भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर तनातनी पर ट्रम्प प्रशासन की स्थिति असहज

एक अमेरिकी विशेषज्ञ का मानना है कि भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर तनातनी पर ट्रम्प प्रशासन की स्थिति असहज हो गई थी। वह भारत और चीन के विवाद में पड़ना नहीं चाहता था। खासकर ऐसे समय में जब उसे उत्तर कोरिया से निपटने के लिये चीन की मदद की आवश्यकता है।
द हेरिटेज फाउंडेशन में दक्षिण एशिया पर रीसर्च फेलो और साउथ एशिया नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (व्हाइट हाउस) के नवनियुक्त निदेशक जेफ स्मिथ ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि डोकलाम संकट की वजह से ट्रम्प प्रशासन की स्थिति बेहद असहज हो गई थी। यह वो विवाद था जिसमें वह बिलकुल नहीं पड़ना चाहते थे। हालांकि स्मिथ ने यह स्वीकार किया कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि वास्तव में ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले पर आपस में आतंरिक स्तर पर क्या चर्चा की।
स्मिथ ने कहा कि इस विवाद के दौरान अगर आप अमेरिकी प्रशासन के बयानों के पीछे के अर्थ को समझें, आपको लगेगा कि वास्तव में जापान भारत की इस स्थिति का ज्यादा समर्थन करता है। अगर चीन भारत से बातचीत के लिये डोकलाम से हटने की पूर्व शर्त लगा रहा था तो ट्रम्प प्रशासन दोनों पक्षों को संकेत दे रहा था कि वह भारत का पक्षधर है। लेकिन आखिर में हुआ क्या। चीन का रुख लचीला था कि वह किसी समझौते तक पहुंच सके। आखिर में आपसी सहमति से दोतरफा समझौता करते हुए दोनों देशों ने न्यूनतम जरूरतों को पूरा किया।
उन्होंने कहा हालांकि भारत ने कई मायनों में चीन और समूचे विश्व को यह दिखा दिया कि उसके उच्च मानक हैं। वह भले ही नरमी से बात करे लेकिन उसकी ताकत में कहीं कोई कमी नहीं है। भारत ने अपना लक्ष्य स्पष्ट कर दिया और उसे हासिल भी कर लिया।
उल्लेखनीय है कि विगत सोमवार को भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर 75 दिन चला विवाद खत्म हुआ। लिहाजा दोनों देशों ने अपनी सेनाएं डोकलाम से हटा लीं। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन में शामिल होने के लिये चीन जाने पर हामी भरने से सिर्फ एक दिन पहले हुआ।

पीएम नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार नए चेहरों को लेकर चर्चा

पीएम नरेंद्र मोदी रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार रविवार सुबह होगा। इसके पहले कई मंत्रियों ने अपना इस्तीफा दे दिया है और नए चेहरों को लेकर चर्चा जारी है। वहीं खबर है कि इस पूरी कवायद में शिवसेना, जदयू और टीडीपी के सांसदों को कैबिनेट में शामिल करने को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
खबरों के अनुसार पहले कहा जा रहा था कि जदयू के एनडीए में शामिल होने के बाद नीतीश के दो सांसदों को मोदी कैबिनेट में जगह दी जा सकती है लेकिन अब तक नीतीश को इस मामले में कोई सूचना नहीं मिली है। टीडीपी के मंत्रिमंडल में शामिल होने को तय माना जा रहा है लेकिन कौन मंत्री बनेगा। शिवसेना को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। जानकारी के अनुसार आरएसएस की बैठक में गए अमित शाह ने संघ प्रमुख के साथ बैठकर मंत्रियों को लेकर लिस्ट को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
मोदी रविवार को अपनी कैबिनेट में तीसरी बार फेरबदल करेंगे। इसके बाद उनके मंत्रिमडल ने 9 नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। विस्तार रविवार की सुबह राष्ट्रपति भवन में दस बजे होगा। वहीं एक सप्ताह के अंदर भाजपा केंद्रीय संगठन में भी बड़ा बदलाव हो सकता है।
भाजपा के छह मंत्रियों का इस्तीफा हो चुका है। महेंद्र नाथ पांडे को जहां उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान दी जा चुकी है। वहीं राजीव प्रताप रूड़ी, संजीव बालियान और फग्गन सिंह कुलस्ते को टीम मोदी से हटाकर टीम शाह में जगह मिलेगी। उन्हें संगठन के अंदर जिम्मेदारी दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा को जल्द ही किसी प्रदेश में राज्यपाल की जिम्मेदारी मिलेगी। जबकि श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रय को आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में सक्रिय होने को कहा जाएगा। उसी लिहाज से जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने भले ही इस्तीफे की पेशकश कर दी है लेकिन माना जा रहा है कि विभाग में बदलाव के साथ वे मंत्रिमंडल में बने रहेंगे।
नए मंत्रियों के रूप में जिन नामों की अटकल है उसमें महाराष्ट्र से विनय सहस्त्रबुद्धे, मध्य प्रदेश से प्रहलाद पटेल, कर्नाटक से प्रहलाद जोशी या सुरेश आंगड़ी, गुजरात से डॉ. भारती धीरूभाई, पश्चिम बंगाल से रूपा गांगुली का नाम शामिल है।
अधिकतर मंत्रियों के नामों पर फैसला राज्यों में आगामी चुनाव और जातिगत संतुलन के लिहाज से किए जा रहे हैं। हिमाचल और उत्तराखंड से भी एक एक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा जदयू और अन्नाद्रमुक के कोटे से दो दो और शिवसेना से एक मंत्री बनाए जाने की संभावना है। इन दलों को शनिवार की सुबह तक मंत्री पद के लिए नाम भेजने को कहा गया है।
बताया जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार के अगले चार पांच दिनों के अंदर ही संगठन का भी बहुप्रतीक्षित विस्तार हो जाएगा। मंत्रिमंडल से हटाए गए कुछ मंत्रियों को संगठन में महत्वपूर्ण पद मिलेगा। ध्यान रहे कि महासचिव पद पर भी दो सीटें रिक्त हैं। जबकि संविधान के अनुसार उपाध्यक्ष पद पर शाह अभी छह और लोगों को नियुक्त कर सकते हैं। इसमें दक्षिणी और पूर्वी राज्यों का संतुलन साधने की कोशिश होगी।

राजस्थान के जैसलमेर में अमेरिका की तीन छात्राएं दर्शन करने पहुंचीं

राजस्थान के जैसलमेर में स्थित लोकदेवता बाबा रामदेव के दर्शन को पूरी दुनिया से लोग आते है। इनमें इस बार अमेरिका की तीन छात्राएं भी शामिल है। उन्होंने इंटरनेट पर बाबा रामदेव और उनके मेले के बारे में जानकारी मिली और वे यहां दर्शन करने आ पहुंचीं। उन्होंने रामदेवरा पहुंचकर बाबा की समाधि के दर्शन कर पूजा अर्चना की।
गौरतलब है कि बाबा रामदेव का मेला राजस्थान का सबसे बड़ा लोकमेला है। पिछले 15 दिन में यहां करीब 40 लाख लोग दर्शन कर चुके है। शुक्रवार को बाबा रामदेव जयंती पर यह मेला अपने पूरे परवान पर है।
अमेरिका के अटलांटा, एरिजोना व न्यूयॉर्क में रहकर पढ़ाई कर रही एलिसी, टेरेसा और इजी ने बताया कि इंटरनेट पर उन्हें जानकारी मिली की राजस्थान के जैसलमेर शहर में बाबा रामदेव का मेला चल रहा है जिसमे सभी धर्मों के लाखों लोग शिरकत करते हैं। यहां भारत की विविधता में एकता की झलक देखने को मिलती है। इसे देख कर उन्हे यहां आने की इच्छा हुई और वे यहां आ पहुंची।
बाबा के दर्शन करके उत्साहित तीनों छात्राओं ने बताया कि अमेरिका जाकर भी प्रतिदिन बाबा की प्रतिमा की पूजा करेंगी इसलिए मेला मैदान से उन्होंने पूजा सामग्री की खरीददारी भी की।

विदिशा में 35 साल से गरीबों को एक रुपए में भोजन करा रही सार्वजनिक सेवा समिति

पांच रुपए में अम्मा थाली और दीनदयाल रसोई के बारे में तो आपने खूब सुना होगा। लेकिन विदिशा में सार्वजनिक सेवा समिति भी 35 साल से गरीबों को एक रुपए में भोजन करा रही है। इसकी शुरुआत आपातकाल काल के दौरान कुछ लोगों ने गरीब बस्तियों में फल बांटने से की थी। इसके बाद 21 सितंबर 1983 को मारवाड़ी धर्मशाला के एक कमरे बाकायदा एक भोजनालय की शुरूआत हुई।
यहां एक रूपए में मरीजों और गरीबों को भोजन कराने की व्यवस्था की गई। हालांकि बाद में यह व्यवस्था अस्पताल के रोगियों और उनके परिजनों के लिए ही सीमित कर दी गई और प्रशासन के सहयोग से समिति ने जिला अस्पताल परिसर में ही भोजनालय बनाया।
यहां पर पिछले 35 वर्षों से रोगियों और उनके सहायकों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। रविवार 3 सितंबर को इस व्यवस्था के 35 वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध शेफ संजीव कपूर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल होने जा रहे हैं।
समिति के संस्थापक अध्यक्ष रहे रामेश्वर दयाल बंसल बताते हैं कि भोजनालय में भोजन के अलावा रोगियों के लिए दलिया और खिचड़ी भी दी जाती है। समिति के सदस्य रोजाना सुबह-शाम जिला अस्पताल के वार्डों में आवाज लगाते हुए पर्चियां बांटते हैं। उनके मुताबिक हर रोज भोजनालय में सुबह और शाम 250 से 300 लोग भोजन करते हैं। एक थाली पर 10 से 12 रुपए का खर्च आता है।
गरीबों को भोजन कराने का विचार आपातकाल के दौरान ही जन्मा था। संघ से जुड़े होने के कारण उस दौरान शाखाएं बंद हो चुकी थीं। समाजसेवा से जुड़े होने के चलते कुछ साथियों के साथ गरीब बस्तियों में जाकर हर रविवार को फल या मिठाई बांटते थे। इन्हीं बस्तियों में गरीबों की हालत देखकर सस्ता भोजन उपलब्ध कराने का विचार आया।
समिति के सचिव डॉ. जीके माहेश्वरी और संस्थापक अध्यक्ष रहे रामेश्वर दयाल बंसल बताते हैं कि लोग अपने प्रियजनों की स्मृति में गरीबों को भोजन कराने के लिए राशि दान करते हैं। इसके अलावा जन्मदिन पर भी लोग राशि दान करते हैं। आज की स्थिति में महीने में 25 दिन स्मृतियों के रूप में भोजन वितरित किया जाता है। शुरूआत के समय संस्था के पास महज 3 हजार रुपए की राशि थी, जो आज बढ़कर करीब 35 लाख रुपए हो गई है।