सरदार सिंह और पैरालिंपिक गोल्ड मेडल विजेता देवेंद्र झांझरिया को खेल रत्न

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सरदार सिंह और पैरालिंपिक गोल्ड मेडल विजेता देवेंद्र झांझरिया को खेल रत्न से सम्मानित किया।
खेल दिवस के अवसर पर देश के खेल जगत की कई हस्तियों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया। इन पुरस्कारों में खेत रत्न, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, खेल प्रोत्साहन समेत कई पुरकार दिए गए। महिला क्रिकेटर हरमनप्रीत को अर्जुन पुरस्कार से सम्म‍ानित किया गया जबकि पुरुष क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा काउंटी क्रिकेट की व्यस्तता के चलते पुरस्कार लेने उपस्थित नहीं हो पाए।
पुजारा ने एक बयान में कहा, ‘अर्जुन पुरस्कार के लिए मैं वास्तव में आभारी हूं और सम्मानित महसूस कर रहा हूं। दुर्भाग्य से मैं इंग्लैंड में नॉटिंघमशायर काउंटी क्रिकेट क्लब के प्रति अपनी वचनबद्धताओं के कारण व्यक्तिगत तौर पर यह पुरस्कार हासिल नहीं कर पाऊंगा।’
जो बने अर्जुन : वीजे सुरेखा (तीरंदाजी), खुशबीर कौर (एथलेटिक्स), राजीव आरोकिया (एथलेटिक्स), प्रशांती सिंह (बॉस्केटबॉल), एल देवेंद्रो सिंह (मुक्केबाजी), चेतेश्वर पुजारा (क्रिकेट), हरमनप्रीत कौर (क्रिकेट), ओइनाम बेमबेम (फुटबॉल), एसएसपी चौरसिया (गोल्फ), एसवी सुनील (हॉकी), जसवीर सिंह (कबड्‍डी), पीएन प्रकाश (निशानेबाजी), एंथनी अमलराज (टेबल टेनिस), साकेत मैनेनी (टेनिस), सत्यव्रत कादियान (कुश्ती), एम थंगावेलू (पैरा एथलीट) और वरुण भाटी (पैरा एथलीट)।
व्यवसायी मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी के रिलायंस फाउंडेशन यूथ स्पोर्ट्स को राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया।

दोनों देशों द्वारा अपनी सेनाएं हटा लेने के बाद भी चीन नहीं आ रहा बाज

डोकलाम में भारत और चीन के बीच गतिरोध खत्म होने और दोनों देशों द्वारा अपनी सेनाएं हटा लेने के बाद भी चीन अपने तल्ख तेवर दिखाने से बाज आता नहीं दिख रहा है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि डोकलाम में भारत और चीन के बीच 73 दिन से चला आ रहा गतिरोध भारत के सैनिक हटाए जाने के बाद खत्म हुआ।
अब नई दिल्ली को इससे सबक सीखना चाहिए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकना चाहिए। दूसरी तरफ, नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने चीनी विदेश मंत्री की टिप्पणियों पर तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।
भारत और चीन ने सोमवार को डोकलाम से अपने-अपने सैनिक हटाकर गतिरोध पर विराम लगा दिया था। यह घटनाक्रम अगले हफ्ते ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन की यात्रा पर जाने से पहले हुआ।
बुधवार को मीडिया से बात करते हुए वांग ने कहा कि भारतीय सैनिकों की अवैध घुसपैठ का मामला सुलझा लिया गया है। वांग से जब पूछा गया कि भारत ने बीजिंग को चेहरा छिपाने का मौका दिया है, तो वांग ने कहा, ‘मीडिया अपने कयास लगा सकता है और रिपोर्ट लिख सकता है।
लेकिन, चीन सरकार के पास मौजूद आधिकारिक सूचना के मुताबिक भारतीय सैनिक 28 अगस्त को दोपहर बाद क्षेत्र से हट गए, जिससे गतिरोध खत्म हो गया। यह मूल तथ्य है।
हम उम्मीद करते हैं कि भारत इस घटना से सबक सीखेगा और इस तरह की घटनाओं को दोबारा होने से रोकेगा।’ इससे पहले मंगलवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने भी डोकलाम में सड़क नहीं बनाने को लेकर किसी तरह की प्रतिबद्धता नहीं दिखाई।
मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनियंग ने कहा था कि सीमाओं की जरूरतों को पूरा करने और हालात में सुधार के लिए चीन बुनियादी ढांचे के विकास में लंबे समय से लगा रहा है।
चीनी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के बीच ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक को लेकर पूछे गए सवाल का भी सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर द्विपक्षीय बैठकें होती रहती हैं। यह सामान्य बात है

काश आपका बॉस भी ऐसा ही होता, तो मजा आ जाता

शिकागो टी स्टाल के बारे में आप जो पढ़ने जा रहे हैं, उसके बाद आपका मन खुश हो जाएगा। आपको भी लगेगा कि काश आपका बॉस भी ऐसा ही होता, तो मजा आ जाता।
दरअसल, इस दुकान के मालिक सुकुमारन अपने कर्मचारियों को अच्छी सैलरी के अलावा, सोने की अंगूठी, बोनस, कपड़े खरीदने के लिए अतिरिक्त पैसे देने के अलावा उन्हें फाइव स्टार होटल में लंच भी कराते हैं। यह सब वह इसलिए करते हैं, ताकि कर्मचारी अपने काम में खुश रहें और अच्छी जिंदगी जी सकें।
यह काम वह पिछले तीन दशक से करते आ रहे हैं। करीब 33 साल पहले सुकुमारन नौकरी की तलाश में केरल से तमिलनाडु आए थे। यहां, उन्होंने भयावह परिस्थितियों में कई चाय के स्टालों में काम किया। इसी दौरान उनका दुकान के मालिक से झगड़ा हो गया, जिसके बाद सुकुमारन ने अपनी चाय की दुकान खोल ली।
शिकागो में 1864 में हुए श्रमिक आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने फैसला किया था कि वह अपने कर्मचारियों का शोषण नहीं करेंगे। उस आंदोलन में 8 घंटे काम करने की मांग कर्मचारियों की ओर से की गई थी। इसी वजह से उन्होंने अपने टी स्टाल का नाम शिकागो टी स्टॉल रखा था।
हर दिन, हजारों ग्राहक नियमित रूप से दुकान पर जाते हैं, जिनमें से कुछ 10 साल से भी अधिक समय से यहां आ रहे हैं। मामूली 15 x10 फुट कमरे में चलने वाली दुकान के बावजूद सुकुमारन अपने हेड कुक को 740 रुपए, चाय बनाने वाले को 540 रुपए और प्रत्येक कर्मचारी को कम से कम 400 रुपए प्रति दिन देते हैं।

कर्मचारी को गलत तरीके से हटाए जाने के मामले में आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की

राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए एक कर्मचारी को गलत तरीके से हटाए जाने के मामले में आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है। इन आईएएस अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से दोषी मानते हुए कर्मचारी के नुकसान की वसूली इन अधिकारियों से करने के आदेश दिए है। हालांकि कर्मचारी को यह न्याय उसकी मौत के नौ साल बाद मिला।
राजस्थान स्टेट हैंडलूम डवलपमेंट कॉरपोरेशन में जूनियर अस्सिटेंट के पद पर काम करने वाले शशिमोहन माथुर 1991 में नियुक्त हुए थे और गबन के आरोप में 1996 में उन्हे हटा दिया गया। बाद में यह आरोप गलत साबित हुआ। उन्होंने अपीलीय अधिकारी के पास बहाली की अपील भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की।
न्याय के इंतजार में 2008 में उनकी मौत हो गई थी जिसके नौ साल बाद उन्हें हाई कोर्ट से न्याय मिला है। जस्टिस एसपी शर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता को उनकी नियुक्ति के पहले दिन से सभी परिलाभ दिए जाए। वहीं कोर्ट ने यह पूरी राशि सेवानिवृत आईएएस अधिकारी दामोदर शर्मा और उमराव सालोदिया के पेंशन व पीडीआर अकाउंट से वसूलने के निर्देश दिए है। शर्मा ने उन्हे सेवा से हटाया था और वापस नहीं लिया जबकि सालोदिया अपीलीय अधिकारी थे।
अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि इन दो आईएएस अधिकारियों ने अगर नियमों के तहत काम किया होता तो आज यह मामला अदालत में नहीं पहुंचता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अधिकारियों की लापरवाही से ही अदालतों में मामले बढ़ रहे है। ऐसे में यह पूरी राशि इन्हीं अधिकारियों से वसूली जाए।

नेशनल पार्क और अभयारण्यों में पर्यटकों को अब कम किराया देना पड़ेगा

छोटे संरक्षित वन क्षेत्र एवं कम सुविधा वाले नेशनल पार्क और अभयारण्यों में पर्यटकों को अब कम किराया देना पड़ेगा। इसके लिए वन विभाग ने प्रदेश के सभी 10 नेशनल पार्क (टाइगर रिजर्व) और 25 अभयारण्यों को छह श्रेणी में बांट दिया है।
इनमें श्रेणी के घटते क्रम के हिसाब से दर तय की गई है। छठवीं श्रेणी में चिड़ियाघरों (वन विहार, रालामंडल, मुकुंदपुर) को रखा है, जिनका किराया इस साल नहीं बढ़ाया गया है। किराए की नई दरें एक अक्टूबर से लागू की जा रही हैं।
सालभर में इन नेशनल पार्क और अभयारण्यों में दस लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं। हालांकि छोटे या वन्यप्राणियों की कम संख्या वाले अभयारण्य और नेशनल पार्कों में प्रवेश शुल्क ज्यादा होने के कारण पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही है।
इनमें पर्यटन बढ़ाने के लिए विभाग ने शुल्क कम करने का निर्णय लिया है। विभाग के इस प्रस्ताव का प्रशासकीय अनुमोदन हो गया है और जल्द ही नए नियम जारी किए जा रहे हैं। वहीं पार्क के फील्ड डायरेक्टरों को निर्देश भेजे जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बारिश के चलते वर्तमान में चिड़ियाघर छोड़कर सभी नेशनल पार्क और अभयारण्यों में पर्यटन बंद हैं। इनमें एक अक्टूबर से पर्यटन शुरू होगा।
– श्रेणी एक में टाइगर रिजर्व और अभयारण्य के कोर एरिया को रखा है। इनमें कोर से सटा बफर एरिया भी रहेगा।
– श्रेणी दो में सभी रिजर्वों के बफर क्षेत्र में विस्तारित पर्यटन जोन और फेन अभयारण्य आएगा।
– श्रेणी तीन में माधव नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य, नौरादेही, रातापानी, कूनो पालपुर और खिवनी अभयारण्य को रखा है।
– श्रेणी चार में फॉसिल नेशनल पार्क घुघुवा, डायनासोर फॉसिल नेशनल पार्क धार, सैलाना, सरदारपुर, घाटीगांव, करेरा, केन घड़ियाल, सोन घड़ियाल, राष्ट्रीय चंबल, नरसिंहगढ़, बगदरा, वीरांगना दुर्गावती, सिंघोरी, ओरछा अभयारण्य को रखा है।
– श्रेणी पांच में संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विशेष स्थल और व्यू प्वॉइंट रहेंगे।
सभी संरक्षित क्षेत्रों का प्रवेश शुल्क श्रेणी के हिसाब से घटते क्रम में तय होगा। विभाग ने इसके लिए फॉर्मूला तैयार किया है, जिसके आधार पर इन क्षेत्रों में किराया तय किया जाएगा। टाइगर रिजर्व में हल्के वाहन या मिनी बस से सफर करने के लिए एक सीट के 250 रुपए लिए जाएंगे, लेकिन दूसरी श्रेणी के संरक्षित क्षेत्र में यही शुल्क 200 रुपए हो जाएगा। जबकि चौथी श्रेणी में जाकर ये शुल्क सिर्फ 50 रुपए रह जाएगा। रिजर्व में घूमने के लिए अधिकतम 6 पर्यटकों के लिए जीप की बुकिंग कराने पर 1500 रुपए देने पड़ेंगे।
संरक्षित क्षेत्रों में निजी वाहन से जाने की इच्छा रखने वाले पर्यटकों को अलग दर से शुल्क देना होगा। दोपहिया वाहन से एक हजार, ऑटो रिक्शा से तीन व्यक्ति तक दो हजार रुपए, कार-जीप व जिप्सी से छह लोगों तक तीन हजार और बस या मिनी बस से जाने पर छह हजार रुपए लगेंगे। हालांकि ये सुविधा अभी सिर्फ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में ही है।