एक कमजोर टीम होने के बावजूद भारत सभी को चौंकाने के लिए तैयार

भारत की अंडर-17 फुटबाल टीम के डिफेंडर संजीव स्टालिन ने कहा कि विश्व कप में एक कमजोर टीम होने के बावजूद भारत सभी को चौंकाने के लिए तैयार हैं। विश्व कप शुक्रवार से शुरू होगा।
स्टालिन ने कहा, ‘हमें फीफा अंडर-17 में खेलने से पहले अपनी टीम की सामूहिक क्षमता पर पूरा भरोसा है। हम जीतने के लिए खेलेंगे और अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर देंगे। हम जानते हैं कि हम अपने ग्रुप में एक कमजोर टीम हैं, लेकिन हमारे पास सभी को चौंकाने के लिए रणनीतियां हैं। भारत ग्रुप ‘ए’ में अमेरिका, घाना और कोलंबिया के साथ है। भारत शुक्रवार को अमेरिका से भिड़ेगा।
स्टालिन ने पहले मैच के बारे में कहा, ‘यह भारतीय फुटबॉल और सामान्य रूप से हर भारतीय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। अमेरिका के खिलाफ होने वाले मैच में हमारा उत्साह बढ़ाने के लिए हमें 12वें खिलाड़ी यानी हमारे समर्थकों की जरूरत है। यह न केवल हमारा फीफा विश्व कप है, बल्कि यह हर भारतीय का विश्व कप है और हर भारतीय इस अद्भुत क्षण का हिस्सा होगा।
दबाव के बारे में बेंगलुरु के इस खिलाड़ी ने कहा, ‘दबाव हर खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा होता है। अच्छे प्रदर्शन का दवाब हर बड़ी या छोटी प्रतियोगिता में होता ही है। एक खिलाड़ी के रूप में हमें दवाब का सामना करना पड़ता है और निश्चित रूप से फीफा अंडर-17 विश्व कप से पहले भी दवाब है। यह अच्छा दवाब है, जो व्यक्तिगत रूप से मुझे प्रेरित करने में मदद करता है।
विश्व कप में भाग लेने के लिए 21 सदस्यीय अमेरिकी टीम भारत पहुंच गई। अमेरिकी टीम यहां दुबई से आई है, जहां वह विश्व कप की तैयारियों के लिए सात दिवसीय शिविर में हिस्सा ले रही थी। वह अपने अभियान की शुरुआत छह अक्टूबर को भारत के खिलाफ करेगा। उसका अगला मुकाबला घाना से नौ और कोलंबिया से 12 अक्टूबर को होगा।
इराक की 21 सदस्यीय टीम सोमवार तड़के कोलकाता पहुंची। इराक को ग्रुप ‘एफ’ में इंग्लैंड, चिली और मैक्सिको के साथ रखा गया है। इस ग्रुप के सारे मुकाबले यहां के साल्ट लेक स्टेडियम में खेले जाएंगे। साथ ही 28 अक्टूबर को टूर्नामेंट का फाइनल भी यहीं खेला जाएगा। इराक का पहला मुकाबला आठ अक्टूबर को मैक्सिको से होगा। उसने पिछले विश्व कप में हिस्सा नहीं लिया था।

हैदराबाद और तेलंगाना में सोमवार को अचानक हुई बारिश

शहर में सोमवार को अचानक हुई बारिश ने लोगों को बेहाल कर दिया। इसके चलते जहां कई इलाकों में पानी भर गया वहीं अलग-अलग जगहों पर कुल 7 लोगों की मौत हो गई। पानी भर जाने के चलते सड़क पर वाहन रेंगते नजर आए और जनजीवन अस्‍त व्‍यस्‍त हो गया है। इसके बाद प्रशासन ने मंगलवार को शहर के सभी स्‍कूलों व कॉलेजों को बंद कर दिया है।
हैदराबाद और तेलंगाना में तूफानी बारिश के चलते जहां एक इमारत गिर गई वहीं कई चीजों को नुकसान पहुंचा और फसलें तबाह हो गईं।
नारायणखेड में बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में दो महिलाएं और उनके बच्चे थे। बंजारा हिल्‍स पुलिस स्‍टेशन के एसएचओ के अनुसार, नींद में सोए हुए 35 वर्षीय यादुलु और उसके 8 माह के शिशु की मौत दीवार गिरने के कारण हुई। मलबे से शवों को निकालकर ऑटोप्‍सी के लिए भेज दिया गया।
सोमवार शाम को शुरू हुई बारी बारिश के चलते सिर्फ पांच घंटे में ही शहर में 13 सेंटीमीटर बारिश दर्ज हो गई। सरकार ने हादसों में मरने वालों के परिवारों को 4 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है। कई इलाकों में पानी भरने के बाद इमरजेंसी रिस्पोंस टीम को तैनात किया गया है।

नागपुर मेट्रो का उद्घाटन 20 हजार नौकरियों का सृजन

नागपुर मेट्रो का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में किया था और 30 सितंबर 2017 को इसका ट्रायल रन शुरु हो गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हरी झंडी दिखाकर ट्रायल मेट्रो को रवाना किया। गौरतलब है कि यह सबसे तेजी से पूरा होने वाला मेट्रो रेल का प्रोजेक्ट है।
शनिवार को ट्रायल शुरू होने के बाद महिला चालक सुमेधा मेश्राम ने तीन कोच वाली इस ट्रेन को 5.6 किलोमीटर दूर तक चलाया। मिहान क्षेत्र और खापरी रेलवे स्टेशन के बीच ट्रायल रन किया गया था। इस कार्य को पूरा करने में करीब 27 महीने लग गए। जानें इस प्रोजेक्ट के बारे में खास बातें…
फड़नवीस ने कहा कि इस परियोजना के कारण करीब 20 हजार नई नौकरियों का सृजन होगा। देश और राज्य की आर्थिक ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं, परियोजना के जल्द पूरा होने को लेकर गडकरी ने तारीफ करते हुए कहा कि इसका निर्माण बहुत तेजी से हुआ है। नागपुर मेट्रो की कुल लंबाई करीब 38 किलोमीटर है।
नागपुर मेट्रो रेल परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 20 प्रतिशत, महाराष्ट्र सरकार ने 20 प्रतिशत, नागपुर नगर निगम ने पांच प्रतिशत, नागपुर सुधार ट्रस्ट ने पांच प्रतिशत और 50 प्रतिशत ऋण जर्मनी की एजेंसी केएफडब्ल्यू (4,000 करोड़ रुपए) और फ्रांसीसी एजेंसी एएफडी (600 करोड़ रुपए) की ओर से दिया गया है।
8,680 करोड़ रुपए की इस परियोजना में दो कॉरिडोर, पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण शामिल हैं। गलियारों की कुल लंबाई करीब 38 किमी है।
अगले दो महीनों तक ट्रायल रन जारी रहेगा। इस दौरान विभिन्न सुरक्षा मापदंडों की जांच की जाएगी और कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की ओर से अंतिम सुरक्षा प्रमाणीकरण दिया जाएगा।
इस मौके पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य भी उपस्थित थीं। उन्होंने महा कार्ड लॉन्च किया, जो परिवहन के विभिन्न तरीकों के लिए एक सामान्य मोबिलिटी कार्ड है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया है कि नागपुर मेट्रो का विस्तार किया जाएगा और इसे कन्हन, हिंगणा और बुटीबोरी सैटेलाइट टाउन्स तक किया जाएगा। नागपुर मेट्रो रेल परियोजना के त्वरित और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कार्यान्वयन के लिए गडकरी ने महा-मेट्रो को बधाई दी। माहा मेट्रो का नेतृत्व प्रबंध निदेशक बृजेश दीक्षित ने किया है।

प्रदेश में हर साल हरियाली बढ़ने की बजाय घट रही

प्रदेश में हर साल 8 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए जा रहे हैं, फिर भी हरियाली बढ़ने की बजाय घट रही है। भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान की सर्वे रिपोर्ट से पता चलता है कि वर्ष 2013 और 2015 के बीच प्रदेश में 60 वर्ग किमी हरियाली घटी है। जबकि पौधरोपण पर हर साल औसतन 60 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस हिसाब से पांच साल में 350 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी हरियाली नहीं बढ़ी है।
पांच सालों में प्रदेश में 40 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं, लेकिन 20 करोड़ भी जिंदा नहीं बचे हैं। वन विभाग के पास जीवित बचे पौधों का ठीक-ठीक आंकड़ा तक नहीं है, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि 50 फीसदी से कम पौधे ही जीवित रह पाते हैं। इस साल 8 करोड़ 25 लाख पौधे लगाए गए हैं।
इनमें से सात करोड़ पौधे नर्मदा कैचमेंट के 16 जिलों में रोपे गए हैं। विभाग के सूत्र बताते हैं कि इनमें से 20 फीसदी से ज्यादा पौधे नष्ट हो गए हैं। लिहाजा विभाग ने सभी मैदानी वन अफसरों को पौधों की सुरक्षा करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि देश में क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे ज्यादा 77 हजार 462 वर्ग किमी वन क्षेत्र मध्य प्रदेश में है।
देश में हरियाली की स्थिति पर भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान ने नई रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसमें प्रदेश की स्थिति फिर खराब बताई जा रही है। संस्थान ने प्रारंभिक रिपोर्ट वन विभाग को भेजकर आकलन करने को कहा है। विभाग की टीप के बाद संस्थान इसे जारी करेगा। संस्थान हर दो साल में सर्वे करता है। वर्ष 2015 के बाद इस साल फिर सर्वे कराया गया है।
हैरत की बात है कि प्रदेश में 60 वर्ग किमी हरियाली घटी है और ये वन क्षेत्र आदिवासी बहुल 18 जिलों में आता है। संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है। इस हिसाब से आदिवासी बहुल इलाकों में जंगलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वन अधिकार कानून आने के बाद पेड़ों की कटाई में तेजी आई है। वहीं अतिक्रमण भी बढ़ा है।
संस्थान की नई रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही सही स्थिति पता चलेगी। 2015 की रिपोर्ट के बाद हमने जंगल की सुरक्षा के उपाय किए हैं। जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।