भारत एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पहली बार पदक तालिका में पहले स्थान पर

भारत रविवार को इतिहास रचते हुए एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चीन को पीछे छोड़ते हुए पहली बार पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा।
भारत ने अपना दबदबा बनाकर रविवार को यहां पांच स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदक जीते और इस तरह से पदक तालिका में शीर्ष रहकर इतिहास रचा तथा चीन को दूसरे स्थान पर खिसका दिया। भारत इस तरह से कुल 29 पदकों (12 स्वर्ण, पांच रजत और 12 कांस्य) के साथ वह शीर्ष पर रहा। भारत का इससे पहले एशियन चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1985 में जकार्ता में 22 पदक (दस स्वर्ण, पांच रजत और सात कांस्य) था। चीन आठ स्वर्ण, सात रजत और पांच कांस्य पदक लेकर दूसरे स्थान पर रहा। उसने रविवार को तीन स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता।
हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने रविवार को जेवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर चैंपियनशिप को अपने लिए यादगार बना दिया। पानीपत जिले के खंडरा गांव के 20 वर्षीय नीरज ने 85.23 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीनियर वर्ग में पहला स्वर्ण पदक जीता। भारत के देवेंद्र सिंह (83.29 मी.) इस स्पर्धा में तीसरे स्थान पर रहे। नीरज ने पिछले हफ्ते पेरिस में हुई डायमंड लीग में सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया था, जहां वह पांचवें स्थान पर रहे थे। नीरज पिछले साल पोलैंड में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर सुर्खियों में आए थे।
अर्चना से छिना स्वर्ण पदक: भारत को हालांकि आखिरी दिन एक झटका भी लगा जब अर्चना अधव से श्रीलंका की निमाली वालिवर्षा कोंडा के विरोध के बाद महिलाओं की 800 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक छीन लिया गया और श्रीलंकाई एथलीट को चैंपियन घोषित कर दिया गया। पुणो की 22 वर्षीय अर्चना ने दो मिनट, 02 सेकंड में दौड़ पूरी करके 800 मीटर का स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन निमाली ने बाद में विरोध दर्ज कराया कि भारतीय एथलीट ने फिनिश लाइन पर उन्हें पीछे से धक्का दिया था। इसके बाद अर्चना को अयोग्य घोषित कर दिया गया और दो मिनट, 05.23 सेकंड में दौड़ पूरी करने वाली निमाली को स्वर्ण पदक दे दिया गया। रजत श्रीलंका की ही गयंतिका अबेयरत्ने (2:05.27) को और कांस्य पदक जापान की फूमिका ओमारी (2:06.50) को मिला।
स्वप्ना ने खोला स्वर्ण का खाता: इसके बावजूद कलिंग स्टेडियम में भारतीय एथलीटों का दबदबा रहा। हेप्टाथलन में स्वप्ना बर्मन ने भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। बर्मन सातवीं और अंतिम स्पर्धा (800 मीटर) में चौथे स्थान पर आने के बावजूद स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं। उनके पास खिताब जीतने के लिए पर्याप्त अंक थे। बंगाल की इस 20 वर्षीय एथलीट ने सात स्पर्धाओं में कुल 5942 अंक बनाए। वह 800 मीटर की दौड़ पूरी करने के तुरंत बाद गिर गयीं और उन्हें तुरंत चिकित्सा मुहैया करायी गयी। जापान की मेग हेंपिल 5883 अंक लेकर दूसरे और पूर्णिमा हेम्ब्रम 5798 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
लक्ष्मणन का गोल्डन डबल: पुरुषों की दस मीटर दौड़ में गोविंदन लक्ष्मणन (29 मिनट, 55.87 सेकंड) ने स्वर्ण पदक जीतकर गोल्डन डबल पूरा किया। भारत के लिए गोपी थोंकनाल (29 मिनट, 29.89 सेकंड) ने रजत पदक पर कब्जा किया। लक्ष्मणन ने पहले दिन पांच हजार मीटर दौड़ में भी पीला तमगा जीता था। जिनसन जॉनसन ने पुरुषों की 800 मी. दौड़ में एक मिनट, 50.07 सेकंड का समय निकाला और तीसरे स्थान पर रहे।
रिले टीमों ने भी दिखाया दम: इसके बाद महिलाओं की चार गुणा चार सौ मीटर रिले टीम (निर्मला श्योराण, एम पूवम्मा, जिस्ना मैथ्यू और देबाश्री मजूमदार) ने 3:31.34 सेकंड के साथ पहला स्थान हासिल कर देश को चौथा, जबकि पुरुषों ने इसी स्पर्धा में पीला तमगा जीतकर पांचवां स्वर्ण दिलाया। कुन्हू मुहम्मद, मुहम्मद अनस, राजीव अरोकिया और अमोज जैकब की पुरुष टीम ने तीन मिनट, 2.92 सेकेंड का समय निकाला।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया बड़ा बयान

इराकी सेना द्वारा मोसुल को आतंकी संगठन आईएस से मुक्त करवाए जाने के बाद अब दुनियाभर से इसे लेकर प्रतिक्रियाएं आ रहीं हैं। ताजा मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर एक बड़ा बयान दिया है। डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा है कि मोसुल में आईएस पर इराक की जीत इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में आतंकी संगठन के दिन गिन-चुन के रह गए हैं। यानि उनका खात्‍मा बेहद नजदीक है।
ट्रंप ने इस जीत के लिए इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी, सुरक्षा बलों और सभी नागरिकों को बधाई दी। आइएस के कब्‍जे से मोसुल को आजाद कराने के लिए अमेरिका व वैश्विक गठबंधन द्वारा समर्थित इराकी सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए उन्‍होंने कहा कि पिछले छह महीनों में आईएस के खिलाफ जबरदस्‍त प्रगति देखने को मिली है, जो कि सबसे बड़ा खतरा बन चुका था।
ट्रंप ने यह भी कहा कि हमें आईएस द्वारा क्रूर तरीके से मौत के घाट उतार दिए गए हजारों इराकियों और आतंकी संगठन द्वारा प्रताड़ित किए गए लोगों के लिए बेहद खेद है। वहीं ट्रंप ने आगे यह भी कहा कि अमेरिका और वैश्विक गठबंधन गर्व के साथ इराकी सुरक्षा बलों और उन लोगों के साथ खड़ा है जिन्‍होंने यह आजादी दिलवाई।

सुषमा स्वराज देश की सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज देश की सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। दुनिया में कहीं भी भारतीयों को प्रभावित करने वाले कोई आपदा हो, तो वह सक्रिय हो जाती हैं और आम लोगों की मदद के लिए भी वह हमेशा आगे रहती हैं। उन्होंने खुद को सही मायने में राजनेता के रूप में स्थापित किया है।
वह ट्विटर पर की जाने वाली अपनी खिंचाई (ट्रॉलिंग) का जवाब भी बड़े ही हास्यास्पद तरीके से देती हैं। सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल भी काफी मजाकिया हैं और वह भी ट्विटर पर काफी लोकप्रिय हैं। मिजोरम के पूर्व गवर्नर स्वराज से किसी व्यक्ति ने ट्विटर पर पूछा कि उनकी पत्नी कितना कमाती हैं।
पूरी तरह से अप्रासंगिक सवाल की अनदेखी करने की जगह उन्होंने बड़े ही सहज तरीके से लिखा, देखो-मेरी उमर और मैडम की तनख्वाह नहीं पूछते हैं। यह बैड मैनर (खराब बात) है।
स्वराज कौशल यहीं पर नहीं रुके, उन्होंने इस अजीब सवाल के जवाब में एक और दिल को खुश करने वाली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा- अरे चंदा लेना हो तो सीधा मांग लो, तनख्वाह क्यूं पूछते हो।
यह अकेली घटना नहीं है, जिसमें पूर्व राज्यपाल ने हास्य के साथ ट्विटर के सवालों का जवाब दिया हो। इससे पहले किसी ने पूछा था कि उनसे मिलने का कोई रास्ता बताएं। इसका भी कौशल ने मजेदार जवाब दिया था। उन्होंने लिखा- जैसे ही पुलिस आपको बुलाए, मुझसे संपर्क करें। मैं एक वकील हूं।
स्वराज कौशल ट्विटर पर काफी सक्रिय रहते हैं। और अक्सर लोगों के सवालों के मजाकिया जवाब देते हैं। इससे पहले किसी ने पूछा कि वह ट्विटर पर सुषमा स्वराज को फॉलो करते हैं, जबकि सुषमा स्वराज उन्हें फॉलो नहीं करती हैं। क्या मैं पूरे सम्मान के साथ पूछ सकता हूं कि ऐसा क्यों?
इसका जवाब भी कौशल ने दिया और लिखा- मैं बीते 45 सालों से सुषमा को फॉलो कर रहा हूं और अब चीजें नहीं बदल सकता हूं।

बच्ची सुन नहीं सकती अपने दम पर इलाज कराना चाहती है 27 साल की प्रियंका

राजस्थान के झुंझुनूं जिले की 27 साल की प्रियंका ने दसवीं कक्षा में प्रवेश लिया है। उसकी बच्ची चेष्टा सुन नहीं सकती और प्रियंका अपने दम पर उसका इलाज कराना चाहती है। इसीलिए वह पढ़-लिख कर खुद को इस काबिल बनाने में जुट गई है।
झुंझुनूं के बगड़ कस्बे में रहने वाली प्रियंका को गरीबी के कारण दसवीं कक्षा में ही पढ़ाई छोडनी पड़ी। इसके बाद उसकी शादी सुमित सेन से कर दी गई। सुमित आॅटो रिक्शा चलाता हैं। प्रियंका की बेटी चेष्टा के अलावा नौ साल का एक बेटा भी है।
प्रियंका ने जब चेष्टा को जन्म दिया तो पता चला कि वह सुन नहीं सकती। शुरूआत में तो प्रियंका ने बेटी की देखभाल की और जब बच्ची कुछ बड़ी हो गई है तो फिर से दसवीं कक्षा में प्रवेश ले लिया। वह चाहती है पढ़-लिख कर खुद नौकरी करे और अपने दम पर बच्ची का इलाज कराए।
प्रियंका का कहना है कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए उम्र कोई पाबंदी नहीं है और मैं अपने परिवार या किसी और से मदद लेने की बजाय अपने दम पर अपनी बेटी का इलाज करवाना चाहती हूं।

कनाड़िया में बड़ों को बोतल में पानी पीते देख मासूम बच्ची नकल करती रही

कनाड़िया में बड़ों को बोतल में पानी पीते देख मासूम बच्ची नकल करती रही। वह बाहर पड़े एक डिब्बे को घर में उठा लाई और खेल-खेल में उससे पानी पीते रही। बच्ची की तबीयत बिगड़ गई और उसने जान दे दी।
पुलिस के मुताबिक रविवार को 5 वर्षीय दुर्गा की तबीयत बिगड़ने पर उसके पिता लक्ष्मण को एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है। परिजन का कहना है कि बच्ची बाहर खेल रही थी।
बाहर खोपरे का तेल का एक डिब्बा पड़ा था। वह उसे उठाकर ले आई और खेलने लगी। जिस तरह बड़े बच्चे और अन्य लोग बोतल से पानी पीते है। उसी तरह दुर्गा भी उनकी नकल करते हुए डिब्बे में पानी भर-भरकर पीती रही। उसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई।
आशंका जताई जा रही है कि डिब्बे में जहरीला पदार्थ रखा होगा। उसे बिना साफ किए किसी ने रोड पर फेंक दिया। बच्ची उसे बोतल समझ घर लेकर आ गई और उसमें पानी पीने लगी। जिससे जहरीला पदार्थ बच्ची के शरीर में चला गया और उसकी जान चली गई।