पहली बार अंडर-17 फीफा विश्व कप में भाग ले रही भारतीय टीम लीग

मेजबान होने के कारण पहली बार अंडर-17 फीफा विश्व कप में भाग ले रही भारतीय टीम लीग चरण के ग्रुप-ए के अपने तीनों मुकाबले हारकर इस टूर्नामेंट के पहले ही दौर से बाहर हो गई। उसे अपने से मजबूत अमेरिका, कोलंबिया से हारने के बाद गुरुवार को घाना से भी मात मिली।
आखिरी मैच में उसने सबसे ज्यादा गोलों के अंतर (0-4) से हार झेली। अफ्रीकी टीम घाना की तरफ से कप्तान इरिक अयाह के अलावा रिचर्ड डेंसो और इमानुएल टोकू ने गोल दागे। भारत ने पहले हाफ में सिर्फ एक गोल खाया, लेकिन दूसरे हाफ में उसका डिफेंस पूरी तरह चकनाचूर हो गया और घाना ने इसका फायदा उठाते हुए तीन और गोल दाग दिए।
ग्रुप-ए का यह मैच जीतने के साथ ही घाना ने प्री क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। इस ग्रुप से कोलंबिया भी प्री क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुका है, जबकि भारत का आगे का सफर समाप्त हो गया।
आक्रमण से ज्यादा रक्षण पर विश्वास करने वाले भारतीय कोच डि मातोस की सेना ने पिछले दो मैचों की तरह अफ्रीकी टीम घाना के खिलाफ भी ऐसा ही किया। शुरुआत के 42 मिनट इस खेल ने उनका साथ भी दिया, लेकिन इसके अगले ही मिनट में मेहमानों के कप्तान अयाह ने गोल करके मेजबानों को एक और हार की तरफ बढ़ने को मजबूर कर दिया।
मैच की शुरुआत से ही घाना ने आक्रमण तो भारत ने रक्षण की रणनीति अपनाई। बोरिस थंगजाम, नाउरेम और अनिकेत ने शानदार रक्षण किया। तीसरे मिनट में ही अनिकेत ने शानदार क्रॉस किया, लेकिन गेंद को गोल तक पहुंचाने के लिए वहां भारतीय टीम का कोई सदस्य नहीं था।
छठे मिनट में घाना ने गेंद को नेट पर पहुंचा दिया, लेकिन रेफरी ने इसे ऑफसाइड दे दिया। आठवें मिनट में धीरज ने शानदार गोल रोका। इसी समय भारत को फ्री किक मिली, लेकिन संजीव गोल नहीं कर पाए।
भारतीय रक्षण का आलम यह था कि शुरुआती दस मिनट में घाना ने तीन ऑफसाइड किए। घाना के खिलाड़ी को रोकने के चक्कर मे 33वें मिनट में बोरिस को पीला कार्ड भी मिला। भारतीय डिफेंस के सामने घाना का आक्रमण पूरी तरह परेशान हो गया और इसका असर उसकी बेंच पर भी दिखाई देने लगा।
39वें मिनट में घाना को फिर कॉर्नर मिला, लेकिन वह लक्ष्य से भटक गया। 42वें मिनट में उनके पास फिर गोल करने का मौका था, लेकिन उनका शॉट फिर लक्ष्य से भटक गया। अगले ही मिनट में मेहमानों ने फिर आक्रमण किया और उनकी तरफ से पहले शॉट को गोलकीपर धीरज ने रोका, लेकिन अयाह ने जवाबी आक्रमण करते हुए गेंद को गोलपोस्ट तक पहुंचाकर 1-0 से बढ़त ले ली।
पहले हाफ के अतिरिक्त समय में अनिकेत को गिराने के कारण घाना के राशिद अलहसन को पीला कार्ड मिला। इसके बाद भारत के पास गोल करने का मौका था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हाफ टाइम तक स्कोर 1-0 रहा।
दूसरा हाफ शुरू होते ही सादिक इब्राहिम ने अमरजीत को हिट किया, जिसके बाद उन्हें रेफरी ने तुरंत पीला कार्ड दिखा दिया। 52वें मिनट में अयाह ने फिर मेजबानों के रक्षण को भेदते हुए दूसरा गोल दागा। दो मिनट बाद भारत के अमरजीत को पीला कार्ड दिखाया गया।
दूसरे हाफ में घाना की तरफ से आक्रमण की भरमार रही। 86वें मिनट में डेंसो ने गोल करके बढ़त को 3-0 कर दिया। अगले ही मिनट में टोकू ने गोलकर करके बढ़त को 4-0 कर लिया। इस हार के बावजूद जेएलएन स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने भारतीय फुटबॉलरों का समर्थन किया। कुल मिलाकर यह विश्व कप भारतीय फुटबॉल के लिए नए युग की शुरुआत साबित होता दिख रहा है।
पिछली बार के उप विजेता माली ने फिर से अपने कौशल और दमखम का खूबसूरत नजारा पेश करते हुए न्यूजीलैंड को 3-1 से हराकर शान के साथ प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। माली की तरफ से सलाम जिदोउ (18वें मिनट), जिमुसा त्राओरे (50वें) और लसाना एनडियाये (82वें) ने गोल किए, जबकि न्यूजीलैंड के लिए एकमात्र गोल स्थानापन्न चार्ल्स स्प्राग (72वें मिनट) ने दागा।
पराग्वे से पहला मैच गंवाने के बाद माली की यह लगातार दूसरी जीत है, जिससे उसने छह अंकों के साथ पराग्वे (नौ अंक) के बाद ग्रुप-बी में दूसरे स्थान पर रहकर अंतिम-16 में जगह बनाई। कीवी टीम की यह दूसरी हार थी और उसका तीन मैचों में केवल एक अंक रहा।
माली ने दर्शकों के समर्थन के बीच अपनी शारीरिक मजबूती, दमखम, तेजी और कौशल के बलबूते पर खुद को न्यूजीलैंड से बेहतर साबित करने की सफल कोशिश की। यह अलग बात है कि कप्तान मैक्स माटा की वापसी से कीवी टीम को मजबूती मिली थी और इसका असर उनके खेल में भी दिखा।
माटा के पास खेल के तीसरे मिनट में ही मौका था, लेकिन तब वह अकेले गोलकीपर को नहीं छका पाए। इसके बाद अधिकतर समय गेंद न्यूजीलैंड के पाले में ही मंडराती रही और 18वें मिनट में सलाम जिदोउ ने गोल करके अफ्रीकी टीम को बढ़त भी दिला दी।
न्यूजीलैंड की रक्षापंक्ति में थोड़ी सी अफरातफरी दिखी और जिदोउ ने इसका फायदा उठाकर जिमुसा त्राओरे के पास पर डी के दायें छोर से करारा शॉट लगाकर उसे गोल के हवाले कर दिया। कीवी गोलकीपर जैक जोंस के पास इसका कोई जवाब नहीं था। 43वें मिनट में माली अपनी बढ़त दोगुनी करने के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन पिछले दोनों मैचों में गोल करने वाले एनडियाये का शॉट पोस्ट से टकरा गया।
मध्यांतर तक माली 1-0 से आगे था। दूसरे हाफ में भी कहानी में कोई परिवर्तन नहीं आया और छोर बदलने के बाद जिमुसा ने पांचवें मिनट में ही माली को 2-0 से आगे कर दिया। वह कप्तान मुहम्मद कमारा के साथ तेजी से गेंद लेकर आगे बढ़े और जब तक कीवी खिलाड़ी संभल पाते जिमुसा का शॉट जाली चूम रहा था।
जब लग रहा था कि मैच एकतरफा रहेगा तब मैथ्यू पामर की जगह मैदान पर उतरने वाले स्प्राग ने न्यूजीलैंड के लिए पहला गोल करके मैच में जान और दर्शकों में जोश भर दिया। वह तब गोलमुख पर खड़े थे जब उन्हें दायें छोर से इल्जाह जस्ट का क्रॉस मिला, जिसे उन्होंने हेडर से गोल में तब्दील कर दिया। न्यूजीलैंड अब बराबरी के गोल की तलाश में था, लेकिन तभी एनडियाये ने फोडे कोनाटे के पास पर बायें पांव से करारा शाट जमाकर माली को 3-1 से आगे करके उसकी जीत भी सुनिश्चित कर दी।

अमेरिका और इजरायल ने यूनेस्को से अलग होने का फैसला लिया

अमेरिका और इजरायल ने गुरुवार को ऐलान किया कि वह संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) से अलग हो जाएगा। अमेरिका ने यूनेस्को पर इजरायल विरोधी रुख रखने का आरोप लगाया है। अमेरिका का संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी से अलग होने का फैसला 31 दिसंबर 2018 से प्रभावी होगा। तब तक वह यूनेस्को का पूर्णकालिक सदस्य बना रहेगा।
इससे फंड की कमी से जूझ रहे यूनेस्को की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। इस संगठन को दिए जाने वाले अमेरिकी फंड पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराजगी जताते रहेहैं। यूनेस्को को अमेरिका से हर साल आठ करोड़ डॉलर (करीब 520 करोड़ रुपये) की मदद मिलती है।
यूनेस्को का मुख्यालय पेरिस में है। संयुक्त राष्ट्र का यह संगठन 1946 से काम कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नौअर्ट ने कहा, “यह फैसला हल्के में नहीं लिया गया है। यह अमेरिकी चिंताओं को जाहिर करता है कि इस संगठन में बुनियादी सुधार की जरूरत है।”
उन्होंने बताया कि इस बारे में यूनेस्को महासचिव को सूचित कर दिया गया है। इसके कुछ घंटे बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अमेरिकी फैसले को साहसिक बताते हुए यूनेस्को से बाहर आने का एलान कर दिया।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने साल 2011 में फलस्तीन को यूनेस्को का पूर्णकालिक सदस्य बनाने के फैसले के विरोध में इसके बजट में अपना योगदान नहीं दिया था। इससे पहले फॉरेन पॉलिसी पत्रिका ने भी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि 58 सदस्यीय यूनेस्को के नए महानिदेशक का चुनाव कर लिए जाने के बाद अमेरिका इससे अलग होने का एलान कर सकता है।
यूनेस्को ने अमेरिका के अलग होने के फैसले पर खेद जताया है। यूनेस्को महासचिव एरिना बोकोवा ने बयान में कहा, “अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन से आधिकारिक सूचना मिली है। अमेरिका का यूनेस्को से अलग होने का फैसला अफसोसजनक है।”

महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में कम पंजीयन ने बढ़ा दी सरकार की चिंता

मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में कम पंजीयन ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दरअसर, सरकार इस योजना को कर्जमाफी के तोड़ के रूप में प्रस्तुत कर रही है। पंजीयन बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को खुद मोर्चा संभाल लिया।
रेडियो और टीवी के माध्यम से उन्होंने विशेष ग्रामसभा लगवाकर किसानों से सीधी बात की। मुख्यमंत्री ने योजना को महाबोनस करार देते हुए कहा कि इससे उचित दाम की गारंटी मिलेगी। किसानों को पंजीयन कराने की हिदायत देते हुए वे बोले कि इसके बिना योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
प्रदेश की 23 हजार पंचायतों में विशेष ग्रामसभा लगवाकर किसानों से भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन के लिए आवेदन भरवाए गए। अभी तक सिर्फ साढ़े आठ लाख किसानों ने पंजीयन कराया है, जबकि उम्मीद 15 लाख से ज्यादा किसानों के योजना से जुड़ने की थी। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष ग्रामसभाएं बुलवाईं और खुद किसानों को भोपाल से संबोधित किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार किसान के साथ है। बाजार में जब भाव कम हुए तो सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर प्याज और फिर मूंग, उड़द और तुअर खरीदी। भावांतर योजना में आठ फसलों की खरीदी 16 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य और मॉडल रेट के बीच जो अंतर आएगा, उसका भुगतान सरकार करेगी।
प्रदेश सरकार भावांतर भुगतान योजना के प्रचार-प्रचार के लिए प्रदेश की 257 कृषि मंडियों में किसान सम्मेलन करेगी। इस पर करीब चार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मंडी बोर्ड ने यह राशि समितियों के लिए मंजूर कर दी है।
योजना में सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग और उड़द की खरीदी होगी। इन फसलों की खरीदी 16 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलेगी। फरवरी में तुअर भी भावांतर योजना के तहत खरीदी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि योजना के तहत खरीदी गई उपज के भाव अंतर का भुगतान करीब दो माह बाद किसान को किया जाएगा। 15 दिसंबर को जब खरीदी बंद हो जाएगी, उसके बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी। भुगतान सिर्फ पंजीयन के वक्त बताए गए बैंक खातों में होगा।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि योजना में वह खरीदी ही मान्य होगा, जो लायसेंसी व्यापारियों द्वारा मंडियों में की जाएगी। पक्की पर्ची पर हुई खरीदी को ही मान्यता मिलेगी। इसके आधार पर ही किसान को भावांतर भुगतान योजना में अंतर की राशि दी जाएगी।