अमेरिकी टेनिस स्टार की कार से हुई एक सड़क दुर्घटना में 78 वर्ष के बुजुर्ग की मौत

अमेरिकी टेनिस स्टार वीनस विलियम्स की कार से हुई एक सड़क दुर्घटना में 78 वर्ष के बुजुर्ग की मौत हो गई है। यह दुर्घटना मियामी के छोटे शहर पाल्म बीच गार्डेंस में नौ जून को हुई थी। इस मामले से जुड़ी फ्लोरिडा ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट आ गई है।
रिपोर्ट के अनुसार दुर्घटना के समय वीनस की गलती थी। 37 वर्षीय वीनस सोमवार से लंदन में अपना 20वां विंबलडन टूर्नामेंट खेलने वाली हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वीनस कार चलाते हुए चौराहे के बीच में धीमी हो गई, जिसके बाद व्यक्ति की 68 वर्षीय पत्नी ने कथित तौर पर अपनी कार से इस टेनिस खिलाड़ी की कार में टक्कर मार दी। घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया, जहां दो सप्ताह बाद उनकी मृत्यु हो गई। उनके सिर में चोट लगी थी।
पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि वीनस ने दूसरे ड्राइवर को रास्ता देने के अधिकार का उल्लंघन किया है। वैसे पुलिस ने यह भी कहा है कि दुर्घटना के समय सात बार की ग्रैंडस्लैम चैंपियन वीनस न तो फोन का इस्तेमाल कर रहीं थीं और न ही उन्हें ड्रग्स या शराब का सेवन किया था।
वीनस के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, पुलिस इसकी जांच कर रही है। वीनस के वकील ने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी। वीनस ने पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

चॉकलेट के नियमित से दिमागी सेहत और समझ बढ़ती है

चॉकलेट के शौकीन लोगों के लिए अच्छी खबर है। ताजा शोध में पाया गया है कि नियमित रूप से चॉकलेट का सेवन दिमाग को फायदा पहुंचा सकता है। इससे दिमागी सेहत ठीक रहती है और समझ बढ़ती है।
इटली की लअकिला यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि कोको फ्लावानोल का अच्छा स्रोत है। फ्लावानोल ऐसा प्राकृतिक रसायन है जो दिमाग की सुरक्षा करता है। शोध में कोको के इस्तेमाल से प्रतिभागियों में याद रखने की क्षमता में निखार पाया गया।
पूरी रात नींद न ले पाने वाली महिलाओं में यह उन्हें लगातार जागते रहने के कारण होने वाले दुष्प्रभावों से बचाता है। फ्लावानोल से दिल को भी फायदा होता है।
वैज्ञानिकों ने कहा कि चॉकलेट का ज्यादा प्रयोग अपने नुकसान भी साथ लाता है। हालांकि संभलकर सीमित मात्रा में किया गया सेवन दिल और दिमाग दोनों की हिफाजत कर सकता है।

देश के अगले अटॉर्नी जनरल होंगे 86 साल के केके वेणुगोपाल

86 साल के केके वेणुगोपाल देश के अगले अटॉर्नी जनरल होंगे। मुकुल रोहतगी द्वारा एक और कार्यकाल लेने के प्रति अनिच्छा प्रकट करने के बाद सरकार ने उनको इस पद पर लाने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील वेणुगोपाल को सरकार का सबसे बड़ा कानूनी अधिकारी बनाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरे से पहले चर्चा कर ली गई थी।
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री के तीन देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले वेणुगोपाल की उनसे भेंट हुई थी। हालांकि, शुक्रवार को जब वेणुगोपाल से अटॉर्नी जनरल के तौर पर प्राथमिकताओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद ही वह इस पर कुछ कहेंगे।
सूत्रों ने बताया कि कानून मंत्रालय ने नए अटॉर्नी जनरल के तौर पर वेणुगोपाल की नियुक्ति से संबंधित फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय के पास भेज दी है।

पाकिस्तान में जितने आतंकवादी नहीं हैं उससे ज्यादा हमारे देश में गद्दार

कश्मीर में पत्थरबाजी और अलग-अलग मौकों पर पाकिस्तान के समर्थन में हुई नारेबाजी को लेकर देशभर में प्रतिक्रियाएं आती रहती हैं। ताजा मामले में अपने कड़वे प्रवचनों के लिए पहचाने जाने वाले जैन मुनि तरूण सागर जी का बयान आया है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान में जितने आतंकवादी नहीं हैं उससे ज्यादा हमारे देश में गद्दार हैं।
जैन मुनि ने यह बात पिपराली में स्थित वैदिक आश्रम में पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि देश में रहता हो, देश का खाता हो और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाता हो वो गद्दार नहीं तो और क्या है।
आतंकवादी शेर की तरह सामने से वार नहीं करता है, वह तो भेड़िये की तरह पीछे से हमला करता है। उन्होंने देश में गरीबी को लेकर कहा कि लोग कहते हैं भारत देश गरीब है जबकि देश में गरीबी नहीं बल्कि गैर बराबरी है।

प्रदेश के अफसरों से 20 हजार रुपए तक बढ़ा एचआरए

केंद्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को संशोधन के साथ लागू करते हुए केंद्रीय कर्मचारियों के एचआरए (मकान भाड़ा) में खासी वृद्धि कर दी है।
ताकि कर्मचारियों को सरकारी मकानों में रहना महंगा पड़े और वे खुद के मकानों में शिफ्ट हो जाएं। उधर, प्रदेश के 4 लाख 24 हजार नियमित कर्मचारियों को अब तक सातवां वेतनमान ही नहीं मिला है। इससे कर्मचारी खासे नाराज हैं और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बना रहे हैं।
केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को एक जनवरी-16 से सातवां वेतनमान और एक जुलाई-17 से बढ़े हुए भत्ते दे दिए हैं। मध्य प्रदेश के पड़ोसी छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित देश के ज्यादातर राज्य अपने कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दे चुके हैं।
ये राज्य अब सातवें वेतन आयोग की भत्तों संबंधी अनुशंसाओं को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। जबकि मध्य प्रदेश सातवें वेतनमान के आदेश जारी नहीं कर पाया है। कर्मचारियों को सबसे ज्यादा तनाव वेतनमान में देरी से एरियर राशि के नुकसान का है। उनका कहना है कि सरकार देरी से वेतनमान देगी और फिर भत्ते भी देरी से देगी, तो उसकी एरियर राशि नहीं मिलेगी। सरकार ऐसा छठवां वेतनमान लागू करते हुए भी कर चुकी है।
जानकार बताते हैं कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को अगले माह से सातवां वेतनमान दे भी दे, तो भत्तों में वृद्धि करने में छह माह से एक साल लग जाएगा। वे बताते हैं कि केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के भत्तों में अंतर रहता है। इसलिए सरकार को कमेटी गठित करना पड़ेगी, जो नए भत्ते या भत्तों में वृद्धि पर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार भत्ते बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में राज्य के कर्मचारियों को सिर्फ चिकित्सा, यात्रा, वाहन और गृहभाड़ा भत्ता मिलता है।
केंद्र सरकार ने एचआरए में 140 फीसदी तक की वृद्धि कर दी है। यानि श्रेणी के हिसाब से कर्मचारी को 50 हजार रुपए तक होम अलाउंस मिलेगा। जबकि प्रदेश में 67 हजार रुपए मासिक वेतन लेने वाले अधिकारी को बी श्रेणी के आवास पर 30 हजार रुपए तक होम अलाउंस दिया जाता है। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को एक हजार रुपए होम अलाउंस मिलता है।
केंद्र सरकार ने एक्स, वाय और जेड श्रेणी के शहरों में पदस्थ कर्मचारियों के लिए क्रमश: 24, 16 और 8 फीसदी एचआरए देने का निर्णय लिया है। जबकि प्रदेश के कर्मचारियों को आबादी के हिसाब से 10, 7, 5 और 3 फीसदी एचआरए दिया जाता है। पहली श्रेणी 7 लाख से अधिक और अंतिम श्रेणी 50 हजार से अधिक आबादी वाले शहरों-कस्बों पर लागू होती है। ये अलाउंस कर्मचारी के बेसिक वेतन और ग्रेड-पे पर दिया जाता है।
सातवां वेतनमान नहीं मिलने से नाराज राज्य के कर्मचारी केंद्रीय कर्मचारियों के भत्तों में बढ़ोत्तरी का फैसला सुन गुरुवार को वित्तमंत्री से मिलने पहुंच गए। मप्र अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह वित्त मंत्री जयंत मलैया से मिले हैं। उन्होंने मंत्री से 7वां वेतनमान जल्द देने की मांग की है। वहीं दूसरे कर्मचारी संगठन आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं।