भारत के लिए बड़ी खुशखबरी 21 साल की आंचल ठाकुर ने स्कीइंग में पहला अंतरर्राष्ट्रीय मेडल जीतकर नया इतिहास रच

फरवरी में दक्षिण कोरिया में होने वाले विंटर ओलिंपिक्स से पहले भारत के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। मनाली की 21 साल की आंचल ठाकुर ने स्कीइंग में पहला अंतरर्राष्ट्रीय मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया।
आंचल की इस कामयाबी पर देश के खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने भी तारीफ की है।
आंचल अंतरर्राष्ट्रीय स्कीइंग चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय हैं। आंचल ने तुर्की के अरजुरुम में हुई अल्पाइन एडर स्कीइंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर ये इतिहास रचा। मेडल जीतने के बाद आंचल ठाकुर ने ट्विटर पर अपनी खुशी का इजहार किया। आंचल ने ट्वीट करते हुए कहा कि- ये वाकई अप्रत्याशित है। मेरा पहला अंतरर्राष्ट्रीय मेडल, जोकि मैंने फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्की रेस में जीता।’
इस जीत के बाद एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में आंचल ठाकुर ने कहा कि आखिरकार कड़ी मेहनत रंग लाई। आंचल ने कहा कि-’ इस चैंपियनशिप के लिए मैंने कड़ी मेहनत की थी। अपनी रेस के दौरान भी मैंने अच्छी शुरुआत की, इसी का नतीजा रहा कि मैं तीसरा स्थान हासिल करने में कामयाब रही।’
आंचल के पिता रोशन ठाकुर भी इस खेल से जुड़े हैं। वो विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल हैं। ऐसे में बेटी को मिली कामयाबी पर पिता भी खुश हैं। उन्होंने कहा कि इस मेडल से देश में इस खेल के हालात बदलेंगे।

करीब 16 साल से फरार एक आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

साल 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार मामले में करीब 16 साल से फरार एक आरोपी को पुलिस ने अहमदाबाद में गिरफ्तार कर लिया। फरार आरोपियों में शामिल आशीष पांडे को अपराध शाखा के अधिकारियों ने बुधवार को शहर के असलाली इलाके से गिरफ्तार किया। पांडे को गुरुवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
आपको बता दें कि अहमदाबाद में एक भीड़ ने 28 फरवरी 2002 को मुस्लिम बहुल कालोनी गुलबर्ग सोसाइटी पर हमला किया था। इसी हमले में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे। यह घटना गोधरा बाद के दंगों के दौरान हुई सबसे भीषण हिंसा में से एक थी।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना के बाद 2002 में दर्ज की गई प्राथमिकी में नामजद किए जाने के बाद से पांडे फरार था। वह अपने परिवार के साथ नरोदा इलाके में रहता था लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग गया। इसके बाद हरिद्वार और वापी सहित कई शहरों में वह रहा। वह परिवहन के धंधे से भी जुड़ा रहा।
पुलिस को पांडे के अपने काम के सिलसिले में शहर में होने की गुप्त सूचना मिली थी। उसे विशेष जांच टीम (एसआइटी) को सौंप दिया गया है। एसआइटी इस मामले की जांच कर रही है।
एक विशेष अदालत ने गुलबर्ग मामले में जून 2016 में 24 लोगों को दोषी ठहराया था और उनमें से 11 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। 36 अन्य को बरी कर दिया था। पांडे की गिरफ्तारी के बाद अब भी चार और आरोपी फरार हैं।

पुलिसकर्मियों की आत्महत्याओं की घटना से सरकार चिंतित

पुलिसकर्मियों की आत्महत्याओं की घटना से सरकार चिंतित है। लिहाजा इस मामले में पुलिस मुख्यालय ने एक अध्ययन कराया गया है। इसमें चौंकाने वाली बात सामने आई है कि करीब दो साल में मप्र पुलिस के 27 कर्मचारियों ने आत्महत्याएं कीं।
इनमें 20 साल की नौकरी पूरी करने वालों की संख्या आधे से ज्यादा है। वहीं पूरी नौकरी में बच्चों-परिवार के बारे में नहीं सोच पाने के तनाव में बीमारियों के कारण तो उनके भविष्य की चिंता में घुट-घुटकर पुलिसकर्मी खुदकुशी कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस मुख्यालय ने एक जनवरी 2016 से 23 दिसंबर 2017 की अवधि में पुलिसकर्मियों द्वारा की गई आत्महत्याओं की घटनाओं का अध्ययन किया है। इसमें पाया गया है कि आत्महत्या करने वाले पांच पुलिसकर्मी वे थे जिनकी पांच साल से भी कम की सेवा थी। पांच से ज्यादा और 20 साल से कम सेवा पूरी करने वाले सात पुलिस वालों ने नशे की लत व बीमारी के कारण खुदकुशी की।
20 साल से ज्यादा सेवा करने के बाद 15 पुलिसकर्मियों ने आत्महत्या कर जीवन समाप्त किया, जिसमें भिंड जिला पुलिस के टीआई से पीड़ित एक हवलदार भी शामिल है। इस अध्ययन में आत्महत्या के कारणों पर भी जानकारी जुटाई गई है। जिसमें पांच साल से कम सेवा करने वालों की खुदकुशी का कारण प्रेम प्रसंग या मनचाही लड़की से शादी नहीं करना भी पाया गया।
नशा व्यक्ति शौकिया करता है, लेकिन शराबी किसी तनाव को भूलने के लिए ही नशा करता है। तनाव से ही बीमारी होती है। पुलिसकर्मियों की आत्महत्याओं का मूल कारण तनाव ही है, जिसके कारण उन्हें नशे की लत पड़ी और बीमारी ने जकड़ लिया। इसलिए तनाव के कारणों को दूर करने का प्रयास होने चाहिए।