1-2 से पिछड़ गया भारत डेविस कप वर्ल्ड ग्रुप प्लेऑफ

रोहन बोपन्ना और पूरव राजा की डबल्स मैच में हार के साथ ही भारत डेविस कप वर्ल्ड ग्रुप प्लेऑफ मुकाबले में कनाडा के खिलाफ 1-2 से पिछड़ गया। अब उसे वर्ल्ड ग्रुप में पहुंचने के लिए दोनों रिवर्स सिंगल्स जीतने होंगे।
अनुभवी डेनियल नेस्टर और वासेक पोस्पिसिल ने बोपन्ना-नेस्टर को 7-5, 7-5, 5-7, 6-3 से हराया। यह मुकाबला दो घंटे 52 मिनट तक चला। युगल मैच में हार की वजह से भारत की अब वर्ल्ड ग्रुप के लिए क्वालीफाई करने की संभावनाएं कम हो गई है।
27 वर्षीय पोस्पिसिल इन चारों खिलाड़‍ि यों में सबसे युवा थे और वे अकेले एटीपी टूर में सिंगल्स भी खेलते हैं। उनके शानदार रिटर्न्स और उम्दा प्लेसमेंट्‍स ने मैच में अंतर पैदा किया।

रेलवे ने लिया एक लाख रिक्त पदों पर भर्ती का फैसला

देर आयद, दुरुस्त आयद। रेलवे ने संरक्षा श्रेणी में एक लाख कर्मचारियों की भर्ती का फैसला लिया है। कई दुर्घटनाओं और भारी उलटफेर के बाद रेलवे को यह बात समझ में आई कि दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए तकनीक के साथ-साथ उपकरणों, सामानों और कर्मचारियों की कमी भी दूर करनी पड़ेगी। इन भर्तियों पर लंबे समय से रोक लगी हुई थी।
रेलवे बोर्ड अधिकारियों के साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल की पहली मैराथन बैठक के बाद से ही संरक्षा को लेकर रेलवे की सोच में बदलाव दिखाई देने लगा है। रविवार को पूर्ण रेलवे बोर्ड और जोनल महाप्रबंधकों के बीच हुई वीडियो कांफ्रेंस में रेल मंत्री के निर्देशों को जमीन पर उतारने के लिए बोर्ड ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
बैठक में महानिदेशक (कार्मिक) ने कहा कि सेफ्टी कैटेगरी में जूनियर इंजीनियरों तथा सीनियर सेक्शन इंजीनियरों की शत-प्रतिशत भर्ती का निर्णय लिया गया है। अगले तीन महीनों में बड़ी संख्या में सहायक स्टेशन मास्टर तथा गार्डों की भर्ती होगी। इसके अलावा ग्रुप-सी के 50 फीसद पदों को रेलवे भर्ती बोर्डों (आरआरबी) के माध्यम से भरा जाएगा। उन्होंने ग्रुप-डी के आधे पदों को आरआरबी और शेष पदों को रेलवे भर्ती प्रकोष्ठों (आरआरसी) के मार्फत भरे जाने की जानकारी दी।
बैठक में सेफ्टी श्रेणी के कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए जोनों को जरूरत पड़ने पर कांट्रैक्ट के आधार पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सेवाएं लेने को भी कहा गया। उन्हें स्पष्ट कर दिया गया कि सेफ्टी कैटेगरी कर्मचारियों की कार्यदशाओं को लेकर उनका नजरिया सकारात्मक होना चाहिए। जहां तक संभव हो कर्मचारियों के इंटरजोनल ट्रांसफर अनुरोधों को लटकाने की बजाय उन पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए। बोर्ड ने लोको पायलटों के विश्राम, आवास और खानपान संबंधी दिक्कतों का तुरंत समाधान किए जाने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में पेंशनरों की दिक्कतों पर भी चर्चा हुई। वित्त और कार्मिक विभाग से विशेष टीमों का गठन कर एक महीने में पेंशनरों की समस्याओं का निदान करने को कहा गया है।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने कहा कि संरक्षा के मामले में विभागवाद आड़े नहीं आना चाहिए। अधिकारियों को सेक्शन इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर, टै्रकमैन, चौकीदारों के बीच जाकर उनसे बात करनी चाहिए और उनकी समस्याओं व जरूरतों को समझने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सभी कार्यालयों, वर्कशॉप, स्टाफ क्वार्टर, रनिंग रूम, रेस्ट हाउस, आरपीएफ बैरक की दशा में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआइआरएफ) के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा ने इन निर्णयों पर प्रसन्नता प्रकट की। उन्होंने कहा कि संरक्षा श्रेणी में वैसे तो दो लाख पद खाली हैं, लेकिन एक लाख पद ऐसे हैं, जिनके बगैर काम नहीं चल सकता। देर से ही सही, रेलवे बोर्ड ने हमारी बात को समझा है। इससे निश्चित रूप से स्थिति में सुधार होगा। कुल मिलाकर लगभग 65 हजार कर्मचारियों की भर्ती आरआरसी के जरिये, जबकि 35 हजार कर्मचारियों की भर्ती आरआरबी के मार्फत होगी।

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर जयपुर में विश्व रिकॉर्ड लगाई पौने दो लाख तस्वीरों की प्रदर्शनी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर रविवार को जयपुर में एक विश्व रिकॉर्ड बना। मोदी के एक प्रशंसक ने शहर के ट्राइटन मॉल में प्रधानमंत्री की विभिन्न मुद्राओं में पौने दो लाख तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई।
प्रदर्शनी लगाने वाले मनमोहन अग्रवाल का दावा है कि यह आयोजन गिनीज बुक आफॅ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होगा। इसके लिए गिनीज बुक से स्वीकृति मिल गई है।
गिनीज बुक के मानदंडों के अनुसार प्रदर्शनी में कोई भी तस्वीर 3.9 इंच से कम की नहीं लगाई गई और न ही कोई तस्वीर रिपीट की गई।
प्रदर्शनी में मोदी के राजनीतिक सफर की शुरुआत से प्रधानमंत्री बनने और उसके बाद अब तक की तस्वीरें प्रर्दिशत की गई हैं। मनमोहन अग्रवाल का कहना है कि प्रदर्शनी की तैयारी में छह माह का समय लगा।
उन्होंने कहा कि जब गिनीज बुक की तरफ से सर्टिफिकेट मिलेगा तो उसे पीएमओ को भेंट किया जाएगा। अग्रवाल इससे पहले भी छह बार विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं।
इनमें सबसे बड़ी लकड़ी की चम्मच और 700 साल का सबसे बड़े आकार का कैलेंडर शामिल है। मनमोहन से पहले 1.44 लाख तस्वीरों के साथ हांगकांग के एक व्यक्ति का नाम रिकॉर्ड है।

मप्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सामने आई बांटे गए वेतन में विसंगति

मप्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बांटे गए वेतन में ऐसी विसंगति सामने आई हैं, जिसने पूरी व्यवस्था को हिला दिया है। पंचायत विभाग ने पिछले 10 महीनों में प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों में पदस्थ सचिवों को वेतन में लगभग 1 अरब 21 करोड़ रुपए ज्यादा बांट दिए है।
विभाग के पीएस राधेश्याम जुलानिया ने यह गड़बड़ी पकड़ी है। इसके बाद प्रदेशभर के पंचायत सचिवों से वेतन में अधिक बांटी गई राशि की वसूली शुरू हो गई है। एक पंचायत सचिव से 53 हजार रुपए से ज्यादा वसूल होने हैं।
गौरतलब है कि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जुलाई महीने में ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन 5300 रुपए कम कर दिया था। ग्रापं सचिवों सहित कई संगठनों ने इसका विरोध किया और वेतन में कटौती को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच विभाग ने एक निर्देश जारी कर दिया कि, ग्रापं सचिवों को 10 महीने से ज्यादा वेतन मिल रहा है।
विभाग के अनुसार पंचायत सचिवों का वेतन 14 हजार 646 रुपए है लेकिन, किसी विसंगति के कारण अक्टूबर 2016 से पंचायत सचिवों को 19 हजार 770 रुपए वेतन दिया जा रहा है। यानी एक पंचायत सचिव को 5324 रुपए का वेतन हर महीने ज्यादा मिला है। यह वेतन अक्टूबर 2016 से जुलाई 2017 तक मिला।
यानी 10 महीने में एक पंचायत सचिव को 53 हजार 240 रुपए का वेतन ज्यादा दे दिया गया। पूरे प्रदेश में 22 हजार 824 ग्राम पंचायत सचिव हैं। इस हिसाब से 10 महीने में पूरे प्रदेश में लगभग 1 अरब 21 करोड़ 51 लाख रुपए का वेतन सचिवों में ज्यादा बंट गया है। सरकार अब सचिवों से वेतन में ज्यादा दी गई राशि को वसूल करेगी।
वेतन में ज्यादा मिल चुकी राशि को वसूलने के लिए हर पंचायत सचिव से मप्र सरकार अंडरटेकिंग फार्म (वचन पत्र) भरवा रही है। जनपदों के माध्यम से भरवाए जा रहे इस वचन पत्र में लिखा है कि 20 जुलाई 2013 से 1 अगस्त 2013 को तय हुआ वेतनमान अनंतिम था। इस वेतनमान से ऊपर जितनी भी राशि मुझे मिली है उसे सरकार वापस वसूल सकती है।
सचिव इस वचन पत्र में लिखकर दे रहे हैं कि, वेतन में ज्यादा मिली राशि को सरकार हर महीने मिलने वाले वेतन या खास मौकों पर मिलने वाले एरियर की राशि में से वसूली हो सकती है। इतना ही नहीं सचिवांे से यह भी लिखवाकर लिया जा रहा है कि, यदि किसी कारण वह ये राशि वापस नहीं कर पाते तो परिवार या उत्तराधिकारी से बढ़े हुए वेतन की राशि वसूल की जा सकती है।
पूरे प्रदेश में ग्राम पंचायत सचिवों से ऐसे वचन पत्र भरवाएं जा रहे हैं। सरकार के हिसाब से पिछले 10 महीने से सचिवों को करीब 5300 रुपए ज्यादा मिल रहा था। इस हिसाब से एक सचिव से 53 हजार की वसूली तो होनी ही है।
ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन जनपदों से निर्धारित होता है। शासन ने जो वेतन तय किया था उसे कई जगह वेतन बहुत ज्यादा मिल रहा था। जो वेतन ज्यादा मिला है उसे एडजस्ट करने के लिए अंडरटेकिंग फार्म भरवाए जा रहे हैं।