पहला ई-ऑफिस वाला मंदिर होगा विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल देश में पहला ई-ऑफिस वाला मंदिर होगा, जहां एक क्लिक पर किसी भी फाइल की हिस्ट्री पता की जा सकेगी। मंदिर समिति ने इसका खाका तैयार कर लिया है। इसके लिए देश की नामी कंपनी से भी चर्चा की जा रही है। ई ऑफिस बनने के बाद मंदिर कार्यालय पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगा।
ई ऑफिस में फाइलों का मूवमेंट सुविधाजनक हो जाएगा। किसी भी विभाग में अफसर कम्प्यूटर पर फाइल खोलकर उस पर टीप लिख सकेंगे। इससे पारदर्शिता के साथ काम में तेजी आएगी। साथ ही फाइलों के गुम हो जाने की समस्या से भी निजात मिलेगी। ई ऑफिस का खाका तैयार कर रहे आईटी अफसरों के अनुसार मई के दूसरे सप्ताह तक काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
ओसीआर सिस्टम से स्कैन होंगे कागज
ई ऑफिस को ओसीआर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी डाक्यूमेंट को स्कैन कर फाइल में जोड़ जा सकेगा। मैन्युअल सिस्टम में नस्थी किए गए कागज इधर-उधर हो जाते हैं। जिससे काम में काफी अड़चने आती हैं।
2013 की कई फाइलें अपडेट नहीं
महाकाल मंदिर में 2013 तक की कई फाइलें अपडेट नहीं हैं। इससे मंदिर के पुराने कामों को समझने में परेशानी हो रही है। जल्द ही मंदिर का मास्टर प्लान तैयार होने वाला है। इसको पूरा करने में भविष्य में कोई पेरशानी खड़ी ना हो, इसके लिए मंदिर समिति अध्यक्ष व कलेक्टर संकेत भोंडवे की मंशा अनुसार ई ऑफिस तैयार किया जा रहा है।

एक सोशल स्टार्ट अप है नाॅलेज कैलेंडर (#Knowledge Calendar)

   पहली साल में मिली अपार सफलता- विद्यार्थियों ने सराहा, महिला सशक्तिकरण का एक बेहतर उपकरण
भोपाल। केन्द्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने 21 मार्च को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में नाॅलेज कैलेन्डर के अंग्रेजी संस्करण का विमोचन किया। डिक्की नेशनल कांफ्रेंस में डिक्की के चेयरमेन श्री मिलिंद कांबले और रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रेल मंत्री ने नाॅलेज कैलेन्डर का विमोचन करते हुए इस नाॅलेज टूल की प्रशंसा की।
इस अवसर पर देश के सभी राज्यों से आए डिक्की के प्रतिनिधि और सदस्य मौजूद थे।
कैलेन्डर के निर्माता डा. अनिल सिरवैयां ने 25 मार्च को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भेंट कर उन्हें नाॅलेज कैलेन्डर की प्रति भेंट की। मुख्यमंत्री चौहान ने नाॅलेज कैलेन्डर के काॅन्सेप्ट की सराहना की और इसे बच्चों, महिलाओं सहित प्रत्येक वर्ग के लिए उपयेागी बताया।
डा. अनिल सिरवैयां ने बताया कि शिक्षा, सूचना और संचार ऐसे उपकरण हैं जो किसी भी परिस्थिति में और किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने में सहायक होते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति को सामान्य जागरूक कर उसके ज्ञान को लगातार अद्यतन किया जाए तो राष्ट्र के विकास में उनकी भूमिका और बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान सबका मौलिक अधिकार है लेकिन भारत जैसे विशाल और अनेक प्रकार की विविधताओं वाले देश में अब भी बहुत बड़ी आबादी इस अधिकार से वंचित है। सामान्य जानकारियों, सूचनाओं और तथ्यों को पहुंचाने के अनेक साधन और सुविधाओं के बावजूद ज्ञान का प्रकाश अब तक देश  के प्रत्येक परिवार तक नहीं पहुंचा।
यह दैनंदिन ज्ञान पुस्तिका विद्यार्थियों से लेकर महिलाओं, लोक सेवकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, समाजसेवी, संस्कृतिकर्मी, अकादमिक संस्थाओं और शोधकर्ताओं के लिये अत्यंत उपयोगी है।
डाॅ. सिरवैयां ने बताया कि नाॅलेज कैलेन्डर की परिकल्पना इसी विचार पर आधारित है। आधुनिक इंटरनेट युग में यह इंटरनेट से पहले का एक चरण है, जो बताता है कि आज अथवा किसी दिन विशेष को इंटरनेट पर क्या सर्च करना है। यह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में अपनी तरह का अनोखा स्टार्ट अप है। एक अद्भुत नवाचार है। इसका पायलेट प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश में किया गया और अल्प समय में ही यह लोगों की पसंद बन गया। समाज के प्रत्येक वर्ग ने इस कैलेन्डर को पसंद किया और इसकी मांग लगातार बढ़ती चली गई।
दीवार पर टंगी एक जीवंत ज्ञान पुस्तिका
नालेज कैलेंडर दीवार पर टंगी एक जीवंत ज्ञान पुस्तिका है। यह लोगों को सूचना सम्पन्न बनाने का प्रभावी उपकरण है। प्रत्येक दिन, तारीख और महीना भूतकाल और भविष्य को दर्शाता है। हर दिन भूतकाल के महत्वपूर्ण समय बिन्दु की याद दिलाता है और भविष्य के प्रति सूचित और सचेत करता है। इस दृष्टि से यह दैनंदिन ज्ञान पुस्तिका विद्यार्थियों से लेकर महिलाओं, लोक सेवकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, समाजसेवी, संस्कृतिकर्मी, अकादमिक संस्थाओं और शोधकर्ताओं के लिये अत्यंत उपयोगी है।
आज का दिन हमारे लिये क्यों महत्वपूर्ण है? इस स्वाभाविक उत्सुकता को यह ज्ञान कैंलेंडर पूरा करता है। इस महीने कौन से महत्वपूर्ण अवसर हैं? इसकी अगिम सूचना देकर यह भविष्य की योजनाएं बनाने में भी मददगार होगा। रचनात्मक तरीके से ज्ञान और सूचनाओं का प्रसार करना इसका उददेश्य है। यह नालेज कैलेंडर प्रतिदिन देश की महानता का बोध कराता है। यह कैलेन्डर विद्यार्थियों, सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए उपयोगी है।
प्रारंभ नाॅलेज कैलेन्डर हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में तैयार किया गया है। पहली साल में इस कैलेंडर की मध्य प्रदेश में धूम मच गई. विद्यार्थियों और अधिकारियों ने सबसे ज्यादा पसंद किया. जनता से सीधा संवाद करने वाले लोगों ने इसे अपने लिए बेहद उपयोगी उपकरण बताया. डॉ सिरवैया ने बताया की भविष्य में इसे अन्य भारतीय भाषाओं में भी तैयार किया जाएगा।
डॉ सिरवैया ने बताया की कैलेंडर से सम्बंधित किसी भी जानकारी के संपर्क नंबर 9424455625 तथा ईमेल आईडी sirvaiyya@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.

नाबालिगों से अपराध करवाने के मामले में देश में नंबर एक मध्य प्रदेश

नवंबर 2016 में बैतूल के सोनाघाटी में धर्मकांटे के पास मेडिकल संचालक की हत्या हुई। पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि दो नाबालिगों ने हत्या अपने गुरु (कथित तौर पर बचपन से दोनों को पाला पोसा) के कहने पर की थी। गिरफ्तार मुख्य आरोपी ने बताया कि मेडिकल संचालक से रंजिश थी। खुद हत्या करता तो फंस जाता और बच्चे पकड़ में भी आ जाते तो उन्हें सजा उतनी न होती। बच्चों का इस्तेमाल अपराध में करवाने का ये पहला मामला नहीं है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि मप्र नाबालिगों से अपराध करवाने के मामले में देश में नंबर एक पर पहुंच चुका है। मप्र में नाबालिगों द्वारा किए अपराधों में चोरी, लूट-पाट के अलावा हत्या और दुष्कर्म के मामले शामिल हैं।
मप्र से बेहतर यूपी व बिहार
रिपोर्ट के अनुसार मप्र में वर्ष 2012 से 2015 तक विभिन्ना अपराधों को अंजाम देने के चलते 23 हजार 37 किशोरों को पुलिस ने पकड़ा है। इनमें ज्यादातर मामलों में नाबालिग के अपराध को प्रेरित करने के पीछे वयस्कों का हाथ था। इतनी बड़ी संख्या में देश के किसी राज्य में नाबालिग अपराध में नहीं पकड़ाए हैं। यहां तक कि उत्‍तरप्रदेश और बिहार में ही यह संख्‍या मप्र से काफी कम है।
19 हजार से ज्‍यादा मामले दर्ज
प्रदेश में तीन सालों में किशोंरो के अपराध में संलिप्‍त होने के 19 हजार 798 मामले पुलिस ने दर्ज किए। वर्ष 2015 में ही इनकी संख्‍या 6 हजार 583 थी, जबकि इस साल 7870 किशोरों को गिरफतार किया गया। मप्र के बाद महाराष्‍ट्र दूसरा ऐसा राज्‍य है, जहां बच्‍चों को अपराध के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश होशंगाबाद जिले के आयुध निर्माण फैक्ट्री में टैंक फटा

होशंगाबाद। मध्य प्रदेश में होशंगाबाद जिले के इटारसी स्थित आयुध निर्माण फैक्ट्री की निर्माण शाखा (मैन्युफैक्चरिंग यूनिट) में शुक्रवार सुबह एसिड का टैंक फट गया। हालांकि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ। इटारसी के अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस (एसडीओ, पी) अनिल शर्मा ने फैक्ट्री का जायजा लेने के बाद बताया, ‘फैक्ट्री में सेना के हथियारों, मिसाइल आदि का निर्माण होता है, इसकी निर्माण शाखा में रीसाइकिलिंग के दौरान एसिड टैंक फट गया। स्थिति को यहां तैनात कर्मचारियों ने काबू में कर लिया। इसमें कोई घायल नहीं हुआ।’
शर्मा के मुताबिक, फैक्ट्री में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं, दोहरी सुरक्षा व्यवस्था है, कंटीले तार लगाए गए हैं और ऊंची चहारदीवारी (वाउंड्री वॉल) है। यह हादसा तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ।

1 घंटे 38 मिनट स्टेशन पर रूके थे भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में ब्लास्ट करने वाले आतंकी

भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में ब्लास्ट करने वाले आतंकी स्टेशन पर कहां घूमे और क्या किया, यह जानने एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की एक टीम दो बार भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंची चुकी है। जहां पर टीम में शामिल अधिकारियों ने आतंकियों के बताने के आधार पर उन पाइंटों को देखा है जहां आतंकी पुष्पक एक्सप्रेस से उतरने के बाद से लेकर भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में चढ़ने के पहले तक घूमे हैं।
सूत्रों के मुताबिक एनआईए की टीम घटना वाले दिन स्टेशन पर आतंकियों की प्रत्येक गतिविधियों की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रेन में ब्लास्ट के अलावा आतंकियों के और क्या इरादे थे और उन्होंने एक ट्रेन से उतरने के बाद दूसरी ट्रेन में चढ़ने के बीच मिले समय में क्या किया।
जांच एजेंसियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि आतंकी घटना वाले दिन पुष्पक एक्सप्रेस से सुबह 6:33 बजे भोपाल स्टेशन पहुंचे थे। इस ट्रेन के पहुंचने के 1 घंटे 38 मिनट बाद सुबह 8:10 बजे भोपाल-उज्जैन पैसेंजर प्लेटफार्म-6 से रवाना हुई थी। तब तक आतंकी प्लेटफार्म-2 से लेकर 6 के बीच घूमते रहे। सूत्रों के मुताबिक एनआईए की टीम यह साक्ष्य जुटा रही है कि आतंकियों ने रेलवे स्टेशन पर 1 घंटे 38 मिनट में क्या किया और कहां घूमे।
एनआईए ने एटीएस से जांच डायरी लेने के बाद सोमवार को इंदौर से भोपाल-उज्जैन पैसेंजर के उस कोच को भी अपने कब्जे में ले लिया है जिसमें 7 मार्च को सुबह विस्फोट हुआ था। एनआईए की फोरेंसिक टीम ने कोच की जांच भी की है। रेलवे ने विस्फोट के बाद प्रभावित कोच को गार्ड डिब्बा सहित इंदौर शिफ्ट कर दिया था।

भारत को वन इंडिया पॉलिसी पर काम करना चाहिए बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा

बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि भारत को वन इंडिया पॉलिसी पर काम करना चाहिए। पाक अधिकृत कश्मीर में चीन के बढ़ते दखल को लेकर दलाई लामा ने कहा कि भारत यदि वन इंडिया की तर्ज पर काम करेगा तो चीन को इसका करारा जवाब मिलेगा।
रविवार को विधानसभा के सभागार में व्याख्यान के बाद मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि पीओके में चीन के बढ़ते दखल पर भारत और पाक सरकार को बैठकर बातचीत करनी चाहिए। इससे पहले उन्होंने व्याख्यान में कहा था कि चीन में बौद्ध धर्म को खत्म करने की कोशिश हुई थी, लेकिन आज वहां 40 करोड़ बौद्ध अनुयायी हैं।
वन चाइना पॉलिसी के मुताबिक चीन नाम का एक ही देश है और ताइवान चीन का ही एक प्रांत है। चीन सभी देशों से कूटनीतिक रिश्ते इसी पॉलिसी के तहत बनाता है। इस तरह दलाई लामा का वन इंडिया पॉलिसी पर जोर देने का मतलब है कि भारत से कूटनीतिक रिश्ते बनाने वाले देश पीओके को भारत का ही हिस्सा मानें।

कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा भाजपा और आरएसएस के सामने नहीं टिकता कहा केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने

यूपी चुनाव के बाद अब कांग्रेस नेता यह बात मानने लगे हैं कि पीएम मोदी और भाजपा को टक्कर देना उनके बस की बात नहीं है। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा भाजपा और आरएसएस के सामने कहीं नहीं टिकता।
उन्होंने यह बात अपनी पुस्तक फियरलेस इन ऑपोजिशन के विमोचन के दौरान कही। चिदंबरम ने कहा की यह बात पुरी तरह साफ है कि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा भाजपा और संघ के संगठनात्मक ढांचे से मेल नहीं खाता। यह वो ताकत है जिससे वोट हासिल किए जाते हैं और वो लोग वोट बटोरने में सक्षम हैं साथ ही हमसे ज्यादा मजबूत हुए हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा और आरएसएस के ढांचे को बंगाल टीएमसी या तमिलनाडु में एआईएडीएमके से मिलाने की कोशिश करें तो उन्हें हार मिलेगी।
लोकसभा चुनाव को लेकर चिदंबरम ने कहा कि यह 29 चुनावों को मिलाकर होते हैं और इनमे फैसला चुनाव के वक्त राज्य के हालात पर होता है। यूपी में अगर नोटबंदी के समर्थन में फैसला मतदान हुआ तो क्या पंजाब में विरोध हुआ। यह तय करना बेमानी है।

श्री चौहान ने मां नर्मदा को चुनरी चढ़ाई

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मां नर्मदा के उदगम स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश के विकास एवं जनता की सुख समृद्धि एवं पर्यावरण संरक्षण की अकांक्षा के साथ मां नर्मदा को चुनरी चढ़ाई। नर्मदा मंदिर में वैदिक विधि-विधान के साथ एवं साधु-संतों के मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की। यहीं से नर्मदा जय घोष के साथ 144 दिवसीय नमामि देवी नर्मदा सेवा यात्रा का आगाज भी किया।
पूजा-अर्चना में महामंडलेश्वर अवधेशानंद, चिदानंद स्वामी, कल्याण दास, अखिलेश्वरा नंद एवं विवेकानंद महाराज, विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा, लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री ओम प्रकाश धुर्वे, सामान्य प्रशासन एवं नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग राज्य मंत्री संजय पाठक, सांसद नंदकुमार चौहान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।सीएम कल शाम महाआरती में भी शामिल हुए।
नर्मदा यात्रा को लेकर पूरे अमरकंटक को दुल्हन की तरह सजाया गया है। पूरे अमरकंटक में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा बलों की 3 कंपनियां और जिला पुलिस बल के 200 जवान 35 से अधिक पुलिस अधिकारी तैनात हैं।
144 दिवसीय ‘नमामि देवि नर्मदे’ नर्मदा सेवा यात्रा पूरे विश्व को नदियों के संरक्षण का संदेश देगी। यह पर्यावरणीय चेतना जाग्रत करने का अनूठा जन-अभियान होगा। यह यात्रा 3344 किलोमीटर की होगी, जिसमें से 1909 किलोमीटर पदयात्रा होगी। प्रतिदिन पैदल और वाहन से 20 से 35 किलोमीटर की यात्रा जायेगी। 16 जिलोें के 51 विकासखंड और 1104 मजरे-टोलों से होकर यह यात्रा गुजरेगी। यात्रा का समापन 11 मई को अमरकंटक में होगा।

धर्मगुरु दलाई लामा मुख्‍यमंत्री निवास पर पहुचे

नमामि देवि नर्मदे सेवा यात्रा में भाग लेने के लिए बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा मुख्‍यमंत्री निवास पर पहुंच चुके है। जहां पर शिवराज सिंह चौहान ने उनका स्‍वागत किया है। श्री लामा ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद दिया और आनंद विभाग के गठन, नर्मदा सेवा यात्रा एवं लाड़ली लक्ष्मी योजना की सराहना की।
होली के चलते विश्राम पर रही नमामि देवि नर्मदे सेवा यात्रा 19 मार्च से फिर शुरू होगी। यात्रा सुबह नेमावर के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर भगवान परशुराम की तपोस्थली तुरनाल पहुंचेगी।
यहां बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान जनसंवाद सभा को संबोधित करेंगे। साथ ही पौधारोपण भी करेंगे। इसके बाद यात्रा सीहोर जिले के लिए प्रस्थान करेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक बाबूलाल गौर ने स्र्कवाया झुग्गियों का सर्वे

प्रधानमंत्री का हाउसिंग फॉर ऑल का सपना मध्यप्रदेश में पूरा होता नहीं दिख रहा है। कहीं और तो छोड़िए राज्य सरकार राजधानी में अपनी नाक के नीचे विधानसभा और मंत्रालय के सामने की झुग्गियों का ही सर्वे नहीं करवा पा रही है। राजधानी सहित प्रदेश भर में झुग्गियों का सर्वे कर पक्के मकान देने की लिए डीपीआर तैयार की जा रही है इसमें जनप्रतिनिधी ही आड़े आ रहे हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी शामिल हैं।निगम अफसरों का कहना है कि राजनीतिक दबाव के कारण वह मजबूर हैं।
राजधानी के सबसे संवेदनशील इलाके अरेरा हिल्स में मंत्रालय और विधानसभा के सामने की झुग्गियों के अलावा श्यामला हिल्स और बाणगंगा में भी कुछ झुग्गियों का सर्वे अटका हुआ है। दरअसल पार्षद से लेकर विधायक और मंत्री तक नहीं चाहते कि गरीबों को झुग्गी की जगह प-े मकान मिलें। इसके पीछे वोट बैंक का गणित भी है क्योंकि यदि झुग्गियां हटाकर दूसरे क्षेत्र में मकान बना दिए गए तो उनका वोट बैंक कम हो जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक बाबूलाल गौर ने बकायदा पत्र लिखकर नगर निगम को सर्वे न करने के हिदायत दी है। वार्ड 67 की सतनामी नगर झुग्गी और वार्ड 68 स्थित शांति नगर बस्ती में सर्वे रोकने के निर्देश दिए गए। निगम सूत्रों के अनुसार राजनीतिक दखल के कारण सर्वे का काम रोक दिया गया।
– मंत्रालय के सामने बने भीमनगर का सर्वे ही नहीं हो पाया। यह क्षेत्र राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता हैं। सर्वे न करने को लेकर बीजेपी के नेताओं का दबाव है।
– माता मंदिर से लगे हर्षवर्धन नगर फेज टू में सर्वे का काम चल रहा था,लेकिन बीजेपी नेता राधेश्याम प्रजापति ने यह कहकर सर्वे स्र्कवा दिया कि सक्षम अधिकारी लिखित में दें कि मकान यहीं बनाकर देंगे।
– श्यामला हिल्स बाणगंगा इलाके में कांग्रेसी पार्षद शबिस्ता सुल्तान ने सर्वे करने गई टीम को वापस कर दिया था। फिर यहां सर्वे ही नहीं हो पाया।
यह सही है कि कुछ हमारे और अन्य पार्टियों के जनप्रतिनिधि सर्वे का विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का सपना है कि गरीबों के जीवन स्तर में सुधार हो। इसलिए हाउसिंग फॉर ऑल योजना शुरू की गई। जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर समस्या का निराकरण कराएंगे।
लोगों ने आपत्ति की इसलिए लिखा पत्र
लोग नहीं चाहते थे कि उन्हें वहां से हटाया जाए। इसलिए उन्होंने आपत्ति की थी,इसके बाद हमने पत्र लिखा था। हमने अपनी तरफ से लोगों को समझाया भी है कि वे विरोध न करें ताकि उन्हें पक्के आवास मिल सकें।
बाबूलाल गौर, पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक गोविंदपुरा
सरकार की योजना का यदि कोई विरोध कर रहा है तो इस बारे में जनप्रतिनिधियों से बात की जाएगी और निश्चित ही हल निकाला जाएगा। सरकार का मकसद है जनता को योजनाओं का लाभ मिले।