ये है साल 2017 की सबसे फ्लॉप फिल्में

बॉलीवुड में हर शुक्रवार को फ़िल्में रिलीज़ होती हैं। लेकिन उनमे कुछ दर्शकों को पसंद नही आती हैं। और वो फ्लॉप हो जाती हैं। आईये देखते हैं इस साल की फ्लॉप फिल्मों के नाम क्या है। और उनका कलेक्शन।
2017 की फ्लॉप फिल्मों एक नाम Raabta है। बॉक्स ऑफिस आय: 27 करोड़ रुपये की कमाई
OK Jaanu बॉलीवुड में 2017 की फ्लॉप फ़िल्म हैं। बॉक्स ऑफिस आय: 23.6 करोड़ रुपये की कमाई
2017 की फ्लॉप फिल्मों एक Rangoon नाम है। बॉक्स ऑफिस संग्रहः 23 करोड़ रुपये की कमाई
Begum Jaan बॉक्स ऑफिस आय: रु। 20.75 करोड़
2017 की फ्लॉप फिल्मों एक नाम Sarkar 3 है। बॉक्स ऑफिस आय: 9.50 करोड़ रुपये की कमाई
Bank Chor बॉलीवुड में 2017 की फ्लॉप फ़िल्म हैं। बॉक्स ऑफिस आय: 8 करोड़ रुपये की कमाई
Aa Gaya Hero बॉलीवुड में 2017 की फ्लॉप फ़िल्म हैं। बॉक्स ऑफिस आय: 1 करोड़ रुपये की कमाई

इस खरगोश के खाने का खर्च जानकर आप भी रह जायेंगे हैरान

इस खरगोश का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सबसे विशाल खरगोश होने का दर्जा पहले से मिल चुका है। जी, हां… इस खरगोश का नाम डेरियस है। डेरियस को वॉरचेस्टर में रहने वाले 62 साल के ऐनट एडवर्डस पालते हैं। डेरियस का कद कुल चार फुट चार इंच का है।

आपको बता दे की डेरियस का वजन 22 किलोग्राम है। इस खरगोश का कद ऐनट की 5 वर्षीय बेटी से भी बड़ा है। इस खरगोश के खाने की बात करे तो वह पूरे साल भर में 4 हजार से भी ज्यादा मात्रा में गाजर, पत्ता गोभी, सेब और अन्य फल खा जाता है। इस खरगोश के एक साल तक खाने का खर्च 2 लाख रूपये है।

दरअसल खरगोश के मालिक उसे भरपेट खाना खिलाते है तभी खरगोश का कद इतना बड़ा है। इस खरगोश को टीवी देखने का भी शौक है। यह डेरियस कॉनटीनेनटल जायन्ट खरगोश की प्रजाति का खरगोश है। ऐसे खरगोशों की आयु आमतौर पर 4-5 साल तक ही होत है लेकिन अगर इनकी ठीक से देखभाल की जाए तो ये 7 सालों तक भी जीवित रह सकते हैं।

62 साल के इस व्यक्ति की लव स्टोरी जानकर आप भी रह जायेंगे हैरान

कहते है प्यार अंधा होता है। क्या पता कब,कहां,किसे और किस समय प्यार हो जाए। प्यार ना उम्र देखता है… ना ही कुछ और देखता है बस प्यार हो जाता है। कुछ ऐसे ही इंडोनेशिया के रहने वाले इस 62 साल के व्यक्ति को हो गया वो भी अपने से 44 साल की छोटी लड़की से……

दरसल, इंडोनेशिया के रहने वाले Sulaeman Daeng Ngampa ने अपने से 44 साल छोटी लड़की ले प्यार किया और शादी भी की। बता दें कि सुलेमान की पहले शादी हो चुकी है जिसमें उनके 5 बच्चे हैं।  इतना ही नहीं 62 साल के सुलेमान 9 बच्चों के दादा भी हैं। बावजूद इसके सुलेमान का दिल 18 साल की डायना डाएंग नगनियांग पर आ गया। खास बात तो ये है कि डायना भी सुलेमान से प्यार कर बैठी। उससे ब्याह रचाने के लिए तैयार भी हो गई।

आपको बता दे सुलेमान अपनी पहली पत्नी की मौत के बाद अकेले हो गए। डायना के पिता पेशे से लौहार हैं और वह अक्सर चाकू के अलावा दूसरा सामान खरीदने के लिए उनके घर जाया करते थे। डायना भी अक्सर उनके लिए कॉफी बनाकर लाती थी इस दौरान दोनों में प्यार हो गया। फिर सुलेमान ने एक साल बाद डायना को शादी के लिए प्रपोज भी किया। वह इसके लिए तैयार भी हो गई। उम्र के फर्क और समाज की अलोचना के बावजूद दोनों ने अपने-अपने परिवार के सामने शादी रचाई।

भारतीय टीम को फीफा अंडर-17 विश्व कप में दमदार प्रतिद्वंद्वी कोलंबिया के खिलाफ कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा

पहले मैच में अपने जज्बे और जिजीविषा का अच्छा नमूना पेश करने के बावजूद पराजय का सामना करने वाली भारतीय टीम को फीफा अंडर-17 विश्व कप में सोमवार को एक अन्य दमदार प्रतिद्वंद्वी कोलंबिया के खिलाफ कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा।
किसी भी तरह के विश्व कप में पहली बार खेल रहे भारत को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेले गए पहले मुकाबले में अमेरिका के हाथों 0-3 से शिकस्त का सामना करना पड़ा था। भारत ने जज्बा तो दिखाया लेकिन कौशल के मामले में अमेरिका उससे मीलों आगे रहा। मेजबान देश को फिर से इसी तरह की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। मध्यपंक्ति के मुख्य खिलाड़ी सुरेश सिंह का मानना है कि भारत को अपने अंतिम क्षणों के पास में सुधार करना होगा, लेकिन हर विभाग में मजबूत कोलंबिया के सामने एक विभाग में सुधार से ही काम नहीं चलने वाला है।
नाइजर से लेनी होगी प्रेरणा : मेजबान टीम विश्व कप में पहली बार भाग ले रही एक अन्य टीम नाइजर से प्रेरणा लेनी चाहेगी, जिसने उत्तर कोरिया को हराकर अपने अभियान का शानदार आगाज किया। अगर अफ्रीकी देश ऐसा कर सकता है तो भारत क्यों नहीं। हालांकि ऐसा करने की तुलना में कहना आसान है। भारत ने कोशिश की, लेकिन वह दुनिया को नहीं दिखा पाया कि उसका स्तर इस टूर्नामेंट के लायक है, जिसने दुनिया को कई स्टार खिलाड़ी दिए हैं।
भारत को भुनाने होंगे मौके : अमेरिका के खिलाफ कुछ मौकों पर भारत ने अच्छे खेल की झलक दिखाई, लेकिन कोच लुई नोर्टन डि मातोस सोमवार को इससे भी बेहतर प्रदर्शन चाहते हैं। भारत ने मौके बनाए और अपने कौशल से भी उसने कुछ प्रभाव छोड़ा। एक अवसर पर टीम गोल करने के करीब भी पहुंची। लेकिन यह साफ नजर आ रहा था कि अमेरिका दोनों टीमों में बेहतर था। स्ट्राइकर कोमल थटाल ने अपनी तेज दौड़ और ड्रिबलिंग के कौशल से सभी का ध्यान खींचा है।
बाईचुंग भूटिया के राज्य सिक्किम के रहने वाले थटाल ने कुछ अच्छे मूव बनाए, लेकिन दूसरे हाफ में एक बार उन्होंने गोल करने का अच्छा मौका भी गंवाया। अग्रिम पंक्ति में उनके साथ अनिकेत यादव ने भी अपने खेल से प्रभावित किया। रक्षापंक्ति में अनवर अली और जितेंद्र सिंह ने अपनी तरफ से अच्छी कोशिश की, लेकिन शारीरिक और तकनीक दोनों के मामले भारत पिछड़ गया। यह अलग बात है कि गोलकीपर एम धीरज सिंह ने कुछ शानदार बचाव करके भारत को बड़े अंतर से नहीं हारने दिया। मैदान से बाहर मातोस को उम्मीद रहेगी कि उनकी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए पर्याप्त संख्या में दर्शक यहां मौजूद रहेंगे।
खाता खोलने को बेताब कोलंबिया : कोलंबिया ही कोलंबिया की पहले मैच में शुरुआत अच्छी नहीं रही थी और उसे घाना से हार का सामना करना पड़ा था। वह अब खाता खोलने के लिए बेताब होगा और बड़े अंतर से जीत दर्ज करने की कोशिश करेगा ताकि अपने गोल अंतर में सुधार कर सके। कोलंबिया अब तक पांच बार इस टूर्नामेंट में भाग ले चुका है और दो बार ही तीसरे स्थान पर रहा है। उसकी टीम यहां की परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने के लिए काफी पहले यहां पहुंच चुकी थी। यह अलग बात है कि उसकी शुरुआत अनुकूल नहीं रही।

ईरान ने दी अमेरिका को धमकी

ईरान ने अपने खास सुरक्षा बल रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर को अमेरिका द्वारा आतंकी संगठन ठहराए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही धमकी दी है कि अमेरिका ने उसके खिलाफ अगर और प्रतिबंध लगाए तो इलाके में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने खतरे में पड़ जाएंगे।
ईरान के ताजा मिसाइल टेस्ट के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिबंधों का एलान किया है। ट्रंप ने ईरान पर आतंकवाद के समर्थन और साइबर हमले के लिए नई रणनीति बनाने का आरोप लगाया है। ईरान का ताजा रुख ट्रंप के बयान के बाद सामने आया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद अली जाफरी ने कहा है कि अगर अमेरिका ईरान पर प्रतिबंध के नए प्रस्ताव लागू करता है तो उसे अपने सैन्य ठिकाने दो हजार किलोमीटर से दूर ले जाने होंगे। क्योंकि दो हजार किलोमीटर की सीमा तक हमला करने में ईरानी मिसाइलें सक्षम हैं।
जाफरी ने कहा, अमेरिका के नए प्रतिबंध ईरान से उसकी बातचीत के सभी रास्ते बंद कर देगे। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकी संगठन के रूप में सूचीबद्ध करने की सूचना अगर सही है तो ईरान भी अमेरिकी सेना को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसा दर्जा देने में नहीं हिचकेगा। उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाएगा जैसा कि आईएस के साथ किया जा रहा है। ऐसे में खासतौर पर मध्य-पूर्वी देश में अमेरिकी सेना की मुश्किल बढ़ जाएगी।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स पर ईरान के बाहरी और अंदरूनी सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यह खास शस्त्रों से लैस प्रशिक्षित बल है जिसे आतंकवाद से लड़ने में महारत हासिल है। इसी के चलते ईरान में आईएस का विस्तार नहीं हो सका। शिया बहुल ईरान में सात जून को आईएस ने हमले की कोशिश की थी। हमले में 18 लोग मारे गए थे। हमलावरों को मारने के बाद ईरान ने 18 जून को सीरिया में आईएस के ठिकानों पर मिसाइलें बरसाकर जवाब दिया था। कहा जाता है कि यह संगठन यह बल में भी ईरान विरोधियों पर कार्रवाई करता है। इसी के चलते अमेरिका ने इसे आतंकी संगठनों की सूची में डाला है।

देश के हर शख्स के मन में वीर सैनिकों का सम्मान का भाव मुस्कान अभिवादन भी

देश के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मनों का सामना करने वाले वीर सैनिकों का जितना सम्मान किए जाए कम है। परिवार को पीछे छोड़कर सीमा पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले इन जवानों के प्रति देश के हर शख्स के मन में गर्व और सम्मान का भाव होता है।
यह गर्व और सम्मान रविवार को जम्मू एयरपोर्ट पर नजर आया जब यहां पहुंचे सीआरपीएफ के जवानों को देख यहां मौजूद यात्री उनके सम्मान में पूरे जोश से तालियां बजाने लगे। एयरपोर्ट पहुंचे जवानों को भी शायद इस तरह के सम्मान की उम्मीद नहीं होगी।
एयरपोर्ट पर लोगों को अपने लिए इस तरह ताली बजाते देख जवानों के चेहरों पर भी मुस्कान आ गई और वो लोगों को अभिवादन भी स्वीकारते दिखे।
हालांकि, लोग अक्सर सोशल मीडिया पर देश के सैनिकों को सेल्युट करते देखे जा सकते हैं लेकिन ऐसा कम ही होता है कि उन्हें किसी सार्वजनिक स्थल पर आम जनता द्वारा सरप्राइज सम्मान दिया गया हो।

भोले बाबा के आशीर्वाद ने मुझे विष पीने और उसे पचाने की शक्ति दी इसी कारण 2001 से अपने खिलाफ विष वमन करने वाले सभी लोगों से निपट सका

अपनी गुजरात यात्रा के दूसरे दिन रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मस्थान वडनगर पहुंचे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला वडनगर दौरा था, जहां उनका बचपन बीता और जहां कभी उन्होंने पिता की चाय की दुकान में हाथ भी बंटाया था।
प्रधानमंत्री के इस दौरे में मंदिर में पूजा-अर्चना से लेकर रोड शो, अपने स्कूल जाकर मिट्टी को माथे से लगाना और एक अत्याधुनिक अस्पताल व मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण करने तक सब कुछ रहा।
मोदी ने जनसभा में राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक अपने खिलाफ होने वाले हमलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वडनगर के भोले बाबा के आशीर्वाद ने मुझे विष पीने और उसे पचाने की शक्तिदी। इसी क्षमता के कारण मैं 2001 से अपने खिलाफ विष वमन करने वाले सभी लोगों से निपट सका। इस क्षमता ने मुझे इन वर्षों में समर्पण के साथ मातृभूमि की सेवा करने की शक्ति दी।
उन्होंने कहा कि मैंने अपनी यात्रा वडनगर से शुरू की और अब काशी पहुंच गया हूं। वडनगर की भांति काशी भी भोले बाबा की नगरी है। भोले बाबा के आशीर्वाद ने मुझे बहुत शक्ति दी है और यही ताकत इस धरती की ओर से मुझे मिला सबसे बड़ा उपहार है। जनसभा में मोदी खुद को गुजराती बोलने से नहीं रोक पाए। काफी समय तक उन्होंने गुजराती में भी लोगों को संबोधित किया। अपनी यात्रा के दौरान मोदी ने करीब पांच हजार करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री वडनगर पहुंचते ही अपने स्कूल श्री बीएन हाईस्कूल को देखकर भावुक हो गए। मातृभूमि को नमन किया और स्कूल की मिट्टी से माथे पर तिलक लगाया। उन्होंने हाटकेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी थे।
करीब सात साल बाद यहां पहुंचे मोदी को एक झलक देखने के लिए वडनगर के लोग बेताब दिखे। करीब छह किलोमीटर के रोड शो के दौरान कार के दरवाजे पर खड़े होकर मोदी ने लोगों का अभिवादन किया। सड़क के दोनों ओर उत्साह से भरा जनसमूह हाथ हिलाकर और मोदी-मोदी के नारे लगाते हुए उनका लगातार अभिवादन करता रहा। रोड शो के दौरान पीएम ने भी लोगों की भावना का कद्र करते हुए प्रोटोकॉल तोड़ दिया और कार से उतरकर पैदल ही चलने लगे। मोदी अपने शहर पहुंचने के लिए इतने उत्सुक थे कि तय समय से करीब एक घंटा पहले ही पहुंच गए। बचपन के दोस्तों की उम्र याद करते हुए उन्होंने कहा कि कइयों के हाथ में अब लाठी आ गई है।
मोदी ने कहा कि पहले यूरिया के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखे जाते थे। कई राज्यों के मुख्यमंत्री तक यूरिया के लिए सिफारिश किया करते थे। पहले की सरकारों ने चोरों के लिए रास्ते खोल रखे थे। यूरिया की चोरी धड़ल्ले से होती थी। लेकिन, उनके पीएम बनने के बाद अब यह सिलसिला बंद हो गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने वडनगर में जीएमईआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि 15 वर्ष बाद केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य नीति बनाकर टीकाकरण से वंचित बालकों का टीकाकरण करने का अभियान शुरू किया है। देश के डॉक्टरों ने सरकार के आह्वान को स्वीकार कर हर महीने की नौ तारीख को गरीब प्रसूताओं को मुफ्त सेवा दी है। इस दौरान 85 लाख महिलाओं को निःशुल्क दवा और उपचार प्रदान किया है। इसके चलते पिछले तीन वर्ष में माता एवं बालक मृत्यु दर में तेजी से कमी आई है।
मोदी ने रविवार को सूरत से जयनगर (बिहार) तक जाने वाली ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि बिहार से रोजगार के लिए युवा गुजरात आते हैं। वे अपने माता-पिता को छोड़कर यहां आते हैं। सूरत से सीधे बिहार के लिए ट्रेन सुविधा ऐसे लोगों को घर से जोड़े रखेगी।
प्रधानमंत्री मोदी रविवार को अपना दो दिवसीय दौरा पूरा कर दिल्ली लौट गए। अब 16 अक्टूबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ फिर गुजरात आएंगे। भाजपा की गुजरात गौरव यात्रा के समापन समारोह में दोनों नेता भाग लेंगे। गांधीनगर में भाजपा के सात लाख पेज प्रमुखों के सम्मेलन में भी दोनों नेता शामिल होंगे।

किसानों को फसल का उचित दाम दिलाने मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना देशभर में लागू

मध्यप्रदेश में किसानों को फसल का उचित दाम दिलाने के लिए लागू मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना देशभर में लागू हो सकती है। इसके जरिए बाजार में उपज के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होने पर अंतर की राशि किसान को अदा की जाएगी। कई राज्य इस योजना का मसौदा प्रदेश से ले चुके हैं। सोमवार को कृषि मंत्रालय में योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने को लेकर बैठक बुलाई गई है।
सूत्रों के मुताबिक उपज के वाजिब दाम दिलाए जाने को लेकर देशभर में किसान आंदोलन हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए भावांतर देने के फॉर्मूले को सबसे बेहतर माना जा रहा है। इसमें न तो सरकार को फसल की खरीदी करनी पड़ेगी और न ही उसके भंडारण और फिर विपणन की कोई चिंता।
सरकार जिन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, उन्हें और अन्य फसलों को इसमें शामिल किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में दोनों तरह की फसलों को योजना के दायरे में रखा गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को इस योजना से काफी राहत मिलेगी। उन्हें अब यह चिंता नहीं सताएगी कि बाजार में फसल के भाव कम होने का खामियाजा उठाना पड़ेगा। सरकार इस योजना के माध्यम से अप्रत्यक्ष तौर पर बाजार को भी नियंत्रित कर सकेगी।
प्रदेश सरकार भावांतर योजना में शामिल फसल में अंतर की राशि देने के लिए पहले दो राज्यों की उन मंडियों से फसल का भाव लेगी, जहां इनका उत्पादन सर्वाधिक होता है। राज्य स्तरीय समिति भाव का तुलनात्मक चार्ट बनाने के बाद खरीदी सीजन समाप्त होते ही तय अंतर की राशि की घोषणा करेगी। इसके बाद यह राशि किसानों के खातों में सीधी डाली जाएगी।
महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ ।
सरकार ने खरीफ फसलों के लिए भावांतर योजना में पंजीयन कराने के लिए तारीख 11 से बढ़ाकर 15 अक्टूबर कर दी है। अभी तक सात लाख किसानों का पंजीयन हो चुका है। संभावना जताई जा रही है कि यह आंकड़ा 15 लाख तक पहुंच सकता है। योजना का लाभ सिर्फ पंजीकृत किसानों को ही मिलेगा।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा का कहना है कि योजना को लेकर कृषि मंत्रालय भी विचार कर रहा है। सोमवार को एक बैठक होने जा रही है। इसमें योजना के बिन्दुओं पर चर्चा होगी। राज्य की ओर से केंद्र को योजना के बारे में पहले ही अवगत करा दिया है। प्रदेश में योजना को लेकर किसानों में विशेष रूचि देखी जा रही है