह से यह धीमा हो जाता है। यह ठीक वैसी ही स्थिति है जैसी आयकर रिटर्न भरने के दौरान होती है जब लोड बढ़ने से रिटर्न फाइल नहीं हो पाता। हालांकि अब अभ्यर्थी बायोमीट्रिक सत्यापन भी करवा सकता है। जो अभ्यर्थी परीक्षा नहीं दे पाए थे उनके लिए 27-28 सितंबर को फिर परीक्षा करवा रहे हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को फिर से प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। इसकी तैयारी चल रही है।

कमजोर परफॉर्मेंस वाले कई मंत्री निशाने पर कैबिनेट की तरह मप्र से भी की जा सकती है कई मंत्रियों की छुट्टी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कैबिनेट विस्तार के संकेत देने के साथ ही प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। चुनावी जमावट के नाम पर लगभग आधा दर्जन कमजोर परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों के सिर पर तलवार लटकी हुई है। मंगलवार को कैबिनेट में सीएम के संकेत भी साफ इशारा कर रहे हैं कि इस बार मोदी कैबिनेट की तरह मप्र से भी कई मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है। विस्तार से पहले सीएम मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे। इसके लिए अफसर मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करवा रहे हैं। इसे भाजपा कोरग्रुप की बैठक में भी रखा जाएगा।
कैबिनेट में शामिल आधा दर्जन मंत्री परफॉर्मेंस, विवाद अथवा बिगड़े स्वास्थ्य के कारण मंत्रिमंडल से बाहर किए जा सकते हैं। पिछली बार भी मुख्यमंत्री चौहान ने फॉर्मूला-75 लागू कर बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस बार चूंकि 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए कैबिनेट की फाइनल टीम का गठन किया जाना है, इसलिए परफॉर्मेंस, जातिगत समीकरण, भौगोलिक समीकरण के अलावा कांग्रेस के कब्जे वाले इलाके में प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर ज्यादा फोकस होगा।
भाजपा सूत्रों की मानें तो जल्द ही कोरग्रुप की बैठक बुलाकर मंत्रियों के नाम फाइनल किए जाने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल पार्टी और सीएम के बीच जिन मंत्रियों के परफॉर्मेंस को लेकर चर्चा है, उनमें कुसुम महदेले, शरद जैन और ओमप्रकाश धुर्वे शामिल हैं। इन मंत्रियों के कामकाज को लेकर सत्ता संगठन दोनों ही नाराज हैं। महदेले से उनके स्टाफ की मनमानी व विवादास्पद बयान को लेकर नाराजगी है। दूसरे महदेले की उम्र 70 साल से अधिक होना भी एक वजह बताई जा रही है।
मोदी कैबिनेट में कई मंत्रियों को उम्र की वजह से कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। ओमप्रकाश धुर्वे और राज्य मंत्री शरद जैन का कामकाज संतोषजनक नहीं माना गया है। दोनों ही मंत्री महाकौशल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। धुर्वे के क्षेत्र शहपुरा में हाल ही में भाजपा नगरीय निकाय का चुनाव भी हार गई थी।
सूत्रों का मानना है कि धुर्वे की जगह पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिह कुलस्ते के भाई रामप्यारे कुलस्ते को भी पार्टी एक मौका दे सकती है। हर्ष सिंह लंबे समय से बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं। अस्वस्थता के चलते उनके विभाग अन्य मंत्रियों को सौंपे गए थे।
चंबल के दो मंत्रियों के मामले फिलहाल कोर्ट में चल रहे हैं। इसलिए माना जा रहा है कि दोनों के फैसले आने पर ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
अमित शाह ने कांग्रेस के कब्जे वाली तीनों लोकसभा सीट को जीतने का टारगेट प्रदेश नेतृत्व को सौंपा है। इस नजरिए से विचार किया जा रहा है कि तीनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कैबिनेट में बढ़ाया जाए। गौरतलब है कि चंबल-ग्वालियर में कांग्रेस ने 11 सीटें जीती थीं। इस दृष्टि से यहां से कद्दावर नेता को कैबिनेट में शामिल करने पर पार्टी विचार कर रही है।