पैसों के पीछे भाग रहे दुनियाभर के क्रिकेटर

आजकल क्रिकेट के छोटे प्रारूप टी20 (IPL) से मिलने वाले पैसों के पीछे दुनियाभर के क्रिकेटर भाग रहे हैं, ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर मिचेल मार्श ने क्रिकेट के लिए एक नई मिसाल पेश की। मार्श ने ज्यादा कमाई वाले IPL की जगह काउंटी क्रिकेट को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने इस साल होने वाले IPL टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया है इसके बदले उन्होंने क्रिकेट के लंबे प्रारूप में खेलकर अपने खेल में सुधार करना बेहतर विकल्प माना है। वो इंग्लिश काउंटी सरे का प्रतिनिधित्व करेंगे। मार्श को पिछले साल राइजिंग पुणे सुपरजायंट्‍स ने 4.8 करोड़ रुपये में खरीदा था।
मार्श ने कहा, ‘पैसों के लिहाज से यह बड़ा फैसला था लेकिन मेरा मुख्य लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया के लिये टेस्ट क्रिकेट खेलना है।’ उन्होंने बताया कि, ‘आईपीएल बहुत ही लुभावना है। उससे मेरा पैसा कमाने और भारत में खेलने का लालच जुड़ा है लेकिन मैंने अपनी क्रिकेट को ध्यान में रखकर फैसला किया है। जब मैंने फैसला किया तो मुझे नहीं लगा कि मैं इतनी जल्दी इस पर पहुंच जाऊंगा।’
ऑस्ट्रेलियाई हरफनमौला मिचेल मार्श ने अब तक 23 टेस्ट मैचों में 893 रन बनाने के अलावा 29 विकेट लिए हैं। उन्होंनने कहा अभी वो जून में होने वाली वनडे सीरीज के लिये खुद को केन्द्रित कर रहे हैं। यह सीरीज इंग्लैंड के खिलाफ होगी।

चुनौती है चीन की नई हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल

चीन की नई हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल को भारत और जापान के साथ अमेरिका के लिए भी चुनौती बताया जा रहा है। टोक्यो की “डिप्लोमेट” पत्रिका ने पिछले महीने अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया था कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की रॉकेट फोर्स ने नई मिसाइल “हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल” (एचजीवी) का परीक्षण किया है। इसे डीएफ-17 नाम दिया गया है। इसका पहला परीक्षण बीते एक नवंबर और दूसरा दो हफ्ते बाद किया गया। दोनों परीक्षण सफल रहे और यह मिसाइल साल 2020 तक तैनात कर दी जाएगी। यह मिसाइल परीक्षण के दौरान करीब 1400 किमी तक गई थी।
साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने मंगलवार को बीजिंग के सैन्य विश्लेषक झोउ चेनमिंग के हवाले से कहा, “पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में एचजीवी बेहद जटिल है और इसे मार गिराना मुश्किल है। अमेरिका, जापान और भारत को चीन की एचजीवी तकनीक के विकास से चिंतित होना चाहिए।
यह जापान में सैन्य अड्डों और भारत में परमाणु रिएक्टरों तक शीघ्रता और ज्यादा सटीकता के साथ पहुंच सकती है।” पीएलए के पूर्व सदस्य सांग झोंगपिंग ने कहा कि एचजीवी हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल डीएफ-41 के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 12 हजार किमी तक है। यह महज एक घंटे के भीतर अमेरिका के किसी भी स्थान तक मार कर सकती है।
मकाऊ के सैन्य पर्यवेक्षक एंटोनी वांग डोंग ने कहा कि एचजीवी अमेरिकी मिसाइल रोधी प्रणाली थाड तक को तबाह कर सकती है। उत्तर कोरिया के हमले से बचाव के लिए थाड को दक्षिण कोरिया में तैनात किया गया है।

कोचिंग छात्र अनुराग पिछले एक सप्ताह से है गायब

जयपुर। राजस्थान की कोचिंग नगरी कोटा से एक कोचिंग छात्र अनुराग पिछले एक सप्ताह से गायब है। पुलिस ने इसके कमरे की तलाशी ली तो यहां नशा करने वाली 500 टयूब मिली।
पुलिस के अनुसार यह अनुराग नाम का यह छात्र बिहार का रहने वाला था और यहां पूर्वांचल होस्टल में रह कर मेडिकल की तैयारी कर रहा था। वह पिछले 28 दिसम्बर से गायब है। उसकी दो बहनें भी कोटा में ही रह कर कोचिंग कर रही है।
पुलिस ने जब उसके कमरे की तलाशी ली तो उसके कमरे से पंचर जोड़ने वाली 500 सिलोचिन ट्यूब मिली। बताया जाता है कि यह ट्यूब नशा करने के काम आती है। ट्यूब को रूमाल पर लगा कर सूंघा जाता है और कोटा में यह ट्यूब बड़ी आसानी से हर जगह उपलब्ध है।
पूछताछ मे पता चला कि अनुराग पिछले तीन महीने से कोचिंग नहीं जा रहा था। उसने अपना कार्ड साथी छात्र को दे रखा था जो उसका कार्ड पंच कर देता था। पुलिस अब छात्र को तलाश कर रही है। इसके परिजन कोटा पहुंच गए है।

हाल में आयोजित पटवारी भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों के फिंगर प्रिंट के नहीं हो सके मिलान

व्यावसायिक परीक्षा मंडल (पीईबी) द्वारा हाल में आयोजित पटवारी भर्ती परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों के फिंगर प्रिंट के (अंगूठे के निशान) मिलान नहीं हो सके थे उन्हें व्यापमं परीक्षा में शामिल होने का एक और मौका देने जा रहा है। इनके लिए विशेष परीक्षा भोपाल में 10 जनवरी को आयोजित की जाएगी। अब इनकी आंखों का सत्यापन किया जाएगा। इसमें कोई समस्या नहीं आएगी।
पटवारी परीक्षा में करीब साढ़े तीन हजार अभ्यर्थी अंगूठे के निशान का मिलान नहीं होने से इसमें शामिल होने से वंचित रह गए थे। इस संबंध में कुछ अभ्यर्थी न्यायालय भी पहुंच गए थे।
उनका तर्क था कि अगर उनका थंब इंप्रेशन या फिंगर प्रिंट सत्यापन नहीं हो रहा है तो इसमें उनकी क्या गलती है। उन्हें परीक्षा में शामिल होने से कैसे रोका जा सकता है। इस संबंध में उन्होंने पीईबी में भी आवेदन किया था। इसके बाद पीईबी ने उनकी अलग से परीक्षा कराने का निर्णय लिया है।
पीईबी के प्रवक्ता आलोक वर्मा ने बताया कि पटवारी की परीक्षा के लिए 6 जनवरी से प्रवेश पत्र जारी कर दिए जाएंगे। इसमें केवल वे ही अभ्यर्थी शामिल हैं जिनके अंगूठे का मिलान नहीं हो सका था। इनकी परीक्षा 10 जनवरी को भोपाल में होगी।