हॉकी में जहां पाकिस्तान पर अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की, वहीं क्रिकेट के मैदान में सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा

भारत के लिए इंग्लैंड में रविवार का दिन खेलों के लिहाज मिश्रित सफलता वाला रहा। भारत ने हॉकी में जहां पाकिस्तान पर अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की, वहीं क्रिकेट के मैदान में उसे इसी देश से सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
हॉकी में 7-1 से रौंदा : दुनियाभर की निगाहें जब भारत और पाकिस्तान के बीच आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले पर टिकी हुई थीं तो लंदन में दूसरी ओर भारतीय हॉकी टीम ने पाक को 7-1 से रौंदा। भारतीय टीम ने वर्ल्ड लीग हॉकी सेमीफाइनल्स के पूल बी मैच में पाक को 7-1 से रौंदकर जीत की हैटट्रिक पूरी कर ली। यह भारत की पाक पर हॉकी में सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले वह दो बार पाकिस्तान को 7-4 से हरा चुका था।
भारतीय टीम रविवार को इस जीत के साथ पूल बी में नौ अंकों के साथ क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई। भारत के लिए हरमनप्रीत सिंह, तलविंदर सिंह और आकाशदीप सिंह ने दो-दो गोल दागे। हरमनप्रीत ने (13वें और 33वें), तलविंदर (21वें और 24वें) और आकाशदीप (47वें और 59वें मिनट) ने गोल किए। प्रदीप मोर ने भी 49वें मिनट में गोल किया। पाकिस्तान के लिए 57वें मिनट में मोहम्मद उमर भुट्टा ने पेनल्टी कॉर्नर की बदौलत एकमात्र गोल किया।
क्रिकेट में करारी हार : भारत ने हॉकी में तो जीत दर्ज कर ली थी, लेकिन क्रिकेट के बहुप्रतिक्षित मुकाबले में उसे शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान ने भारत को 180 रनों से रौंदकर पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी खिताब अपने नाम किया। इससे पहले पाकिस्तान की भारत पर सबसे बड़ी जीत 159 रनों से थी, जो उसने दिल्ली में 2005 में दर्ज की थी। भारत के नाम आईसीसी फाइनल्स में भी सबसे शर्मनाक हार का रिकॉर्ड दर्ज हुआ।
पाकिस्तान ने चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में टॉस हारने के बाद फखर जमान (114), अजहर अली (59) और मोहम्मद हफीज (57 नाबाद) की दमदार बल्लेबाजी से 4 विकेट पर 338 रन बनाए। जवाब में मोहम्मद आमिर (16/3) और हसन अली (19/3) की घातक गेंदबाजी के सामने भारत की पारी 30.3 ओवरों में 158 रनों पर सिमट गई और पाक ने रिकॉर्ड 180 रनों से मुकाबला अपने नाम किया।

विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने की चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात

विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने रविवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की और द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार पर चर्चा की।
वह ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने बीजिंग गए हैं। इस साल सितंबर में ब्रिक्स का सम्मेलन चीन के शियामन शहर में होगा और इसका एजेंडा तय करने के लिए बीजिंग में बैठक हुई।
वीके सिंह ने कहा कि भारत चीन के साथ सामरिक सहयोग के रिश्तों को मजबूत करना चाहेगा। उनका कहना है कि चीन के विदेश मंत्री के साथ बातचीत में पीएम नरेंद्र मोदी व चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एजेंडा आगे बढ़ाया गया।
ब्रिक्स का सम्मेलन पिछली बार गोवा में आयोजित किया गया था। उस दौरान भारत इसका अध्यक्ष था जबकि इस बार चीन इसकी अगुवाई कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि चीन व भारत के बीच कई मुद्दों को लेकर गतिरोध कायम है। एनएसजी ग्रुप में भारत की सदस्यता का चीन लगातार विरोध कर रहा है तो जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी के मामले में चीन संयुक्त राष्ट्र संघ में अड़ंगा डाल चुका है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर भी दोनों देशों के बीच विवाद लगातार चल रहा है। भारत चाहता है कि पाकिस्तान के साथ चीन का यह प्रोजेक्ट आगे न बढ़ सके, लेकिन चीन कुछ भी सुनने को तैयार नहीं।

क्यों है नाराज किसान सियासत गर्म

किसान आंदोलन ने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। किसानों के साथ कर्मचारी, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर सभी सरकार से नाराज हैं। उधर, विपक्ष इन परिस्थितियों का फायदा उठाने में जुट गया है। ऐसे में सरकार को प्रदेश में डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की चिंता सताने लगी है। खजाना भी खाली है, इसलिए इन वर्गों की मांगों को लेकर सरकार मुश्किल में है।
प्रदेश में करीब 67 लाख किसान, 4 लाख 64 हजार नियमित कर्मचारी, 2 लाख 84 हजार अध्यापक, 53 हजार पंचायत सचिव हैं। ये सभी वोट बैंक को प्रभावित करने का माद्दा रखते हैं और वर्तमान में ये सभी सरकार से नाराज हैं। इन्हें विधानसभा चुनाव से पहले मनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। ये चुनौती तब और बढ़ जाती है, जब सरकार का खजाना खाली हो। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सभी को मनाने के जतन में लग गए हैं।
किसान फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिए जाने, कर्ज माफी और उपज को खरीदने की व्यवस्था नहीं होने के कारण सरकार से नाराज हैं। वे हिंसक रूप में अपनी नाराजगी बयां भी कर चुके हैं। प्रदेश के एक हिस्से में 10 दिन हिंसक आंदोलन चला।
सातवें वेतनमान, पदोन्नति सहित अन्य मांगों को लेकर नियमित कर्मचारी नाराज हैं। केंद्रीय कर्मचारियों को सितंबर 2016 में 7वां वेतनमान मिल चुका है। देश की ज्यादातर राज्य सरकारें वेतनमान दे चुकी हैं, पर प्रदेश सरकार आज-कल कर रही है। वहीं सपाक्स-अजाक्स प्रस्ताव रख चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट के अधीन कर्मचारियों को पदोन्न्ति दे दी जाए, फिर भी सरकार निर्णय नहीं ले रही है। अलग-अलग संवर्ग के कर्मचारियों की अपनी मांगें अलग हैं।
अध्यापकों के छठवें वेतनमान का मसला सरकार एक साल में नहीं सुलझा पाई। तबादला नीति, अनुकंपा नियुक्ति, सातवें वेतनमान और शिक्षा विभाग में संविलियन की मांग पर भी सरकार मौन है। सरकार ने जो वादा किया है, वह भी नहीं मिला। इसलिए अध्यापक नाराज हैं। जबकि जिला कैडर के कर्मचारी पंचायत सचिव वेतनवृद्धि की मांग पूरी न होने से नाराज हैं।
व्यापारी जीएसटी को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार से नाराज हैं। इसे लेकर व्यापारी चार दिन पहले बाजार बंद कर शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं। वहीं कानून से इतर लाइफ टाइम टैक्स वसूली को लेकर ट्रांसपोर्टर नाराज हैं। वे एक बार राजधानी में आरटीओ का घेराव कर चुके हैं और अब चक्काजाम की तैयारी कर रहे हैं।
उपेक्षा कर रही सरकार
सरकार लगातार कर्मचारियों की उपेक्षा कर रही है। सातवां वेतनमान, छठवें वेतनमान की विसंगति सहित अन्य मांगों पर कई बार चर्चा होने के बाद भी सरकार कुछ देने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री 4 जून 2012 के बाद कर्मचारियों से नहीं मिले। ऐसे में नाराजगी जायज है। इसका नुकसान सरकार को उठाना पड़ेगा।

खेती के लिए बीज खरीदने के पैसे नहीं बैंक का कर्ज कैसे चुकाते

देवकरण रविवार सुबह मजदूरी पर गया था। उसे पिता प्यारेलाल की मौत की सूचना मिली तो वह बिलख पड़ा। देवकरण ने बताया हमारे पास खेती के लिए बीज खरीदने के पैसे नहीं थे तो ऐसे हालात में बैंक का कर्ज कैसे चुकाते। प्यारेलाल पर 24 माह से 2.5 लाख का कर्ज था।
एक माह से बैंक कर्ज वसूली के लिए दबाव बना रहा था। इसी से तंग आकर उसने फांसी लगाकर जान दे दी। कर्ज का दावा मृतक किसान के बेटे देवकरण ने किया। वहीं बैंक प्रबंधन ने पिपलिया व्यास सर्विस एरिया में नहीं होने का हवाला दिया है।
यह घटना जिला मुख्यालय से करीब 9 किमी दूर ग्राम पिपलिया व्यास में हुई है। मृतक किसान प्यारेलाल पिता कनीराम ओढ़ (65) है। प्यारेलाल रविवार सुबह करीब 8 बजे घर से खेत व कुएं पर जाने के लिए निकला था। दोपहर 12 से 1.30 बजे के बीच पड़ोसी किसान ने परिजनों को प्यारेलाल द्वारा फांसी लगाकर जान देने की सूचना दी।
गांव से करीब 1 किमी दूर खेत पर प्यारेलाल ने नीम के पेड़ पर पशुओं को बांधने की रस्सी से फंदा तैयार किया और जीवन लीला समाप्त कर ली। ग्राम पंचायत बामनिया के सरपंच किशनलाल की सूचना पर नीमच सिटी पुलिस मौके पर पहुंची। टीआई हितेश पाटिल व एएसआई भोपाल सिंह चौहान ने पंचनामा बनाकर शव को पीएम के जिला अस्पताल पहुंचाया।
घटनास्थल पर चर्चा के दौरान प्यारेलाल के बेटे देवकरण ओढ़ ने बताया पिता कुछ समय से परेशान थे। उनकी 3 बीघा जमीन है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का 2.5 लाख स्र्पए कर्ज था। वसूली के लिए एक माह से बैंक अधिकारी परेशान कर रहे थे। माली हालत ठीक नहीं होने के कारण कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं थे। इसी कारण परेशान होकर संभवत: पिता ने यह रास्ता चुना।
प्यारेलाल ओढ़ व पत्नी पार्वती बाई के 7 बच्चे हैं। 1 बेटा देवकरण (21) है। जबकि बेटी संतोष (38), भागवंता (35), राधा (32), यशोदा (30), नर्मदा (26) व आरती (23) हैं। सभी की शादी हो चुकी है।
प्यारेलाल ने फांसी लगाने से पूर्व चचेरे भाई कंवरलाल निवासी दड़ौली को फोन किया था। प्यारेलाल ने सुबह करीब 11 बजे चचेरे भाई कंवरलाल से मोबाइल पर कहा था घर आ जा, मैं परेशान हूं। इस पर भाई ने घर पर मेहमान होने का हवाला देकर आने में असमर्थता जताई तो प्यारेलाल ने कहा यह मेरा आखिरी फोन है और फोन काट दिया। कंवरलाल के फोन करने पर उसे रिसीव भी नहीं किया। कुछ देर बाद कंवरलाल को भाई की आत्महत्या की खबर मिली।
बेटे देवकरण के अनुसार प्यारेलाल ने करीब दो साल पूर्व भी फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की थी। लेकिन परिजनों ने बचा लिया था।
प्यारेलाल की परेशानी एक अन्य कारण बहू द्वारा दर्ज कराया गया दहेज प्रताड़ना का प्रकरण भी है। प्यारेलाल के बेटे देवकरण की शादी 24 मई 2013 को पिपलिया मंडी के समीप ग्राम सुपड़ा के रामप्रसाद ओढ़ की बेटी पूजा से हुई थी। लेकिन पूजा 2017 तक भी कभी ससुराल नहीं आई।
दोनों परिवारों में इसी बात पर गतिरोध था। पूजा के परिजन देवकरण व परिजनों पर नहीं ले जाने का आरोप लगाते थे। जबकि देवकरण व परिजन पूजा के ससुराल नहीं आने की बात कहते थे। 4 जून 2017 को पूजा ने नीमच सिटी थाने में पति देवकरण, ससुर प्यारेलाल व सास पार्वती (पताशी) बाई के खिलाफ थाने में दहेज प्रताड़ना का प्रकरण दर्ज कराया था। भादवि की धारा 498 ए में दर्ज प्रकरण में पुलिस जांच चल रही थी।
पूजा व देवकरण का वैवाहिक जीवन शुरू भी नहीं हो पाया था। करीब एक माह पूर्व से प्यारेलाल बेटे देवकरण के लिए नया रिश्ता तलाश कर रहा था। रतनगढ़ व जाट के समीप जावरिया की लाड़ बाई से देवकरण की रिश्ते की बात भी चल रही थी। इसकी भनक लगने पर देवकरण के ससुराल पक्ष ने थाने में शिकायत की। चर्चाओं के अनुसार नए रिश्ते की एवज में दोनों पक्षों में 5 लाख स्र्पए के लेन-देन की बात पर गतिरोध की स्थिति भी बनी थी। विवाद भी हुआ था। वहीं दहेज प्रताड़ना के प्रकरण में शनिवार को पुलिस प्यारेलाल को बैठाकर ग्राम माल्या तक ले आई थी। इस बात का दावा परिजनों द्वारा किया जा रहा है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा कमल चौक के प्रबंधक विजय गुप्ता ने बताया पिपलिया व्यास हमारा सर्विस क्षेत्र नहीं है। वहीं भगवानपुरा शाखा के प्रबंधक एसके उपाध्याय ने बताया फिलहाल मैं बाहर हूं। सोमवार को अधिकृत रूप से रिकॉर्ड देखकर ही बता सकूंगा। वर्तमान में सर्विस एरिया ज्यादा मायने नहीं रखता। किसान कहीं से भी लोन करा लेते हैं।
‘ग्राम पिपलिया व्यास में एक किसान ने फांसी लगाकर जान दी है। आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस जांच कर रही है। इसके उपरांत ही आत्महत्या के कारणों की स्थिति स्पष्ट होगी।