सेरेना विलियम्स ने टेनिस टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन से नाम वापस लिया।

गत चैंपियन सेरेना विलियम्स ने साल के पहले ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन से नाम वापस लिया।
सेरेना पिछले वर्ष सितंबर में मां बनी थी, जब उन्होंने एलेक्सिस ओलिंपिया को जन्म दिया था। 23 वर्षीया सेरेना ने पिछले वर्ष ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में बहन वीनस को 6-4, 6-4 से हराकर खिताब हासिल किया था। वे इस टूर्नामेंट का खिताब 7 बार हासिल कर चुकी है, सबसे पहले उन्होंने यहां 2003 में खिताब अपने नाम किया था।
सेरेना के इस टूर्नामेंट में खिताब बचाने के लिए कोर्ट पर उतरने की उम्मीद थी, लेकिन शुक्रवार को उन्होंने साफ किया कि वे 15 जनवरी से शुरू होने जा रहे इस टूर्नामेंट में नहीं खेलेंगी। उन्होंने कहा कि वे इस टूर्नामेंट में खेल सकती थी, लेकिन पूरी तरह तैयारी नहीं होने के कारण वे इससे हट रही हैं।

आइसलैंड ने पुरुषों को महिलाओं से अधिक वेतन देना किया अवैध

भले ही भारत समेत तमाम देशों में महिलाएं पुरुषों की तुलना में समान वेतन के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन योरपीय देश आइसलैंड ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आइसलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जहां पुरुषों को महिलाओं से अधिक वेतन देना अवैध करार दे दिया गया है।
नए कानून के मुताबिक 25 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों और सरकारी एजेंसियों को अपनी समान वेतन की नीति के लिए सरकार से प्रमाण-पत्र लेना होगा।
नए कानून के मुताबिक, जो कंपनियां समान वेतन की नीति पर चलती नहीं पाई जाएंगी, उन्हें जुर्माना भरना होगा। आइसलैंड वीमंस राइट्स असोसिएशन की बोर्ड मेंबर डैग्नी ऑस्क ने कहा, “इसके जरिये यह तय किया जाएगा कि महिलाओं और पुरुषों को समान वेतन मिले।”
ऑस्क ने कहा, “हमारे यहां यह नियम दशकों से ही रहा है कि पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन मिलना चाहिए, लेकिन यह अंतर बढ़ गया है।”
विधेयक पारित होने के बाद यह कानून इसी साल की शुरुआत से यानी 1 जनवरी से लागू हो गया है।
बीते साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर इसका ऐलान किया गया था। इस विधेयक का आइसलैंड की गठबंधन सरकार ने स्वागत किया था। इसके अलावा संसद की विपक्षी पार्टी ने भी स्वागत किया था, जहां 50 फीसदी के करीब सदस्य महिलाएं ही हैं।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2017 के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में आइसलैंड शीर्ष पांच देशों में था। जबकि अमेरिका जैसा विकसित देश शीर्ष 10 देशों की सूची में जगह नहीं बना सका था। वहीं, आइसलैंड सरकार का लक्ष्य वर्ष 2020 तक महिला और पुरुषों में वेतन असमानता को पूरी तरह से खत्म करना है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2017 के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत का स्थान 108 वां है। इसमें 144 देशों को शामिल किया जाता है। 2016 में इसका स्थान 87 था यानी भारत इस मामले में एक साल में 21 स्थान और नीचे आया है। यह इंडेक्स महिला पुरुषों के लिए चार मानकों शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवित रहना, आर्थिक मौके और राजनीतिक सशक्तीकरण पर आधारित होता है।
भारत की कार्यस्थल पर महिला पुरुष समानता और महिलाओं को वेतन के मामले में स्थिति और खराब है। इस मामले में देश का स्थान 144 देशों में 136 वां है। यानी इसमें काफी सुधार की जरूरत है। भारत में औसतन 66 फीसदी महिलाओं को काम के बदले कुछ नहीं मिलता जबकि इस मामले में पुरुषों का प्रतिशत केवल 12 है।

डॉक्टर ने आत्हमत्या की कोशिश की

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के बी.जे मेडिकल कॉलेज में तीसरे वर्ष में पढ़ाई कर रहे निवासी डॉक्टर ने शुक्रवार रात होस्टल के कमरे में नींद की गोली खाकर आत्हमत्या की कोशिश की।
डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि दलित होने के कारण उसके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है। ढाई साल में एक बार भी उसे ऑपरेशन नहीं करने दिया गया, उसे ऑपरेशन थिएटर के बाहर वॉचमैन की तरह खड़ा रखा जाता है। इतना ही नहीं उसके साथी डॉक्टर उसे जातिवाद के शब्द का उपयोग कर उसे नीचा दिखाते हैं।
अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती डाक्टर अभी खतरे से बाहर है। शाहीबाग पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
आत्महत्या का प्रयास करने वाला ये डॉक्टर मूल रूप से चेन्नई का रहने वाला है। उसने बताया कि वो जब से सिविल अस्पताल में पढ़ाई के लिए आया है, तब से ही उसे परेशान किया जा रहा है। पीड़ित डॉक्टर ने अस्पताल में उसके साथ हो रहे बुरे बर्ताव के बारे में बताने के लिए एक घटना का हवाला दिया, जब अस्पताल में डॉक्टर पंकज मोदी उनके पास आये और उसे 15 लोगों के लिए चाय बनाकर लाने को कहा। जब उसने चाय बनाने से इंकार किया तो उसे गंदी गालियां दी गईं।
इस बारे में उसने वरिष्ठ विभागीय अधिकारी से शिकायत की, लेकन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। उसने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में भी इसकी शिकायत की थी।
बी.जे मेडिकल कालेज की निदेशक डॉक्टर हंसाबेन गोस्वामी ने कहा कि दलित होने के नाते छात्र से बुरा बर्ताव करने के आरोप गलत हैं। इस छात्र का होस्टल में रह रहे अपने साथियों से झगड़ा हुआ था। इस बारे उन्हें शिकायत मिली थी। बाकी सर्जरी न करने देने का आरोप है, तो नियम के मुताबिक निवासी डॉक्टर को स्वतंत्रता पूर्वक सर्जरी का अधिकार नहीं है। इस बारे में मैंने खुद उसे समझाया है।

पूर्व सांसद सुखलाल कुशवाहा की याद में लाठी रैली के बहाने नए सियासी गठबंधन का ऐलान

राजधानी में पूर्व सांसद सुखलाल कुशवाहा की याद में आयोजित लाठी रैली के बहाने नए सियासी गठबंधन का ऐलान किया गया। पूर्व केन्द्रीय मंत्री शरद यादव, पूर्व सांसद प्रकाश आंबेडकर और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने एक सुर में पिछड़े वर्ग के साथ दलित, मुस्लिम व आदिवासियों को एकजुट करने पर जोर दिया। शरद बोले-मोदी सरकार ने एक भी वायदा पूरा नहीं किया। 80 फीसदी वोट बिखरा हुआ है उन्हें एक कर सत्ता हासिल करें।
छोला मैदान पर आयोजित लाठी रैली में गैर भाजपाई दलों के पिछड़ा वर्ग और अजा-अजजा के नेताओं ने अगले विधानसभा चुनाव के लिए नए गठबंधन का संकल्प जताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के साथ पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश प्रभारी जुबेर खान भी खासतौर पर पहुंचे थे।
इस मौके पर शरद यादव ने कहा कि जाति को जमात बनाएं सत्ता अपने आप मिल जाएगी। भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए बोले-ये लोग हिन्दू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद की बातें करते हैं। दंगा कराकर राज करना चाहते हैं। इन मुद्दों का सरकार से कोई वास्ता नहीं। पुणे की घटना में मराठा-दलित का झूठ फैला रहे हंै। संविधान और लोकतंत्र ने हमें वोट की ताकत दी है।
डॉ आंबेडकर ने तो कांग्रेस हाईकमान से सीधे आह्वान कर दिया कि अरुण यादव को मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित कर दें। मप्र का अगला सीएम ओबीसी का ही हो। गुजरात में कांग्रेस ठीक से लड़ती तो भाजपा सत्ता में नहीं लौटती, हमारी लड़ाई बीजेपी से है। पैसे का खेल चल रहा गुजरात में एक वोट के लिए दस हजार रुपए बांटे गए। इसलिए संकल्प लें कि चुनाव में पिछड़े, दलित, मुस्लिम और अजजा को ही अपना वोट देंगे।
वह बोले कि यह सरकार दोबारा आई तो बात करने का अधिकार भी छीन लेगी। प्रजातांत्रिक समाज के लिए छोटी जातियों को सम्मान दें। धर्म की राजनीति बेकाबू हो रही है। उन्होंने हिंदूवादी संगठनों पर पुणे में हिंसा फैलाने का आरोप लगाया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यादव ने कहा कि एकता ही सफलता का मूल मंत्र है। पिछड़े वर्ग के हम सभी साथी संगठित होकर काम करेंगे। जुबेर खान ने कहा कि सभी पिछड़ी जातियों को एकजुट करना है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं दीपक बाबरिया भी आने वाले थे लेकिन पहुंच नहीं पाए। रैली में कांग्रेस विधायक यादवेन्द्र सिंह, नीलांशु चतुर्वेदी एवं हिना कांवरे व राजमणि पटेल भी मौजूद थे।
पूर्व सांसद सुखलाल कुशवाहा के पुत्र सिद्धार्थ कुशवाहा ने रैली का आयोजन किया था। कार्यक्रम को जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव, महेन्द्र सिंह मौर्य, राजेश कुशवाह, सत्यशोधक समाज के सुनील सरदार और गुलजार सिंह मरकाम ने भी संबोधित किया। रैली में विंध्य, बुंदेलखंड,ग्वालियर और चंबल संभाग से हजारों लोग पहुंचे थे