दोबारा चेक होगी वर्ष 2013 में टायपिंग व स्टेनो परीक्षा पास करने वाले सभी अभ्यर्थियों की कॉपी

वर्ष 2013 में टायपिंग व स्टेनो परीक्षा पास करने वाले सभी अभ्यर्थियों की कॉपी दोबारा चेक होगी। मामले की पड़ताल कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को शक है कि मामले में कई और अभ्यर्थी सामने आ सकते हैं, जिन्होंने पैसे देकर परीक्षा पास की है।
मालूम हो कि एसटीएफ ने इस मामले में शुरूआत में तीन हजार संदिग्ध अभ्यर्थियों को शॉर्ट लिस्ट किया था, जिनसे 90 फीसदी तक पूछताछ पूरी हो चुकी है। वहीं अब तक हुई पड़ताल में 600 अभ्यर्थियों द्वारा पैसे देकर परीक्षा में पास होने और फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी हासिल करने के सबूत मिल चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि टायपिंग स्टेनो के फर्जी अभ्यर्थियों व टायपिंग इंस्टीट्यूट के कर्ताधर्ताओं से पूछताछ में एसटीएफ को संदिग्ध तीन हजार के अलावा भी कई अन्य अभ्यर्थियों के इसी तरह पास होने के संकेत मिले हैं। इसके बाद ही एक बार फिर सभी 11 हजार अभ्यर्थियों की कॉपी चैक करने का फैसला लिया गया है।
एक लाख से ज्यादा बैठे थे परीक्षा में
जानकारी के अनुसार टायपिंग-स्टेनो की वर्ष 2013 की परीक्षा में एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थी सम्मलित हुए थे। इनमें हिंदी, अंग्रेजी टायपिंग और स्टेनो परीक्षा सभी के अभ्यर्थी थे। ऑफलाइन होने वाली यह आखिरी परीक्षा थी, जिसके चलते बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ।
फर्जीवाड़ा सामने आने पर एसटीएफ को जांच का जिम्मा सौंपा गया। प्रारंभिक तौर पर एसटीएफ ने 2946 अभ्यर्थियों कॉपियां जब्त की थीं, जिनमें हेराफेरी के संकेत मिले थे। एसटीएफ 2425 अभ्यर्थियों व 272 टाइपिंग इंस्टीट्यूट संचालकों में से 185 से पूछताछ कर चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से धन्यवाद पत्र के माध्यम से पता चला गैस कनेक्शन फर्जीवाड़ा

वैभव नायक उस वक्त आश्चर्य में पड़ गए जब उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से एक पत्र मिला जिसमें गैस सबसिडी छोड़ने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया गया था। वैभव के आश्चर्य की वजह यह थी कि उन्होंने कभी अपने नाम पर गैस कनेक्शन लिया ही नहीं था तो फिर स‍ब्सिडी छोड़ने की बात कहां से आ गई। इंडेन कंपनी की श्री गैस एजेंसी के माध्यम से वैभव़ को ये प्रशंसा पत्र भेजा गया था।
वैभव जब गैस एजेंसी पहुंचे तो पता चला कि यह गैस कनेक्शन 20 अक्टूबर 2015 में गुप्ता गैस एजेंसी से ट्रांसफर होकर उनके पास आया था। इधर गुप्ता एजेंसी के संचालक के मुताबिक 2003 से यह कनेक्शन अस्तित्व है लेकिन उसके दस्तावेज उपलब्ध कराना कंपनी का काम है इधर कंपनी के सेल्स आफिसर इस मामले में बात करने से बच रहे हैं।
कहां-कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
-गैस कनेक्शन लेने के लिए आईडी जरूरी होती है। इसके अलावा कई जगह हस्ताक्षर भी किए जाते हैं। यानी फर्जी आईडी और हस्ताक्षरों का उपयोग हुआ।
-कनेक्शन के बाद नाम व अन्य जानकारी के लिए टेलीफोन पर तथा पते के लिए फिजिकल वैरीफिकेशन होता है। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। ये बिना गैस एजेंसी की मिलीभगत के संभव नहीं है।
-केवायसी सहित कई मौके पर गैस एजेंसी के अफसर जांच करते हैं। इस मामले से स्पष्ट है कि अफसर भी आंखें मूंदे रहे।
स‍ब्सिडी छोड़ने के लिए टोल फ्री नंबर पर जानकारी देना होता है या एजेंसी में जाकर आवेदन करना होता है। वैभव ने जब गैस कनेक्शन ही नहीं लिया तो स‍ब्सिडी कैसे छोड़ता। सवाल यह उठता है कि आखिर स‍ब्सिडी किसने छोड़ी और क्यों?
ये हो सकते हैं कारण
2015 के पहले तक नंबर लगाने पर भी कई दिनों तक सिलेंडर नहीं मिलता था। ऐसे में गैस एजेंसी फर्जी कनेक्शनों के सिलेंडर दूसरे उपभोक्ताओं को बेचकर मनचाहे दाम वसूलती थी। इसके बाद एक परिवार में सालभर में सिलेंडर की संख्या 12 सीमित कर दी गई,तब भी कालाबाजारी पर अंकुश नहीं लगा। फिर गैस कनेक्शन से आधार कार्ड और बैंक खातों को लिंक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई जिससे कालाबाजारी मुश्किल हो गई। वैभव नायक के नाम के कनेक्शन से भी आखिरी रिफिलिंग 20 जून 2015 को हुई थी।
20 अक्टूबर 2015 में वैभव नायक का कनेक्शन ट्रांसफर हुआ था। तब से एक भी रिफिल नहीं ली गई, इसलिए कनेक्शन डेड की श्रेणी में है। सब्सिडी छोड़ने का पत्र आया तो उन्हें ट्रांसफर कर दिया। इससे ज्यादा कुछ नहीं पता।
2003 में कनेक्शन के पेपर तैयार हुए थे। बाद में सभी सिस्टम कंप्यूटीकृत हो गए हैं, इसलिए कनेक्शन के दस्तावेजों में किसके हस्ताक्षर हैं, यह पता कर पाना मुश्किल है। कितनी बार और कब तक रिफिल ली गई है,यह नहीं बता सकते। दस्तावेज सही हैं या फर्जी, ये देखना कंपनी का काम है।

सात जिलों में निकले फर्जी उम्मीदवार

परीक्षा में धांधली रोकने के व्यावसायिक परीक्षा मंडल भले ही कितने ही दावे कर ले पर हकीकत यह है कि मुन्नाभाइयों ने एक बार फिर सारी व्यवस्थाओं को धता बताते हुए 11 उम्मीदवारों को पुलिस आरक्षक के लिए चयनित करवा दिया।
मामला पिछले साल हुई पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा का है। आरक्षक पद पर ज्वाइन करने से पहले ऐसे 11 अभ्यर्थियों को चिन्हित कर लिया गया है। पुलिस की चयन एवं भर्ती शाखा ने सभी 11 फर्जी उम्मीदवारों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के आदेश भी जारी कर दिए गए हंै। मालूम हो आरक्षक भर्ती परीक्षा देने के दौरान ही 70 मुन्नााभाई पकड़े गए थे।
जानकारी के अनुसार कुल सात जिलों में ऐसे अभ्यर्थी सामने आए है, जिन्होंने मुन्नाभाइयों से परीक्षा दिलवाई, फिटनेस खुद दिया और आरक्षक के लिए चयनित भी हो गए। इनमें दतिया, छिंदवाड़ा, सतना, उज्जैन, इंदौर के साथ 9वीं बटालियन रीवा और 36वीं बटालियन बालाघाट के उम्मीदवार शामिल हैं।
पुलिस आरक्षक भर्ती में इस बार बड़े पैमाने पर फिंगर प्रिंट मिलान नहीं होने के चलते पसोपेश की स्थिति रही। फिटनेस के दौरान ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या 320 थी, जिनके फिंगर प्रिंट मिलान नहीं हुए। इन अभ्यर्थियों को दोबारा मौका दिया गया। इनमें भी 150 उम्मीदवारों के फिंगर प्रिंट नहीं मिले।
इसके बाद जिलों में एक बार फिर फिंगर प्रिंट मिलान के लिए शेष उम्मीदवारों के फिंगर प्रिंट लेने को कहा गया। व्यापमं से मूल रिकॉर्ड मंगवाया गया जिसमें फिंगर प्रिंट और राइटिंग का रिकॉर्ड था। इसे जिलों में भेजा गया जहां इन 11 लोगों के फिंगर प्रिंट परीक्षा देने वाले फिंगर प्रिंट से अलग थे।
इधर, मुख्यालय की फाइल ही गायब कर दी
जानकारी के अनुसार चयनित उम्मीदवारों के फिंगर प्रिंट मिलान करने को लेकर रीवा जिले को पुलिस मुख्यालय से अभ्यर्थी का भेजा गया मूल रिकॉर्ड ही गायब हो गया। इसमें तीन संदिग्ध उम्मीदवारों के व्यापमं से मंगवाए ओरिजनल दस्तावेज थे। इसे लेकर पुलिस मुख्यालय ने रीवा एसपी को तलब किया है।
साढ़े नौ लाख में 10-11 कोई बड़ी बात नहीं
पुलिस आरक्षक भर्ती में साढ़े नौ लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें से 10-11 मुन्न्ाभाई बच कर परीक्षा देने में सफल भी हो गए तो कोई बड़ी बात नहीं। तीन जगहों पर फिल्टर थे इसलिए पकड़े भी गए। वैसे आप यह भी कह सकते हैं कि फिजिकल में पुलिस विभाग की नजरों से भी चूक गए

अवैध उत्खनन खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने दिए वाहन नीलाम करने के अधिकार

अवैध उत्खनन खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने कलेक्टरों को वाहन राजसात करने, जुर्माना लगाने और वाहन को नीलाम करने के अधिकार दिए हैं। इसके लिए खनिज विभाग ने गौण खनिज नियम में गुरुवार को बदलाव कर दिया।
इसके तहत तीन बार से ज्यादा अवैध खनन या परिवहन करते मशीन या डम्पर जब्त होने पर रायल्टी का अधिकतम 70 फीसदी तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। यह 50 हजार रुपए से कम नहीं होगा। जुर्माना नहीं देने पर राजसात की कार्रवाई होगी। इसी तरह निजी जमीन पर मुरम, पत्थर और रेत खनन के अस्थाई लायसेंस भी अब नहीं दिए जाएंगे।
नर्मदा सहित प्रदेश की कई नदी की रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन के मामले लगातार सामने आने पर मुख्यमंत्री ने एक बार फिर बैठक लेकर खनिज विभाग को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके मद्देनजर विभाग ने नियमों में संशोधन करके कार्रवाई के अधिकार कलेक्टरों को दे दिए हैं।
सचिव खनिज मनोहर दुबे ने बताया कि गौण खनिज नियम 1966 के नियम 53 में संशोधन करके कलेक्टरों को कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं। अब वे अवैध उत्खनन और परिवहन में लगे वाहन को राजसात कर सकेंगे। साथ ही इन्हें नीलाम करने का अधिकार भी कलेक्टरों को होगा। वे अवैध खनिज और वाहन पर जुर्माना भी लगा सकेंगे। कोई लीजधारक यदि कम मात्रा दिखाकर ज्यादा खनिज बेचता है तो कलेक्टर कारण बताओ नोटिस जारी कर लीज निलंबित कर सकता है।
– कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर स्तर का अधिकारी सुनवाई के बाद कार्रवाई करेगा।
– पहली बार अवैध उत्खनन और परिवहन पर रायल्टी का 30 गुना लेकिन जुर्माना 10 हजार से कम नहीं लगेगा।
– दूसरी बार में रायल्टी का 40 गुना लेकिन जुर्माना 20 हजार से कम नहीं ।
– तीसरी बार में रायल्टी का 50 गुना लेकिन जुर्माना 30 हजार से कम नहीं ।
– तीन बार से अधिक पर रायल्टी का 70 गुना लेकिन जुर्माना 50 हजार कम नहीं।
– छापे में पकड़ाए वाहन या मशीन तब तक नहीं छोड़े जाएंगे जब तक कि जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं हो जाता।
– राजसात होने की दशा में मशीन या वाहन की नीलामी टेंडर के माध्यम से होगी।
अवैध उत्खनन या परिवहन करने वाला यदि समझौता करना चाहता है तो इसके लिए भी नियमों में प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत पहली बार नियमों का उल्लंघन करने पर कुल अवैध खनन या परिवहन हुए खनिज की रायल्टी का 25 गुना या दस हजार रुपए, जो ज्यादा हो, जुर्माना लगेगा।
– दूसरी बार में खनिज की रायल्टी का 35 गुना या 20 हजार रुपए, जो ज्यादा हो।
– तीसरी बार में खनिज की रायल्टी का 45 गुना या 30 हजार रुपए, जो ज्यादा हो।
– चौथी या उससे ज्यादा बार में खनिज की रायल्टी का 65 गुना या 50 हजार रुपए, जो ज्यादा हो।

केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी समेत कई राजनेताओं ने जताया दुख

केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी समेत कई राजनेताओं ने दुख जताया है। प्रधानमत्री ने दवे के निधन पर दुख जताते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए और कहा कि अनिल माधव दवे जी को एक प्रतिबद्ध जनसेवक के तौर पर जाना जाता रहेगा, वह पर्यावरण को बचाने के लिए काम करते रहे। वहीं कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी शोक जताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने एक श्रेष्ठ नेता को खो दिया है।
वही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि दवे जी की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता है। व्यक्तिगत और पार्टी के लिए ये एक बहुत बड़ी क्षति है।
वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह कि मैं दवे जी के निधन से स्तब्ध हूं। वहीं भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी अनिल माधव दवे को बेहतरीन रणनीतिकार बताते हुए कहा कि उनके जाने से पार्टी को जो क्षति हुई है, उनकी भरपाई कभी भी नहीं की जा सकेगी।

नमामि देवी नर्मदे यात्रा के समापन पर अमरकंटक पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमामि देवी नर्मदे यात्रा के समापन पर नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक पहुंचे। जहां सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उनकी अगुवाई की।
इसके पहले मंच पर रखी गई मां नर्मदा की प्रतिमा पर नर्मदा जल अर्पित कर पीएम शिवराज ने पूजा अर्चना की। इस दौरान सीएम शिवराज पूरे भक्तिभाव में नजर आ रहे थे।
समापन अवसर के दौरान मां नर्मदा की पूजा के दौरान पीएम मोदी और सीएम शिवराज साथ में थे।
इस दौरान मंच में पीएम और सीएम के अलावा, जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरिजी महाराज के साथ-साथ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी मौजूद थे।
पीएम ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा और नर्मदा तट पर बसे सभी लोगों को 150 दिन की गई इस तपस्या को लेकर बधाई देता हूं। अगर ये प्रयास कहीं और होता तो इसका बहुत प्रचार होता, लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं है।
इस दौरान मध्यप्रदेश के हर जिले से सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता अमरकंटक पहुंचे हुए थे।

नर्मदा सेवा यात्रा के समापन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे डिंडौरी के पास पलट गई बस

नर्मदा सेवा यात्रा के समापन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे लोगों की बस डिंडौरी के पास पलट गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए करंजिया अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के मुताबिक बस उमरिया जिले के मानपुर से लोगों लेकर जा रही थी। घटना में मानपुर निवासी योगेश सिंह और कटनी जिले के दो पंचायत सचिवों की मौत हो गई।
ये दूसरी बस में सवार थे और नित्य क्रिया के बाद बस के पास खड़े थे, तभी बस उनके ऊपर पलट गई। सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल में पहुंचाया। इस दौरान कुछ देर के लिए रोड़ को वन वे कर दिया गया था, जिससे ट्रैफिक जाम होने लगा।

नर्मदा सेवा यात्रा का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में

नमामि देवी नर्मदा सेवा यात्रा का समापन समारोह जिले की पवित्र नगरी अमरकंटक एवं मां नर्मदा के उद्यम स्थल पर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में होगा। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री और साधुसंत सहित लाखों जन भेदी मौजूद रहेगी। अमरकंटक के सर्किट हाउस के समीप नर्मदा सेवा यात्रा का समापन कार्यक्रम रखा गया है।
नमामि देवी यात्रा के समापन समारोह में आ रहे प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रम अनुसार सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से विशेष वायुयान द्वारा जबलपुर के डुमना एयर पोर्ट पहुंचेंगे। करीब 12.30 बजे जबलपुर से हेलिकॉप्टर द्वारा ट्राइवल यूनिवर्सिटी के हैलीपैड में दोपहर करीब 1.30 बजे पहुंचेंगे। यहां से प्रधानमंत्री का काफिला सड़क मार्ग से अमरकंटक के लिए रवाना होगा इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी साथ में रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरकंटक पहुचंने के बाद सीधे मां नर्मदा मंदिर जाएंगे जानकारी अनुसार दोपहर करीब 2 बजे प्रधानमंत्री नर्मदा सेवा यात्रा के समापन समारोह में उपस्थित जन सभा को संबोधित करेंगे। जानकारी के मुताबिक मंच पर प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संत अवधेशा नंद, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर, सांसद ज्ञान सिंह मौजूद रहेंगे।

प्रदेश के एक तिहाई से अधिक स्कूली बच्चे गुजर रहे निराशा एवं अवसाद से

प्रदेश के एक तिहाई से अधिक (34 फीसदी) स्कूली बच्चे किसी न किसी तनाव से गुजर रहे हैं। ऐसे बच्चों को निराशा एवं अवसाद से निकालने के लिए निरंतर देखरेख और काउंसलिंग की जरूरत है। स्कूल के टीचर एवं अभिभावक इस मामले में अतिरिक्त सतर्कता रखें।
बच्चों में चल रहे तनाव की भयावह स्थिति का खुलासा ग्वालियर मेडिकल कालेज द्वारा की गई एक रिसर्च में हुआ। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र ने इस रिसर्च के नतीजों का ब्योरा सरकार को भेजकर जरूरी उपाय करने का आग्रह किया है। साथ ही प्रदेश के विभिन्ना स्कूलों से भी ऐहतियात बतरने को कहा है। इस संबंध में उन्होंने स्कूलों को पत्र भी भेजा है। हाई एवं हायर सेकंडरी परीक्षा के नतीजे आने के बाद जिन स्कूलों में बच्चों ने आत्मघाती कदम उठाया आयोग ने उनसे भी जानकारी मांगी है।
आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि ग्वालियर मेडिकल कालेज के डॉ पीयूष दत्त स्वामी एवं उनकी टीम को 15 अलग- अलग स्कूलों के 500 बच्चों पर की गई रिसर्च में यह चौंकाने वाली तस्वीर दिखाई दी। बच्चों के मनोविज्ञान पर किया गया यह अध्ययन कई दिन तक चला। मानसिक समस्याओं के चलते 26 प्रतिशत स्कूली लड़कियां और 21 फीसदी लड़के तनाव से जूझ रहे हैं। बच्चों का यह तनाव उनके व्यवहार में भी झलकने लगता है। इससे उबरने के लिए ‘एडल्ट सेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक’बनाने का सुझाव दिया गया है। ऐसे बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकाला जा सकता है।
बाल आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को इस संबंध में उपाय करने का सुझाव दिया है। साथ ही इस रिसर्च का ब्योरा भी भेजा है। रिसर्च में तनावग्रस्त बच्चों के तो लक्षण बताए गए हैं उनके अनुसार पहली नजर में ही ऐसे बच्चों को चिन्हित किया जा सकता है। उन पर विशेष ध्यान दिया जाए तो ये बच्चे इस उलझन से बाहर निकल सकते हैं।
तनावग्रस्त बच्चों के लक्षण…
*पारिवारिक-सामाजिक कार्यक्रमों में दिलचस्पी कम हो जाना।
*बच्चों में भूलने की आदत पनपने लगना।
*बच्चों का अपनी ही धुन और किसी विचार में खोए रहना।
*स्वभाव में चिड़चिड़ापन का बढ़ना।
*किसी बात का जवाब ठीक से न देना।

जामुनिया में मजदूरों से भरा वन विभाग का पिकअप वाहन पलटने से 11 लोगों की मौत

शहर के करीब जामुनिया में मजदूरों से भरा वन विभाग का पिकअप वाहन पलटने से 11 लोगों की मौत हो गई और 15 घायल हो गए। सभी घायलों को जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां इलाज के बाद 11 घायलों को डिस्चार्ज कर दिया गया और 4 गंभीर घायलों का इलाज जारी है। जानकारी के मुताबिक वन विभाग ने अपनी सरकारी गाड़ी को एक तेंदूपत्ता ठेकेदार को मजदूरों को लाने के लिए दी थी।
ठेकेदार का ड्राइवर नशे की हालत में गाड़ी चला रहा था। इस दौरान नरसिंहपुर-गोटेगांव रोड पर जामुनिया के पास एक मोड पर ड्राइवर गाड़ी से अपना नियंत्रण खो बैठा और वह पुलिया की रेलिंग तोड़ते हुए सीधे नीचे जा गिरी। घटनास्थल पर ही 10 मजदूरों की मौत हो गई और एक घायल ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
ये सभी मजदूर गोंदिया से देर रात ट्रेन से जबलपुर आए थे। वन विभाग के वाहन में बैठकर तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए चरगंवा जा रहे थे। इसी दौरान रात करीब 2 बजे जामुनिया के पास यह हादसा हो गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को तुरंत मेडिकल अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन द्वारा सभी को आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। सभी मजदूर महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के डुग्गीपार इलाके के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं।
मृतकों के नाम
1- बुधराम पिता लक्खू (40)
2- चुन्नी लाल पिता दायाराम चौधरी (35)
3- लच्छू पिता कुंवरलाल चौधरी (30)
4- रामनाथ पिता गनपत सरोते (40)
5- तुलाराम पिता हरिशचंद्र मोयरे (35)
6- प्रदीप पिता माऊराव हल्वी (19)
7- छगन पिता नीलकंठ कामड़े (30)
8- शंकर पिता रामकृष्‍ण मसकोडे़ (35)
9- गनेंद्र पिता तेजराम (35)
10- टुमेश्वर पिता दयाराम मोयर (32)
11- संतू पिता दामा शिंदे (53)
घायलों के नाम
1 – बाबूराव पिता चिंतामण (55)
2- नरेश पिता चेतराय ठीमर (24)
3- विलास पिता नामदेव हल्वी (29)
4- भुनेश्वर पिता रामदास सोनवाने (45)
5- भाऊराव पिता सदाराम हल्वी (45)
6- जयपाल पिता श्रीराम हल्वी( 55)
7- रविंद्र पिता तेजराम हल्वी (25)
8- भोजराज पिता चिंतामण हल्वी (40)
9- हरिचंद्र पिता रमेश ठीमर (22)
10- काली राम पिता चेम्पू चकटे (40)
11- हुलीचंद्र पिता दसरू कोलारे (35)
12- देवाजी पिता कारू मोयर (50)
13- मारूती पिता अर्जुन कोयरे (40)
14- चुन्नी लाल पिता लक्ष्मण सिंडे (32)
15- त्रिमूति पिता अमितन बंसोर (28)