काली पट्टी बांधकर खेले बार्सिलोना के खिलाड़ी

बार्सिलोना ने स्पेनिश फुटबॉल लीग ला लीगा में अपने अभियान की शुरुआत जीत के साथ की। कैम्प नाउ में रविवार को हुए इस सत्र के अपने पहले मुकाबले में बार्सिलोना ने रीयल बेटिस को 2-0 से पराजित किया।
बार्सिलोना के लिए सर्गी रॉबर्टो ने 39वें मिनट में गोल किया, जबकि रीयल बेटिस के अलिन टोस्का 36वें मिनट में आत्मघाती गोलकर कर बैठे।
बार्सिलोना ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और खेल पर पूरी तरह नियंत्रण रखा। जीत बार्सिलोना को मिली लेकिन टीम के स्टार लियोन मेसी कोई जलवा नहीं दिखा सके।
नेमार के क्लब छोड़ने और स्पेनिश सुपर कप में रीयल मैड्रिड के हाथों मिली करारा हार के बाद बार्सा के लिए ये जीत थोड़ी राहत देने वाली है।
मैच से पहले खिलाड़ियों ने बार्सिलोना में हुए आतंकी हमले के विरोध और मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट का मौन रखा। साथ ही बार्सा के खिलाड़ी काली पट्टी बांधकर मैदान में उतरे। इस घटना में 14 लोग मारे गए थे और 120 घायल हो गए थे।
हमले के कारण ही 99000 की दर्शक क्षमता वाले स्टेडियम में 56,480 दर्शक ही खिलाड़ियों की हौसला अफजाई के लिए पहुंचे थे।
इसके अलावा गेरेथ बेल के शानदार प्रदर्शन के बूते गत चैंपियन रीयल मैड्रिड ने डेपोर्टिवा ला कोरुना को 3-0 से मात दी। स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो की गैरमौजूदगी में खेले रहे रीयल के लिए बेल ने एक गोल दागने के अलावा एक गोल करने में भी मदद की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा,’पाकिस्तान के लोग खुद आतंकवाद की समस्या से पीड़ित हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा कि है कि वो आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगार बन गया है।
पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए ट्रंप ने कहा,’पाकिस्तान के लोग खुद आतंकवाद की समस्या से पीड़ित हैं, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान आतंकियों के लिए स्वर्ग बना हुआ है। अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ आर-पार की लड़ाई में अपनी जिम्मेदारी निभाए।
इतना ही नहीं अफगानिस्तान पर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि, ‘हम भारत की हरसंभव मदद करेंगे, भारत और अमेरिका का अरबों डॉलर का व्यापारिक संबंध है। वहीं अफगानिस्तान में हालत सामान्य करने के लिए उन्होंने भारत से मदद की उम्मीद जताई।
ट्रंप ने कहा कि, ‘हम इराक में अपने पूर्व नेताओं द्वारा की गई गलतियों को नहीं दोहराएंगे। आतंकवादी सिर्फ ठग, अपराधी और दरिंदे हैं। जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों से आतंकियों को लाभ मिलेगा, जिसका अलकायदा और आईएस जैसे संगठन फायदा उठा सकते हैं। पाकिस्तान अफगानिस्तान में हमारे प्रयासों की मदद से काफी लाभ कमा सकता है।’

एक बार में तीन तलाक की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मुसलमानों में प्रचलित एक बार में तीन तलाक की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना दिया है। मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के पांच न्यायाधीश बारी-बारी से अपना फैसला पढ़ा। पांच में से तीन जजों ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया है।
मंगलवार को सबसे पहले न्यायाधीश जेएस खेहर ने अपना फैसला पढ़ा। उन्होंने अपहोल्ड (Uphold) शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ट्रिपल तलाक पर संसद को फैसला करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार को आदेश देती है कि वह छह माह में तीन तलाक पर कानून बनाए। इस दौरान यानी इन छह माह की अवधि में तीन तलाक पर रोक रहेगी।’
इसके बाद अपना फैसला पढ़ते हुए तीन अन्य जजों न्यायमूर्ति यूयू ललित, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है। इससे पहले चीफ जस्टिस ने अपने फैसले में कहीं भी असंवैधानिक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था।
पांचवें जज न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर अभी अपना फैसला पढ़ेंगे। इस तरह पांच में से तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दे दिया है। इस बीच मुस्लिम पर्सनल लॉ ने बैठक बुलाई है।
– इस पीठ की खासियत यह भी है कि इसमें पांच विभिन्न धर्मों के अनुयायी शामिल हैं। हालांकि यह बात मायने नहीं रखती क्योंकि न्यायाधीश का कोई धर्म नहीं होता।
– कोर्ट ने शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वह फिलहाल एक बार में तीन तलाक पर ही विचार करेगा। बहुविवाह और निकाह हलाला पर बाद में विचार किया जाएगा।
– इस पर सुनवाई तो कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर शुरू की थी लेकिन बाद में छह अन्य याचिकाएं भी दाखिल हुईं जिसमें से पांच में तीन तलाक को रद करने की मांग है।
– मामले में तीन तलाक का विरोध कर रहे महिला संगठनों और पीड़िताओं के अलावा इस पर सुनवाई का विरोध कर रहे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत ए उलेमा ए हिंद की ओर से दलीलें रखी गईं। केंद्र सरकार ने भी इसे महिलाओं के साथ भेदभाव बताते हुए रद करने की मांग की है।
– सुनवाई के दौरान पीठ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से पूछा था कि क्या शादी के वक्त ही मॉडल निकाहनामे में महिला को तीन तलाक न स्वीकारने का विकल्प दिया जा सकता है। बोर्ड ने कोर्ट को बताया था कि निकाह के समय न सिर्फ लड़की को तीन तलाक को न कहने के विकल्प की जानकारी दी जाएगी बल्कि मॉडल निकाहनामा में इसे एक विकल्प के तौर पर भी शामिल किया जाएगा।
1. तीन तलाक महिलाओं के साथ भेदभाव है। इसे खत्म किया जाए।
2. महिलाओं को तलाक लेने के लिए कोर्ट जाना पड़ता है जबकि पुरुषों को मनमाना हक दिया गया है।
3. कुरान में तीन तलाक का जिक्र नहीं है।
4. यह गैरकानूनी और असंवैधानिक है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत की दलीलें
1. तीन तलाक अवांछित है लेकिन वैध।
2. यह पर्सनल लॉ का हिस्सा है। कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता।
3. 1400 साल से चल रही प्रथा है। यह आस्था का विषय है, संवैधानिक नैतिकता और बराबरी का सिद्धांत इस पर लागू नहीं होगा।
4. पर्सनल लॉ में इसे मान्यता दी गई है। तलाक के बाद उस पत्नी के साथ रहना पाप है। धर्मनिरपेक्ष अदालत इस पाप के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
5. पर्सनल लॉ को मौलिक अधिकारों की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता।
केंद्र सरकार की दलीलें
1. तीन तलाक महिलाओं को संविधान में मिले बराबरी और गरिमा से जीवन जीने के हक का हनन है।
2. यह धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है, इसलिए इसे धार्मिक आजादी के मौलिक अधिकार में संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
3. पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 22 मुस्लिम देश इसे खत्म कर चुके हैं।
4. धार्मिक आजादी का अधिकार बराबरी और सम्मान से जीवन जीने के अधिकार के अधीन है।
5. सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों का संरक्षक है। कोर्ट को विशाखा की तरह फैसला देकर इसे खत्म करना चाहिए।
6. अगर कोर्ट ने हर तरह का तलाक खत्म कर दिया तो सरकार नया कानून लाएगी।
कोर्ट की टिप्पणियां
1. जो चीज ईश्वर की नजर में पाप है वह इंसान द्वारा बनाए कानून में वैध कैसे हो सकती है।
2. क्या तीन तलाक इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है।
3. क्या निकाहनामे में महिला को तीन तलाक को न कहने का हक दिया जा सकता है।
4. अगर हर तरह का तलाक खत्म कर दिया जाएगा तो पुरुषों के पास क्या विकल्प होगा।

दो बागी कांग्रेस विधायकों के वोट रद्द करने गुजरात हाई कोर्ट ने भेजा कांग्रेस नेता अहमद पटेल को नोटिस

राज्‍य सभा चुनाव में दो बागी कांग्रेस विधायकों के वोट रद्द करने के मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग और कांग्रेस नेता अहमद पटेल को नोटिस भेजा है।
दो वोट रद्द करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए भाजपा प्रत्‍याशी बलवंतसिंह राजपूत ने एक याचिका दायर की है, जिस पर कोर्ट ने नोटिस भेजा है। चुनाव अयोग के इस फैसले के कारण ही अहमद पटेल को राज्‍य सभा चुनाव में जीत मिली थी। राजपूत चुनाव हार गए थे।
जस्टिस बेला त्रिवेदी ने सोमवार को चुनाव आयोग, अहमद पटेल के साथ राज्‍य सभा चुनाव में भाजपा के दो अन्य उम्मीदवारों पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को भी नोटिस जारी किया। उन्‍हें 21 सितंबर को नोटिस का जवाब देने को कहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में गुजरात की तीन राज्‍यसभा सीटों के लिए मतदान के बाद साढ़े नौ घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा कांग्रेस नेता अहमद पटेल की जीत के साथ खत्म हुआ था। कांग्रेस के दो बागियों द्वारा भाजपा नेताओं को मतपत्र दिखाने के बाद जमकर बवाल मचा। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा। आयोग ने दोनों के वोट रद्द कर दिए। इसके साथ ही अहमद पटेल की जीत का रास्ता साफ हुआ अन्‍यथा वह हार जाते।
भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग का फैसला गलत था, इसीलिए इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग ने इस मामले में जो भी फैसला लिया, उसमें सभी तथ्यों का ध्यान नहीं रखा गया और मतपेटी में डाले जा चुके वोट को वापस निकाल कर रद किया गया जो मतदान संबंधी नियमों के अनुरूप नहीं है।

प्रदेश में डेंगू के पांच और स्वाइन फ्लू के तीन मरीज मिले

मध्यप्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों में भी स्वाइन फ्लू है, लेकिन जानलेवा कम है। वजह, वहां जांच की सुविधाएं ज्यादा हैं। मरीज भी समय पर इलाज के लिए पहुंच जाते हैं, जिससे समय पर इलाज शुरू हो जाता है। मप्र में स्वाइन फ्लू में मौत की दर ज्यादा है। खासतौर पर भोपाल व आसपास के जिलों में।
इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) भोपाल द्वारा 1 जुलाई से अब तक भेजे गए नमूनों में 11 में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें चार की मौत हो चुकी हैं। यानी पॉजिटिव मरीजों में हर तीसरे-चौथे मरीज की मौत हो रही है।
प्रदेश में एक जुलाई से अब तक 59 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें 8 मरीजों की मौत हुई है। इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज के फेफड़े में संक्रमण बढ़ने पर बचाने में मुश्किल होती है। गांधी मेडिकल कॉलेज के पल्मोनरी मेडिसीन विभाग के प्रमुख डॉ. लोकेन्द्र दवे ने बताया कि कई मरीज ऐसी हालत में अस्पताल पहुंचते हैं कि बीमारी का असर उनके दूसरे अंगों पर भी हो चुका होता है। फेफड़े खराब हो जाते हैं। उन्हें फौरन वेंटिलेटर पर लेना पड़ता है। संक्रमण के दूसरे-तीसरे दिन मरीज अस्पताल पहुंच जाए तो उसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।
राजधानी में सोमवार को डेंगू के पांच नए मरीज मिले हैं। इस साल एक ही दिन में पहली बार इतने मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि अलग-अलग लैब में 42 मरीजों के सैंपल की जांच सोमवार को की गई थी। इसी तरह से स्वाइन फ्लू के 11 संदिग्ध मरीजों की जांच में तीन पॉजिटिव आए हैं। इनमें भोपाल, सीहोर व होशंगाबाद के एक-एक मरीज हैं। सोमवार को 16 संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए।
गर्भवती महिलाएं, 5 साल से छोटे बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र वाले, डायबिटीज, किडनी व हृदय रोग के मरीज। जिनकी कीमोथैरेपी चल रही है।
सर्दी-जुकाम के साथ तेज बुखार, बहुत ज्यादा कफ आना, सांस लेने में तकलीफ।
स्वाइन फ्लू नियंत्रण में है। डेथ रेट ज्यादा इसलिए है कि मरीज काफी देर से अस्पताल पहुंच रहे हैं। हालत ज्यादा बिगड़ने पर बचा पाना मुश्किल होता है। सरकारी अस्पतालों में इलाज की पूरी सुविधाएं हैं।