कंगना आज के जमाने की श्रीदेवी हैं : हंसल मेहता

एंटरटेनमेंट डेस्क। बॉलीवुड निर्देशक हंसल मेहता कंगना रनौत को आज के जमाने की श्रीदेवी मानते हैं। हंसल मेहता इन दिनों अपनी कंगना रनौत स्टारर फिल्म ‘सिमरन’ के प्रमोशन में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि कंगना के अभिनय की जितनी तारीफ की जाए, कम है। वह मुझे आज के जमाने की श्रीदेवी लगती हैं। वह किसी भी किरदार में इस तरह घुस जाती हैं कि उस किरदार को अपने अभिनय से जिंदा कर देती हैं।

हंसल मेहता ने कहा, फिल्म का कन्टेंट ही फिल्म का हीरो है और फिल्म की स्टार कंगना रनौत है। उन्होंने अपने दमदार अभिनय के दम पर इस फिल्म में न भूल पाने वाला काम किया है। मुझे कंगना रनौत के साथ काम करके बहुत मजा आया। वह एक बेहतरीन अभिनेत्री है। कहानी की मांग के अनुसार अपने काम में निखार भी लाती रहती हैं।

बताया जा रहा है कि सिमरन में कंगना रनौत एक गुजराती महिला की भूमिका निभा रही हैं जिसका तलाक हो चुका है। साथ ही उसे चोरी करने और जुए खेलने की भी लत है। सिमरन 15 सितंबर को रिलीज होगी।

रिलीज से पहले बाहुबली को टक्कर दे रही है पद्मावती

 

एंटरटेनमेंट डेस्क। संजय लीला भंसाली की आने वाली फिल्म पद्मावती ने रिलीज से पहले ही कई रिकार्ड तोड़ दियें है। और तो और इस फिल्म ने बाहुबली-2 का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। खबरों की माने तो यह फिल्म बाहुबली से 500 ज्यादा सिनेमाघरों में रिलीज होगी। और ये 8,000 स्क्रीन्स पर लगेगी। जो एक बड़ा रिकॉर्ड कायम करती है।

फिल्म पद्मावती 18 नवंबर 2017 को रिलीज होनी थी। लेकिन फिल्म अभी सिर्फ 75 प्रतिशत ही खत्म हो पाई है। ये फिल्म अगले साल तक ही रिलीज हो सकती हैं। फिल्म को लेकर काफी उम्मीद जताई जा रही है।

फिल्म की कहानी की बात की जाये तो अल्लाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती पर बनी है। जिनके रोल की भुमिका रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण निभा रहे है। और फिल्म में राजा रतन सिंह का रोल शाहिद कपूर निभा रहे है।

इस फिल्म मे दीपिका पादुकोण ने पद्मावती किरदार के लिए 11 करोड़ की फिस है। इसके बाद दीपिका दुनिया की सबसे महंगी एक्ट्रेस की लिस्ट में आ चुकी हैं। इस फिल्म में दीपिका सबसे ज्यादा फीस ले रही हैं। फिल्म का बजट करीब 175 करोड़ है। फिल्म के क्लाइमैक्स सीन पर 12 करोड़ तक खर्च होने का प्लान है।

पीएम मोदी और प्रधानमंत्री शिंजो आबे गुजरात में करेंगे रोड शो

नई दिल्ली। दो दिवसीय दौरे पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे 13 सितंबर को भारत आ रहे है। इस दौरान जापानी पीएम और पीएम मोदी गुजरात के अहमदाबाद में एक रोड शो करेंगे। बीजेपी के मुताबिक पीएम मोदी अहमदाबाद हवाई अड्डे से साबरमती आश्रम तक 8 किमी लंबा रोड शो करेंगे।

इसके बाद 14 सितंबर को दोनों नेता भारत में शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास करेंगे। इसी बीच दोनों दिग्गज नेता बाइलेटरल मीटिंग भी करेंगे। गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष जीतूभाई वाघानी के मुताबिक देश में पहली बार हमारे पीएम दूसरे देश के पीएम के साथ संयुक्त रूप से रोड शो करेंगे। पीएम शिंजो आबे 13 सितंबर को सीधे यहां पहुंचेंगे। ये अवसर और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दौरे के पहले दिन वह राज्य के दौरे पर होंगे।

रोड शो के दौरान दोनों नेताओं का रास्ते में स्वागत किया जाएगा। साथ ही 28 राज्य के 28 अलग-अलग नर्तक पारंपरिक वेश भूषा में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

बता दें कि यह रोड शो साबरमती फ्रंट से भी गुजरेगा और फिर साबरमती आश्रम का दौरा करने के बाद दोनों नेता शाम तक आराम करेंगे। साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी 1917 से 1930 तक रहे थे। पटेल ने कहा कि, शाम के वक्त, दोनों नेता शहर के पूर्वी हिस्से में प्रतिष्ठित सिदी सैय्यद मस्जिद का भी दौरा करेंगे। मस्जिद दुनिया भर में पत्थर की जाली के काम के लिए जानी जाती है। देर रात दोनों नेता यहां के अगाशिए रेस्त्रां में डिनर करेंगे।

खुले दरवाजे के साथ दौड़ती रही दिल्ली मेट्रो

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो में बैठे यात्रियों की रात को तब धड़कने तेज हो गई जब मेट्रो बिना दरवाजे बंद हुए दौड़ने लगी। जैसे ही मेट्रो टनल में घुसी तो उसकी एका एक रफ्तार बढ़ गई और लोगों की सांसे मानों डर के मारे थम सी गई।

यात्रियों से खचाखच भरी मेट्रो ट्रेन के येलो लाइन के दो स्टेशनों से गुजरने के दौरान इसका एक दरवाजा खुला रहा। येलो लाइन पर चावड़ी बाजार और कश्मीर गेट स्टेशन के बीच रात करीब 10 बजे यह बेहद असामान्य घटना हुई। कश्मीरी गेट पर येलो लाइन उत्तरी दिल्ली को गुडगांव से जोड़ती है।

हालांकि मेट्रो में सफर कर रहे यात्रियों ने अलार्म बजाने की भी कोशिश की लेकिन वो भी नहीं बजा, वैसे तो जब तक ट्रेन के गेट बंद नहीं होते तब तक मेट्रो आगे बढ़ती नहीं है लेकिन कोई तकनीकि समस्यां के चलते ऐसा यह घटना हुई।

दिल्ली मेट्रो के एक प्रवक्ता ने बताया कि समस्या सिर्फ एक दरवाजे के साथ थी। किसी भी प्रकार की देरी या ट्रेनों के इकट्ठा होने से बचने के लिये ट्रेन को विश्वविद्यालय स्टेशन ले जाया गया। घटना के तुरंत बाद ट्रेन ऑपरेटर को सुरक्षा में चूक के कारण निलंबित कर दिया गया।

इसी तरह का मामला जुलाई 2014 में भी हुआ था, तब इसी लाइन पर घिटोरनी और अर्जनगढ़ स्टेशनों के बीच चल रही ट्रेन के सभी दरवाजे खुले रह गये थे।

सितारा खिलाड़ी नहीं लेंगे टूर्नामेंट में भाग पीवी सिंधु करेंगी अगुआई

विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता पीवी सिंधु मंगलवार से यहां शुरू होने वाले कोरिया सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारतीय चुनौती की अगुआई करेंगी। साइना नेहवाल और किदाम्बी श्रीकांत जैसे देश के सितारा खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में भाग नहीं लेंगे।
महिला एकल वर्ग में सिंधु अपने अभियान की शुरूआत हांगकांग की युंग एनगान यी के खिलाफ करेंगी। पुरूष एकल वर्ग में अमेरिकी ओपन ग्रांप्रि गोल्ड विजेता एचएस प्रणय को पहले दौर में छठी वरीयता प्राप्त हांगकांग के एनजी का लोंग एंगस से भिड़ना है। सिंगापुर ओपन चैंपियन बी. साई प्रणीत भी पहले दौर में हांगकांग के ह्यू युन से खेलेंगे। जिनके खिलाफ उनका जीत-हार का रिकॉर्ड 3-2 है।
प्रणीत ने गत वर्ष थॉमस और उबेर कप फाइनल में युन को हराया था। सैयद मोदी ग्रांप्रि विजेता धार (मप्र) के समीर वर्मा को थाईलैंड के तेनोंगसाक सेनसोमबूनसुक से भिड़ना है। उनके बड़े भाई सौरभ वर्मा अपने अभियान की शुरुआत क्वालीफायर के खिलाफ करेंगे। मिश्रित युगल वर्ग में प्रणव जैरी चोपड़ा- एन. सिक्की रेड्डी को पहले दौर में ही चौथी वरीयता प्राप्त प्रवीण जॉर्ड- डेबी सुसांतो की इंडोनेशियाई जोड़ी की चुनौती का सामना करना होगा। मनु अत्री- बी. सुमित रेड्डी की पुरूष युगल जोड़ी को पहले दौर में क्वालीफायर का सामना करना है।

बिजली भी पैदा करेगा रगों में बहता खून

आपकी रगों में बहता खून आपमें जोश पैदा करता है और काम का जूनून भी लेकिन अब यही खून बिजली भी पैदा करेगा। जी हां, सुनकर थोड़ा आश्चर्य जरूर होता है लेकिन यह सच है। दरअसल चीन में एक ऐसा नेनो जनरेटर विकसित किया गया है जो नसों में बहते खून से बिजली पैदा करेगा। चीनी वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया यह जनरेटर छोटा होने के साथ ही लाइटवेट भी है।
खबरों के अनुसार चीन के फुडन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक मिलीमीटर से भी कम मोटा फाइबर तैयार किया है, जो पतली ट्यूब या रक्त वाहिका (धमनियों) में नमकीन घोल से घिरे होने पर बिजली उत्पन्न करता है।
चीन के वैज्ञानिक द्वारा तैयार किए गए फाइबर के निर्माण का सिद्धांत बेहद आसान है। इसमें कार्बन नैनोट्यूब की एक क्रमबद्ध सारणी लगातार एक पॉलीमरिक कोर के चारों ओर लपेटी जाती है। कार्बन नैनोट्यूब को एक इलेक्ट्रोएक्टिव के रूप में जाना जाता है। इन्हें शीट्स में काता और श्रेणीबद्ध किया जा सकता है। इलेक्ट्रोएक्टिव धागों में कार्बन नैनोट्यूब शीट्स को आधे माइक्रोन से भी कम मोटाई के फाइबर कोर को लेपित किया जाता है।
वैज्ञानिकों ने रक्तों ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए धागे या फाइबर शेपड फ्लूडिक नैनोजनरेटर (एफएफएनजी) को इलेक्ट्रोड्स से जोड़ा जाता है और इसे बहते पानी या नमकीन घोल में डुबोया जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, शोध के दौरान एफएफएनजी और घोल के रिलेटिव मोशन के कारण बिजली उत्पन्न हुई। इससे उत्पन्न हुई बिजली की क्षमता अन्य विधियों से पैदा होने वाली बिजली से 20 गुना अधिक थी। चीन के वैज्ञानिकों के मुताबिक, मेडिकल एप्लीकेशंस में इसका प्रयोग खून से बिजली उत्पन्न करने में किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने मेंढक की तंत्रिकाओं पर इसकी जांच कर इसकी सफलता की पुष्टि कर दी है।

हर व्यक्ति को अपने मोबाइल नंबर को आधार के साथ लिंक करना अनिवार्य

लोकनीति फाउंडेशन के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित किए गए आदेश के बाद सरकार ने नए निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर व्यक्ति को अपने मोबाइल नंबर को आधार के साथ लिंक करना अनिवार्य है। इस काम के लिए सरकार ने आखिरी तारीख फरवरी 2018 की तय की है।
यदि इस तारीख तक कोई व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर को आधार नंबर के साथ लिंक नहीं करता है, तो उसका मोबाइल नंबर बंद कर दिया जाएगा। सिम के साथ आधार जोड़ने से मोबाइल यूजर्स को बेहद मदद मिलती है क्योंकि आधार ई-केवाईसी के साथ इसे करने में महज 30 मिनट लगते हैं। वहीं, पुरानी व्यवस्था में दो दिनों तक लग जाते थे और मोबाइल यूजर को फोटो आईडी प्रूफ के साथ कई दस्तावेज देने होते थे।
यूआईडीएआई के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2017 तक करीब 33.8 करोड़ मोबाइल सिम कार्ड को ई-केवाईसी के माध्यम से जोड़ा गया है। इस कदम का मकसद मौजूदा मोबाइल यूजर्स की प्रभावी ढंग से जांच करना है ताकि अपराधियों, धोखेबाज और आतंकवादियों द्वारा की जाने वाले किसी भी अप्रिय घटनाओं पर एक नजर रखी जा सके।
आपके सिम के साथ आधार संख्या का लिंक सिर्फ ऑफलाइन मोड में ही किया जा सकता है क्योंकि वन टाइम पासवर्ड से प्रमाणीकृत लेन-देन नहीं होता है। इसके लिए आपको आपके टेलीकॉम ऑपरेटर के किसी भी स्टोर पर जाकर अपनी आधार संख्या बतानी है। वहां आपको कोई अन्य कागजात नहीं दिखाने होंगे, वहां सिर्फ आपको अपने बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट्स ही देने हैं।
मोबाइल नंबर और आधार को लिंक करने के लिए ऑफलाइन मोड इसलिए रखा गया है, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचा जा सके, नहीं तो पूरी प्रक्रिया ही विफल हो जाएगी। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक मोबाइल नंबर के ऑनलाइन लिंक से सिक्योरिटी रिस्क होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई जालसाज आपके आधार नंबर, नाम और अन्य विवरणों को जानता है, तो वह आपके आधार को मोबाइल नंबर जोड़ सकता है। ऐसे में यदि वह व्यक्ति कोई अपराध करता है, तो पुलिस आपके घर पहुंचेगी।
कोई भी टेलीकॉम कंपनी किसी भी बॉयोमीट्रिक इंफॉर्मेंशन और पर्सनल डेटा को संग्रहित नहीं कर सकती हैं क्योंकि इस जानकारी को दूरसंचार कंपनी द्वारा कलेक्ट करने के बाद उसे एन्क्रिप्ट करना है। ऐसा नहीं करने पर टेलीकॉम कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जा सकता है।

एम्स ने तैयार किया सबसे छोटा व सस्ता स्वदेशी पोर्टेबल वेंटिलेटर

एम्स ने एक निजी कंपनी के साथ मिलकर सबसे छोटा व सस्ता स्वदेशी पोर्टेबल वेंटिलेटर तैयार किया है। यह वेंटिलेटर इतना छोटा है कि जेब में भी आसानी से रखा जा सकता है। एम्स में किफायती चिकित्सा तकनीकी पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को यह वेंटिलेटर प्रदर्शित किया जाएगा।
एम्स ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक अग्रवाल ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर में कई ऐसे मरीज हैं जो तीन साल से वेंटिलेटर पर हैं। वेंटिलेटर की कीमत ढाई लाख से पांच लाख रुपये है। इस वजह से मरीज खुद वेंटिलेटर नहीं खरीद पाते। इसलिए उन मरीजों को अस्पताल में ही वेंटिलेटर पर रखना मजबूरी है, जबकि उनका इलाज पूरा हो चुका होता है।
उन्हें सिर्फ सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत होती है। उन मरीजों की जरूरतों के मद्देनजर ही एम्स ने ए-सेट रोबोटिक्स कंपनी के साथ मिलकर इस वेंटिलेटर को तैयार किया है। इसकी कीमत सिर्फ 15,000 से 20,000 रुपये होगी।
इस वेंटिलेटर को बनाने वाले युवा वैज्ञानिक दिवाकर वैश्य ने कहा कि सामान्य वेंटिलेटर व्यक्ति की लंबाई के बराबर होता है। उसमें कई उपकरण लगे होते हैं, इसलिए उसे डॉक्टर ही संचालित कर पाते हैं। उसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षण की भी जरूरत होती है, जबकि नवनिर्मित वेंटिलेटर छोटा होने के साथ-साथ उसे संचालित करना भी आसान है। इसलिए मरीज घर में आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे।
सांस लेने के लिए डॉक्टर मरीज के गले में एक स्थायी ट्यूब डालते हैं। उस ट्यूब को वेंटिलेटर से जोड़ दिया जाता है। यह वेंटिलेटर बिजली से संचालित होता है। ट्यूब को वेंटिलेटर से जोड़ने के बाद बिजली का प्लग ऑन करते ही वेंटिलेटर काम करने लगता है। इस वेंटिलेटर में प्रेशर सेंसर लगा है, जो मरीज को उनकी इच्छा के अनुसार सांस लेने व छोड़ने में मदद करेगा।
डॉक्टर कहते हैं कि संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ने पर ऐसे मरीज अस्पतालों में अधिक संख्या में पहुंचते हैं जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होती है, लेकिन वेंटिलेटर की कमी के कारण उन्हें सुविधा नहीं मिल पाती। इस वजह से मरीज की मौत भी हो जाती है। इस वेंटिलेटर के आविष्कार से आने वाले दिनों में वेंटिलेटर की कमी दूर हो सकेगी।
एम्स एप से जुड़ा कॉलसेंटर किफायती चिकित्सा तकनीकी पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे एम्स पहुंचे। इस दौरान एम्स के अपडेट किए गए मोबाइल एप को लांच किया गया। एम्स के मोबाइल एप में एक बटन का विकल्प जोड़ा गया है, इसको दबाकर लोग संस्थान के कॉलसेंटर में सीधे बात कर सकते हैं और अप्वाइंटमेंट ले सकते हैं।

रेलवे का कायाकल्प मोदी करेंगे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का भूमि पूजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 सितंबर को अहमदाबाद के साबरमती में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ इस प्रोजेक्ट का भूमि पूजन करेंगे। बुलेट ट्रेन भारतीय रेलवे में वह परिवर्तन लेकर आएगी, जो मारुति कार ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लेकर आई थी। इस कदम से रेलवे का कायाकल्प हो जाएगा। ये बात रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कही। वह मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बारे में बता रहे थे। दो दिन बाद इस परियोजना का क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा।
रेल मंत्री गोयल ने संवाददाता सम्मेलन में बुलेट ट्रेन परियोजना की खूबियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मारुति कार आने के बाद 30 साल में भारत का ऑटोमोबाइल क्षेत्र एकदम बदल गया। इसी तरह का परिवर्तन बुलेट ट्रेन आने के बाद रेलवे में दिखाई देगा।
मारुति से शुरुआत होने के बाद अब भारत की सड़कों पर एक से बढ़कर एक आधुनिक कार दिखाई देती है। परंतु रेलवे में ऐसा नहीं हुआ। वह आज भी पुरानी तकनीक पर चल रही है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने आते ही देश में बुलेट ट्रेन लाने का निश्चय किया। ताकि रेलवे में भी नई से नई तकनीक आ सके। बुलेट ट्रेन आने से रेलवे में बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। इससे आधुनिक तकनीक आने के साथ अर्थव्यवस्था को लाभ के साथ रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
एक बार बुलेट ट्रेन आने से रेलवे में एक नया नजरिया पैदा होगा। भारत बुलेट ट्रेन की लागत कम कर विदेशों में उसका निर्यात कर सकता है। इससे अन्य ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने तथा उन्हें सुरक्षित चलाने की प्रेरणा भी मिलेगी। क्योंकि आज तक एक भी दुर्घटना न होने के कारण जापानी शिंकांशेन बुलेट ट्रेन तकनीक विश्व में सर्वाधिक सुरक्षित मानी जाती है।
गोयल के मुताबिक, पीएम मोदी के प्रभाव के कारण भारत को बुलेट ट्रेन के लिए 0.1 फीसद की नगण्य ब्याज दर पर कर्ज मिला है। यह अनुदान जैसा ही है। 50 सालों में शायद ही किसी परियोजना के लिए इतनी सस्ती दर पर ऋण मिला होगा। इस कारण बुलेट ट्रेन की लागत काफी कम होगी।
आगे चल कर जब कई बुलेट ट्रेन परियोजनाएं बनेंगी तो लागत और घटेगी। उसी तरह जिस तरह एलईडी बल्बों की लागत घटी है।
गोयल ने कहा कि वैसे तो परियोजना को 2023 में पूरा होना है। लेकिन भारतीय इंजीनियरों की कार्यकुशलता को देखते हुए मुझे भरोसा है कि हम इसे 2022 में ही पूरा करने में कामयाब हो जाएंगे।
जापान रेलवे ने भारत के संजीव सिन्हा को बुलेट ट्रेन परियोजना का सलाहकार बनाया है। संजीव राजस्थान के रहने वाले हैं और पिछले 20 साल से जापान में रह रहे हैं। अपनी नियुक्ति के बाद सिन्हा ने कहा, “मैं दो सरकारों के बीच सेतु का काम करूंगा। यह महत्वपूर्ण मगर काफी उलझाने वाली है। राजनीतिक इच्छा को जमीन पर उतारने में बहुत कुछ लगता है।”रातोरात नहीं बना सकते : सिन्हा ने कहा कि तेज रफ्तार वाली बुलेट ट्रेनों को रातोरात नहीं बनाया जा सकता, इसके लिए सावधानी भरी प्लानिंग जरूरी है।
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे दो दिनी भारत यात्रा पर 13 सितंबर को आ रहे हैं। इसी दिन वे पीएम मोदी के साथ 12 वीं सालाना शिखर बैठक में भाग लेंगे। इसमें दोनों नेता बहुआयामी रिश्तों को नई रफ्तार देंगे। शिखर बैठक गुजरात की राजधानी गांधीनगर में होगी।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब उत्तर कोरिया को लेकर पूर्वी एशिया में तनाव चरम पर है। उत्तर कोरिया हाइड्रोजन बम का परीक्षण करने के साथ ही जापान के ऊपर से बैलेस्टिक मिसाइल दाग चुका है। दक्षिण चीन सागर को लेकर जापान का चीन से भी टकराव बढ़ रहा है।
मोदी-आबे की यह चौथी शिखर बैठक है। दोनों नेता पिछले तीन साल में 10 बार मिल चुके हैं। उनकी पिछली मुलाकात जर्मनी के हैम्बर्ग में जुलाई में जी-20 देशों की बैठक के मौके पर हुई थी, जबकि पीएम मोदी गत वर्ष नवंबर में जापान गए थे।