इस टमाटर की लंबाई जानकर आप भी रह जायेंगे हैरान

अब कद्दू की साइज के टमाटर भी आ चुके हैं जिसे काट-काट कर आप कई दिनों तक काम में ले सकते हैं। यूके और यूएस के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक ऐसे टमाटर के बीज तैयार किये है जिनके पौधों पर 3 से 4 किलो तक वजनी टमाटर लगते हैं। 20 साल की कड़ी मेहनत के बाद इन बीजों को बनाने में कामयाबी हासिल की है।

दरअसल ब्रिटेन और अमेरिका की एक कंपनी जिन बीजों का तैयार करती है , उनके पौधों से आज तक का सबसे बड़ा टमाटर सामने आया है। इस टमाटर की लंबाई 10 इंच है और यह टमाटर साढे तीन किलो से भी ज्यादा वजन का है। यह टमाटर इतना बड़ा है कि इसे आप काट-काट कर रखते हुए कई दिनों तक काम में ले सकते है।

बता दें कि जिगनमोटो बीज से उगले वाले टमाटर के पौधे की लबांई करीब 6 फुट होती है और उसमें 1.5 से लेकर साढे तीन किलो तक के टमाटर लगते है। इसके एक पौधे के करीब 11 टमाटर लगते हैं। अपनी साइज और वजन के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा टमाटर भी घोषित हो चुका है। इसी कारण इस कंपनी ने इसके बीजों से खेती कर इससे बडा टमाटर उगाने वाले को 5 हजार पाउंड (46 हजार रूपए) का इनाम देने की घोषणा भी की है।

इस आठ फीट सांप का क्यों हुआ सीटी स्कैन

सोशल डेस्क। वैसे आपने अब तक इंसानों का सीटी स्कैन देखा होगा, लेकिन आपने किसी अन्य जीव का सीटी स्कैन नहीं देखा होगा। लेकिन हम आपको एक ऐसी खबर बताने जा रहे है, जिस पर यकिन नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह हुआ है, खबर के मुताबिक सीटी स्कैन एक अजगर सांप किया है, यह सांप करीबन आठ फिट का है। आपको बता दें कि यह खबर ओडिशा के भुवनेश्वर से 130 किलोमीटर दूर स्थित आनंदपुर से है।

आपको बता दें कि सांप का सीटी स्कैन सिर में लगी चोट का पता लगाने के लिए किया गया है। वन विभाग के कर्मचारियों ने इस सांप को 4 दिन पहले भुवनेश्वर से 130 किलोमीटर दूर आनंदपुर बरामद किया था। सांप बहुत ही गंभीर हालत में था।

वन विभाग की टीम ने अजगर को गंभीर हालत में देख कर स्नेक हेल्पलाइन को सौंप दिया था । इसके बाद इस सांप को ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ ऐग्रिकल्चर एंड टेक्नॉलजी में लाया गया स्नेक हेल्पलाइन के मलिक शुभेंदु ने कहा कि कई मेडिकल विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद अजगर के चोट का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन का सहारा लिया गया। जिससे सांप की अंदरूनी चोटों का पता चला है। अब सांप की हालत मे सुधार नजर आ रहा है।

टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर ने यूरोप को 15-9 से जीत दिलाई

दुनिया के नंबर दो टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर ने सुपर टाइ-ब्रेक में निक किर्गियोस को हराकर यहां पहले लेवर कप टेनिस टूर्नामेंट में टीम यूरोप को विश्व टीम के खिलाफ 15-9 से जीत दिलाई।
इस साल ऑस्ट्रेलियाई ओपन और विंबलडन का खिताब जीतने वाले फेडरर ने रविवार को 4-6, 7-6, 11-9 से यह मुकाबला अपने नाम किया।
स्विट्जरलैंड के 36 वर्षीय दिग्गज खिलाड़ी फेडरर को 22 साल के दुनिया के 20वें नंबर के ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी के खिलाफ जूझना पड़ा। उन्होंने पहला सेट गंवा दिया था, लेकिन उसके बाद वह वापसी करने में सफल रहे और जीत दर्ज की।
दिन की शुरुआत में टीम यूरोप को 9-3 की बढ़त हासिल थी। शुरुआती डबल्स मुकाबले में जैक सोक और जॉन इस्नर ने टॉमस बर्डिच और मारिन सिलिच को 7-6, 7-6 हराकर यूरोप की बढ़त को 6-9 कर दिया। इसके बाद एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने सैम क्वेरी को सीधे सेटों में 6-4, 6-4 से हराकर यूरोप को खिताब की दहलीज पर पहुंचाया।
हालांकि, नडाल इसके बाद इस्नर के खिलाफ सीधे सेटों में हार गए, जिससे यूरोप की बढ़त 12-9 रह गई। फेडरर ने अंतिम मुकाबले में जीत के साथ यूरोप को पहले लेवर कप का खिताब दिलाया।

अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस आज से भारत दौरे पर

अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस आज से भारत दौरे पर आ रहे हैं। उनके दौरे को लेकर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह दौरा अहम होगा और इस पर कई करार हो सकते हैं। मैटिस से भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण मुलाकात करेंगी।
माना जा रहा है कि इस दौरान फाइटर जेट एफ-16, ड्रोन डील के अलावा अफगानिस्तान को लेकर सुरक्षा की साझा चिंताओं का मुद्दे पर चर्चा होगी। दौरे से पहले मैटिस ने एक बयान में कहै कि दूसरों की कीमत पर भारत के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत नहीं किया जा रहा है। अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समर्थ देने के लिए उन्होंने भारत की सराहना की है।
मैटिस ने सोमवार को कहा, “भारत के साथ जो संबंध हम बना रहे हैं वह दूसरे देशों के लिए अपवाद नहीं है। आज के आतंकवाद विरोधी युग में दूसरे देश में हस्तक्षेप नहीं करने के पारंपरिक नियम से बंधा कोई भी राष्ट्र इस संबंध को किसी भी प्रकार से विपरीत नहीं पाएगा।”
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत लगातार समर्थक बना हुआ है। अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचा निर्माण में लाखों डॉलर का योगदान और अफगान अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए उन्होंने भारत की सराहना की।

पत्रकार जे डे की हत्या मामले में चार गवाहों को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश

विशेष मकोका कोर्ट ने पत्रकार जे डे की हत्या मामले में चार गवाहों को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया है। एक गवाह ने दावा किया था कि चार अज्ञात लोगों ने घर में घुसकर उसको धमकी दी। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया।
2011 में हुए इस हत्याकांड का गैंगस्टर छोटा राजन मुख्य आरोपी है। विशेष सरकारी वकील प्रदीप घरात ने सोमवार को बताया, ‘कोर्ट ने पिछले सप्ताह चार गवाहों को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश दिए हैं।’ सरकारी वकील ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धारा 19 के तहत सुरक्षा की मांग की थी।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जे डे की पत्नी सहित सौ से अधिक गवाहों के बयान दर्ज होंगे। जागरण समूह के अखबार मिड-डे में कार्यरत जे डे की 11 जून, 2011 को उपनगर पवई में हत्या कर दी गई थी। अदालत ने पिछले साल 31 अगस्त को छोटा राजन के खिलाफ आरोप तय किए थे। सीबीआइ ने मामले में पूरक आरोपपत्र दायर किया था।
पूरक आरोपपत्र के अनुसार, राजन ने जे डे की इसलिए हत्या कराई थी, क्योंकि उन्होंने गैंगस्टर के खिलाफ कुछ खबरें लिखी थीं। छोटा राजन को 25 अक्टूबर, 2015 को इंडोनेशिया में बाली हवाईअड्डे पर गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया।
2011 में दायर पहले आरोपपत्र में सतीश कालिया, अभिजीत शिंदे, अरुण ढाके, सचिन गायकवाड़, अनिल वाघमोडे, नीलेश शेंडगे, मंगेश अगवाने, विनोद असरानी, पॉलसन जोसेफ और दीपक सिसोदिया के नाम थे। ये सभी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सीबीआइ ने स्थानीय पत्रकार जिग्ना वोरा के खिलाफ भी अलग से आरोपपत्र दायर किया है। इसमें जिग्ना पर जे डे की हत्या के लिए राजन को उकसाने का आरोप है।

फोन बढ़ते गए और शिक्षा से लोग दूर होते गए दोनों ही क्षेत्रों में बड़ा बदलाव

टेलीफोन का उपयोग करने के मामले में मध्यप्रदेश साल दर साल आगे बढ़ रहा है, लेकिन स्कूलों के एडमिशन के मामले में सूबे का ग्राफ नीचे आता जा रहा है। नीति आयोग की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक 2005 में मप्र में हर 100 में से 5 लोगों के पास फोन था। वहीं 100 में से 94 बच्चे प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश लेते थे। करीब दस साल में इन दोनों ही क्षेत्रों में बड़ा बदलाव हुआ है। फोन बढ़ते गए और शिक्षा से लोग दूर होते गए।
नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मप्र में 2015 में हर 100 में से 60 लोगों के पास टेलीफोन पहुंच गया, लेकिन प्राथमिक स्कूलों में एडमिशन की बात करें तो प्रवेश 100 में से 94 लोगों से घटकर 79 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने भोपाल दौरे के दौरान मप्र सरकार को खरी-खरी सुनाते हुए कहा था कि प्रदेश में स्कूल ड्रॉप आउट बहुत ज्यादा हैं, इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
मप्र में स्कूल शिक्षा विभाग का इस साल का बजट करीब 18 हजार करोड़ रुपए है। पिछले दो सालों से यह बजट करीब 20 हजार करोड़ रुपए के आसपास रहा है। पिछले दो सालों में मप्र सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा बजट दिया। इसके बावजूद सरकारी सिस्टम प्रदेश के स्कूलों में प्रवेश की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। स्कूलों में प्रवेश बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर मिड-डे मील, साइकल वितरण सहित कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।