अंतिम एकादश में शामिल नहीं किए गए अजिंक्य रहाणे न्यूलैंड्स मैदान पर अभ्यास में पसीना बहाया

फ्रीडम सीरीज के पहले टेस्ट में अंतिम एकादश में शामिल नहीं किए गए अजिंक्य रहाणे और केएल राहुल ने मंगलवार को न्यूलैंड्स मैदान पर अभ्यास में पसीना बहाया। इनके साथ तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा और विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल भी थे।
पहला टेस्ट भारत चौथे ही दिन 72 रनों हार गया था। जिसमें बल्लेबाजों का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था। आलोचकों ने रहाणे और राहुल को बाहर रखने के कप्तान कोहली के फैसले पर सवाल खड़े किए थे। रहाणे को उपकप्तान होने और विदेशों में अच्छा रिकॉर्ड होने के बावजूद टीम में शामिल नहीं किया गया था। इन चारों ने लगभग डेढ़ घंटे तक अभ्यास किया और इस बीच सहायक कोच संजय बांगर और गेंदबाजी कोच भरत अरूण उनके साथ थे।
राहुल और रहाणे अगल-बगल की नेट्स पर थे तथा उन्होंने थ्रो डाउन के अलावा नेट गेंदबाजों के सामने अपने बल्ले का उपयोग किया। इन्हें ईशांत ने भी गेंदबाजी की। पार्थिव ने सबसे आखिर में बल्लेबाजी की। उम्मीद की जा रही है कि दूसरे टेस्ट में रहाणे को अंतिम एकादश में शामिल किया जा सकता है। दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीकी कोच ओटिस गिब्सन ने चेतावनी दी कि उनकी टीम तेज गेंदबाजी के दम पर भारत को परेशान करती रहेगी।

आयकर छूट सीमा को मौजूदा ढाई लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर सकती है केंद्र सरकार

केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर छूट सीमा को मौजूदा ढाई लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर सकती है और मौजूदा टैक्स स्लैबों में भी बदलाव होने की संभावना है। साथ ही कारपोरेट टैक्स की दरें घटाने की दिशा में कदम उठाकर सरकार उद्योगों को उपहार भी दे सकती है। मोदी सरकार का यह आखिरी पूर्ण बजट होगा।
सूत्रों ने कहा कि प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में सुधार सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। वित्त मंत्रालय एक समूह का गठन कर इस दिशा में पहले ही कदम उठा चुका है। इसका उद्देश्य आम लोगों खासकर मध्यम वर्ग और कारोबार जगत को राहत देना है। वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी 2018 को आम बजट पेश करेंगे।
सूत्रों ने कहा कि मध्यम वर्ग को कर राहत देने के जिन विकल्पों पर विचार हो रहा है उनमें सबसे प्रमुख आयकर की दरें कम करने के संबंध में है। सरकार कर की दरें कम कर टैक्स के बोझ से राहत दे सकती है। चालू वित्त वर्ष के आम बजट में भी पांच लाख रुपये से कम आय पर दस प्रतिशत टैक्स की दर को घटाकर पांच प्रतिशत करके किया गया था।
हालांकि दूसरा विकल्प टैक्स से छूट की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर राहत देने का है। फिलहाल ढाई लाख रुपये तक की सालाना आय करमुक्त है। इसे बढ़ाकर तीन लाख रुपये या इससे अधिक करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
बहरहाल सूत्रों का यह भी कहना है कि सरकार आयकर स्लैब में भी बदलाव कर सकती है। दरअसल स्लैब में बदलाव के प्रस्ताव के पीछे दलील यह है कि बढ़ती महंगाई से राहत दिलाने के लिए यह जरूरी है। पांच से दस लाख रुपये के स्लैब में टैक्स की दर घटाकर 10 फीसद की जा सकती है।
सूत्रों का कहना है कि दस लाख रुपये से 20 लाख रुपये के बीच एक नया स्लैब बनाया जा सकता है। इसमें दर 20 फीसद होगी। इससे ऊपर के स्लैब में 30 फीसद टैक्स होगा। फिलहाल व्यक्तिगत आयकर की चार स्लैब हैं। पहली स्लैब ढाई लाख रुपये से कम है जिस पर शून्य आयकर है। दूसरी स्लैब ढाई से पांच लाख रुपये है जिस पर पांच प्रतिशत आयकर है। तीसरी स्लैब पांच से दस लाख रुपये है जिस पर 20 प्रतिशत टैक्स है और चौथी स्लैब दस लाख रुपये से अधिक की है जिस पर 30 प्रतिशत टैक्स है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने नवंबर में ही छह सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन प्रत्यक्ष करों में बदलाव पर विचार के लिए किया है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि आयकर और कॉरपोरेट टैक्स के संबंध में जो भी बदलाव आगामी बजट में होंगे, वे प्रत्यक्ष कर प्रणाली में बदलाव की दिशा और दशा तय करेंगे।
सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्री कारपोरेट रेट टैक्स में कटौती की पूर्व घोषणा पर भी इस बजट में अमल कर सकते हैं। दरअसल नोटबंदी और जीएसटी के प्रभाव के चलते उद्योग जगत की सुस्ती को दूर करने के लिए प्रोत्साहन की दरकार है। ऐसे में सरकार कारपोरेट टैक्स की वर्तमान दर 30 प्रतिशत को नीचे लाने की दिशा में कदम उठाकर इस संबंध में प्रयास कर सकती है। इससे उद्योग जगत को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि चालू वित्त वर्ष में जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद सरकार के राजस्व में अपेक्षानुरूप वृद्धि नहीं हुई है, ऐसे में राजकोषीय घाटे को काबू रखने की जरूरत के बीच सरकार के हाथ बंधे होंगे।

पतंग का मांझा साबित हो रहा लोगों के लिए जानलेवा

गुजरात में पतंग का मांझा लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इस साल तीन लोगों की गर्दन कटने तथा सूरत में मासूम बच्ची की मौत की घटना के बाद अहमदाबाद में सोमवार रात को पतंग के मांझे से 22 साल की एक लड़की का चेहरा खराब हो गया है।
एक्टिवा पर जा रही लड़की के पतंग के मांझे के कारण चेहरे पर 30 टांके आए हैं। मकरसंक्राति त्योहार के अभी पांच दिन बाकी है। मगर, यहां लोग डेढ़ महिने पहले से पतंग उड़ाने लगते है।
वस्त्राल के गिरिवर गेलेक्सी में रहती बिनल पटेल नामक 22 वर्षीय लड़की गांधीनगर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करती है। सोमवार शाम को वह अपने घर के पास स्थित शाक मार्केट से गुजर रही थी। तभी अचानक पतंग का मांझा उसके चेहरे से लिपट गया।
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इसकी वजह से वह एक्टीवा से गिर पड़ी। घटना के चलते लोग एकत्रित हो गए। लहुलुहान अवस्था में बिनल को निकट निजी अस्पताल में ले जाया गया। डाक्टरों के मुताबिक पतंग का मांझा बिनल के गाल को काटता हुआ अंदर घुस गया।
उसका गाल पूरी तरह से कट गया है, जिसके कारण चेहरे पर 30 टांके लेने पड़े हैं। डाक्टरों ने बिनल का उपचार कर अस्पताल में छुट्टी दे दी है।

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एमबीबीएस सीटों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के दिए सख्त निर्देश

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य शासन को एक सप्ताह के भीतर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में मॉप-अप काउंसिलिंग राउंड में भरी गई एमबीबीएस सीटों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने सख्त निर्देश दिए हैं। इस रिपोर्ट में मॉप-अप काउंसिलिंग राउंड की 94 एमबीबीएस सीटों में दाखिला पाने वालों के अंक और मैरिट पोजीशन सहित प्रत्येक जानकारी शामिल करने कहा गया है।
मंगलवार को न्यायमूर्ति आरएस झा व जस्टिस नंदिता दुबे की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता खंडवा निवासी प्रांशु अग्रवाल और उज्जैन निवासी आदिश जैन सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी खड़े हुए।
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आरोप को गंभीरता से लेकर सरकार को यह भी साफ करने कहा है कि आखिर क्यों मूल निवासी योग्य छात्र-छात्राओं की उपलब्धता के बावजूद उन्हें दरकिनार किया गया? याचिकाओं में लगे एक-एक छात्र-छात्रा से एक-एक करोड़ लेकर एमबीबीएस सीट बेचे जाने संबंधी आरोपों के सिलसिले में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और सरकार अपना जवाब प्रस्तुत करे।
उन्होंने दलील दी कि इस मामले में राज्य शासन का रवैया आश्चर्यजनक है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों पर एमबीबीएस सीटों पर गैर मूलनिवासी छात्र-छात्राओं को दाखिला दिए जाने के आरोप जैसे गंभीर मामले के बावजूद सरकार का रवैया कम दिखाने और ज्यादा छिपाने वाला बना हुआ है। जबकि कायदे से सरकार को खुलकर सभी तथ्य सामने लाने चाहिए। चूंकि ऐसा नहीं किया जा रहा है, अत: सवाल उठता है कि सरकार आखिर बचाव किसका कर रही है और क्यों?
अधिवक्ता आदित्य संघी ने आक्षेप लगाया कि 10 सितंबर 2017 की रात्रि मॉप-अप काउंसिलिंग राउंड में मध्यप्रदेश के मूलनिवासी वास्तविक योग्य छात्र-छात्राओं का हक सीधे तौर पर मारा गया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि याचिकाकर्ताओं सहित अन्य को 420 से अधिक अंक हासिल हुए थे, इसके बावजूद जिन्हें दाखिला दे दिया गया वे मध्यप्रदेश के गैर मूल निवासी होने के साथ-साथ महज 200 के आसपास अंक हासिल करने वाले अयोग्य छात्र-छात्रा थे। इससे साफ है कि मॉप-अप काउंसिलिंग राउंड के नाम पर करोड़ों रुपए लेकर एमबीबीएस सीटें बेचने का खुला खेल खेला गया।