भारत के ज्ञानेंद्र दहिया चूक गए कांस्य पदक

भारत के ज्ञानेंद्र दहिया विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक प्लेऑफ मुकाबले में जगह बनाने से चूक गए। इसी के साथ ग्रीको रोमन स्टाइल में भारतीय पहलवानों की झोली खाली रही।
ज्ञानेंद्र को 59 किग्रा वर्ग में रेपचेज में भाग लेने का मौका मिला था, लेकिन वे इसके दूसरे दौर में ही हारकर कांस्य की दौड़ से बाहर हो गए। ज्ञानेंद्र ने रेपचेज के पहले दौर में इजिप्ट के मुस्तफा हसन मुहम्मद को 3-1 से पराजित किया। लेकिन वे दूसरे दौर में यूक्रेन के दिमित्रो सिंबालुक से नजदीकी मुकाबले में हार गए।
इससे पहले ज्ञानेंद्र ने चीन के लिबिन डिंग को 4-1 से हराकर प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन उन्हें कजाकिस्तान के मिरामबेक से 0-9 की करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। कजाक पहलवान के फाइनल में पहुंचने से ज्ञानेंद्र को रेपचेज के रुप में मौका मिला था लेकिन वे इसे भुना नहीं सके।
दूसरे दिन अन्य मुकाबलों में रविंदर (66 किग्रा), हरप्रीत सिंह (80 किग्रा) और नवीन (130 किग्रा) भी मैट पर उतरे, लेकिन अपने क्वालीफिकेशन मुकाबले ही हार गए। पहले दिन भारत के 4 पहलवान मैट पर उतरे थे, लेकिन पहले दौर से आगे नहीं जा सके।

चीन ने कहा यदि सीमा पर भारत के बुनियादी ढांचे के खिलाफ हमारी सेना कदम उठाती है तो कोहराम मच जाएगा

चीन ने कहा है कि यदि सीमा पर भारत के बुनियादी ढांचे के खिलाफ हमारी सेना कदम उठाती है तो कोहराम मच जाएगा। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का तर्क है कि डोकलाम में चीन की बन रही सड़क नई दिल्ली के लिए खतरा है। उसका यह तर्क हास्यास्पद और निंदनीय है।
मंत्रालय ने कहा है कि चीन किसी भी देश या व्यक्ति को अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता में हस्तक्षेप करने की इजाजत नहीं देगा। चीन ने मंगलवार को कहा कि डोकलाम पर जारी गतिरोध का समाधान भारत पर निर्भर है। समाधान के लिए भारत को क्षेत्र से बिना शर्त अपनी सेना को वापस बुलाना होगा।
एक दिन पहले सोमवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उम्मीद जताई थी कि चीन शीघ्र ही सकारात्मक दिशा में कदम बढ़ाएगा। डोकलाम में जारी गतिरोध का समाधान शीघ्र निकल आएगा। उन्होंने कहा था कि भारत ने किसी देश पर कभी आक्रमण नहीं किया और यह किसी विस्तारवादी व्यवहार को भी बर्दाश्त नहीं करेगा।
भारतीय गृह मंत्री के इस बयान के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन शांति से प्रेम करता है और मजबूती से उसके साथ खड़ा है। इसके साथ ही हम अपनी क्षेत्रीय एकता और संप्रभुता की रक्षा भी करेंगे।
प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने डोकलाम इलाके में चीन का सड़क निर्माण रोक दिया। भारत का यह कदम बेतुका है। इसलिए इसके समाधान की एकमात्र शर्त यही है कि भारत क्षेत्र से अपनी सेना और उपकरण हटाए।
भारत और चीन के बीच दो महीनों से सिक्किम सीमा के समीप स्थित डोकलाम को लेकर तनातनी चल रही है। चीन यहां सड़क बनाने जा रहा था जिसे भारतीय सेना ने रोक दिया। चीन की इस सड़क से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र पर खतरा पैदा हो सकता था। डोकलाम पर भूटान का दावा है लेकिन चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है।

9 साल बाद कर्नल पुरोहित रिहा कर दिए गए

9 साल बाद बुधवार को नवी मुंबई के तलोजा जेल से लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित रिहा कर दिए गए। रिहाई के बाद उन्‍हें सेना को सौंप दिया गया। सेना में उन्‍हें नई पोस्‍ट सौंपी जाएगी। सोमवार को ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन कुछ कागजी कार्यवाही की वजह से मंगलवार को रिहाई नहीं हो सकी।
बता दें कि उनकी रिहाई से पहले ही तलोजा जेल में आर्मी वाहन पहुंच गयी थी। मालेगांव ब्‍लास्‍ट मामले में पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दी गयी है। इसके बाद वे सीधे पुणे जाएंगे, जहां उनका परिवार रहता है। उन्हें पुणे में ही सेना के सामने भी हाजिर होना है।
जमानत मिलने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित ने कहा कि वह जल्द से जल्द सेना में फिर से शामिल होना चाहते हैं। उन्‍होंने कहा, मैं अपनी वर्दी पहनना चाहता हूं। यह मेरी त्वचा की ऊपरी परत है। पुरोहित ने कहा कि सेना ने मेरी इज्जत कम नहीं होने दी। उन्होंने कहा, सेना की यह परम्परा और प्रकृति रही है कि वह अपने लोगों की इज्जत कम नहीं होने देती। मैंने यह एक बार भी महसूस नहीं किया कि मैं सेना से बाहर हो जाऊंगा

सरकारी स्कूल की खराब हालत को सुधारने गांव वाले आगे आए एक सप्ताह में एकत्र कर लिए 22 लाख

बाड़मेर जिले के ओगाला गांव के सरकारी स्कूल की खराब हालत को सुधारने के लिए गांव वाले ही आगे आए और एक सप्ताह में 22 लाख रूपए एकत्र कर लिए।
यह स्कूल 12वीं कक्षा तक है और सिर्फ 9वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाएं ही कमरों में चलती है। अन्य सभी कक्षाएं पेड़ के नीचे या बरामदों में लगती है। जब बारिश होती है तो यहां छुट्टी करनी पड़ती है। यहां 497 बच्चे पढ़ते हैं और इनमें से 229 छात्राएं है। छह किलोमीटर के क्षेत्र में यह अकेला सीनियर सेकंडरी स्कूल है। इस हालत को सुधारने के लिए इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर यहां के गांव वालों ने तय किया कि सरकार मदद दे या नहीं, वे खुद ही स्कूल को बेहतर बनाएंगे। स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में तय किया गया कि इसकी हालत सुधारने के लिए 20 लाख रुपए एकत्र किए जाएंगे।
यहां के प्राचार्य भोमाराम ने इस वर्ष जून में ही यहां कार्यभार सम्भाला। यहां 18 में से सिर्फ नौ शिक्षक है। स्वतंत्रता दिवस के आयोजन में प्राचार्य ने गांव वालो से पूछा कि क्या वे अपने बच्चों को ऐसी ही हालत में पढ़ाना चाहते है या कुछ सुधार करना चाहते है।
प्राचार्य के इस सवाल पर गांव वालो ने तय किया कि वे खुद ही स्कूल की हालत में सुधार करेंगे। कुछ ही देर में 105 गांव वालों ने 15.44 लाख रुपए स्कूल के लिए देने की घोषणा कर दी। एक व्यक्ति ने यहां कम्प्यूटर लैब और एक अन्य ने सीसीटीवी कैमरे लगवाने की घोषणा कर दी। अब इस राशि से स्कूल में 12 कमरे और खेल का मैदान व अन्य सुविधएं विकसित की जाएंगी। गांववालों की पहल को देखते हुए सरकार ने भी सहयोग का हाथ बढ़ाया है। मुख्यमंत्री भामाशाह योजना के तहत सरकार भी यहां के लिए सहायता राशि देगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कीं मंत्रियो को नसीहत होगा सबका मूल्यांकन काम के आधार

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी मंत्रियों को नसीहत दी है कि सबका मूल्यांकन काम के आधार पर होगा। पार्टी अध्यक्ष ने कहा है कि मंत्रियों को मौका दो, ताकि वे बेहतर प्रदर्शन करें। जो काम नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें बदलो।
मैं चाहता हूं कि आप पूरी क्षमता से काम करें और बेस्ट परफार्मेंस दें। अब जितना समय बचा है, उसमें कामकाज में तेजी लाएं। यदि कोई दिक्कत है तो मुझे बताइए। सप्ताह में दो दिन प्रभार के जिलों में जाएं और संगठन के साथ बैठकें भी करें। बुद्धिजीवी और विशेषज्ञ लोगों से जीवंत संपर्क रखें।
सूत्रों के मुताबिक लंच के साथ मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री ने करीब एक घंटे अनौपचारिक बैठक की। इस दौरान अमित शाह के तीन दिवसीय दौरे में जो बातें सामने आई थीं, वो मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के साथ साझा कीं। उन्होंने बताया कि दौरा अच्छा था। समयसीमा को ध्यान में रखते हुए काम करें।
जिसे जो जिम्मेदारी मिली है, उसमें प्रदर्शन बेहतर होना चाहिए। अब ये साफ है कि मूल्यांकन काम के आधार पर ही होगा। अपनी सीट के साथ अन्य विधानसभा सीटों पर भी ध्यान दें। प्रभार के जिलों में दौरे के दौरान वहां के जिला संगठन के साथ बैठक करें। केंद्र और राज्य की योजनाओं के क्र्रियान्वयन पर ध्यान दें।