मैं अपना जीवन फिल्मी दुनिया में नहीं बिताना चाहती। मुझे खेल पसंद है

फ्रांस की खूबसूरत टेनिस खिलाड़ी क्रिस्टिना म्लादेनोविच जानती हैं कि सुंदरता के कारण हमेशा प्रशंसकों और मीडिया का ध्यान उनकी ओर रहता है, लेकिन फिल्मी दुनिया में जाने का उनका कोई इरादा नहीं है।
पिछले सप्ताह सेंट पीट्सबर्ग ओपन टेनिस टूर्नामेंट के मैच में म्लादेनोविच ने डॉमिनिका चिबुल्कोवा को सीधे सेटों में हराया था। इसके बाद वे पत्रकारों से चर्चा के दौरान वे तब हैरान रह गईं, जब एक पत्रकार ने उनकी खूबसूरती की तारीफ करते हुए पूछा कि क्या फिल्मी दुनिया में कदम रखने का उनका इरादा है।
इसपर म्लादेनोविच ने कहा- तारीफ के लिए शुक्रिया। टेनिस खिलाड़ी यदि कोर्ट पर सुंदर दिखती हैं तो यह अच्छी बात है। जहां तक मेरी बात है तो मैं अपना जीवन फिल्मी दुनिया में नहीं बिताना चाहती। मुझे खेल पसंद है और मैं टेनिस करियर पर ही ध्यान केंद्रित कर रही हूं। हालांकि मैं अपनी फिटनेस और खेल दोनों पर समान रूप से ध्यान देती हूं।
24 साल की म्लादेनोविच ऑस्ट्रिया के सितारा टेनिस खिलाड़ी डॉमिनिक थिएम के साथ डेटिंग कर रही हैं। लंबे समय से थिएम उनके पसंदीदा हीरो हैं।
उन्होंने कहा- मैं फिल्में देखती हूं और कई फिल्में पसंद हैं। मेरी पसंदीदा अभिनेत्री जुलिया रॉबर्ट्स हैं। जहां तक पसंदीदा हीरो की बात है तो वह मेरे बॉयफ्रेंड थिएम हैं। मैं उनके साथ खुश हूं। वे मुझे बहुत प्यार करते हैं और उनकी नजर में मैं बहुत खूबसूरत हूं। यह मेरे लिए सबसे खुशी की बात है।

जमानत का आदेश तक हो गई मौत

उसे सीने में दर्द की शिकायत थी। जमानत के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अर्जी लगाई थी। कोर्ट से जमानत का आदेश भी जेल अधिकारियों तक पहुंच गया, लेकिन उसके चार घंटे पहले ही 54 वर्षीय दालचंद मौर्य की मौत हो गई।
मुरादाबाद की जिला जेल में गुरुवार को प्राकृतिक कारणों से उसकी मौत हो गई। वह हत्या की कोशिश के मामले में जेल में बंद था। दालचंद की मौत होने के करीब चार घंटे बाद जेल अधिकारियों को अदालत का आदेश मिला, जिसमें मौर्या को रिहा करने का आदेश दिया गया था।
संभल में हयात नगर के रहने वाले किसान मौर्या और उनके चार रिश्तेदारों को पुलिस ने सितंबर 2016 में गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ चांदौसी के निवासी राम प्रसाद ने एफआईआर दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि मौर्या और उनके चार साथियों ने उन पर गोली चलाई थी।
इस हमले में राम प्रसाद के भाई पप्पू घायल हो गए थे और उनकी रीढ़ की हड्डी में गोली लगी थी, जिससे वह लकवा ग्रस्त हो गए थे। चंदौसी की अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश में मामले की सुनवाई चल रही है। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 जनवरी को मौर्य को जमानत दे दी।
जेलर राजेंद्र सिंह ने कहा कि मौर्य ने छाती में दर्द की शिकायत की थी। उन्हें जेल अस्पताल में भेजा गया, जहां से उन्हें मुरादाबाद जिला अस्पताल भेजा गया था, जहां उनकी मौत हो गई।
मौर्य के छोटे भाई ठाकुरदास ने कहा कि बुधवार की शाम को दालचंद को रिहा करने का आदेश जारी किया गया था। मगर, यह आदेश गुरुवार सुबह तक जेल नहीं पहुंचा और जब यह आया, तब बहुत देर हो चुकी थी।

नैरो गेज वाले ट्रैक का इस्तेमाल करने वाली भारतीय रेलवे हर साल देती है 1.20 करोड़ रुपए की रॉयल्टी

यूं तो भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था, लेकिन देश के एक हिस्से पर आज भी ब्रिटेन का कब्जा है। यहां से हर साल 1.20 करोड़ की रॉयल्टी ब्रिटेन को जाती है। अगर आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है दरअसल, ऐसी रेल लाइन है, जिसका मालिकाना हक भारतीय रेलवे की जगह ब्रिटेन की एक निजी कंपनी के पास है।
नैरो गेज वाले इस ट्रैक का इस्तेमाल करने वाली भारतीय रेलवे हर साल 1.20 करोड़ रुपए की रॉयल्टी ब्रिटेन की एक प्राइवेट कंपनी को देती है। इस रेल ट्रैक पर शकुंतला एक्सप्रेस पैसेंजर ही चलती है। अमरावती से मुर्तजापुर के 189 किलोमीटर का सफर अधिकतम गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूरा करती है।
शकुंतला एक्सप्रेस पहली बार 2014 में और दूसरी बार अप्रैल 2016 में बंद किया गया था। मगर, स्थानीय लोगों की मांग और सांसद आनंद राव के दबाव में सरकार को फिर से इसे शुरू करना पड़ा। राव का कहना है कि, यह ट्रेन अमरावती के लोगों की लाइफ लाइन है। उन्होंने इसे ब्रॉड गेज में कन्वर्ट करने का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को भेजा है।
भारत सरकार ने इस ट्रैक को कई बार खरीदने का प्रयास भी किया, लेकिन तकनीकी कारणों से वह संभव नहीं हो सका। आज भी इस ट्रैक पर ब्रिटेन की इस कंपनी का कब्जा है। इसके देख-रेख की पूरी जिम्मेदारी भी इसपर ही है। हर साल पैसा देने के बावजूद यह ट्रैक बेहद जर्जर है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि, पिछले 60 साल से इसकी मरम्मत भी नहीं हुई है। सात कोच वाली इस पैसेंजर ट्रेन में रोजाना एक हजार से ज्यादा लोग यात्रा करते हैं।
बताते चलें कि अमरावती से कपास मुंबई पोर्ट तक पहुंचाने के लिए अंग्रेजों ने इस ट्रैक का निर्माण करवाया था। साल 1903 में ब्रिटिश कंपनी क्लिक निक्सन की ओर से शुरू किया गया रेल ट्रैक को बिछाने का काम 1916 में पूरा हुआ। 1857 में स्थापित इस कंपनी को आज सेंट्रल प्रोविन्स रेलवे कंपनी के नाम से जाना जाता है। साल 1951 में भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण करने के बावजूद सिर्फ यही रूट भारत सरकार के अधीन नहीं था।
100 साल पुरानी 5 डिब्बों की इस ट्रेन को 70 साल तक स्टीम का इंजन खींचता था, जिसे 1921 में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में बनाया गया था। हालांकि, 15 अप्रैल 1994 को शकुंतला एक्प्रेस के स्टीम इंजन की जगह डीजल इंजन का इस्तेमाल किया जाने लगा। इस रेल रूट पर लगे सिग्नल आज भी ब्रिटिशकालीन हैं। इनका निर्माण इंग्लैंड के लिवरपूल में 1895 में हुआ था।

पकौड़ा बेचने वाले कथनों को कांग्रेस ने शर्मनाक बताया

विधानसभा में भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा के पकौड़ा बेचने वाले कथनों को कांग्रेस ने शर्मनाक बताया है। विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि अगर, पकौड़ा बेचना इतना ही अच्छा है तो क्यों मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, विधायक शिवरतन शर्मा और भाजपा के अन्य नेता अपने बेटों को इस काम में नहीं लगा देते हैं?
बघेल का कहना है कि प्रधानमंत्री से लेकर छत्तीसगढ़ में भाजपा के विधायकों ने शिक्षित बेरोजगारों का मजाक बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही देश के युवाओं को हर साल दो करोड़ को रोजगार देने का भरोसा दिलाया था। आज पकौड़ा से रोजगार हासिल करने की बात कह रहे हैं।
बघेल का कहना है कि युवा रातभर जगकर पढ़कर पढ़ाई करता है। माता-पिता अपना पेट काटकर बच्चों की फीस जमा करते हैं, तब जाकर युवा इंजीनियर, डॉक्टर बनता है, इनसे प्रधानमंत्री और छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता कहते हैं, पकौड़ा बेचो।
बघेल ने यह सवाल भी किया है कि पकौड़ा बनाने में सरकार का क्या योगदान है, जिससे रोजगार की बात कही जा रही है। पकौड़ा तो अशिक्षित, गृहिणियां भी बना लेती हैं, इसमें सरकार का क्या योगदान है?
बघेल का कहना है कि जब युवाओं से पकौड़ा ही बिकवाना है तो अरबों खर्च कर शुरू किए गए इंजीनियरिंग, मेडिकल, एमबीए, आईटीआई जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों को बंद कर देना चाहिए। प्रदेश के तीन हजार स्कूल तो सरकार पहले ही बंद करा चुकी है।
कांग्रेस के संचार विभाग के चेयरमेन शैलेश नितिन त्रिवेदी का कहना है कि पकौड़ा को कौशल विकास कार्यक्रम में शामिल करने का विधायक शिवरतन शर्मा का बयान बेरोजगार युवाओं का मजाक उड़ाने वाला है।

सपना था युवाओं के लिए कुछ करूं दूसरे शहरों के युवा भी खरीदते हैं उनकी पुस्तकें

मेरा सपना था कि युवाओं के लिए कुछ करूं। चूंकि मैं एक अंग्रेजी का शिक्षक हूं। इसलिए चाहता था कि कुछ ऐसी किताबें लिखूं, जिन्हें पढ़कर बच्चों को आसानी से अंग्रेजी का ज्ञान मिल सके। उनके लिए रोजगार की राह आसान हो सके। लेकिन 25 साल पहले एकाएक मेरी आंखों की रोशनी चली गई। तब मैं यह सोचकर बहुत निराश और दुखी हुआ कि शायद मेरा यह सपना अब पूरा न हो, लेकिन परिवार के लोगों ने हिम्मत बंधाई। मैंने भी हौसला किया और अंग्रेजी की पांच किताबें लिख डालीं।
यह कहानी है ग्वालियर के 71 वर्षीय एसबी गोयल की। श्री गोयल द्वारिकापुरी में रहते हैं। उनकी आंखें नहीं हैं, लेकिन वह अपने ज्ञान से बच्चों और युवाओं की जिंदगी को रोशन बना रहे हैं। किताबें लिखने के अलावा पिछले 50 सालों से इंग्लिश की कोचिंग भी संचालित कर रहे हैं और लगभग 5 लाख लोगों को वो इस भाषा की शिक्षा दे चुके हैं। गरीब बच्चों को उनके द्वारा नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है और सामाजिक कार्यों में भी योगदान दिया जाता है।
बातचीत करते हुए एसबी गोयल ने बताया कि उनके नानाजी की आंखों की रोशनी भी अपने आप चली गई थी। इसी तरह उनके दोनों भाइयों की आंखों की रोशनी भी चली गई है। आंखों की रोशनी के बाद वो डॉक्टर के पास गए। इलाज भी कराया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
श्री गोयल ने बताया कि पिछले 50 वर्षों से वो इंग्लिश की कोचिंग चला रहे हैं। पहले सरार्फा बाजार के निकट डीडवानाओली में कोचिंग करत थे। इसके बाद द्वारिकापुरी में अपने निवास पर शिक्षा देने लगे। अभी तक वह 5 लाख से अधिक युवाओं को इंग्लिश सिखा चुके हैं।
श्री गोयल ने बताया कि आज भी उन्हें इंग्लिश की 25 से 30 पुस्तकें मौखिक याद हैं। कोचिंग में आने वाले युवाओं को वह मौखिक रूप से बता देते हैं कि किस पेज नंबर पर क्या दिया गया है।
श्री गोयल द्वारा लिखी गईं पुस्तकें मार्केट में उपलब्ध हैं। दूसरे शहरों के युवा भी इंग्लिश सीखने के लिए इन पुस्तकों को खरीदते हैं। इसके अलावा इंग्लिश की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी दूसरे स्थानों से युवा यहां आते हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तकों को लिखने में उनके पुत्र मनोज गोयल ने सहयोग किया। उनके दोनों बेटे प्रवीण गोयल, मनोज गोयल और नाती अभिनव गोयल भी इंग्लिश की शिक्षा प्रदान करते हैं।
ये हैं 5 पुस्तकें
1. ट्रेजर ऑफ मॉडर्न इंग्लिश
2. ट्रेजर एंड प्लेजर
3. ग्रेट ट्रेजर ऑफ स्पोकन इंग्लिश
4. ट्रेजर ऑफ एडवांस इंग्लिश ग्रामर 5. द प्लेजर ऑफ इंग्लिश स्पीकिंग आदि पुस्तकें पढ़ सकते हैं।
नामीगिरामी लोगों को दी शिक्षा
श्री गोयल से शहर के कई प्रसिद्ध व्यक्ति अंग्रेजी की शिक्षा ले चुके हैं। इनमें एडवोकेट टीसी बंसल, एडवोकेट राजमणि बंसल, देव मणि बंसल, महेश हासवानी, सुरेश हासवानी, डॉ. प्रदीप घोडगे, एडवोकेट समीर जैन, डॉ. राकेश कंचन निर्मला कंचन, सतेन्द्र दुबे सहित कई अन्य व्यक्ति शामिल हैं। ये सभी व्यक्ति अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छे पदों पर आसीन हैं।