पीवी सिंधु और पारुपल्ली कश्यप ने ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में बना ली जगह

भारत की शीर्ष महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और पुरुष खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप ने कोरिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के अपने-अपने मुकाबलों में जीत हासिल करके दूसरे दौर में जगह बना ली है।
विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली सिंधु ने बुधवार को महिला एकल वर्ग के पहले दौर में 17वीं वरीयता प्राप्त चेउंग नगान यी को मात दी। दुनिया की चौथी नंबर की खिलाड़ी सिंधु ने हांगकांग की चेउंग को सीधे गेमों में 21-13, 21-8 से मात दी। अब प्री-क्वार्टर फाइनल में सिंधु का मुकाबला थाईलैंड की नितचाओन जिंदापोल से होगा।
वहीं, पुरुष एकल वर्ग के पहले दौर में कश्यप ने चीनी ताईपे के सु जेन हाओ को सीधे गेमों में 21-13, 21-16 से हराया। उनका सामना अब अगले दौर में शीर्ष वरीय प्राप्त कोरियाई खिलाड़ी सोन वान हो से होगा।
इससे पहले भारत के अग्रणी बैडमिंटन खिलाड़ी परूपल्ली कश्यप ने कोरिया ओपन के पुरुष एकल वर्ग की क्वालीफांग राउंड की बाधा पार कर ली थी। उन्होंने क्वालीफिकेशन राउंड में खेले गए दो मैचों में जीत हासिल करते हुए मुख्य दौर में प्रवेश किया।
कश्यप के अलावा मिश्रित युगल में अश्विनी पोनप्पा और रेड्डी की जोड़ी ने भी दोनों राउंड में जीत हासिल करते हुए मुख्य दौर में जगह बनाई थी। वहीं, प्रणव जेरी चोपड़ा और एन.सिक्की रेड्डी को मिश्रित युगल के पहले दौर में हार का सामना करना पड़ा है।

गुरुवार को अदालत में मौजूद रहेगा नौ हजार करोड़ का चूना लगाकर ब्रिटेन भागे उद्योगपति विजय माल्या

भारतीय बैंकों को नौ हजार करोड़ का चूना लगाकर ब्रिटेन भागे उद्योगपति विजय माल्या सुनवाई के दौरान गुरुवार को अदालत में मौजूद रहेगा।
लंदन के वेस्टमिंस्टर स्थित चीफ मजिस्ट्रेट की अदालत में उस पर मामला विचाराधीन है। अभी तक माल्या अदालत में व्यक्तिगत तौर पर पेश नहीं हुआ था।
भारत सरकार ने प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन में अपील की थी। उसके बाद अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। किगंफिशर के कर्ताधर्ता को अदालत ने वापस भारत भेजने का फैसला किया तो इसके दो माह के भीतर ब्रिटिश सरकार को उसे भारत को सौंपना होगा।
हालांकि फैसले के खिलाफ अपील का प्रावधान है और माना जा रहा है कि प्रत्यर्पण को टालने के लिए माल्या हर मुमकिन कोशिश करेगा। अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई चार दिसंबर से तय की है। माल्या को अप्रैल में स्काटलैंड यार्ड पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
यह कार्रवाई भारत सरकार की तरफ से की गई शिकायत के बाद की गई थी। तब माल्या ने जमानत हासिल कर ली थी। अदालत ने तब माना था कि केस मैनेजमेंट से जुड़ी सुनवाई के दौरान उसके मौजूद रहने की अनिवार्यता नहीं होगी। चीफ मजिस्ट्रेट एम्मा लुइस की अदालत में सुनवाई होगी।
इस मामले में भारत सरकार को सबसे ज्यादा उम्मीद क्राउन प्रासीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) से है। इसने जुलाई में अदालत से कहा था कि भारत सरकार से उसका बेहतरीन तालमेल है और केस से जुड़े इतने दस्तावेज उन्हें मिल चुके हैं जो ट्रायल शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं।
उधर, माल्या की पैरवी करने वाली टीम का कहना है कि वह पूरी तैयारी के साथ अदालत में जाएंगे। हालांकि उद्योगपति को अदालत में पेशी से छूट मिली है, लेकिन उन्होंने फैसला लिया है कि वह हर सुनवाई में व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहेंगे।
प्रर्त्यपण संधि पर ब्रिटेन व भारत ने करार 1992 में किया था, लेकिन इसने प्रभावी तरीके से काम करना नवंबर 1993 से शुरू किया। अब तक कई पेंचीदे मामले सुलझाने में इससे काफी मदद मिल चुकी है। गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के मामले में गुजरात निवासी समीरभाई, वूनूभाई पटेल को हाल ही में ब्रिटेन से प्रत्यर्पित किया गया है।
भारत में मामला दर्ज होने के बाद वह ब्रिटेन चले गए थे। अशोक मालिक के प्रत्यर्पण के लिए भारत ने ब्रिटेन से अपील की थी, लेकिन मलिक उसके बाद खुद ही भारत लौट आए।
जिनकी भारत को दरकार है उनमें राजेश कपूर, टाइगर हनीफ, अतुल सिंह, राज कुमार पटेल, जितेंद्र कुमार, आशा रानी, संजीव कुमार चावला व शाइक सादिक शामिल हैं।

ट्रेन में अब एम-आधार को आईडी प्रूफ के रूप में कर सकेंगे इस्तेमाल

ट्रेन में सफर के लिए यात्री अब एम-आधार को आईडी प्रूफ (पहचान प्रमाण पत्र) के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगे। रेल मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसने किसी भी आरक्षित श्रेणी के यात्रियों के लिए पहचान पत्र के रूप में आधार के डिजिटल प्रारूप ‘एम-आधार’ को मंजूरी देने का फैसला लिया है।
रेल मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, किसी भी आरक्षित श्रेणी में सफर के दौरान यात्री जब पासवर्ड डालकर एम-आधार दिखाएगा तब उसे आईडी प्रूफ के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
मालूम हो, एम-आधार एक मोबाइल ऐप है। डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने लांच किया है। इससे कोई भी व्यक्ति डाउनलोड कर सकता है। हालांकि इसे केवल उसी मोबाइल नंबर पर डाउनलोड किया जा सकता है, जो आपके आधार से लिंक हो। यह अभी केवल एंड्रॉयड फोन पर ही काम करेगा।

ओशो रजनीश ट्रस्ट के कोष से जुड़ी कथित धोखाधड़ी जांच बड़ा पर निर्देश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ओशो रजनीश ट्रस्ट के कोष से जुड़ी कथित धोखाधड़ी और अनियमितता की जांच मामले में एक बड़ा निर्देश दिया है। मंगलवार को एक इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) को भी प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया।
2016 में पुणे के योगेश ठक्कर ने पिछले साल पुलिस में मामला दर्ज करवाया था कि ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन के ट्रस्टियों ने ओशो की वसीयत में उनके हस्ताक्षर में धोखाधडी की है। पूरे मामले में कोई जांच न होते देख ठक्कर ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी।
ठक्कर की अपील न्यायमूर्ति आर वी मोरे और न्यायमूर्ति साधना जाधव की खंडपीठ ने कहा कि ‘हम सीबीआई को भी सुनना चाहते हैं, क्योंकि याचिका दायर करने वाले ने उनसे इस मामले की जांच कराने की मांग की है। कोर्ट ने सीबीआई को इस संबंध में नोटिस जारी करते हुए इस मामले की सुनवाई अब 27 सितंबर को करने को कहा है।
यहां बताना जरूरी हो जाता है कि आध्यात्मिक गुरु रजनीश की मौत 1990 में हो गई थी। वे अपने पीछे अकूत धन-दौलत छोड़ गए थे, ऐसा लोगों का मानना है। उनकी वसीयत 1989 में ही बन गई थी। ठक्कर का आरोप था कि यह वसीयत जाली है। उन्होंने अपने आरोप के समर्थन में एक प्राइवेट हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट साथ में दी जो उनके आरोप को सही साबित करती है।

कमजोर परफॉर्मेंस वाले कई मंत्री निशाने पर कैबिनेट की तरह मप्र से भी की जा सकती है कई मंत्रियों की छुट्टी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कैबिनेट विस्तार के संकेत देने के साथ ही प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। चुनावी जमावट के नाम पर लगभग आधा दर्जन कमजोर परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों के सिर पर तलवार लटकी हुई है। मंगलवार को कैबिनेट में सीएम के संकेत भी साफ इशारा कर रहे हैं कि इस बार मोदी कैबिनेट की तरह मप्र से भी कई मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है। विस्तार से पहले सीएम मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे। इसके लिए अफसर मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करवा रहे हैं। इसे भाजपा कोरग्रुप की बैठक में भी रखा जाएगा।
कैबिनेट में शामिल आधा दर्जन मंत्री परफॉर्मेंस, विवाद अथवा बिगड़े स्वास्थ्य के कारण मंत्रिमंडल से बाहर किए जा सकते हैं। पिछली बार भी मुख्यमंत्री चौहान ने फॉर्मूला-75 लागू कर बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस बार चूंकि 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए कैबिनेट की फाइनल टीम का गठन किया जाना है, इसलिए परफॉर्मेंस, जातिगत समीकरण, भौगोलिक समीकरण के अलावा कांग्रेस के कब्जे वाले इलाके में प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर ज्यादा फोकस होगा।
भाजपा सूत्रों की मानें तो जल्द ही कोरग्रुप की बैठक बुलाकर मंत्रियों के नाम फाइनल किए जाने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल पार्टी और सीएम के बीच जिन मंत्रियों के परफॉर्मेंस को लेकर चर्चा है, उनमें कुसुम महदेले, शरद जैन और ओमप्रकाश धुर्वे शामिल हैं। इन मंत्रियों के कामकाज को लेकर सत्ता संगठन दोनों ही नाराज हैं। महदेले से उनके स्टाफ की मनमानी व विवादास्पद बयान को लेकर नाराजगी है। दूसरे महदेले की उम्र 70 साल से अधिक होना भी एक वजह बताई जा रही है।
मोदी कैबिनेट में कई मंत्रियों को उम्र की वजह से कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। ओमप्रकाश धुर्वे और राज्य मंत्री शरद जैन का कामकाज संतोषजनक नहीं माना गया है। दोनों ही मंत्री महाकौशल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। धुर्वे के क्षेत्र शहपुरा में हाल ही में भाजपा नगरीय निकाय का चुनाव भी हार गई थी।
सूत्रों का मानना है कि धुर्वे की जगह पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिह कुलस्ते के भाई रामप्यारे कुलस्ते को भी पार्टी एक मौका दे सकती है। हर्ष सिंह लंबे समय से बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं। अस्वस्थता के चलते उनके विभाग अन्य मंत्रियों को सौंपे गए थे।
चंबल के दो मंत्रियों के मामले फिलहाल कोर्ट में चल रहे हैं। इसलिए माना जा रहा है कि दोनों के फैसले आने पर ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
अमित शाह ने कांग्रेस के कब्जे वाली तीनों लोकसभा सीट को जीतने का टारगेट प्रदेश नेतृत्व को सौंपा है। इस नजरिए से विचार किया जा रहा है कि तीनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कैबिनेट में बढ़ाया जाए। गौरतलब है कि चंबल-ग्वालियर में कांग्रेस ने 11 सीटें जीती थीं। इस दृष्टि से यहां से कद्दावर नेता को कैबिनेट में शामिल करने पर पार्टी विचार कर रही है।