ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर वनडे बना यादगार

ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर के लिए भारत के खिलाफ गुरुवार को बेंगलुरू वनडे यादगार बन गया। वॉर्नर का यह 100वां वनडे मैच हैं और उन्होंने इसमें शानदार शतक जड़ते हुए इसे अविस्मरणीय बना लिया।
वॉर्नर 100वें अंतरराष्ट्रीय वनडे में शतक लगाने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई और दुनिया के आठवें बल्लेबाज बने। उनसे पहले यह करिश्मा गार्डन ग्रीनिज (वेस्टइंडीज), क्रिस कैर्न्स (न्यूजीलैंड), यूसुफ योहाना (पाकिस्तान), कुमार संगकारा (श्रीलंका), क्रिस गेल (वेस्टइंडीज), मार्कस ट्रेस्कोथिक (इंग्लैंड) और रामनरेश सरवन (वेस्टइंडीज) कर चुके हैं।
वॉर्नर के लिए भारत के खिलाफ जारी सीरीज अच्छी साबित नहीं हो रही थी। वे इससे पहले तीन मैचों में एक भी फिफ्टी नहीं लगा पाए थे। वे इससे पहले तीन मैचों में 25, 1 और 42 रन ही बना पाए थे। वॉर्नर ने इससे उबरते हुए बेंगलुरू में शानदार पारी खेली। उन्होंने लय हासिल करने के बाद जमकर स्ट्रोक्स खेले और भारतीय स्पिनरों को पूरी तरह बेअसर साबित किया।
वॉर्नर ने केदार जाधव की गेंद पर चौका लगाते हुए शतक पूरा किया। यह उनका वनडे में 14वां शतक था। उन्होंने इसके लिए 103 गेंदों का सामना कर 10 चौके और 3 छक्के लगाए।

चीन ने वायुसेना में शामिल किया जे-20 जेट

चीन ने गुरुवार को स्टेल्थ जे-20 जेट को वायुसेना में शामिल करने की घोषणा की। ये लड़ाकू विमान रडार में दिखाई नहीं देता है। यही खासियत उसे दूसरे विमानों से अलग करती है। हालांकि ये पता नहीं चल सका है कि वायुसेना में कितने जेट शामिल किए गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि जे-20 चीन की चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। ये मध्यम व लंबी दूरी तक मार करने वाला विमान है। 2011 में ये पहली बार आकाश में देखा गया। जुहाई गुआंग्डोंग प्रांत में चीन के 11वें एयर शो के मौके पर लोगों को दिखाया गया। ये शो पिछले साल नवंबर माह में आयोजित किया गया था।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इसके वायुसेना में शामिल होने से चीन व भारत के लड़ाकू बेड़े के बीच संतुलन स्थापित हो सकेगा। दो इंजन वाले जेट को चेंगदू एयरोस्पेस कॉरपोरेशन ने बनाया है। पाकिस्तान इस विमान को हासिल करने के लिए अपनी इच्छा जाहिर कर चुका है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी सेना एफ-22 राप्टर का इस्तेमाल करती है। ये पांचवी पीढ़ी का स्टेल्थ जेट है। 2014 में अमेरिका-चीन आर्थिक व रक्षा समीक्षा आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जे-20 एशिया पेसिफिक देश में इस्तेमाल होने वाले विमानों की तुलना में ज्यादा सक्षम है। इसके होने से चीन की सेना की मारक क्षमता में बहुत ज्यादा इजाफा होता है।

सबसे ज्यादा धान बोनस रायपुर संभाग के पांच जिलों में

किसानों के लिए अच्छी खबर है। सरकार जल्द ही धान बोनस देने जा रही है। इसे बांटने की योजना लगभग अंतिम चरण में है। किस संभाग में कितना बोनस बंटेगा, ये तय हो चुका है। सरकारी आंकड़ों पर यकीन करें तो सबसे ज्यादा करीब 677 करोड़ रुपए रायपुर संभाग के पांच जिलों में दिया जाएगा। लगभग सवा चार लाख किसान लाभान्वित होंगे।
बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स) ने वर्ष 2016-17 में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के उपार्जन केंद्रों में धान बेचने वाले लगभग 13 लाख 28 हजार किसानों को करीब 2100 करोड़ स्र्पए का बोनस देने के लिए तैयारी पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश भर में बोनस तिहार मनाया जाएगा। यहां किसानों को बोनस की राशि दी जाएगी। इन किसानों ने समितियों में 69 लाख 59 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा धान बेचा था।
– बस्तर संभाग के 7 जिलों-बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर और सुकमा के कुल 94 हजार किसानों को 130 करोड़ 09 लाख स्र्पए का बोनस मिलेगा।
– बिलासपुर संभाग के 5 जिलों-बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़ और मुंगेली के तीन लाख 34 हजार 594 किसानों को 560 करोड़ 15 लाख स्र्पए का बोनस दिया जाएगा।
– दुर्ग संभाग के अंतर्गत बालोद, बेमेतरा, दुर्ग, कर्वा और राजनांदगांव के कुल तीन लाख 98 हजार किसानों को कुल 570 करोड़ 25 लाख स्र्पए का बोनस दिया जाएगा।
– रायपुर संभाग के अंतर्गत बलौदाबाजार, मतरी, गरियाबंद, महासमुन्द और रायपुर जिलों के चार लाख 24 हजार 380 किसानों को बोनस के रूप में 677 करोड़ 76 लाख स्र्पए दिए जाएंगे।
– सरगुजा संभाग के अंतर्गत बलरामपुर, कोरिया, सूरजपुर, जशपुर और सरगुजा के 76 हजार 320 किसानों को 139 करोड़ 48 लाख स्र्पए का बोनस मिलेगा।

शिशुओं की मौत के मामले में मध्यप्रदेश की सबसे खराब स्थिति

शिशुओं की मौत के मामले में मध्यप्रदेश के एक बार फिर देश में सबसे खराब स्थिति में रहा। जनगणना निदेशालय की एसआरएस-2017 की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक मप्र की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 47 हैं। यानी यहां जन्म से एक साल के बीच प्रति हजार बच्चों में 47 की मौत हो जाती है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र की आईएमआर 50 और शहरी क्षेत्र की 33 प्रति हजार है।
एसआरएस-2016 की रिपोर्ट में आईएमआर 50 प्रति हजार थी। इस तरह सिर्फ तीन अंको गिरावट आई है। बता दें कि मप्र सरकार ने 2015 तक आईएमआर 30 प्रति हजार लाने का लक्ष्य तय किया था। शिशुओं और माताओं की मौत कम करने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन के तहत कई योजनाएं चल रही हैं। केन्द्र व राज्य सरकार इन योजनाओं पर 1800 करोड़ रुपए हर साल खर्च कर रही है।