परमाणु युद्ध की संभावना से इन्कार नहीं -पाकिस्तान

पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नासेर खान जंजुआ ने कहा है कि दक्षिण एशिया में जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उसमें परमाणु युद्ध की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। अमेरिका की आलोचना करते हुए जंजुआ ने कहा कि वह सीपीईसी (चीन-पाक आर्थिक गलियारा) के विरुद्ध साजिश रच रहा है।
पाक को जो आतंकवाद झेलना पड़ रहा है वह भी महज इस वजह से क्योंकि उसने अमेरिका का साथ दिया था। अमेरिका के साथ आने के बाद ही पाक में आतंकवाद ने पैर पसारे। राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक सेमिनार में उनका कहना था कि अमेरिका अब भारत की भाषा बोल रहा है।
अफगानिस्तान में तालिबान ताकतवर हुआ तो अमेरिका ने उसका ठीकरा पाक के सिर फोड़ दिया, जबकि यह महाशक्ति की अपनी नाकामी रही। वह पाक पर आरोप जड़ता है कि उसका संबंध तालिबान व हक्कानी नेटवर्क से है, जबकि उनका देश लगातार इन ताकतों को जवाब दे रहा है।
उनका कहना था कि कश्मीर मामले में भी अमेरिका भारत का समर्थन कर रहा है। वह पाक पर भारत को तरजीह देता है। उनका कहना था कि आतंकवाद से लड़ाई में पाक की नीयत साफ है और वह नहीं चाहता कि आतंकी संगठन अपना सिर उठाएं।

मुंबई शहर के साकीनाका क्षेत्र की एक दुकान में आग से 12 लोगों की मौत

शहर के साकीनाका क्षेत्र की एक दुकान में सोमवार सुबह लगी आग से 12 लोगों की मौत हो गई। दुकान में नमकीन बनाने का कारखाना था। साकीनाका नाका के खैरानी रोड स्थित मकरिया कंपाउंड की एक बड़ी दुकान में भानु फरसाण नामक नमकीन बनाने का कारखाना था।
कारखाने के अंदर बने छज्जे पर वहां काम करनेवाले मजदूर रात में सोते थे। करीब एक दर्जन मजदूर रविवार रात भी वहां सो रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार सुबह करीब 4.25 बजे दुकान की निचली मंजिल पर आग लग गई और यह पूरी दुकान में फैल गई। दुकान के अंदर छज्जे पर सोते मजदूर भी आग की चपेट में आ गए।
करीब 1800 वर्ग फुट का शेड आग के कारण भरभराकर गिर पड़ा। मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों ने आग बुझाने की कोशिश की। झुलसे मजदूरों को मलबे से निकालकर घाटकोपर स्थित राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन 12 मजदूरों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
इमारत के एक हिस्से में रहने वाली दृष्टिहीन महिला की सूझबूझ से कुछ लोगों की जान बच गई। आग लगने के बाद तेज आवाजें आने पर उसने अपने बेटे को जगाया। दोनों ने तुरंत लोगों को सतर्क किया जिसके बाद पांच-छह लोग दुकान बाहर निकल आए।

संतरा फसल पर मौसम की मार पड़ने से 80 फीसदी तक का नुकसान

जिले में संतरा फसल पर मौसम की मार पड़ने से 80 फीसदी तक का नुकसान हो रहा है लेकिन जिन किसानों के पास आंवले के बागीचे हैं, वे मालामाल हो रहे हैं। दरअसल, इस बार यूपी के प्रतापगढ़ क्षेत्र में आंवला फसल की कम पैदावार के चलते जिले के आंवला फसल की पूछपरख बढ़ गई है।
जिले में आलू, संतरा, प्याज का तो उत्पादन बहुतायात में होता है, लेकिन आंवला जैसी औषधि फसल के उत्पादन के प्रति अभी किसानों का रूझान कम ही है। वहीं जो किसान आंवले का उत्पादन कर रहे हैं, वे मालामाल हो रहे हैं। यहां का आंवला बिहार, उत्तरप्रदेश, पंजाब, उत्तराचंल तक भेजा जा रहा है। इसका च्यवनप्राश, त्रिफला सहित अन्य आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग किया जा रहा है। बाहर के व्यापारी इन दिनों आंवला फसल का सौदा करने जिले में पहुंच रहे हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 12 किमी दूर ग्राम कुकड़ेश्वर में शाजापुर के ओसवाल सेरी निवासी मनोज नारेलिया का आंवला का बगीचा है। कृषक नारेलिया ने यह बगीचा 17 साल पहले लगाया था। बगीचा करीब 15 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है। 1200 पौधे पेड़ का रूप ले चुके हैं, जो अब बड़ी आमदनी का जरिया बन चुके हैं। उन्हें इस बार इस बागीचे से करीब 17 लाख रुपए तक मिलने की उम्मीद है। बागीचे का फल एक दिन पहले ही बिहार के सांसाराम गया है। वहीं अब उत्तरप्रदेश के व्यापारी बागीचे के फलों को लेने आए हैं।
कृषक नारेलिया ने बताया कि वे पहले परंपरागत खेती करते थे, लेकिन राजस्थान के उनके एक रिश्तेदार भगवतसिंह कोठारी ने उन्हें आंवला फसल के उत्पादन की सलाह दी थी। वर्ष 2002 में वे कोटा से पौधे ले आए। बुआई पर 5 हजार रुपए बीघा का खर्चा आया। इस प्रकार उन्हें एक बार कुल 75 हजार रुपए का खर्चा आया। पांच वर्ष पौधों से आंवला फसल की पैदावार होने लगी। उन्होंने बताया कि किसानों को चाहिए कि वह परंपरागत खेती में बदलाव की शुरूआत करें।
वे बताते हैं कि एक पौधा चार से पांच क्विटल तक फल देता है। हर वर्ष बढ़ रहे उत्पादन से उनकी आमदनी भी बढ़ रही है। कृषक नारेलिया ने बताया कि बागीचे में वह कभी भी रसायनिक दवाओं का उपयोग नहीं करते। जैविक तरीके से ही खेती करते हैं।

ओपन बोर्ड परीक्षा में घोटाला

ओपन बोर्ड परीक्षा में एक घोटाला प्रकाश में आया है। जो कॉपियां छात्रों ने कोरी छोड़ीं, स्कैनिंग के दौरान टॉपर की कॉपी के जवाबों को उसमें पेस्ट कर दिया गया। इसके बाद भोपाल में अच्छे नंबरों से पास भी कर दिया गया।
यह घपला 2016-17 में हुई ओपन बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में हुआ। एक शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने इसकी जांच शुरू की। फौरी जांच में गड़बड़ी पकड़ में आई तो ओपन परीक्षा के प्रभारी शिक्षक को हटा भी दिया गया। साथ ही दस मूल कॉपियों(जिनमें कुछ भी लिखा नहीं गया) को भोपाल से आए अधिकारी अपने साथ ले गए।
जून 2016 में ओपन बोर्ड परीक्षा में श्योपुर 250 से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद कॉपियां को जांचने के लिए स्कैन करके भोपाल भेजा गया था। जब यह कॉपियां ऑनलाइन जांची गईं तो वह कॉपियां भी भरी हुई निकली हैं जो असल में कोरी थीं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इन कोरी कॉपियों को स्थानीय स्तर पर ही स्कैनिंग के दौरान मेधावी छात्रों की कॉपियों से बदल दिया गया।
शिकायत पर ओपन बोर्ड ने 24 नवंबर को उप संचालक प्रशांत डोलस और दीपक पाण्डेय को श्योपुर भेजा। इन दोनों अफसरों ने बेहद गुपचुप तरीके से जांच की। श्योपुर से ओपन बोर्ड की 10 कॉपियों को भी यह दोनों अफसर जब्त करके ले गए। जांच में पाया गया कि इन कॉपियों में एक या दो प्रश्नों के उत्तर भी पूरे हल नहीं थे।
कॉपियों के अधिकांश पेज कोरे थे, लेकिन स्कैन करने के बाद जो कॉपियां भोपाल पहुंची, उनके अधिकांश प्रश्नों के उत्तर लिख दिए गए हैं। अभी जांच जारी है, लेकिन पहली कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग ने इस मामले में ओपन बोर्ड परीक्षा प्रभारी सुशील कुमार दुबे को उत्कृष्ट स्कूल से हटाकर मॉडल स्कूल में पदस्थ कर दिया है। क्योंकि कॉपियों को स्कैन कर भोपाल भेजने का काम श्री दुबे की निगरानी में ही हुआ था।
एक अफसर ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि स्कैन करते समय कॉपी का पहला पेज जिस पर छात्र का नाम, रोल नंबर आदि अंकित रहता है, उस पेज को तो सही स्कैन किया गया, लेकिन जैसे ही अंदर के पेजों को स्कैन करने की बारी आई तो कोरे पेजों की जगह उन दूसरी कॉपियों के पेज पेस्ट कर दिए गए, जिनमें प्रश्नों के उत्तर सही लिखे गए थे।
ओपन बोर्ड परीक्षा में पहली बार गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई है। श्योपुर जिले में पहले भ्ाी ऐसे घपले सामने आ चुके हैं।
पांच साल पहले हजारेश्वर स्कूल में ओपन बोर्ड परीक्षा में भाग लेने वाले 70 छात्रों की अंकसूची आई तो वह फर्स्ट डिवीजन पास थे।घपला यह था कि जिन छात्रों को फर्स्ट डिवीजन पास किया गया था, वह परीक्षा में भी नहीं बैठे थे। हजारेश्वर स्कूल के तत्कालीन प्रिंसीपल केसी गोयल ने यह सभी अंकसूची वापस भोपाल भेज दी थीं।
करीब चार साल पहले तत्कालीन कलेक्टर जीबी पाटील ने भी ओपन बोर्ड परीक्षा की कॉपियों में छेड़छाड़ का मामला पकड़ा था। उस समय कलेक्टर पीएल सोलंकी ने ओपन बोर्ड को लिखकर अनुशंसा की कि श्योपुर में ओपन बोर्ड की परीक्षा ही न कराई जाएं। इन परीक्षाओं में लगातार धांधली हो रही है।
ओपन बोर्ड परीक्षा की स्कैन की गई कॉपियों में गड़बड़ी हुई है। कुछ मूल कॉपियां जो कोरी हैं, वह भोपाल में भरी हुई मिलीं। यह गलती हमारे यहां से नहीं हुई है। जांच के बाद ही असल दोषी का पता लगेगा।
ओपन बोर्ड परीक्षा में कॉपियों से छेड़छाड़ मिली है। इसकी जांच चल रही है। दो उपसंचालक पिछले दिनों श्योपुर आकर जांच कर चुके हैं। उन्हें कुछ गड़बड़ मिली इसलिए परीक्षा प्रभारी को हटा दिया गया है। मामला पूरी तरह हमें भी नहीं बताया गया है।