रितु फोगाट ने पोलैंड में चल रही विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर खुशी ला दी।

हरियाणा की पहलवान रितु फोगाट (48 किग्रा) ने पोलैंड में चल रही पहली अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में शुक्रवार को रजत पदक जीतकर भारतीय खेमे में खुशी ला दी।
पिछले तीन दिन से भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। ओलिंपियन गीता फोगाट की बहन रितु को टूर्नामेंट के चौथे दिन फाइनल में तुर्की की इविन डेमारहन के हाथों शिकस्त खाकर रजत से ही संतोष करना पड़ा। इससे पहले वॉकओवर से सीधे क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने वाली रितु ने बुल्गारिया की मिगलेना जॉर्जिवा को 4-2 से, जबकि सेमीफाइनल में कड़े मुकाबले में चीन की जियांग जुहु को 4-3 से पराजित किया।
एक अन्य भारतीय पहलवान उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की दिव्या सेन (69 किग्रा) रेपचेज के मुकाबले में लिथुआनिया की डेनॉट से 4-2 से हराकर कांस्य पदक की दौड़ से बाहर हो गई। वहीं पिंकी जागड़ा (53 किग्रा) क्वालीफाइंग दौर में ही यूक्रेन की पहलवान बेरेजा से 4-0 से हराकर बाहर हो गईं।

दिल्ली में स्मॉग संकट गहराया तो ऊंची इमारतों पर चढ़ की गई पानी की बौछार

पिछले दिनों दिल्ली में स्मॉग संकट गहराया तो ऊंची इमारतों पर चढ़ पानी की बौछार की गई। हेलिकॉप्टर से पानी का छिड़काव करने की योजना बनी। उदाहरण देकर कहा गया कि हमें चीन से सीखना चाहिए, वह मशीनों के जरिये स्मॉग को हटाता है। सोचने वाली बात है कि हम जिस चीन की मिसाल दे रहे थे, वह खुद भारत में बनी एंटी स्मॉग मशीनों का इस्तेमाल करता है।
बहरहाल, दिल्ली सरकार ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। क्लाउड टेक कंपनी के सीईओ यमुना नगर(हरियाणा) के रहने वाले सुशांत सैनी ने बताया कि मशीन का ट्रायल जल्द ही दिल्ली में होगा। सुशांत मैकेनिकल इंजीनियर हैं और उनका दावा है कि देश में सिर्फ उनके पास इस तरह की तकनीक है।
इंजीनियरिंग करने के बाद सुशांत ने हीरो होंडा कंपनी में नौकरी की। कुछ खास करने की चाह मे नौकरी छोड़ दी। यमुनानगर आ गए। वर्ष 2005 में क्लाउड टेक कंपनी बनाई। उन्होंने पांच तरह की मशीनें बनाईं जो स्मॉग (वातावरण में धूल, कार्बन और सूक्ष्म धातु कणों की मात्रा बढ़ जाना), फॉग (कोहरा), मिस्ट (धुंध), डस्ट (धूल), नमी, गंध व कीट नियंत्रण के काम आती हैं। इनकी कीमत छह से तीस लाख रुपए तक है। इनमें फॉग कैनन डस्ट सप्रेशन सिस्टम स्मॉग दूर करने में इस्तेमाल होती है।
सुशांत ने यमुनानगर के मानकपुर और अहमदाबाद में दो प्लांट लगाए हैं। खनन, थर्मल, सीमेंट, स्टील, एनटीपीसी, पेट्रोलियम कंपनियों, चाय बागानों और दूसरी औद्योगिक इकाइयों में उनकी मशीन इस्तेमाल हो रही हैं। कंपनी का टर्नओवर 25 करोड़ से अधिक पहुंच गया है।
ऐसे काम करती है स्मॉग-फॉग कैनन मशीन
– सेंसर के कारण प्रदूषण पीएम 2.5 से ज्यादा होते ही मशीन स्वतः कार्य शुरू कर देती है।
– पानी को इतने अधिक प्रेशर पर निकालते हैं कि उसकी बूंदें धूल के कण के आकार (0.5 से 2 माइक्रोन) की हो जाएं।
– इनके आपस में टकराते ही धूल कण का वजन बढ़ता है और वह नीचे आ जाता है।
-15 मिनट का स्प्रे 5 घंटे की बारिश जितना असर डालता है। – 4 से 6 किमी तक वातावरण एक दम साफ हो जाता है।

मंत्री अर्जुन खोटक को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका

महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना के कोटे से मंत्री अर्जुन खोटक को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान विधायक खोटकर की सदस्यता रद्द कर दी है।
खोटकर जालना विधानसभा सीट से विधायक हैं और मौजूदा भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में टेक्सटाइल, पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन मंत्री हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के जस्टिस टीवी नालावाडे ने याचिकाकर्ता कैलाश गोरंत्यल की याचिका पर अपना फैसला सुनाया। गोरंत्यल ने अपनी याचिका में दावा किया है कि खोटकर ने नामांकन की समय सीमा खत्म होने के बाद पर्चा दाखिल किया था। उन्होंने अदालत से खुद को जालना से विजेता घोषित करने की मांग भी की।
याचिकाकर्ता कैलाश ने कांग्रेस की टिकट पर खोटकर के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

आपबीती :- लगा था नहीं बच पाऊंगा, लेकिन आज नई जिंदगी मिल गई

भोपाल से सटे जंगल में बाहरी दखल से बाघ आक्रामक हो गए हैं। इसी का नतीजा है कि अब वे इंसानों पर हमला करने लगे हैं। शुक्रवार को पहली बार भोपाल से सटे मेंडोरा के जंगल में एक बाघ ने वनकर्मी पर हमला कर दिया।
इससे वनकर्मी घबरा गया और शोर मचाने लगा, तब तक बाघ झाड़ियों की तरफ भाग गया। हमले में वनकर्मी के बाएं पैर पर दो जगह बाघ के नाखून से गहरे घाव लगे। घायल वनकर्मी का जेपी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
घायल वनकर्मी नारायण सिंह मीना ने बताया कि रोज की तरह वह शुक्रवार सुबह 9 बजे समरा रेंज की मेंडोरा बीट में पैदल गश्ती पर निकला था। तभी सामने से बाघ ने अचानक हमला कर दिया। बाघ का पंजा उसके बाएं पैर पर जांघ और घुटने के नीचे दो जगह लगा। घटना से वह घबरा गया और बचाओ-बचाओ कहकर शोर मचाने लगा। तब तक बाघ झाड़ियों की तरफ निकल गया। शोरगुल सुनकर पास में काम कर रहे मजदूर आए और उन्होंने डिप्टी रेंजर, नाकेदारों को सूचना देकर वनकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया।
रोज की तरह मैं जंगल में झाड़ियों के बीच पगडंडियों से पहाड़ी की तरफ जा रहा था। अचानक सामने से बाघ आ गया। मैंने सोचा अब नहीं बच पाऊंगा। मेरे हाथ-पांव कांप रहे थे, तब तक बाघ ने मुझ पर हमला कर दिया। मैं चिल्लाने लगा तो वह जंगल की तरफ चला गया।
गनीमत रही कि वह अपने मुंह और पंजे से मुझे पकड़ नहीं पाया और मैं बच गया। आज मुझे नहीं जिंदगी मिली है। 25 साल से जंगल में बाघ की देखरेख कर रहा हूं, कई बार आमना-सामना हो चुका था, लेकिन ऐसी नौबत कभी नहीं बनी। आज के बाद कभी पैदल गश्ती पर जंगल नहीं जाऊंगा, चाहे भले ही नौकरी चली जाए। आज मेरी जान चली जाती तो मेरा परिवार अकेला हो जाता। (जैसा कि घायल वनकर्मी ने नईदुनिया को बताया।)
वनकर्मी को पता था कि क्षेत्र में बाघ का मूवमेंट है। ऐसे में उसे अकेले गश्ती पर नहीं जाना था। वन विभाग की तरफ से घायल का इलाज कराया जा रहा है। बाघ की देखरेख बढ़ा दी है। अलग से गश्ती करने दो टीमें बनाई गईं हैं। – डॉ. एसपी तिवारी, वन संरक्षक, भोपाल
इस घटना से वन विभाग को सीख लेनी चाहिए। क्योंकि बाघ बाहर निकलकर हमला नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनके क्षेत्र में बाहरी दबाव बढ़ने के कारण खुद की सुरक्षा में वे हमला
कर रहे हैं। राजानी से सटे जंगल में अतिक्रमणकारियों को हटाकर बाघों की सुरक्षा बढ़ानी होगी।