स्टार टेनिस खिलाडी मारिया शारापोवा को यूएस ओपन में वाइल्ड कार्ड प्रवेश की अनुमति

रूस की स्टार टेनिस खिलाडी मारिया शारापोवा को साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट यूएस ओपन में वाइल्ड कार्ड प्रवेश की अनुमति मिल गई है। प्रतिबंध के 18 माह बाद शारापोवा पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में खेलेंगी। अमेरिका टेनिस संघ (यूएसटीए) ने इसकी जानकारी दी।
यूएसटीए ने अपने बयान में कहा, शारापोवा ने इससे पहले 10 बार यूएस ओपन के मुख्य ड्रॉ में शामिल होते हुए टूर्नामेंट खेला। पिछले साल वह अंतिम-16 में कैरोलिना वोज्नियाकी से हार गईं थीं। पिछले साल आस्ट्रेलिया ओपन में सेरेना विलियम्स से मिली हार के बाद 30 वर्षीया शारापोवा को ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट की तैयारियों का अवसर नहीं मिला। वर्तमान में वे विश्व रैंकिंग में 148वें स्थान पर हैं।
पांच बार की ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट विजेता शारापोवा को डोपिंग मामले में 15 माह के लिए टेनिस जगत से प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस साल फ्रेंच ओपन में उन्हें वाइल्ड कार्ड से प्रवेश की अनुमति नहीं मिली और चोटिल होने के कारण वे विम्बल्डन ओपन के क्वालीफाइंग राउंड से बाहर हो गई थीं। यूएस ओपन टेनिस टूर्नामेंट का आगाज 28 अगस्त से हो रहा है।

अमेरिका ने भी मान लिया कश्मीर में आजादी की लड़ाई के नाम हो रही हिंसक घटनाएं

आखिरकार अमेरिका ने भी मान लिया है कि कश्मीर में आजादी की लड़ाई के नाम हो रही हिंसक घटनाएं दरअसल आतंकी वारदात है।
भारत लंबे समय से इसे आतंकवाद बताता रहा था, लेकिन अमेरिका समेत कई देश इसको मानने को तैयार नहीं थे।
अमेरिका के गृह विभाग की तरफ से बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के जरिए हिजबुल मुजाहिदीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया है।
हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन को दो महीने ही अमेरिका अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर चुका है।
गौरतलब है कि कश्मीर में भारत के खिलाफ छद्मयुद्ध का मोर्चा खोलने के लिए 1989 में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने हिजबुल मुजाहिदीन का गठन कराया था।
पाकिस्तान दुनिया के सामने इसे कश्मीर के स्थानीय युवाओं की आजादी के लिए संघर्ष के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है।
यही नहीं, इसके आड़ में सैयद सलाउद्दीन और हिजबुल मुजाहिदीन को पाकिस्तान खुला समर्थन भी देता रहा है। हिजबुल मुजाहिदीन के अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित होने के साथ ही पाकिस्तानी की साजिश ध्वस्त हो गई है।
इसके बाद पाकिस्तान कश्मीर में सक्रिय किसी भी आतंकी को स्वतंत्रता सेनानी बताने की स्थिति में नहीं होगा। घाटी में सक्रिय लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद पहले से अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन की सूची में शामिल है। अब उसमें हिजबुल मुजाहिदीन का नाम भी आ गया है।
अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने के बाद उनके खिलाफ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर मानवाधिकार संगठन उंगली नहीं उठा पाएंगे। इससे कश्मीर में आतंकियों के सफाए के लिए सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे ‘आपरेशन ऑल आउट’ को बल मिलेगा।
यही नहीं, हिजबुल मुजाहिदीन के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर कश्मीर के नाम पर फंडिंग हासिल करना भी संभव नहीं होगा। विदेशों में उसके आफिस और खातों को सील किये जा सकते हैं और उन्हें मदद करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
पिछले साल संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर में मारे गए हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी को स्वतंत्रता सेनानी बताकर महिमामंडित करने की कोशिश की थी।
जबकि बुरहान वानी पर घाटी में कई आतंकी वारदात को अंजाम देने का आरोप था। अब पाकिस्तान के लिए दुनिया के सामने किसी भी हिजबुल आतंकी को स्वतंत्रता सेनानी बताना आसान नहीं होगा।
यही नहीं, पाकिस्तान के लिए आतंकी फंडिंग पर लगाम लगाने के लिए बनी संस्था एफएटीएफ के सामने अपना बचाव करना भी आसान नहीं होगा।
पाकिस्तान को एफएटीएफ के सामने आतंकी फंडिंग पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने के सबूत देने को कहा गया है।
जबकि हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी पाकिस्तान में खुलेआम चंदा इकट्ठा करते हैं और मुजफ्फराबाद में उनका हेडक्वार्टर है।
एफएटीएफ के सामने पाकिस्तान को यह बताना होगा कि उसने हिजबुल मुजाहिदीन की फंडिंग रोकने और उसकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए हैं।
ऐसा नहीं करने की स्थिति में पाकिस्तान को अंतराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों का भी सामना करना पड़ सकता है।

अगस्त क्रांति राजधानी एक्सप्रेस के सात डिब्बों में चोरों ने करीब 20 यात्रियों की लाखों की नकदी चोरी किए

बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली राजधानी ट्रेन में अब तक की सबसे बड़ी चोरी कर चोरों ने पुलिस और रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। मंगलवार और बुधवार की रात चोरों ने वारदात को अंजाम दिया और सुबह करीब 5.30 बजे जब राजस्थान के कोटा में यात्रियों की नींद खुली, तब तक चोर लाखों के कीमती सामान के साथ फरार हो चुके थे।
मुंबई से दिल्ली आ रही अगस्त क्रांति राजधानी एक्सप्रेस के सात डिब्बों में चोरों ने करीब 20 यात्रियों की लाखों की नकदी, जूलरी, घड़ियों और मोबाइल चोरी किए हैं। ट्रेन के दिल्ली पहुंचने पर केस दर्ज किया गया। हाल के वर्षों में ट्रेनों में हुई चोरी की घटना में यह सबसे हाई प्रोफाइल चोरी है। पुलिस को संदेह है कि चोर ट्रेन में ही टिकट लेकर बतौर यात्री बनकर बैठे थे और मौका पाते ही वे कीमती सामान पर हाथ साफ कर फरार हो गए।
यात्रियों को अपने खाली बैग और पर्स ट्रेन के अंदर पैंट्री कार, अवन, बाथरूम जैसी जगहों पर मिले। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) और गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) के शुरुआती आकलन के मुताबिक, करीब 10.30 बजे वड़ोदरा पार करने के बाद चोर ट्रेन में सवार हुए। उस वक्त तक कई यात्री नींद में थे।
यात्रियों से मिली जानकारी के बाद जांचकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि चोरों ने मध्य प्रदेश के रतलाम में रात 2 बजे से 3 बजे के बीच वारदात को अंजाम दिया होगा। वड़ोदरा और कोटा के बीच की ट्रेन के रुकने का यही एकमात्र स्टाप है।
अधिकारियों ने बताया कि उस रात आरपीएफ के तीन कांस्टेबल रेलगाड़ी की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए थे। वारदात को गाड़ी के एसी-2 और एसी-3 के डिब्बों में अंजाम दिया गया है। यह ट्रेन मुंबई और दिल्ली के बीच 11 स्टॉपेज पर रुकती है।
एक वरिष्ठ आरपीएफ अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर स्थानीय गिरोह वारदातों को अंजाम देने के बाद भागने के लिए चेन पुलिंग करते हैं। मगर, राजधानी में चैन-पुलिंग नहीं की गई थी। इसके साथ ही जिन परिस्थितियों में खाली पर्स मिले हैं, वे इशारा कर रहे हैं कि वारदात को ट्रेन में सवार ‘फर्जी यात्रियों’ ने अंजाम दिया है। उनके पास चोरी करने के लिए पर्याप्त समय था।
हमने इस मामले की कुछ संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। पश्चिमी मध्य रेलवे, जबलपुर के मुख्य सुरक्षा आयुक्त राजिंदर मलिक ने कहा कि पिछले चोरी के मामलों में कैटरिंग स्टाफ की आंशिक या पूरी तरह से वारदात में मिलीभगत देखी गई है। हमने ट्रेन के अंदर मौजूद कर्मचारियों के बयान लिए हैं। हालांकि, मलिक ने इस आशंका से इंकार किया है कि यात्रियों को चोरों ने ड्रग्स दी थी।
जांचकर्ता पिछले 18 महीनों में इस रूट पर अंजाम दिए गए अपराधों की घटनाओं को देख रहे हैं, ताकि पता कर सकें कि क्या इस मामले में उन्हें कोई पैटर्न देखने को मिल सके। मथुरा में यात्रियों के एक ग्रुप उतर गया था, जबकि 11 यात्रियों ने दिल्ली में निजामुद्दीन स्टेशन के जीआरपी स्टेशन पर अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई है।
दर्ज कराई गई इन एफआईआर के अनुसार चोरी किए गए सामानों में से 2.5 लाख रुपए की नकदी, सोने के आभूषण छह मोबाइल फोन, क्रेडिट और डेबिट कार्ड, पैन और आधार कार्ड और पासपोर्ट आदि चोरी हुए हैं। वहीं, एक यात्री ने दावा किया है कि उसके पास 1.25 लाख रुपए नकद थे, जो चोरी हो गए हैं।

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक महिला ने किया हुआ है डाक्टरों को हैरान

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक ऐसी महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके खून में हीमोग्लोबीन की मात्रा सिर्फ एक ग्राम डेसीलीटर है। इस महिला ने डाक्टरों को हैरान किया हुआ है ।
बांसवाड़ा जिले के घाटोल उपखण्ड क्षेत्र के आमलीवाटा गांव निवासी महिला देवा को दो दिन पहले महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस महिला को बुखार था जो कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। अस्पताल में भर्ती होने के बाद जब महिला की जांच कराई गई तो हीमोग्लोबीन की इस मात्रा का पता लगा।
इस मामले की अस्पताल के लेब इन्चार्ज शरद त्रिवेदी ने भी पुष्टि की है। डाक्टर महिला की जांच रिपोर्ट देख कर अचरज में है।
लेब इन्चार्ज शरद त्रिवेदी के अनुसार सामान्य महिला का हीमोग्लोबिन 12 से 18 ग्राम प्रति डेसी लीटर होना चाहिए। आठ ग्राम से कम होने पर उसे एनिमिक माना जाता है। ऐसे में इतना कम हीमोग्लोबीन हैरान कर देने वाला है।

कांग्रेसियों में जमकर चले लात-घूसे माफी भी मांग

कांग्रेस संगठन चुनाव के लिए रायशुमारी करने दिल्ली से शाजापुर पहुंचे पर्यवेक्षक सुरेंद्र सोलंकी के सामने कांग्रेसियों में जमकर लात-घूसे चले। कुर्सियां भी फेंकी। महूपुरा स्थित नपा सामुदायिक हॉल में दो पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा एवं हुकुमसिंह कराड़ा के समर्थकों ने एक-दूसरे को पीट भी दिया। इससे पुलिस बुलाना पड़ी। इधर, खुलेआम गुटबाजी देख पर्यवेक्षक भी हैरान रहे।
वे खुद नेता व कार्यकर्ताओं के सामने हाथ जोड़ते रहे लेकिन काफी देर तक हंगामा चलता रहा। तीसरे गुट के रूप में युकां प्रदेश प्रवक्ता नरेश कप्तान भी पहुंचे। जिनका मंच पर ही पर्यवेक्षक से विवाद हो गया। हालांकि, मौके की नजाकत देखते हुए पर्यवेक्षक ने प्रदेश प्रवक्ता से मंच पर ही माफी भी मांग ली।
जिले में कांग्रेसियों में गुटबाजी जगजाहिर है लेकिन बुधवार को गुटबाजी बंद कमरे से सड़क पर आ गई। दरअसल, संगठन चुनाव के चलते सुबह 11.30 बजे सामुदायिक हॉल में पर्यवेक्षक सोलंकी की मौजूदगी में रायशुमारी शुरू हुई। पूर्व मंत्री एवं अभा कांग्रेस सचिव वर्मा भी मौजूद रहे।
करीब दो घंटे तक कांग्रेसियों से खचाखच भरे हॉल में रायशुमारी होती रही लेकिन हंगामा तब शुरू हो गया, जब दोपहर 1 बजे पूर्व मंत्री व पूर्व क्षेत्रीय विधायक कराड़ा अपने समर्थकों के साथ मौके पर जा पहुंचे। रायशुमारी व बैठक के दौरान महूपुरा से गायत्री मंदिर के बीच वाहनों का काफी देर तक जाम लगा रहा। कई स्कूली बसें भी फंस गई।
रायशुमारी के दौरान कराड़ा व उनके समर्थकों के पहुंचने के बाद विवाद की स्थिति शुरू हुई। कराड़ा हॉल के गेट तक पहुंचे और रुक गए। इस दौरान उनके समर्थक जमकर नारेबाजी करने लगे। कराड़ा समर्थकों को देख वर्मा-सिकरवार समर्थकों का पारा भी चढ़ गया और हॉल के भीतर से ही नारेबाजी करने लग गए।
करीब 15 मिनट तक नारेबाजी का दौर चलता रहा। इसके बाद पर्यवेक्षक सोलंकी हॉल से बाहर आए और कराड़ा को भीतर ले गए लेकिन समर्थक चुप नहीं हुए। मंच के सामने ही एक कार्यकर्ता ने दूसरे को थप्पड़ मार दिया।
इसके बाद दोनों गुट के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर लात-घूसे बरसाने लगे। लाठियां भी चली। टीआई राजेंद्र वर्मा व अन्य पुलिसकर्मी हॉल में पहुंचे और दोनों पक्षों को अलग किया। विवाद के दौरान भगदड़ मच गई। कुछ ही देर हुई थी कि युकां प्रदेश प्रवक्ता कप्तान भी तीसरे गुट के रूप में समर्थकों के साथ जा पहुंचे।
भले ही संगठन चुनाव की रायशुमारी हो लेकिन कांग्रेसी इसे विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे थे। इसलिए वर्मा-सिकरवार, कराड़ा एवं कप्तान अपने-अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन करने पहुंचे। खास बात ये है कि समर्थकों को लाने वाले नेता बाद में उन्हें चुप कराने के लिए हाथ जोड़ते दिखाई दिए।
करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर 1.45 बजे मंच पर पर्यवेक्षक सोलंकी ने जैसे ही जिलाध्यक्ष रामवीरसिंह सिकरवार को बोलने के लिए बुलाया, तभी नीचे बैठे एक कार्यकर्ता ने कहा कि मंच के सारे जयचंदों को बाहर करो। ये जयचंदों की टोली है।
इसी बीच सिकरवार ने कहा कि हमें और जोर से बोलना आता है। कुछ देर तक जिलाध्यक्ष व कार्यकर्ता के बीच नोकझोंक हुई। इसे जब शांत कराया तो पूर्व पार्षद प्रतिनिधि चट्टानसिंह चंदेल ने कहा कि यहां तानाशाही मचा रखी है। पूर्व पार्षद बालकृष्ण चतुर्वेदी मंच पर ही पर्यवेक्षक से भिड़ पड़े।
पूर्व मंत्री कराड़ा के संबोधन के दौरान ही पर्यवेक्षक सोलंकी ने पास में खड़े युकां प्रदेश प्रवक्ता कप्तान से पूछ लिया कि आप कौन हैं? यह सुन कप्तान के समर्थन गुस्सा हो गए। वहीं कप्तान व पर्यवेक्षक के बीच जमकर बहस भी हुई। हालांकि, समर्थकों का गुस्सा कम न होने पर पर्यवेक्षक सोलंकी ने मंच पर ही माफी मांगते हुए समर्थकों को चुप कराने को कहा। इसके बाद कप्तान ने समर्थकों को चुप कराया।
इधर, पूर्व मंत्री वर्मा के संबोधन के दौरान ही कराड़ा समर्थक हंगामा करने लगे। कराड़ा समर्थक वर्मा को बोलने नहीं देना चाहते थे। जिस पर कप्तान को फिर से मैदान संभालना पड़ा। उन्होंने सभी को चुप कराते हुए वर्मा का संबोधन कराया।
वर्मा-सिकरवार एवं कराड़ा समर्थकों के बीच हुए विवाद के दौरान शुजालपुर की पूर्व नपाध्यक्ष रचना जैन व अन्य नेत्रियां मंच पर ही थीं। इससे वे एक कोने में खड़ी हो गईं। जैसे ही भीड़ तितर-बितर हुई, उन्हें कुछ कांग्रेसियों ने घेरा बनाकर हॉल से बाहर निकाला। इसके बाद नेत्रियां हॉल में नहीं आई। वे पास स्थित नपा भवन की तीसरी मंजिल की गैलरी से सारा माजरा देखती रहीं।
मंच के सामने विवाद कर रहे कार्यकर्ताओं के कुछ नेताओं ने मोबाइल पर वीडियो भी बनाए। खुद जिलाध्यक्ष सिकरवार वीडियो बनाते नजर आए। सूत्र बताते हैं कि विवाद करने वालों के चेहरे वीडियो से पहचाने जाएंगे। जिन पर कांग्रेस कमेटी कुछ एक्शन ले सकती है। एक कार्यकर्ता ने तो माइक व उसकी मशीन पर पत्थर भी फेंके।
मामला शांत होने के बाद पर्यवेक्षक सोलंकी ने कहा कि यदि हम आपस में लड़ेंगे तो भाजपा से कैसे लड़ सकेंगे। जिस तरह आज एक-दूसरे से लड़ने में ताकत लगाई, वह भाजपा के खिलाफ लगाएं। एकजुट होकर पार्टी को मजबूत करें। मनमुटाव होते हैं किंतु विवादों को सड़क पर ले जाने की सभ्यता नहीं है।
सोलंकी से पूर्व वर्मा, कराड़ा व सिकरवार ने भी संबोधित किया। इस दौरान बिजली गुल हो गई थी। इससे सिकरवार ने बिना माइक के ही संबोधन दिया किंतु कराड़ा के संबोधन के दौरान बिजली आ गई। जिन्हें बिना माइक के ही बोलने दिया गया। जिलाध्यक्ष सिकरवार अड़ गए और माइक चालू नहीं करने दिया। सभी नेताओं ने बिना माइक के ही संबोधित किया।
बैठक के बाद मीडियाकर्मियों ने पर्यवेक्षक सोलंकी से पूछा कि विवाद करने वालों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी तो वे सवाल को टाल गए। बस इतना कहा कि लात-घूसे नहीं चले। हालांकि, पास में खड़े दूसरे नेता उनके जवाब को सुनकर मुस्कुरा रहे थे। पर्यवेक्षक के अनुसार संगठन चुनाव को लेकर वे रायशुमारी करने आए थे। रिपोर्ट कांग्रेस नेतृत्व को सौंपेंगे।