यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जब कहा लोगों के जेहन में एक बार फिर राहुल गांधी की उम्र आ गई

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जब संसद में कहा कि मैं राहुल गांधी से एक साल छोटा हूं और अखिलेश से एक साल बढ़ा, तो बरबस ही लोगों के जेहन में एक बार फिर राहुल गांधी की उम्र आ गई।
यूपी चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद से राहुल चर्चा में हैं। देश की सबसे पुरानी पार्टी में कोई उनका बचाव कर रहा है तो कोई खुली चुनौती दे रहा है कि आगे आकर नेतृत्व करें या पार्टी छोड़ दें।
बहरहाल, राहुल में हमेशा उनके पिता राजीव गांधी की झलक देखी जाती रही है। हालांकि दोनों की तुलना नहीं हो सकती, लेकिन देश की सियासत पर पैनी नजर रखने वाले बताते हैं कि दोनों की राजनीतिक उपलब्धियों में जमीन-आसमान का फर्क है। एक नजर इसी से जुड़ी अहम बातों पर- 20 अगस्त 1944 को जन्में राजीव गांधी 36 साल की उम्र में सियासत में आए थे और उसके अगले ही साल सांसद बन गए थे। उन्होंने भाई संजय गांधी के निधन के बाद 1981 में अमेठी लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी।
वहीं 19 जून 1970 को पैदा हुए राहुल गांधी महज 34 साल की उम्र में सांसद बन गए थे। राहुल ने 2004 के चुनाव में अपने पिता की सीट अमेठी से जीत दर्ज की थी।
राहुल 13 साल से सांसद हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई मंत्री पद नहीं मिला है, जबकि इस बीच लगातार दो बार केंद्र में यूपीए की सरकार रही।
दूसरी ओर राजीव गांधी 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बन गए थे। राहुल गांधी आज उम्र के जिस पड़ाव पर हैं, तब तक तो राजीव पांच साल प्रधानमंत्री रह चुके थे। 46 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था।

नदी किनारे ट्रेनिंग करना महंगा पड़ा मोजाम्बिक युवा फुटबॉलर को

मोजाम्बिक के एक युवा फुटबॉल खिलाड़ी को नदी किनारे ट्रेनिंग करना काफी महंगा पड़ गया, जिसके कारण उसे अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा। ट्रेनिंग के दौरान 16 फीट लंबे एक मगरमच्छ ने इस मोजाम्बिक खिलाड़ी को अपना शिकार बना लिया।
इस्टेवाओ अल्बर्टो गिनो नाम का यह 19 वर्षीय फुटबॉलर मोजाम्बिक के दूसरे डिवीजन क्लब एटलेटिको मिनेरो डी” टेटे की ओर से खेलता है। वह पश्चिमी प्रांत में जाम्बेजी नदी के समीप रहता था।
यह घटना पिछले गुरुवार को हुई थी। कोच एडुआर्डो कावाल्हो ने बताया कि उस रात गिनो ट्रेनिंग कर रहे थे। जॉगिंग करने के बाद उन्होंने अपने हाथ पानी में डाले, तभी मगरमच्छ ने उन्हें पकड़ लिया।
दो पड़ोसी इस हमले के प्रत्यक्षदर्शी रहे। वह करीब 16 फीट लंबे मगरमच्छ से उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं कर सके। स्थानीय पुलिस के अनुसार अभी तक मृत खिलाड़ी की बॉडी नहीं मिली है।
जाम्बेजी नदी में मगरमच्छ का हमला होना सामान्य बात है। पिछले सप्ताह ही नजदीक ही जिम्बाब्वे की सीमा के एक गांव में लोगों ने मगरमच्छ को पकड़ा था, जिसके पेट से आठ साल के बच्चे के अवशेष मिले थे।

सीरिया में दमिश्क के पूर्वी इलाके में सेना ने सोमवार को भीषण बमबारी की।

सीरिया में शांति की कोशिशों को जोरदार झटका लगा है। राजधानी दमिश्क के पूर्वी इलाके में सेना ने सोमवार को भीषण बमबारी की। इससे एक दिन पहले विद्रोहियों ने इस इलाके में अचानक हमले कर कई महत्वपूर्ण जगहों पर कब्जा कर लिया था। निगरानी संगठन सीरियन ऑब्जरवेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार इनमें से ज्यादातर जगहों पर फिर से सेना का नियंत्रण हो गया है।
हमले में 26 सैनिक और 21 विद्रोहियों के मारे जाने की पुष्टि संगठन ने की है। इसके अलावा इदलिब सहित कई अन्य जगहों पर भी विद्रोहियों के प्रभाव वाले इलाकों में सेना ने हवाई हमले किए हैं। बीते साल अलेप्पो पर सेना का नियंत्रण होने के बाद रूस और तुर्की की पहल पर शांति के प्रयास शुरू किए गए थे। इसके बाद से यह अब तक का सबसे भीषण संघर्ष है।
सीरियाई टीवी के अनुसार विद्रोहियों ने रविवार को अल-कायदा से जुड़े फतेह अल शाम के साथ मिलकर पूर्वी दमिश्क के जोबार और कबोन में सैन्य ठिकानों पर अचानक धावा बोल दिया।
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि विद्रोही लड़ाके सुरंग के रास्ते शहर में दाखिल हुए थे। कार बम धमाके और रॉकेट हमलों से विद्रोहियों ने कई जगहों पर कब्जा कर लिया। सेना ने जवाब में भयंकर बमबारी कर विद्रोहियों को पीछे खदेड़ दिया।
सातवें साल में प्रवेश कर चुके सीरियाई गृहयुद्ध में करीब साढ़े तीन लाख लोग जान गंवा चुके हैं। बीते दो साल से जिन इलाकों में भीषण लड़ाई चल रही है उनमें जोबार भी है। इसके एक ओर सेना तो दूसरी ओर विद्रोहियों का नियंत्रण है। सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थक रूस के दमिश्क स्थित दूतावास की इमारत को भी इस लड़ाई में नुकसान पहुंचा है।
रूस ने मॉस्को में तैनात इजरायली राजदूत को तलब कर सीरियाई में हवाई हमलों को लेकर विरोध भी जताया है। बीते शुक्रवार को इजरायल ने हिजबुल्लाह के लिए हथियार लेकर जा रहे काफिले को निशाना बनाया था। हिजबुल्लाह भी असद का समर्थक है।

भारत के सौमिल वैद्य का प्रोजेक्ट शोरटलिस्ट

भारत के पहले प्राइवेट लूनर मिशन ने मुंबई के सौमिल वैद्य का प्रोजेक्ट को शॉर्टलिस्ट कर लिया है। 15 मार्च को Lab2Moon काॅन्टेस्ट का आयोजन किया गया था, जिसमें मुंबई के सौमिल के प्रोजेक्ट के साथ-साथ इटली की एक टीम के प्रोजेक्ट टीम ईयर्स (इलेक्ट्रोस्टेटिक्स एक्टिव रेडिएशन शील्ड) को भी विनर घोषित किया गया था। सौमिल वैद्य के नेतृत्व में उनकी टीम इंडस ने यह कमाल कर दिखाया। उनकी टीम में गोवा यूनिवर्सिटी में छात्र ऐश्वर्य मुंगले और दूसरे कोल्हापुर के रहने वाले अनिकेत कुमार हैं।
सौमिल के मुताबिक उनका आइडिया चांद पर जाने वाली स्पेसक्राफ्ट और जनजीवन के बीच एक शील्ड बनाने की है जो हमारी रक्षा कर सके।
सौमिल की टीम के पास एक बड़ा टारगेट चार करोड़ की कॉर्पोरेट फंडिंग जुटाने का है। इसके बाद ही 15 अप्रैल तक अपने प्रोजेक्ट को भेज पाएंगे। उनके द्वारा बनाया गया डिजाइन केवल 250 ग्राम का है और तीन वाट की ऊर्जा से चलेगा। चयनित डिज़ाइन को एक मशीन से चांद पर भेजा जाएगा।
सौमिल की टीम गूगल लूनर एक्स प्राइज काम्पटीशन में भाग लेने वाली अकेली भारतीय टीम है।

1 घंटे 38 मिनट स्टेशन पर रूके थे भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में ब्लास्ट करने वाले आतंकी

भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में ब्लास्ट करने वाले आतंकी स्टेशन पर कहां घूमे और क्या किया, यह जानने एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की एक टीम दो बार भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंची चुकी है। जहां पर टीम में शामिल अधिकारियों ने आतंकियों के बताने के आधार पर उन पाइंटों को देखा है जहां आतंकी पुष्पक एक्सप्रेस से उतरने के बाद से लेकर भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में चढ़ने के पहले तक घूमे हैं।
सूत्रों के मुताबिक एनआईए की टीम घटना वाले दिन स्टेशन पर आतंकियों की प्रत्येक गतिविधियों की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रेन में ब्लास्ट के अलावा आतंकियों के और क्या इरादे थे और उन्होंने एक ट्रेन से उतरने के बाद दूसरी ट्रेन में चढ़ने के बीच मिले समय में क्या किया।
जांच एजेंसियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि आतंकी घटना वाले दिन पुष्पक एक्सप्रेस से सुबह 6:33 बजे भोपाल स्टेशन पहुंचे थे। इस ट्रेन के पहुंचने के 1 घंटे 38 मिनट बाद सुबह 8:10 बजे भोपाल-उज्जैन पैसेंजर प्लेटफार्म-6 से रवाना हुई थी। तब तक आतंकी प्लेटफार्म-2 से लेकर 6 के बीच घूमते रहे। सूत्रों के मुताबिक एनआईए की टीम यह साक्ष्य जुटा रही है कि आतंकियों ने रेलवे स्टेशन पर 1 घंटे 38 मिनट में क्या किया और कहां घूमे।
एनआईए ने एटीएस से जांच डायरी लेने के बाद सोमवार को इंदौर से भोपाल-उज्जैन पैसेंजर के उस कोच को भी अपने कब्जे में ले लिया है जिसमें 7 मार्च को सुबह विस्फोट हुआ था। एनआईए की फोरेंसिक टीम ने कोच की जांच भी की है। रेलवे ने विस्फोट के बाद प्रभावित कोच को गार्ड डिब्बा सहित इंदौर शिफ्ट कर दिया था।

खागरागढ़ में हुए ब्लास्ट के बाहरी तार जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्‍लादेश से जुड़े

साल 2015 के मुकाबले 2016 में पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा की सीमाओं पर हरकत-उल-जिहादी अल-इस्लामी और जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आतंकियों की घुसपैठ तीन गुना ज्‍यादा हुई है। घुसपैठ को लेकर बांग्लादेश सरकार द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2014 में बर्दवान जिले के खागरागढ़ में हुए ब्लास्ट की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेन्सी (एनआईए) ने जांच में पाया था कि उस ब्लास्ट के बाहरी तार जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्‍लादेश से जुड़े हैं।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हूजी और जेएमबी के दो हजार से ज्‍यादा ऑपरेटिव इन तीनों राज्यों में घुस चुके हैं। इनमें से करीब 720 बंगाल की सीमा और बाकी 1,290 संदिग्ध असम और त्रिपुरा की सीमाओं से आए हैं। हालांकि रिपोर्ट को लेकर बंगाल सरकार के अधिकारियों को संदेह है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2014 में 800 और 2015 में 659 लोगों ने घुसपैठ की थी।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, खागरागढ़ की घटना के बाद इन आतंकियों के काम करने के तरीके में बदलाव आया है जिससे इन्हें ट्रैक करने में मुश्किलें आ रही थीं। बंगाल पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘पहले ये मालदा, मुर्शिदाबाद या नदिया जैसे जिले से आते थे। अब वे असम और त्रिपुरा से होते हुए पश्चिम बंगाल में घुस रहे हैं। यह उनके लिए ज्‍यादा आसान और सुरक्षित है।
बंगाल गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस रिपोर्ट की सच्चाई जानने के लिए जानकारी एक‍त्रित की जा रही है। वहीं असम पुलिस के अतिरिक्त मुख्य निदेशक (एसबी) पल्लब भट्टाचार्य मानते हैं कि आतंकी गतिविधि में निश्चित ही बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि पिछले छह महीने के दौरान जेएमबी के 54 संदिग्‍धों को गिरफ्तार किया गया है। घुसपैठ पर नजर रखने के लिए पुलिस अधिकारियों की एक कमेटी भी बनाई गई है जिसमें विधायक भी शामिल हैं।
एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक 12 जनवरी को जेएमबी का सचिव इफ्तादुर रहमान फर्जी पासपोर्ट पर भारत आया था और यहां पर उसने असम व बंगाल में कई लोगों से संपर्क साधा था। खुफिया जानकारी के मुताबिक वह दिल्ली भी आ सकता है और उसका असली नाम सज्जाद हुसैन है। अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि 18 जनवरी को बांग्लादेश के मायमेनसिंह जिले में असम, पश्चिम बंगाल और नई दिल्ली में बैठे लोगों और जेएमबी और हूजी के शीर्ष नेतृत्व के बीच मीटिंग हुई थी।

सैंटियागो निएवा भारत के पुरुष मुक्केबाजों के नए विदेशी कोच होंगे

अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी महासंघ (एआइबीए) के कोचों के आयोग के उपाध्यक्ष सैंटियागो निएवा भारत के पुरुष मुक्केबाजों के नए विदेशी कोच होंगे। वह 2014 में क्यूबा के बीआइ फर्नांडीज के पद छोड़ने के बाद से रिक्त पड़े स्थान को भरेंगे।
बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, “एआइबीए ने हमसे निएवा की सिफारिश की थी और उनके पास अच्छा अनुभव है। मैं अच्छे परिणाम के लिए आश्वस्त हूं।”
42 वर्षीय निएवा एआइबीए के तीन सितारा कोच हैं और वह पिछले साल तक पुरुष स्वीडिश टीम के साथ जुड़े हुए थे।
उन्होंने रियो ओलंपिक के बाद पद छोड़ा था। अपने प्रतिस्पर्धी दिनों में अर्जेंटीना का भी प्रतिनिधित्व करने वाले स्वीडन निवासी निएवा का अनुबंध इस साल होने वाली विश्व चैंपियनशिप तक के लिए है, जिसके बाद फेडरेशन उनके अनुबंध को बढ़ाने पर फैसला करेगा।
विश्व चैंपियनशिप का आयोजन 25 अगस्त से तीन सितंबर के दौरान जर्मनी के हैम्बर्ग में होगा। वह सोमवार को भारत पहुंचेंगे और तत्काल पटियाला में दायित्व संभालेंगे, जहां दो में से एक राष्ट्रीय शिविर का आयोजन होना है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय विवाह कानून को राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने मंजूरी दी

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से जुड़े बहुप्रतीक्षित विवाह कानून को राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह विधेयक अब कानून बन गया है। इसके बाद अब वहां रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को विवाह के बाद कानूनी मान्यता मिल सकेगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पीएमओ से जारी एक बयान में इसकी पुष्टि करते हुए कहा गया है कि पीएम की सलाह पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने ‘हिंदू विवाह विधेयक 2017’ को मंज़ूरी दे दी है।
इससे पहले 9 मार्च को इसे संसद से मंजूरी मिली थी। कानून को पारित होने से पहले लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। नेशनल असेंबली में दूसरी बार यह विधेयक पारित हुआ था। इससे पहले पिछले साल सितंबर में संसद ने इस कानून को पारित कर दिया था। लेकिन बाद में सीनेट ने इसमें कुछ बदलाव कर दिए थे।
नियमानुसार, कोई भी विधेयक तभी राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है, जब दोनों सदनों से समान प्रति को ही पारित किया गया हो। दोनों सदनों से विधेयक के अंतिम स्वरूप को मंजूरी मिल गई जिसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया। कानून बनने के बाद यह तीन प्रांतों पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लागू होगा।
सिंध प्रांत पहले ही अपने यहां हिंदू विवाह अधिनियम लागू कर चुका है। इस कानून को पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिदुओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिनियम के अंतर्गत हिंदुओं को मुस्लिमों के ‘निकाहनामे’ की तरह शादी के प्रमाण के तौर पर ‘शादीपरत’ दिया जाएगा।
विधवाओं को सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ लेने में शादी का पंजीकरण काम आएगा। शादी के लिए हिंदू जोड़े की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है। कानून के मुताबिक, अलग होने के लिए हिंदू दंपती अदालत से तलाक का अनुरोध भी कर सकेंगे।
तलाक ले चुके व्यक्ति को इस कानून के तहत फिर से विवाह का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा हिंदू विधवा को पति की मृत्यु के छह महीने बाद फिर से शादी का अधिकार होगा। पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी वहां की जनसंख्या का करीब 1.6 फीसद है।
– पाकिस्तान में हिंदू विवाह अधिनियम वहां के हिंदू समुदाय पर लागू होता है, जबकि भारत में हिंदू मैरिज एक्ट हिंदुओं के अलावा जैन, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी लागू होता है।
– पाकिस्तानी कानून के मुताबिक शादी के 15 दिनों के भीतर इसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। भारतीय कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है। इस बारे में राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं।
– पाकिस्तान में शादी के लिए हिंदू जोड़े की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है। भारत में लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल निर्धारित है।
– पाकिस्तानी कानून के मुताबिक, अगर पति-पत्नी एक साल या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं और साथ नहीं रहना चाहते, तो शादी को रद कर सकते हैं। भारतीय कानून में कम से कम दो साल अलग रहने की शर्त है।
– पाकिस्तान में हिंदू विधवा को पति की मृत्यु के छह महीने बाद फिर से शादी का अधिकार होगा। भारत में विधवा पुनर्विवाह के लिए कोई समयसीमा तय नहीं है।

उपहार सिनेमा कांड के आरोपी गोपाल अंसल को सरेंडर के लिए और मोहलत देने से इन्कार

उपहार सिनेमा कांड के आरोपी गोपाल अंसल को सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर के लिए और मोहलत देने से इन्कार कर दिया है। इसके बाद उन्हें तुरंत सरेंडर करते हुए सजा के लिए जेल जाना होगा। गोपाल अंसल को राहत दिलाने के उद्देश्य से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी कोर्ट में उपस्थित हुए। लेकिन कोर्ट ने जेठमलानी की दलीलों को दरकिनार करते हुए गोपाल अंसल को सरेंडर करने के लिए और वक्त देने से मना कर दिया।
इससे पहले कोर्ट की ओर से गोपाल अंसल को राहत देते हुए 9 मार्च को उन्हें जेल नहीं भेजने की याचिका को खारिज करते हुए आत्मसमर्पण करने को लेकर 10 दिन की मोहलत दी गयी थी। जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस ए के गोयल की खंडपीठ ने अंसल को सजा की 7 महीने की बाकी अवधि को पूरा करने के लिए 20 मार्च को आत्मसमर्पण का निर्देश दिया था। गोपाल अंसल अपने भाई सुशील अंसल के समान जेल की बाकी सजा में छूट की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर उनकी ओर से अपने स्वास्थ्य को एक बड़ी वजह बताया गया था। लेकिन गोपाल अंसल की दलीलों का कोर्ट पर कोई असर नहीं हुआ।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए गोपाल अंसल को जेल की बाकी सजा काटने का निर्देश दिया था, जबकि उनके बड़े भाई सुशील अंसल को जेल की सजा से राहत दी गयी थी। कोर्ट ने उनकी उम्र संबंधी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुये कहा था कि उन्होंने पहले ही जेल की सजा काट ली। साथ ही कोर्ट ने अंसल बंधुओं पर निचली अदालत की ओर से लगाये गये 30-30 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा था।
गोपाल अंसल की ओर से भी इसी तरह की राहत का अनुरोध करते हुये दावा किया है कि उसकी आयु 69 वर्ष की है और अगर उसे जेल भेजा गया तो उसके स्वास्थ्य को नुकसान होगा। बता दें कि वर्ष 1997 में उपहार सिनेमा अग्निकांड उस वक्त हुआ जब उपहार सिनेमा में हिन्दी फिल्म ‘बॉर्डर’ चल रही थी। इस अग्निकांड में 59 दर्शकों की मृत्यु हो गई थी। जिसमें करीब दो दर्जन बच्चे शामिल थे। मामले में रियल स्टेट कारोबारी और उपहार सिनेमा के मालिक अंसल बंधुओं को लापरवाही बरतने का दोषी करार दिया गया।

छत्रपति शिवाजी का जन्मदिन साल में दो बार मनाने के सवाल के चलते खानी पड़ गई जेल की हवा

छत्रपति शिवाजी का जन्मदिन साल में दो बार मनाने के लेकर सवाल उठाने वाले एक प्रोफेसर को जेल की हवा खानी पड़ गई है। जिले के खालपुर स्थित केएमसी कॉलेज में कॉमर्स विभाग के हेड सुनिल वाघमारे ने अपने व्हाट्सऐप ग्रुप में पूछा था कि शिवाजी महाराज का जन्मदिन साल में दो बार क्यों मनाया जाता है।
बता दें कि माराठा योद्धा शिवाजी महाराज की जन्मतिथि को लेकर असमंजस के चलते उनका जन्मदिन साल में दो बार मनाया जाता है। उनका दूसरा जन्मदिन 15 मार्च को आता है और इसी पर वाघमारे ने सवाल उठाया था। रात 11.30 बजे उनके इस कमेंट को वाघमारे के साथ कॉलेज में ही पढ़ाने वाले अमोल नागरगोजे ने देखा और वाघमारे को डांट भी लगाई।
इसके बाद उन्होंने तुरंत ग्रुप को डिलिट भी कर दिया लेकिन इसके बावजूद अगले दिन पूरे कॉलेज में यह बात फैल गई। मामला इतना गर्मा गया कि अगले दिन कॉलेज में कुछ छात्रों और प्रोफेसर्स ने वाघमारे पर हमला कर दिया और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें बचाया। बाद में पुलिस ने वाघमारे को धारा 295 ए (जानबुझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने) की धारा ते तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
वाघमारे के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने वाले नागरगोजे जो कि व्हाट्सऐप ग्रुप के एडिमन भी थे उन्होंने बताया कि वाघमारे वरिष्ठ फैकल्टी हैं और उस रात उनके कमेंट का विरोध करते हुए मैंने उसे वापस लेने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया। इसके बाद मैंने ग्रुप डिलिट कर दिया। अगले दिन जब में स्टाफ रूम में था तो खबर मिली की उन पर हमला हुआ है। मैं ग्रुप एडमिन था इसलिए पुलिस ने मुझे शिकायत दर्ज करवाने के लिए कहा। पुलिस ने वाघमारे और नागरगोजे के फोन जब्त कर लिए हैं। खोपोली पुलिस थाना इंचार्ज सावता शिंदे के अनुसार दोनो फोन्स को सील किया गया और मामले की जांच चल रही है।