ऑस्ट्रेलियाई ओपन से बाहर रही भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने कहा चोट से निपटना बेहद चुनौतीपूर्ण

चोट के कारण ऑस्ट्रेलियाई ओपन से बाहर रही भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने कहा कि उनके लिए यह इस चोट से निपटना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
पिछले साल (2017) ऑस्ट्रेलियाई ओपन के मिश्रित युगल में उपविजेता और 2016 में महिला युगल की विजेता रही सानिया ने कहा- चोट के दौरान सबसे मुश्किल मानसिक चुनौती से निपटना होता है। ऑस्ट्रेलियाई ओपन में नहीं खेलना और टेलीविजन पर उसे देखना काफी मुश्किल था। एक खिलाड़ी के तौर पर यह स्वीकार करना की आप नहीं खेल सकते काफी तकलीफदेह होता है। जब आप संन्यास लेते है तो स्थिति थोड़ी अलग होती है। यह पहली बार नहीं है जब मैं चोटिल हुई हूं। इससे पहले भी मेरी 3 बार सर्जरी हुई है, एक खिलाड़ी के तौर पर मैं इसकी अभ्यस्त हूं। मेरे लिए यह मानसिक चुनौती की तरह है, क्योंकि मैं घर में होती हूं और लगता है कि कुछ कर ही नहीं पा रही हूं।
साल के दूसरे ग्रैंड स्लैम फ्रेंच ओपन में वापसी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा- उम्मीद है अगले ग्रैंड स्लैम में वापसी होगी, लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि यह मेरे हाथ में नहीं है। अगले ग्रैंड स्लैम में अभी थोड़ा समय है देखते है क्या होता है। अभी इस बारे में पूरी तरह कुछ भी नहीं पता कि कोर्ट में कब तक वापसी करूंगी।
उन्होंने कहा- मैं अभी लगभग दो महीने तक कोर्ट से दूर रहूंगी। सर्जरी के बाद भी इस बात की गारंटी नहीं की यह पूरी तरह ठीक हो। मैं पिछले दो साल से इस चोट के साथ खेल रही थी। इस बीमारी को जंपर्स नी (घुटने में दर्द संबंधी) कहा जाता है। दर्द इतना बढ़ गया था कि मुझे खेल से ब्रेक लेना पड़ा । यह अब ठीक हो रहा, मैं चाहूंगी कि यह जल्दी ठीक हो लेकिन ऐसा नहीं हो रहा, जो मेरे लिए थोडा हतोत्साहित करने वाला है। हां अभी भी दो महीने का समय लगेगा।
एशियाई खेलों में देश को कई पदक दिलाने वाली सानिया से जब जकार्ता में इस होने वाले इन खलों में खेलने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- जहां तक एशियाई खेल का सवाल है मैंने पहली बार 2002 में इसमें भाग लिया था। उस वक्त मेरी उम्र 15 साल थी यह काफी लंबा सफर रहा है और अगर मौका मिला तो फिर इसमें खेलना और देश के लिए पदक जीतना चाहूंगी। मैं जब भी इसमें खेली हूं पदक जीतने में कामयाब रही हूं। सुपरटेक स्पोर्ट विलेज में अपनी टेनिस अकादमी से जुड़े कार्यक्रम में यहां पहुंची सानिया ने कहा कि नए खिलाड़ियों के लिए ये जरूरी नहीं की वे किस अकादमी में खेल रहे, सबसे पहले यह जरूरत इस बात की है कि खेल संस्कृति का निर्माण हो। खेल सिर्फ चैंपियन बनाने के लिये नहीं होते यह जिंदगी के हर क्षेत्र में सिख देने वाला होता है।

परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट से चिढ़ गए चीन और रूस

परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट से चीन और रूस चिढ़ गए हैं। दोनों ने ही अमेरिकी दावों को गलत बताया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने परमाणु हथियारों के भंडार में बढ़ोतरी कर रहा है जबकि रूस अपने परमाणु आयुधों को कम करना नहीं चाहता। रूसी हथियार दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
चीन ने कहा है कि अमेरिका दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने परमाणु हथियारों को कम करे जिसके लिए उसने संकल्प जताया है।
चीनी रक्षा मंत्रालय के अनुसार उसकी सैन्य गतिविधियां पूरी तरह से सुरक्षात्मक हैं और परमाणु हथियारों की भी उतनी ही संख्या है जितनी उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है।
बयान में कहा गया है कि अमेरिका शीत युद्ध काल की अपनी मानसिकता में बदलाव लाए और परमाणु निशस्त्रीकरण की अपनी जिम्मेदारी को निभाए।
अमेरिका ने परमाणु हथियारों पर समीक्षा रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की है। रूस ने भी अमेरिकी रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपने परमाणु हथियारों की संख्या कम करने से इन्कार कर दिया है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया में कहा है कि रिपोर्ट में अमेरिका का रूस विरोधी रुख साफ नजर आ रहा है। रिपोर्ट में झूठे तथ्यों के आधार पर दावे किए गए हैं जो रूस को अस्वीकार्य हैं।
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस लगातार परमाणु शस्त्रों के नियंत्रण के समझौते का उल्लंघन कर रहा है। उल्लेखनीय है कि रूस के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं।
पूर्व में हुए एक समझौते के तहत रूस और अमेरिका ने अपने-अपने परमाणु हथियार नष्ट किए थे लेकिन अभी भी दोनों के पास 14 हजार से ज्यादा परमाणु हथियार मौजूद हैं जो दुनिया को कई बार नष्ट कर सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ व राजौरी जिलों में अकारण भारी गोलाबारी

पाकिस्तानी सेना ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ व राजौरी जिलों में नियंत्रण रेखा पर फिर अकारण भारी गोलाबारी की। इसकी चपेट में आने से गुरुग्राम के एक युवा कैप्टन, मप्र के ग्वालियर के राइफलमैन रामअवतार समेत चार सैन्यकर्मी शहीद हो गए। भारतीय सेना ने पाक सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया। दोनों ओर से गोलाबारी रविवार रात तक जारी रही। तीन जवान व दो नागरिक घायलपाक फायरिंग में सेना के दो जवान, सीमा सुरक्षा बल का एक एएसआई और दो स्थानीय नागरिक घायल हो गए।
बीएसएफ की 126वीं बटालियन के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) आजाद सिंह को गंभीर हालत में सैन्य अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि गोलाबारी की शुरुआत सुबह 11 बजे के आसपास पुंछ के शाहपुर सेक्टर में हुई इसके बाद दोपहर 3.40 बजे राजौरी जिले के मंजाकोट में गोले दागे। पुंछ के शाहपुर सेक्टर में हुई गोलाबारी के दौरान गुलजान व यासिन आरिफ के अलावा सेना का एक जवान किशोर कुमार घायल हो गए।
पाक गोलाबारी में शहीद सेना की 15 जैकलाई यूनिट के कैप्टन कपिल कुंडू निवासी गांव रनसिका, गुरुग्राम (हरियाणा) के निवासी थे। वह 22 साल की उम्र में वीरगति को प्राप्त हुए। छह दिन बाद 10 फरवरी को ही उनका 23वां जन्मदिन था। वहीं ग्वालियर के शहीद रामअवतार 27 साल के थे। वह ग्वालियर के बराका गांव के रहने वाले थे। तीसरे शहीद हवलदार रोशनलाल (42) जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के और शुभम सिंह (23) कठुआ जिले के रहने वाले थे।
सेना के प्रवक्ता ने शहीदों का ब्योदा व उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद कहा, उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। पाक सेना की अकारण गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।सीमा से सटे पांच किमीके क्षेत्र में 84 स्कूल बंदराजौरी जिला प्रशासन ने पाक गोलाबारी को देखते हुए सुंदरबनी से मंजाकोट सेक्टर तक सीमा से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 84 स्कूलों को तीन दिनों तक बंद रखने का आदेश जारी कर दिया है।
जनवरी में भी पाक सेना ने भारी गोलाबारी की थी। इसमें आठ नागरिकों की मौत हो गई थी और छह सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। 70 से ज्यादा लोग घायल भी हो गए थे। 18 से 22 जनवरी तक पाक सेना ने जम्मू, कठुआ व सांबा जिलों की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में भारी गोलाबारी की थी। 22 जनवरी के बाद से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाक सेना खामोश थी, लेकिन नियंत्रण रेखा पर रुक-रुककर गोलीबारी हो रही थी।

अंकित सक्सेना की बर्बर हत्या के बाद तनाव का माहौल

पश्चिमी दिल्ली के ख्याला इलाके में अंकित सक्सेना की बर्बर हत्या के बाद तनाव का माहौल है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में अर्धसैनिक बल तैनाती कर दिए गए हैं। अंकित दूसरे धर्म की एक युवती से प्रेम करता था, लेकिन युवती के परिजन इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे।
पेशे से फोटोग्राफर और यूट्यूब चैनल चलाने वाले 23 साल का अंकित घर के पास रहने वाली दूसरे धर्म की लड़की से प्यार करता था। लड़की के परिवार वालों ने अंकित को उससे दूर रहने की धमकी भी दी। मगर, अंकित ने लड़की से रिश्ता तोड़ने से इंकार कर दिया था। आरोप है कि इसी के चलते अंकित की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई।
पुलिस ने इस हत्या के आरोप में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें से एक नाबालिग है। शनिवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दो आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है जबकि एक किशोर आरोपी को बाल सुधार गृह भेजा गया है।
गुरुवार को अंकित सक्सेना रात करीब 8 बजे स्कूटी से रघुवीर नगर अपने घर जा रहा था। तभी रास्ते में 4 लोगों ने अंकित सक्सेना पर चाकुओं से हमला कर दिया। अंकित को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।स्थानीय लोगों ने एक आरोपी को पकड़ कर उसी समय पुलिस के हवाले कर दिया।
उधर, पुलिस ने अंकित की हत्या के बाद लड़की का बयान लिया, जिसमें उसने दावा किया कि वह अंकित से शादी करना चाहती थी। उसने अपने घरवालों पर अंकित की हत्या का आरोप लगाया और अपने ही परिवार से अपनी जान को भी खतरा बताया है।
वहीं इस मामले में राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। तिवारी ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में ऐसी घटनाएं देखना दुखद है। इस मामले में मुख्यमंत्री और कई एनजीओ की चुप्पी संकेत देती है कि ये लोग किसी मुद्दे पर तभी बोलते हैं जब वह उनके राजनीतिक हित में होता है।
प्रदेश भाजपा ने मांग की है कि केजरीवाल सरकार ने अन्य मामलों में जिस तरह एक करोड़ रुपए की सहायता राशि घोषित की है, उसी तरह अंकित के परिजन के लिए सहायता राशि घोषित करें। अंकित के मामा ने कहा कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है, इंसाफ जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि हत्या के दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

छत्तीसगढ़ में राशन दुकान संचालकों की हुई बैठक

छत्तीसगढ़ में राशन दुकान संचालकों का फेडरेशन बनेगा। इसको लेकर न्यू सर्किट हाउस में रविवार को राशन दुकान संचालकों की एक बैठक हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई और ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रहलाद मोदी भी शामिल हुए।
राशन दुकान संचालकों ने प्रहलाद मोदी को छत्तीसगढ़ में पीडीएस सिस्टम में आ रही समस्याओं की जानकारी दी। वहीं, दस जिलों में फेडरेशन के गठन का काम पूरा कर दिया गया है। संचालकों ने मोदी से चर्चा में कहा कि एक महीने में प्रदेश में राशन दुकान के फेडरेशन के गठन का काम पूरा कर लिया जाएगा।

पैसा नहीं आया तो कंपनी ने लौटा दी किसानों की प्रीमियम

एक तरफ सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की तारीफ करते नहीं थकती, लेकिन दूसरी तरफ मप्र के इंदौर जिले के 636 किसानों की पीड़ा इस योजना की पोल खोल रही है। केंद्र और राज्य सरकार की उलझन से तीन साल पहले नुकसान हुई फसल की बीमा राशि भी किसानों के हाथ में नहीं आई है।
एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया के डाटा में हुई चूक का खामियाजा किसान अब तक उठा रहे हैं। सरकारी सिस्टम की खामी में इन किसानों के 1.34 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं। इंतजार की हद होने के बाद जिले के कम्पेल गांव की सहकारी संस्था के किसानों ने तो केंद्र, प्रदेश और इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लगा दी है।
इंदौर प्रीमियर को-ऑपरेटिव बैंक (आईपीसी) के जरिये सहकारी संस्थाओं से खेती का कर्ज लेने वाले किसानों को इंश्योरेंस कंपनी से बीमा लेना अनिवार्य किया गया था। योजना में वर्ष 2015-16 में भी किसानों ने प्रीमियम राशि जमा की। उस दौरान इंदौर जिले में सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान हुआ। नुकसानी के तौर पर कई किसानों को मुआवजा मिला, लेकिन जिले की इंदौर और महू तहसील के 7 पटवारी हल्कों के विभिन्न गांवों के किसान बीमा राशि से वंचित रह गए।
इनमें कम्पेल, पेड़मी, सिवनी, पिवड़ाय, बावलिया, धमनाय, खुड़ैल खुर्द, पिगडंबर, सोनवाय, भैंसलाय सहित अन्य गांवों के किसान शामिल हैं। कम्पेल सेवा सहकारी संस्था के पूर्व अध्यक्ष रवींद्र दुबे ने बताया कि हमारी सोसायटी के करीब 250 किसानों को फसल बीमा नहीं मिला है। आईपीसी बैंक से बात हुई तो पता चला कि केंद्र और राज्य सरकार का अनुदान नहीं मिला है।
इंतजार करते-करते एक महीने पहले हमने केंद्र व राज्य शासन और इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ हाई कोर्ट में केस लगा दिया है। कंपनी को नोटिस तामील हो गया है। सांसद प्रतिनिधि और आईपीसी बैंक के डायरेक्टर देवराजसिंह परिहार, कंचनसिंह चौहान ने हाल ही में प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। वित्त मंत्री ने बताया कि वे बैंक डायरेक्टरों के साथ भोपाल में इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों से बात कर बीमा राशि मिलने की रुकावट दूर करेंगे। यदि राज्य का हिस्सा नहीं मिला है तो वह दिलवाया जाएगा।
– आईपीसी बैंक ने जिले के सभी ऋ णी किसानों की प्रीमियम इंश्योरेंस कंपनी को भेज दी थी। जब बीमा राशि आई तो कई किसानों के नाम ही नहीं थे। इस पर कंपनी ने बचे किसानों की प्रीमियम राशि बैंक को लौटा दी। इस पर बैंक ने आपत्ति ली तो पता चला कि कंपनी की ओर से डाटा इंट्री और केलकुलेशन में चूक से ऐसा हुआ।
– बैंक ने अपने दस्तावेजी सबूत और डिक्लेयरेशन पेश किए तो कंपनी ने अपनी गलती मानी और वह किसानों की प्रीमियम वापस लेने को तैयार हुई। कंपनी ने गलती सुधारी और फाइल दिल्ली भेजी। बताया जाता है कि अब राज्य का हिस्सा नहीं मिल पा रहा है।
– कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सदाशिव यादव ने बताया कि बैंक का प्रतिनिधि होने के नाते मैंने आमसभा में भी किसानों की समस्या रखी। बैंक प्रबंधन से पूछा कि किसकी गलती से ये हुआ, लेकिन कोई जवाब देने को तैयार नहीं है।
– सिवनी के प्रभावित किसान बच्चन सेठ बताते हैं, हम हर आने वाले मंत्री और अधिकारी को अपनी समस्या बता चुके हैं लेकिन राशि नहीं मिली। यदि ऐसा ही करना है तो सरकार और बैंक हर साल जबर्दस्ती प्रीमियम क्यों जमा कराते हैं।