शहडोल संभाग में व्यापारियों ने खरीद ली प्याज

प्याज खरीदी में गड़बड़ी की बढ़ती आशंका को देखते हुए सरकार ने तय किया है कि अब प्याज के हर लेन-देन की जांच होगी। यदि किसान के खाते में पैसा आने के बाद तुरंत किसी ऐसे खाते में राशि स्थानांतरित होती है जो संदिग्ध है तो पूछताछ की जाएगी। बिना प्याज की खेती किए उपज बेचने वाले किसानों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। इसके लिए सभी किसानों से रिकॉर्ड की सत्यापित प्रतिलिपि ली जाएगी। ये व्यवस्था 26 जून से होने वाली खरीदी पर लागू होगी।
प्याज खरीदी को लेकर अपर मुख्य सचिव पीसी मीना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टरों से फीडबैक लिया। सूत्रों के मुताबिक इसमें कलेक्टरों ने बताया कि मौके का फायदा उठाते हुए बाहरी राज्यों से व्यापारी प्रदेश में प्याज न खपाने लगें, इसके लिए नाकों पर पहरेदारी सख्त कर दी गई है।
कहीं से भी प्याज लेकर आने वाले ट्रकों को प्रदेश की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। देवास में एक ट्रक भी पकड़ा गया है। 33 हजार टन से ज्यादा बिक चुका है। इसमें 27 हजार टन व्यापारियों ने खरीदा है। रीवा में खरीदी का काम पूरा हो गया है। रतलाम कलेक्टर ने बताया कि पांच-पांच बार प्याज बेचने वाले किसानों के खातों पर नजर रखी जा रही है। ये देखा जा रहा है कि वे कितना पैसा निकाल रहे हैें और ऑनलाइन ट्रांसफर कर रहे हैं तो किस खाते में जा रहा है।
दरअसल, सरकार को आशंका है कि प्रदेश में प्याज के ऊंचे दाम को देखते हुए कहीं प्याज कारोबारी खेल न कर रहे हों। बैठक में ही कलेक्टरों को निर्देश दिए कि 26 जून से होने वाली खरीदी में किसानों के रिकॉर्ड का भी सत्यापन किया जाए। ये सुनिश्चित कर लिया जाए कि जिस किसान ने प्याज की बोवनी की हो, उसी से उपज खरीदी जाए। साथ ही बैंक खाते से होने वाले लेन-देन पर भी नजर रखी जाए।
उधर, मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे धैर्य रखें, पूरी प्याज खरीदी जाएगी। प्याज की बंपर पैदावार हुई है। खरीदी केंद्रों पर अंबार लग गया है। परिवहन एक समस्या और चुनौती है। इससे निपटने के लिए कोशिशें चल रही हैं। स्वार्थी तत्व इस व्यवस्था में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए सभी नजर रखें। मूंग की बाजार और समर्थन मूल्य की दर में काफी अंतर हैं, फिर भी पूरी मूंग और उड़द खरीदेंगे। उन्होंने किसानों से कहा कि वे साफ मूंग लेकर आएं ताकि उन्हें उचित दाम दिलाया जा सके।
सरकार ने प्याज की खपत को लेकर प्रदेश के बाहर संभावनाएं टटोलना भी तेज कर दिया है। खाद्य विभाग के छह अधिकारियों को दिल्ली, बिहार, झारखंड, गुजराज, पश्चिम बंगाल और हैदराबाद भेजा गया है। वहीं, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक ने बुधवार को प्रदेशभर के प्याज व्यापारियों से चर्चा की।
अधिकारियों ने बताया कि शहडोल संभाग भेजी गई प्याज को थोक व्यापारियों ने खरीद लिया। सरकार ने तय किया है कि प्याज का भंडारण करने की जगह इसे नीलाम किया जाएगा। व्यापारियों से कहा जा रहा है कि वे प्रदेश से बाहर प्याज बेचें, ताकि दोबारा प्याज खरीदी की प्रक्रिया में न आ जाए।
सूत्रों का कहना है कि प्याज को प्रदेश के भीतर और बाहर भेजने के लिए सरकार ने रेल मंत्रालय से ज्यादा से ज्यादा रैक उपलब्ध कराने की मांग की है। मार्कफेड के प्रबंध संचालक ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि रैक मिलने लगे हैं।
प्याज की नीलामी के लिए नागरिक आपूर्ति निगम ने ऑनलाइन टेंडर जारी कर आवेदन बुलाए हैं। शाजापुर के व्यापारियों ने कुछ रैक प्याज लेने का आवेदन भी किया है। हर सोमवार और गुरुवार टेंडर निकलेंगे।

भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ कोच अनिल कुंबले ने दिया इस्तीफा

भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ कोच अनिल कुंबले ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीसीसीआई ने कुंबले द्वारा इस्तीफा देने की पुष्टि कर दी। बोर्ड के क्रिकेट ऑपरेशंस (महाप्रबंधक) एमवी श्रीधर को वेस्टइंडीज दौरे पर टीम प्रबंधन का प्रमुख नियुक्त किया है।
कुंबले इसी के चलते भारतीय टीम के साथ मंगलवार सुबह वेस्टइंडीज के दौरे पर रवाना नहीं हुए। पहले यह बताया गया था कि वे आईसीसी की 22 व 23 जून को होने वाली बैठक के चलते अभी टीम के साथ नहीं गए है और 23 जून के बाद टीम के साथ जुड़ेंगे ।
भारतीय क्रिकेट टीम को वेस्टइंडीज में 23 जून से पांच वन-डे मैच और एक टी20 मैच की सीरीज खेलनी है। इसके लिए भारतीय टीम सुबह वेस्टइंडीज के लिए रवाना हुई। लेकिन टीम के रवाना होते वक्त चीफ कोच कुंबले खिलाड़‍ियों के साथ नहीं थे, जबकि उनका टिकट भी रिजर्व था। इसे लेकर यह अटकलें लगाई जाने लगी कि कप्तान कोहली के साथ खराब संबंधों के चलते वे टीम के साथ नहीं गए हैं।

मोहम्मद बिन सलमान को कहा जाता है मिस्टर एवरीथिंग

सऊदी अरब में बड़ा बदलाव हुआ है। यहां किंग सलमान ने भतीजे 57 वर्षीय मोहम्मद बिन नायेफ के स्थान पर अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस घोषित किया है। यानी किंग के बाद अब राजगद्दी पर उनके बेटे का हक होगा। साथ ही किंग ने अपने इस 31 वर्षीय प्यारे बेटे को देश का डिप्टी प्राइम मिनिस्टर भी बना दिया है।
– मोहम्मद बिन सलमान आज सऊदी अरब की सत्ता में सबकुछ संभालते हैं, इसीलिए डिप्लोमेट इन्हें ‘मिस्टर एवरीथिंग’ पुकारने लगे हैं। शाही परिवार की नई पीढ़ी की अगुवाई कर रहे मोहम्मद बिन सलमान न केवल देश की अर्थव्यवस्था संभाल रहे हैं, बल्कि रक्षा मंत्री भी हैं।
– पिछले साल किंग अब्दुल्ला के निधन के बाद मोहम्मद बिन सलमान के पिता ने सत्ता संभाली थी। तभी से इनकी ताकत और प्रभाव तेजी से बढ़ी है।
– पश्चिमी देशों के डिप्लोमेट्स भी मोहम्मद बिन सलमान का लोहा मानते हुए उन्हें बहुत होशियार और बुद्धिमान मानते हैं। मोहम्मद बिन सलमान काउंसिल ऑफ इकोनॉमिक एंड डेवलपमेंट अफेयर्स के चेयरमैन हैं। देश में कच्चे तेल का सारा कामकाज संभालने वाली संस्था सऊदी अराम को भी इन्हीं के अधीन हैं।

पाकिस्तान में फांसी की सजा पा चुके कुलभूषण जाधव को लेकर बड़ा बासित का बयान

पाकिस्तान में फांसी की सजा पा चुके कुलभूषण जाधव को लेकर पाकिस्तानी उच्चयुक्त अब्दुल बासित का बड़ा बयान आया है। बासित ने कहा है कि जाधव की फांसी पर पुर्विचार की संभावना है।
बासित ने द हिंदू से अपने कार्यकाल में भारत-पाकिस्‍तान संबंधों के बारे में बात करते हुए कहा कि जब तक कुलभूषण जाधव का मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में है, तब तक उन्हें फांसी नहीं दी जाएगी।
बासित ने कहा कि भले ही कोर्ट की ओर से फैसला आने में दो-तीन साल लग जाएं, लेकिन उससे पहले फांसी नहीं दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वो चाहते हैं इस मामले में जल्द कोर्ट का फैसला आए। बता दें कि अगले माह बासित का कार्यकाल समाप्‍त हो रहा है।
अब्दुल बासित ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के अलावा भी कुलभूषण जाधव के पास फांसी की सजा से बचने के उपाय हैं। बासित ने बताया कि ‘कोर्ट ऑफ अपील’ से यदि जाधव की अपील रद्द हो जाती है, तो उनके पास अपील का मौका है। उन्होंने कहा कि जाधव पहले आर्मी चीफ जनरल से दया की फरियाद कर सकते हैं, उसके बाद राष्ट्रपति के पास भी दया याचिका दी जा सकती है।
पाकिस्तान ने 46 वर्षीय पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को मार्च, 2016 में गिरफ्तार किया था। जिसके बाद पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों के आरोपों में मौत की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ भारत ने 8 मई को आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने फांसी पर रोक लगा दी। फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में लंबित है।

देश ही नहीं दुनिया में लोग योग कर मना रहे अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस

अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस पर देश ही नहीं दुनिया में लोग योग कर इसे मना रहे हैं। इसी मौके पर अहमदाबाद में भाजपा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने योग गुरु बाबा रामदेव के साथ योग किया। इस दौरान यहां कई विश्व रिकॉर्ड बनाए गए।
कार्यक्रम में गुजरात के मुख्‍यमंत्री विजय रुपानी भी रामदेव और अमित शाह के साथ मंच पर योग करते नजर आए। अमित शाह ने योग की महत्‍ता के बारे में बताते हुए ट्वीट किया, ‘योग शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को एकमसत करने का अद्वितीय माध्यम है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व निरामय और विश्व कल्याण की कामना करता हूं|’
कार्यक्रम के दौरान अहमदाबाद में बारिश भी हुई, लेकिन लोगों की योग के प्रति रुचि में इससे कोई बाधा नहीं पड़ी। यहां उपास्थित लोग तेज बारिश में भी योग करते रहें। इस दौरान बाबा रामदेव ने दावा किया कि यहां पर सर्वाधिक लोग एक साथ योग कर रहे हैं, यह एक विश्व रिकॉर्ड है। बाबा रामदेव ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही जब सयुंक्त राष्ट्र में गए थे, तब उन्होंने योग दिवस का प्रस्ताव रखा था। वहीं उनके कारण आज पूरी दुनिया योग कर रही है, और तीसरा योग दिवस मना रही है। बाबा रामदेव के साथ इस मैदान में लगभग सवा लाख लोग योग कर रहे थे।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर किसानों की मौत के विरोध में कांग्रेस कार्यालय सहित जिलों में भी शवासन

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कांग्रेस ने मंदसौर में पुलिस फायरिंग में किसानों की मौत के विरोध में भोपाल स्थित कांग्रेस कार्यालय सहित जिलों में भी शवासन किया। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। कांग्रेस का आरोप है कि किसानों की मौत के बाद भी सरकार लापरवाह बनी रही, इसके विरोध में ही शवासन किया गया। उधर कुछ किसान संगठनों ने भी कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए शवासन किया। भारतीय किसान महासंघ ने भी राजधानी में शवासन कर विरोध जताया।गौरतलब है कि किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर पुलिस फायरिंग में हुई किसानों की मौत के बाद से कांग्रेस सरकार को घेरने में लगी है।

अगले साल अधिकांश शीर्ष सदस्यों के व्यस्त होने से आईसीसी ने 2018 टी-20 विश्व कप रद्द कर दिया

अगले साल अधिकांश शीर्ष सदस्यों द्वारा द्विपक्षीय सीरीज में व्यस्त होने से आईसीसी ने 2018 टी-20 विश्व कप रद्द कर दिया है। यह टूर्नामेंट दक्षिण अफ्रीका में प्रस्तावित था, लेकिन स्थानीय सरकार व क्रिकेट संघ की तनातनी के कारण इसे कहीं और कराने की योजना बन रही थी। हर 2 साल में होने वाला यह टूर्नामेंट भारत में 2016 में होने के 4 साल बाद सीधे 2020 में होगा।
अब तक दक्षिण अफ्रीका (2007), इंग्लैंड (2009), वेस्टइंडीज (2010), श्रीलंका (2012), बांग्लादेश (2014) और भारत (2016) में टी-20 विश्व कप आयोजित हो चुका है। द्विपक्षीय सीरीज से सभी देशों को कमाई होती है जिसका बड़ा हिस्सा प्रसारण करार से आता है, विशेषकर जब भारत किसी देश का दौरा करता है तो मेजबान बोर्ड टीवी प्रसारण अधिकार से लाखों डॉलर की कमाई करता है।
भारत को 18.5 अरब की जगह 27 अरब रुपए देने को तैयार आईसीसी
चैंपियंस ट्रॉफी के खत्म होने के तुरंत बाद लंदन में ही सोमवार से आईसीसी की वार्षिक कांफ्रेंस होगी जिसमें भारत की तरफ से कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और सीईओ राहुल जौहरी भाग लेंगे। इसमें भारत को आईसीसी से मिलने वाले वार्षिक राजस्व पर मुहर लगेगी। दुबई में अप्रैल में हुई बैठक में भारत को आईसीसी के संचालन ढांचे में बदलाव के मतदान में 1-9 से शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
यही नहीं राजस्व मॉडल के विरोध को लेकर बीसीसीआई की आपत्ति को भी आईसीसी बोर्ड ने 8-2 से खारिज कर दिया था। उस बैठक में भारत का हिस्सा 57 करोड़ डॉलर (करीब 37 अरब रुपए) की जगह 29.3 करोड़ डॉलर (लगभग 18.5 अरब रुपए) कर दिया गया था। तब आईसीसी के स्वतंत्र चेयरमैन शशांक मनोहर ने बीसीसीआई को अतिरिक्त 10 करोड़ डॉलर (लगभग छह अरब, 43 करोड़ रुपए) के राजस्व की पेशकश की थी लेकिन उसे बीसीसीआई ने खारिज कर दिया था।
बीसीसीआई सूत्रों के मुताबिक एक बार फिर भारतीय पदाधिकारियों ने मनोहर से बात की है और यह भारत को 29.3 करोड़ डॉलर की जगह 40.5 करोड़ डॉलर (लगभग 27 अरब रुपए) देने पर सहमति बन गई है।
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप पर भी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक इस वार्षिक सम्मेलन में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप पर भी चर्चा हो सकती है। आईसीसी लंबे समय से सभी प्रारूपों में कम से कम एक विश्व प्रतियोगिता शुरू करने की योजना बना रहा है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच कार्गो कॉरिडोर शुरू

भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए एयर कार्गो कॉरिडोर को आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। इसके माध्यम से पहली फ्लाइट जब भारत पहुंची तो इसमें 60 अफगानी हींग भेजा गया है।
इस पहली फ्लाइट की आगवानी करने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज, नागरिक उड्डयन मंत्री गजपति राजू, विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर वहां मौजूद थे।
हवाई कॉरिडोर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के साथ चारों ओर से जमीन से घिरे अफगानिस्तान को भारत के बाजारों तक पहुंच देगा। इससे अफगानिस्तान के किसानों को खराब होने वाली वस्तुओं की भारतीय बाजारों तक जल्द और सीधी पहुंच से लाभ होगा।
दोनों देशों के बीच पहले एयर कार्गो कॉरिडोर का उद्घाटन अफगान के राष्‍ट्रपति अशरफ गनी ने किया। जिसके बाद पहला मालवाहक विमान 60 टन हींग लेकर काबुल से दिल्ली पहुंचा है। 2016 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी के बीच इस कॉरिडोर पर निर्णय लिया गया था।
मोदी ने ट्वीट करके कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधा हवाई संपर्क समृद्धि की राह खोलेगा। पीएम ने कहा, ‘मैं राष्ट्रपति अशरफ गनी को उनकी इस पहल के लिए धन्यवाद देता हूं।’
मालूम हो कि चारों तरफ से विदेशी जमीनों से घिरे अफगानिस्तान का आयात और निर्यात पड़ोसी देशों पर निर्भर है। लेकिन, वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आतंकियों को पनाह देने जैसे आरोप को लेकर तनावपूर्ण संबंध हैं।
राष्ट्रपति बनने के बाद अशरफ गनी पहली बार 2015 में भारत दौरे पर आए थे। तभी एयर कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया था। इससे पहले सड़क के जरिए अफगानिस्‍तान से प्रोडक्‍ट भारत आते हैं।
अब तक अपने विदेशी व्‍यापार के लिए अफगानिस्‍तान पड़ोसी देश पाकिस्‍तान के पोर्ट पर निर्भर है। इसे भारत तक पहुंचने के लिए पाकिस्‍तान के जरिए आना पड़ता है लेकिन इस मार्ग से भारत को वहां सामान निर्यात की अनुमति नहीं है। नए एयर कॉरिडोर के जरिए अफगानिस्‍तान और भारत के बीच व्‍यापार को तीन साल में 800 मिलियन से 1 बिलियन और अगले दस सालों में 10 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्‍य है।
अगले हफ्ते कंधार से दूसरी कार्गो 40 टन सूखे फल के साथ भारत आएगा। मांग के अनुसार, हर हफ्ते काबुल और कंधार से अनेकों कार्गो विमान भारत आएंगे। अफगानिस्‍तान में भारतीय राजदूत मनप्रीत वोहरा ने राष्‍ट्रपति अशरफ गनी को कहा, ‘हम विभिन्‍न तरीकों से आपकी सहायता जारी रखेंगे।‘

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से कर दिया इन्कार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया जिसमें दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के कर्जदाता को ब्याज के रूप में 60 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया गया था।
दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लाइन के संयुक्त उद्यम में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर साझीदार थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने डीएमआरसी को हालांकि धनराशि का भुगतान करने के लिए एक और हफ्ते का समय दे दिया।
दरअसल, पंचाट ने 11 मई, 2017 को अपने एक फैसले में डीएमआरसी को आदेश दिया था कि वह दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को 4,670 करोड़ रुपये का भुगतान करे।
डीएएमईपीएल ने ही दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का निर्माण किया था। यह रिलांयस इंफ्रास्ट्रक्चर की सब्सिडिरी कंपनी है, लेकिन रिलांयस ने 2013 में खुद को एयरपोर्ट मेट्रो से अलग कर लिया था।
इसके बाद डीएएमईपीएल ने नीति आयोग के 2016 के दिशा-निर्देशों के अनुसार 75 प्रतिशत रकम के भुगतान की मांग करते हुए हाई कोर्ट की शरण ली थी।
पंचाट न्यायाधिकरण ने उसे 13.5 प्रतिशत की ब्याज दर से 2,782.33 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट में डीएमआरसी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा ने कहा कि पंचाट का फैसला 90 दिनों तक लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि पीड़ित पक्ष को यह समय फैसले को चुनौती देने के लिए दिया गया है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट उनकी दलील से सहमत नहीं हुआ।

थम नहीं रहा किसानों की आत्महत्या का सिलसिला

कर्ज से परेशान किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है। 16 जून को होशंगाबाद के रंढाल गांव में खुद को आग लगाने वाले किसान बाबूलाल पिता बालकृष्ण वर्मा की मौत हो गई। गंभीर हालात में उनका भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज चल रहा था। उधर नरसिंहपुर के धमना गांव में लक्ष्मी प्रसाद पिता टीकाराम लोधी (70) ने जहर की गोलियां खा ली, जिसके बाद गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां इलाज के दौरान किसान की मौत हो गई।
किसान पर था कर्ज
आत्मदाह करने वाले बाबूलाल पर करीब 7 लाख का कर्जा था। जिन लोगों से उसने कर्ज लिया था वे आए दिन तकाजा कर रहे थे। 15 जून को उसे कर्ज देने वाले घर पहुंचे और गाली-गलौज कर अपमानित किया। जिससे उसके परिवार में कलह मची और उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। बाबूलाल का बयान लेने वाले तहसीलदार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कर्ज और कलह के कारण उसने आत्मदाह किया।
मकान बनाने 10 फीसदी पर कर्ज
छोटे भाई छोटेलाल वर्मा और पड़ौसी हरिशंकर साहू ने बताया बाबूलाल के ऊपर करीब 7 लाख का कर्ज था। ये पैसा उसने दो सूदखोरों और 50 हजार रुपए बैंक से ले रखा था। सूदखोरों से उसने 10 फीसदी ब्याज पर रूपया लिया था। इन पैसों से उसने मकान बनवाया था। बताया जा रहा है कि मकान बनाने के बाद से पैसा देने वाले ज्यादा परेशान कर रहे थे।