कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने के लिए पाकिस्तान अनर्गल ने कर दिया दावा

कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने के लिए पाकिस्तान किस हद तक जा सकता है उसका अनर्गल दावा इसका नया उदाहरण है।
वैश्विक कूटनीति को ताक पर रखते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दावा कर दिया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से कहा है कि वह भारत व पाकिस्तान के लंबित मामलों में हस्तक्षेप करेंगे। शरीफ सरकार इसका स्वागत करती है।
बयान आने के कुछ ही देर बाद भारत ने इस तरह के बयान को पूरी तरह से आधारहीन करार दिया। इसके बाद भारत में रूसी दूतावास ने भी इस तरह के किसी भी आश्वासन या पुतिन व शरीफ के बीच इस आशय की किसी बातचीत से साफ इन्कार कर दिया।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि, रूस की तरफ से भारत के सामने इस तरह की कोई पेशकश नहीं की गई है। साथ ही रूस, भारत की स्थिति से पूरी तरह अवगत है।
रूस इस बात का समर्थन करता है कि पाकिस्तान के साथ भारत अपने सारे मसले शांति पूर्ण माहौल में द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाना चाहता है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब माहौल में आतंकवाद व हिंसा का हस्तक्षेप न हो।
नई दिल्ली में रूसी दूतावास के एक वरिष्ठ राजनयिक ने भी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया के बयान को ख्याली पुलाव बताया।
दरअसल, इस्लामाबाद में वहां के विदेश मंत्रालय के साप्ताहिक प्रेस कांफ्रेंस में जकारिया से पुतिन व शरीफ के बीच हुई बातचीत पर सवाल पूछा गया था।
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पुतिन ने शरीफ से कहा है कि वह भारत व पाक के बीच लंबित मामलों में हस्तक्षेप करना चाहते हैं।
यह पाकिस्तान के लिए अच्छा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक स्थाई सदस्य हस्तक्षेप करना चाहता है। यह संयुक्त राष्ट्र के लंबित मामलों को लागू करने में सहायक हो सकता है।
साफ है कि पाकिस्तान कश्मीर मसले का उदाहरण दे रहा था।
माना जा रहा है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शरीफ सरकार को घरेलू राजनीति में थोड़ी अहमियत दिलाने के लिए यह बयान दिया है।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शरीफ से मुलाकात नहीं की थी।

राजनाथ सिंह और वैंकेया नायडू आज करेंगे सोनिया गांधी और सीताराम येचूरी से मुलाकात

राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन शुरू हो गया है और वहीं राजनीतिक दल इसे लेकर किसी एक नाम पर सहमति नहीं बना पाए हैं। इसके लिए भाजपा द्वारा बनाई गई कमेटी के राजनाथ सिंह और वैंकेया नायडू आज सोनिया गांधी और सीताराम येचूरी से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि भाजपा नेता दोनों विपक्षी नेताओं को अपने पसंद के उम्मीदवार को लिए मनाने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस नेता मल्‍लिकार्जुन खड्गे ने एएनआई को बताया कि इस मीटिंग में हुई चर्चा को पार्टी के अन्‍य सदस्‍यों और चुनाव के लिए गठित उपसमिति के साथ बांटा जाएगा। हम सबके मत को विचाराधीन रखेंगे। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के समर्थन देने की बात को खारिज करते हुए खड्गे ने बताया कि सेक्‍युलर पार्टी होने के नाते कांग्रेस के विचार से राष्‍ट्रपति पद के लिए भागवत उपयुक्‍त उम्‍मीदवार नहीं हैं।
उन्‍होंने आगे कहा, ‘हम सेक्‍युलर पार्टी हैं। हम कभी मोहन भागवत को व अन्‍य पार्टियों को समर्थन नहीं देंगे। उनका नाम शिवसेना की ओर से प्रस्‍तावित किया गया है। हम नहीं जानते कि उनका भाजपा के साथ क्‍या संबंध हैं। हम सेक्‍युलर पार्टी से उम्‍मीदवार का चयन करेंगे।‘
पटेल और मिश्रा के जल्द ही समिति से मिलने की उम्मीद है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे नायडू को आश्वस्त कर चुके हैं कि उनकी पार्टियां किसी उम्मीदवार के नाम पर बीजेपी समिति से चर्चा करने के बाद संज्ञान लेंगी। अब तक कांग्रेस, बीएसपी, एनसीपी, टीडीपी, सीपीएम और एआईएनसी(एनआर) से समिति की ओर से सम्पर्क किया जा चुका है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 12 जून को गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली और नायडू को समिति में नियुक्त किया था जिससे कि राष्ट्रपति चुनाव में सर्वसम्मत उम्मीदवार चुनने के लिए विपक्षी दलों से बात की जा सके। वेंकैया नायडू ने गुरुवार को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू से भी बात की। चंद्रबाबू ने वेंकैया से कहा है कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय के साथ खड़ी है। वहीं पवार ने कहा है कि वह आगे की बातचीत के लिए अगले कुछ दिन दिल्ली में है।
नायडू ने बुधवार को कहा था कि उन्‍होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से विचार विमर्श किया है और निर्णय लिया है कि वे विभिन्‍न पार्टियों से बात करेंगे। नायडू ने बताया, हमने विचार किया है और इस संबंध में विभिन्‍न दलों से बात करेंगे। ’17 जून को वित्‍त मंत्री वापस आएंगे। हम उनसे बात कर आगे बढ़ेंगे।‘
राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्‍त हो जाएगा और राष्‍ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को है। नामांकन करने की अंतिम तारीख 28 जून है और मतगणना 20 जुलाई को होगी। राष्‍ट्रपति मुखर्जी 25 जुलाई को अपना पद छोड़ेंगे आर उप राष्‍ट्रपति हामिद अंसारी अपना दूसरा कार्यकाल अगस्‍त में पूरा करेंगे।

महाराष्ट्र की भाजपा ईकाई मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मुंबई आगमन से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने शिवसेना को लेकर अपने तेवर तीखे कर लिए हैं।
फड़नवीस ने कहा है कि महाराष्ट्र की भाजपा ईकाई मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार है। अपने तीन दिन के मुंबई दौरे में इस बार अमित शाह शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से उनके घर मातोश्री जाकर मिलनेवाले हैं।
महाराष्ट्र के किसान आंदोलन के दौरान शिवसेना कई बार यह धमकी दे चुकी है कि जुलाई के बाद राज्य में राजनीतिक तूफान आ सकता है।
संभवतः इसीलिए गुरुवार सुबह दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए फड़नवीस ने शिवसेना का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग सरकार गिराने और समर्थन वापस लेने की बात करते हैं।
यदि ऐसा हुआ तो हम मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार हैं। यदि कोई हमें मध्यावधि चुनाव की ओर ढकेलना चाहता है तो हमें पूरा भरोसा है कि हम दोबारा सरकार बनाने में कामयाब होंगे।
हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को मिली जबर्दस्त सफलता से उत्साहित फड़नवीस कहते हैं कि यह सफलता अभूतपूर्व थी।
कांग्रेस-राकांपा जैसी पार्टियां अपनी सफलता के चरम पर रहते हुए भी ऐसी सफलता हासिल नहीं कर पाईं। इसका मतलब है कि लोग हमारी सरकार पर भरोसा कर रहे हैं।
बता दें कि हाल ही में सूबे में 10 दिन चली किसान हड़ताल के दौरान सरकार में रहते हुए भी शिवसेना के तेवर विपक्ष जैसे ही रहे। उसी दौरान शिवसेना सांसद एवं प्रवक्ता संजय राउत ने कहा था कि जुलाई में राज्य में राजनीतिक तूफान आ सकता है।
हालांकि किसान हड़ताल खत्म होने के बाद सरकार ने बुधवार शाम अपने दो वरिष्ठ मंत्रियों को किसानों की कर्ज माफी के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे से बात करने उनके घर भेजा था। लेकिन शिवसेना अभी भी सभी किसानों के पूरे कर्ज माफ न होने की स्थिति में सरकार से असहयोग करने की धमकी दे रही है।
माना जा रहा है कि इससे चिढ़कर ही फड़नवीस ने मध्यावधि चुनाव होने की स्थिति में चुनौती स्वीकार करने का बयान दिया है।
दूसरी ओर, गुरुवार शाम को ही महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष रावसाहब दानवे पाटिल ने भी फड़नवीस के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि हालांकि सूबे में मध्यावधि चुनाव की कोई संभावना नहीं दिख रही है।
लेकिन यदि ऐसी परिस्थिति आती है तो भाजपा उसके लिए भी तैयार है। पाटिल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के तीन दिन के मुंबई दौरे की जानकारी देने के लिए पत्रकारों से बात कर रहे थे।
शाह शुक्रवार की सुबह मुंबई पहुंच रहे हैं। तीन रविवार तक यहां रहने के दौरान वह छोटी-बड़ी 25 बैठकों को संबोधित करेंगे। संगठन के नेताओं से लेकर सरकार के मंत्रियों तक से मिलेंगे।
इसी दौरान रविवार को उनका उद्धव ठाकरे के घर जाने का भी कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में शाह उद्धव से राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी से लेकर सूबे की सियासत तक पर चर्चा करेंगे।
उधर, उद्धव ने फड़नवीस के बयान का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा के पास पैसे ज्यादा हों तो उनका उपयोग चुनाव पर खर्च करने के बजाय किसानों की कर्ज माफी के लिए करना चाहिए।

किसान को न चाहते हुए भी कर्ज लेना पड़ता है खेती की लागत इतनी बढ़ चुकी

आजकल खेती को लाभ का धंधा बनाने की बातें तो खूब हो रही हैं लेकिन यह तभी संभव होगा जब किसान को उसकी फसल का दाम लागत से ज्यादा मिलेगा। दरअसल किसान एक सीजन में जितना खर्च करता है उसके मुकाबले उसकी बचत बहुत कम होती है। यहां तक की उसका घर चलाना भी मुश्किल होता है।
खेती की लागत इतनी बढ़ चुकी है कि किसान को न चाहते हुए भी कर्ज लेना पड़ता है। फसल अगर ठीक हुई तो कोई दिक्कत नहीं पर किसी कारण से फसल में गड़बड़ हुई तो किसान को कई मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। किसान का अधिकतर पैसा खेत तैयार करने,बीज,दवाई और मजदूरी में खर्च होता है।
यदि 10 बीघा के एक किसान का उदाहरण लेकर हम खेती की लागत और आमदनी का आकलन करें तो यह हिसाब किताब किसान की स्थिति बयान कर देता है। मान लीजिए दस बीघा का किसान सोयाबीन की फसल लेता है तो सीजन का लेखा-जोखा कुछ इस तरह का होगा।
10 बीघा में सोयाबीन की फसल
काम खर्च समय और किराया
2 बार हकाई- 4800 (8 घंटे लगते हैं 1 घंटे का किराया 600 रुपए)
1 बार बुआई – 2400 (4 घंटे लगते हैं 1घंटे का किराया 600 रुपए)
4 क्विंटल बीज- 14000 (1 क्विंटल का 3500 रुपए )
10 बोरी खाद – 11000 (1 बोरी का खर्च 1100 रुपए)
3 बार दवाई छिड़काव- 12000 (1 बार का खर्च 4 हजार रुपए)
कटाई (50 मजदूर) – 17500 (1 मजदूर का खर्च 350 रुपए)
5 घंटे में निकलाई – 6,000 (1 घंटे का किराया 1200 रुपए)
घर लाने का खर्च – 1000 (1 ट्रॉली का किराया 500 रुपए )
अन्य खर्च 3000 (मंडी भाड़ा, अन्य मजदूरी)
कुल खर्च : 71700 रुपए (उत्पादन 1 बीघा में 3 क्विंटल मतलब 30 क्विंटल होता है)
30 क्विंटल के दाम – 81,000 रुपए (1 क्विंटल का दाम 2700 रुपए)
4 महीने में
किसान की बचत – 9300 रुपए (मतलब 1 दिन के 77.5 रुपए )
किसान को 4 महीने में 9300 रुपए की बचत हुई। मतलब 1 दिन में 77.5 रुपए मिले। आजकल एक मजदूर भी 1 दिन में इससे ज्यादा कमा लेता है। इतनी कम बचत में किसान कैसे अपना घर चलाएगा। ये सब तो तब संभव है जब मौसम पूरी तरह से किसान का साथ दे अगर मौसम बिगड़ गया तो समझो सबकुछ बरबाद। इसलिए किसान अपना घर चलाने के लिए कर्ज लेता है और गहरे दलदल में फंस जाता है।