अगले साल अधिकांश शीर्ष सदस्यों के व्यस्त होने से आईसीसी ने 2018 टी-20 विश्व कप रद्द कर दिया

अगले साल अधिकांश शीर्ष सदस्यों द्वारा द्विपक्षीय सीरीज में व्यस्त होने से आईसीसी ने 2018 टी-20 विश्व कप रद्द कर दिया है। यह टूर्नामेंट दक्षिण अफ्रीका में प्रस्तावित था, लेकिन स्थानीय सरकार व क्रिकेट संघ की तनातनी के कारण इसे कहीं और कराने की योजना बन रही थी। हर 2 साल में होने वाला यह टूर्नामेंट भारत में 2016 में होने के 4 साल बाद सीधे 2020 में होगा।
अब तक दक्षिण अफ्रीका (2007), इंग्लैंड (2009), वेस्टइंडीज (2010), श्रीलंका (2012), बांग्लादेश (2014) और भारत (2016) में टी-20 विश्व कप आयोजित हो चुका है। द्विपक्षीय सीरीज से सभी देशों को कमाई होती है जिसका बड़ा हिस्सा प्रसारण करार से आता है, विशेषकर जब भारत किसी देश का दौरा करता है तो मेजबान बोर्ड टीवी प्रसारण अधिकार से लाखों डॉलर की कमाई करता है।
भारत को 18.5 अरब की जगह 27 अरब रुपए देने को तैयार आईसीसी
चैंपियंस ट्रॉफी के खत्म होने के तुरंत बाद लंदन में ही सोमवार से आईसीसी की वार्षिक कांफ्रेंस होगी जिसमें भारत की तरफ से कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और सीईओ राहुल जौहरी भाग लेंगे। इसमें भारत को आईसीसी से मिलने वाले वार्षिक राजस्व पर मुहर लगेगी। दुबई में अप्रैल में हुई बैठक में भारत को आईसीसी के संचालन ढांचे में बदलाव के मतदान में 1-9 से शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
यही नहीं राजस्व मॉडल के विरोध को लेकर बीसीसीआई की आपत्ति को भी आईसीसी बोर्ड ने 8-2 से खारिज कर दिया था। उस बैठक में भारत का हिस्सा 57 करोड़ डॉलर (करीब 37 अरब रुपए) की जगह 29.3 करोड़ डॉलर (लगभग 18.5 अरब रुपए) कर दिया गया था। तब आईसीसी के स्वतंत्र चेयरमैन शशांक मनोहर ने बीसीसीआई को अतिरिक्त 10 करोड़ डॉलर (लगभग छह अरब, 43 करोड़ रुपए) के राजस्व की पेशकश की थी लेकिन उसे बीसीसीआई ने खारिज कर दिया था।
बीसीसीआई सूत्रों के मुताबिक एक बार फिर भारतीय पदाधिकारियों ने मनोहर से बात की है और यह भारत को 29.3 करोड़ डॉलर की जगह 40.5 करोड़ डॉलर (लगभग 27 अरब रुपए) देने पर सहमति बन गई है।
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप पर भी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक इस वार्षिक सम्मेलन में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप पर भी चर्चा हो सकती है। आईसीसी लंबे समय से सभी प्रारूपों में कम से कम एक विश्व प्रतियोगिता शुरू करने की योजना बना रहा है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच कार्गो कॉरिडोर शुरू

भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए एयर कार्गो कॉरिडोर को आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। इसके माध्यम से पहली फ्लाइट जब भारत पहुंची तो इसमें 60 अफगानी हींग भेजा गया है।
इस पहली फ्लाइट की आगवानी करने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज, नागरिक उड्डयन मंत्री गजपति राजू, विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर वहां मौजूद थे।
हवाई कॉरिडोर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के साथ चारों ओर से जमीन से घिरे अफगानिस्तान को भारत के बाजारों तक पहुंच देगा। इससे अफगानिस्तान के किसानों को खराब होने वाली वस्तुओं की भारतीय बाजारों तक जल्द और सीधी पहुंच से लाभ होगा।
दोनों देशों के बीच पहले एयर कार्गो कॉरिडोर का उद्घाटन अफगान के राष्‍ट्रपति अशरफ गनी ने किया। जिसके बाद पहला मालवाहक विमान 60 टन हींग लेकर काबुल से दिल्ली पहुंचा है। 2016 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी के बीच इस कॉरिडोर पर निर्णय लिया गया था।
मोदी ने ट्वीट करके कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधा हवाई संपर्क समृद्धि की राह खोलेगा। पीएम ने कहा, ‘मैं राष्ट्रपति अशरफ गनी को उनकी इस पहल के लिए धन्यवाद देता हूं।’
मालूम हो कि चारों तरफ से विदेशी जमीनों से घिरे अफगानिस्तान का आयात और निर्यात पड़ोसी देशों पर निर्भर है। लेकिन, वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आतंकियों को पनाह देने जैसे आरोप को लेकर तनावपूर्ण संबंध हैं।
राष्ट्रपति बनने के बाद अशरफ गनी पहली बार 2015 में भारत दौरे पर आए थे। तभी एयर कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया था। इससे पहले सड़क के जरिए अफगानिस्‍तान से प्रोडक्‍ट भारत आते हैं।
अब तक अपने विदेशी व्‍यापार के लिए अफगानिस्‍तान पड़ोसी देश पाकिस्‍तान के पोर्ट पर निर्भर है। इसे भारत तक पहुंचने के लिए पाकिस्‍तान के जरिए आना पड़ता है लेकिन इस मार्ग से भारत को वहां सामान निर्यात की अनुमति नहीं है। नए एयर कॉरिडोर के जरिए अफगानिस्‍तान और भारत के बीच व्‍यापार को तीन साल में 800 मिलियन से 1 बिलियन और अगले दस सालों में 10 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्‍य है।
अगले हफ्ते कंधार से दूसरी कार्गो 40 टन सूखे फल के साथ भारत आएगा। मांग के अनुसार, हर हफ्ते काबुल और कंधार से अनेकों कार्गो विमान भारत आएंगे। अफगानिस्‍तान में भारतीय राजदूत मनप्रीत वोहरा ने राष्‍ट्रपति अशरफ गनी को कहा, ‘हम विभिन्‍न तरीकों से आपकी सहायता जारी रखेंगे।‘

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से कर दिया इन्कार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया जिसमें दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के कर्जदाता को ब्याज के रूप में 60 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया गया था।
दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लाइन के संयुक्त उद्यम में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर साझीदार थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने डीएमआरसी को हालांकि धनराशि का भुगतान करने के लिए एक और हफ्ते का समय दे दिया।
दरअसल, पंचाट ने 11 मई, 2017 को अपने एक फैसले में डीएमआरसी को आदेश दिया था कि वह दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को 4,670 करोड़ रुपये का भुगतान करे।
डीएएमईपीएल ने ही दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का निर्माण किया था। यह रिलांयस इंफ्रास्ट्रक्चर की सब्सिडिरी कंपनी है, लेकिन रिलांयस ने 2013 में खुद को एयरपोर्ट मेट्रो से अलग कर लिया था।
इसके बाद डीएएमईपीएल ने नीति आयोग के 2016 के दिशा-निर्देशों के अनुसार 75 प्रतिशत रकम के भुगतान की मांग करते हुए हाई कोर्ट की शरण ली थी।
पंचाट न्यायाधिकरण ने उसे 13.5 प्रतिशत की ब्याज दर से 2,782.33 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट में डीएमआरसी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा ने कहा कि पंचाट का फैसला 90 दिनों तक लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि पीड़ित पक्ष को यह समय फैसले को चुनौती देने के लिए दिया गया है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट उनकी दलील से सहमत नहीं हुआ।

थम नहीं रहा किसानों की आत्महत्या का सिलसिला

कर्ज से परेशान किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है। 16 जून को होशंगाबाद के रंढाल गांव में खुद को आग लगाने वाले किसान बाबूलाल पिता बालकृष्ण वर्मा की मौत हो गई। गंभीर हालात में उनका भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज चल रहा था। उधर नरसिंहपुर के धमना गांव में लक्ष्मी प्रसाद पिता टीकाराम लोधी (70) ने जहर की गोलियां खा ली, जिसके बाद गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां इलाज के दौरान किसान की मौत हो गई।
किसान पर था कर्ज
आत्मदाह करने वाले बाबूलाल पर करीब 7 लाख का कर्जा था। जिन लोगों से उसने कर्ज लिया था वे आए दिन तकाजा कर रहे थे। 15 जून को उसे कर्ज देने वाले घर पहुंचे और गाली-गलौज कर अपमानित किया। जिससे उसके परिवार में कलह मची और उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। बाबूलाल का बयान लेने वाले तहसीलदार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कर्ज और कलह के कारण उसने आत्मदाह किया।
मकान बनाने 10 फीसदी पर कर्ज
छोटे भाई छोटेलाल वर्मा और पड़ौसी हरिशंकर साहू ने बताया बाबूलाल के ऊपर करीब 7 लाख का कर्ज था। ये पैसा उसने दो सूदखोरों और 50 हजार रुपए बैंक से ले रखा था। सूदखोरों से उसने 10 फीसदी ब्याज पर रूपया लिया था। इन पैसों से उसने मकान बनवाया था। बताया जा रहा है कि मकान बनाने के बाद से पैसा देने वाले ज्यादा परेशान कर रहे थे।