बीसीसीआई की आगामी स्पेशल जनरल बॉडी मीटिंग में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को दिए जाने वाले पुरस्कार की राशि को बढ़ाए जाने की संभावना

बीसीसीआई की आगामी स्पेशल जनरल बॉडी मीटिंग में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को दिए जाने वाले पुरस्कार की राशि को बढ़ाए जाने की संभावना है। यह कदम वर्तमान में महिला खिलाड़ियों को दिए गए पुरस्कार की कम राशि होने पर कई स्टेट यूनिट्स की ओर से नाराजगी जाहिर करने के बाद उठाया गया है।
महिला विश्व कप में भारत के शानदार प्रदर्शन के बाद प्रशासक समिति ने 15 सदस्यीय टीम की हर महिला खिलाड़ी को 50 लाख रुपए और सपोर्ट स्टाफ को 25 लाख रुपए का पुरस्कार देने का फैसला किया था। भारतीय महिला खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई थी और मेजबान इंग्लैंड को कड़ी टक्कर दी थी।
हालांकि, बड़े पैमाने पर लोगों का मानना है कि महिला खिलाड़ियों को दी जाने वाली राशि काफी कम है, जिन्होंने सभी बाधाओं को पार करते हुए देश को गर्व का मौका दिया। विभिन्न स्टेट यूनिट्स के सदस्यों को भी लगता है कि महिला खिलाड़ियों को दिए जाने वाले पुरस्कार की राशि में वृद्धि होनी चाहिए। बुधवार 26 जुलाई को आयोजित होने वाली विशेष जनरल बॉडी की मीटिंग में इसके बारे में एक सुझाव दिया जा सकता है।
वेस्ट जोन की स्टेट यूनिट के एक प्रतिनिधि ने अनौपचारिक रूप से कहा कि मैं यह प्रस्ताव दूंगा कि खिलाड़ियों को 60 लाख रुपए और सपोर्टिंग स्टाफ को 30 लाख रुपए नकद पुरस्कार दिया जाना चाहिए। वह स्पेशल जनरल बॉडी मीटिंग में भी उपस्थित रहेंगे। प्रतिनिधि ने कहा कि लड़कियों ने हमें गर्व महसूस करने का मौका दिया है और उन्हें पर्याप्त रूप से पुरस्कृत किया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि यदि महिला खिलाड़ियों को अधिक भुगतान मिलता है, तो किसी को भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
बीसीसीआई के कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना का भी मानना है कि महिला खिलाड़ियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि को बढ़ाने की जरूरत है। खन्ना ने कहा कि मैं इस मामले को उचित मंच पर उठाऊंगा। यह पहली बार नहीं होगा कि प्रारंभिक अधिकृत घोषणा के बाद पुरस्कार राशि में वृद्धि की जाए। हालांकि, वित्त से संबंधित सभी मामलों को पहले जनरल बॉडी पारित करती है।

किसी को चलती हुई ट्रेन में साइकिल चलाते देखा नहीं, तो रूस के रहने वाले इन दोनों लड़कों को जरूर देख लें

सड़क पर साइकिल चलाते हुए आपने कई लोगों को देखा होगा। मगर, क्या कभी किसी को चलती हुई ट्रेन में साइकिल चलाते देखा है। नहीं, तो रूस के रहने वाले इन दोनों लड़कों को जरूर देख लें। ये अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेन के डिब्बे पर साइकिल चला रहे हैं। उनके सिर के ऊपर हाईटेंशन तार है और नीचे तेजी से चल रही ट्रेन का डिब्बा।
यूट्यूब पर अपलोड किये गए इस वीडियो में दो लड़के तेज चल रही ट्रेन की छत पर चढ़ते दिख रहे हैं। वे एक दूसरे को सहारा देते हुए साइकिल भी साथ लेकर ट्रेन के डिब्बे पर चढ़ रहे हैं। इस दौरान वे वीडियो भी बनाते जा रहे हैं। ये कलाकारी दिखाने वाले रोमन शिरोकोव ने कहा कि सड़क पर साइकिल चलाना हमें बोरिंग लगता था, इसलिए हमने कुछ अलग करने का सोचा।
एक युवक ने बीएमएक्स साइकिल चलाते हुए हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन भी किया। हालांकि, इस दौरान एक युवक का बैलेंस बिगड़ गया और वह ट्रेन के डिब्बे के ऊपर ही गिर गया। इसका नतीजा घातक हो सकता था, लेकिन गनीमत रही कि वह सुरक्षित बच गया। अगर, उसका हाथ हाई-टेंशन लाइन के तार पर पड़ गया होता, तो उसकी जान भी जा सकती थी।
यदि वह चलती हुई ट्रेन से नीचे गिर जाता, तो चोट लगने या ब्रेन हैमरेज होने के कारण भी उसकी जान जा सकती थी। ट्रेन के स्टेशन पर रुकने के दौरान वे साइकिल साथ लेकर ट्रेन से नीचे भी उतर गए।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री गुरुवार को तमिलनाडु पहुंचे

देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री गुरुवार को तमिलनाडु पहुंचे। यहां से पीएम रामेश्वरम गए जहां उन्होंने डॉ. कलाम के समाधि स्थल पर बने मेमोरियल का उद्घाटन किया।
इस दौरान उन्होंने डॉ. कलाम के परिजनों से भी मुलाकात की। पीएम ने समाधि स्थल जाकर डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। इसके अलावा पीएम यहां अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे।
प्रधानमंत्री ने डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किए और बनाए गए मेमोरियल पर तिरंगा फहराने के अलावा डॉ. कलाम की प्रतिमा का भी अनावरण किया।

मानसून सत्र में कई वाकये ऐसे आए जब मंत्रियों ने विधायकों के सवालों पर गलत जानकारी देकर सदन को गुमराह करने की कोशिश

विधानसभा को लेकर सरकार या मंत्री कितने गंभीर हैं, ये उनके द्वारा दिए जाने वाले जवाब से साफ हो जाता है। मानसून सत्र में कई वाकये ऐसे आए जब मंत्रियों ने विधायकों के सवालों पर गलत जानकारी देकर सदन को गुमराह करने की कोशिश की।
दो दिन पहले ऊर्जा मंत्री पारस जैन राजगढ़ और उज्जैन के विधायकों के सवाल के जवाब पर घिर गए। विधायकों ने उत्तरों को गलत करार देते हुए जब सही तथ्य रखे तो मंत्री ने गलती स्वीकार कर ली और आश्वासन दिया कि जल्दी काम करा लेंगे। इस पर अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने भी चिंता जाहिर करते हुए मंत्रियों से कहा कि वे इस ओर ध्यान दें। जिन सवालों के जवाब नहीं आ रहे हैं, उन्हें अगला सत्र शुरू होने से पहले सचिवालय को भिजवाएं।
अटैचमेंट वाले शिक्षकों की सूची दे दी
स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह ने भी राजगढ़ में शिक्षकों के अटैचमेंट को लेकर पूछे सवाल पर कहा था कि एक भी शिक्षक संलग्न नहीं है। जबकि दांगी ने अटैचमेंट वाले शिक्षकों की सूची दे दी। इस मामले में वहां के जिला शिक्षा अधिकारी का रोल बेहद शर्मनाक रहा। वे गलत जानकारी देने के बाद भी उसे सही ठहराते रहे।
ऊर्जा मंत्री ने मंगलवार को हजारीलाल दांगी के सवाल के जवाब में बताया कि राजगढ़ की खिलचीपुर विस क्षेत्र के सभी गांवों में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस जवाब को विधायक ने करार दिया और कहा कि मेरे पास उन गांवों की सूची है, जहां काम हुआ ही नहीं है।
दांगी का समर्थन ब्यावरा विधायक नारायण सिंह पवार और नरसिंहगढ़ विधायक गिरीश भंडारी ने भी किया। बाद में मंत्री को गलती माननी पड़ी और उन्होंने कहा कि 15 गांव ऐसे हैं, जहां काम चल रहा है। उधर, भंडारी ने कहा कि नरसिंहगढ़ क्षेत्र में 75 फीसदी गांवों में विद्युतीकरण का काम पूरा नहीं हुआ है, जबकि विभाग बता रहा है कि काम पूर्ण हो गया है।
विधायक डॉ. मोहन यादव ने हाईटेंशन लाइन की गार्डिंग का मामला उठाया। ऊर्जा मंत्री ने जो जवाब दिया, उसे विधायक ने गलत करार दे दिया। मंत्री ने स्वीकार करते हुए कहा कि हम व्यवस्था कर देंगे। भाजपा विधायकों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री कुसुम महदेले द्वारा नल-जल योजनाओं को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया।
बुधवार को आई प्रश्नोत्तरी में 51 सवालों का एक ही जवाब विधायकों को दिया गया कि ‘जानकारी एकत्र की जा रही है”। इसको लेकर विधायकों ने आपत्ति जताई है। विधायकों का कहना है कि हर सत्र में यह मुद्दा उठता है। सरकार की ओर से सुधार का आश्वासन दिया जाता है पर समस्या जस की तस है। रामनिवास रावत को प्रश्न पूछने से करीब एक घंटे पहले प्याज खरीदी से जुड़ा संशोधित उत्तर मिला।
सत्र के दौरान मंत्रियों ने सवाल के जवाब गलत दिए। विधायकों ने आपत्ति उठाई हैं।
– मंत्रियों का संवैधानिक पद होता है। ये उम्मीद की जाती है कि वे सही जानकारी लेकर विधायकों को देंगे। कई बार विधायक जवाब से संतुष्ट नहीं होते हैं। अध्यक्ष भी टिप्पणी करते हैं। ये अपने आप में गंभीर बात होती है। मुख्यमंत्री भी सत्र शुरू होने से पहले मंत्री और अधिकारियों की बैठक लेते हैं।
जवाब यदि गलत दिए जा रहे हैं तो व्यवस्था में सुधार का उपाय क्या है।
– यदि विधायक जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो उसके पास प्रश्न एवं संदर्भ समिति में जाने का विकल्प रहता है। जहां तक बात सचिवालय की है तो सर्वदलीय बैठक में इसके साथ ही अपूर्ण उत्तर और ध्यानाकर्षण सूचनाओं के जवाब नहीं मिलने को लेकर बात की जाएगी।
सचिवालय अधिकारियों की सीधे जिम्मेदारी तय नहीं कर सकता है?
– सचिवालय सीधे तो नहीं पर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों को पत्र लिखने जा रहा है कि अपूर्ण उत्तर और ध्यानाकर्षण सूचनाओं के जवाब समय पर दिलाने अधिकारियों को पाबंद किया जाए।