भारतीय टीम को दूसरे टेस्ट मैच में झटका लगना तय

श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में संघर्षरत भारतीय टीम को दूसरे टेस्ट मैच में एक बड़ा झटका लगना तय है। भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट मैच 24 नवंबर से नागपुर में खेला जाना है और इसमें भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार का नहीं खेलना लगभग तय है।
भुवनेश्वर कुमार की 23 नवंबर को मेरठ में नूपुर नागर से शादी होनी है। इस स्थिति में शादी के ठीक अगले दिन भुवी का नागपुर में टेस्ट मैच में खेलना संदिग्ध है। बीसीसीआई सिलेक्टर्स ने दो टेस्ट मैच के लिए घोषित भारतीय टीम में भुवनेश्वर कुमार को शामिल किया है। वैसे भुवी की दूसरे टेस्ट के लिए उपलब्धता के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
भारतीय तेज गेंदबजा मोहम्मद शमी कोलकाता टेस्ट में फिटनेस संबंधी समस्या से जूझते दिखे। ईशांत को टीम प्रबंधन ने रणजी ट्रॉफी मैच के लिए रिलीज कर दिया था।
भुवी और नूपुर की मेरठ के एक होटल में 23 नवंबर को शादी होगी और उसी रात वहां डिनर होगा। इसके बाद 26 नवंबर को बुलंदशहर स्थित पैतृक गांव में समारोह होना है और इसके चलते इस बात की संभावना नहीं के बराबर है कि भुवी दसरे टेस्ट मैच में हिस्सा लेंगे।

नेपाल प्रधानमंत्री के इकलौते बेटे प्रकाश का दौरा पड़ने से निधन

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कुमार दहल प्रचंड के इकलौते बेटे प्रकाश का रविवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 36 वर्ष के थे। प्रकाश अपने पिता के राजनीतिक सचिव और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी-सेंटर) के केंद्रीय सदस्य भी थे।
अस्पताल सूत्रों ने बताया कि प्रकाश को सुबह थापाथली स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यह दुखद समाचार सुनते ही माओवादी पार्टी के मुखिया प्रचंड झापा से काठमांडू रवाना हो गए। वह चुनाव प्रचार के लिए झापा गए थे। नेपाल में दो हफ्ते बाद ही संसदीय और प्रांतीय चुनाव के पहले चरण का मतदान होना है। प्रकाश की पत्नी बीना भी कंचनपुर सीट से संसदीय चुनाव लड़ रही हैं। प्रकाश के अलावा प्रचंड की तीन बेटियां हैं।

नामांकन से पहले अंत तक चली लंबी तकरार कांग्रेस और पाटीदारों के बीच रविवार को सहमति

गुजरात में पहले चरण के नामांकन से पहले अंत तक चली लंबी तकरार, खींचतान और कई दौर की बातचीत के बाद कांग्रेस और पाटीदारों के बीच रविवार को सहमति बन गई।
इस सहमति में पटेलों के लिए आरक्षण को सबसे ऊपर होने का दावा किया गया है। लेकिन इससे भी बड़ी बात यह कि पाटीदार नेताओं को कांग्रेस ने अपने टिकट पर मैदान में उतरने का मौका दे दिया है।
यानी पाटीदार आंदोलन समिति (पास) के कई नेता कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। इस बीच बताया गया है कि कांग्रेस के साथ समझौते का पूरा ब्योरा राजकोट में पाटीदार के नेता हार्दिक पटेल सोमवार को खुद देंगे। गुजरात में दो चरणों में 9 दिसंबर और 14 दिसंबर को मतदान होंगे। मतगणना 18 दिसंबर को होगी।
हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाली पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) कांग्रेस के साथ कड़ी सौदेबाजी कर रही थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ‘पास’ ने कांग्रेस से करीब 20 सीटों की मांग की थी। इसके अलावा अल्पेश ठाकोर के नेतृत्व वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) गुट ने भी 12 से 15 सीटों की मांग की थी।
अल्पेश हाल ही में कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। इन चुनौतियों के अलावा गुजरात कांग्रेस में गुटबाजी और असंतोष को भी सूची जारी होने में विलंब का कारण माना जा रहा था। दूसरी ओर, भाजपा अपने प्रत्याशियों की दो सूचियां जारी कर इस मामले में बढ़त बना चुकी है।
रविवार शाम गांधीनगर में कांग्रेस नेताओं और ‘पास’ नेताओं के बीच बैठक में आरक्षण के मसले पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक के बाद कांग्रेस ने ‘पास’ नेताओं के साथ समझौते का दावा किया।
गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने बताया कि पाटीदारों के साथ जो सहमति होनी थी, वह हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने फॉर्मूले को लेकर कुछ नहीं बताया।
गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने रविवार को कहा कि वह इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया कि वह प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी हाईकमान से नाखुश हैं। हालांकि उनकी इस घोषणा को कांग्रेस की ओर से प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने में की जा रही देरी से जोड़कर ही देखा जा रहा है।
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल के घर जाकर उनसे मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। रूपाणी सोमवार को राजकोट (पश्चिम) से नामांकन दाखिल करेंगे।
मुलाकात के बाद रूपाणी ने बताया कि आदरणीय केशूभाई पार्टी के वरिष्ठतम सदस्य हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित किया है।

पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई पेंशन योजना का पूरा लाभ दिलाने में बाधक बन रहा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन

प्रदेश के पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई पेंशन योजना का पूरा लाभ दिलाने में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) बाधक बन रहा है। ओडिशा सहित कुछ अन्य राज्यों में ऐसा नहीं है। उपमहासचिव चंद्रशेखर परसाई ने कहा कि यह विसंगति एवं भ्रष्टाचार दूर कराने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। यह ऐलान निवृत्त कर्मचारी 1995 राष्ट्रीय समन्वय समिति के राज्य स्तरीय पहले सम्मेलन में किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बढ़ी हुई पेंशन के मामले में ईपीएफओ बाधक बन रहा है, भुवनेश्वर (ओडिशा) में ऐसा नहीं है। 1 सितंबर 2014 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले एवं अभी कार्यरत कर्मचारियों को हायर पेंशन का लाभ दिलाने की लड़ाई जारी है। ‘एक्जम्टेड” संस्थानों को भी बढ़ी हुई पेंशन के दायरे में लिए जाने की मांग की जा रही है।
इसके लिए ईपीएफओ द्वारा 31 मई 2017 को जारी आदेश निरस्त किए जाने की मांग को लेकर 21 फरवरी 2018 को रामलीला मैदान दिल्ली में देशभर के पेंशन भोगी आकर धरना देंगे। साथ ही ईपीएफ अधिनियम की विसंगतियों को दूर करने, पीएफ पर मिलने वाली ब्याज दरों में बढ़ोतरी और 3 सितंबर 2013 से राज्य सभा में लंबित कोशियारी कमेटी की सिफारिशों को लागू कराने का दबाव बनाया जाएगा। सम्मेलन का आयोजन एमपी स्टेट एग्रो कार्पोरेशन कर्मचारी संघ द्वारा किया गया था।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सलाहकार एवं मप्र खनिज विकास निगम अध्यक्ष शिव चौबे ने आश्वासन दिया कि वह शासन के स्तर पर हर संभव मदद दिलाएंगे। भूमि विकास निगम के कर्मचारी रहे चौबे को भी 845 रुपए ईपीएफ पेंशन मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पहले भी वह वर्षों तक संघर्ष कर चुके हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश येंडे ने 1995 की योजना का ब्योरा दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी भी दी।
उपमहासचिव परसाई ने बताया कि सम्मेलन में प्रदेश के 48 जिलों से करीब 1500 पेंशनभोगी एवं कर्मचारियों ने कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने बताया कि ओडिशा की तर्ज पर प्रदेश में भी बढ़ी हुई पेंशन की मांग को लेकर वह ईपीएफओ के क्षेत्रीय कमिश्नर को मांग पत्र भी सौंपेंगे। कार्यक्रम के समापन पर जेएस पुरी ने आभार जताया।