मारिया शारापोवा शेनझेन ओपन के दूसरे राउंड में अमेरिकी एलिसन रिस्के को हराने में सफल

स्टार महिला टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा शेनझेन ओपन के दूसरे राउंड में कड़ी मशक्कत के बाद अमेरिकी एलिसन रिस्के को हराने में सफल रही। उन्होंने रिस्के को 4-6, 6-3, 6-2 से मात देकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।
क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला कजाकिस्तान की जरीना दियास से होगा, जिन्होंने एक अन्य मुकाबले में स्थानीय खिलाड़ी जांग शुआई को 6-3, 6-7, 6-4 से हराया। शेनझेन ओपन के फाइनल में दो बार पहुंच चुकीं रिस्के ने पहला सेट अपने नाम किया। एलिसन ने शुरुआत में बढ़त बनाने के बावजूद शारापोवा ने 34 विनर लगाए, जो अमेरिकी खिलाड़ी से लगभग तीन गुना रहे। दुनिया की 59वें नंबर की खिलाड़ी शारापोवा ने 11 ऐस भी लगाए और दस में से सात ब्रेक प्वाइंट बचाने में सफल रही।
एडमंड ने शापावालोव को दी मात : ब्रिटेन के काइल एडमंड ने इस टूर्नामेंट के पहले दौर में डेनिस शापावालोव को मात दी। उन्होंने शापावालोव को 6-7, 7-6, 6-4 से हराया। विश्व के 51वें वरीय कनाडा के शापावालोव ने शुरुआत में एडमंड पर बढ़त ले ली थी, लेकिन दो घंटे 30 मिनट तक चले मैच में ब्रिटेन के खिलाड़ी ने उन्हें आखिरकार मात दी। पहला सेट हारने के बाद एडमंड ने हार नहीं मानी और दूसरा सेट जीत मैच तीसरे सेट में ले गए।

बढ़ती दिखाई दे रही तीन तलाक बिल को लेकर राज्यसभा में सरकार की मुश्किल

एकसाथ तीन तलाक बिल को लेकर राज्यसभा में सरकार की मुश्किल बढ़ती दिखाई दे रही है। बुधवार को सदन में बिल पेश होने के बाद कांग्रेस के बदले हुए रूख ने सरकार को परेशानी में डाल दिया वहीं भाजपा के सहयोगी दल भी इसका विरोध करते दिखे। इसके बाद वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। माना जा रहा है कि गुरुवार को भी सदन में इस बिल पर विपक्ष का रूख सरकार के पक्ष में रहने की उम्मीद नहीं है।
बुधवार को बीजद, तेदेपा भी विपक्ष के साथवित्त मंत्री की इस दलील के बावजूद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा और राजद समेत 17 दल विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग पर अड़े रहे। राजग की सहयोगी तेदेपा के अलावा बीजद जैसे दल भी इस पर विपक्ष के साथ दिखे।
इससे पहले मुस्लिम महिलाओं को एकसाथ तीन तलाक की कुप्रथा से आजादी दिलाने वाला यह विधेयक राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच पेश तो हो गया, लेकिन इसे पारित नहीं कराया जा सका। कांग्रेस सहित 17 विपक्षी दल बिल को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) में भेजने की जिद पर अड़े रहे। भारी हंगामे की वजह से सदन को स्थगित करना पड़ा। राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने लोकसभा में समर्थन करने और उच्च सदन में अवरोध खड़ा करने के लिए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।
जेटली ने विपक्ष की मांग को अनुचित बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक संबंधी फैसले के मद्देनजर छह महीने के भीतर कानून बनाना जरूरी है। 22 फरवरी को छह माह की अवधि पूरी हो रही है। इसीलिए यह विधेयक तत्काल पारित होना चाहिए। प्रवर समिति में भेजने की विपक्ष की रणनीति इसे लटकाने का प्रयास है।
नेता सदन और नेता विपक्ष के बीच सदन में विधेयक पेश करने को लेकर भी घमासान हुआ। विपक्ष तत्काल तलाक पर विधेयक से पहले महाराष्ट्र की दलित हिंसा पर चर्चा की मांग पर अड़ा था। मगर उपसभापति पीजे कुरियन के प्रयासों से भारी हंगामे के बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पेश किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा से बिल पारित होने के बाद भी तत्काल तलाक की घटनाएं सामने आ रही हैं। मुस्लिम महिलाओं को हक दिलाने के लिए इसे तत्काल पारित किया जाना चाहिए। मत विभाजन पर अड़ा विपक्षउपसभापति ने विपक्ष के दोनों संशोधन प्रस्तावों को वैध माना। इसके बाद घमासान बढ़ गया और विपक्ष मत विभाजन की मांग करने लगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष का घमासान थमता नहीं देख उपसभापति ने सदन पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।
-245 सदस्यीय राज्यसभा में सत्तारूढ़ राजग के पास 88 सांसद हैं। इनमें अकेले भाजपा के पास 57 सांसद हैं।
-कांग्रेस के 57, सपा के 18, बीजद के 8, अन्नाद्रमुक के 13, तृणमूल के 12 और राकांपा के 5 सांसद हैं।
-सरकार को सभी दलों का साथ मिल जाता है, तो भी बिल पारित कराने के लिए 35 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।
किसी भी विधेयक को कानूनी रूप देने के लिए दोनों सदनों से पास करवाना जरूरी होता है। अब गुरुवार को इस बिल का भविष्य तय होगा। हालांकि, सदन का गणित देखते हुए बिल पारित होने की राह मुश्किल दिख रही है और इसके प्रवर समिति में जाने के प्रबल आसार हैं।
संसद अपने कामकाज निपटाने के लिए कई तरह की समितियों का गठन करती है। संसदीय समितियां दो तरह की होती हैं, प्रवर और स्थायी। प्रवर समिति का गठन किसी खास मामले या उद्देश्य के लिए किया जाता है। रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत कर दिए जाने के बाद उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। स्थायी समिति का काम निश्चित होता है।

महाराष्ट्र बंद ने बुधवार को लगातार दस घंटे सूबे के बड़े हिस्से को बेहाल रखा

पुणे में हुई दलित-मराठा झड़प के बाद भारिप बहुजन महासंघ के नेता प्रकाश आंबेडकर की ओर से आहूत महाराष्ट्र बंद ने बुधवार को लगातार दस घंटे सूबे के बड़े हिस्से को बेहाल रखा।
नांदेड़ में हिंसक प्रदर्शन के बीच एक नाबालिग की मौत की खबर है। बंद के दौरान मुंबई सहित कई हिस्सों में तोड़फोड़ भी हुई। अकेले मुंबई में 90 बसें तोड़फोड़ का शिकार हुईं।
हिंसक घटनाओं में चार प्रदर्शनकारी घायल हुए। चार पुलिस वाले भी पथराव में घायल हुए। सोमवार को दलितों एवं मराठों के संघर्ष के बाद बुधवार को राज्यव्यापी बंद के दौरान नांदेड़ में एक नाबालिग योगेश प्रह्लाद जाधव की मौत हो गई।
उसके परिजनों का आरोप है कि उसकी मौत पुलिस के सड़क खाली कराने के दौरान किए लाठीचार्ज से हुई है।
मुंबई समेत राज्य के कई शहरों में बसों पर हमले हुए, ट्रेनों को रोका गया और विभिन्न स्थानों पर सड़कों को जाम कर दिया। हालांकि शाम पांच बजे बंद वापस ले लिया गया।
सरकार की सतर्कता के कारण पूरे महाराष्ट्र में सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त थे। इसके बावजूद शुरू में शांतिपूर्ण दिख रहा बंद सुबह 11 बजते-बजते कई स्थानों पर हिंसक हो उठा।
मुंबई में मध्य, पश्चिम एवं हार्बर लाइन की लोकल रेल सेवाएं करीब चार घंटे ठप रहीं। दलित कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह नाकेबंदी कर वाहनों की आवाजाही रोक दी।
पवई, विक्रोली, घाटकोपर विशेष तौर पर प्रभावित रहे। इन इलाकों में कई वाहन भी तोड़फोड़ का शिकार हुए। तोड़फोड़ से पुलिस के वाहन भी नहीं बच सके। लेकिन पुलिस अपनी तरफ से बल प्रयोग करने से बचती रही।
पुलिस के मुताबिक चेंबूर, घाटकोपर, दिनदोशी, कांदीवली, जोगेश्वरी, कालानगर और माहिम में भी दलितों ने प्रदर्शन किए। ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे बुधवार को भी करीब पांच घंटे बंद रहा।
बंद की गिरफ्त में लगभग पूरी मुंबई नजर आई। इस बंद को ऑटो-रिक्शा यूनियन सहित मुंबई के कई संगठनों का भी समर्थन प्राप्त था।
पुणे, नागपुर, नासिक, औरंगाबाद, अहमदनगर में भी बंद का असर : मुंबई के बाहर पुणे, नागपुर, नासिक, औरंगाबाद, नांदेड़, अहमदनगर जैसे बड़े शहरों में भी बंद का अच्छा-खासा असर देखा गया।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे सहित राज्य के सभी प्रमुख हाइवे पर यातायात ठप रहा। कुछ स्थानों पर राज्य परिवहन की बसों को भी क्षति पहुंची है।
पश्चिम महाराष्ट्र में बंद करवा रहे दलित कार्यकर्ताओं में कुछ हिंदू संगठनों के बीच आज भी झड़प की खबर मिली है। प्रकाश आंबेडकर के अनुसार उन्होंने बंद शांतिपूर्ण रखने की अपील की थी।
अब आगे महाराष्ट्र शांत रहे या नहीं, यह मुख्यमंत्री को तय करना है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के एक कार्यक्रम में कहा कि बाहर से आए कुछ लोग कुछ बातें कहकर राज्य में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
चूंकि चर्चा के लिए कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए इस प्रकार के मुद्दे उठाकर संकुचित विचारों के लोग दो समूहों को आमने-सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। राज्य की जनता समझती है कि इससे विकास बाधित होता है। इसलिए वह ऐसी किसी चीज को समर्थन नहीं देगी।
संभाजी, मिलिंद, जिग्नेश व उमर खालिद के खिलाफ एफआइआर :
बता दें कि सोमवार की घटना के बाद जहां दलित संगठनों की ओर से दो हिंदुत्ववादी नेताओं संभाजी भिड़े एवं मिलिंद एकबोटे के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
वहीं हिंदू जनजागृति समिति के कार्यकर्ताओं ने गुजरात के दलित नेता एवं नवनिर्वाचित विधायक जिग्नेश मेवाणी एवं जेएनयू के छात्र उमर खालिद के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है।
हिंदू जनजागृति समिति का मानना है कि इन दोनों के भड़काऊ भाषणों के कारण ही सोमवार को भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़की। मुख्यमंत्री ने सोमवार की घटना के लिए दो जांचें बैठा दी है।
मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सोमवार को हिंसा भड़काने के पूरे प्रकरण की जांच करेंगे। जबकि राज्य सीआइडी उस दिन मारे गए युवक राहुल की हत्या की जांच करेगी।

व्यावसायिक परीक्षा मंडल नकल पर नकेल कसने के लिए लागू कर रहा नई व्यवस्था

परीक्षाओं में फर्जीवाड़े को लेकर सुर्खियों में रहने वाले व्यावसायिक परीक्षा मंडल (पीईबी) नकल पर नकेल कसने के लिए नई व्यवस्था लागू कर रहा है। इसके तहत आगामी परीक्षाओं में केंद्रों पर जैमर का प्रयोग किया जाएगा ताकि छात्र किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग नकल के लिए न कर सकें।
हाल में हुईं कुछ परीक्षाओं में अभ्यर्थी ब्लूटूथ सहित विभिन्न् प्रकार की डिवाइस लेकर नकल करते पकड़े गए थे। इसमें मोबाइल फोन भी शामिल हैं। मोबाइल फोन चालू अवस्था में मिलने पर उक्त अभ्यर्थियों के खिलाफ नकल का प्रकरण दर्ज किया गया और पुलिस में भी शिकायत की गई।
कुछ समय पूर्व ग्वालियर में पीईबी की परीक्षा में एक अभ्यर्थी बटन जितनी डिवाइस लेकर पहुंचा था। यह भी ब्लूटूथ डिवाइस थी। बताया जाता है कि उक्त अभ्यर्थी के ही किसी साथी ने परीक्षा के दौरान मुखबिरी की थी और वह पकड़ा गया। कई अन्य मामलों में भी इस प्रकार की डिवाइस मिली है जिसे आसानी से देखा नहीं जा सकता।
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से नकल रोकने के लिए पीईबी परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाने की तैयारी कर रहा है। संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा में इसे लगाया जाएगा। इसी के साथ क्वालिटी कंट्रोल अधिकारी की परीक्षा में भी परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए जाने का प्रस्ताव है। यह परीक्षा जबलपुर, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और सागर में होना है।
पीईबी के अधिकारियों ने बताया कि जैमर लगाने के लिए भारत सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। जैमर लगने की वजह से कई बार परीक्षा केंद्र के आसपास के लोगों के मोबाइल भी काम नहीं करते। अगर क्वालिटी कंट्रोल परीक्षा में इसकी अनुमति 10-12 दिन पहले मिल जाती है तो जैमर का उपयोग करेंगे। इसके लिए जैमर लगाने वाली एजेंसी से भी चर्चा चल रही है। उसे भी इसे लगाने में समय चाहिए होता है। जैमर हैदराबाद से मंगवाने पड़ेंगे। अगर इस बार समय तो संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा में इसे लगाया जाना तय है। अधिकारियों ने बताया कि सत्यापन की अन्य व्यवस्था पूर्व की भांति यथावत रहेगी।
लगातार तकनीक में बदलाव आ रहा है। ऐसे ही नकल के मामले में भी है। नई-नई डिवाइस सामने आ रही हैं और कई बार नकल करते अभ्यर्थी पकड़ाए भी हैं। इस कारण परीक्षा केंद्रों में जैमर का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। संबंधित एजेंसी से भी चर्चा चल रही है।