देश के 125 शहरों में 8 करोड़ से भी ज्यादा एलईडी बल्ब वितरित

भारत सरकार की उजाला योजना के तहत देश के 125 शहरों में एक साल के अंदर 8 करोड़ से भी ज्यादा एलईडी बल्ब वितरित किए हैं, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि गुजरात की एक विधायक ने मात्र चार महीने में 6 लाख एलईडी बल्ब लोगों में बांट दिए।
सूरत के लिम्बायत विधानसभा सीट से विधायक संगीता पाटिल ने मात्र चार महीने में मोदी सरकार की उजाला योजना के तहत 6 लाख एलईडी बल्ब व लाइट का वितरण कर रिकॉर्ड बना दिया है। माना जा रहा है कि गुजरात में यह पहली ऐसी विधायक हैं जिन्होंने इतने कम समय में लाखों की संख्या में एलईडी बल्ब का वितरण किया है। सिर्फ इतना ही नहीं सरकार की योजना में शामिल ट्यूबलाइट और पंखे का वितरण भी वे कर रही हैं। इनके चुनावी क्षेत्र में लोग इन्हें बल्ब वाली विधायक के नाम से ज्यादा पहचानते हैं।
उल्लेखनीय है कि संगीता पाटिल को देश में सबसे लोकप्रिय युवा विधायक का पुरस्कार भी मिल चुका है। विधायक संगीता पाटिल का कहना है कि हमारा उद्देश्य है कि मोदी सरकार की उजाला योजना से लोगों को लाभ दिलाया जाए इसलिए हम अपने क्षेत्र में रोजाना 4 से 5 जगहों पर कैम्प लगाकर एलईडी बल्ब का वितरण करते रहे जो अभी भी जारी है। लोग भी इसके लिए अधिक जागरूक नजर आए। पहले कोई योजना आती थी तो लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती थी, लेकिन अब इस तरह के महत्वपूर्ण योजना लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
लोगों के घर उजाला रहे और वह भी सस्ते बिजली दरों में इसलिए भारत सरकार ने उजाला योजना की शुरुआत की। इसे क्रांतिकारी योजना बनाने के लिए भाजपा के हर एक कार्यकर्ता ने गुजरात में एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। गुजरात में उजाला योजना के माध्यम से भाजपा ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में लोगों के बीच अपनी चुनावी पृष्ठभूमि तैयार कर रही है, जहां वह अब तक वोटरों के बीच जगह नहीं बना पाई थी। माना जा रहा है कि जिस तरह उत्तरप्रदेश में उज्ज्वला योजना ने महिलाओं के मन में भाजपा के लिए जगह बनाई वैसे ही गुजरात में उजाला योजना कारगर साबित होगी।

नक्सल क्षेत्र की सरकारी शराब दुकानों को खतरा

प्रदेश के हर जिले में जनता के विरोध को देखते हुए सरकारी शराब दुकानों की सुरक्षा के लिए नगरसैनिक और सिक्यूरिटी गार्ड तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा विरोध से घबराई सरकार ने दुकानों का बीमा कराने का भी फैसला लिया है। शराब के स्टॉक, पैसों की सुरक्षा और कर्मचारियों का गारंटी बीमा कराया जाएगा। शराब दुकानों का संचालन करने के लिए गठित छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसी) ने बीमा कंपनियों से निविदा बुलाया है।
कॉर्पोरेशन ने बीमा का प्रारूप और शर्त तैयार कर मंगलवार को निविदा की प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकारी शराब दुकानों का बीमा एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 की आधी रात तक रहेगा। चार प्रकार की बीमा पॉलिसी ली जाएगी। पहली फायर पॉलिसी होगी, जिसमें 50 करोड़ तक के स्टॉक में आग, आपदा, भूंकप, आतंक के कारण स्टॉक को नुकसान होता है तो उसका बीमा रहेगा। दूसरी पॉलिसी चोरी या सेंधमारी की घटना होने पर नुकसान की भरपाई करेगी। इसमें भी 50 करोड़ तक के स्टॉक का बीमा रहेगा। तीसरी पॉलिसी मनी इंश्योरेंस की रहेगी।
दुकान में रखी नकद राशि चोर, लुटेरे या डकैत ले जाते हैं तो उसका बीमा रहेगा। नकद राशि पर सरकार नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र की शराब दुकानों का 10 लाख, नगर पंचायत क्षेत्र की दुकानों का पांच लाख और ग्राम पंचायत क्षेत्र की दुकानों का दो लाख का बीमा कराने जा रही है। चौथी पॉलिसी शराब दुकान के सुपरवाइजर, सेल्समैन, अन्य कर्मचारी और गार्ड के बीमा की होगी। कर्मचारियों की संख्या लगभग पांच हजार होगी। कर्मचारियों का कुल 11 करोड़ का बीमा होगा।
निविदा प्रारूप में कॉर्पोरेशन ने इस बात का अनुमान लगाया है कि प्रदेश की 712 देसी-विदेशी शराब दुकानों में हमेशा औसतन 100 करोड़ का स्टॉक और नकद रहेगा। नकद राशि को खतरा इसलिए रहेगा कि सुबह 11 से रात नौ बजे तक बिक्री की राशि रात में दुकान में ही पड़ी रहेगी। उस राशि को अगले दिन सुबह 11 बजे बैंक में जमा कराया जाएगा।
आबकारी अधिकारियों का कहना है कि नक्सल क्षेत्र की सरकारी शराब दुकानों को ज्यादा खतरा रहेगा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 27 शराब दुकानें संचालित होंगी। इनमें गरियाबंद जिले की छह, राजनांदगांव जिले की चार, कोण्डागांव जिले की पांच, दंतेवाड़ा जिले की तीन, सुकमा जिले की चार और बीजापुर जिले की पांच सरकारी शराब दुकानें शामिल होंगी।
विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के उल्लंघन का मुद्दा उठेगा
सुप्रीम कोर्ट ने अशोक लेंका विरुद्ध ऋषि दीक्षित मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन के निर्णय के खिलाफ तल्ख टिप्पणी कर आदेश दिया था। वर्ष 2005 में लाइसेंसी दुकानदारों ने लाइसेंस शुल्क नहीं पटाया और प्रदेश से भाग गए थे। इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए इन दुकानों का संचालन सरकार खुद ही करने लगी थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है राज्य सरकार को अपने संविधान की कार्यप्रणाली सही ढंग से ज्ञात नहीं है।
संविधान प्रदत्त व्यवस्था को सरकार ने राजस्व बढ़ाने की प्रक्रिया समझ ली है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार व मशीनरी अगली बार से ऐसी गलती नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 47 का अक्षरशः पालन करने व इसी के अनुरूप शराब नीति का संचालन करने का आदेश दिया था। विधानसभा में कांग्रेस इसी आदेश को पटल पर रखकर सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता ममता शर्मा ने भी इसी मुद्दे पर विधानसभा की याचिका समिति को आवेदन दिया है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव ने बताया कि विधानसभा में गुरुवार को शराबबंदी के अलावा सुकमा नक्सली हमले को उठाकर सरकार को घेरा जाएगा। इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार पर खुफियातंत्र और नक्सल विरोधी अभियान में फेल होने का आरोप लगाएगा। सरकार से कहा जाएगा कि इस बार भी चूक की बात कहकर शहीद जवानों का अपमान न करें।

कैप्टन अमरिंदर सिंह बने पंजाब के नए मुख्यमंत्री

पंजाब विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें राज्यपाल वीपी सिंह बडनोरे ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई उनके साथ उनकी कैबिनेट के 9 मंत्री भी शपथ ले रहे हैं। यह दूसरी बार होगा जब कैप्टन राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं। वो राज्य के 26वें मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
उनके बाद ब्रह्म मोहिदर और नवजोत सिंह सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण के बाद सिद्धू ने कैप्टन के पैर छू कर आशीर्वाद भी लिया। उनके डिप्टी सीएम बनने पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। कहा जा रहा है कि कैप्टन उन्हे डिप्टी सीएम नहीं बनाना चाहते जबकि पार्टी आलाकमान को इस बात पर कोई एतराज नहीं है। बहीं खबर यह भी है कि कैप्टन उन्हें शहरी विकास मंत्रालय दे सकते हैं। इनके बाद मनप्रीत बादल ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली और उनका वित्तमंत्री बनना तय है।
इसके बाद साधु सिंह धर्मसोत, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राणा गुरजीत सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली जबकि अरुणा चौधरी और रजिया सुल्ताना ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ ली।
यादगार बनेगा अमरिंदर का शपथ ग्रहण समारोह
कैप्टन अमरिंदर सिंह के शपथ ग्रहण समारोह को यादगार बनाने के लिए देशभर से प्रमुख कांग्रेसी नेताओं के अलावा अन्य कई दलों के नेता पहुंचे हैं। समारोह को हालांकि अमरिंदर ने सादा रखने की बात कही थी मगर इसमें पार्टी नेताओं व वर्करों समेत करीब 1200 लोगों के पहुंचने की बात कही जा रही है।
शपथ ग्रहण में राहुल गांधी और मनमोहन सिंह नजर आए वहीं बुधवार को राजभवन से जिन नेताओं के पहुंचने की पुष्टि की गई है उनमें फारूख अब्दुल्ला, अखिलेश यादव, भूपिंदर सिंह हुड्डा और वीरभद्र सिंह आदि के नाम भी शामिल हैं।
इनके अलावा पी चिदंबरम, सलमान खुर्शीद, उमर अब्‍दुल्ला, दिग्विजय सिंह, सीपी जाेशी, अहमद पटेल, अजय माकन, अंबिका सोनी, आनंद शर्मा, अर्चना डालमिया, कपिल सिब्‍बल, वीरप्पा मोइली, मलिका अर्जुन खडके, मीनाक्षी नटराजन, मिलिंद मुरली देवडा, मोहसिना किदवई, सचिन पायलट, रेणुका चौधरी, राजीव शंकर राव साटव, राज बब्बर, आस्कर फर्नाडीज, मोहम्मद असलम एवं फिरोजा, मुकुल वासनिक भी पंजाब राजभवन में कैप्टन अमरिंदर के शपथ ग्रहण समारोह के गवाह बने।

पिता पुत्र ने किया कमाल एक ही मैच में लगाई हाफ सेंचरी

वेस्टइंडीज टीम के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी शिवनारायण चंद्रपॉल और उनके बेटे तेगनारायण चंद्रपॉल ने मिलकर क्रिकेट फिल्ड में कमाल कर दिया।
पिता-पुत्र की जोड़ी ने कैरीबियाई घरेलू क्रिकेट में गुयाना की ओर से खेलते हुए एक ही मैच में अर्धशतक ठोंक दिया।
इस तरह घरेलू क्रिकेट में एक ही मैच में हाफ सेंचुरी लगाने वाली यह पिता-पुत्र की पहली जोड़ी बन गई है। जमैका के खिलाफ खेलते हुए दोनों ने 38 रनों की साझेदारी भी की। इसकी बदौलत किंग्सटन के सबीना पार्क मैदान पर गुयाना को पहली पारी के आधार पर कुछ बढ़त भी मिल गई।
तेगबहादुर ने 135 गेंदों पर 58 रनों की पारी खेली वहीं शिवनारायण ने पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 175 गेंदों पर 57 रन बनाए। दोनों बल्लेबाज हालांकि सेंचुरी पूरी नहीं कर सके।
अपने जमाने के खब्बू बल्लेबाज रहे चंद्रपॉल ने 164 टेस्ट मैचों में 11867 रन बनाए हैं। इस दौरान उनकी बल्लेबाजी औसत 51.37 रही है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 30 शतक और 66 अर्धशतक लगाए हैं। टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में सातवें पायदान पर हैं
तेगनारायण ने 2013 में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था। अपने पिता के साथ यह उनका पांचवां मैच है लेकिन पहली बार दोनों ने हाफ सेंचुरी लगाई है।
जब शिवनारायण चंद्रपॉल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने के दो साल बाद 1994 में तेगनारायण का जन्म हुआ। दोनों की उम्र में करीब 22 साल का फर्क है।
42 वर्षीय शिवनारायण ने पिछले साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। तेगनारायण भी अपने पिता की ही तरह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं।

पीएम मोदी का लोहा मानते है देश विदेश के नेता

यूपी में प्रचंड जीत के बाद देश ही नहीं बल्कि दुनिया के नेताओं ने बी पीएम मोदी का लोहा मान लिया है। दूसरे देशों के अलावा पाकिस्तान के लोगों को भी इस जीत से उम्मीद है। इस ऐतिहासिक जीत के लिए जहां सभी ने पीएम को बधाई दी है वहीं पाकिस्तान की एक 11 साल की बच्ची ने भी उन्हें पत्र लिखकर बधाई दी है।
इस बच्ची ने अपने पत्र में लिखा है कि इस जीत के बाद पीएम को अब ज्यादा से ज्यादा भारतीय और पाकिस्तानी दिलों को जीतकर दोनों देशों के बीच शांति पुल की काम करने पर ध्यान केंद्रीत करें। अकीदत नावीद नाम की इस बच्ची ने अपने पत्र में भारत और पाक के बीच शांति की जरूरत पर ध्यान खींचते हुए लिखा है की पीएम मोदी इस प्रक्रिया को तेजी दे सकते हैं।
अकीदत ने लिखा है, एक बार मेरे पिता ने कहा था कि दिल जीतना बेहतरीन काम है। संभवतः आपने भारतीयों के दिलों को जीता है इसलिए आप यूपी का चुनाव जीत गए। लेकिन में यह कहना चाहुंगी की अगर आप और ज्यादा भारतीय और पाकिस्तानी दिलों को जीतना चाहते हैं तो आपको शांति और दोस्ती की तरफ कदम बढ़ाना होगा। दोनों ही देशों को अच्छे रिश्तों की जरूरत है। आईये दोनों देशों के बीच शांति और दोस्ती की पुल बनाएं। आईये तय करें कि हम गोलियां नहीं बल्कि किताबें खरीदेंगे। बंदूकें नहीं बल्कि दवाएं खरीदेंगे।
अकीदत ने आगे लिखा है कि शांति और लड़ाई में से क्या चुनना है यह विकल्प दोनों देशों के सामने है। उसने अपने पत्र का समापन पीएम मोदी को यूपी में जीत की बधाई देते हुए किया है। बता दें कि लाहौर की रहने वाली इस बच्ची ने इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी पत्र लिखकर शांति की अपील की थी।

मणिपुर में एन. बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद

मणिपुर में आजादी के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। पार्टी ने एन. बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री चुना है। भाजपा विधायक थोंगम विश्वजीत भी इस पद के दावेदार थे, पर आखिरकार बाजी बीरेन सिंह के हाथ लगी। बीरेन सिंह राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर भी रह चुके हैं। बाद में पत्रकारिता से जुड़े। फिर राजनीति में उतरे। अब वह मणिपुर में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए हैं।
– राष्ट्रीय स्तर के पेशेवर फुटबॉलर रहे बीरेन ने स्थानीय भाषा में दैनिक अखबार की शुरुआत की थी।
– अखबार चलाने के लिए उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली दो एकड़ जमीन बेचनी पड़ी थी।
– हालांकि, राजनीति में आने के लिए उन्होंने साल 2001 में इस अखबार को दो लाख रुपए में बेच दिया था।
– वर्ष 2002 में 56 वर्षीय नॉन्गथोमबाम बीरेन सिंह का राजनीतिक कॅरियर शुरू हुआ।
– 2002 में डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी (डीआरपीपी) के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ा।
– डीआरपीपी ने 2002 के विधानसभा चुनाव में 23 उम्मीदवार उतारे, जिनमें से महज दो को जीत मिली थी।हीनगैंग क्षेत्र से लड़े बीरेन सिंह भी इन दो विधायकों में एक थे।
– चुनाव जीतने के बाद बीरेन और उनकी पार्टी कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा बन गए।
– इबोबी सिंह सरकार में बीरेन मंत्री बनाए गए थे। साल 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले डीआरपीपी
का कांग्रेस में विलय हो गया।
– 2007 में बीरेन ने पहली बार कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता।
– 2016 अक्टूबर में बीरेन ने अंसतोष जाहिर करते हुए इबोबी सिंह सरकार और कांग्रेस की सदस्यता से
इस्तीफा दे दिया था।
– इसके बाद अक्टूबर 2016 में वो पर भाजपा में शामिल हो गए।
– 2017 में वे भाजपा के टिकट पर फिर से हीनगैंग क्षेत्र से जीते।

सभी बड़े और गंभीर मामलों में सिराज अब्देअली नामक फर्जी गवाह का नाम सामने

कविता रैना हत्याकांड हो या चर्चित व्यापमं घोटाला। सभी बड़े और गंभीर मामलों में सिराज अब्देअली नामक फर्जी गवाह का नाम सामने आया है। वह अभी तक सैकड़ों मामलों में गवाही दे चुका है। इसका ज्यादातर वक्त कोर्ट और थानों में गुजरता है। कई मामलों में पुलिस खुद सेटिंग कर बयान बदलवा देती है। जिन मामलों में सेटिंग नहीं होती उनके खिलाफ बयान भी करवा देती है।
सिराज अब्देअली वह शख्स है जिसे सिपाही से लेकर कोर्ट कर्मचारी भी पहचानते हैं। सैंकड़ों केसों में गवाह बन चुका सिराज कुछ दिनों पूर्व कविता रैना हत्याकांड में गवाही देने कोर्ट पहुंचा तो वकील दंग रह गए कि आखिर पुलिस का परमानेंट गवाह इस गंभीर मामले में कैसे शामिल हो गया। केस डायरी में उसका नाम तीन जगह दर्ज था। सिराज अमूमन रुपए लेकर गवाही से पलट जाता है लेकिन जिस मामले में सेटिंग नहीं होती उसमें खिलाफ भी बयान देता है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। पुलिस खुद लेकर आई और रटे-रटाए बयान करवाए।
पुलिस ने बताया कविता के हत्यारे महेश बैरागी ने नौलखा पार्किंग में एक्टिवा रखी थी। इसमें सिराज को चश्मदीद गवाह बताया। इसके बाद तीन अलग-अलग तारीखों पर किराया चिट्ठी जब्त करना दर्शाई। ताज्जुब इस बात का है कि सभी में सिराज को गवाह बनाया गया।
राजेंद्र नगर थाने में अ.क्र.539/13 में भी सिराज गवाह है। जांच में शामिल दो टीआई-दो एसआई 18 अप्रैल को मुख्य आरोपी नितिन महिंद्रा से हार्ड डिस्क जब्त करने रवाना हुए। मेमोरंडम पर सिराज और राहुल मराठा को गवाह बनाया गया। राहुल सिराज का साथी है और सिराज की तरह वह भी पॉकेट गवाह है।
सिराज राजेंद्र नगर, जूनी इंदौर और चंदन नगर थाने का ‘पॉकेट’ गवाह है। कई मामलों में सिराज को खुद पता नहीं रहता कि उसे केस में गवाह बना दिया। कोर्ट से समंस और वारंट जारी होने पर वह आरोपी-फरियादी से मिलता है। कोर्ट के बाहर सेटिंग हो गई तो बयान पलट देता है। सेटिंग नहीं हुई तो उनके खिलाफ बयान देता है। रेट भी केस के हिसाब से तय हैं। अवैध हथियार और अवैध शराब के मामले में 500 और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर केस में 50 हजार तक वसूल लेता है।
चायवाले और मुखबिर भी गवाह
कनाड़िया थाने के बाहर चाय का ठेला लगाने वाला राजू और एरोड्रम का मुनीम भी परमामेंट गवाहों में शामिल हैं। इन्हें तो कोर्ट से समंस तामील होने पर केस का पता चलता है। इसी तरह लखन तंवर, लखन गौर, रघुवीर पौहरा, रणवीर, सुरेश माघरे, संजय, धीरज, वकील सिंह, रामलाल, रामसिंह, धरमू, रमेश, महादेव, राजेश, गंगाचरण, अजय पथरोड, राजू दीनानाथ, सुबोध पांडे, बाबू खां, सत्तार, मिट्टूलाल, रामप्रसाद, रतनलाल, रमाकांत, जसवंत, नवाब खान, किशोर, नारायण, रुमाब, छगन, भेरु, गणेश, छीतू, हीरालाल, अनिल, भीमसिंह, रामचंद्र, शंकरलाल, विनोद, कुंवरलाल भी पुलिस के पॉकेट गवाह हैं।
तत्कालीन डीआईजी संतोषकुमार सिंह ने भी जून 2015 में 40 से ज्यादा पॉकेट गवाहों को चिन्हित करवाया था और इसकी समीक्षा भी की जा रही थी, ताकि आगे से ऐसे गवाहों का इस्तेमाल ना हो। कुछ दिनों तक ये ठीक रहा, लेकिन फिर थाना प्रभारियों ने पॉकेट गवाहों को कोर्ट में उतारना शुरू कर दिया।
हर मामले में पुलिस को निष्पक्ष एवं स्वतंत्र गवाहों को ही रखना चाहिए। गंभीर मामलों में गवाह बनाते वक्त विशेष ध्यान रखना चाहिए, कि ऐसा कतई ना हो कि वे पॉकेट गवाह हों। अगर पॉकेट विटनेस बनाए गए हैं और रुपए लेकर पक्षद्रोही होते हैं तो उनकी समीक्षा की जाएगी।

रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा या लखनऊ मेयर दिनेश शर्मा बन सकते है यु पी के नए सी एम्

यूपी में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री चुने जाने की कवायद जारी है। बुधवार को राजनाथ सिंह का नाम तेजी से चला। चर्चा चल पड़ी कि संघ ने भी उनके नाम पर मुहर लगा दी है और जातीय समीकरण साधने के लिए भाजपा दो डिप्टी सीएम के साथ राजनाथ को यूपी की कमान सौंप सकती है।
बहरहाल, राजनाथ सिंह ने इन अटकलों को गैर जरूरी बताया था। उन्होंने कहा, ऐसी बातें निरर्थक हैं। मालूम हो, चुनाव प्रचार के दौरान भी राजनाथ सिंह से पूछा गया था कि क्या मीडिया की बात यूपी के अगले सीएम से हो रही है तो वे यह कहते हुए आगे बढ़ गए थे कि ‘राम-राम क्या बात कर रहे हैं..।’
इससे पहले चल रही चर्चाओं के अनुसार, यूपी के सीएम पद की रेस में चार-पांच नाम और भी हैं, लेकिन राजनाथ को सभी का समर्थन मिल सकता है। यहां तक कहा गया कि पार्टी अंदरखाने राजनाथ को सीएम और सुरेश खन्ना को स्पीकर बनाए जाने का मन बना चुकी है।
अपुष्ट सूचनाओं के मुताबिक, 17 मार्च को शपथग्रहण हो सकता है, जिसमें शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी कार्यक्रम बन चुका है। 16 मार्च को लखनऊ में विधायक दल की बैठक है।
कहा जा रहा है कि कोयंबटूर में चल रही संघ की बैठक में राजनाथ के नाम पर भी चर्चा हुई। इसके बाद राजनाथ सिंह का निजी स्टाफ लखनऊ में सीएम पर आवास पहुंचा। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है।
बता दें, यूपी सीएम की दौड़ में जिन नेताओं के नाम चल रहे हैं, उनमें योगी आदित्यनाथ भी शामिलि हैं। वहीं पार्टी केशव प्रसाद मौर्य को भी जिम्मेदारी दे सकती है। मौर्य बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी से मिलेंगे। इनकी छवि साफ-सुथरी है, ओबीसी हैं और संघ से पुराना नाता तो है ही।
इनके अलावा गृहमंत्री राजनाथ सिंह के करीबी व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा या लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा में से किसी को सीएम बनाकर पार्टी चौंका भी सकती है।
युवा चेहरों में श्रीकांत शर्मा का नाम भी शामिल है, जो मथुरा से चुनाव जीते हैं। श्रीकांत को मोदी और शाह का करीबी बताया जाता है। शाह ने श्रीकांत के लिए रैलियां की हैं।

डीआरएस विवाद में स्टीव स्मिथ और विराट कोहली पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर हैरानी

दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फॉफ डु प्लेसिस को इस बात पर हैरानी हो रही है कि आईसीसी ने बेंगलुरू टेस्ट के दौरान डीआरएस विवाद में स्टीव स्मिथ और विराट कोहली पर कोई कार्रवाई नहीं की।
प्लेसिस को लग रहा था कि आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में आईसीसी इन दो कप्तानों के खिलाफ कोई कदम उठाएगा। बेंगलुरू टेस्ट के बाद विराट ने आरोप लगाया था कि स्मिथ ने डीआरएस के दौरान ड्रेसिंग रूम से मदद की कोशिश की थी।
कुछ समय पहले मिंट से गेंद चमकाने की कोशिश के मामले में प्लेसिस को आईसीसी की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। प्लेसिस का मानना है कि उनके मामले से बेंगलुरू टेस्ट का डीआरएस मामला ज्यादा गंभीर था, इसके बावजूद ये दोनों क्रिकेटर किस तरह आईसीसी की कार्रवाई से बच गए।
नवंबर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होबार्ट टेस्ट के कुछ दिनों बाद जारी हुए फोटोज में प्लेसिस को मिंट से गेंद चमकाते हुए देखा गया था। इसके बाद आईसीसी ने उन्हें दोषी पाते हुए 100 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना किया था। प्लेसिस ने इसके खिलाफ अपील भी की थी, जिसे ठुकरा दिया गया था।
प्लेसिस ने स्वीकारा कि उन्हें हैरानी हुई जब आईसीसी ने स्मिथ और विराट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया। उ्ल्लेखनीय है कि स्मिथ ने स्वयं स्वीकारा था कि उन्होंने डीआरएस के दौरान ड्रेसिंग रूम के तरफ देखने की कोशिश की थी।

उनकी महान खोजों ने इलेक्ट्रिकल पावर सप्लाय की दुनिया को बदलने में बड़ा योगदान दिया।

वायरलेस टेलीकम्यूनिकेशन और बिजली की सप्लाय के लिए पहले मैग्निफायर को निकोला टेस्ला नामक वैज्ञानिक ने सन् 1895-98 के दौरान डिजाइन किया था। इससे 51 फीट व्यास के क्षेत्र में बिजली भेजी जा सकती थी।
1899 में टेस्ला अमेरिका के कोलेरेडो शिफ्ट हो गए। वहां पोलीफेज अल्टरनेटिंग करंट पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन सामने आ चुका था, जिससे उन्हें बिना चार्जिंग के इलेक्ट्रिक पावर मिल सकता था।
यहां आकर उन्होंने अपने प्रयोगों पर हाथ से 500 पन्नों की डायरी लिखी। टेस्ला ने अपनी खोजें जारी रखीं और तीन
जुलाई 1899 को टेस्ला ने टेरेस्टेरियल स्टेशनरी वेव्स की खोज की। उन्होंने इस सिद्धांत की भी खोज की कि धरती कम प्रतिरोधकता के साथ इलेक्ट्रिक तरंगों की चालक है।
बाद में उनकी इन महान खोजों ने इलेक्ट्रिकल पावर सप्लाय की दुनिया को बहुत प्रभावित किया और दुनिया को बदलने में बड़ा योगदान दिया।