उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग ने सेना प्रमुख ह्वांग प्योंग को कर दिया बर्खास्त

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने सेना प्रमुख ह्वांग प्योंग सो को बर्खास्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि वह रिश्वत लेते पकड़े गए थे। ह्वांग को भ्रष्टाचार के चलते पद से हटाए जाने की खबर सबसे पहले दक्षिण कोरियाई मीडिया ने दी थी। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि कर दी।
उत्तर कोरिया ने गुरुवार को सेना के स्थापना दिवस पर सैन्य परेड के जरिये अपनी ताकत दिखाई थी। राजधानी प्योंगयांग में हुई इस परेड में सशस्त्र बलों के मंत्री किम जोंग गैक को वाइस मार्शल और सेना के जनरल पॉलिटिकल ब्यूरो के निदेशक के तौर पर पेश किया गया। पहले यह पद ह्वांग के पास था।
जनरल पॉलिटिकल ब्यूरो उत्तर कोरिया की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था है। करीब 13 लाख सैनिकों वाली उत्तर कोरिया की सेना के अधिकारियों की तैनाती यही करती है। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी के अनुसार ह्वांग को जांच के बाद हटाया गया और उन्हें दोबारा शिक्षा के लिए सैन्य स्कूल भेजा गया है।

सरकार का इरादा 2030 तक केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पक्की करना

एक तरफ सरकार का इरादा वर्ष 2030 तक केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पक्की करना है और दूसरी तरफ उस साल तक देश में पेट्रोल और डीजल की खपत मौजूदा स्तर से दोगुनी हो जाने की संभावना है। तेल व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों के दाम किफायती स्तर पर आने में बहुत समय लगेगा।
फिलहाल इनके दाम कीमतों के प्रति संवेदनशील आम भारतीयों के लिए ज्यादा हैं। ऐसे में कम से कम अगले एक दशक तक देश में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की मांग बनी रहेगी। कारों और स्कूटरों की जोरदार बिक्री होती रहेगी।
वुड मैकेंजी के एशिया रिफाइनिंग रिसर्च प्रमुख सुरेश शिवानंदम ने कहा, “सरकार 2030 तक 100 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री का लक्ष्य लेकर चल रही है। बावजूद इसके हमारा अनुमान है कि 2030 तक वहां पेट्रोलियम की मांग बढ़ती रहेगी। उसके बाद ही मांग घटना शुरू होगी।” पेट्रोलियम योजना व विश्लेषण प्रकोष्ठ का अनुमान है कि पेट्रोल और डीजल की खपत के मामले में सबसे तेज ग्रोथ वाले देश भारत में 2030 तक इन ईंधनों की मांग दोगुनी हो जाएगी।
वुड मैकेंजी का भी यही मानना है। तब केवल डीजल की मांग ही करीब एक तिहाई बढ़कर 11.3 करोड़ टन के स्तर पर पहुंच जाएगी। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मंत्री इलेक्ट्रिक वाहनों के लक्ष्य की बात कर रहे हैं, लेकिन गौर करने वाली बात है कि यह लक्ष्य हासिल करने के लिए अब तक कोई आधिकारिक नीति नहीं तैयार की गई है।
शिवानंदम ने कहा, “सरकार ने अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर कोई नीति पत्र जारी नहीं किया है। इससे पता चलता है कि सरकार इस लक्ष्य को लेकर कितना गंभीर है।”
भारत में लोगों की आय निरंतर बढ़ रही है। इसकी बदौलत लोग डीजल और पेट्रोल से चलने वाली कारें और स्कूटर खरीदने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। 31 मार्च को खत्म वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान भारत में 1.75 करोड़ से ज्यादा स्कूटर और मोटसाइकिलों की बिक्री हुई थी। पिछले 4 साल की अवधि में 3 साल ऐसे रहे, जब इनकी बिक्री में सालाना करीब 7 फीसदी इजाफा हुआ। इसके अलावा पिछले 2 वर्षों के दौरान कारों की बिक्री सालाना 7 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का भी आकलन है कि वर्ष 2030 तक भारत तेल की वैश्विक मांग का केंद्र रहेगा। इस एजेंसी का मानना है कि भारत की इलेक्ट्रिक वाहन योजना महत्वाकांक्षी है।

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा जिसने दिल्ली के जिंदा आदमी को मृत बताकर लाखों का क्लेम उठाया

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है, जिसने दिल्ली के जिंदा आदमी को मृत बताकर बीमा कंपनियों से लाखों का क्लेम उठा लिया। यह सारा खेल उस जिंदा आदमी और उसकी पत्नी की मिलीभगत से किया गया। गिरोह में सरकारी डॉक्टर, वकील, बैंककर्मी और पुलिसकर्मी शामिल हैं। ये सभी क्लेम के लिए जरूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लेकर सभी तरह के फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक उमेश मिश्रा ने बताया कि इस गिरोह में बीमा सर्वेयर रघुराज सिंह, यश चौहान, बैंककर्मी राजेश कुमार, सरकारी अस्पताल का वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी सतीश कुमार खंडेलवाल, वकील चतुर्भुज मीणा और राजस्थान पुलिस का सहायक पुलिस अधिकारी रमेश चंद्र शामिल हैं।
दरअसल कुछ समय पहले एक पुलिस वाले ने इनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि एक ऐसी एफआईआर की जांच रिपोर्ट मांगी गई है, जो अपराध उनके थाना क्षेत्र में हुआ ही नहीं और न ही उससे जुड़ी कोई एफआईआर उनके हस्ताक्षर से जारी हुई है।
मामले की जांच स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने की तो दिल्ली निवासी जिस जितेंद्र सिंह के नाम पर बीमा की रकम उठाने के लिए यह फर्जी एफआईआर की कॉपी जारी की गई थी, वह जिंदा निकला। वह दिल्ली में ऑटो चला रहा था और उसकी पत्नी सुधा के हवाले से उसे मृतक बताकर इस बीमा की रकम उठाई गई थी।
एसओजी ने जांच में पाया कि आरोपियों ने जितेंद्र सिंह के नाम पर बिरला सन लाइफ, बजाज आलियांज, रेलिगेयर और करूर वैश्य बैंक में लाखों रुपए का जीवन बीमा करवा रखा था। इसमें बजाज इंश्योरेंस से 12 लाख और जीवन ज्योति बीमा पॉलिसी के 2 लाख रुपए उठाने के साथ इन्होंने प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा योजना से 2 लाख रुपए का क्लेम उठा भी लिया गया था।
बाकी इंश्योरेंस कंपनी से रुपए उठाने के लिए जितेंद्र सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे जाली दस्तावेज जमा करवाए जा चुके थे। जब एक बीमा कंपनी ने अपने सर्वेयर यानी इन्वेस्टिगेशन एजेंसी से कागजों की जांच करवाई तो यह पूरा घपला सामने आया।
पूरे मामले में एक छोटी सी गलती ने इन्हें पकड़वा दिया। इन्होंने पोस्टमार्टम और एफआईआर रिपोर्ट कंप्यूटर से निकालने के बजाय हाथ से लिखी और जल्दबाजी में डॉक्टर ने शव की लोकेशन भी दो अलग-अलग जगह पर बता दी।
पुलिस के अनुसार, सर्वेयर रघुराज सिंह इस गिरोह का मास्टरमाइंड था, जिसने अपने साथी यश चौहान के साथ मिलकर दौसा के एडवोकेट चतुर्भुज मीणा, डॉ. सतीश कुमार खंडेलवाल और दौसा कोतवाली में तैनात रमेश चंद्र के साथ षड्यंत्र करके जितेंद्र सिंह की सड़क दुर्घटना में मृत्यु की फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस रोजनामचे की फर्जी नकल रपट और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवा लिया। इसके बाद जितेंद्र की पत्नी सुधा के साथ मिलकर दो-तीन जगहों से कुल 16 लाख रुपए उठाकर आपस में बंटवारा कर लिया।
अब तक की जांच में यह बात भी सामने आई है कि रामगढ़ इलाके में भी इन्होंने फर्जी पोस्टमार्टम करवाकर कैंसर पीड़ित मृत व्यक्ति को सड़क दुर्घटना में मरना बताकर झूठा क्लेम उठाने की कोशिश शुरू कर दी थी। अब ये सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और दिल्ली के ऑटो ड्राइवर जितेंद्र सिंह और उसकी पत्नी सुधा की तलाश की जा रही है।

छत्तीसगढ़ का सकल घरेलू उत्पाद 6.65 फीसद बढ़ोतरी का अनुमान

छत्तीसगढ़ का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसपीडी) 2017-18 में 6.65 फीसद बढ़ोतरी का अनुमान है। 2016-17 में यह 8.41 फीसद रही। इसके बावजूद राज्य के जीएसपीडी की दर में औसत 6.31 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह प्रति व्यक्ति आय में 9.22 फीसद की बढ़ोतरी के साथ इसके 92035 रहने का अनुमान है।
योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री पुन्नालाल मोहले ने शुक्रवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2017-18 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। सकल राज्य घरेलू उत्पाद की प्रगति सकल राज्य घरेलू उत्पाद के अग्रिम अनुमान वर्ष 2016-17 के 2,13,649 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 2,27,866 करोड़ स्र्पए संभावित है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 6.65 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।
सकल राज्य घरेलू मूल्यवर्धन (आधार मूल्य पर) कृषि व संबद्ध क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, मछलीपालन एवं वन) में 2.89 प्रतिशत, उद्योग क्षेत्र (निर्माण, विनिर्माण, खनन एवं उत्खनन, विद्युत, गैस तथा जल आपूर्ति सम्मिलित ) में 5.84 प्रतिशत एवं सेवा क्षेत्र में 9.46 प्रति वृद्धि अनुमानित है।
प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2016-17 के त्वरित अनुमान के अनुसार 84,265 रूपए से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 92035 रूपए होना अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.22 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।
राज्य घरेलू उत्पाद के त्वरित अनुमान, वर्ष 2015-16 के 1,97,069 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2016-17 में स्र्पए 2,13,649 करोड़ आंकलित है। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 8.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
अग्रिम अनुमान वर्ष 2017-18 में प्रचलित भावों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (बाजार मूल्य) वर्ष 2016-17 के 2,62,263 करोड़ से बढ़कर 2,91,681 करोड़ स्र्पए होना संभावित है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 11.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सकल राज्य घरेलू मूल्यवर्धन (आधार मूल्य पर) कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, मछलीपालन एवं वन) में वर्ष 2016-17 में 53,005 करोड़ से बढ़कर 60,591 करोड़, उद्योग क्षेत्र (निर्माण, विनिर्माण, खनन एवं उत्खनन, विद्युत, गैस तथा जल आपूर्ति सम्मिलित) में 1,04,263 करोड़ से बढ़कर 1,12,140 करोड़ और सेवा क्षेत्र में 89,270 करोड़ से बढ़कर 1,00,685 करोड़ होना संभावित है। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में प्रतिशत वृद्धि क्रमश: 14.31 प्रतिशत, 7.56 प्रतिशत एवं 12.79 % अनुमानित है।

मानक ब्यूरो का महकमा इसलिए हैरान-परेशान कि उसका जनता से जुड़ाव नहीं हो पा रहा

मध्यप्रदेश में भारतीय मानक ब्यूरो का महकमा इसलिए हैरान-परेशान है कि उसका जनता से जुड़ाव नहीं हो पा रहा। बोतलबंद पानी से लेकर दैनंदिनी उपयोग की ढेरों वस्तुओं में घटिया क्वालिटी और फर्जी आईएसआई मार्का जैसे मामले सामने आते हैं पर ब्यूरो को फीडबैक नहीं मिलता। हालत यह है कि सात करोड़ से अधिक आबादी के बावजूद मप्र से सालभर में मात्र 3 शिकायतें ही मिलीं। इनमें दो ‘इनपुट” व्यापारिक प्रतिस्पर्धियों के थे।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि उन्हें जनता से फीडबैक नहीं मिलता, इसके लिए ब्यूरो ने अब तक क्या प्रयास किए? इसके जवाब में विभागीय अफसरों का एक ही जवाब है कि हम जनता से अपील करते हैं। जागो ग्राहक जागो वाला विज्ञापन भी कभी-कभार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिखा दिया जाता है। इसके अलावा मानक ब्यूरो और उपभोक्ताओं के बीच किसी तरह का संवाद नहीं होता। हालत यह है कि मानक ब्यूरो का कार्यालय तक राजधानी में अपनी पहचान का मोहताज है। औद्योगिक प्रतिष्ठान के ऐसे लोग जिनका यहां काम अटकता है वे ही पूछताछ करते हुए कार्यालय तक पहुंचते हैं।
बताया जाता है कि ब्यूरो की ओर से जनजुड़ाव के लिए कोई पहल नहीं की जाती। ब्यूरो किस तरह काम काज करता है इसके बारे में भी लोगों को जानकारी बहुत कम रहती है। नकली सामान अथवा फर्जी आईएसआई मार्का के मामले बाजारों में रहने के बावजूद ब्यूरो तक नहीं पहुंच पाते। इसके अलावा कौन पचड़े में पड़े यह सोचकर भी लोग फीडबैक देने अथवा शिकायत करने से बचते हैं।
ब्यूरो की प्रमुख प्रीति भटनगार ने बताया कि इस साल कुल तीन शिकायतें ही मिलीं। विभाग का ऐसा कोई सूचना तंत्र नहीं है। जिससे मार्केट की खबरें उस तक निरंतर पहुंचती रहें। इस साल जो तीन सूचनाएं मिलीं उन पर छापे की कार्रवाई की गई। इनमें भोपाल में पुराने कबाड़खाने में पानी के कारोबारी का मामला भी था। फर्जी आईएसआई मार्का एवं बिना लाइसेंस के मार्का लगाने के प्रकरण भी दर्ज किए गए।