कमाई के मामले में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों में दक्षिण भारत के दल सबसे आगे

क्षेत्रीय राजनीतिक दलों में दक्षिण भारत के दल कमाई के मामले में सबसे आगे हैं। देश के तीन सबसे अमीर राजनीतिक दलों की बात करें, तो पहले नंबर पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) है। चंदे और अन्य स्रोतों से जुटाई गई राशि से डीएमके के बाद दूसरे और तीसरे नंबर पर अन्नाद्रमुक (AIADMK) और तेलगू देशम पार्टी है।
यह जानकारी गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फार डैमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की रिपोर्ट से मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-16 के दौरान देश की 32 क्षेत्रीय पार्टियों के पास चंदे और अन्य स्रोतों से जुटाई गई कुल रकम 221.48 करोड़ रुपए रही।
इनमें 77.63 करोड़ रुपए की आमदनी के साथ द्रमुक पहले स्थान पर है। वहीं, 54.94 करोड़ रुपए के साथ अन्नाद्रमुक दूसरे और 15.98 करोड़ रुपए के साथ तेलगू देशम पार्टी तीसरे स्थान पर है। आय के हिसाब से क्षेत्रीय दलों में इन तीन पार्टियों की कुल हिस्सेदारी 67 फीसद थी, जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा खर्च ही नहीं किया गया।
एडीआर ने क्षेत्रीय दलों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए आय और व्यय के ब्यौरे के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। इसमें बड़ा खुलासा करते हुए कहा गया है कि 32 क्षेत्रीय दलों में से केवल 18 ने ही आयकर दाखिल करने और चंदे में मिली रकम का ब्यौरा आयोग को दिया है। कुल 47 क्षेत्रीय पार्टियों में से केवल एक-तिहाई ने अपनी अंकेक्षण रिपोर्ट समय पर दाखिल की है।
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग को अब तक अपनी अंकेक्षण रिपोर्ट नहीं जमा करने वाले 15 क्षेत्रीय दलों में समाजवादी पार्टी, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, राष्ट्रीय जनता दल, इंडियन लोक दल, ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस, ऑल इंडिया यूनाइटेड डैमोक्रेटिक फ्रंट, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन और महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी प्रमुख हैं।

जगमग हुए राजधानी के प्रमुख रेलवे स्टेशन सौर ऊर्जा से जगमग

राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख रेलवे स्टेशन सौर ऊर्जा से जगमग हो गए हैं। नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, आनंद विहार टर्मिनल और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर लगाए गए सोलर पैनल से कुल पांच मेगावाट बिजली मिलेगी।
गुरुवार को रेलवे बिजली इंजीनियरिंग संस्थान द्वारा हरित उपाय एवं रेल विद्युतीकरण विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन किया। यह भारतीय रेल का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र है, जिसकी इकाइयां दिल्ली के प्रमुख चार स्टेशनों के प्लेटफार्म की छतों पर लगाई गई हैं।
इससे न सिर्फ रेलवे के बिजली बिल में कमी आएगी बल्कि पर्यावरण को बचाने में भी मदद मिलेगी। बिल में होगी 421 लाख की कमी : सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत दिसंबर, 2016 में इस योजना पर काम शुरू हुआ था और रिकॉर्ड दस महीनों में इसे पूरा कर लिया गया।
इसे बनाने वाली कंपनी ने पूरा खर्च वहन किया है। वह अगले 25 वर्षों तक इसका रखरखाव भी करेगी। इससे प्रतिवर्ष कुल 76.5 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा, जिससे बिजली बिल में 421.4 लाख रुपए की बचत होगी। वहीं, प्रतिवर्ष 6,082 टन कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन रोका जा सकेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
सौर उर्जा संयंत्र की क्षमता
रेलवे स्टेशन- क्षमता
नई दिल्ली- 2.05 मेगावाट
पुरानी दिल्ली – 1.50 मेगावाट
हजरत निजामुद्दीन- 0.70 मेगावाट
आनंद विहार टर्मिनल-0.80 मेगावाट

आधार कार्ड के सेंटर बनाने बैंकों ने दिया प्राइवेट कंपनियों को ठेका

यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के निर्देश के बाद बैंकों ने आधार कार्ड के सेंटर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अपनी शाखाओं में सेटअप भी लगवाए हैं, लेकिन नियमों की गफलत के कारण अभी तक आधार सेंटर चालू ही नहीं हो सके हैं। यूआईडीएआई ने बैंकों को खुद मशीनरी खरीदकर अपने स्टॉफ के माध्यम से आधार सेंटर चालू करने को कहा है, जबकि अधिकांश बैंकों ने प्राइवेट कंपनियों के सहारे सेंटर शुरू किए हैं।
देश में करीब 15,200 बैंकों की शाखाओं में आधार सेंटर खोले जाना हैं। जब बैंकों में आधार सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया तो नियमों की स्पष्टता नहीं थी। बैंकों को 31 अक्टूबर तक सेंटर खोलने की डेडलाइन दी गई थी। इसके बाद पेनल्टी का प्रावधान था। इसी कारण दो माह पहले कई बैंकों ने टेंडर जारी कर आधार सेंटर संचालित कर रही प्राइवेट एजेंसियों को बैंक शाखाओं में इसके संचालन का काम सौंप दिया।
केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और यूआईडीएआई द्वारा 7 अक्टूबर को जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया कि बैंकों को अपनी शाखाओं में आधार सेंटर खोलने की प्रक्रिया में किसी भी प्राइवेट आधार पंजीकरण करने वाली एजेंसी को शामिल नहीं करना है। इस निर्देश के आने तक कई बैंक टेंडर के माध्यम से प्राइवेट एजेंसियों को सेंटर खोलने का काम सौंप चुके थे। बैंकों के लिए आधार के काम के लिए करीब 30 हजार कर्मचारियों की जरूरत होगी और इतने कम समय में कर्मचारियों की नियुक्ति करना आसान नहीं है। इस वजह से बैंकों को मैनपॉवर आउटसोर्स करने की छूट दी गई।
जिन प्राइवेट एजेंसियों ने बैंकों के साथ करार कर उनकी शाखाओं में आधार का सेटअप लगाया है। एक बैंक शाखा में आधार सेंटर का एक सेटअप लगाने पर करीब 1.5 लाख रुपए खर्च आ रहा है। कई एजेंसियों ने बैंकों की 100 से ज्यादा शाखाओं में सेटअप लगाया है। इंदौर की कुछ एक एजेंसियों ने तो मप्र ही नहीं पंजाब, हरियाणा, गोवा व महाराष्ट्र की बैंकों में भी आधार सेंटर बनाया है। ऐसे में प्राइवेट कंपनियों के करोड़ों रुपए उलझकर रह गए हैं।
इंदौर में हमारी 10 बैंक शाखाओं में आधार का सेटअप लग चुका है। अभी इन सेंटर पर ऑपरेटर्स की मशीनें लगी हैं। इन सेंटर्स के संचालन के मुद्दे पर उलझन है। यही वजह है कि सेंटर अभी शुरू नहीं हुए हैं। इस मुद्दे पर हेड ऑफिस व यूआईडीएआई के अफसरों से बातचीत चल रही है। -रोहित रहंगदाले, मैनेजर फाइनेंशियल इनक्लूजन, बैंक ऑफ इंडिया
हमने पिछले डेढ़ से दो महीने में 6 राज्यों की बैंक शाखाओं में करोड़ों रुपए खर्च कर आधार का सेटअप लगाया है, लेकिन बैंकों के स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं कि इन सेंटर को कब चालू करना है। -भगवत एस. नागौरी, डायरेक्टर ओसवाल कम्प्यूटर्स

भारत ने सुल्तान जोहोर कप जूनियर हॉकी टूर्नामेंट में अमेरिका को २२-० से हराया

भारत ने बुधवार को धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए सुल्तान जोहोर कप जूनियर हॉकी टूर्नामेंट में अमेरिका को 22-0 से रौंद डाला। भारत लगातार तीसरी जीत के बाद 9 अंकों के साथ अंक तालिका में शीर्ष पर है।
भारत की तरफ से हरमनजीत सिंह ने सवाधिक 5 गोल दागे जबकि अभिषेक ने चार गोल बनाए। इनके अलावा विशाल अंतिल और दिलप्रीत सिंह ने भी हैटट्रिक लगाई। मनिंदर सिंह ने दो गोल बनाए जबकि प्रताप लाकरा, रबिचंद्र मोइरांगथेम, रौशन कुमार, शिलानंद लाकरा और विवेक प्रसाद ने 1-1 गोल अपने नाम किए। भारतीय टीम की तरफ से 10 खिलाड़‍ियों ने गोल दागे।
अमेरिकी टीम की यह लगातार तीसरी करारी हार है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने उसे 19-0 से और ग्रेट ब्रिटेन ने 11-0 से पराजित किया था। इस तरह अमेरिका के खिलाफ तीन मैचों में 52 गोल किए जा चुके हैं जबकि वह एक गोल भी नहीं कर पाया है।
दूसरी तरफ भारत की यह लगातार तीसरी जीत है। भारत ने जापान को 3-2 से हराने के बाद मेजबान मलेशिया को 2-1 से हराया था।

हिरोशिमा परमाणु हमले में जीवित बचने वाली महिला लेंगी नोबल पुरस्कार

1945 में अमेरिका के परमाणु हमले में हिरोशिमा से जीवित बचने वाली महिला संयुक्त रूप से नोबल पुरस्कार लेंगी। आइसीएएन को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। अभी 85 साल की सेतसुको थुर्लो संस्था के कार्यकारी निदेशक बीट्रिक फिन के साथ पुरस्कार प्राप्त करेंगी।
छह अगस्त 1945 में हिरोशिमा पर परमाणु हमले के समय वह महज 13 साल की थीं। हमले में उनके स्कूल का भवन तबाह हो गया था। साथी छात्र-छात्राएं झुलस गए थे। उस दौरान वह बच गईं। थुर्लो आइसीएएन में कार्यरत हैं।
गौरतलब है कि दुनिया भर में परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए अभियान चलाने वाले संगठन आइसीएएन को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। इस बार का नोबेल शांति पुरस्कार किसी व्यक्ति की बजाय एक संगठन को मिला है। दस दिसंबर को यह थुर्लो व फिन को दिया जाएगा।
नॉर्वे के ओस्लो में शांति नोबेल पुरस्कार देने वाली कमेटी ने अपनी घोषणा में कहा है कि आइसीएएन को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से होने वाली भयानक मानवीय त्रासदी की तरफ लोगों का ध्यान दिलाने और अपनी कोशिशों से इस तरह के हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए संधि कराने के लिए उसे 2017 का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा।
नोबेल कमेटी ने चेतावनी दी है कि परमाणु युद्ध का संकट लंबे समय के बाद इस वक्त काफी बड़ा है। आइसीएएन दुनिया भर के नागरिक समाज का एक संगठन है जो परमाणु हथियारों पर पूरी तरह से रोक लगाने की संधि और उस पर अमल के लिए अभियान चला रहा है। आइसीएएन 2007 में शुरू किया गया। थुर्लो उस समय से ही इसकी एक अहम सदस्य रही हैं

टीपू सुल्तान ने अपने रॉकेट से अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे आज भी एक किंवदंती

अंग्रेजों से अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टन को बचाते हुए टीपू सुल्तान ने रणभूमि में अपनी जान दे दी थी। मगर, आज भी एक किंवदंती चली आ रही है कि ‘टाइगर ऑफ मैसूर’ ने अपने रॉकेट से अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। उप महाद्वीप में अंग्रेजों को सबसे कड़ी चुनौती का सामना टीपू के शासन में ही करना पड़ा था।
मैसूर में बने रॉकेट, दुनिया में सबसे पहले ऐसे आयुध थे, जिनका सफल इस्तेमाल सैन्य उपयोग के लिए किया गया था। लोहे से सिलेंडर में बारूद भरकर इन रॉकेट को विरोधी खेमे में दागा जाता था।
यह 18 वीं सदी में मैसूर में हैदर अली ने विस्फोटकों से भरे रॉकेट के पहले प्रोटोटाइप को विकसित किया था। उनके बेटे टीपू सुल्तान ने रॉकेट को और बेहतर बनाया और इसके डिजाइन में बदलाव किए। बेलनाकार लोहे के केस बनाकर उनमें बारूद भरा और उसके पीछे डंडा या तलवार लगई, जिससे वे काफी सटीक निशाना लगाने में सक्षम रहते थे।
टीपू के बनाए रॉकेट लगभग 2 किमी की दूरी तक मार करने में सक्षम होते थे। उस समय वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रॉकेट्स थे। 1700 के दशक के अंत में एंग्लो-मैसूर युद्ध के दौरान टीपू सुल्तान ने जिन रॉकेट्स का इस्तेमाल किया, उन्होंने अंग्रेजों की सेना पर बड़ा प्रभाव डाला।
खासतौर पर 1780 में हुए द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध में, जब ईस्ट इंडिया कंपनी के गोला बारूद में टीपू के रॉकेट ने धमाका कर ब्रिटिश सेना को भारत में करारी शिकस्त दी थी। ब्रिटिश पैदल सेना ने उनसे पहले कभी इस तरह के हथियार को नहीं देखा था।
उन्हें सच में पता ही नहीं था कि टीपू की सेना के आखिर किस चीज से हमला किया था। इस तरह के हमले से ब्रिटिश सैनिक बेहद डरे हुए और भ्रम में थे।

श्रद्धा के साथ-साथ सियासत का भी जरिया है मुंबई की छठ पूजा –

उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही तीन दिवसीय छठ पर्व शुक्रवार की सुबह संपन्न हो गया। इससे पहले छठ पूजा के दूसरे दिन उगते सूरज को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गुरुवार की शाम से ही घाटों पर श्रद्धालु जमे रहे।
बिहार-झारखंड, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई सहित पूरे देश में घाट पर छठ पूजा के तीसरे दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दिल्ली एनसीआर के व्रती घाट पर अपने परिवार के साथ पहुंचे और पूजा अर्चना की।
आस्था का महापर्व छठ बिहार समेत देश के कई राज्यों में मनाया जा रहा है। यह पर्व मंगलवार को नहाए-खाए के साथ शुरू हो चुका है और बुधवार को खरना मनाया गया। गुरुवार को अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्य को अर्घ्य दिया गया, जबकि शुक्रवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का समापन हुअा।
इस त्योहार में श्रद्धालु तीसरे दिन डूबते सूर्य को और चौथे व अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्ध्य देते हैं। पहले दिन को ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाया जाता है जिसमें व्रती लोग स्नान के बाद पारंपरिक पकवान तैयार करते हैं। दूसरे दिन को ‘खरना’ कहा जाता है, जब श्रद्धालु दिन भर उपवास रखते हैं, जो सूर्य अस्त होने के साथ ही समाप्त हो जाता है। उसके बाद वे मिट्टी के बने चूल्हे पर ‘खीर’ और रोटी बनाते है, जिसे बाद में प्रसाद के तौर पर वितरित किया जाता है।
पर्व के तीसरे दिन छठ व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य देते हैं। चौथे व अंतिम दिन को पारन कहा जाता है। इस दिन व्रती सूप में ठेकुआ, सठौरा जैसे कई पारंपरिक पकवानों के साथ ही केला, गन्ना सहित विभिन्न प्रकार के फल रखकर उगते सूर्य को अर्ध्य देते हैं जिसके बाद इस पर्व का समापन हो जाता है।
संभवतः मुंबई ही एकमात्र जगह होगी, जहां छठ पूजा श्रद्धा के साथ-साथ सियासत का भी जरिया बन जाती है। इस बार भी यह उत्सव कांग्रेस और भाजपा के बीच यह लाग-डाट का माध्यम बनने से नहीं बच पाया है। पिछले दो वर्ष से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस स्वयं जुहू पधारकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते नजर आते हैं।
मुंबई महानगर का जुहू स्थित समुद्री तट छठ पूजा की शाम सागर में डूबते लाल-लाल सूर्य और उन्हें अर्घ्य देते छठ व्रतियों से गुलजार हो जाता है। मुंबई में पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लोगों की आबादी करीब 40 लाख है। इनमें से छठ पूजा करनेवाले श्रद्धालुओं का तांता आज सुबह से ही जुहू तट की ओर जानेवाले रास्तों पर लग गया था। छठ व्रती महिलाओं के साथ-साथ उनके परिवारों के पुरुष सिर अथवा सामूहिक रूप से छोटे टैम्पो में पूजा का सामान लेकर समुद्र तट की ओर जाते दिखाई दे रहे थे। शाम होने तक एक तरफ अरब सागर होता है, तो दूसरी तरफ उसके किनारे ही जनसागर। जो शाम की अर्घ्य देकर रात भर जुहू तट पर ही रुकता है। अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर ही अपने घर लौटता है।
हिंदीभाषियों की इतनी बड़ी आबादी महानगर के राजनीतिक दलों को भी लुभाती रही है। इनके बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कर राजनीतिक दल अपनी सियासत चमकाते रहे हैं। करीब तीन दशक पहले उस समय के जनसंघ के कार्यकर्ता मोहन मिश्र ने छठव्रती महिलाओं को वस्त्र बदलने सहित कुछ और सुविधाएं देने के लिए छठ उत्सव महासंघ का गठन किया था। यह महासंघ करीब दो दशक तक चुपचाप अपना काम करता रहा। 2008 में लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव से पहले अचानक कई राजनीतिक दलों ने जुहू बीच पर अपने-अपने मंच सजाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू कर दिया। जिसके जवाब में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने छठ पूजा को हिंदीभाषियों के शक्तिप्रदर्शन का माध्यम न बनाने की चेतावनी दी थी।
राज ठाकरे की उक्त चेतावनी के बाद से ही मुंबई में छठ पूजा सियासत का भी जरिया बन गई है। जब निकट भविष्य में कोई चुनाव होना रहता है, तो राजनीतिक दल ज्यादा सक्रिय होते हैं, जब चुनाव नहीं होता तो कम।
कांग्रेस के वर्तमान मुंबई अध्यक्ष संजय निरुपम जब शिवसेना के राज्यसभा सदस्य थे, तो वह शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को भी छठपूजा में लाए थे। इसी प्रकार मुंबई भाजपा के महासचिव अमरजीत मिश्र पिछले दो वर्षों से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को जुहू की छठपूजा में लाकर उनसे सूर्यदेव को अर्घ्य दिलवा रहे हैं। मुंबई के हिंदीभाषी मतदाताओं पर मुख्यतया इन्हीं दोनों दलों का दावा रहता है। इसलिए सियासत भी इन्हीं दोनों दलों की चमकती है।

मध्यप्रदेश की सड़कों को अमेरिका से बेहतर बनाने नौ हजार करोड़ रुपए का नया कर्ज

मध्यप्रदेश की सड़कों को अमेरिका से बेहतर बताने को लेकर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की दूसरे दिन भी आलोचना होती रही। प्रदेश में मैदानी हकीकत यह है कि सरकार ने सड़कों की मरम्मत, नई सड़कें बनाने और उनके उन्नायन के लिए नौ हजार करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने की योजना बनाई है। दस फीसदी सड़कें आज भी बदहाली में हैं।
मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश की जर्जर सड़कों के कायाकल्प के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से 6 हजार करोड़ और न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) से 3 हजार करोड़ रुपए का कर्ज उठाने का प्रस्ताव भेजा है। लोनिवि ने इस नए कर्ज से सड़क बनाने की पूरी योजना भी तैयार कर ली है। एनडीबी से मिलने वाले कर्ज से करीब तीन हजार किलोमीटर सड़कें बनाने की तैयारी है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार इसके पहले भी सड़कों के लिए करीब दस हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि का कर्ज उठा चुकी है। यह कर्ज मिलने के बाद केवल सड़कों की सेहत सुधारने के लिए मप्र पर 20 हजार करोड़ का कर्ज हो जाएगा। वैसे अधिकृत तौर पर प्रदेश की कुल सड़कों (1 लाख 32 हजार किमी) में से दस फीसदी सड़कों की हालत जर्जर बनी हुई है।
सड़क के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है। गुरुवार को प्रदेश के मंत्रीगण भी डेमेज कंट्रोल और बचाव में जुट गए। नगरीय विकास मंत्री माया सिंह ने कहा कि मप्र में सड़कों को लेकर बहुत काम हुए हैं। इसमें कोई दो राय नहीं। वहीं, कांग्रेस विधायक डॉ. गोविंद सिंह का कहना है कि मंत्रियों की हिम्मत नहीं कि सीएम की बात काट सकें। कुर्सी बचाने के लिए मंत्रीगण चापलूसी करने में लगे हैं। मेरी चुनौती है कि मेरे साथ चलकर भोपाल की सड़कें देखें।
मुख्यमंत्री के बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव की प्रतिक्रिया पप्पूगिरी की पराकाष्ठा है। दिग्विजय कार्यकाल के दौरान सड़कों की याद होती तो उन्हें यह स्वीकारने में संकोच नहीं होता कि मप्र की सड़कें विश्वस्तरीय हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश की नई सड़कें विश्वस्तरीय हैं।
प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं। पिछले एक दशक के दौरान प्रदेश की सड़कों का कायाकल्प हुआ है। उज्जैन की सड़कें, इंदौर का सुपर कॉरिडोर, क्षिप्रा ब्रिज सहित कई सड़कें इसके जीवंत उदाहरण हैं।
सभी जानते हैं कि 15 साल पहले सड़कों के मुद्दे पर हम ‘जीरो” थे। आज हम 50 फीसदी समस्या हल कर चुके हैं। हमारे यहां विश्वस्तरीय सड़कें बनने लगी हैं। इन्हें देखकर ही सीएम ने यह बात कही होगी। अमेरिका तक पहुंचने में 5 से 10 साल लगेंगे।

उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक कहां से मिली मसला उठाया रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि उत्तर कोरिया आज सारे विश्व के लिए समस्या बन चुका है। उनका कहना था कि इसकी जांच होनी चाहिए कि परमाणु तकनीक उसे कहां से मिली? आसियान के रक्षा मंत्रियों की चौथी बैठक में उन्होंने यह मसला उठाया।
रक्षा मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद वह अपनी पहली विदेश यात्रा पर फिलीपींस पहुंची हैं। पाकिस्तान पर अपरोक्ष तौर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जांच होगी तो पूरा सच सामने आ जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी यह बात कह चुकी हैं। अमेरिका व जापान के विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता के दौरान उन्होंने यह सवाल उठाया था।
सीतारमण का कहना था कि जिस तरह से उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ भूमिगत परमाणु परीक्षण किए हैं उससे सारे विश्व के समक्ष खतरा पैदा हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद भी मान चुके हैं कि जापान, दक्षिण कोरिया व गुआम को बचाने के लिए उत्तर कोरिया को तबाह करना पड़ सकता है।
रक्षा मंत्री का कहना है कि उत्तर कोरिया को यह तकनीक एओ खान के परमाणु कार्यक्रम का अध्यक्ष रहते मिली होगी, क्योंकि अपने दम पर यह देश इस तरह का परीक्षण नहीं कर सकता है। पश्चिमी देशों की मीडिया में भी कहा जा रहा है कि 2002 से पहले यह तकनीक पाकिस्तान से उत्तर कोरिया तक पहुंची।
सीतारमण ने कहा कि सोशल मीडिया की वजह से आतंकवाद व कट्टरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। उग्र विचारों का तेजी से प्रसार हो रहा है, जिससे सारे विश्व को खतरा पैदा हो गया है। इस पर सभी को गंभीरता से मंथन करना होगा। उनका कहना था कि एशिया के देशों को सैन्य व दूसरी चुनौतियों से निपटने को तैयार रहना होगा।
जो देश आतंकी फंडिंग व उनके पनाहगार के तौर पर सामने आते हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है। उनका कहना था कि ब्रिक्स देशों की बैठक में आतंकवाद की भर्त्सना की गई। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि समुद्री विवादों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत निपटाए जाने की जरूरत है।

IRCTC की नई वेबसाइट में आसान लॉगइन और नेविगेशन सुविधा मिलेगी

ऑनलाइन टिकट बुक करने में अगर आपको भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो अब ऐसा नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईआरसीटीसी अपनी वेबसाइट और एंड्रायड ऐप को अपडेट करने जा रहा है।
इसके बाद यात्री आसानी से ऑनलाइन टिकट बुक करवा पाएंगे साथ ही यात्रियों को टिकट कन्फर्म होने की तारीख भी पता लग सकेगी जिससे वो अपनी यात्रा प्लान कर सकें। हालांकि इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
यह मिलेंगी सुविधाएं

– टिकट कन्फर्म होने की तारीख पता चल सकेगी जिससे यात्रा प्लान करने में आसानी होगी।
– टिकट बुक करते समय टाइम आउट की समस्या नहीं रहेगी।
– यात्रियों को ट्रेन के रियल टाइम का अपडेट भी एसएमएस अलर्ट के माध्यम से भेजा जाएगा।
– रेलवे इसरो की मदद लेगा जिससे ट्रेन की वास्तविक लोकेशन पता चल सके।