शहडोल संभाग में व्यापारियों ने खरीद ली प्याज

प्याज खरीदी में गड़बड़ी की बढ़ती आशंका को देखते हुए सरकार ने तय किया है कि अब प्याज के हर लेन-देन की जांच होगी। यदि किसान के खाते में पैसा आने के बाद तुरंत किसी ऐसे खाते में राशि स्थानांतरित होती है जो संदिग्ध है तो पूछताछ की जाएगी। बिना प्याज की खेती किए उपज बेचने वाले किसानों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। इसके लिए सभी किसानों से रिकॉर्ड की सत्यापित प्रतिलिपि ली जाएगी। ये व्यवस्था 26 जून से होने वाली खरीदी पर लागू होगी।
प्याज खरीदी को लेकर अपर मुख्य सचिव पीसी मीना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टरों से फीडबैक लिया। सूत्रों के मुताबिक इसमें कलेक्टरों ने बताया कि मौके का फायदा उठाते हुए बाहरी राज्यों से व्यापारी प्रदेश में प्याज न खपाने लगें, इसके लिए नाकों पर पहरेदारी सख्त कर दी गई है।
कहीं से भी प्याज लेकर आने वाले ट्रकों को प्रदेश की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। देवास में एक ट्रक भी पकड़ा गया है। 33 हजार टन से ज्यादा बिक चुका है। इसमें 27 हजार टन व्यापारियों ने खरीदा है। रीवा में खरीदी का काम पूरा हो गया है। रतलाम कलेक्टर ने बताया कि पांच-पांच बार प्याज बेचने वाले किसानों के खातों पर नजर रखी जा रही है। ये देखा जा रहा है कि वे कितना पैसा निकाल रहे हैें और ऑनलाइन ट्रांसफर कर रहे हैं तो किस खाते में जा रहा है।
दरअसल, सरकार को आशंका है कि प्रदेश में प्याज के ऊंचे दाम को देखते हुए कहीं प्याज कारोबारी खेल न कर रहे हों। बैठक में ही कलेक्टरों को निर्देश दिए कि 26 जून से होने वाली खरीदी में किसानों के रिकॉर्ड का भी सत्यापन किया जाए। ये सुनिश्चित कर लिया जाए कि जिस किसान ने प्याज की बोवनी की हो, उसी से उपज खरीदी जाए। साथ ही बैंक खाते से होने वाले लेन-देन पर भी नजर रखी जाए।
उधर, मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे धैर्य रखें, पूरी प्याज खरीदी जाएगी। प्याज की बंपर पैदावार हुई है। खरीदी केंद्रों पर अंबार लग गया है। परिवहन एक समस्या और चुनौती है। इससे निपटने के लिए कोशिशें चल रही हैं। स्वार्थी तत्व इस व्यवस्था में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए सभी नजर रखें। मूंग की बाजार और समर्थन मूल्य की दर में काफी अंतर हैं, फिर भी पूरी मूंग और उड़द खरीदेंगे। उन्होंने किसानों से कहा कि वे साफ मूंग लेकर आएं ताकि उन्हें उचित दाम दिलाया जा सके।
सरकार ने प्याज की खपत को लेकर प्रदेश के बाहर संभावनाएं टटोलना भी तेज कर दिया है। खाद्य विभाग के छह अधिकारियों को दिल्ली, बिहार, झारखंड, गुजराज, पश्चिम बंगाल और हैदराबाद भेजा गया है। वहीं, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक ने बुधवार को प्रदेशभर के प्याज व्यापारियों से चर्चा की।
अधिकारियों ने बताया कि शहडोल संभाग भेजी गई प्याज को थोक व्यापारियों ने खरीद लिया। सरकार ने तय किया है कि प्याज का भंडारण करने की जगह इसे नीलाम किया जाएगा। व्यापारियों से कहा जा रहा है कि वे प्रदेश से बाहर प्याज बेचें, ताकि दोबारा प्याज खरीदी की प्रक्रिया में न आ जाए।
सूत्रों का कहना है कि प्याज को प्रदेश के भीतर और बाहर भेजने के लिए सरकार ने रेल मंत्रालय से ज्यादा से ज्यादा रैक उपलब्ध कराने की मांग की है। मार्कफेड के प्रबंध संचालक ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि रैक मिलने लगे हैं।
प्याज की नीलामी के लिए नागरिक आपूर्ति निगम ने ऑनलाइन टेंडर जारी कर आवेदन बुलाए हैं। शाजापुर के व्यापारियों ने कुछ रैक प्याज लेने का आवेदन भी किया है। हर सोमवार और गुरुवार टेंडर निकलेंगे।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर किसानों की मौत के विरोध में कांग्रेस कार्यालय सहित जिलों में भी शवासन

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कांग्रेस ने मंदसौर में पुलिस फायरिंग में किसानों की मौत के विरोध में भोपाल स्थित कांग्रेस कार्यालय सहित जिलों में भी शवासन किया। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। कांग्रेस का आरोप है कि किसानों की मौत के बाद भी सरकार लापरवाह बनी रही, इसके विरोध में ही शवासन किया गया। उधर कुछ किसान संगठनों ने भी कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए शवासन किया। भारतीय किसान महासंघ ने भी राजधानी में शवासन कर विरोध जताया।गौरतलब है कि किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर पुलिस फायरिंग में हुई किसानों की मौत के बाद से कांग्रेस सरकार को घेरने में लगी है।

थम नहीं रहा किसानों की आत्महत्या का सिलसिला

कर्ज से परेशान किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है। 16 जून को होशंगाबाद के रंढाल गांव में खुद को आग लगाने वाले किसान बाबूलाल पिता बालकृष्ण वर्मा की मौत हो गई। गंभीर हालात में उनका भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज चल रहा था। उधर नरसिंहपुर के धमना गांव में लक्ष्मी प्रसाद पिता टीकाराम लोधी (70) ने जहर की गोलियां खा ली, जिसके बाद गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां इलाज के दौरान किसान की मौत हो गई।
किसान पर था कर्ज
आत्मदाह करने वाले बाबूलाल पर करीब 7 लाख का कर्जा था। जिन लोगों से उसने कर्ज लिया था वे आए दिन तकाजा कर रहे थे। 15 जून को उसे कर्ज देने वाले घर पहुंचे और गाली-गलौज कर अपमानित किया। जिससे उसके परिवार में कलह मची और उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। बाबूलाल का बयान लेने वाले तहसीलदार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कर्ज और कलह के कारण उसने आत्मदाह किया।
मकान बनाने 10 फीसदी पर कर्ज
छोटे भाई छोटेलाल वर्मा और पड़ौसी हरिशंकर साहू ने बताया बाबूलाल के ऊपर करीब 7 लाख का कर्ज था। ये पैसा उसने दो सूदखोरों और 50 हजार रुपए बैंक से ले रखा था। सूदखोरों से उसने 10 फीसदी ब्याज पर रूपया लिया था। इन पैसों से उसने मकान बनवाया था। बताया जा रहा है कि मकान बनाने के बाद से पैसा देने वाले ज्यादा परेशान कर रहे थे।

क्यों है नाराज किसान सियासत गर्म

किसान आंदोलन ने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। किसानों के साथ कर्मचारी, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर सभी सरकार से नाराज हैं। उधर, विपक्ष इन परिस्थितियों का फायदा उठाने में जुट गया है। ऐसे में सरकार को प्रदेश में डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की चिंता सताने लगी है। खजाना भी खाली है, इसलिए इन वर्गों की मांगों को लेकर सरकार मुश्किल में है।
प्रदेश में करीब 67 लाख किसान, 4 लाख 64 हजार नियमित कर्मचारी, 2 लाख 84 हजार अध्यापक, 53 हजार पंचायत सचिव हैं। ये सभी वोट बैंक को प्रभावित करने का माद्दा रखते हैं और वर्तमान में ये सभी सरकार से नाराज हैं। इन्हें विधानसभा चुनाव से पहले मनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। ये चुनौती तब और बढ़ जाती है, जब सरकार का खजाना खाली हो। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सभी को मनाने के जतन में लग गए हैं।
किसान फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिए जाने, कर्ज माफी और उपज को खरीदने की व्यवस्था नहीं होने के कारण सरकार से नाराज हैं। वे हिंसक रूप में अपनी नाराजगी बयां भी कर चुके हैं। प्रदेश के एक हिस्से में 10 दिन हिंसक आंदोलन चला।
सातवें वेतनमान, पदोन्नति सहित अन्य मांगों को लेकर नियमित कर्मचारी नाराज हैं। केंद्रीय कर्मचारियों को सितंबर 2016 में 7वां वेतनमान मिल चुका है। देश की ज्यादातर राज्य सरकारें वेतनमान दे चुकी हैं, पर प्रदेश सरकार आज-कल कर रही है। वहीं सपाक्स-अजाक्स प्रस्ताव रख चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट के अधीन कर्मचारियों को पदोन्न्ति दे दी जाए, फिर भी सरकार निर्णय नहीं ले रही है। अलग-अलग संवर्ग के कर्मचारियों की अपनी मांगें अलग हैं।
अध्यापकों के छठवें वेतनमान का मसला सरकार एक साल में नहीं सुलझा पाई। तबादला नीति, अनुकंपा नियुक्ति, सातवें वेतनमान और शिक्षा विभाग में संविलियन की मांग पर भी सरकार मौन है। सरकार ने जो वादा किया है, वह भी नहीं मिला। इसलिए अध्यापक नाराज हैं। जबकि जिला कैडर के कर्मचारी पंचायत सचिव वेतनवृद्धि की मांग पूरी न होने से नाराज हैं।
व्यापारी जीएसटी को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार से नाराज हैं। इसे लेकर व्यापारी चार दिन पहले बाजार बंद कर शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं। वहीं कानून से इतर लाइफ टाइम टैक्स वसूली को लेकर ट्रांसपोर्टर नाराज हैं। वे एक बार राजधानी में आरटीओ का घेराव कर चुके हैं और अब चक्काजाम की तैयारी कर रहे हैं।
उपेक्षा कर रही सरकार
सरकार लगातार कर्मचारियों की उपेक्षा कर रही है। सातवां वेतनमान, छठवें वेतनमान की विसंगति सहित अन्य मांगों पर कई बार चर्चा होने के बाद भी सरकार कुछ देने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री 4 जून 2012 के बाद कर्मचारियों से नहीं मिले। ऐसे में नाराजगी जायज है। इसका नुकसान सरकार को उठाना पड़ेगा।

खेती के लिए बीज खरीदने के पैसे नहीं बैंक का कर्ज कैसे चुकाते

देवकरण रविवार सुबह मजदूरी पर गया था। उसे पिता प्यारेलाल की मौत की सूचना मिली तो वह बिलख पड़ा। देवकरण ने बताया हमारे पास खेती के लिए बीज खरीदने के पैसे नहीं थे तो ऐसे हालात में बैंक का कर्ज कैसे चुकाते। प्यारेलाल पर 24 माह से 2.5 लाख का कर्ज था।
एक माह से बैंक कर्ज वसूली के लिए दबाव बना रहा था। इसी से तंग आकर उसने फांसी लगाकर जान दे दी। कर्ज का दावा मृतक किसान के बेटे देवकरण ने किया। वहीं बैंक प्रबंधन ने पिपलिया व्यास सर्विस एरिया में नहीं होने का हवाला दिया है।
यह घटना जिला मुख्यालय से करीब 9 किमी दूर ग्राम पिपलिया व्यास में हुई है। मृतक किसान प्यारेलाल पिता कनीराम ओढ़ (65) है। प्यारेलाल रविवार सुबह करीब 8 बजे घर से खेत व कुएं पर जाने के लिए निकला था। दोपहर 12 से 1.30 बजे के बीच पड़ोसी किसान ने परिजनों को प्यारेलाल द्वारा फांसी लगाकर जान देने की सूचना दी।
गांव से करीब 1 किमी दूर खेत पर प्यारेलाल ने नीम के पेड़ पर पशुओं को बांधने की रस्सी से फंदा तैयार किया और जीवन लीला समाप्त कर ली। ग्राम पंचायत बामनिया के सरपंच किशनलाल की सूचना पर नीमच सिटी पुलिस मौके पर पहुंची। टीआई हितेश पाटिल व एएसआई भोपाल सिंह चौहान ने पंचनामा बनाकर शव को पीएम के जिला अस्पताल पहुंचाया।
घटनास्थल पर चर्चा के दौरान प्यारेलाल के बेटे देवकरण ओढ़ ने बताया पिता कुछ समय से परेशान थे। उनकी 3 बीघा जमीन है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का 2.5 लाख स्र्पए कर्ज था। वसूली के लिए एक माह से बैंक अधिकारी परेशान कर रहे थे। माली हालत ठीक नहीं होने के कारण कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं थे। इसी कारण परेशान होकर संभवत: पिता ने यह रास्ता चुना।
प्यारेलाल ओढ़ व पत्नी पार्वती बाई के 7 बच्चे हैं। 1 बेटा देवकरण (21) है। जबकि बेटी संतोष (38), भागवंता (35), राधा (32), यशोदा (30), नर्मदा (26) व आरती (23) हैं। सभी की शादी हो चुकी है।
प्यारेलाल ने फांसी लगाने से पूर्व चचेरे भाई कंवरलाल निवासी दड़ौली को फोन किया था। प्यारेलाल ने सुबह करीब 11 बजे चचेरे भाई कंवरलाल से मोबाइल पर कहा था घर आ जा, मैं परेशान हूं। इस पर भाई ने घर पर मेहमान होने का हवाला देकर आने में असमर्थता जताई तो प्यारेलाल ने कहा यह मेरा आखिरी फोन है और फोन काट दिया। कंवरलाल के फोन करने पर उसे रिसीव भी नहीं किया। कुछ देर बाद कंवरलाल को भाई की आत्महत्या की खबर मिली।
बेटे देवकरण के अनुसार प्यारेलाल ने करीब दो साल पूर्व भी फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की थी। लेकिन परिजनों ने बचा लिया था।
प्यारेलाल की परेशानी एक अन्य कारण बहू द्वारा दर्ज कराया गया दहेज प्रताड़ना का प्रकरण भी है। प्यारेलाल के बेटे देवकरण की शादी 24 मई 2013 को पिपलिया मंडी के समीप ग्राम सुपड़ा के रामप्रसाद ओढ़ की बेटी पूजा से हुई थी। लेकिन पूजा 2017 तक भी कभी ससुराल नहीं आई।
दोनों परिवारों में इसी बात पर गतिरोध था। पूजा के परिजन देवकरण व परिजनों पर नहीं ले जाने का आरोप लगाते थे। जबकि देवकरण व परिजन पूजा के ससुराल नहीं आने की बात कहते थे। 4 जून 2017 को पूजा ने नीमच सिटी थाने में पति देवकरण, ससुर प्यारेलाल व सास पार्वती (पताशी) बाई के खिलाफ थाने में दहेज प्रताड़ना का प्रकरण दर्ज कराया था। भादवि की धारा 498 ए में दर्ज प्रकरण में पुलिस जांच चल रही थी।
पूजा व देवकरण का वैवाहिक जीवन शुरू भी नहीं हो पाया था। करीब एक माह पूर्व से प्यारेलाल बेटे देवकरण के लिए नया रिश्ता तलाश कर रहा था। रतनगढ़ व जाट के समीप जावरिया की लाड़ बाई से देवकरण की रिश्ते की बात भी चल रही थी। इसकी भनक लगने पर देवकरण के ससुराल पक्ष ने थाने में शिकायत की। चर्चाओं के अनुसार नए रिश्ते की एवज में दोनों पक्षों में 5 लाख स्र्पए के लेन-देन की बात पर गतिरोध की स्थिति भी बनी थी। विवाद भी हुआ था। वहीं दहेज प्रताड़ना के प्रकरण में शनिवार को पुलिस प्यारेलाल को बैठाकर ग्राम माल्या तक ले आई थी। इस बात का दावा परिजनों द्वारा किया जा रहा है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा कमल चौक के प्रबंधक विजय गुप्ता ने बताया पिपलिया व्यास हमारा सर्विस क्षेत्र नहीं है। वहीं भगवानपुरा शाखा के प्रबंधक एसके उपाध्याय ने बताया फिलहाल मैं बाहर हूं। सोमवार को अधिकृत रूप से रिकॉर्ड देखकर ही बता सकूंगा। वर्तमान में सर्विस एरिया ज्यादा मायने नहीं रखता। किसान कहीं से भी लोन करा लेते हैं।
‘ग्राम पिपलिया व्यास में एक किसान ने फांसी लगाकर जान दी है। आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस जांच कर रही है। इसके उपरांत ही आत्महत्या के कारणों की स्थिति स्पष्ट होगी।

किसान आंदोलन के कारण मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने अपना रूस दौरा रद्द कर दिया

प्रदेश में जारी किसान आंदोलन के कारण मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने अपना रूस दौरा रद्द कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान 18 जून को छह दिनों के लिए रूस जाने वाले थे, लेकिन प्रदेश में बढ़ते किसान आंदोलन और कांग्रेस के आक्रामक रूख को देखते हुए शिवराज ने अपना रूस दौरा रद्द कर दिया है।
गौरतलब है कि 16 जून को ही किसानों ने मंदसौर गोलीकांड के विरोध और अपनी मांगों को लेकर हाईवे जाम कर दिया था। इस दौरान भोपाल में चक्काजाम करने का प्रयास करने वाले किसान नेता शिवकुमार शर्मा (कक्काजी) को भी गिरफ्तार कर लिया था।
वहीं शनिवार को कांग्रेस ने भी चुनावी शंखनाद करते हुए खलघाट में किसान पंचायत करने का ऐलान किया है। इस स्थिति में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विदेश दौरा रद्द करना ही बेहतर समझा।

किसान को न चाहते हुए भी कर्ज लेना पड़ता है खेती की लागत इतनी बढ़ चुकी

आजकल खेती को लाभ का धंधा बनाने की बातें तो खूब हो रही हैं लेकिन यह तभी संभव होगा जब किसान को उसकी फसल का दाम लागत से ज्यादा मिलेगा। दरअसल किसान एक सीजन में जितना खर्च करता है उसके मुकाबले उसकी बचत बहुत कम होती है। यहां तक की उसका घर चलाना भी मुश्किल होता है।
खेती की लागत इतनी बढ़ चुकी है कि किसान को न चाहते हुए भी कर्ज लेना पड़ता है। फसल अगर ठीक हुई तो कोई दिक्कत नहीं पर किसी कारण से फसल में गड़बड़ हुई तो किसान को कई मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। किसान का अधिकतर पैसा खेत तैयार करने,बीज,दवाई और मजदूरी में खर्च होता है।
यदि 10 बीघा के एक किसान का उदाहरण लेकर हम खेती की लागत और आमदनी का आकलन करें तो यह हिसाब किताब किसान की स्थिति बयान कर देता है। मान लीजिए दस बीघा का किसान सोयाबीन की फसल लेता है तो सीजन का लेखा-जोखा कुछ इस तरह का होगा।
10 बीघा में सोयाबीन की फसल
काम खर्च समय और किराया
2 बार हकाई- 4800 (8 घंटे लगते हैं 1 घंटे का किराया 600 रुपए)
1 बार बुआई – 2400 (4 घंटे लगते हैं 1घंटे का किराया 600 रुपए)
4 क्विंटल बीज- 14000 (1 क्विंटल का 3500 रुपए )
10 बोरी खाद – 11000 (1 बोरी का खर्च 1100 रुपए)
3 बार दवाई छिड़काव- 12000 (1 बार का खर्च 4 हजार रुपए)
कटाई (50 मजदूर) – 17500 (1 मजदूर का खर्च 350 रुपए)
5 घंटे में निकलाई – 6,000 (1 घंटे का किराया 1200 रुपए)
घर लाने का खर्च – 1000 (1 ट्रॉली का किराया 500 रुपए )
अन्य खर्च 3000 (मंडी भाड़ा, अन्य मजदूरी)
कुल खर्च : 71700 रुपए (उत्पादन 1 बीघा में 3 क्विंटल मतलब 30 क्विंटल होता है)
30 क्विंटल के दाम – 81,000 रुपए (1 क्विंटल का दाम 2700 रुपए)
4 महीने में
किसान की बचत – 9300 रुपए (मतलब 1 दिन के 77.5 रुपए )
किसान को 4 महीने में 9300 रुपए की बचत हुई। मतलब 1 दिन में 77.5 रुपए मिले। आजकल एक मजदूर भी 1 दिन में इससे ज्यादा कमा लेता है। इतनी कम बचत में किसान कैसे अपना घर चलाएगा। ये सब तो तब संभव है जब मौसम पूरी तरह से किसान का साथ दे अगर मौसम बिगड़ गया तो समझो सबकुछ बरबाद। इसलिए किसान अपना घर चलाने के लिए कर्ज लेता है और गहरे दलदल में फंस जाता है।

कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन व बालाघाट-सिवनी सांसद बोधसिंह भगत के बीच मतभेद

प्रदेश शासन के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन व बालाघाट-सिवनी सांसद बोधसिंह भगत के बीच मतभेद अब हर मंचीय कार्यक्रम में खुलकर सामने आने लगे है। कुछ दिन पूर्व ही दिव्यांग सामूहिक विवाह के दौरान उत्कृष्ट मैदान में सांसद ने सम्मान न करने पर सिर्फ गौरीशंकर बिसेन के परिवार का ही राज नहीं है अभी सांसद भी यहां पर मौजूद है कहकर मंच से ही नाराजगी व्यक्त की थी।
सांसद बोधसिंह भगत और प्रदेश के केबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन के बीच चल रहे मतभेद, गुटबाजी बुधवार को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर नजर आई। सार्वजनिक मंच पर ही सांसद और मंत्री के बीच हॉट-टॉक हो गई। अवसर था जिले के मलाजखंड मुख्यालय में आयोजित सबका साथ सबका विकास सम्मेलन का।
सांसद बोधसिंह भगत जब समारोह को संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने एक मामले का उल्लेख किया। जिस पर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष राजकुमार रायजादा ने उसका खंडन किया। इसी बीच मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने भी सांसद बोधसिंह भगत से गलत बाद नहीं कहने की बात कही। इस दौरान सांसद-मंत्री के बीच तीखी नोक-झोंक हो गई। मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने जहां सांसद भगत को कहा कि बहुत देखे है ऐसे सांसद। वहीं इसके जवाब में सांसद ने भी मंत्री बिसेन को चोर मंत्री कह दिया। इसके बाद मंत्री गौरीशंकर बिसेन मंच छोड़कर चले गए।
समारोह को जब मंत्री गौरीशंकर बिसेन संबोधित कर रहे थे, तभी एक भाजपा के कार्यकर्ता लखन बिसेन ने मलाजखंड को रोजगार नहीं दिए जाने की बात कही गई। जिसके बाद मंत्री बिसेन ने उस ग्रामीण को कार्यक्रम से बाहर किए जाने की बात कही।

करैरा विधायक पर केस दर्ज सुबह का इंतजार करती रही पुलिस

सोमवार-मंगलवार की रात करैरा विधायक पर केस दर्ज होने के बाद पुलिस सुबह का इंतजार करती रही, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रात में किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। वहीं सुबह को विधायक अपने घर से फरार हो गईं।
करैरा विधायक पर भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप है। करैरा विधायक पर केस दर्ज होने के पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है।
प्रदेशभर में तत्समय आंदोलन हिंसक रूप ले चुका था और पुलिस को पता था कि करैरा में आंदोलन की अगुआई महिला विधायक कर रही हैं, बावजूद इसके मौके पर कोई भी महिला पुलिस नहीं थी, जबकि एसडीओपी की मौजूदगी में आक्रोशित विधायक शकुंतला खटीक ने टीआई पर घूंसे बरसा दिए।
वहीं इस मामले के बाद वीडियो क्लिप सामने आने और सत्ता पक्ष के दबाव के चलते भले ही करैरा पुलिस ने सोमवार की देर रात विधायक व ब्लॉक अध्यक्ष पर केस दर्ज कर लिया, लेकिन यहां भी पुलिस की मंशा विधायक को तत्काल गिरफ्तार करने की नजर नहीं आई, क्योंकि केस देर रात 11:50 बजे दर्ज किया गया।
कानून के जानकारों के अनुसार रात के समय महिला की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। केस दर्ज होने की जानकारी लगते ही विधायक अपने घर से फरार हो गईं। ब्लॉक अध्यक्ष भी फरार हो गए।
विधायक पर केस दर्ज होने के साथ ही करैरा कस्बे में पुलिस ने एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। विधायक के समर्थक कोई अप्रिय घटना को अंजाम न दे सके। कस्बे में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था और देर रात से लेकर मंगलवार शाम तक पुलिस बल तैनात रहा।
विधायक पर जो धाराएं दर्ज की गई हैं, उनमें धारा 353 शासकीय कार्य में बाधा की है, जो गैर जमानती
है और इसमें न्यूनतम दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान हैं। इस मामले में फरियादी पुलिस है, इसलिए विधायक की मुसीबत बढ़ सकती है।
शहर के एडवोकेट गजेन्द्र यादव के अनुसार धारा 147 व 149 विधि विरुद्ध जमाव यानी बलवा की धाराएं हैं, वहीं 189 लोक सेवक को पदीय कार्य न करने के लिए दबाव डालना है। इसके अलावा 294 गाली गलौज, 436 लड़ाई झगड़ा, 504 व 506 जान से मारने की धमकी की श्रेणी में हैं और यह सभी धाराएं जमानती हैं।
घटनाक्रम 8 जून का था, लेकिन तत्समय टीआई से नोकझोंक की बात सामने आई और एक क्लिपिंग में विधायक ‘थाने में आग लगा दो” कहती नजर आई थीं। इसके अगले दिन से लगातार वीडियो सामने आते चले गए।
विधायक ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की और आग लगाने के बयान से मुकर भी गईं, लेकिन एक और वीडियो ने हलचल पैदा कर दी। मंगलवार को नया वीडियो सामने आया है, जिसमें विधायक शकुंतला टीआई संजीव तिवारी को घूंसे से मारती दिखाई दे रही हैं।
चर्चा है कि भले ही पुलिस ने देर रात केस दर्ज कर विधायक शकुंतला को फरार होने का मौका हासिल करा दिया हो, लेकिन दूसरी तरफ पुलिस विधायक सहित ब्लॉक अध्यक्ष को गिरफ्तार करने उनके घरों पर कई बार दबिश देती रही। देर रात दबिश देने के अलावा सुबह और शाम को भी पुलिस दोनों के ठिकानों पर दबिश देती नजर आई।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि जल्द ही दोनों को बंदी बनाया जाएगा। इधर विधायक और ब्लॉक अध्यक्ष के फोन बंद आ रहे हैं। विधायक के गनर शैलेन्द्र सिकरवार के अनुसार विधायक रात को अचानक कहीं चली गई हैं। बता दें कि करैरा विधायक पर विरुद्ध आगजनी के लिए उत्प्रेरित करने, शासकीय कार्य में बाधा, अपशब्द, जान से मारने की धमकी, शासकीय कर्मचारी से अभद्रता सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

किसान : थम्स अप सरकार : थम्स डाउन

दस दिन चले हिंसक किसान आंदोलन ने मध्यप्रदेश के साथ-साथ पूरे देश को झकझोर दिया है। इस आंदोलन ने सूबे के मुखिया से लेकर प्रशासन, विपक्ष और जनता को भी कुछ संदेश दिए हैं। पेश है नईदुनिया की रिपोर्ट…
फसल की लागत मूल्य और कर्ज माफी के लिए शुरू हुआ आंदोलन कई मुद्दों पर लगभग सफल रहा है। शिवराज ने फसल को समर्थन मूल्य से नीचे नहीं बिकने देने की घोषणा की, जो किसानों के लिए बड़ी सफलता है। इसके अलावा मूल्य स्थिरीकरण आयोग, कर्ज के ब्याज की माफी जैसे फैसले भी किसानों को बड़ी राहत देंगे। हिंसक घटनाओं को छोड़ दें तो किसानों ने अपनी ताकत भी दिखा दी।
पूरे आंदोलन में सरकार की किसान हितैषी छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा। मप्र्र सरकार पूरे देश में किसानों के नाम पर ढिंढोरा पीटती थी, लेकिन आंदोलन से जमीनी समस्या के साथ-साथ यह भी उभरकर सामने आया कि कहीं न कहीं दोनों पक्षों के बीच संवादहीनता की स्थिति बन गई है। इसके अलावा आंदोलन की गंभीरता को समझने में भी सरकार से बहुत बड़ी चूक हो गई।
किसानों के प्रदर्शन से प्रदेश में बुरी तरह चरमरा चुकी प्रशासनिक व्यवस्था भी उजागर हुई। इंटेलीजेंस, पुलिस और जिला प्रशासन स्तर पर कई खामियां सामने आईं। प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस के मुखिया भी कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे हैं। अधिकारियों ने न मंत्रालय स्तर पर सक्रियता दिखाई और न ही स्थानीय स्तर पर। सबने इसे हल्के में लिया।
जिस इलाके में आंदोलन शुरू हुआ, वहां का कोई भाजपा नेता न तो मैदान में उतरा और न ही पार्टी का कोई बड़ा नेता सामने आया। मुख्यमंत्री अकेले पड़ते दिखे। पूरे आंदोलन में किसान मोर्चा की भूमिका न के बराबर रही। आलाकमान के संदेश के बाद कुछ नेता मुख्यमंत्री के साथ खड़े हुए। संगठन के अंतिम छोर तक मैनेजमेंट की कलई खुल गई, क्योंकि पार्टी नेताओं को भी आंदोलन की गंभीरता का पता नहीं चला।
इतने बड़े आंदोलन के बाद भी विपक्ष न तो दमदारी से खड़ा दिखाई दिया और न ही सरकार के लिए मुसीबत बन सका। भाजपा और सरकार के नेताओं ने जरूर कांग्रेस का नाम लेकर उसे तवज्जो दे दी। गोलीकांड के बाद राहुल गांधी का दौरा भी विपक्ष में जान फूंकने में नाकाम रहा। सरकार को कटघरे में खड़ा करने के लिए कांग्रेस के पास प्लानिंग की कमी साफ तौर पर नजर आई।
यात्रियों से भरी बसों में जिस तरह पथराव हुए, उससे पूरे देश में मप्र को लेकर एक गलत संदेश गया। मप्र हमेशा शांति का टापू माना जाता रहा है, लेकिन इस हिंसक आंदोलन ने प्रदेश की इस छवि पर बड़ा दाग लगाया है। किसान आंदोलन के नाम पर प्रदेश में असामाजिक तत्व भी सक्रिय हुए। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश बदनाम हुआ।