अब आपका बिजली कनेक्शन भी आधार नंबर से लिंक होगा

बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के बाद अब आपका बिजली कनेक्शन भी आधार नंबर से लिंक होगा। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने इस बारे में अपने वितरण केंद्रों को आदेश जारी कर दिए हैं। इंदौर-उज्जैन संभाग में फौरी तौर पर 11 लाख उपभोक्ताओं के नंबर लिंक करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
बिजली कंपनी के एमडी आकाश त्रिपाठी ने अपने सभी 475 विद्युत वितरण केंद्रों के प्रभारियों को उपभोक्ताओं से आधार नंबर लेने के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा है कि बिल बांटते या बिल जमा करते वक्त सभी उपभोक्ताओं से आधार नंबर ले लिए जाएं और उन्हें उनके कनेक्शन के साथ कम्प्यूटर में फीड किए जाएं।
बिजली कंपनी ने आधार नंबरों के लिए अपने सॉफ्टवेयर में परिवर्तन करते हुए उपभोक्ता के नाम के साथ नया कॉलम भी जोड़ दिया है। फिलहाल कंपनी ने आधार नंबर देना उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य नहीं किया है। इन्हें स्वेच्छा से लिया जा रहा है।
उपभोक्ताओं के कनेक्शन से आधार लिंक करने की कोई खास वजह बिजली कंपनी नहीं बता रही। न ही शासन से इस बारे में आदेश जारी हुआ है। कंपनी कह रही है कि डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए यह किया जा रहा है।
कंपनी सूत्रों के मुताबिक कंपनी धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ रही है जिससे सभी उपभोक्ताओं की जानकारी सीधे आधार से लिंक हो जाएगी। ऐसे में सरकार की योजना, किसानों या गरीबी रेखा से नीचे लाभ दिए जाने पर सीधे आधार से कनेक्शन का वेरीफिकेशन हो सकेगा।
कनेक्शन से आधार जुड़ने पर नए कनेक्शनों में भी दस्तावेजी औपचारिकताओं की जरूरत खत्म होगी। वसूली और डिफॉल्टर की स्थिति में भी आधार से लिंक होना कंपनी के लिए खासा मददगार होगा।

शहर के तीन प्रसिद्ध डॉक्टर डेंगू और चिकनगुनिया से गंवा चुके जान

डेंगू और चिकनगुनिया से शहर के तीन प्रसिद्ध डॉक्टर जान गंवा चुके हैं। इनमें से दो तो एमजीएम मेडिकल कॉलेज के रिटायर प्रोफेसर थे। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि शहर में डेंगू और चिकनगुनिया से कोई मौत नहीं हुई।
जब तक मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब पुष्टि नहीं करती, तब तक विभाग मानता ही नहीं कि बीमारी हुई है। हजारों लोग अब भी इन बीमारियों से जूझ रहे हैं लेकिन विभाग के आंकड़े 121 की ही पुष्टि कर रहे हैं। आशंका इस बात की भी है कि ये बीमारियां अब तक दर्जनों लोगों को लील चुकी हैं।
डेंगू से पीड़ित वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. ओपी बाजपेई की हाल ही में डेंगू से मौत हुई है। इसके पहले डॉ. एलएस शर्मा भी इसी बीमारी से जान गवा चुके हैं। इसी तरह डॉ. एलएस भटनागर की चिकनगुनिया से मौत हुई थी। तीनों ही डॉक्टरों की बीमारियों से मौत की आईएमए और डॉक्टर पुष्टि कर रहे हैं, बावजूद स्वास्थ्य विभाग बीमारियों से कोई मौत नहीं होने की बात कह रहा है।
शहर के हर दूसरे घर में बुखार और जोड़ों के दर्द के मरीज हैं। उन्हें हफ्तों दर्द से निजात नहीं मिल रही। विभाग ने अब तक सिर्फ 2017 मरीजों के सैंपल जांच के लिए मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजे हैं। इनमें से 121 में डेंगू और 27 में चिकनगुनिया की पुष्टि हुई है। निजी अस्पतालों और क्लिनिकों में इलाज कराने वाले हजारों लोग निजी लैबों से जांच करवा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इनकी रिपोर्ट को मान्यता नहीं देता।
डेंगू के लिए दो तरह की जांच होती है। पहला रैपिड टेस्ट और दूसरा मैक अलाइजा टेस्ट। दोनों ही जांचों पर 50 से 300 रुपए तक खर्च आता है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में ये जांचें लगभग मुफ्त होती हैं लेकिन दिक्कत यह है कि हर संदिग्ध मरीज का ब्लड सैंपल यहां नहीं भेजा जा सकता। यही वजह है कि पूरा शहर भले ही बीमारी से परेशान हो, सरकारी आंकड़ा 121 पर ही अटका हुआ है। आरोप यह भी है कि शासन स्तर पर बीमारी की गंभीरता कम आंकने के लिए जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। शासन क्षेत्रवार निजी लैब को जांच के लिए अधिकृत कर देता तो वास्तविक आंकड़े सामने लाए जा सकते थे।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों से मरीजों के ब्लड सैंपल बुलवाए हैं जबकि ज्यादातर मरीज क्लिनिक में इलाज करवा रहे हैं। डेंगू और चिकनगुनिया दोनों के मरीज को भर्ती होने की अनिवार्यता नहीं रहती। ऐसे में शासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जब तक एमजीएम मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब बीमारी की पुष्टि नहीं करती, हम बीमारी नहीं मानते। निजी लैबों की जांच रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेने का कोई सिस्टम नहीं है। सालों से व्यवस्था इसी तरह चल रही है। अब तक शहर में डेंगू और चिकनगुनिया से कोई मौत नहीं हुई।
डेंगू और चिकनगुनिया से तीन डॉक्टरों की मौत हुई है। शहर में हजारों मरीज हैं लेकिन विभाग इसे मान नहीं रहा। हजारों मरीज रिकॉर्ड पर नहीं आ पा रहे। क्लिनिकों के बाहर मरीजों की कतार लग रही है। एमवायएच की ओपीडी में सामान्य दिनों के मुकाबले तीन गुना मरीज आ रहे हैं।

भिंडी बाजार की पुरानी इमारतें बनी मुसीबतें

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की मुंबई स्थित तीन इमारतें नीलाम हो गईं। इन्हें बुरहानी ट्रस्ट ने खरीदा है जो धर्मार्थ काम करता है। दाऊद की तीनों संपत्तियों – दिल्ली जायका होटल, शबनम गेस्ट हाउस और डामरवाला बिल्डिंग का भिंडी बाजार से सीधा संबंध है। पढ़ें इसी बारे में –
दरअसल, ये तीनों प्रॉपर्टी मुंबई के प्रसिद्ध भिंडी बाजार में हैं। बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने भिंडी बाजार को संवारने के लिए बहुत काम किया है, लेकिन ये तीन इमारतें बाधा बन रही थीं। इसलिए भी ट्रस्ट ने यह संपत्ति खरीदने में रुचि दिखाई और तीन गुना कीमत पर खरीदा।
बुरहानी ट्रस्ट के प्रवक्ता के मुताबिक, हमारा मकसद भिंडी बाजार में बिजनेस का बेहतर माहौल पैदा करना है। हम चाहते हैं कि यह मुंबई में बिजनेस का बड़ा सेंटर बने। यहां लोगों को सुविधाएं और सुरक्षा, दोनों मिले। इलाके में दाऊद की प्रॉपर्टी होने से इस काम में बाधा आ रही थी।
मुंबई की ज्यादातर पुरानी इमारतें भिंडी बाजार में हैं। इसी साल सितंबर में एक इमारत ढह गई थी, जिसमें 33 लोग मारे गए थे। अभी भी यहां 256 इमारतें पुनर्निर्माण के लायक हैं। 80 साल से ज्यादा पुरानी इन इमारतों में 4,221 परिवार रहते हैं।
चूंकि इस इलाके में रहनेवाले ज्यादातर लोग दाऊदी बोहरा समुदाय के हैं। इसलिए 2008 में दाऊदी बोहरा समुदाय के धर्मगुरु सैयदना मुहम्मद बुरहानुद्दीन ने इस इलाके की सभी जर्जर इमारतों को गिराकर यहां रहने वाले लोगों को बेहतर आवास देने की योजना शुरू करने की घोषणा की थी। इस कड़ी में 95 इमारतें गिराकर कुछ काम शुरू भी किया जा चुका है।

ऑनलाइन रेत बेचेगा खनिज विकास निगम

प्रदेश सरकार ने भले ही पंचायतों को रेत खदानें सौंपने का फैसला कर लिया हो पर खनिज विकास निगम भी रेत बेचेगा। पूरा कारोबार ऑनलाइन होगा। इसके लिए निगम पोर्टल बनाएगा। इसमें बेचने और खरीदने वाले का पंजीयन कर रेत की आपूर्ति की जाएगी। यह व्यवस्था अगले कुछ महीनों में लागू हो जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक खनिज विकास निगम रेत के कारोबार को पूरी तरह से अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहता है। यही वजह है कि विरोधों के बावजूद रेत की प्रति घनमीटर कीमत तय करने की भूमिका में उसने स्वयं को भी रखा है। हर दो से तीन साल में रेत की कीमत तय होगी।
इसके साथ ही निगम रेत के ऑनलाइन कारोबार में भी उतरेगा। सचिव खनिज मनोहर दुबे ने बताया कि निगम एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार करेगा। इसमें ऑनलाइन शॉपिंग की तरह रेत का कारोबार होगा। जिसे रेत चाहिए वो पोर्टल पर अपनी मांग दर्ज कराकर ऑनलाइन भुगतान करेगा।
इसी तरह जो व्यक्ति रेत बेचना चाहता है वो भी पोर्टल पर पंजीयन कराएगा। खरीदार की मांग संबंधित रेत विक्रेता के पास जाएगी और वो रेत की आपूर्ति सुनिश्चित कर देगा। इस पूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कराया जा रहा है। आने वाले कुछ महीनों में यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी।

इंदौर के सुयश दीक्षित ने बर्थ-डे गिफ्ट में पिता को बनाया प्रधानमंत्री खुद को बनाया राजा बनाया नया देश

शहर के सुयश दीक्षित ने सूडान और मिस्त्र के बीच 800 वर्ग मील के क्षेत्र पर अपना झंडा लगाकर उसे ‘किंगडम ऑफ दीक्षित’ घोषित किया है। उन्होंने खुद को इस गैर दावाग्रस्त इलाके का राजा बताते हुए संयुक्त राष्ट्र से उनके नए देश को मान्यता देने की बात कही है। इतना ही नहीं सुयश ने एक वेबसाइट बनाकर लोगों से इस देश की नागरिकता के लेने का आवदेन करने को भी कहा है।
जानकारी के मुताबिक ये यह पूरा इलाका रेगिस्तानी है, जो मिस्त्र और सूडान की दक्षिणी सीमा से लगा हुआ है। मिस्त्र और सूडान इसे अपना इलाका नहीं मानते। मिस्त्र का मानना है कि 800 वर्ग मील का यह इलाका सूडान का है, तो सूडान यह मानता है कि यह मिस्त्र का है।
सुशय ने अपने फेसबुक जब पहली बार उस क्षेत्र पर दावा करते हुए तस्वीरें डाली तो पूरी दुनिया में हलचल मच गई। उन्होंने अपनी कहानी भी शेयर की है, जिसमें सुयश ने बताया है कि वे 319 किमी का सफर कर यहां तक पहुंचे। उनके अनुसार रेगिस्तानी क्षेत्र में पहुंचने के लिए कोई सड़क भी नहीं थी। यहां आकर उन्होंने पौधा लगाने के लिए बीज बोया और उसे पानी दिया। सुशय का कहना है कि यहां पौधे का बीज लगाकर अब मैं यह दावा करता हूं कि यह सारी जगह मेरी है।
सुयश ने अपने पिता को बर्थ-डे का‍ गिफ्ट देते हुए उन्हें ‘किंगडम ऑफ दीक्षित’ का प्रधानमंत्री बनाया है। उन्होंने एक वेबसाइट भी बनाई है, जिस पर इस नए देश की नागरिकता के लिए लोग रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस बढ़ा दी देश भर में भोपाल की शान

बेहतर यात्री सुविधाओं के लिए हमेशा सुर्खियां बटोरने वाली शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस ने देश भर में भोपाल की शान बढ़ा दी है। इस ट्रेन को रेलवे बोर्ड ने आदर्श ट्रेन का दर्जा (मेल एक्सप्रेस श्रेणी की ट्रेनों में) दिया है। अब इस ट्रेन की तर्ज पर हर मंडल की दो-दो ट्रेनों को अपग्रेड किया जाएगा।
यानी भोपाल एक्सप्रेस में यात्रियों को जो सुविधा दी जा रही हैं वे ही सुविधाएं अगले छह महीने में प्रत्येक मंडल की दो-दो ट्रेनों में यात्रियों को मिलेंगी। बोर्ड ने इसके लिए सभी जोन के जीएम को पत्र लिखकर भोपाल एक्सप्रेस से सीख लेने की सलाह दी है। 20 नवंबर तक मंडल स्तर से दो-दो ट्रेनों के नाम मंगाए हैं।
शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस (12155/12156) बीते 18 साल से राजधानी भोपाल के हबीबगंज स्टेशन से हजरत निजामद्दीन के बीच चल रही है। ट्रेन में कैटरिंग सुविधा नहीं है फिर भी यह ट्रेन यात्रियों को खूब पसंद आ रही है। तमाम सर्वे और यात्रियों के फीडबैक के बाद रेलवे बोर्ड ने यह पाया है कि भोपाल एक्सप्रेस सबसे अच्छी ट्रेन है।
रेलवे बोर्ड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ई एंड आर) विकास आर्य 8 नवंबर को रेलवे के सभी जोन के जीएम को लिखे पत्र में शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस को आदर्श बताते हुए मंडल स्तर पर दो-दो ट्रेनों का चयन कर 20 नवंबर तक उनके नाम बोर्ड को भेजने को कहा है।
ट्रेन में ये सुविधाएं सबसे अलग
– कोच में यात्रियों को ग्रीन-टी, लेमन-टी, शूप की सुविधा दी गई है।
– फर्स्ट एसी में मखबली कंबल मिलते हैं। (अभी इंडियन रेलवे की किसी भी ट्रेन में यात्रियों को ऐसे कंबल नहीं मिलते।)
– चुनिंदा कोचों में वॉटर वेंडिंग व कॉफी मशीनें हैं।
– डायबिटिक मरीजों के लिए लो-शुगर-टी की सुविधा दी गई है।
– कोच में यात्रियों के लिए नि:शुल्क लाइब्रेरी है। पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम का ट्रायल चल रहा है।
– जोन में ट्रेन सबसे पहले बायो टॉयलेट युक्त ट्रेन घोषित की है, टॉयलेट के अंदर डस्टबिन की सुविधा है।
– कोच में फ्लावर पॉट लगाए हैं, शौचालय में हैंड सावर की सुविधा है।
– ट्रेन में वाइल्ड लाइफ से जुड़ी तस्वीरें लगाई गईं हैं।

राजस्व विभाग ने किया तृतीय श्रेणी अराजपत्रित सेवा भर्ती नियमों में संशोधन

नौ हजार पटवारियों के पद पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही राजस्व विभाग ने तृतीय श्रेणी अराजपत्रित सेवा भर्ती नियमों में संशोधन कर दिया है। इसके तहत परीक्षा से चयनित पटवारियों को गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों की जो प्रतीक्षा सूची बनेगी, नए पद बनने की सूरत में इसी में से नियुक्ति की जाएगी। प्रतीक्षा सूची डेढ़ साल तक कानूनी तौर पर मान्य की जाएगी।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नए पद बनाने के बाद प्रदेश में पटवारियों की संख्या 11 हजार 622 से बढ़कर 19 हजार 20 हो जाएगी। नियमों में संशोधन करके पदों की संख्या को भी बढ़ा दिया गया है। भर्ती 9 हजार से ज्यादा पदों के लिए हो रही है।
प्रतियोगी परीक्षा के बाद एक मेरिट सूची बनाई जाएगी। इसके आधार पर चयनित अभ्यर्थी ने जिले की जो प्राथमिकता दी है, उसके हिसाब से काउंसलिंग होगी। दस्तावेजों की जांच के लिए कलेक्टर समिति बनाएंगे। समिति पात्र अभ्यर्थियों की चयन सूची तैयार करेगी। नियमों में यह भी साफ कर दिया गया है कि कोई अभ्यर्थी, जिसके विरुद्ध किसी अपराध में दोष सिद्ध हुआ हो या आपराधिक प्रकरण दर्ज है, वो सेवा में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा।

पीएससी चयन सूची पर मप्र लोकसेवा आयोग असमंजस में

परीक्षा परिणाम घोषित करने के बाद अपनी ही चयन सूची पर मप्र लोकसेवा आयोग (पीएससी) असमंजस में है। रिजल्ट आधिकारिक तौर पर घोषित करने के तीन दिन बाद पीएससी ने उसे वापस ले लिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले विकासखंड अधिकारी (बीडीओ) पद पर यह स्थिति बनी है। रिजल्ट देख चयन की खुशी मना चुके उम्मीदवार अब गड़बड़ी की आशंका में पीएससी पर अंगुली उठा रहे हैं।
पीएससी ने 6 नवंबर को बीडीओ का रिजल्ट और अंतिम चयन सूची जारी की थी। रिजल्ट को वेबसाइट पर भी प्रसारित कर दिया गया था। इसमें उपलब्ध पद के मुताबिक 71 उम्मीदवारों को मुख्य सूची में चयनित घोषित किया गया था, जबकि 17 उम्मीदवारों की अनुपूरक सूची यानी वेटिंग लिस्ट भी जारी की गई थी। 9 नवंबर को पीएससी की आधिकारिक वेबसाइट से घोषित रिजल्ट हटाते हुए पीएससी ने रिजल्ट वापस लेने की घोषणा की है। इसके पीछे कारण स्पष्ट नहीं किया गया।
शुक्रवार को उम्मीदवार पीएससी मुख्यालय संपर्क कर कारण जानने की कोशिश करते रहे। उम्मीदवारों के मुताबिक यह भी स्पष्ट नहीं है कि पीएससी रिजल्ट में परिवर्तन करेगा या नहीं। नया रिजल्ट कब जारी होगा, इस पर भी पीएससी चुप है। सूत्रों के मुताबिक मामले में पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के आला अधिकारी शुक्रवार को भोपाल से इंदौर स्थित पीएससी मुख्यालय भी पहुंचे।
बीडीओ की यह परीक्षा विभागीय स्तर की थी। यानी इसमें ग्रामीण विकास विभाग के निचले पदों पर पदस्थ कर्मचारियों ने ही हिस्सेदारी की थी। परीक्षा की प्रक्रिया मार्च 2016 में विज्ञापन जारी होने के साथ हुई थी। सितंबर 2016 में ऑनलाइन परीक्षा ली गई थी। 2 नवंबर 2016 को लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद मामले में एक याचिका भी लगी थी।
हालांकि अगस्त 2017 में कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद पीएससी को प्रक्रिया आगे बढ़ाने की हरी झंडी मिल गई थी। पीएससी ने 1, 2 और 3 नवंबर को लिखित परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए। फिर 6 नवंबर को अंतिम परीक्षा परिणाम और चयन सूची जारी की गई।

छात्राओं की सुरक्षा के लिए कोचिंग का समय बदलने की जरूरत

स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह ने कहा है कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए यदि कोचिंग का समय बदलने की जरूरत पड़ेगी तो बदल दिया जाएगा। राजधानी में पिछले दिनों हुए शक्ति दुष्कर्म मामले के बाद स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी ने आठ बजे के बाद कोचिंग न लगाने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के बारे में अनभिज्ञता जताते हुए शाह ने कहा कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं दीपक जोशी से बात करुंगा।
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि यह सरकार की प्राथमिकता है और जल्द ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर समीक्षा की जाएगी। गौरतलब है कि दीपक जोशी ने कुछ दिन पहले निर्देश दिए थे कि कोचिंग संस्थान रात आठ बजे के बाद कक्षाएं नहीं लगाएं और यदि कक्षाएं लगाई जाती है तो विद्यार्थियों को घर छोड़ने की व्यवस्था करें।
10 से 16 नवंबर तक प्रशासन अकादमी में शुरू हो रही जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान, गणितीय और पर्यावरण प्रदर्शनी का उद्धाटन अब राष्ट्रपति नहीं करेंगे। जानकारी के मुताबिक उनके कार्यक्रम में फेरबदल हो गया है। अब उनकी जगह मुख्यमंत्री प्रदर्शनी का उद्धाटन करेंगे। प्रदर्शनी में देशभर से आए स्कूली छात्र अपने मॉडल प्रदर्शित करेंगे। शाह ने बताया कि विज्ञान में बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए इस प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।

नोटबंदी में दिन-रात और छुट्टी के दिन भी काम करने वाले कर्मचारियों को नहीं दिया गया अवकाश के दिन काम करने का वेतन

नोटबंदी लागू होने के बाद 53 दिन तक 1000 और 500 के पुराने नोट को बैंकों में जमा करने का दौर चला। उस समय प्रधानमंत्री मोदी से लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली और आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने बैंक व एटीएम के बाहर कतार में खड़ी देश की जनता के धैर्य से पहले बैंक कर्मचारियों की लगन की तारीफ की थी।
जब सरकार ने नोटबंदी को सफल बताया तो उसका श्रेय बैकों के कर्मचारियों को भी दिया ,लेकिन नोटबंदी में दिन-रात और छुट्टी के दिन भी काम करने वाले एसबीआई बैंक के कर्मचारियों को एक साल बीतने के बाद भी ओवरटाइम व अवकाश के दिन काम करने का वेतन नहीं दिया गया है। एक-दो बैंकों ने ओवरटाइम का पैसा दिया तो कुछ ने देने से ही इंकार कर दिया है।
नोटबंदी की घोषणा 8 नवंबर को हुई। दूसरे दिन 9 नवंबर की सुबह से 500 व 1000 के नोटों को बैंकों में जमा कराने वालों की भीड़ जुटने लगी। उस समय बैंकों पर काम का इतना लोड था कि रिजर्व बैंक ने नवंबर महीने में बैंकों की छुट्टियां रद्द कर दी।
यहां तक कि रविवार को भी बैंकों को खुलने व नोट बदलने के आदेश दिए गए। नवंबर 2016 में 24, 26, 30 और 31 तारीख की छुट्टियां थीं,लेकिन इन चार दिनों में बैंकें खुली और नोट बदलने का काम किया गया। इतना ही नहीं कर्मचारियों ने सुबह 8 से लेकर रात 2 बजे तक बैंकों में काम किया।
उस समय बैंककर्मियों को ओवरटाइम का वेतन देने का भरोसा दिया गया। देश की सबसे बड़ी बैंक एसबीआई ने एक साल बाद भी यह वेतन नहीं दिया है। मप्र में एसबीआई की 1400 ब्रांच हैं जिनमें 12 हजार 800 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैंं। इन सभी को ओवरटाइम का वेतन मिलना है।
दूसरी तरफ यूनियन बैंक ने करीब 9 महीने पहले ही अपने कर्मचारियों को ओवरटाइम का पैसा दे दिया है तो एडीएफसी सहित कुछ और बैंक हैं जिन्होंने, कर्मचारियों को ओवरटाइम का वेतन देने से इंकार सा ही कर दिया है। यह बैंकें ऐसे किसी भी तरह के वेतन को स्वीकार ही नहीं कर रहीं।
हमें ओवरटाइम का पैसा मिलना था। चार दिन छुट्टियों के अलावा देर रात तक जितने दिन काम हुआ उसका बढ़ा हुआ वेतन मिलना था, जो अब तक नहीं मिला। प्रदेश के एसबीआई कर्मचारी-अधिकारियों ने अपनी बात हेड ऑफिस तक पहुंचाई लेकिन, अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ।