चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ने अफगानिस्तान पर डाल रहे डोरे को भारत के खिलाफ नहीं मानता चीन

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) से जुड़ने के लिए अफगानिस्तान पर डोरे डाल रहे चीन ने बुधवार को कहा कि भारत को इससे परेशान नहीं होना चाहिए। यह परियोजना भारत के खिलाफ नहीं है। भारत का नाम लिए बगैर चीन ने यह भी कहा कि किसी तीसरे देश को इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रभावित या बाधित नहीं करना चाहिए।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि चीन और पाकिस्तान सीपीईसी से अफगानिस्तान को जोड़ना चाहते हैं। उनका यह बयान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ बीजिंग में पहली त्रिपक्षीय बैठक के बाद आया था। अफगानिस्तान ने हालांकि सीपीईसी से जुड़ने पर अभी तक कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान भी सीपीईसी से जुड़ने का इच्छुक है। उन्होंने भारत का नाम लिए बगैर एक प्रश्न के जवाब में कहा, ‘यह परियोजना तीनों देशों के हित में है। यह सहयोग किसी देश को साधने के लिए नहीं है। किसी देश की ओर से वार्ता और सहयोग को प्रभावित और बाधित नहीं किया जाना चाहिए।’
पत्रकारों ने उनसे सीपीईसी को लेकर भारत की चिंताओं के बारे में पूछा था। यह परियोजना गुलाम कश्मीर से होकर गुजरेगी। इसका भारत विरोध कर रहा है।
करीब 3.20 लाख करोड़ रुपये की लागत वाला सीपीईसी चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का अहम हिस्सा है। करीब तीन हजार किमी लंबे सीपीईसी से पश्चिमी चीन के काशगर को पाकिस्तान में अरब सागर के तट पर स्थित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ा जाना है।

पैसे नहीं होने की वजह से बहन की मौत के तीन दिन बाद तक नहीं हो सका अंतिम संस्कार

पैसे नहीं होने की वजह से बहन की मौत के तीन दिन बाद तक भाई ने उसके शव को घर में रखा। घटना के बारे में सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार करवाया।
घटना उलबेड़िया थाना अंतर्गत मयरापाड़ा ग्राम की है। मृतका की पहचान करवी धारा तौर पर हुई। वह अविवाहित थी। वह अपने भाई नीलकांत धारा के साथ रहती थी। नीलकांत धारा नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज में कार्यरत था। 1995 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इसकी वजह से परिवार काफी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से करवी बेहद बीमार थीं। उसे इलाज के लिए उलबेड़िया महकमा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के क्रम में 24 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने एंबुलेंस से शव को उसके भाई नीलकांत धारा के हवाले कर दिया।
नीलकांत के पास दीदी के अंतिम संस्कार के लिए रुपए नहीं थे, इसीलिए शव तीन दिनों से घर में पड़ा था। इधर, तीन दिन बाद शव सड़ने की दुर्गंध से आसपास से लोग परेशान थे। स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसका अंतिम संस्कार करा दिया।

लोकसभा ने अवैध कालोनियों और स्लम को दंडात्मक कार्रवाई से मुक्ति दिलाने संबंधी विधेयक को किया पारित

लोकसभा ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की अवैध कालोनियों और स्लम को दंडात्मक कार्रवाई से मुक्ति दिलाने संबंधी विधेयक को पारित कर दिया। तर्कसंगत व्यवस्था बनाने के लिए ढांचा तैयार होने तक ऐसी बस्तियों पर कार्रवाई नहीं हो सकेगी। दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कानून (विशेष प्रावधान) दूसरा (संशोधन) विधेयक में स्लम एवं कुछ अवैध निर्माणों को 31 दिसंबर 2020 तक प्रतिरक्षा दी गई है।
मौजूदा विधेयक में दी गई प्रतिरक्षा की अवधि 31 दिसंबर को समाप्त हो रही है। शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यदि विधेयक पारित नहीं हुआ तो राष्ट्रीय राजधानी में अप्रत्याशित अफरातफरी मच जाएगी। विधेयक जहां जैसा है के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई से 31 दिसंबर 2020 तक मुक्ति दिलाएगा।
पुरी ने दिल्ली की पूर्व की शीला दीक्षित सरकार पर इस मुद्दे को लेकर उचित नीति सामने नहीं लाने के लिए हमला किया। यह व्यापक स्तर पर शासन की विफलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कानून के तहत एक जनवरी 2006 तक अतिक्रमण या गैरकानूनी डेवलपमेंट, 31 मार्च 2002 तक मौजूद ग्रामीण आबादी क्षेत्र और जहां आठ फरवरी 2007 तक निर्माण हुए, वहां 31 दिसंबर 2017 तक स्थानीय प्राधिकार कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से डरे लोग सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त निगरानी समिति की सीलिंग कार्रवाई से स्लम में रहने वालों और व्यापारियों के बीच भय व्याप्त हो गया है। इस कानून से बड़े पैमाने पर उनका डर कम हो सकेगा।
-भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने दिल्ली की आप सरकार पर हमला किया। अवैध कालोनियों और स्लम पर नीति नहीं लाने का आरोप लगाया।
– दक्षिणी दिल्ली के सांसद रमेश बिधूरी ने पानी शुल्क में वृद्धि का मुद्दा उठाया। ऐसा कर अरविंद केजरीवाल सरकार ने लोगों को धोखा दिया।

एक प्लेटफार्म पर आएंगे सभी विश्वविद्यालय

प्रदेश के विभिन्न् विश्वविद्यालयों के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों की फीस अब विवि तय करेंगे। कॉलेज छात्रों को कौन-कौन सी सुविधाएं दे रहे हैं, उनकी आधारभूत संरचना कैसी है और स्तर कैसा है इसके आधार पर निजी कॉलेजों की फीस तय की जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग इसके लिए एक केंद्रीय समिति भी बनाएगा जिसे विश्वविद्यालय अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। बुधवार को उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक में यह तय हुआ।
अब तक विश्वविद्यालय कालेजों को संबद्धता देते हैं और फीस उच्च शिक्षा विभाग की ओर से तय की जाती है। फीस निर्धारण में और पारदर्शिता लाने के लिए विश्वविद्यालयों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि विवि अपने क्षेत्र के कालेजों की फीस का निर्धारण बेहतर तरीके से कर सकें। इसके लिए विश्वविद्यालय स्तर पर भी कमेटी बनाई जाएगी।
कालेजों की फीस तय होने के बाद इसे कार्यपरिषद की बैठक में भी रखा जाएगा और उच्च शिक्षा विभाग को भी रिपोर्ट दी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कॉलेजों की फीस में एकरूपता संभव नहीं है लेकिन सामान्य पाठ्यक्रमों के लिए इसके स्लैब बनाए जा सकते हैं।
बैठक में सभी विश्वविद्यालयों को एक प्लेटफार्म पर लाने के विषय पर भी चर्चा हुई। यह तय हुआ कि सभी विश्वविद्यालयों को आनलाइन एक इनरफेस पर लाया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग इसे तैयार कराएगा। इसके तहत छात्र एक ही जगह से विभिन्न् विश्वविद्यालयों में संचालित हो रहे पाठ्यक्रम, फीस, फैकल्टी, छात्र संख्या आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। छात्रों को कॅरियर गाइडेंस संबंधी जानकारी भी दी जाएगी।
बैठक में उच्च शिक्षा विभाग आईटी सेल के अधिकारियों ने बताया कि छात्रों को दिए गए स्मार्ट फोन पर भी एप उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे सभी विश्वविद्यालयों की जानकारी एक जगह से हासिल कर सकें।
बैठक में जानकारी दी गई कि विश्वविद्यालयों को एक प्लेटफार्म पर लाने से रियल टाइम डाटा मिलेगा। छात्रों को कियोस्क जाने की जरूरत भी नहीं होगी। वे अपने मोबाइल से ही बैठे-बैठे विभिन्न् विश्वविद्यालयों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विश्वविद्यालयों में होने वाले दाखिले भी इस प्रक्रिया में शामिल किए जा रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी गई कि रियल टाइम में यह जानकारी भी दी जा सकती है कि किस प्रोफेसर ने आज क्या पढ़ाया, कल वे क्या पढ़ाएंगे। इसके लिए प्रावधान करना होंगे और सभी को गंभीरता से प्रयास करना होंगे।
विश्वविद्यालयों और कालेजों में प्रवेश के लिए ई-प्रवेश प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा इसमें छात्र के आवेदन का वैरिफिकेशन, दस्तावेजों का सत्यापन आदि भी शामिल रहेगा। इसके माध्यम से विवि के यूटीडी में भी प्रवेश के लिए आवेदन किए जा सकेंगे।
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि अनेक ऐसे छात्र हैं जिन्हें स्कालरशिप मिलती है। लेकिन वे कालेज ही नहीं आते। वे कहीं नौकरी करते हैं। ओबीसी विभाग की स्कालरशिप में यह बात सामने आई है। इस कारण ऐसे छात्रों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस का प्रावधान किया जाएगा। यह देखा जाना भी जरूरी है कि कालेज में पढ़ने आते भी हैं या नहीं। या केवल स्कॉलरशिप ही लेते हैं।
बैठक में बताया गया कि छात्रों को जो आनलाइन प्रवेश दिए जाते हैं उसका शुल्क लिया जाता है। इस पर अपर मुख्य सचिव बीआर नायडू ने कहा कि शुल्क को कम से कम किया जाए। इसमें किसी भी प्रकार से लाभ को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। इस मौके पर अपर संचालक जगदीशचंद्र जटिया ने कहा कई विश्वविद्यालयों ने हाईकोर्ट को कई मामलों में जवाब नहीं दिया है। जवाब दाखिल किया जाए।
सीएम हेल्पलाइन के लंबित मामलों का समाधान समय से करें। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना विश्वविद्यालयों और अनुदान प्राप्त कालेजों में लागू की जाएगी। बैठक में बरकतउल्ला विवि के कुलसचिव डा. यूएन शुक्ला, बुंदेलखंड विवि के डा. संजय तिवारी, डा. बी भारती, डा.एके पांडे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।