न्यूजीलैंड को करारा झटका टिम साउदी मैच के ठीक पूर्व टीम से बाहर

न्यूजीलैंड को करारा झटका लगा जब उसके प्रमुख गेंदबाज टिम साउदी वेस्टइंडीज के खिलाफ 1 दिसंबर से शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच के ठीक पूर्व टीम से बाहर हो गए।
साउदी पिता बनने वाले हैं और इसके चलते वे अपनी पत्नी के साथ समय बिताना चाहते हैं। साउदी की अनुपलब्धता के चलते लोकी फर्ग्यूसन को टीम में शामिल किया गया था अब बल्लेबाज जॉर्ज वर्कर को भी टीम में शामिल किया गया है।
सिलेक्टर गेविन लार्सन ने कहा, क्रिकेट से भी महत्वपूर्ण कई बातें होती हैं और इसी के चलते साउदी के लिए इस समय परिवार के साथ रहना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उधर वर्कर ने इस वर्ष 9 फर्स्ट क्लास मैचों में 49.13 की औसत से 737 रन बनाए हैं। उन्होंने अभी तक 6 सीमित ओवरों के मैचों में मैचों में न्यूजीलैंड का प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन वे अभी तक टेस्ट डेब्यू नहीं कर पाए हैं। उन्होंने अक्टूबर 2015 में टी20 मैच में न्यूजीलैंड की तरफ से अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था।
बीजे वाटलिंग की जगह टीम में शामिल किए विकेटकीपर टॉम ब्लंडैल का पदार्पण करना तय है।

ब्रिटेन यात्रा पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

ब्रिटेन यात्रा पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लंदन में नमामि गंगे को लेकर आयोजित रोड शो में भागीदारी की। उन्होंने भारतीय मूल के उद्योगपतियों से मिशन में शामिल होने की अपील की।
एक अधिकारी ने बताया कि दो निवेशकों ने कानपुर व पटना के प्रोजेक्टों में काम करने पर अभी तक सहमति जताई है।
गडकरी का कहना था कि गंगा सफाई के लिए कुल 150 प्रोजेक्टों पर मार्च 2018 तक टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उनका कहना था कि इसमें 15 साल की मेंटीनेंस की शर्त पर कंपनियों को प्रोजेक्ट दिए जा रहे हैं।
गंगा व इसकी बीस सहायक नदियों के लिए सरकार के पास बेहतरीन योजना है। इसके तहत विभिन्न व्यावसायिक घरानों व कंपनियों को आमंत्रित किया जा रहा है, जिससे अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके गंगा की कायाकल्प की जा सके।
उन्होंने उम्मीद जताई कि रोड शो के आयोजन के बाद कुछ और उद्योगपति मिशन से जुड़ने को रजामंद हो सकते हैं। उनका कहना था कि कानपुर जैसे शहरों में गंगा को ज्यादा प्रदूषित किया जा रहा है।
सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि गंगा को प्रदूषण मुक्त किया जा सके।
अपने मिशन के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उद्योगपतियों से अपील करती है कि वह इसमें भागादारी करें। एक अधिकारी का कहना है कि बातचीत सार्थक है और जल्द परिणाम मिलेंगे।

जनता के पैसे से राजनीतिज्ञों को सरकार सुरक्षा क्यों मुहैया करा रही

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि जनता के पैसे से राजनीतिज्ञों को सरकार सुरक्षा क्यों मुहैया करा रही है। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की।
चीफ जस्टिस मंजुला छेल्लर व जस्टिस एमएस सोनक ने कहा कि राजनेता अपनी सुरक्षा का खर्च अपनी पार्टी के खाते से वहन कर सकते हैं तो उन्हें सरकार अपने खर्च पर बॉडीगार्ड क्यों दे रही है। आखिर इसकी जरूरत क्या है।
एक वकील ने याचिका दायर करके अदालत से अपील की है कि पुलिस को आदेश दिया जाए कि ऐसे लोगों की सुरक्षा तत्काल वापस की जाए।
याचिका में कहा गया है कि राजनतिज्ञों के साथ फिल्म अभिनेताओं व अन्य वीआइपी लोगों को भी सरकार अपने खर्च पर सुरक्षा मुहैया करा रही है। इन लोगों ने सरकार को एक पैसे का भुगतान इसकी एवज में नहीं किया है।
याचिका के अनुसार तकरीबन एक हजार जवान सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किए गए हैं। अदालत ने सरकार से कहा कि जिन लोगों को सुरक्षा दी गई है, उनकी लगातार निगरानी करके यह पता लगाया जाए कि उन्हें सुरक्षा की जरूरत अब भी है या नहीं। सरकार को लगता है कि इन लोगों के जीवन पर अब कोई संकट नहीं है तो सुरक्षा तत्काल वापस की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में तैनात जवानों को छह माह बाद दूसरे काम पर लगाया जाए, जिससे वह अपने काम के प्रति सजग रहें। यह भी कहा गया कि जवानों की फिटनेस को भी लगातार परखा जाए।
हल्के मूड में उन्होंने कहा कि वह अपने बाडीगार्ड से तेज भाग सकती हैं। हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी के मामले से सबक लेने की नसीहत दी। पूर्व प्रधानमंत्री को कहा गया था कि वह अपने बॉडीगार्ड बदल लें, लेकिन उन्होंने इसकी अनदेखी की, नतीजा सबके सामने है।

शाजापुर में लगातार तीन साल से जलस्तर घट रहा

शाजापुर जिले में लगातार तीन साल से जलस्तर घट रहा है। कुछ इलाकों में गिरावट 5 मीटर तक है। इससे लगभग 300 हैंडपंप सूख चुके हैं। विधानसभा सत्र के तीसरे दिन हंगामे के बीच विधायक अरुण भीमावद ने अपना सवाल रखा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री की ओर से रुस्तम सिंह ने जवाब दिया कि भू जल स्तर गिरने का मुख्य कारण अनियमित बारिश, किसानों द्वारा निजी जल स्रोतों का दोहन आदि है। इसकी वजह से ही हैंडपंप बंद हो रहे हैं। 10 अक्टूबर 2017 को हुई बैठक में जल अभावग्रस्त घोषित करते हुए सरकार ने सात तहसीलों शाजापुर, बड़ोदिया, शुजालपुर, कालापीपल, गुलाना,पोलापकला और अवंतीपुर को सूखाग्रस्त माना है।
ग्रीष्मकाल में पेयजल की परेशानी न आए इसलिए 250.88 लाख की कार्ययोजना बनाई है। जिसके अंतर्गत नवीन नलकूपों का खनन कर हैंडपंप स्थापना का कार्य, स्थापित हैंडपंपों में राइजर पाइप बढ़ाने का काम एवं सिंगलफेस मोटर पंप स्थापित करने, कम जल आवक क्षमता वाले नलकूपों में हाइड्रोे फैक्चरिंग कार्य व
(नईदुनिया न्यूज)। जीएन गोल्ड चिटफंड कंपनियों ने द्वारा देवास में 35 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी की गई। देवास जिले में ही 20 हजार से ज्यादा निवेशकर्ता हैं। इनके साथ हुई धोखाधड़ी की भरपाई के लिए देवास कोर्ट ने कंपनी की चल अचल संपत्ति बेचकर पीड़ितों को राशि दिए जाने को कहा है। विधायक फूलचंद वर्मा के सवाल के जवाब में गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा। कंपनी को 35 करोड़ रुपए और लगभर इतना ही ब्याज चुकाने को कहा गया है।
शुजालपुर के पांच गांव़ों में पेयजल के लिए टंकी तो बना दी गई है लेकिन इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। विधायक जसवंत सिंह हाड़ा के सवाल के लिखित जवाब में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ने यह जवाब दिया। उन्होंने बताया अभी किसी योजना का काम पूरा नहीं हुआ है। 2018-19 में पूर्ण होने की संभावना है। वित्तीय संसाधन की उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर ग्राम पंचायतों से मिलने वाले प्रस्तावों के आधार पर नवीन ग्रामों में नल-जल योजना की स्वीकृति दी जाएगी।
पशु या पशु समूह ऊंट, भेड़, बकरियों के समूह अन्य प्रांतों से प्रदेश की सीमा में आकर कुछ समय के लिए विचरण करते हैं। उनके साथ कई संक्रामक रोक भी आ सकते हैं। विधायक राजकुमार मेव के सवाल के जवाब में पशुपालन मंत्री अंतरसिंह आर्य ने यह बात मानी लेकिन विभाग के पास इन्हें चिन्हित कर रोकने या पंजीयन करने का कोई उपाय नहीं है। बीमारी पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की योजना है।

उत्तर कोरिया की ओर से एक और बैलिस्‍टिक मिसाइल लॉन्च की तैयारियों के संकेत

उत्तर कोरिया की ओर से एक और बैलिस्‍टिक मिसाइल लॉन्च की तैयारियों के संकेत जापान को मिले हैं।
जापान के सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को बताया, जापान को कुछ रेडियो सिग्‍नल प्राप्‍त हुए हैं जो उत्तर कोरिया द्वारा एक और बैलिस्‍टिक मिसाइल परीक्षण की संभावना की पुष्‍टि कर रहे हैं। हालांकि ये सिग्‍नल आम नहीं हैं और सैटेलाइट इमेज से किसी नई गतिविधि का पता नहीं चल रहा है।
अप्रैल से एक माह में दो या तीन मिसाइलों की फायरिंग के बाद सितंबर में उत्तर कोरियाई मिसाइल लांचिंग रुक गयी जब प्‍योंगयांग द्वारा फायर किया गया रॉकेट जापान के उत्तरी होक्‍काइदो आइलैंड के ऊपर से गुजरा था।
जापान की क्‍योदो न्‍यूज एजेंसी के अनुसार, रेडियो सिग्‍नल मिलते ही जापान सरकार अलर्ट हो गयी। इन रेडियो सिग्‍नल के अनुसार जल्‍द ही लांच होने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार, ये सिग्‍नल उत्तर कोरियाई मिलिट्री द्वारा विंटर मिलिट्री ट्रेनिंग से संबंधित भी हो सकता है।
दक्षिण कोरिया के न्‍यूज एजेंसी ने दक्षिण कोरिया के सरकारी सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया व जापान को भी संभावित मिसाइल लॉन्च के संकेत मिले हैं।

12वीं विज्ञान के एक छात्र ने कमरे में फांसी लगाकर कर ली आत्महत्या

राजकोट में दोस्त के बाद नहीं करने से दुःखी 12वीं विज्ञान के एक छात्र ने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को हॉस्टल के कमरे में एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें इस बात का उल्लेख किया गया है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मूला मोरबी तहसील के वाघपर पिलुडी गांव का निवासी छात्र जैनिक सुराणी अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता अरविंद भाई दूसरों के खेत में मजदूरी करते हैं। जैनिक टंकारा स्थित आर्यम विद्यालय नामक निजी स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था। दोस्तों के मुताबिक, वह बहुत भावुक व जज्बाती स्वभाव का लड़का था।
जानकारी के मुताबिक, रविवार को जब स्कूल के सहपाठी मैच खेलने के लिए जैनिक को बुलाने गए तो उसका शव कमरे में पंखे से लटक रहा था। स्कूल संचालकों ने इस बारे में तुंरत ही पुलिस को सूचना दी।
बताया जा रहा है कि फांसी लगाने से पहले जैनिक ने एक सुसाइड नोट लिखी थी, जो उसके कमरे से बरामद की गई है। सुसाइड नोट में उसने लिखा है कि शुक्रवार को किसी बात को लेकर उसकी अपने दोस्त से अनबन हुई थी और इस वजह से ही वो उससे बात नहीं कर रहा था। इसकी वजह से वह काफी दुखी था और उसने आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठा लिया।
छात्र के आत्महत्या करने की खबर से स्कूल कैम्पस में सनसनी मच गई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

60 बच्चे नक्सली बन गए मप्र के हालात समझने की कोशिश

माओवादियों को खबरें पहुंचाने के शक में पुलिस की क्रूरता का शिकार हुई छत्तीसगढ़ की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी कहती हैं कि नक्सलवाद से लड़ाई संभव है पर सरकारी नीतियों से कैसे लड़ें? वे कहती हैं छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में नक्सलवाद सरकार की ही देन है। सरकारें इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं होने देना चाहती हैं, क्योंकि नक्सलवाद के नाम पर पैसा मिलता है और राजनीति भी इसी से चलती है।
भोपाल जन उत्सव में राजधानी आईं सोरी ने ‘नवदुनिया’ से विशेष बातचीत में कहा कि छत्तीसगढ़ में सरकार की नीतियां पुलिस को जनता पर अत्याचार करने के लिए मजबूर कर रही हैं। पुलिसकर्मी दिन-रात जंगलों में गश्त करते हैं। गश्त के दौरान कोई घटना न हो तो उनके अफसर नहीं मानते कि गश्त हुई है। बोला जाता है किसी को पकड़कर क्यों नहीं लाए। उन्हें बुरा-भला बोला जाता है। इसलिए वे आदिवासियों को माओवादी बताकर ड्यूटी निभाते हैं।
सोरी कहती हैं नक्सलवाद से निपटना मुश्किल नहीं है। इसके लिए जमीनी लोगों को जोड़ना पड़ेगा। जबकि वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार के अफसर चैंबर में बैठकर इस समस्या से निपटने की योजना बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों में राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। पुलिस का अत्याचार बढ़ गया है। इससे दुखी लोग नक्सली बन जाते हैं।
वे सवाल खड़ा करती हैं कि इस समस्या का हल सरकार के हाथ में नहीं है। कहा जाता है कि नक्सली काम नहीं करने दे रहे तो सरकार ही बताए कि आज तक नक्सलियों ने बड़ी परियोजनाओं को नुकसान क्यों नहीं पहुंचाया। सत्ता पक्ष के लोगों पर हमला क्यों नहीं किया? वे गुनहगारों को फांसी देने के पक्ष में नहीं हैं।
सोरी ने कहा कि मेरे ऊपर हुए अत्याचार का मुझे दुख नहीं है। दुख इस बात का है कि जिन 60 अनाथ बच्चों को मैं नौ साल पहले पढ़ाने के लिए जंगलों से लाई थी। मेरे जेल जाने के बाद वे नक्सली बन गए। उन्होंने एक बार अपने माता-पिता पर अत्याचार देखा था और फिर मुझ पर।
सोरी आदिवासी कल्याण संस्थाओं पर टिप्पणी करती हैं कि ऐसी संस्थाएं भी हक नहीं दिला पा रही हैं। बस पैसे की बंदरबाट की जा रही है। वे कहती हैं कि आदिवासी और महिलाओं के हक के लिए मैं हमेशा लड़ती रहूंगी। मप्र के हालातों को भी समझने की कोशिश कर रही हूं।

पीवी सिंधु और अवध वारियर्स की साइना नेहवाल आमने-सामने

23 दिसंबर से शुरू होने वाली प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) के तीसरे संस्करण के पहले मुकाबले में चेन्नई स्मैशर्स की पीवी सिंधु और अवध वारियर्स की साइना नेहवाल आमने-सामने होंगी। आठ टीमों की लीग के शुरुआती मुकाबले इस संस्करण की नई टीम नॉर्थ ईस्टर्न वॉरियर्स के घर गुवाहाटी में खेले जाएंगे, जो अपना पहला मुकाबला कैरोलिना मारिन की टीम हैदराबाद हंटर्स से खेलेंगे।
23 दिन तक चलने वाली लीग में सारे मुकाबले रात में होंगे, जिससे खिलाड़ियों को अगले मैच के लिए तैयार होने में समय मिल सके। फाइनल मुकाबला 14 जनवरी को हैदराबाद में खेला जाएगा इस लीग में विश्व नंबर एक पुरुष खिलाड़ी विक्टर एक्सेलसन (बेंगलुरु बलास्टर्स) और विश्व की नंबर एक महिला खिलाड़ी ताई जु यिंग (अहमदाबाद स्मैश मास्टर्स) भी इस लीग का हिस्सा होंगी।
चार दिन गुवाहाटी में मुकाबले होने के बाद लीग दिल्ली पहुंचेंगी, जहां पर पांच दिन तक मुकाबले चलेंगे। इसमें दिल्ली डेशर्स को दो मुकाबले घर में खेलने का फायदा मिलेगा। उनका इरादा बेंगलुरु ब्लास्टर्स और हैदराबाद हंटर्स के खिलाफ अधिक से अधिक अंक लेकर सेमीफाइनल में पहुंचने पर होगा।
दिल्ली के बाद लीग लखनऊ पहुंचेंगी, जहां विक्टर एक्सेलसन की टीम बेंगलुरु सान वान हो की मुंबई रॉकेट्स से भिड़ेगी। यहां पर चार दिन तक मुकाबले होंगे। इसके बाद लीग पांच जनवरी को चेन्नई पहुंचेगी और इसके बाद 10 जनवरी को लीग हैदराबाद पहुंचेगी, जहां पर दो लीग मुकाबले होंगे। 12 और 13 जनवरी को सेमीफाइनल मुकाबले होंगे।

भारत व रूस ने किये आतंकरोधी समझौते पर दस्तखत

भारत व रूस ने आतंकरोधी समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह व रूसी के आंतरिक सुरक्षा मंत्री व्लादिमिर कॉलोकोत्सेव की मौजूदगी में यह समझौता परवान चढ़ा। यह अक्टूबर 1993 में हुई संधि का नया रूप है। दोनों देशों में संयुक्त बयान में कहा कि आतंकवाद न तो अच्छा होता है और न ही बुरा। यह केवल आतंकवाद होता है और इससे लड़ने की हर मुमकिन कोशिश होनी चाहिए।
दोनों देशों के बीच तय हुआ कि आतंकवाद से लड़ने के लिए सूचनाओं के आदान प्रदान के साथ पुलिस बलों को प्रशिक्षण देने का काम तेजी से किया जाएगा। रूस व भारत ने इस बात पर खुशी जताई कि 70 सालों से दोनों देशों के संबंध नित नई इबारत लिख रहे हैं। दोनों ने आशा जताई कि दोनों देश भविष्य में एक दूसरे के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। इस दौरान दोनों ने नारकोटिक्स की तस्करी से पैदा होने वाले खतरों पर भी मंथन किया।
भारत के रूसी राजदूत पंकज सरन व रूस के उप आंतरिक सुरक्षा मंत्री इगोर जुबॉव ने समझौते पर दस्तखत किए। गृह मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि दोनों देशों के बीच जो सहमति बनी है उसके बाद आतंकवाद पर करारा प्रहार किया जा सकेगा। अब नई तकनीकों के सहारे खुफिया बल को इस दिशा में लगाया जा सकता है तो सूचनाओं के आदान प्रदान के जरिये आतंकियों की कमर तोड़ी जा सकती है।
गौरतलब है कि राजनाथ सिंह का रूस दौरा सितंबर 2016 में प्रस्तावित था, लेकिन 18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सैन्य मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले के चलते दौरा रद्द कर दिया गया था।

देश के हर कॉल सेंटर का कुछ ऐसा ही हाल

जब कभी उसका क्लाइंट फोन काट देता है, तो वह वॉशरूम जाकर अकेले में रोती है। फिर वह अपनी आंखें धोती है और डेस्क पर वापस आकर फेक अमेरिकी अंग्रेजी में अगली कॉल के लिए तैयार होती है। यह केवल हैदराबाद के एक कॉल सेंटर की कहानी नहीं है, बल्कि देश के हर कॉल सेंटर का कुछ ऐसा ही हाल है।
देश को भले ही कॉल सेंटर्स का हब माना जाने लगा हो, लेकिन देश-विदेश को सर्विस उपलब्ध करा रहे बीपीओ कर्मचारी खासे तनाव में रहते हैं। विदेश से आने वाली कॉल्स पर उन्हें नस्लवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। अमेरिका जैसे देशों के लोग उन्हें ‘जॉब चोर’ तक कह देते हैं।
‘बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिग (बीपीओ) सेंटर्स इन इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाइंट से बात करते हुए कर्मचारियों को नस्लवादी गालियां सुननी पड़ती हैं, जो तनाव का कारण बनती हैं। इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ केंट की श्वेता राजन ने यह रिपोर्ट तैयार की है। वह बताती हैं, ‘यह मंदी के बाद की सच्चाई है। पश्चिमी देशों के क्लाइंट्स का स्वभाव कॉल सेंटर्स वालों के लिए काफी रूखा होता है। यदि उन्हें लगता है कि कॉलर भारतीय है तो उनका सबसे बड़ा डर यह होता है कि ये लोग उनकी नौकरी चुरा रहे हैं और सारी चीजें आउटसोर्स हो रही हैं।’
एक कॉल सेंटर वर्कर ने बताया, ‘अपशब्द यह रोज की बात है, दिन में एक या दो बार। कॉल के बीच में कोई क्लाइंट कहता है, यू इंडियंस!’ रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ने भी बीपीओ कर्मचारियों को प्रभावित किया है। श्वेता का कहना है कि ब्रेग्जिट और अमेरिका में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद नस्लभेदी टिप्पणियां बढ़ गई हैं।
90 के दशक में जब विदेशी कंपनियां भारत आई थीं, तब उन्होंने पूरी कोशिश की थी कि कॉलर्स को पता न चल पाए कि उनकी मदद करने वाला कोई भारतीय है। इसका एक कारण यह भी था कि लोग विदेश में बैठे किसी व्यक्ति से मदद लेने के बजाय उनके देश के व्यक्ति से प्रोडक्ट या सर्विस पर मदद लेना चाहेंगे। 90 के दशक में भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका तक भेजा गया, ताकि वे वहां बात करने के तौर-तरीके सीख जाएं।