देश के हर कॉल सेंटर का कुछ ऐसा ही हाल

जब कभी उसका क्लाइंट फोन काट देता है, तो वह वॉशरूम जाकर अकेले में रोती है। फिर वह अपनी आंखें धोती है और डेस्क पर वापस आकर फेक अमेरिकी अंग्रेजी में अगली कॉल के लिए तैयार होती है। यह केवल हैदराबाद के एक कॉल सेंटर की कहानी नहीं है, बल्कि देश के हर कॉल सेंटर का कुछ ऐसा ही हाल है।
देश को भले ही कॉल सेंटर्स का हब माना जाने लगा हो, लेकिन देश-विदेश को सर्विस उपलब्ध करा रहे बीपीओ कर्मचारी खासे तनाव में रहते हैं। विदेश से आने वाली कॉल्स पर उन्हें नस्लवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। अमेरिका जैसे देशों के लोग उन्हें ‘जॉब चोर’ तक कह देते हैं।
‘बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिग (बीपीओ) सेंटर्स इन इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाइंट से बात करते हुए कर्मचारियों को नस्लवादी गालियां सुननी पड़ती हैं, जो तनाव का कारण बनती हैं। इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ केंट की श्वेता राजन ने यह रिपोर्ट तैयार की है। वह बताती हैं, ‘यह मंदी के बाद की सच्चाई है। पश्चिमी देशों के क्लाइंट्स का स्वभाव कॉल सेंटर्स वालों के लिए काफी रूखा होता है। यदि उन्हें लगता है कि कॉलर भारतीय है तो उनका सबसे बड़ा डर यह होता है कि ये लोग उनकी नौकरी चुरा रहे हैं और सारी चीजें आउटसोर्स हो रही हैं।’
एक कॉल सेंटर वर्कर ने बताया, ‘अपशब्द यह रोज की बात है, दिन में एक या दो बार। कॉल के बीच में कोई क्लाइंट कहता है, यू इंडियंस!’ रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ने भी बीपीओ कर्मचारियों को प्रभावित किया है। श्वेता का कहना है कि ब्रेग्जिट और अमेरिका में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद नस्लभेदी टिप्पणियां बढ़ गई हैं।
90 के दशक में जब विदेशी कंपनियां भारत आई थीं, तब उन्होंने पूरी कोशिश की थी कि कॉलर्स को पता न चल पाए कि उनकी मदद करने वाला कोई भारतीय है। इसका एक कारण यह भी था कि लोग विदेश में बैठे किसी व्यक्ति से मदद लेने के बजाय उनके देश के व्यक्ति से प्रोडक्ट या सर्विस पर मदद लेना चाहेंगे। 90 के दशक में भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका तक भेजा गया, ताकि वे वहां बात करने के तौर-तरीके सीख जाएं।

सेंधवा में दुष्कर्म से जुड़े दो मामले सामने आने के बाद हलचल

सेंधवा जिले में दुष्कर्म से जुड़े दो मामले सामने आने के बाद हलचल मच गई है। मिली जानकारी के मुताबिक बीती 26 नवंबर की रात को वरला थाना क्षेत्र के अंतर्गत पांजरिया गांव में दो आरोपियों ने घर में घुसकर एक विवाहिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
विवाहित महिला ने आरोप लगाया है कि दोनों आरोपियों ने पहले घर में घुसकर मारपीट की, उसके बाद दुष्कर्म किया। इस वारदात के अंजाम देने वाले दोनों आरोपियों के नाम अब्दुल बारेला और श्रीराम बारेला है, जिनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। वहीं दोनों फरार आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है।
इसके अलावा जननी एक्सप्रेस में भी एक आशा कार्यकर्ता के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। मिली जानकारी की मुताबिक जननी एक्सप्रेस के चालक के भाई ने प्रसव मामले की जानकारी लेने के बहाने आशा कार्यकर्ता को बुलाया और जननी एक्सप्रेस में ही दुषकर्म किया। पुलिस ने बताया कि यह घटना 11 नवंबर की रात 10 बजे हुई। इस मामले में आरोपी के खिलाफ केस कर्ज कर लिया गया है और उसकी तलाश की जा रही है।

व्यापमं घोटाले में शातिर आरोपियों के साथ कई निर्दोष भी चपेट में

बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में शातिर आरोपियों के साथ कई निर्दोष भी चपेट में आ गए। एसटीएफ ने बगैर कोई पुख्ता सबूत या जांच के उन्हें सिर्फ इसलिए आरोपी बना दिया, क्योंकि वे संदिग्ध परिस्थिति के घेरे में आ रहे थे। बाद में एसटीएफ उनके खिलाफ सबूत जुटा भी नहीं पाई। ऐसे ही 27 आरोपियों को सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में क्लीनचिट दे दी है।
विशेष न्यायधीश डीपी मिश्र की अदालत में पेश की गई चार्जशीट में सीबीआई ने सबूत नहीं होने, आवेदक के निर्दोष होने के पूरे प्रमाण होने, जांच से पहले ही मौत होने या ऐसे साक्ष्य जो कोर्ट में जिरह के दौरान टिक नहीं पाएंगे, के आधार पर 27 लोगों को निर्दोष बताया है।
एसटीएफ द्वारा दीपा देवी, रोहित कुमार, धर्मेंद्र शुक्ला, अरविंद पुरी, इरफान खान और भारत बघेल को बतौर इंजन और सतेंद्र सिंग को बोगी बताते हुए आरोपी बनाया गया था। सीबीआई को जांच में इन सातों आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले, क्योंकि ये इन लोगों ने फॉर्म तो भरे थे लेकिन वे परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए।
सीबीआई की जांच में मोनिका सेठ का मामला बेहद रोचक निकला। मोनिका के मकान का पता, फोन नंबर, ईमेल आईडी और आवेदन फॉर्म सहित अन्य सभी जानकारियां सही पाई गईं। उसके नंबर भी आगे, पीछे, दाएं और बाएं में बैठे परीक्षार्थियों से भी कम हैं। इसके बाद भी एसटीएफ ने मोनिका को बोगी बताकर आरोपी बना दिया था।
एसटीएफ ने अमित निमावत, बालेंद्र राजपूत और सुनीता सागर को बतौर दलाल आरोपी बनाया था। सीबीआई को जांच में इन तीनों लोगों से जुड़ा कोई भी आवेदक या आरोपी नहीं मिला। कोई ऐसा साक्ष्य भी नहीं मिला जिससे यह साबित किया जा सके कि उक्त तीनों ने पीएमटी परीक्षा में दलाली की है।
एसटीएफ ने 12 ऐसे लोगों को भी क्लीनचिट दी है, जिनके खिलाफ एसटीएफ के पास सबूत तो थे लेकिन वे इतने पुख्ता नहीं थे कि कोर्ट में जिरह के दौरान टिक पाते। इन लोगों में बदन सिंग यादव, गोपाल सिंग, नरेंद्र कौशिक, ठाकुर प्रसाद, जीवन लाल कुशराम, देवाराम, प्रकाश सिंग दापकरा, छोटेलाल जाटव, भूप सिंह सुमन, जीएस सुमन, बाबू लाल चौपड़ा, चीमा चौधरी शामिल हैं। वहीं जांच के दौरान मौत होने के कारण चंद्र सिंग, शैलेंद्र सिंग, ब्रजेश गर्ग और भारत सिंह सोलंकी को आरोपी नहीं बनाया गया।

आपबीती :- लगा था नहीं बच पाऊंगा, लेकिन आज नई जिंदगी मिल गई

भोपाल से सटे जंगल में बाहरी दखल से बाघ आक्रामक हो गए हैं। इसी का नतीजा है कि अब वे इंसानों पर हमला करने लगे हैं। शुक्रवार को पहली बार भोपाल से सटे मेंडोरा के जंगल में एक बाघ ने वनकर्मी पर हमला कर दिया।
इससे वनकर्मी घबरा गया और शोर मचाने लगा, तब तक बाघ झाड़ियों की तरफ भाग गया। हमले में वनकर्मी के बाएं पैर पर दो जगह बाघ के नाखून से गहरे घाव लगे। घायल वनकर्मी का जेपी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
घायल वनकर्मी नारायण सिंह मीना ने बताया कि रोज की तरह वह शुक्रवार सुबह 9 बजे समरा रेंज की मेंडोरा बीट में पैदल गश्ती पर निकला था। तभी सामने से बाघ ने अचानक हमला कर दिया। बाघ का पंजा उसके बाएं पैर पर जांघ और घुटने के नीचे दो जगह लगा। घटना से वह घबरा गया और बचाओ-बचाओ कहकर शोर मचाने लगा। तब तक बाघ झाड़ियों की तरफ निकल गया। शोरगुल सुनकर पास में काम कर रहे मजदूर आए और उन्होंने डिप्टी रेंजर, नाकेदारों को सूचना देकर वनकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया।
रोज की तरह मैं जंगल में झाड़ियों के बीच पगडंडियों से पहाड़ी की तरफ जा रहा था। अचानक सामने से बाघ आ गया। मैंने सोचा अब नहीं बच पाऊंगा। मेरे हाथ-पांव कांप रहे थे, तब तक बाघ ने मुझ पर हमला कर दिया। मैं चिल्लाने लगा तो वह जंगल की तरफ चला गया।
गनीमत रही कि वह अपने मुंह और पंजे से मुझे पकड़ नहीं पाया और मैं बच गया। आज मुझे नहीं जिंदगी मिली है। 25 साल से जंगल में बाघ की देखरेख कर रहा हूं, कई बार आमना-सामना हो चुका था, लेकिन ऐसी नौबत कभी नहीं बनी। आज के बाद कभी पैदल गश्ती पर जंगल नहीं जाऊंगा, चाहे भले ही नौकरी चली जाए। आज मेरी जान चली जाती तो मेरा परिवार अकेला हो जाता। (जैसा कि घायल वनकर्मी ने नईदुनिया को बताया।)
वनकर्मी को पता था कि क्षेत्र में बाघ का मूवमेंट है। ऐसे में उसे अकेले गश्ती पर नहीं जाना था। वन विभाग की तरफ से घायल का इलाज कराया जा रहा है। बाघ की देखरेख बढ़ा दी है। अलग से गश्ती करने दो टीमें बनाई गईं हैं। – डॉ. एसपी तिवारी, वन संरक्षक, भोपाल
इस घटना से वन विभाग को सीख लेनी चाहिए। क्योंकि बाघ बाहर निकलकर हमला नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनके क्षेत्र में बाहरी दबाव बढ़ने के कारण खुद की सुरक्षा में वे हमला
कर रहे हैं। राजानी से सटे जंगल में अतिक्रमणकारियों को हटाकर बाघों की सुरक्षा बढ़ानी होगी।

मध्य प्रदेश में 2 हजार 820 बच्चे अतिकुपोषित एवं 26 हजार 35 बच्चे कुपोषण के शिकार

जिले में पोषाहार, स्नेह सरोकार, ममता अभियान सहित सांझा चूल्हा आदि योजनाओं के जरिए कुपोषण भगाने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। लेकिन कुपोषण बधा का पीछा नहीं छोड़ रहा। महिला बाल विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2 हजार 820 बच्चे अतिकुपोषित एवं 26 हजार 35 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।
दोनों श्रेणियों को मिला दें तो कुल 28 हजार 855 में से 15 हजार 380 बालिकाएं एवं 13 हजार 775 बालक कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। आंकड़ों से जाहिर है जिले में कुपोषण ने बालकों की अपेक्षा बालिकाओं को अधिक घेर रखा है। बड़ी तादात में कुपोषित बच्चे सामने आने के बाद कलेक्टर ने प्रशासनिक अफसरों से अति कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल करने के निर्देश दिए हैं। इधर कुपोषण से ग्रस्त बच्चों को ठीक करने के लिए माता-पिता नीम हकीमों की शरण में जा रहे हैं। सितम्बर माह में झाड़ फूंक के चक्कर में बरखेड़ा गांव की ढाई वर्षीय दीपिका की जान चली गई थी।
जिले में अति कुपोषित बच्चों को थर्ड मील योजना के तहत आंगनबाड़ियों के माध्यम से दोपहर तीन बजे भोजन देने की योजना फ्लॉप हो गई है। जिले में कहीं भी व्यवस्थित ढंग से यह योजना लागू नहीं है। मामले में मबावि अधिकारी चंद्रसेना भिड़े ने स्वीकारा कि जिले में थर्ड मील का क्रियान्वयन व्यवस्थित ढंग से नहीं हो पा रहा है। कलेक्टर साहब से चर्चा कर जल्द इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। ज्ञात हो कि जिले में 2 हजार 417 आंगनवाड़ी केंद्र है।
सीएमएचओ डॉ अनुसूईया गवली के अनुसार बच्चों में कुपोषण उनकी माताओं के खानपान एवं पोषण स्तर से हो रहा है। समाज के पिछड़ेपन की वजह से माताएं दो बच्चों के बीच में कम से कम दो साल का अंतर नहीं रखती। साथ ही पर्याप्त डाइट भी नहीं लेती। इसलिए माता एवं होने वाली संतान दोनों ही कमजोर रहती है। कम उम्र में शादी होना भी शारीरिक कमजोरी की एक प्रमुख वजह है। ज्ञात हो कि जिले में बालविवाह आज भी मोटे पैमाने पर हो रहे हैं।
स्नेह सरोकार: शासन की इस योजना के तहत अति कुपोषित बच्चों को सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी या किसी भी संपन्न् व्यक्ति द्वारा गोद लेकर पोषण आहार देने की जिम्मेदारी ली जाती है।
सांझा चूल्हा: इस योजना के तहत आंगनबाड़ियों में 3 से 6 साल के बच्चों को प्रतिदिन नाश्ता एवं भोजन दिया जाता है।
पोषाहार: इस योजना के तहत आंगनबाड़ियों से तीन साल तक के बच्चों एवं गर्भवतियों को सूखे राशन के पैकेट देकर 125 ग्राम प्रतिदिन पकाकर डाइट देने की व्यवस्था है।
काम्पलीकेशन यानी जटिलताओं वाले बच्चे जिनमें खून, शूगर, पानी आदि की कमीं हो जाती हैं। ऐसे बच्चों को गंभीर जटिलता की श्रेणी में रखा जाता हैं। ऐसे बच्चों को यदि समय पर इलाज न मिले तो वह मरणासन्न् अवस्था में पहुंच सकते हैं। बिना डाक्टरों की जांच के इनका चि-ांकन नहीं किया जा सकता।
अतिकुपोषित बच्चों की पहचान करके उन्हें एनआरसी में भर्ती कराने के लिए महिला बाल विकास अधिकारी को कहा है। ओपीडी से भी बच्चों को केंद्र में भर्ती किया जा रहा है। हम नेगेटिव नहीं हैं। कुपोषण से एक भी बच्चे को मरने नहीं देंगे।
महिला बाल विकास अधिकारी से कहा है कि वह गंभीर एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों एवं ऐसे परिवार को चिन्हित करें जो वास्तव में गरीब हो। सूची को हम अफसरों को उपलब्ध करा रहे हैं। बच्चों को गोद लेकर सरकारी अफसर पोषाहार देकर देखभाल करेंगे। स्वयहायता समूहों के माध्यम से ऐसे परिवारों की महिलाओं को रोजगार देने की योजना भी है। मीडिया एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी अपील है कि अति कुपोषित बच्चों को गोद लेकर देखभाल की जिम्मेदारी लें।

पासपोर्ट कार्यालय में अब ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार

पासपोर्ट कार्यालय में अब ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। लंबित आवेदन निपटाने और आवेदकों की सुविधा के लिए नए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी नीलेश श्रीवास्तव ने यह सुविधा शुरू की है। विदेश मंत्रालय ने मौजूदा पासपोर्ट अधिकारी मनोज राय को मुंबई के लिए रिलीव कर उनके स्थान पर श्रीवास्तव को तैनात किया है।
पासपोर्ट अधिकारी का पदभार संभालने के बाद श्रीवास्तव ने विशेष चर्चा में बताया कि अब तक आवेदन जमा कराने के लिए केवल ऑनलाइन सुविधा ही थी, लेकिन अब पेंडिंग प्रकरण निपटाने और आवेदकों की सुविधा के लिए पासपोर्ट मुख्यालय (बैक ऑफिस) में ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि आवेदकों की सुविधा के लिए यह विकल्प भी शुरू किया गया है। अभी तक जिन्हें ऑनलाइन अपॉइंटमेंट मिलता था, केवल उनके ही आवेदन स्वीकार किए जाते थे। अब बिना अपॉइंटमेंट वाले आवेदकों को वापस नहीं लौटना पड़ेगा।
मंत्रालय ने अब तक पासपोर्ट अधिकारी रहे मनोज राय को भोपाल से रिलीव कर दिया है, उन्हें मुंबई में डिप्टी पासपोर्ट अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर मंत्रालय ने उन्हें अब तक डिप्टी पासपोर्ट अधिकारी रहे श्रीवास्तव की क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के रूप में पदस्थापना की है।

पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई पेंशन योजना का पूरा लाभ दिलाने में बाधक बन रहा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन

प्रदेश के पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई पेंशन योजना का पूरा लाभ दिलाने में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) बाधक बन रहा है। ओडिशा सहित कुछ अन्य राज्यों में ऐसा नहीं है। उपमहासचिव चंद्रशेखर परसाई ने कहा कि यह विसंगति एवं भ्रष्टाचार दूर कराने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। यह ऐलान निवृत्त कर्मचारी 1995 राष्ट्रीय समन्वय समिति के राज्य स्तरीय पहले सम्मेलन में किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बढ़ी हुई पेंशन के मामले में ईपीएफओ बाधक बन रहा है, भुवनेश्वर (ओडिशा) में ऐसा नहीं है। 1 सितंबर 2014 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले एवं अभी कार्यरत कर्मचारियों को हायर पेंशन का लाभ दिलाने की लड़ाई जारी है। ‘एक्जम्टेड” संस्थानों को भी बढ़ी हुई पेंशन के दायरे में लिए जाने की मांग की जा रही है।
इसके लिए ईपीएफओ द्वारा 31 मई 2017 को जारी आदेश निरस्त किए जाने की मांग को लेकर 21 फरवरी 2018 को रामलीला मैदान दिल्ली में देशभर के पेंशन भोगी आकर धरना देंगे। साथ ही ईपीएफ अधिनियम की विसंगतियों को दूर करने, पीएफ पर मिलने वाली ब्याज दरों में बढ़ोतरी और 3 सितंबर 2013 से राज्य सभा में लंबित कोशियारी कमेटी की सिफारिशों को लागू कराने का दबाव बनाया जाएगा। सम्मेलन का आयोजन एमपी स्टेट एग्रो कार्पोरेशन कर्मचारी संघ द्वारा किया गया था।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सलाहकार एवं मप्र खनिज विकास निगम अध्यक्ष शिव चौबे ने आश्वासन दिया कि वह शासन के स्तर पर हर संभव मदद दिलाएंगे। भूमि विकास निगम के कर्मचारी रहे चौबे को भी 845 रुपए ईपीएफ पेंशन मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पहले भी वह वर्षों तक संघर्ष कर चुके हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश येंडे ने 1995 की योजना का ब्योरा दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी भी दी।
उपमहासचिव परसाई ने बताया कि सम्मेलन में प्रदेश के 48 जिलों से करीब 1500 पेंशनभोगी एवं कर्मचारियों ने कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने बताया कि ओडिशा की तर्ज पर प्रदेश में भी बढ़ी हुई पेंशन की मांग को लेकर वह ईपीएफओ के क्षेत्रीय कमिश्नर को मांग पत्र भी सौंपेंगे। कार्यक्रम के समापन पर जेएस पुरी ने आभार जताया।

अब आपका बिजली कनेक्शन भी आधार नंबर से लिंक होगा

बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के बाद अब आपका बिजली कनेक्शन भी आधार नंबर से लिंक होगा। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने इस बारे में अपने वितरण केंद्रों को आदेश जारी कर दिए हैं। इंदौर-उज्जैन संभाग में फौरी तौर पर 11 लाख उपभोक्ताओं के नंबर लिंक करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
बिजली कंपनी के एमडी आकाश त्रिपाठी ने अपने सभी 475 विद्युत वितरण केंद्रों के प्रभारियों को उपभोक्ताओं से आधार नंबर लेने के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा है कि बिल बांटते या बिल जमा करते वक्त सभी उपभोक्ताओं से आधार नंबर ले लिए जाएं और उन्हें उनके कनेक्शन के साथ कम्प्यूटर में फीड किए जाएं।
बिजली कंपनी ने आधार नंबरों के लिए अपने सॉफ्टवेयर में परिवर्तन करते हुए उपभोक्ता के नाम के साथ नया कॉलम भी जोड़ दिया है। फिलहाल कंपनी ने आधार नंबर देना उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य नहीं किया है। इन्हें स्वेच्छा से लिया जा रहा है।
उपभोक्ताओं के कनेक्शन से आधार लिंक करने की कोई खास वजह बिजली कंपनी नहीं बता रही। न ही शासन से इस बारे में आदेश जारी हुआ है। कंपनी कह रही है कि डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए यह किया जा रहा है।
कंपनी सूत्रों के मुताबिक कंपनी धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ रही है जिससे सभी उपभोक्ताओं की जानकारी सीधे आधार से लिंक हो जाएगी। ऐसे में सरकार की योजना, किसानों या गरीबी रेखा से नीचे लाभ दिए जाने पर सीधे आधार से कनेक्शन का वेरीफिकेशन हो सकेगा।
कनेक्शन से आधार जुड़ने पर नए कनेक्शनों में भी दस्तावेजी औपचारिकताओं की जरूरत खत्म होगी। वसूली और डिफॉल्टर की स्थिति में भी आधार से लिंक होना कंपनी के लिए खासा मददगार होगा।

शहर के तीन प्रसिद्ध डॉक्टर डेंगू और चिकनगुनिया से गंवा चुके जान

डेंगू और चिकनगुनिया से शहर के तीन प्रसिद्ध डॉक्टर जान गंवा चुके हैं। इनमें से दो तो एमजीएम मेडिकल कॉलेज के रिटायर प्रोफेसर थे। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि शहर में डेंगू और चिकनगुनिया से कोई मौत नहीं हुई।
जब तक मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब पुष्टि नहीं करती, तब तक विभाग मानता ही नहीं कि बीमारी हुई है। हजारों लोग अब भी इन बीमारियों से जूझ रहे हैं लेकिन विभाग के आंकड़े 121 की ही पुष्टि कर रहे हैं। आशंका इस बात की भी है कि ये बीमारियां अब तक दर्जनों लोगों को लील चुकी हैं।
डेंगू से पीड़ित वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. ओपी बाजपेई की हाल ही में डेंगू से मौत हुई है। इसके पहले डॉ. एलएस शर्मा भी इसी बीमारी से जान गवा चुके हैं। इसी तरह डॉ. एलएस भटनागर की चिकनगुनिया से मौत हुई थी। तीनों ही डॉक्टरों की बीमारियों से मौत की आईएमए और डॉक्टर पुष्टि कर रहे हैं, बावजूद स्वास्थ्य विभाग बीमारियों से कोई मौत नहीं होने की बात कह रहा है।
शहर के हर दूसरे घर में बुखार और जोड़ों के दर्द के मरीज हैं। उन्हें हफ्तों दर्द से निजात नहीं मिल रही। विभाग ने अब तक सिर्फ 2017 मरीजों के सैंपल जांच के लिए मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजे हैं। इनमें से 121 में डेंगू और 27 में चिकनगुनिया की पुष्टि हुई है। निजी अस्पतालों और क्लिनिकों में इलाज कराने वाले हजारों लोग निजी लैबों से जांच करवा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इनकी रिपोर्ट को मान्यता नहीं देता।
डेंगू के लिए दो तरह की जांच होती है। पहला रैपिड टेस्ट और दूसरा मैक अलाइजा टेस्ट। दोनों ही जांचों पर 50 से 300 रुपए तक खर्च आता है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में ये जांचें लगभग मुफ्त होती हैं लेकिन दिक्कत यह है कि हर संदिग्ध मरीज का ब्लड सैंपल यहां नहीं भेजा जा सकता। यही वजह है कि पूरा शहर भले ही बीमारी से परेशान हो, सरकारी आंकड़ा 121 पर ही अटका हुआ है। आरोप यह भी है कि शासन स्तर पर बीमारी की गंभीरता कम आंकने के लिए जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। शासन क्षेत्रवार निजी लैब को जांच के लिए अधिकृत कर देता तो वास्तविक आंकड़े सामने लाए जा सकते थे।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों से मरीजों के ब्लड सैंपल बुलवाए हैं जबकि ज्यादातर मरीज क्लिनिक में इलाज करवा रहे हैं। डेंगू और चिकनगुनिया दोनों के मरीज को भर्ती होने की अनिवार्यता नहीं रहती। ऐसे में शासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जब तक एमजीएम मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब बीमारी की पुष्टि नहीं करती, हम बीमारी नहीं मानते। निजी लैबों की जांच रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेने का कोई सिस्टम नहीं है। सालों से व्यवस्था इसी तरह चल रही है। अब तक शहर में डेंगू और चिकनगुनिया से कोई मौत नहीं हुई।
डेंगू और चिकनगुनिया से तीन डॉक्टरों की मौत हुई है। शहर में हजारों मरीज हैं लेकिन विभाग इसे मान नहीं रहा। हजारों मरीज रिकॉर्ड पर नहीं आ पा रहे। क्लिनिकों के बाहर मरीजों की कतार लग रही है। एमवायएच की ओपीडी में सामान्य दिनों के मुकाबले तीन गुना मरीज आ रहे हैं।

भिंडी बाजार की पुरानी इमारतें बनी मुसीबतें

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की मुंबई स्थित तीन इमारतें नीलाम हो गईं। इन्हें बुरहानी ट्रस्ट ने खरीदा है जो धर्मार्थ काम करता है। दाऊद की तीनों संपत्तियों – दिल्ली जायका होटल, शबनम गेस्ट हाउस और डामरवाला बिल्डिंग का भिंडी बाजार से सीधा संबंध है। पढ़ें इसी बारे में –
दरअसल, ये तीनों प्रॉपर्टी मुंबई के प्रसिद्ध भिंडी बाजार में हैं। बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने भिंडी बाजार को संवारने के लिए बहुत काम किया है, लेकिन ये तीन इमारतें बाधा बन रही थीं। इसलिए भी ट्रस्ट ने यह संपत्ति खरीदने में रुचि दिखाई और तीन गुना कीमत पर खरीदा।
बुरहानी ट्रस्ट के प्रवक्ता के मुताबिक, हमारा मकसद भिंडी बाजार में बिजनेस का बेहतर माहौल पैदा करना है। हम चाहते हैं कि यह मुंबई में बिजनेस का बड़ा सेंटर बने। यहां लोगों को सुविधाएं और सुरक्षा, दोनों मिले। इलाके में दाऊद की प्रॉपर्टी होने से इस काम में बाधा आ रही थी।
मुंबई की ज्यादातर पुरानी इमारतें भिंडी बाजार में हैं। इसी साल सितंबर में एक इमारत ढह गई थी, जिसमें 33 लोग मारे गए थे। अभी भी यहां 256 इमारतें पुनर्निर्माण के लायक हैं। 80 साल से ज्यादा पुरानी इन इमारतों में 4,221 परिवार रहते हैं।
चूंकि इस इलाके में रहनेवाले ज्यादातर लोग दाऊदी बोहरा समुदाय के हैं। इसलिए 2008 में दाऊदी बोहरा समुदाय के धर्मगुरु सैयदना मुहम्मद बुरहानुद्दीन ने इस इलाके की सभी जर्जर इमारतों को गिराकर यहां रहने वाले लोगों को बेहतर आवास देने की योजना शुरू करने की घोषणा की थी। इस कड़ी में 95 इमारतें गिराकर कुछ काम शुरू भी किया जा चुका है।