एटीएम हैक कर सात राज्यों के 300 लोगों के खातों से करोड़ों रुपये निकालने वाले गिरोह के तीन गिरफ्तार

राजस्थान पुलिस ने एटीएम हैक कर सात राज्यों के 300 लोगों के खातों से करोड़ों रुपये निकालने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें से दो आरोपी उत्तराखंड के रहने वाले सगे भाई हैं। तीनों आरोपियों ने राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के करीब 300 लोगों के साथ धोखाधड़ी कर तीन करोड़ रुपये की ठगी की बात कुबूली है।
13 नवंबर को उत्तराखंड में रुड़की निवासी अजय राठौड़ और सचिन राठौड़ व उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी विजेंद्र सिह चौहान ने पाली जिले के रायपुर से सुरेंद्र सिह नामक व्यक्ति के खाते से 35 हजार रुपये निकाले थे। यह रकम एटीएम कार्ड बदलकर निकाली गई।
सुरेंद्र सिह को अपने खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली तो उसने जैतारण पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया। इस पर पुलिस ने जांच शुरू की और मुखबिर से सूचना मिलने पर थाना अधिकारी राजेंद्र सिह ने अपनी टीम के साथ तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में तीनों ने राजस्थान में 22 और अन्य राज्यों में 50 से अधिक शहरों व कस्बों में लोगों से धोखाधड़ी की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार ये तीनों आरोपी पिछले कई दिन से राजस्थान के अलग-अलग शहरों में घूमकर एटीएम हैक कर लोगों के खातों से पैसे निकाल रहे थे। इनका एक साथी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।

देश की बेटियां बार्डर की सुरक्षा में अग्रिम पक्तिं में

आज के समय में लड़कियां प्रत्येक क्षेत्र में नाम रोशन कर रही हैं। जहां पहली बार भारतीय वायु सेना ने महिलाओं को फाइटर पॉयलट के रुप में कमीशन प्रदान की, वहीं दूसरी तरफ देश की बेटियां बार्डर की सुरक्षा में अग्रिम पक्तिं में खड़ी हैं।
लेकिन उनकी यह उड़ान वहीं नहीं रुकी है। महाराष्ट्र सरकार ने प्रदेश की फायर ब्रिगेड में पहली बार बड़ी संख्या में महिलाओं की भर्ती की है।
जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार की फायर ब्रिगेड में 97 महिला फायर फाइटर्स को नियुक्ति की गई है। इससे पहले प्रदेश सरकार की फायर ब्रिगेड में केवल 18 लड़कियां ही शामिल थीं। नई भर्ती हुई महिलाओं में अधिकतर प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों की रहने वाली हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में महिलाओं की संख्या और बढ़ाई जायेगी। उन्होंने बताया कि नई भर्ती हुई फायर फाइटर्स को वडाला के रीजनल कमांड सेंटर में ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके बाद इन्हें प्रदेश के विभिन्न भागों में तैनाती दी जायेगी।

केंद्र सरकार के 36 राफेल विमानों सौदे पर कांग्रेस ने खड़े कर दिए सवाल

केंद्र सरकार द्वारा फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों सौदे पर कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बाद जहां फ्रांस ने आरोपों से इन्कार किया है वहीं सौदे में शामिल अनील अंबानी की कंपनी ने कांग्रेस पर मुकदमे की धमकी दी है।
इस सौदे को भारत के फायदे में बताते हुए फ्रांस ने कहा है कि इसका चुनाव इसके शानदार प्रदर्शन और प्रतिस्पर्द्धात्मक कीमतों के चलते किया गया है। फ्रांसीसी दूतावास के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि इसकी खरीद में पूरी तरह से पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया है। इस करार से भारत में रक्षा उत्पादन उद्योग का विकास होगा।
उल्लेखनीय है कि फ्रांस से 36 लड़ाकू विमानों की खरीद पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को सवाल उठाया था। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राफेल सौदे में अपने उद्योगपति दोस्त के लिए देश की सुरक्षा से समझौता किया। इस डील से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचेगा।
फ्रांस के राजनयिक सूत्रों ने इसे घरेलू राजनीतिक मामला बताते हुए इस पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। लेकिन, साथ ही कहा कि किसी भी तरह का दावा करने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या फ्रांस इस सौदे को आगे बढ़ाने के लिए भी उत्सुक है, सूत्रों ने कहा कि यह भारत पर निर्भर करता है। फिलहाल तो हमारा ध्यान भारत को 36 विमान उपलब्ध कराने पर है। राफेल फ्रांस की दासो कंपनी द्वारा बनाया गया दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है। यह एक मिनट में 60,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। साथ ही यह 2200 से 2500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है।
इस डील में कांग्रेस ने अनील अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को लेकर कहा है कि इस सौदे में उसे ज्यादा पैसे दिए गए हैं। इससे नाराज कंपनी कहा है कि कांग्रेस अपना बयान वापिस ने नहीं तो केस किया जाएगा।

पराली जलाना भी है एक वजह दिल्ली-एनसीआर में हो रहे प्रदूषण की

दिल्ली-एनसीआर में हो रहे प्रदूषण की एक वजह पराली जलाना भी है और इसी मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात करेंगे। उनकी इस मुलाकात को लेकर पंजाब के मुख्मयंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अरविंद केजरीवाल पर फिर निशाना साधा है।
अमरिंदर सिंह ने कहा है कि सड़क छाप राजनीति करने वाले केजरीवाल मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाना चाहते है। कैप्टन बोले कि केजरीवाल अच्छी तरह जानते हैं कि उनके साथ बैठक कर समस्या का हल नहीं निकलने वाला है।
बता दें कि केजरीवाल हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ बैठक करने के लिए चंडीगढ़ रवाना हो चुके हैं और उन्होंने इस बैठक में शामिल होने के लिए कैप्टन को भी निमंत्रण दिया था। इसके अलावा केजरीवाल ने ट्वीट कर कैप्टन से मिलने का समय भी मांगा था। पिछली बार की तरह कैप्‍टन ने एक बयान जारी कर कहा कि पराली को लेकर केजरीवाल को राजनीतिक नहीं करनी चाहिए।
कैप्टन ने कहा कि केजरीवाल को अच्छी तरह से पता है कि पराली मुद्दे पर उनके साथ बैठक करने का कोई नतीजा नहीं निकलना है। इसके बावजूद यह कहना मुश्किल है कि केजरीवाल इस मुद्दे में अपना हाथ क्यों काला करना चाह रहे है। कैप्टन ने कहा कि सड़क छाप राजनीतिक करने वाले अरविंद केजरीवाल इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार की असफलता से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए यह राजनीतिक हथकंडा अपना रहे हैं।
कैप्टन ने कहा कि जिस तरह ऑड एंड ईवन स्कीम पर दिल्ली सरकार पलट गई वैसे ही उसका अन्य मुद्दों पर भी कोई स्टैंड नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो प्रदूषण की समस्या है वह अनियमित शहरी विकास, अनियमित परिवहन तथा औद्योगीकरण के कारण है। केजरीवाल को इन मुद्दों पर फोकस करना चाहिए न कि केवल कोरी राजनीति।
कैप्टन ने कहा ‘मेरे पास ऐसी राजनीति के लिए समय नहीं है।’ उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत करके हल निकालने की कोशिश में जुटी हुई है। अत: केजरीवाल को भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत करनी चाहिए।
यह दूसरा मौका है जब कैप्टन ने केजरीवाल को स्पष्ट शब्दों में बैठक करने से मना कर दिया है। इससे पूर्व भी केजरीवाल ने जब ट्वीट कर कैप्टन से मिलने का समय मांगा था तो कैप्टन ने कहा था कि उनसे बैठक करके समस्या का हल निकलने वाला नहीं है। केजरी ने फिर ट्वीट किया तो कैप्टन ने कड़े शब्दों में कहा था कि केजरीवाल अजीब शख्स हैैं जो हर मुद्दे पर अपनी राय तो देते हैैं लेकिन समस्या का समझते नहीं है।

राजस्थान में बोरवेल एक बच्चे की मौत का कारण बन गया।

राजस्थान में सवाई माधोपुर जिले के मलारना डूंगर में एक बार फिर एक बोरवेल एक बच्चे की मौत का कारण बन गया। यहां मंगलवार रात बोरवेल में गिरे पांच साल के अमन को बचाव दलों ने 12 घंटे की मशक्कत के बाद आखिर निकाल तो लिया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
घटना मंगलवार रात हुई जब अमन यहां खेत में खुले पड़े एक बोरवेल में गिर गया। बोरवेल करीब 230 फुट गहरा है और अमन 30 फुट की गहराई पर अटक गया था। कैमरे में बोरवेल में एक सांप भी नजर आ रहा था। यह खेत गांव के पूर्व सरपंच का है और अमन के पिता ने आरोप लगाया कि उसने कई बार इस बोरवैल को बंद कराने के लिए उसे कहा था, लेकिन उसने बंद नहीं कराया।
पूरी रात चले बचाव अभियान के बाद बुधवार सुबह अमन को बोरवेल से निकाल लिया गया और इसे अस्पताल भेजा गया, लेकिन यहां उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई। 15 दिन पहले बीमारी के चलते अमन की बहन की मौत हो गई थी।

राष्ट्रपति की बेटी स्वाति अपने नाम के साथ नहीं लिखती सरनेम

एयर इंडिया ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की बेटी स्वाति को एयर होस्टेस के काम से हटाकर ग्राउंड ड्यूटी में लगा दिया है। अब एअर इंडिया के हेड ऑफिस के को-ऑर्डिनेटर डिपार्टमेंट में शिफ्ट किया गया है। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि विमानन कंपनी ने सुरक्षा कारणों से यह फैसला किया है।
वे यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ईस्ट में जाने वाली फ्लाइट्स में जाती थीं। स्वाति कभी भी अपने नाम के साथ अपना सरनेम कोविंद नहीं लिखती थीं। अपनी पहचान छुपाई की बात पर उन्होंने कहा था कि बचपन से ही पिता ने उन्हें स्वावलंबी बनने की सीख दी है, इसलिए अपनी पहचान छिपाई।
उनसे जुड़े सूत्रों के अनुसार, असल में स्वाति कभी भी अपने पिता के राजनीतिक पद का फायदा नहीं उठाना चाहती थीं। स्वाति के क्रू मेंबर को ही अब तक ये जानाकारी नहीं थी कि उनके पिता रामनाथ कोविंद हैं। बताते चलें कि राम नाथ कोविंद 20 जुलाई 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति बने हैं।
स्वाति ने बीते दिनों प्रिवलेज लीव के लिए अप्लाई किया, तब भी उन्होंने ये नहीं बताया कि वे अपने पिता के राष्ट्रपति चुनाव के लिए छुट्टी ले रही हैं।
मीड‍िया र‍िपोर्ट्स के मुताबिक, एअर इंड‍िया के एक सूत्र ने बताया था कि स्वाति हमारे सबसे अच्छे क्रू मेंबर्स में से एक हैं। उनके ऑफिशियल रिकॉर्ड्स में भी मां का नाम सविता और पिता का नाम आरएन कोविंद लिखा गया है।

भीषण जहरीली हवा में जी रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को जल्द ही मिलने वाली है राहत

दिवाली के बाद प्रदूषण और पिछले एक सप्ताह से स्मॉग के चलते भीषण जहरीली हवा में जी रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को जल्द ही इससे राहत मिलने वाली है। अगले 24 घंटे में बारिश से स्मॉग खत्म हो जाएगा और हवा में प्रदूषण का स्तर भी घटेगा।
बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से कोहरे और कुहासे से परेशान रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए यह वेस्टर्न डिस्टरबेंस साफ हवा का तोहफा लेकर आ रहा है। इसकी वजह से दिल्ली-एनसीआर में हवाएं शुरू हो चुकी हैं।
इसका नजारा मंगलवार सुबह देखने को भी मिला। आज सुबह कई इलाकों में हवाएं चल रही थीं, इससे स्मॉग नहीं के बराबर था। वहीं, दिल्ली के रायसीना हिल्स में मंगलवार सुबह हल्का स्मॉग नजर आया। लोगों ने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत भी की है।
वहीं, मौसम विभाग के हवाले से जानकारी आ रही है कि अगले 24 से 48 घंटे में यहां पर बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी और कई इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। ऐसे में तेज हवा और फिर बारिश होने के चलते अगले कुछ दिनों में दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग खत्म हो जाएगा।
वहीं, मौसम विभाग की मानें तो उत्तर भारत में एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस ने दस्तक दी है, जिसकी वजह से पंजाब और जम्मू-कश्मीर में मौसम में बदलाव है।
मौसम विभाग का यह भी कहना है कि इस वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते अगले तीन-चार दिनों तक जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है।
मौसम विभाग की मानें तो दिल्ली-एनसीआर में 14 नवंबर से लेकर 16 नवंबर तक दिल्ली-एनसीआर में रात के तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की जाएगी। ऐसा अनुमान है कि यहां पर रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास होने लगेगा।

राजस्थान में इलाज के अभाव में 20 से ज्यादा की मौत डॉक्टरों की हड़ताल आखिर खत्म

राजस्थान में सात दिन से चल रही सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल आखिर रविवार देर रात खत्म हो गई। हड़ताल के चलते चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई थी और इलाज के अभाव में 20 से ज्यादा की मौत हो गई थीं।
रविवार को सरकार व हड़ताली डॉक्टरों के बीच करीब नौ घंटे तक चली वार्ता के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई। इसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्ति की घोषणा कर दी।
राजस्थान के सरकारी डॉक्टर एक पारी में अस्पताल चलाने, 10 हजार रुपए ग्रेड पे किए जाने, एरियर की वसूली नहीं करने सहित 33 सूत्री मांगों को लेकर सात दिन से हड़ताल पर थे।
सरकारी डॉक्टरों के साथ ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो गए थे।
सरकार ने तीन बार डॉक्टरों से वार्ता की, लेकिन नतीजा नहीं निकला। आखिरकार रविवार दोपहर दो बजे से वार्ता का दौर शुरू हुआ, जो रात 11 बजे तक चला।
इस दौरान एक बार वार्ता टूटने की स्थिति भी बनी। सरकार ने वार्तास्थल से ही डॉक्टरों की गिरफ्तारी के इंतजाम भी कर लिए थे, लेकिन रात 11 बजे दोनों पक्षों में सहमति बन गई।
और डॉक्टरों के प्रतिनिधि अजय चौधरी ने हड़ताल समाप्ति की घोषणा कर दी।

भूषण की दलील पर सन्न रह गई पीठ कार्रवाई की मांग

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जजों के नाम पर घूसखोरी के मामले की सुनवाई के दौरान खलबली मच गई। इसकी सुनवाई के दौरान अदालत में जोरदार हंगामा हुआ। वकील प्रशांत भूषण ने इस दौरान चीफ जस्टिस से यह तक कह दिया कि उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज है लेकिन प्रशांत ने जब एफआईआर का कुछ अंश पढ़ा तो वे मुख्य न्यायाधीश का नाम उसमें नहीं बता पाए।
खबरों के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने मामला सुनवाई के लिए संविधान पीठ को भेजने का दो न्यायाधीशों का आदेश रद्द कर दिया। भविष्य के लिए निर्देश भी दिया कि कोई भी न्यायाधीश स्वयं से अपने सामने कोई मामला सुनवाई के लिए नहीं लगाएगा। कौन सा मामला कौन पीठ सुनेगी, यह तय करने का अधिकार सिर्फ मुख्य न्यायाधीश को है।
न्यायिक अनुशासन की अनदेखी कर गुरुवार को जस्टिस जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जजों के नाम पर घूसखोरी मामले की एसआईटी से जांच कराने की मांग वाली याचिका सीधे पांच जजों की संविधान पीठ को भेज दी थी। यह याचिका वकील कामिनी जायसवाल ने दायर की है। जस्टिस चेलमेश्वर वरिष्ठता में दूसरे नंबर के न्यायाधीश हैं। उनकी पीठ ने सुनवाई की तिथि और पीठ के न्यायाधीश भी तय कर दिए।
पीठ ने मामला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया। न्यायिक अनुशासन के मुताबिक दो न्यायाधीशों की पीठ सीधे कोई मामला पांच न्यायाधीशों की पीठ को नहीं भेजती। सामान्य तौर पर दो न्यायाधीश मामले को बड़ी पीठ यानी तीन न्यायाधीशों को भेजते हैं। कई बार मुद्दा संवैधानिक महत्व का होने पर मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष लगाए जाने का आदेश देते हैं। लेकिन गुरुवार को ऐसा नहीं हुआ था।
शुक्रवार को ठीक तीन बजे मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, आरके अग्र्रवाल, अरुण मिश्रा, अमिताव राय और एएम खानविल्कर की पीठ मामले पर सुनवाई करने के लिए बैठी। अदालत खचाखच भरी थी। प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि उन्हें 15 मिनट पहले ही इस सुनवाई का नोटिस मिला है। उन्हे नहीं मालूम कि यह सुनवाई किस मुद्दे पर है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आपके मामले में अभी जो दो न्यायाधीशों की पीठ ने आदेश दिया है, उस पर ही सुनवाई है। केंद्र सरकार की ओर से एएसजी पीएस नरसिम्हा कोर्ट में मौजूद थे। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि दो न्यायाधीशों की पीठ ने आज मामला मुख्य न्यायाधीश को पीठ का गठन करने के लिए भेजा है।
गुरुवार को एक अन्य पीठ ने ऐसे ही मामले को सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों को भेज दिया है। इस परिस्थिति में यह बेंच तय करेगी कि मुख्य न्यायाधीश के क्या अधिकार हैं? और किसी मामले की सुनवाई के लिए पीठ कैसे गठित की जाएगी। तभी मुख्य न्यायाधीश ने कहा दो जजों की पीठ सीधे किसी मामले को संविधान पीठ को नहीं भेज सकती।
जस्टिस मिश्रा ने मेडिकल कॉलेज की मान्यता के बारे में अपने पूर्व आदेश का जिक्र करते हुए प्रशांत भूषण से कहा कि आपको नहीं मालूम कि हमने क्या आदेश दिया था। कोर्ट ने भूषण को आदेश की प्रति पढ़कर सुनाने को कहा। आदेश पढ़े जाने के बाद जस्टिस मिश्रा ने कहा कि उन्होंने कालेज को 2017-18 के सत्र के लिए इजाजत नहीं दी थी।
उन्होंने किसी भी कालेज को इसकी इजाजत नहीं दी थी। जस्टिस मिश्रा ने कोर्ट में मौजूद वकील अजीत सिन्हा से कहा कि आप तो मेडिकल के मैटर में थे। आप बताइए क्या आदेश हुआ था। सिन्हा ने कहा कि कोर्ट ने किसी भी कॉलेज को अनुमति नहीं दी थी।
तभी प्रशांत भूषण ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश को यह मामला नहीं सुनना चाहिए। उन्हें मामले से अलग हो जाना चाहिए। उनके खिलाफ एफआईआर है। तेज आवाज में प्रशांत भूषण की इस दलील पर पीठ सन्न रह गई।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उनके खिलाफ कौन सी एफआईआर है। क्या बकवास कर रहे हो? जस्टिस मिश्रा ने कहा कि पढ़कर सुनाओ एफआईआर (ये उस एफआईआर की बात हो रही थी जो सीबीआई ने जजों के नाम पर घूस लेने के आरोपों में दर्ज की है और जिसमें उड़ीसा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज आईएम कुद्दुसी को अभियुक्त बनाया गया है।) प्रशांत ने एफआईआर का कुछ अंश पढ़ा, लेकिन वे मुख्य न्यायाधीश का नाम उसमें नहीं बता पाए।
जजों के नाम पर घूसखोरी के मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में बड़ी संख्या में मौजूद वकील प्रशांत भूषण के आचरण पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने की मांग करने लगे। वे इस तरह के व्यवहार पर कड़ाई से रोक लगाने की बात कह रहे थे। उनका कहना था कि इससे न्यायपालिका की छवि को धक्का लगा है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष आरएस सूरी ने कहा कि यह कोर्ट की अवमानना है। इस तरह कोर्ट को आतंकित कर कोई मनमाफिक आदेश नहीं ले सकता। पी नरसिम्हा ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि यह नहीं भूलना चाहिए कि कई लोग दूसरों का नाम लेकर फेवर कराने की बात करते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि वह व्यक्ति भी उसमें शामिल है।

गुजरात भाजपा पहुंचा रही महासंपर्क के जरिये मतदाताओं तक प्रधानमंत्री का संदेश

गुजरात भाजपा महासंपर्क के जरिये मतदाताओं तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश पहुंचा रही है, वहीं कांग्रेस 14 नवंबर से जनसंपर्क शुरू कर एक करोड़ मतदाताओं से जुड़ने की योजना बना रही है।
चुनावी दंगल में दोनों ही दल जीत के दावे कर रहे हैं। भाजपा के आंतरिक सर्वे में पार्टी को 120 से 130 और कांग्रेस को 50 से 60 सीट मिलने का दावा किया गया है। जबकि, कांग्रेस के सर्वे में भाजपा को 60 से 70 और पार्टी को 110 से 120 सीटें मिलने की बात कही गई है।
कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष अजरुन मोढवाडिया का कहना है कि भाजपा मीडिया में खूब प्रचार कर रही है, लेकिन जमीन पर कांग्रेस मजबूत है। कांग्रेस नेता राज्य में अब तक 275 छोटी-बड़ी सभाएं कर चुके हैं। ग्रामीण इलाकों के साथ इस बार कांग्रेस को अहमदाबाद व सूरत जैसे शहरों में भी अच्छी संख्या में सीटें मिलेंगी।
मोढवाडिया का दावा है कि किसान, युवा, व्यापारी और महिलाएं कांग्रेस का समर्थन करेंगे, पार्टी को 110 से 120 सीटें मिल रही हैं। राहुल गांधी को मिल रहे समर्थन से कांग्रेस उत्साहित है।