विधानसभा के मानसून सत्र में चौंका दिया स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने डॉक्टरों में इन दिनों गांव में जाकर प्रैक्टिस करने की होड़

विधानसभा के मानसून सत्र में शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने यह कहकर पूरे सदन को चौंका दिया कि डॉक्टरों में इन दिनों गांव में जाकर प्रैक्टिस करने की होड़ लगी है। एमबीबीएस में टॉप करने वाले डॉक्टर्स इंटर्नशिप के लिए बड़ी संख्या में आदिवासी बहुल इलाके चुन रहे हैं। यह बात तब सामने आई जब हाल ही में भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित हुईं।
उन्होंने बताया कि गांव में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स को पीजी की प्रवेश परीक्षा में अतिरिक्त अंक मिलते हैं। आमतौर पर यह धारणा है कि डॉक्टर्स ग्रामीण अंचलों में जाकर प्रैक्टिस नहीं करना चाहते। यही वजह है कि अभी तक तक प्रदेश में 1700 से ज्यादा पद खाली पड़े हुए हैं। इनमें से 1400 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। इनमें से 500 डॉक्टर्स का चयन हो चुका है। एक-दो दिन में पोस्टिंग दे दी जाएगी।
कम्प्यूटर देखों और चुन लो: स्वास्थ्य मंत्री ने बताया विभाग ने ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित कर लिया है जिससे अब डॉक्टर्स खुद ही अपना पसंदीदा शहर या गांव चुन सकते हैं। इससे भ्रष्टाचार भी कम होगा और डॉक्टर्स मनपसंद जाकर स्वेच्छा से काम कर पाएंगे।

एयर इंडिया की उड़ान के पायलट की सतर्कता से बच गई 120 यात्रियों की जान

शहर के देवी अहिल्या बाई होलकर विमानतल से बुधवार को दिल्ली के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की उड़ान के पायलट की सतर्कता से 120 यात्रियों की जान बच गई। विमान के टेकऑफ के तीन मिनट बाद ही इंजन से आवाज आने लगी। खतरा भांपकर पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से विमान लैंड करने की अनुमति मांगी और 15 मिनट बाद ही विमान सुरक्षित लैंड करवा दिया गया।
सुबह 9.25 बजे विमान तय समय पर दिल्ली के लिए रवाना हुआ। तीन मिनट बाद ही पायलट ने एटीएसी से संपर्क कर विमान की अनुमति मांगते हुए कहा कि विमान के लेफ्ट इंजन से आवाज आ रही है। ऐसे में आगे उड़ान जारी रखना खतरनाक हो सकता है। इसके बाद विमान दोबारा रनवे पर आ गया।
अधिकृत सूत्रों के मुताबिक रनवे पर विमान के आने के बाद जांच की तो पता चला खराबी को तत्काल सुधारना मुमकिन नहीं है, इसलिए यात्रियों को उतार लिया गया। सूत्रों ने बताया कि विमान के लेफ्ट इंजन से पक्षी टकरा गया था। इससे उसकी ब्लेड तिरछी हो गई थी और प्लेन में वाइब्रेशन होने लगा था।
यात्रियों के मुताबिक पक्षी टकराने की आवाज तो नहीं आई, लेकिन टेकऑफ करने के करीब दो मिनट बाद जैसे ही प्लेन सीधा हुआ अजीब सा वाइब्रेशन होने लगा। इसके बाद कुछ लोगों ने केबिन क्रू से भी इसकी शिकायत की। हालांकि तब तक पायलट ने ही समस्या समझ ली थी।
यात्रियों के लिए मुंबई से दूसरा विमान आने में करीब 6 घंटे लग गए। यात्री शाम 4 बजे दिल्ली के लिए रवाना हो पाए । उधर, देरी से उन यात्रियों की मुसीबत हो गई जिन्हें सुबह 11 बजे तक दिल्ली पहुंचना था। वे बार-बार एयरलाइंस अफसरों से शिकायत करते रहे। देरी से परेशान यात्रियों ने एयरपोर्ट पर हंगामा भी किया।
विमान के लेफ्ट इंजन में खराबी आ गई थी, प्लेन सकुशल उतर गया था। इससे कोई दिक्कत नहीं आई। तकनीकी टीम कारणों की जांच कर रही है।

मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से पटवारियों को उनके मोबाइल पर ही ग्राम के समस्त भूमि स्वामियों के सभी खसरों की जानकारी

किसानों के हित के लिये इस वर्ष से फसल गिरदावरी संबंधी जानकारी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से संग्रहीत की जायेगी। इस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से पटवारियों को उनके मोबाइल पर ही ग्राम के समस्त भूमि स्वामियों के सभी खसरों की जानकारी प्राप्त हो जायेगी। लगायी गयी फसल की जानकारी ग्राम से ही भरी जा सकेगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने समन्वय भवन में मोबाइल एप का शुभारंभ किया।
श्री चौहान ने कहा कि राजस्व अमले की कमी पूरी करने के लिये जल्दी ही 10 हजार पटवारियों, 550 तहसीलदारों और 940 नायब तहसीलदारों की भर्ती की जायेगी। भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दे दिये गये हैं। उन्होंने राजस्व विभाग प्रमुख को पटवारियों की विभागीय पदोन्नति के संबंध में भी विचार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन को प्रभावी बनाने के लिये युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने पटवारियों को सूचना प्रोद्योगिकी का उपयोग करने के लिये टेब खरीदने के लिये उनके खाते में आवश्यक राशि देने की घोषणा की। श्री चौहान ने कहा कि सरकार पूरी तरह से लोगों के प्रति जवाबदेह है। उन्होंने कहा कि बोनी के समय के आँकडों का शुद्ध रेकार्ड उपलब्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने के लिये हर संभव कदम उठाये जा रहे हैं। किसानों को समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर के आधार पर आदर्श दर से भुगतान करने का नवाचारी प्रयोग भी किया जायेगा।
मोबाइल एप से होने वाले लाभों की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि राजस्व विभाग का यह क्रांतिकारी कदम भविष्य में बदलाव लायेगा। पारंपरिक बस्ते से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने एप संचालन के लिये एनआईसी का उपयोग करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि लोगों को राजस्व विभाग और इसके अमले से बहुत अपेक्षाएँ हैं।
फसल गिरदावरी प्रतिवर्ष की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह वर्ष में दो बार खरीफ और रबी सीजन की बुवाई के बाद की जाती है। इसे भू-अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। यह कृषि सांख्यिकी एकत्रित करने की प्रक्रिया है। इसके आधार पर फसलों के क्षेत्रफल एवं उत्पादन संबंधी अनुमान की जानकारी तैयार की जाती है।
कृषि वर्ष 1 जुलाई से प्रारंभ होकर 30 जून को समाप्त होता है। प्रथम खरीफ की फसलों तथा द्वितीय रबी की फसलों के आधार पर चालू वर्ष के खसरे में बोए गए क्षेत्रफल की फसल गिरदावरी के आधार पर दर्ज की जाती है। गिरदावरी जितनी सही और समय पर होगी, कृषि सांख्यिकी पूरी तरह से विश्वसनीय रहेगी।
फसल गिरदावरी के आधार पर ही खरीफ और रबी फसलों के बोए गए रकबे के आँकड़े प्राप्त होते हैं। उस आधार पर प्रमुख फसलों के उत्पादन व उत्पादकता अनुमान तथा राज्य एवं देश की कृषि दर निर्धारित की जाती है।
फसल गिरदावरी कार्य से ही फसल पूर्वानुमान लगाया जाता है, जिससे फसल गिरदावरी को राजस्व खसरे के रकबे के आधार पर सांख्यिकी कार्य के लिये जानकारी शासन को प्रेषित की जाती है। यह जानकारी कई मामलों जैसे फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई, बैंक ऋण, योजनाओं के लाभ लेने आदि में महत्वपूर्ण होती है।
इस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से पटवारियों को उनके मोबाइल पर ही ग्राम के समस्त भूमि स्वामियों के सभी खसरों की जानकारी प्राप्त हो जायेगी। जैसे ही भरी गयी जानकारी अपलोड की जायेगी, कृषक को उससे संबंधित खसरों में फसल गिरदावरी के अंतर्गत कौन सी जानकारी दर्ज की गयी है, यह सूचना एस.एम.एस. के माध्यम से भेजी जायेगी। इसमें एक पासकोड भी होगा।
यदि कृषक, पटवारी द्वारा भरी गयी जानकारी से सहमत है, तो वह पासकोड पटवारी को बतायेगा। जब पटवारी द्वारा यह पासकोड एप्लीकेशन में डाला जायेगा तभी जानकारी को अंतिम माना जायेगा।
यदि किसी कृषक के पास कोई मोबाइल नंबर नहीं है तो वह अपने पड़ोसी का नंबर भी एस.एम.एस. प्राप्त करने में उपयोग कर सकेगा। फसल की जानकारी के साथ ही अन्य पड़त भूमि, भूमि में लगे वृक्ष, मकान आदि की जानकारी भी एप्लीकेशन के माध्यम से दर्ज की जा सकेगी।
प्रमुख सचिव राजस्व श्री अरूण पांडे ने मोबाइल एप के बारे में जानकरी दी। इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीणा, प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री अजीत केसरी उपस्थित थे। आयुक्त भू-अभिलेख श्री एन. के. अग्रवाल ने आभार माना।

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के उपाय किये जायेंगे

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के उपाय किये जायेंगे। तात्कालिक उपाय में किसानों को राहत पहुँचाने का काम जारी रहेगा। दीर्घकालिक उपाय में भण्डारण क्षमता बढ़ाई जायेगी, अधिकतम प्रोसेसिंग इकाईयाँ लगायी जायेंगी, मूल्य संवर्धन किया जायेगा और ग्लोबल मार्केट का लाभ लिया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ मंत्रालय में एग्रीकल्चर टास्क फोर्स की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में कृषि विशेषज्ञों के साथ किसानों को अधिक उत्पादन के बाद भी उचित मूल्य नहीं मिलने की चुनौती पर विचार विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कृषि उत्पादन वृद्धि में कीर्तिमान बना है। पर इसके साथ किसानों की उपज का मूल्य गिरने की समस्या सामने आई है। इसके समाधान की आदर्श व्यवस्था की जायेगी। इसके अंतर्गत ऐसी नीति बनाई जायेगी जिसमें कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और प्रोसेसिंग की व्यवस्था रहेगी। इसमें प्रोसेसिंग इकाईयों और भण्डारण क्षमता के लिये अधोसंरचना बनाने के लिये किसानों के युवा बच्चों को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रदेश में प्याज, आलू, फल-सब्जियों के लिये कोल्ड स्टोरेज श्रंखला बनायी जायेगी। इसके साथ ही मार्केटिंग पर ध्यान दिया जायेगा। प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों जैसे मालवा के आलू, शरबती गेहूँ, नर्मदा किनारे के क्षेत्र में उत्पादित होने वाली तुअर दाल, नीमच के जीरन में पैदा होने वाली एक कली की लहसुन की मार्केटिंग की जायेगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पिछले पाँच सालों में खाद्यान्न का उत्पादन दोगुना हो गया है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ा है। बीज प्रतिस्थापन की दर 30 प्रतिशत हो गयी है। खाद के अग्रिम भण्डारण की व्यवस्था की गई है। मिट्टी परीक्षण में प्रदेश देश में अग्रणी है। उत्पादन बढ़ाने के सभी पक्षों पर तेजी से काम किया गया है जिससे उत्पादन बढ़ा है। उत्पादन बढ़ने के बाद भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने की समस्या सामने आई है। इसके लिये तात्कालिक रूप से प्याज आठ रूपये प्रति किलो तथा तुअर, उड़द, मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई है। इसके बाद भी समस्या के समाधान के लिये दीर्घकालिक उपाय आवश्यक है।
बैठक में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों और मंत्रियों ने किसानों को उपज का उचित मिले, इसके लिये सुझाव दिये।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अशोक गुलाटी – कृषि उत्पादों के लिये भण्डारण क्षमता 5 से 10 गुना बढ़ायी जाये। इसके लिये निवेश किया जाये। कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के लिये डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से लिंकेज किया जाये। गुजरात में दुग्ध उत्पादन के लिये चलाये गये ऑपरेशन फ्लड की तरह मध्यप्रदेश में सब्जी उत्पादन के लिये ऑपरेशन वेजीस चलाया जाये।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. पंजाब सिंह – मध्यप्रदेश की समस्या को चुनौती के रूप में लें। फूड प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन में निवेश के माध्मय से ग्रामीण युवाओं को रोजगार दें। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ उसकी सुरक्षा के उपायों पर ध्यान दें।
कृषि क्षेत्र के इंटरप्रेन्योर श्री प्रशांत अग्रवाल – भण्डारण और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में युवाओं के प्रशिक्षण पर ध्यान दें। प्रशिक्षण की व्यवस्था जिला स्तर पर हो। ग्राम स्तर पर सब्जी मंडियों में कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था हो।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह – कृषि यंत्रों के कस्टम हायरिंग के तरह भण्डारण और प्रोसेसिंग में भी व्यवस्था की जाये। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि उत्पादों के प्रोसेसिंग और भण्डारण के लिये अधोसरंचना विकसित की जाये।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. आर.के. पाटिल – गाँव – गाँव में प्रोसेसिंग की छोटी इकाईयाँ स्थापित की जायें। प्रोसेस्ड फूड के लिये उत्पाद तैयार किये जायें।
वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया – किसानों के लिये समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाये। भण्डारण क्षमता बढ़ाई जाये।
कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन – क्वालिटी फूड पर ध्यान देना चाहिये। जैविक उत्पादों के लिये बेहतर अवसर हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव – भण्डारण क्षमता के लिये राष्ट्रीय संस्थान व्यवस्था करे। किसान कृषि उत्पादों के मूल्यों के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं हों, ऐसी व्यवस्था की जाये।
वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार – प्याज और टमाटर जैसे उत्पादों की प्रोसेसिंग इकाई जिलों में स्थापित हो।
ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन – वैश्विक बाजार में निर्यात किये जाने योग्य उत्पाद तैयार करने के संयंत्र स्थापित किये जायें।
सहकारिता राज्यमंत्री श्री विश्वास सारंग – सहकारिता के क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग इकाईयाँ लगायी जायें। भण्डारण के लिये मल्टीयूटीलिटी गोदाम बनाये जायें।
बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्री ओमप्रकाश धुर्वे, नर्मदा घाटी विकास राज्यमंत्री श्री लाल सिंह आर्य, पर्यटन राज्यमंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, उद्यानिकी राज्यमंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा, मुख्य सचिव श्री बी.पी.सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता अजय शिवहरे द्वारा आत्महत्या कुछ समय से आर्थिक कारणों को लेकर भारी तनाव में थे

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता अजय शिवहरे द्वारा मंगलवार को मुलताई में घर के बैडरूम में पंखे से दुप्पटा बांधकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई। जिस समय उन्होंने आत्महत्या की उस समय घर पर कोई नहीं था, उनके बच्चे स्कूल गए थे और पत्नी सब्जी लेने के लिए बाजार गई हुई थी। जब वह बाजार से वापस आई तो घर के मुख्य द्वार पर ताला लगा था, जिससे किसी को पता नहीं चला कि बैडरूम में क्या हुआ है।
जब बच्ची बैडरूम में स्कूल बैग रखने गई तो अजय शिवहरे को पंखे पर लटका देख हल्ला मचाया। जिसके बाद पुलिस बुलाई गई और उनके शव को पंखे से नीचे उतारा गया। उनके बैडरूम या उनके पास से कोई भी सोसाईड नोट बरामद नहीं हुआ है। आत्महत्या के कारणों का अभी तक कोई खुलासा नहीं हो पाया है, नजदीकी सूत्रों के अनुसार वह कुछ समय से आर्थिक कारणों को लेकर भारी तनाव में थे, फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मुलताई में बैतूल रोड अंबेडकर वार्ड में परिवार के साथ अजय शिवहरे रह रहे थे। वे कुछ दिनों से कर्ज को लेकर परेशान थे, जिसके कारण उन्होने मंगलवार शाम लगभग 4.30 बजे अपने बेडरूम में फांसी लगा ली। अजय शिवहरे के निधन की खबर सुनते ही उनके घर पर भीड लग गई तथा पुलिस ने भी पहुंचकर उनके फांसी पर झूलते शव को नीचे उतारा गया जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।
उनकी पत्नी सुनीता शिवहरे ने बताया कि वे कर्ज को लेकर कुछ समय से परेशान चल रहे थे,लेकिन वे एैसा आत्मघाती कदम उठाएगें, एैसा बिलकुल नही लग रहा था। वे अपने पीछे पत्नी सहित एक पुत्र तथा दो पुत्रियॉ छोड गए हैं। उनके निधन की खबर मिलते ही नगर कांग्रेस में शोक का माहौल है।
अजय शिवहरे द्वारा फांसी लगाने से पूर्व फैसबुक आईडी से अपना कवर फोटो बदल दिया गया था, बदले गए कवर फोटो में उन्होंने लिखा कि निभाओ किरदार इस तरह से कि परदा गिरे पर तालियां बजती रही। कवर फोटो के स्लोगन से यह साफ है कि वह भारी तनाव में थे और आत्महत्या का मन बना चुके है। सीधे, सरल स्वभाव के धनी अजय शिवहरे ने कम समय में ही मुलताई में गहरी पैठ बना ली थी, ऐसे में किसी भी विश्वास नहीं हो पा रहा है, उनके द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई।

किसान का हक कोई न मार ले: राजौरा

बाजार में मूंग,उड़द और अरहर की कीमतों मे भारी गिरावट के बाद सरकार ने समर्थन मूल्य पर इन्हें खरीदने का फैसला किया और देखते ही देखते 13 सौ करोड़ की खरीदी हो गई। इतनी ज्यादा खरीदी पर अब सरकार को शक है कि इसमें गड़बड़झाला हुआ है।
नरसिंहपुर, रायसेन, विदिशा, हरदा, होशंगाबाद सहित कुछ अन्य जिलों में खरीदी की मात्रा अप्रत्याशित होने से अधिकारियों को ये लग रहा है कि व्यापारियों ने किसानों के नाम पर अपना पुराना स्टॉक ठिकाने लगा दिया है।
यही वजह है कि सरकार ने खरीदी की पूरी जांच करने के निर्देश कलेक्टरों को दिए हैं। सरकार ने दलहन फसलें बाजार दर से लगभग दो हजार रुपए क्विंटल ज्यादा में खरीदी है। प्रदेश में गर्मी की मूंग, अरहर और उड़द की बंपर पैदावार और बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने के कारण सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदने का फैसला किया था।
अब तक 5 हजार 225 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 1 लाख 65 हजार टन मूूंग, 5 हजार 50 रुपए क्विंटल में 85 हजार 260 टन अरहर और पांच हजार रुपए क्विंटल में 16 हजार 358 टन उड़द खरीदी कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार को आशंका है कि कुछ जिलों में सरकारी खरीदी का फायदा उठाकर गड़बड़ियां की गई हैं। इसमें व्यापारियों ने अपने स्टॉक को किसान के नाम से ठिकाने लगा दिया। गाडरवाड़ा में ऐसे दो व्यापारी पकड़े भी जा चुके हैं।
इसके मद्देनजर कृषि विभाग ने कलेक्टरों को ये निर्देश दिए हैं कि वे जिन किसानों से खरीदी की गई है, उनके दस्तावेज की जांच करा लें। मात्रा बहुत ज्यादा होने पर पटवारी से किसानों के खेतों का निरीक्षण कराया जाए। बैंक खातों में हुए भुगतान की पुष्टि भी कराई जाए कि वे खाते उन्हीं के हैं या नहीं। इन खातों से व्यापारियों के खाते में तो राशि ट्रांसफर नहीं की गई।
इन सभी बिन्दुओं पर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में 1 लाख 20 हजार हेक्टेयर में गर्मी की मूंग बोई गई थी। किसान बड़ी मात्रा में मूंग बेच भी चुके थे लेकिन बाजार में कीमत कम होने की वजह से न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा था। इसके मद्देनजर समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में गर्मी की मूंग का रकबा सवा दो लाख हेक्टेयर के आसपास है। पिछले साल 3 लाख टन मूंग पैदा हुई थी। इस बार बंपर फसल आई है और बाजार में कीमत नहीं मिलने के कारण किसानों ने सरकार को इसे बेच दिया। संभावना इस बात की है कि जिन किसानों ने अपनी उपज औने-पौने दाम में व्यापारियों को बेच दी थी, उन्होंने अपना स्टॉक किसानों के माध्यम से बिकवा दिया हो।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ.राजेश राजौरा ने बताया कि सरकार ने खरीदी किसानों के हितों को देखते हुए की है। अरहर को छोड़कर मूंग और उड़द की खरीदी अभी चल रही है। किसान का हक कोई और न मार ले, इसके लिए ऐहतियातन कलेक्टरों को पड़ताल करने के लिए कहा।

मध्यप्रदेश विधानसभा राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग शुरू

मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार सुबह राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई। सबसे पहले नरेंद्र सिंह कुशवाह ने वोट डाला। इसके बाद अन्य मंत्री और विधायक लाइन में लगकर वोट डालने पहुंचे। कांग्रेस के पर्यवेक्षक कृपाशंकर सिंह मतदान केंद्र के भीतर बैठे रहे। यहां 228 विधायक वोट डालेंगे। मतदान शाम पांच बजे तक चलेगा। मतदान करने वाले विधायकों को मतदान केंद्र में मोबाइल, पैन या अन्य कोई भी सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है।
राष्ट्रपति चुनाव के मतदान में दिवगंत विधायक प्रेम सिंह और डॉ. नरोत्तम मिश्रा को छोड़कर 228 विधायक शामिल होंगे। एनडीए के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को बीजेपी के अलावा मप्र के तीनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने समर्थन दिया है तो उन्हें 168 एमएलए के 22 हजार 8 कीमत के वोट मिलने की उम्मीद है। मप्र के लोकसभा व राज्यसभा सदस्यों में से 33 सांसदों के 23 हजार 364 कीमत के वोट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं यूपीए की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी व पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को कांग्रेस के 56 अलावा बसपा के चार विधायकों का समर्थन है। मीरा कुमार को 60 विधायकों के 7 हजार 860 कीमत के वोट मिलने की संभावना है। इसी तरह मीरा कुमार को प्रदेश कांग्रेस के छह लोकसभा व राज्यसभा सदस्यों के 4 हजार 248 कीमत के वोट मिलने की उम्मीद है।

चालान बनाकर 14 करोड़ रुपए से ज्यादा वसूले

प्रदेश में चालान की कार्रवाई करने का अधिकार अब एएसआई (सहायक उप पुलिस निरीक्षक) को होगा। इस पर शुक्रवार को मंत्रालय में हुई राज्य सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सहमति बनी। बैठक में यह भी तय किया गया कि जिला स्तरीय सुरक्षा समिति के उपाध्यक्ष पुलिस अधीक्षक होंगे। गौरतलब है कि अभी तक थानेदार स्तर के अधिकारी को ही चालानी कार्रवाई का अधिकार था।
अपर मुख्य सचिव गृह केके सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के इलाज के लिए 32 ट्रॉमा सेंटर काम कर रहे हैं। 43 की बिल्डिंग तैयार की जा चुकी है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ट्रॉमा सेंटर के जरिए कितने लोगों को बचाया गया, इसकी जानकारी दी जाए। इंदौर में ड्राइविंग लायसेंस ट्रैक सेंटर बन चुका है।
37 जिलों के ऑफिस में ट्रैक बनकर तैयार हैं। बैठक में जिला स्तरीय समिति में पुलिस अधीक्षक को उपाध्यक्ष बनाने का फैसला करते हुए निर्देश दिए गए कि संभाग और जिला मुख्यालय में नियमित बैठकें बुलाई जाएं।
अधिकारियों ने बताया कि संचालक लोक शिक्षण ने राज्य शिक्षा केंद्र को सड़क सुरक्षा पर जागरूकता विषय स्कूली शिक्षा के कोर्स में शामिल करने पत्र लिखा है। इसके अलावा यह भी बताया गया कि देवास बायपास छह लेन बनाया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 11 मार्च से 11 जून तक बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले 2 लाख 34 हजार 521 लोगों के खिलाफ चालान बनाकर 6 करोड़ 38 लाख 24 हजार 800 रुपए वसूले गए। इसी दौरान 277 नाबालिग वाहन चालाकों को पकड़ा गया। 3 लाख 86 हजार 300 रुपए का चालान काटा गया। 15 अप्रैल से 30 जून तक जो विशेष अभियान चलाया था, उसमें 1 लाख 96 हजार 561 चालान बनाकर 4 करोड़ 91 लाख 85 हजार रुपए शुल्क वसूला गया।
शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ जून से जुलाई के बीच चलाए गए अभियान में 4 हजार 726 चालान बनाकर कोर्ट में प्रस्तुत किया गया और 556 मामले ड्राइविंग लायसेंस निलंबित करने परिवहन अधिकारी को भेजे गए। बैठक में पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला, प्रमुख सचिव परिवहन एसएन मिश्रा, परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र श्रीवास्तव, स्वास्थ्य सचिव कवीन्द्र कियावत, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विजय कटारिया मौजूद थे।

मध्यप्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश का दौर शुरू

मध्यप्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। खरगोन जिले सहित आस-पास के इलाकों में देर रात से मूसलाधार बारिश हो रही है। जिससे कुंदा और उसकी सहायक नदियां उफान पर आ गई हैं। बारिश से कुंदा नदी के पास बने प्राचीन किले की दीवार भी ढह गई है। उधर रीवा में भी 48 घंटों से बारिश जारी है। यहां नेहरू नगर, बिछिया, दुआरी और निपानिया इलाके में लोगों का बुरा हाल है। तेज बारिश से कई घरों के अंदर पानी भर गया है।
खरगोन में कुंदा नदी का पानी कई जगहों पर पुल के ऊपर से बह रहा है, जिससे आवागनम ठप हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई है। खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाइवे पर दीवाली और बंधानी नदी की पुलियाओं पर पानी होने से आवागमन रुक गया था। यहां जाम में एक एंबुलेंस भी फंस गई। करीब 4 घंटे बाद नौ बजे पुलिया पर पानी कम हुआ, जिसके बाद वाहनों का आवागमन शुरू हो सका।
मौसम विज्ञानियों ने अगले 24 घंटों के दौरान कटनी, रीवा, दमोह, छतरपुर, उमरिया, सतना, सागर, विदिशा, रायसेन, नरसिंहपुर और में भारी वर्षा की चेतावनी दी है। साथ ही पश्चिमी मप्र में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में भी जोरदार बौछारें पड़ने की संभावना है। दरअसल, दक्षिण-पूर्व उत्तरप्रदेश और उत्तर-पूर्वी मप्र पर एक शक्तिशाली लो-प्रेशर क्षेत्र बना है,जो पूर्वी मप्र पर सक्रिय है।
इसका मूवमेंट धीरे-धीरे पश्चिमी मप्र की तरफ हो रहा है। इसके असर से पूरे प्रदेश में अगले 24 घंटे के दौरान तेज बौछारों का सिलसिला शुरू होने के आसार बढ़ गए हैं।

10 दिन पहले कीटनाशक पीने वाले किसान की इलाज के दौरान मौत

कथित रूप से कर्ज से परेशान होकर करीब 10 दिन पहले कीटनाशक पीने वाले किसान की इलाज के दौरान मौत हो गई है। मिली जानकारी के मुताबिक खरगोन जिले के अजनगांव में किसान तकेसिंह पिता तोताराम पिपलिया करीब आठ दिन पहले जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था।
तकेसिंह को गंभीर हालत में अस्पतालम में भर्ती किया गया था, जहां उसका बीते कुछ दिनों से इलाज चल रहा था। मंगलवार-बुधवार के दरमियानी रात उसकी हालत बिगड़ने से मौत हो गई।
किसान के परिवार वालों का कहना है कि खेत में लगी मिर्च की फसल खराब हो गई थी। इसके अलावा 10 लाख रुपए के कर्ज से परेशान होकर उसने आत्महत्या कर ली। वहीं आधिकारिक रूप से अभी तक कर्ज की पुष्टि नहीं हुई है।