भारतीय स्टार महिला खिलाड़ी पीवी सिंधू ने गुरुवार को विजयी अभियान जारी किया।

रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता भारतीय स्टार महिला खिलाड़ी पीवी सिंधू ने गुरुवार को अपना विजयी अभियान जारी रखते हुए हांगकांग ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, ओलंपिक कांस्य पदक विजेता भारतीय खिलाड़ी साइना नेहवाल और एचएस प्रणय अपने-अपने मुकाबलों में हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता सिंधू ने महिला सिंगल्स के मुकाबले में जापान की अया ओहोरी को 21-14, 21-17 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई। विश्व की तीसरे नंबर की खिलाड़ी सिंधू ने दूसरे दौर का यह मुकाबला 39 मिनट में अपने नाम किया।
सिंधू की यह जापानी खिलाड़ी पर तीसरी जीत है। सिंधू का अगले दौर में एक और जापानी खिलाड़ी अकोन यामागुची से शुक्रवार को मुकाबला होगा। विश्व की दसवें नंबर की खिलाड़ी नेहवाल अपनी लय में नहीं दिखी और महिला सिंगल्स के दूसरे दौर के मुकाबले में आठवीं वरीय चीन की चेन युफेई 21-18, 19-21, 10-21 से हार गई।
चीनी खिलाड़ी ने नेहवाल को एक घंटे से भी कम समय में शिकस्त देकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया। पुरुष सिंगल्स में भारतीय खिलाड़ी एचएस प्रणय को हार का सामना करना पड़ा। वह जापान के कजूमासा सकाई से 21-11, 10-21, 15-21 से 54 मिनट में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
प्रणय को तीसरी बार सकाई से हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले अन्य भारतीय खिलाड़ी पारूपल्ली कश्यप और सौरव वर्मा पहले दौर में हार गए थे।

15 दिसंबर से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र

संसद का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से शुरू होगा और 5 जनवरी तक चलेगा। शुक्रवार को दिल्ली में हुई संसदीय समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसकी पुष्टि करते हुए संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि सत्र 15 दिसंबर से शुरू होकर 5 जनवरी तक चलेगा। यह 14 दिन का सत्र होगा जिसमें 25 और 26 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि मैं सभी दलों से अपील करता हूं कि सत्र में सहयोग करें ताकि यह सफल और परिणामदायक रहे। हम यह भी उम्मीद करते हैं कि संसद के इस सत्र में सभी की उपस्थिति शत प्रतिशत रहेगी जिसमें नया साल भी शामिल है।
बता दें कि इस बार संसद का यह शीत सत्र कई मायनों में अहम होगा। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण बिलों को पेश किया जाएगा। इनमें हाल ही में कैबिनेट द्वारा दिवालियापन को लेकर कानून में संशोधन को लेकर विधेयक भी शामिल है।

हार्दिक पटेल को वाई श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा मुहैया

गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भले ही कांग्रेस के पाले में जा रहे हों लेकिन केंद्र सरकार ने ने उन्हें वाई श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा मुहैया कराई है। हार्दिक को यह सुरक्षा सेंट्रल इंटेलीजेंस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर दी जाएगी। इस रिपोर्ट में हार्दिक को सुरक्षा देने की वकालत की गई है।
यह जानकारी गुरुवार को सरकारी सूत्रों ने दी। पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के नेता की सुरक्षा की जिम्मेवारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सौंपी गई है।
सीआईएसएफ के कमांडो जल्दी ही पाटीदार नेता की सुरक्षा की कमान अपने हाथों में ले लेंगे। गुजरात में यात्रा के दौरान पटेल के साथ करीब आठ कमांडो रहेंगे।
सीआईएसएफ की एक विशेष वीआईपी सुरक्षा शाखा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत जैसे करीब 60 गणमान्य लोगों की सुरक्षा इसी शाखा के पास है।

मध्य प्रदेश में 2 हजार 820 बच्चे अतिकुपोषित एवं 26 हजार 35 बच्चे कुपोषण के शिकार

जिले में पोषाहार, स्नेह सरोकार, ममता अभियान सहित सांझा चूल्हा आदि योजनाओं के जरिए कुपोषण भगाने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। लेकिन कुपोषण बधा का पीछा नहीं छोड़ रहा। महिला बाल विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2 हजार 820 बच्चे अतिकुपोषित एवं 26 हजार 35 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।
दोनों श्रेणियों को मिला दें तो कुल 28 हजार 855 में से 15 हजार 380 बालिकाएं एवं 13 हजार 775 बालक कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। आंकड़ों से जाहिर है जिले में कुपोषण ने बालकों की अपेक्षा बालिकाओं को अधिक घेर रखा है। बड़ी तादात में कुपोषित बच्चे सामने आने के बाद कलेक्टर ने प्रशासनिक अफसरों से अति कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल करने के निर्देश दिए हैं। इधर कुपोषण से ग्रस्त बच्चों को ठीक करने के लिए माता-पिता नीम हकीमों की शरण में जा रहे हैं। सितम्बर माह में झाड़ फूंक के चक्कर में बरखेड़ा गांव की ढाई वर्षीय दीपिका की जान चली गई थी।
जिले में अति कुपोषित बच्चों को थर्ड मील योजना के तहत आंगनबाड़ियों के माध्यम से दोपहर तीन बजे भोजन देने की योजना फ्लॉप हो गई है। जिले में कहीं भी व्यवस्थित ढंग से यह योजना लागू नहीं है। मामले में मबावि अधिकारी चंद्रसेना भिड़े ने स्वीकारा कि जिले में थर्ड मील का क्रियान्वयन व्यवस्थित ढंग से नहीं हो पा रहा है। कलेक्टर साहब से चर्चा कर जल्द इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। ज्ञात हो कि जिले में 2 हजार 417 आंगनवाड़ी केंद्र है।
सीएमएचओ डॉ अनुसूईया गवली के अनुसार बच्चों में कुपोषण उनकी माताओं के खानपान एवं पोषण स्तर से हो रहा है। समाज के पिछड़ेपन की वजह से माताएं दो बच्चों के बीच में कम से कम दो साल का अंतर नहीं रखती। साथ ही पर्याप्त डाइट भी नहीं लेती। इसलिए माता एवं होने वाली संतान दोनों ही कमजोर रहती है। कम उम्र में शादी होना भी शारीरिक कमजोरी की एक प्रमुख वजह है। ज्ञात हो कि जिले में बालविवाह आज भी मोटे पैमाने पर हो रहे हैं।
स्नेह सरोकार: शासन की इस योजना के तहत अति कुपोषित बच्चों को सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी या किसी भी संपन्न् व्यक्ति द्वारा गोद लेकर पोषण आहार देने की जिम्मेदारी ली जाती है।
सांझा चूल्हा: इस योजना के तहत आंगनबाड़ियों में 3 से 6 साल के बच्चों को प्रतिदिन नाश्ता एवं भोजन दिया जाता है।
पोषाहार: इस योजना के तहत आंगनबाड़ियों से तीन साल तक के बच्चों एवं गर्भवतियों को सूखे राशन के पैकेट देकर 125 ग्राम प्रतिदिन पकाकर डाइट देने की व्यवस्था है।
काम्पलीकेशन यानी जटिलताओं वाले बच्चे जिनमें खून, शूगर, पानी आदि की कमीं हो जाती हैं। ऐसे बच्चों को गंभीर जटिलता की श्रेणी में रखा जाता हैं। ऐसे बच्चों को यदि समय पर इलाज न मिले तो वह मरणासन्न् अवस्था में पहुंच सकते हैं। बिना डाक्टरों की जांच के इनका चि-ांकन नहीं किया जा सकता।
अतिकुपोषित बच्चों की पहचान करके उन्हें एनआरसी में भर्ती कराने के लिए महिला बाल विकास अधिकारी को कहा है। ओपीडी से भी बच्चों को केंद्र में भर्ती किया जा रहा है। हम नेगेटिव नहीं हैं। कुपोषण से एक भी बच्चे को मरने नहीं देंगे।
महिला बाल विकास अधिकारी से कहा है कि वह गंभीर एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों एवं ऐसे परिवार को चिन्हित करें जो वास्तव में गरीब हो। सूची को हम अफसरों को उपलब्ध करा रहे हैं। बच्चों को गोद लेकर सरकारी अफसर पोषाहार देकर देखभाल करेंगे। स्वयहायता समूहों के माध्यम से ऐसे परिवारों की महिलाओं को रोजगार देने की योजना भी है। मीडिया एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी अपील है कि अति कुपोषित बच्चों को गोद लेकर देखभाल की जिम्मेदारी लें।